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हरियाणा चुनाव में योगेंद्र यादव बजाएँगे ‘सीटी’, जानिए आखिर क्यों आई ऐसी नौबत

‘स्वराज इंडिया’ के संयोजक योगेंद्र यादव ने अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है। 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को जिताने वालों का कॉलर पकड़कर उन्हें झकझोरने की बात करने वाले योगेंद्र यादव की नई पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘सीटी’ है।

इसकी जानकारी अपने ट्विटर एकाउंट से देते हुए योगेंद्र यादव ने कहा, “हम हरियाणा के सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। हम मुख्यधारा की राजनीतिक दलों के एक विकल्प के रूप में उभरेंगे। हमारा फोकस युवाओं, किसानों और महिलाओं पर होगा।”

इसके साथ ही योगेंद्र यादव ने बताया कि स्वराज इंडिया कोई नई पार्टी नहीं बनाई है बल्कि स्वराज इंडिया अक्टूबर 2016 से रजिस्टर्ड पार्टी है।

एक समय आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के करीबी रह चुके योगेंद्र यादव के इस ऐलान के साथ ही देश को एक और राजनीतिक पार्टी मिल गई है। उनकी पार्टी अपना पहला चुनाव हरियाणा में लड़ेगी। हरियाणा में इस साल विधानसभा चुनाव हो सकता है।

मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री ने आदित्य पंचोली पर लगाया बलात्कार का आरोप, FIR दर्ज

मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में अभिनेता-निर्माता आदित्य पंचोली के ख़िलाफ़ एक बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है। मुंबई पुलिस ने वर्सोवा पुलिस स्टेशन में बॉलीवुड की एक मशहूर अभिनेत्री की शिकायत के आधार पर अभिनेता पर बलात्कार का मामला दर्ज किया।

कथित तौर पर, अभिनेत्री ने कहा था कि आदित्य पंचोली ने 17 साल की उम्र में उसके साथ रेप किया था और यह भी दावा किया था कि वह पुलिस के पास गई थी जब यह घटना घटी थी, लेकिन आदित्य को मात्र एक चेतावनी देकर छोड़ दिया था। बॉलीवुड में आदित्य पंचोली को 2015 में संजय लीला भंसाली की फ़िल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ में देखा गया था।

वर्सोवा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की सीआर नंबर 198/2019 U/s 376, 328, 384, 341, 342, 323, 506 के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, आदित्य पंचोली ने ख़ुद पर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है।

हालाँकि, पुलिस ने कहा कि इस मामले को साबित करना मुश्किल होगा और सबूत इकट्ठा करना भी मुश्किल होगा क्योंकि मामला लगभग 10 साल पुराना है। FIR दर्ज कर ली गई है और जाँच शुरू कर दी गई है।

मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री ने अपनी शिकायत में कहा कि आदित्य पंचोली द्वारा कई अवसरों पर उनके साथ बलात्कार किया गया। इससे पहले, अभिनेत्री ने पंचोली के ख़िलाफ़ लिखित शिक़ायत दर्ज कराई थी।

मोदी सरकार ने सिर्फ 5 स्टाफ दिया, मनमोहन को चाहिए 14: चिट्ठी लिख वाजपेयी का दिया उदाहरण

पीएमओ द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 14 सदस्यीय स्टाफ़ को बरकरार रखने की अपील को खारिज़ करने के बाद मनमोहन सिंह ने एक बार फिर से पीएमओ को उसी उद्देश्य से पत्र लिखा है। उन्होंने फिर अपील की है कि उनके स्टाफ़ में कटौती न की जाए। लेकिन इस बार उन्होंने अपने पत्र में अटल बिहारी वाजपेयी के समय का हवाला दिया है।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री से कहा है कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी उस समय अटल बिहारी वाजपेयी जी को पद छोड़ने के बाद भी पूरा स्टाफ़ मुहैया करवाया गया था, जिसे बाद में उनकी बताई जरूरतों के हिसाब से घटाकर 12 कर दिया गया था। लेकिन उनके केस में वैसा ही व्यवहार नहीं किया जा रहा है।

हालाँकि, मनमोहन सिंह की इस ताजा अपील पर पीएमओ से प्रतिक्रिया आनी अभी बाकी है। बता दें कि ऐसा पहली बार हुआ है कि पूर्व प्रधानमंत्री के स्टाफ में नियमों से हटकर कटौती की जा रही है।

खबरों के मुताबिक पूर्व पीएम ने 2 फरवरी को प्रधान सचिव को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उनके ऑफिस स्टाफ का कार्यकाल 5 साल और बढ़ाने की गुजारिश की गई थी, इसके बाद उन्होंने इसी सिलसिले में 18 मार्च को भी चिट्ठी लिखी, लेकिन नरेंद्र मोदी के दोबारा शपथ ग्रहण समारोह से 4 दिन पहले 26 मई को मनमोहन सिंह को इस बात की जानकारी दी गई कि उनके कर्मचारियों की संख्या को पाँच तक सीमित कर दिया गया है, जिसमें 2 पर्सनल असिस्टेंट, 1 लोअर डिवीजन क्लर्क और 2 चपरासी शामिल हैं।

गौरतलब है पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव (1991-1996) के कार्यकाल के दौरान यह फैसला लिया गया था कि सभी पूर्व प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद 5 साल के लिए कैबिनेट मंत्री के बराबर लाभ के हकदार होंगे। इन सुविधाओं में एक 14-सदस्यीय स्टाफ, मुफ्त कार्यालय व्यय, चिकित्सा सुविधाएँ, 6 फैमिली एग्जिक्यूटिव क्लास एयर टिकट और एक वर्ष के लिए एसपीजी कवर शामिल हैं।

Fact Check: ‘फ्री मेट्रो राइड’ का प्रस्ताव केंद्र ने नहीं किया खारिज, मीडिया बना रही आपको बेवकूफ

आज संसद के निचले सदन की कार्यवाही में, TMC की सौगत रॉय द्वारा उठाए गए एक प्रश्न का जवाब देते हुए, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के लिए राज्य मंत्री, हरदीप सिंह पुरी ने जवाब दिया कि भारत की केंद्र सरकार दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को ‘फ्री राइड’ पर कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

हालाँकि, कई मीडिया आउटलेट्स ने इस मामले के बारे में गलत खबरें फैलानी शुरू कर दीं कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त सवारी देने के विचार को खारिज कर दिया था।

रिपब्लिक टीवी ने भी एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार ने दिल्ली में फ्री मेट्रो राइड की पेशकश करने वाली AAP सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

टाइम्स नाउ के एक लेख में भी छापा गया है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने AAP सरकार की महिलाओं के लिए फ्री मेट्रो राइड को अस्वीकार कर दिया है।

एक अन्य समाचार आउटलेट, ज़ी न्यूज़ ने भी ऐसी ही लाइन पर एक लेख प्रकाशित किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल द्वारा महिलाओं के लिए दिल्ली मेट्रो की सवारी को मुफ्त बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

उपर्युक्त कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को ‘फ्री मेट्रो राइड’ देने की योजना को अस्वीकार कर दिया है। जबकि, वास्तव में, केंद्र के समक्ष केजरीवाल द्वारा ऐसा कोई प्रस्ताव भेजा ही नहीं गया था।

संसद में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि दिल्ली मेट्रो में दिल्ली सरकार से महिलाओं को ‘फ्री मेट्रो राइड’ का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। फिर भी, प्रमुख समाचार संगठनों द्वारा “केंद्र सरकार ने ख़ारिज/अस्वीकार या रिजेक्ट की केजरीवाल सरकार की महिलाओं के लिए ‘फ्री मेट्रो राइड’ योजना” इस तरह की भ्रामक और फेक रिपोर्ट प्रकाशित की गई।

हालाँकि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज कहा कि उनकी सरकार को महिलाओं के लिए ‘फ्री मेट्रो राइड’ को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव भेजने की आवश्यकता नहीं है।

साथ ही, केजरीवाल ने फिर से दिल्ली में महिलाओं के लिए फ्री मेट्रो राइड देने का अपना वादा दोहराया है।

वर्ल्ड कप 2019: इंग्लैंड को पछाड़कर टीम इंडिया ODI में बनी नंबर वन

विराट कोहली की कप्तानी वाली भारतीय क्रिकेट टीम अब आईसीसी की (पुरुष क्रिकेट) वनडे रैंकिंग में दुनिया की नंबर वन टीम बन गई है। आईसीसी की ताज़ा रैंकिंग में टीम इंडिया 123 अंकों के साथ वनडे की नंबर वन टीम बन गई है। ऑस्ट्रेलिया के हाथों मंगलवार को मिली हार से मेज़बान इंग्लैंड को नुक़सान हुआ है और वो 121 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गई है।

भारत और इंग्लैंड 30 जून को बर्मिंघम में खेलने वाले हैं। यह मैच न केवल एक महत्वपूर्ण लीग मैच साबित हो सकता है, बल्कि इस मैच से यह बात भी स्पष्ट हो जाएगी कि वनडे रैंकिंग में कौन-सी टीम टॉप पर रहेगी।

अगर भारतीय टीम, वेस्टइंडीज़ को हराने के बाद इंग्लैंड को भी हरा देती है तो वो 124 अंक पर पहुँच जाएगी, जबकि इंग्लैंड की टीम 121 अंक पर रहेगी। वहीं, दूसरी तरफ़, अगर इंग्लैंड की टीम जीत जाती है, तो वो 123 अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर वापस आ जाएगी और भारतीय टीम उससे एक क़दम पिछड़कर दूसरे पायदान पर आ जाएगी।

अगर भारतीय टीम, वेस्टइंडीज से हार जाती है, लेकिन इंग्लैंड को हरा देती है, तो वो 122 अंकों के साथ इंग्लैंड के 121 अंकों से आगे रहते हुए पहले पायदान पर बनी रहेगी। अगर भारतीय टीम वेस्टइंडीज से हारने के बाद इंग्लैंड से भी हार जाती है तो, इंग्लैंड की टीम तीन अंकों की बढ़त के साथ टॉप पर पहुँच जाएगी। तब इंग्लैंड के 123 और भारत के 120 अंक होंगे।

आज के मैच की बात करें तो भारतीय कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीता और मैनचेस्टर में पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला लिया।

निकाह-हलाला बलात्कार है, इसे भी करें बैन: दिल्ली महिला आयोग की PM मोदी से माँग

निकाह-हलाला और बहु-विवाह (एक से अधिक पत्नी रखने की परम्परा) को लेकर दिल्ली महिला आयोग (DCW) की चेयरमैन स्वाति मालीवाल ने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर माँग की है कि ट्रिपल तलाक बिल में संशोधन करके हलाला और बहुविवाह को शामिल किया जाए।

स्वाति मालीवाल ने कहा है कि निकाह हलाला और बलात्कार में कोई अंतर नहीं है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने ट्वीट करते हुए कहा-

“निकाह हालाला और बहुविवाह बहुत ही शर्मनाक और अमानवीय सामाजिक कुरीतियाँ हैं। PM नरेंद्र मोदी जी से निवेदन है कि तीन तलाक़ क़ानून में संशोधन कर के निकाह, हलाला और बहु-विवाह को भी प्रतिबंधित करें। निकाह हलाला बलात्कार है। इसको सरकार किसी हाल में मान्यता ना दे।”

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने ट्रिपल तलाक बिल के संसद से पास होने की उम्मीद जताई है। उनका कहना है कि संसद निकाह-हलाला को भी बैन करें, यह अमानवीय और जघन्य हैं।

क्या है निकाह हलाला और खुला?

इस्लाम में निकाह मुता वो तरीका है, जिसमें लड़का-लड़की तय समय के लिए शादी करते हैं। इसमें मेहर की रकम भी होती है। समय की मियाद पूरी होने पर शादी खत्म मान ली जाती है, लेकिन इसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इस तरह से यह एक तरीके की ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरेज’ होती है।

वहीं, समुदाय विशेष में एक बार तलाक हो जाए, तो पत्नी को दोबारा पाने के लिए यही एक तरीका बचता है। पत्नी को दोबारा हासिल करने के लिए और उससे निकाह करने के लिए उसकी पत्नी को किसी दूसरे मर्द से निकाह करना होता है और शारीरिक संबंध बनाने होते हैं। फिर यदि वो ‘खुला‘ या तलाक़ के ज़रिए अलग हो जाते हैं, तो वो अपने पहले पति से दोबारा शादी कर सकती है, इसे हलाला कहते हैं।

मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मोदी सरकार ट्रिपल तलाक बिल को लेकर गंभीर है

मोदी सरकार ट्रिपल तलाक बिल को कानून बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। यही वजह रही कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले संसद सत्र में इस बिल को पेश किया गया। पिछली बार ट्रिपल तलाक बिल दिसंबर में लोकसभा में पास हुआ था, लेकिन उस वक्त यह बिल राज्यसभा में पास होने में असफल रहा था। वहीं, इस बिल का एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने विरोध किया है।

बॉम्बे HC ने मराठा आरक्षण को बताया जायज़, लेकिन घटाना होगा प्रतिशत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठाओं को दिए गए आरक्षण को हरी झंडी दे दी है, लेकिन उसे घटाकर शिक्षण संस्थानों में 12% तथा सरकारी नौकरियों में 13% करने के लिए कहा है। कोर्ट ने महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि मराठा आरक्षण को 16% से घटाकर 12 या 13% करना चाहिए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तर्क देते हुए कहा कि सवर्णों को दिया जाने वाला आरक्षण 16% नहीं होना चाहिए, लेकिन पिछड़ा आयोग की ओर से प्रस्तावित 12 से 13% आरक्षण दिया जा सकता है।

पिछले साल 30 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) श्रेणी के तहत मराठों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 16% आरक्षण का प्रस्ताव पारित किया था। आरक्षण को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में कई याचिकाएँ दायर की गई थीं, जबकि कुछ अन्य कोटे के समर्थन में दायर की गईं। सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि आरक्षण केवल मराठा समुदाय के उन लोगों को दिया गया जो लंबे समय से उपेक्षित हैं।

महाराष्ट्र में पिछली कॉन्ग्रेस-राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार ने भी इसकी प्रकार से 16% आरक्षण का प्रस्ताव दिया था, जिस पर बॉम्बे उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी।

ISIS के नाम पर फर्जी कॉल करने वाले उवैस सईद को पुलिस ने किया गिरफ्तार

अहमदाबाद में करनज पुलिस ने मंगलवार (जून 25, 2019) को एक 32 वर्षीय व्यक्ति को ISIS के नाम से फर्जी कॉल करने पर गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक करनज निवासी मोहम्मद उवैस सईद ने अपने घर के नंबर से पुलिस को फोन करके जानकारी दी थी कि युसूफ पठान नाम का व्यक्ति रथ यात्रा के रास्ते का मुआएना करता देखा गया है और हो सकता है वह तीन दिन के भीतर हमला करे। सईद का कहना था कि युसूफ लाल दरवाजे के पास खड़ा था और हाल ही में उसने पाकिस्तान का भी दौरा किया है।

हालाँकि, मामले में जाँच के बाद पुलिस ने पाया कि आईएसआईएस की लगातार खबरों को पढ़ने से सईद का दिमागी संतुलन बिगड़ गया है, इसलिए उसने पुलिस को इस तरह की कॉल की। पुलिस ने सईद के पास से आईएसआईएस से जुड़ी 250 खबरों की कतरनों को भी बरामद किया है

खबरों के मुताबिक सईद के इस कॉल के बाद पुलिस ने उसका पता लगाया और उसके द्वारा दी गई जानकारी की प्रमाणिकता की जाँच की, लेकिन पूछताछ में सईद पुलिस के किसी भी प्रश्न का जवाब देने में असमर्थ दिखा। साथ ही पुलिस के कहने पर वह पठान की पहचान कर पाने में भी असफल रहा।

पुलिस के मुताबिक, जब उन्होंने सईद को पकड़ा तो उसने बताया कि उसने किसी से सुना था कि युसूफ की इलाके में किसी से लड़ाई हुई है। इसके बाद ही उसे लगा कि पठान जरूर आईएसआईएस से जुड़ा हुआ है। सईद का बयान लेने के बाद पुलिस ने उसके पिता और भाई को पूछताछ के लिए बुलाया, जिन्होंने बताया कि सईद सनकी है और वह कुछ भी कल्पना कर सकता है।

अपनी जाँच के बाद करनज पुलिस थाने के इंस्पेक्टर फैज़ नायाब ने कहा, “सईद ISIS की बहुत खबरों को पढ़ता था, जिसके कारण उसे हर जगह आतंकी हमला होने का शक होने लगा।”

तेलंगाना: 2 पूर्व मंत्री व 1 पूर्व सांसद सहित 5 बड़े TDP व कॉन्ग्रेस नेता BJP में शामिल

तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी टीआरएस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन कर उभर रही है। चूँकि, विधानसभा चुनाव के दौरान केसीआर की आँधी में टीडीपी और कॉन्ग्रेस राज्य में अपना अस्तित्व खो चुके हैं, हालिया लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन राज्य में अच्छा रहा और इससे राज्य में अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को भाजपा में सम्भावनाएँ दिख रही हैं। पश्चिम बंगाल की तरह तेलंगाना में भी भाजपा का उद्भव पार्टी के लिए सुखद है क्योंकि दक्षिण भारत में कर्नाटक छोड़ कर पार्टी अन्य राज्यों में काफ़ी ख़राब स्थिति में है।

अब तीन टीडीपी नेताओं ने भाजपा ज्वाइन किया है। आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री रहे ई पेड्डी रेड्डी और बोड़ा जनार्दन ने भाजपा की सदस्यता ले ली। इसके अलावा पूर्व सांसद सुरेश रेड्डी ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। राज्य में तीन बड़े नेताओं के पार्टी में शामिल होने से भाजपा के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई है और पार्टी कार्यकर्ताओं ने ख़ुशी जताई है। 2 बार विधायक रहे ई पेड्डी रेड्डी राज्य के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। वह टीडीपी के महासचिव भी थे। रेड्डी इस बात से नाराज़ चल रहे थे कि टीडीपी ने हालिया लोकसभा चुनाव में तेलंगाना में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे और बीते विधानसभा चुनाव में भी काफ़ी कम सीटों पर चुनाव लड़ा।

रेड्डी ने हाल ही में आशंका जताई थी कि अगर टीडीपी का यही रवैया रहा तो तेलंगाना में पार्टी अपने संगठन को खो देगी। वहीं, अगर बोड़ा जनार्दन की बात करें तो वह वह चेन्नूर विधानसभा क्षेत्र से 4 बार विधायक रह चुके हैं। 1985 से लेकर 2004 तक वह लगातार 19 वर्षों तक क्षेत्र के विधायक रहे। इससे पहले भी कई टीडीपी नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं। कॉन्ग्रेस से भाजपा में शामिल होने वालों में एक नाम शशिधर रेड्डी का है। 4 बार विधायक रह चुके रेड्डी संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

भाजपा ज्वाइन करने वाले दूसरे कॉन्ग्रेस नेता का नाम शेख रहमतुल्ला है। जानकारी देते चलें कि दक्षिण भारत में कॉन्ग्रेस के एक अन्य नेता और पूर्व सांसद एपी अब्दुल्ला कुट्टी कॉन्ग्रेस से निष्कासित होने के बाद बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की उपस्थिति में अब्दुल्ला कुट्टी भाजपा में शामिल हुए थे। दक्षिण भारत में अपना संगठन मजबूत करने में लगी भाजपा लगातार नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है।

‘तबरेज़ के अब्बू विवाद में मारे गए थे, उनकी लिंचिंग नहीं हुई थी – मीडिया फैला रहा भ्रम’

चोरी के संदेह में झारखंड में भीड़ के हमले में चौबीस वर्षीय तबरेज़ अंसारी की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने मुख्यधारा की मीडिया में नए विवादों को जन्म दे दिया है। इसमें पीड़ित के पिता की मृत्यु के बारे में असत्यापित और झूठे दावों आधार पर प्रोपेगेंडा भी शामिल है।

कई मीडिया समूह द्वारा तबरेज़ अंसारी की मौत की खबर मिलने के तुरंत बाद, उनके पिता मस्कुर अंसारी को भी उनके बेटे तबरेज़ अंसारी की तरह ही ‘मॉब लिंचिंग’ में मार डाला गया था। ऐसी खबरें चलाई गई।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि तबरेज़ अंसारी के पिता मस्कुर अंसारी की भी लगभग 15 साल पहले इसी तरह से मॉब लिंचिंग में हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमशेदपुर के बागबेड़ा इलाके में कथित रूप से चोरी करते हुए मस्कुर को भीड़ ने पकड़ लिया और उन्हें भी भीड़ ने लिंच किया था।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट जिसमें दावा किया गया है कि तबरेज़ के अब्बू की भी लिंचिंग की गई थी

हालाँकि, तबरेज अंसारी के चाचा मरसूद आलम ने तबरेज के पिता मस्कुर की लिंचिंग के बारे में इस तरह के किसी भी दावे का खंडन किया है। मस्कुर की मौत के संबंध में मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मरसूद आलम ने कहा कि उनकी अपने दोस्तों के साथ विवाद के कारण हत्या कर दी गई थी और परिवार को एक सप्ताह बाद ही मस्कुर का शव मिला। मरसूद आलम ने मॉब लिंचिंग से जुड़ी ऐसी किसी भी रिपोर्ट को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।