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ED ने IMA इस्लामिक बैंकिंग और पॉन्जी स्कीम घोटाले में कॉन्ग्रेसी मंत्री को किया तलब

प्रवर्तन निदेशालय ने कॉन्ग्रेस के विधायक ज़मीर अहमद खान को IMA पोंजी घोटाला मामले में तलब किया है। उस पर आरोप है कि उसने आरोपित मंसूर ख़ान से धन प्राप्त किया है, जो अब गिरफ्तारी के डर से देश छोड़कर भाग गया। दरअसल, सन 2006 में खाड़ी से लौटे मोहम्मद मंसूर खान ने इस्लामिक बैंकिंग और हलाल निवेश के नाम पर एक फर्म बनाई जिसका नाम रखा ‘आई मॉनेटरी एडवाइजरी’ (I Monetary Advisory).

इस्लामिक बैंकिंग के नाम पर मंसूर खान ने अपने समुदाय के लोगों से इस फर्म में निवेश करने को कहा। उसने उन मुस्लिमों को निशाना बनाया जो इस्लामिक कानून के डर से किसी वित्तीय फर्म में निवेश करने से कतराते हैं। निवेश आने पर मंसूर खान ने उस पैसे से ज्वेलरी, रियल एस्टेट, बुलियन ट्रेडिंग, फार्मेसी, प्रकाशन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में जमकर व्यवसाय किया और धन कमाया। आई मॉनेटरी एडवाइजरी में निवेशकों का 2000 करोड़ रुपया लग चुका है। ED इसी मामले की जाँच कर रही है।

ख़बर के अनुसार, जाँच में नामित अन्य विधायक हैं जिन्हें ED द्वारा भी बुलाया जा सकता है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने इस साल जनवरी में पूरे IMA पोंजी स्कैम को क्लीन चिट दे दी थी, बावजूद इसके कि यह घोटाला जारी था। प्रारम्भिक जाँच में IMA पोंजी स्कैम में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के कैबिनेट मंत्रियों के शामिल होने की संभावना का संकेत मिला है। कर्नाटक सरकार के कई मंत्रियों पर इस 5000 करोड़ रुपए के घोटाले के लाभार्थी होने के आरोप हैं। इस घोटाले में 50,000 से अधिक निवेशकों को ठगा गया है जिसमें अधिकांश मुस्लिम हैं। इस महीने की शुरुआत में, IMA ज्वेल्स के 7 निवेशकों को कर्नाटक पुलिस ने गिरफ़्तार किया था।

प्रवर्तन निदेशालय ने IMA समूह और इसके प्रबंध निदेशक, मोहम्मद मंसूर ख़ान के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई शुरू की है। इस कार्रवाई में 20 अचल सम्पत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत 209 करोड़ रुपए ज़ब्त किए गए।

इस मामले में एक मज़ेदार बात सामने आई थी जिसमें मंसूर ख़ान की आवाज़ वाली एक ऑडियो क्लिप घूम रही थी। इस ऑडियो क्लिप में वो कह रहा था कि वो नेताओं और बाबुओं को रिश्वत देते-देते थक गया है, इसलिए वो आत्महत्या करना चाहता है।

इस ऑडियो क्लिप में मंसूर ख़ान ने यह भी दावा किया था कि बेंगलुरू के एक कॉन्ग्रेसी विधायक रोशन बेग ने उसके 400 करोड़ रुपए हड़प लिए हैं। हालाँकि, रोशन बेग ने ऑडियो क्लिप के वास्तविक होने पर सवाल खड़े किए थे। पुलिस भी जाँच में जुटी है कि मंसूर ख़ान ने कहीं सच में तो आत्महत्या नहीं कर ली। 

ख़बर के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय अब मंसूर ख़ान के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में जुट गया है। साथ ही उसके ख़िलाफ़ भगोड़े आर्थिक अपराध अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की कोशिश में है। बता दें कि मंसजूर ख़ान ईद के बाद से ही फ़रार है, पुलिस शिद्दत से उसकी तलाश में जुटी हुई है।

‘हिंदुओं यहाँ से भागो, हमारे बीच में रह रहे हो और हमसे ही मुँहजोरी दिखा रहे हो?’

कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के दिलारी से खबर आई थी कि वहाँ एक 54 वर्षीय व्यक्ति गंगाराम की मुस्लिम भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी, क्योंकि उसने अपनी बेटी के अपहरण की शिक़ायत पुलिस से की थी। इस मामले में पहले गंगाराम ने अपनी बेटी के अपहरण का आरोप दूसरे समुदाय के पड़ोसी पर लगाया था, लेकिन बाद में पता चला, कि नदीम नाम के व्यक्ति द्वारा बच्ची का अपहरण किया गया है।

हालाँकि यह मामला 19 जून का है लेकिन मामले पर स्वराज्य पत्रिका की सीनियर पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा द्वारा कवर की गई ग्राउंड रिपोर्ट ने कुछ नए खुलासे किए हैं, जो बेहद चौंकाने वाले हैं। शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक लड़की का इस घटना से 2 महीने पहले भी अपहरण हुआ था, जो कि उसके पड़ोसी 25 वर्षीय दानिश द्वारा किया गया था। दानिश बच्ची को घर से 700 किलोमीटर दूर राजस्थान ले गया था।

गंगाराम के बेटे दीपक के मुताबिक उस समय परिवार ने पुलिस की जगह पड़ोस के गाँव पीपली उमरपुर से मदद की गुहार लगाई थी क्योंकि वह लोग अपने गाँव के प्रधान अब्दुल रहमान के पास जाने तक से डर रहे थे। उन्हें डर था कि प्रधान उनकी न सुनकर, आरोपितों की तरफदारी करेंगे। दीपक ने बताया कि उनका गाँव मुस्लिम बहुल गाँव है। जहाँ 100 मुस्लिम परिवारों में सिर्फ़ 2 हिन्दू घर हैं। ऐसे में उनकी सुनवाई होना मुश्किल था।

इस घटना के बाद 18 जून को नाबालिग लड़की फिर घर से गायब हो गई। पिछली घटना के आधार पर गंगाराम ने दानिश को दोषी समझा और समाज की परवाह न करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने पहुँचे, जहाँ मामले पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने की जगह पुलिस ने गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव दिखाया।

इस बीच जैसे ही दानिश के परिवार को शिकायत के बारे में पता चला वह लोग जबरन गंगाराम के घर में घुस आए और उन्हें तब तक मारा जब तक वह होश नहीं गवा बैठे। रिपोर्ट के मुताबिक गंगाराम की पत्नी सविता ने दावा किया कि हमलावरों ने कहा था,“तुम लोग हमारे बीच रहते हो, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारे ख़िलाफ़ खड़े होने की।” सविता ने दावा किया कि गंगाराम को मारने के लिए 6 आदमी और 2 महिलाएँ आईं थीं। उनके पास लाठियाँ थी और कसाई वाला चाकू था।

वह लोग उनके घर में गाली देते हुए घुसे और सविता के सिर पर मारा, फिर उन्होंने चौहान को बहुत तेज छाती पर घूँसा मारा और उन्हें कई बार उठा-उठाकर ज़मीन पर पटका। गंगाराम के होश गंवाने तक उन्हें पीटा गया और फिर वे लोग उन्हें छोड़कर चले गए। सविता के अनुसार उनके पति को देखकर ऐसा लग रहा था कि उनकी मृत्यु हो गई है।

वहीं, चौहान के छोटे बेटे दीपक के मुताबिक हमलावर कह रहे थे, “हमारे बीच में रह रहे हो और हमसे ही मुँहजोरी दिखा रहे हो? हिंदुओं यहाँ से भागो।” इस भीड़ में दानिश का पिता सफायत नबी भी शामिल था, जो बार-बार दोहरा रहा था कि वह उनकी बेटी को उनकी आँखों के सामने उठाकर अपने घर ले जाएँगे और वह कुछ नहीं कर पाएँगे।

इतना ही नहीं सविता के अनुसार दानिश की अम्मी अमीना ने जान बूझकर खुद अपना हाथ काटा ताकि वह पुलिस के पास जाकर मामला दर्ज करवा सके कि उन्होंने (गंगाराम के परिवार वालों) उसपर हमला किया है। दीपक के अनुसार हमलावर बार बार गंगाराम से कह रहे थे कि न तू रहेगा न लड़की ढूंढेगा।

रिपोर्ट के अनुसार पड़ोसी गाँव पीपली उमरपुर में रहने वाले चौहान के भाई हरस्वरूप ने बताया कि जैसे ही उन्हें इस हमले की खबर मिली, वह तुरंत अपने भाई के घर पहुँचे और उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। स्वास्थ्य केंद्र से उन्हें मुरादाबाद भेजा गया, लेकिन कॉसमॉस अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। परिवार ने जब मामला दर्ज किया तो उनके पास पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट भी नहीं थी।

बता दें इस मामले में पहली एफआईआर हमले की रात ही दर्ज हुई थी। जिसमें दानिश के साथ उसके पिता सफायत नबी, उसके दो भाई मोहसिन, छोटू और 2 कज़न अकरम और इरफान का नाम शामिल था। इस प्राथमिकी में दर्ज था कि 6 लोग चौहान के घर में 8 बजे के करीब घुसे और उनसे मारपीट की, लेकिन उसमें यह नहीें था कि उन लोगों ने चौहान की बेटी को अगवा किया और शिकायत करने पर हमला किया।

इस एफआईआर में धारा 302, 147 और 452 के तहत मामला दर्ज है लेकिन इस प्राथमिकी में किसी महिला आरोपित का नाम नहीं शामिल किया गया और न ही धर्म के नाम पर फैलाई घृणा से जुड़े मामले को जोड़ा गया। इस लापरवाही के कारण दिलारी के एसएचओ दीपक कुमार को सस्पेंड भी कर दिया गया है।

एसएचओ के निलंबन पर मुरादाबाद जिले के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि मामले में जिम्मेदारियों को सही ढंग से न निभाने के कारण उन्हें निलंबित किया गया है। जैसे एसएचओ ने परिवार की शिकायत को न रात में दर्ज किया और न ही 19 जून की सुबह, उन्होंने बच्ची को ढूँढने के लिए तत्परता नहीं दिखाई और न ही मामले के ‘हिंदू-मुस्लिम’ एंगल होने की जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों को दीं।

एसएसपी के मुताबिक उनकी आगे की जाँच अभी जारी है ताकि 2 महीने पहले हुए अपहरण मामले में दिलारी पुलिस की लापरवाही की जाँच हो सके।

बता दें इस मामले में 21 जून को लड़की का पता लगा लिया गया है। लड़की के चचेरे भाई संदीप ठाकुर का कहना है कि जब वह आश्रय गृह में उससे मिली तो उसने स्वीकारा कि वह नदीम के साथ भाग गई थी, जो कि दानिश का चचेरा भाई था। संदीप ने बताया कि लड़की के मुताबिक यह सब दानिश का प्लान था, लेकिन अपने पिता की हत्या के बाद वह नदीम के साथ नहीं रहना चाहती है और साथ ही उसने पिता के हत्यारों के लिए सख्त से सख्त सजा की भी माँग की।

दिलारी थाना के दरोगा विजेंद्र सिंह राठी ने बताया है कि इस मामले में दानिश सहित चार लोगों पर धारा 363 और 366 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और लड़की की मेडिकल रिपोर्ट आनी भी अभी बाकी है।

इस घटना के बाद चौहान का परिवार हरस्वरूप के घर जाकर रहने लगा है क्योंकि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर है। वह अपना अलियाबाद गाँव स्थित घर बेचने की भी सोच रहे हैं। जिसके लिए उनका कहना है कि उन्हें कोई हिंदू घर नहीं मिलेगा, उन्हें अपने घर को किसी दूसरे मजहब वाले को ही बेचना होगा, जो उनकी जरूरतों को देखते हुए उनकी मदद करे।

बता दें कि पीपली के प्रधान ने चौहान के परिवार को आश्वासन दिया है कि वह उनके गाँव में सुरक्षित है क्योंकि पीपली हिंदुओं का गाँव है, जहाँ उनके समुदाय के लोग उनकी मदद करेंगे। वहीं स्वाति के मुताबिक जब वह आलियाबाद पहुँची तो वहाँ उनसे कोई बात करने को तैयार नहीं हुआ। मोहम्मद इबरार नाम के शख्स ने सिर्फ़ इतना बताया कि जिस दिन यह घटना हुई उस वक्त वह अपने घर नहीं था।

अमित शाह ने कहा, कश्मीर में अनुच्छेद 370 है अस्थाई, लोग यह तथ्य भूल गए हैं

लोकसभा में जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने आज जम्मू कश्मीर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कॉन्ग्रेस द्वारा की गई कई भूलों का भी जिक्र किया।

गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 अस्थाई तौर पर लगाया गया है और यह स्थाई नहीं है। उन्होंने कहा कि यह शेख अब्दुल्ला साहब की सहमति से हुआ था। साथ ही, शाह ने कहा कि कश्मीर को लेकर मोदी सरकार के एप्रोच में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जो पहले था वह आगे भी रहेगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दोनों बिल कश्मीर की भलाई के लिए हैं और इन्हें सदन से पारित कराना चाहिए।लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में काफी अंतर होता है और इस हालात में वहाँ सुरक्षा दे पाना मुमकिन नहीं था, यही वजह रही कि लोकसभा के साथ विधानसभा के चुनाव नहीं कराए गए।

370 पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा, “हसनैन जी ने कहा 370 है। लेकिन वो इसके साथ जुड़ा अस्थाई शब्द को भूल जाते हैं। ये टेम्परेरी प्रोविज़न है। 370 हमारे संविधान का अस्थाई मुद्दा है।”

अमित शाह ने कहा कि काफी सदस्यों ने जम्मू कश्मीर की सुरक्षा और देश की सुरक्षा पर चिंता जताई है, उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूँ कि मोदी सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति अपनाकर चल रही है और इस समस्या को जड़ से उखाड़ कर रहेंगे। शाह ने कहा कि हमारी विचारधारा भारत माता के हित में समाहित है इससे ऊपर उठने की जरूरत नहीं है।

गृहमंत्री ने कहा कि 2014 में सरकार बनने के पहले दिन से हमारी सरकार ने जम्मू कश्मीर को प्राथमिकता दी है। सबसे पहले हमने वहाँ सीआरपीएफ ती तैनाती को बढ़ाया ताकि जवानों की कमी कश्मीर में न हो।

बुलंदशहर हिंसा मामले में 44 अभियुक्तों पर चलेगा राजद्रोह का मुकदमा

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने बुलंदशहर के चिंगरावती इलाके में हिंसा भड़काने के 44 आरोपितों पर राजद्रोह लगाने की अनुमति दे दी है। बुलंदशहर के कोतवाली स्याना के गाँव चिंगरावती में गोकशी के बाद हुई हिंसा में एक पुलिसकर्मी सहित दो लोगों की जान जाने चली गई थी।

मामले की जाँच कर रहे अधिकारी राघवेंद्र मिश्रा के अनुसार, उन्हें स्याना हिंसा के 44 आरोपितों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के तहत राजद्रोह लगाने की मंज़ूरी मिल गई है।

उन्होंने बताया, “इस साल 19 फरवरी को, हमने आधिकारिक तौर पर एक अनुरोध भेजा था, जिसमें आरोपितों के ख़िलाफ़ राजद्रोह लगाने के लिए मंज़ूरी माँगी गई थी। आज, हमें मंज़ूरी पत्र मिल गया है और हमने इसे अदालत में पेश कर दिया है।”

पिछले साल 3 दिसंबर को बुलंदशहर में उस वक़्त हिंसा भड़क उठी थी जब बुलंदशहर के चिंगरावती के पास महाव गाँव के एक खेत में गायों के शव पाए गए थे। प्रदर्शनकारी एक थाने के बाहर इकट्ठा हुए थे और दावा किया था कि उन्हें अपने इलाक़े में गायों के शवों मिले हैं।

बार-बार शिक़ायत के बाद भी पुलिस की लापरवाही से नाराज़ होकर वे पुलिस से भिड़ गए थे। इसके चलते विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया जहाँ पुलिस निरीक्षक सुबोध सिंह ने ग़लती से 17 वर्षीय लड़के सुमित को गोली मार दी। भीड़ द्वारा गोली मारे जाने के बाद इंस्पेक्टर सिंह की भी मौत हो गई थी।

दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर में शराब पीते कर्मचारियों का Video हुआ वायरल

एक तरफ जहाँ दिल्ली-एनसीआर के लोग पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारियों के ऑफिस के अंदर ताश खेलने और शराब पीने का वीडियो सामने आया है। वीडियो के वायरल होने के बाद जल बोर्ड के 4 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।

दरअसल, पंजाबी बाग स्थित दिल्ली जल बोर्ड के दफ्तर में 4 कर्मचारी शराब पार्टी करते पाए गए। इनमें से 3 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि 1 कर्मचारी, जो कॉन्ट्रैक्ट पर था, उसे नौकरी से हटा दिया गया है। ये चारों कर्मचारी बोर्ड के दफ्तर में बैठ कर शराब पीते हुए ताश खेल रहे थे। वीडियो में एक कर्मचारी सिक्योरिटी गार्ड को दरवाजा बंद करने के लिए भी कह रहा है, ताकि बाहर से उन्हें कोई देख न ले।

इस मामले पर दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष दिनेश मोहनिया ने कहा कि इस संबंध में आधिकारिक रुप से किसी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। उन्होंने बताया कि उन्हें ये वीडियो पब्लिक डोमेन से मिला। वीडियो देखने के बाद मामले पर संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई की गई और 4 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया। मोहनिया ने कहा कि वीडियो में दिख रहे 4 लोगों में से 2 चपरासी हैं और बाकी 2 वाटर मीटर रीडर्स हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह की अवांछनीय गतिविधियों के मामलों पर दिल्ली जल बोर्ड की जीरो टॉलरेंस की नीति है।

वीडियो के सामने आने के बाद राजधानी में सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों के रवैये पर सवाल उठने लगे हैं। अकाली दल विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने सीएम केजरीवाल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, “जैसा मुख्यमंत्री, वैसे ही उसके मंत्री और उनसे भी बढ़कर उस सरकार के कर्मचारी। दिल्ली जल बोर्ड का हाल तो देखिए- दिल्ली के लोग पानी को क्यों तरस रहे हैं…इस वीडियो को देखकर समझ आ जाएगा।”

आने वाली रेलवे भर्ती में 50% पदों पर होंगी सिर्फ महिलाओं की भर्ती: पीयूष गोयल

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने केंद्र सरकार के बजट से कुछ दिन पहले रेलवे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। पीयूष गोयल ने कहा है कि रेलवे में आने वाले समय में होने वाली भर्ती में 50% पदों पर महिलाओं की भर्ती होगी। गोयल के अनुसार, “रेलवे में 9,000 पदों की कांस्टेबल और सब-कांस्टेबल भर्ती में 50% पदों पर सिर्फ महिलाओं की भर्ती की जाएगी।”

रेलवे की आरपीएफ (Railway Protection Force) में मौजूदा समय में महिलाओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है। सरकार ने तय किया है कि आरपीएफ की 9,000 पदों की भर्ती में 50% यानी, 4500 पदों पर महिलाओं की भर्ती होगी। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार (जून 28, 2019) को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह बातें कहीं।

पीयूष गोयल ने कहा, “मौजूदा समय में आरपीएफ में सिर्फ 2.25% महिलाएँ हैं। इसको ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने महिलाओं की भर्तियों का सुझाव दिया। जिसके परिणामस्वरूप, सरकार आने वाले वक्त में 9,000 पदों पर भर्तियां करने वाली है। इन भर्तियों में हमारा ध्यान महिलाओं की भर्ती पर रहेगी। हम इस बार 4500 महिला कांस्टेबलों की नियुक्ति करने जा रहे हैं। जो कि कुल भर्ती पदों का 50% हिस्सा है।”

नरसिम्हा राव के पोते ने कहा: माफ़ी माँगें सोनिया और राहुल

पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता स्वर्गीय पीवी नरसिम्हा राव के पोते एन वी सुभाष ने पूर्व प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ आरोप लगाने के लिए कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पार्टी की खिंचाई की और गाँधी परिवार से इस अन्याय के लिए माफ़ी की माँग की।

नरसिम्हा राव के पोते, एन वी सुभाष, जो अब भाजपा से जुड़े हुए हैं, उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने आज उनकी जयंती पर पूर्व प्रधानमंत्री को सम्मान नहीं दिया।

सुभाष ने ANI को बताया, “1996 चुनाव में कॉन्ग्रेस की पराजय के बाद, उन्हें (राव) को पार्टी से कई कारणों से दरकिनार कर दिया गया था जिनका उनकी सरकार की नीतियों से कोई लेना-देना नहीं था। कॉन्ग्रेस पार्टी ने सोचा था कि अगर गाँधी-नेहरू परिवार के अलावा कोई आगे बढ़ जाएगा, तो उनकी चमक फ़ीकी पड़ जाएगी, इसलिए राव जी को ही दरकिनार कर दिया गया।”

सुभाष ने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी की सभी विफलताओं के लिए पीवी नरसिम्हा राव को ज़िम्मेदार ठहराया गया है और उनके योगदानों का श्रेय उन्हें नहीं दिया गया है। मैं माँग करता हूँ कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को माफ़ी माँगनी चाहिए, और आकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए।” 

एन वी सुभाष 2014 में भाजपा में शामिल हुए थे और वो पार्टी की तेलंगाना इकाई के आधिकारिक प्रवक्ताओं में से एक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस नेहरू-गाँधी परिवार ने ख़ासकर स्वर्गीय पी वी नरसिम्हा राव के अलावा अन्य नेताओं की उपेक्षा की।

नरसिम्हा राव की जयंती पर उनके पोते सुभाष ने कहा, “तेलंगाना के किसी भी कॉन्ग्रेस नेता ने आकर उन्हें (राव)पुष्पांजलि नहीं दी। भाजपा, टीआरएस और टीडीपी सहित सभी ने उनका सम्मान किया, लेकिन कॉन्ग्रेस ने नहीं। इससे पता चलता है कि वे कितने निरंकुश हैं।”

नरसिम्हा राव के योगदान पर सुभाष ने कहा, “कॉन्ग्रेस और राष्ट्र में उनके (नरसिम्हा राव) योगदान को दुनिया भर में सभी ने सराहा है। जब 1991 में राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद नरसिम्हा राव ने पदभार संभाला, तो उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में मनमोहन सिंह की मदद की।” उन्होंने कहा कि उनका योगदान बहुत बड़ा है, जिसे मापा नहीं जा सकता है।

लोकसभा में नरसिम्हा राव के नाम का उल्लेख करने के लिए सुभाष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लोकसभा में संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नरसिम्हा राव के योगदान और 1991 में लागू की गई आर्थिक नीति की प्रशंसा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने नरसिम्हा राव को उनकी 98वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी और अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “श्री पीवी नरसिम्हा राव जी को उनकी जयंती पर याद करते हुए। एक महान विद्वान और अनुभवी प्रशासक, उन्होंने हमारे इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ पर राष्ट्र का नेतृत्व किया। उन्हें अग्रणी कदम उठाने के लिए याद किया जाएगा। हमारे इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ पर उन्होंने राष्ट्र का नेतृत्व किया।”

मंगलवार (25 जून) को मोदी ने कॉन्ग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि पार्टी ने कभी भी राव, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह जैसे पूर्व प्रधानमंत्रियों के प्रयासों को मान्यता नहीं दी।

पीएम मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के धन्यवाद के अभिभाषण के बाद कहा, “2004 से 2014 तक सत्ता में रहने वालों ने कभी अटल जी के अच्छे काम के बारे में बात की? क्या वे कभी नरसिम्हा राव जी के अच्छे काम के बारे में बोलते हैं? इस लोकसभा बहस में वही लोग मनमोहन सिंह जी की बात भी नहीं करते थे?”

बता दें कि भारत के नौवें प्रधानमंत्री राव ने जून 1991 में पदभार ग्रहण किया और मई 1996 तक सत्ता में रहे। उन्हें देश में विशेष रूप से लाइसेंस राज को ख़त्म करने और कई आर्थिक सुधार करने का श्रेय दिया जाता है। छ: बार सांसद रहे राव ने 2004 में 83 वर्ष की आयु में अंतिम साँस ली।

G-20 Summit: सऊदी अरब ने भारत का हज कोटा बढ़ाकर किया 2 लाख, अतिरिक्त 30,000 लोग जा सकेंगे मक्का

G20 Summit में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। सऊदी अरब ने भारत का हज कोटा 1,70,000 से बढ़ाकर 200,000 (G-20 शिखर सम्मेलन) कर दिया है। सऊदी अरब के इस कदम से और 30,000 भारतीय हज यात्रियों के मक्का में वार्षिक इस्लामिक तीर्थ यात्रा में जाने का रास्‍ता साफ हो गया है। सऊदी अरब, भारत का कच्चे तेल का शीर्ष आपूर्तिकर्ता है। हालाँकि दोनों देशों ने ऊर्जा सहयोग से आगे बढ़कर अपने संबंधों को विस्तार दिया है। दोनों देशों की सरकारें सामरिक साझेदारी के लिए सहमत हुई हैं।

PM मोदी ने उठाया था मुद्दा

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (जून 28,2019) को जापान के ओसाका में G-20 शिखर सम्मेलन से इतर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान के साथ बातचीत में इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद सऊदी अरब की ओर से यह घोषणा की गई है।

पीएम मोदी ने G-20 शिखर सम्‍मेलन के अलावा सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से द्विपक्षीय बातचीत में व्यापार और निवेश, ऊर्जा सुरक्षा तथा आतकंवाद से निपटने में सहयोग बढ़ाने के मसले पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर के कहा कि एक बहुमूल्य सामरिक साझेदार के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार तथा निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद से निपटने समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की।

कॉन्ग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री के भाई पर CBI ने दर्ज किया केस, परिजनों को दिए थे ठेके

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अरुणाचल प्रदेश के पूर्व कॉन्ग्रेस मुख्यमंत्री नबाम तुकी के भाई पर शिकंजा कसा है। नबाम तुकी के भाई नबाम हरि, उनकी पत्नी नबाम मैरी और प्रदेश के पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के खिलाफ सरकारी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितता बरतने का आरोप लगा है। इस मामले में सीबीआई ने मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने शुक्रवार (जून 28, 2019) को इसकी जानकारी दी है।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि ये मामला तुकी के लोक कल्याण मंत्री (PWD) रहते हुए बिना टेंडर इनवाइट किए परिजनों को ठेका देने से जुड़ा है। अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई ने शिलॉन्ग के उमरोई में एक केन्द्रीय विद्यालय के भवन निर्माण से संबंधित कार्य पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रारंभिक जाँच की थी।

इसमें आरोप लगाया गया था कि नबाम तुकी की भाभी नबाम मैरी के मालिकाना हक वाली कंपनी मेरी एसोसिएट्स को कई ठेके दिए गए, जिसका यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में चालू खाता है। खाते में उनके पति नबाम हरि भी नामित हैं। अधिकारियों ने कहा कि ठेके 2005 से 2007 के बीच दिए गए।

अमित शाह ने रखा J&K में राष्‍ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्‍ताव, कॉन्ग्रेस नाराज

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (जून 28, 2019) को लोकसभा में जम्‍मू-कश्‍मीर में राष्‍ट्रपति शासन को 6 महीने तक और बढ़ाने का प्रस्‍ताव रखा। प्रस्‍ताव रखते हुए अमित शाह ने कहा, “जम्मू कश्मीर में रमजान और अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी कर रहे हैं। हम जम्मू कश्मीर में स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बंकरों का निर्माण तय समय सीमा में किया जाएगा। हर व्यक्ति का जीवन हमारे लिए महत्वपूर्ण है।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में अभी विधानसभा चुनाव कराने का माहौल नहीं है, इसलिए 6 महीने के लिए और राष्ट्रपति शासन बढ़ाया जाए। वहीं कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को बढ़ाए जाने के सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया।

अमित शाह ने प्रस्‍ताव पेश करते हुए कहा, “पहली बार जनता महसूस कर रही है कि जम्मू और लद्दाख भी राज्य का हिस्सा है। सबको अधिकार देने का काम मोदी सरकार ने किया है। हमारे लिए सीमा पर रहने वाले लोगों की जान कीमती है। कश्मीर में लोकतंत्र बहाली बीजेपी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आतंकवाद के खात्मे की कार्रवाई भी की जा रही है।” अमित शाह ने सदन से अपील करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन के प्रस्ताव का समर्थन करें।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब कोई दल राज्य में सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं था तो कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाया गया था। इसके बाद विधानसभा को भंग करने का फैसला राज्यपाल ने लिया था। दिसंबर 09, 2018 को राज्यपाल शासन की अवधि खत्म हो गई थी और फिर धारा 356 का उपयोग करते हुए 20 दिसंबर से वहाँ राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला लिया गया।

लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 2 जुलाई को 6 माह का अंतराल खत्म हो रहा है और इसलिए इस राष्ट्रपति शासन को बढ़ाया जाए क्योंकि वहां विधानसभा अस्तित्व में नहीं है।