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17 जून को पूरे देश में डॉक्टरों की हड़ताल, IMA ने किया आह्वान

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि सोमवार (जून 17, 2019) को सुबह 6 बजे से लेकर 18 की सुबह 6 बजे तक 24 घंटे के लिए पूरे देश भर के डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान केवल इमरजेंसी और कैजुएलटी की सेवाएँ जारी होंगी।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वो अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा चाहते हैं। कोलकाता के मेडिकल छात्र बेहद डरे हुए हैं, सड़कों पर हिंसा शुरू हो गई हैं। इसलिए वो चाहते हैं कि उनका समाज आगे आए और कोलकाता में हुई हिंसा के आरोपितों को सज़ा हो।

वो चाहते हैं कि अस्पतालों में हिंसा के खिलाफ केंद्रीय कानून लागू हो। इसलिए उन्होंने घोषणा की है कि 17 जून को पूरे देश में हड़ताल की जाएगी,और उस दौरान सिर्फ इमरजेंसी सेवाएँ जारी रहेंगी। खबरों के अनुसार डॉक्टरों की हड़ताल शनिवार को भी जारी रहेगी।

आईएमए के सेक्रेटरी ने जानकारी दी कि 17 तारीख को उन्होंने डॉक्टरों की देशव्यापी हड़ताल बुलाई है। इस हड़ताल में प्राइवेट अस्पताल भी हिस्सा लेंगे। डॉक्टरों की माँग है कि उनकी सुरक्षा में कानून लागू हो। आईएमए सेक्रेट्री ने कहा कि उन्हें पता है कि मरीज़ इस ‘बंद’ से परेशान होंगे, लेकिन उनकी सुरक्षा भी ज़रूरी है। इस बंंद के बावजूद आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।

अगर आप बंगाल में हैं तो आपको बांग्ला ही बोलनी होगी: ममता का क्षेत्रवाद भड़का

भाजपा कार्यकर्ताओं की लगातार होती हत्या और डॉक्टरों की हड़ताल से बंगाल का माहौल काफ़ी तनावपूर्ण पहले से है कि इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने क्षेत्रवाद को लेकर बयान दे दिया। शुक्रवार यानी आज (जून 14, 2019) ममता बनर्जी ने नॉर्थ 24 परगना में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि वो बंगाल को गुजरात नहीं बनने देंगी। अपने बयान में ममता ने साफ़ बोल दिया कि अगर आप बंगाल में आए हैं तो आपको बांग्ला ही बोलनी होगी।

हमेशा से क्षेत्रवाद की राजनीति करने वाली ममता बनर्जी ने कहा, “हमें बांग्ला को आगे ले जाना है, जब मैं बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब जाती हूँ तो मैं उनकी भाषा बोलती हूँ, इसलिए अगर आप बंगाल आते हैं तो आपको भी बांग्ला ही बोलनी होगी” अपने बयान में ममता ने आगे कहा कि वो बंगाल में उन अपराधियों को बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगी जो यहाँ रहते हैं और मोटरसाइकल पर घूमते हैं।

सोशल मीडिया पर ममता के इस बयान की खूब आलोचना हो रही है। डॉक्टरों को दिए अल्टीमेटम पर जहाँ उन्हें हिटलर बताया जा रहा था, वहीं अब लोग उन्हें ‘बंगाली राज ठाकरे’ बताने लगे हैं। ममता बनर्जी के बारे में लोग साफ़ बोल रहे हैं कि वो अब देश को जाति और भाषा में बाँटना चाहती हैं, वो ज्यादा समय मुख्यमंत्री नहीं रहेंगी।

अमित शाह और BSF को कोसने के बाद JDU प्रवक्ता ने खुद दिया इस्तीफ़ा

बिहार में एनडीए के सहयोगी जनता दल यूनाईटेड के प्रवक्ता अजय आलोक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आलोक ने ट्विटर पर अपने इस्तीफे की तस्वीर ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी। आलोक ने अपनी और पार्टी की विचारधारा मेल न खाने के कारण ये कदम उठाया है।

अजय ने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री एवं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को धन्यवाद दिया है। साथ ही उन्होंने लिखा है कि वो उनके लिए शर्म का कारण नहीं बनना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने पद से इस्तीफ़ा दिया है। आलोक ने अपना इस्तीफा केंद्रीय गृहमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के काम पर सवाल उठाने के बाद दिया है।

दरअसल, 11 तारीख़ को आलोक ने ट्विटर पर एक पोस्ट किया था। इस पोस्ट में उन्होंने बांग्लादेशी शरणार्थियों के मुद्दे को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसा था। साथ ही एक अन्य ट्वीट में उन्होंने बीएसएफ अधिकारियों पर भी निशाना साधा था। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा था, “सिर्फ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कोसने से काम नहीं चलेगा अपने तंत्र को कसने की जरूरत है, खासकर तब जब अमित शाह हमारे गृह मंत्री हैं। अवैध घुसपैठ पे रोक अति आवश्यक है। अब नहीं होगा तो कब होगा।”

अजय आलोक ने बीएसएफ अधिकारियों को लेकर बुधवार को भी बड़ा बयान दिया था। मीडिया खबरों के मुताबिक उन्होंने कहा था कि सीमा पर बीएसएफ के अधिकारी 5000 रुपये लेकर बांग्लादेशी घुसपैठियों को अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करवाते हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए ट्विटर पर लिखा था कि बांग्लादेश बॉर्डर पर तैनात ऐसे बीएसएफ अधिकारी जो 7-8 वर्षों से वहीं पर जमे हुए हैं, उनकी संपत्ति की जाँच हो। उनका कहना है कि बांग्लादेशी शरणार्थी ऐसे ही भारत में नहीं आ गए हैं।

राजस्थान सरकार की करतूत: चैप्टर नहीं हटा सके तो सावरकर के आगे से ‘वीर’ हटाया

राजस्थान में पिछले साल दिसंबर में कॉन्ग्रेस सत्ता पर काबिज हुई। राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पाठ्यपुस्तकों में भी विचारधारा का टकराव देखने को मिल रहा है। अशोक गहलोत सरकार ने सत्ता में आने के 6 महीने के भीतर स्कूल की तमाम किताबों में बदलाव किया है। अशोक गहलोत ने राज्य बोर्ड के अतंर्गत आने वाले स्कूलों के छात्रों की किताबों में कई बदलाव किए हैं। इनमें ऐतिहासिक घटनाओं, शख्सियतों से लेकर एनडीए सरकार के कार्यकाल में लिए गए फैसलों में बदलाव किए गए।

राजस्थान सरकार ने कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर वाले चैप्टर में सावरकर के नाम के आगे से ‘वीर’ हटा दिया है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि कॉन्ग्रेस की नज़र में सावरकर, वीर नहीं हैं। दरअसल, ये बदलाव राज्य में 13 फरवरी को पाठ्यपुस्तक समीक्षा समिति द्वारा की गई सिफारिशों के बाद किया गया है। इस समिति का गठन इसलिए किया गया था, ताकि यह अध्ययन किया जा सके कि कहीं एनडीए सरकार द्वारा राजनीतिक हितों को साधने के लिए इतिहास के साथ छेड़-छाड़ तो नहीं किया गया था।

जानकारी के मुताबिक, 12वीं की इतिहास की पुरानी किताब में स्वतंत्रता संग्राम वाले चैप्टर में सावरकर के नाम के आगे ‘वीर’ लिखा था। इस अध्याय में स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में दिए उनके योगदान के बारे में काफी विस्तार से लिखा गया था। वहीं, नई किताब में सावरकर के नाम से ‘वीर’ शब्द हटा दिया गया है और उनका नाम अब विनायक दामोदर सावरकर हो गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे अंग्रेजों ने सेल्यूलर जेल में उन्हें प्रताड़ित किया था और उन्होंने दूसरी दया याचिका में खुद को पुर्तगाल का बेटा बताया था।

यह भी लिखा है कि सावरकर ने अंग्रेजों को चार बार दया याचिका भेजी। सावरकर ने भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की तरफ कार्य किया। इसके साथ ही इसमें लिखा है कि सावरकर ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन और 1946 में पाकिस्तान के निर्माण का विरोध किया। 30 जनवरी, 1948 को गाँधी की हत्या के बाद, उन पर हत्या की साजिश रचने और गोडसे की सहायता करने के आरोप में मुकदमा चलाया गया। हालाँकि, बाद में उन्हें मामले से बरी कर दिया गया।

वीर सावरकर के नाम के आगे से वीर हटाने के साथ ही पाठ्यपुस्तक में और भी कई सारे बदलाव किए गए हैं। गौरतलब है कि, राजस्थान सरकार ने पहले तो स्कूली पाठ्यक्रम से विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े चैप्टर को हटाने का फैसला किया था, लेकिन भाजपा के विरोध के बाद फैसला पलटा गया। अब विनायक दामोदर सावरकर का चैप्टर पाठ्यक्रम में तो है, लेकिन राजस्थान सरकार की नजर में अब वो ‘वीर’ नहीं है।

हर केंद्रीय संस्थान के समीप 2 संस्कृत बोलने वाले गाँव बनाए जाने चाहिए: निशंक

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरूवार (13 जून) को दिल्ली में केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थानों के प्रमुखों की बैठक में कहा कि केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के समीप कम से कम दो गाँवों को संस्कृत भाषा बोलने वाले गाँव बनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को सशक्त बनाना उनका लक्ष्य है। इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री संजय धोत्रे भी मौजूद थे।

ख़बर के अनुसार, केंद्रीय मंत्री निशंक ने कहा कि मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ केंद्रीय भाषा से जुड़े संस्थानों के प्रमुखों की लगातार समीक्षा बैठक आयोजित होती रहनी चाहिए। इससे भारतीय भाषाओं के विकास को दिशा मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक शिक्षकों की भर्तियों को बढ़ाने की भी बात कही, जिससे संस्कृत भाषा सीखने वालों की संख्या बढ़ सके। ऐसा करके संस्कृत भाषा को विश्व स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करने में सफलता मिलेगी। केंद्रीय मंत्री निशंक ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि देश में केंद्रीय संस्कृत शिक्षण संस्थानों के आसपास कम से कम दो ऐसे गाँव बनाने का लक्ष्य रखा जाए, जहाँ के लोग आम बोलचाल की भाषा के लिए संस्कृत भाषा का प्रयोग करते हों।

केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थानों के प्रमुखों की बैठक में निशंक ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए और भी कई महत्वपूर्ण बातें कही। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास के लिए नए तरीके खोजने की ज़रूरत है। भारतीय भाषाओं में नए शोध और उन्हें वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करने की भी आवश्यकता है। इससे संस्कृत भाषा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकेगी।

इसी तरह के एक प्रयास में, फरवरी 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य का बजट पेश करते हुए संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने पर विशेष ज़ोर दिया था। इसके तहत राज्य में संस्कृत पाठशालाओं को अनुदान के लिए 242 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। अनुदानित संस्कृत स्कूलों और डिग्री कॉलेजों को अनुदान प्रदान करने के लिए 30 करोड़ रुपए और आवंटित किए गए थे।

संस्कृत में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काशी विद्यापीठ को 21 करोड़ रुपए दिए गए। वहींं, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को 21.51 करोड़ रुपए और काशी हिंदू विश्वविद्यालय में वैदिक विज्ञान केंद्र को 16 करोड़ रुपए दिए गए। पिछले एक दशक में राज्य सरकार द्वारा किसी भी अनुसंधान केंद्र को दिया गया यह सबसे बड़ा आवंटन था।


इसके अलावा उन्होंने अनुवाद पर भी ज़ोर दिया और कहा कि भारतीय भाषाओं के साहित्य का दूसरी भाषाओं में अनुवाद होना चाहिए, जिससे सभी लोग साहित्य जगत में अधिक से अधिक अपनी पहुँच बना सकें और उसका लाभ उठा सकें। इससे भाषा के प्रचार-प्रसार का मार्ग प्रशस्त होगा।  उन्होंने बताया कि जल्द ही भाषा भवन की स्थापना की जाएगी, जहाँ भारतीय भाषाओं से संबंधित सभी संस्थान एक साथ भाषाओं के विकास के लिए काम करेंगे।

दरअसल, भारतीय भाषा संस्थान भारतीय भाषाओं के विकास के लिए काम करता है। भारतीय भाषा संस्थान भारत सरकार की भाषा नीति को तैयार करने और उसके कार्यान्वयन के अलावा भाषा विश्लेषण, भाषा शिक्षा शास्त्र, भाषा प्रौद्योगिकी और समाज में भाषा के इस्तेमाल पर रिसर्च करता है। वर्ष 1969 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन मैसूर में केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान की स्थापना की गई थी। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषा केंद्र भुवनेश्वर, पुणे, मैसूर, पटियाला, गुवाहाटी, सोलन और लखनऊ में हैं।

10 साल की बच्ची को बनाया हवस का शिकार, 55 वर्षीय कलाम अंसारी गिरफ़्तार

नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। ऐसा ही एक शर्मनाक मामला बिहार में शिवहर क्षेत्र का है जहाँ 10 साल की हिन्दू बच्ची का बलात्कार 55 साल के कलाम अंसारी ने किया। उसे लोगों ने रंगे हाथों पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया।

यह मामला हिरम्मा थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया है। इसकी पुष्टि करते हुए, एसडीपीओ राकेश कुमार ने बताया कि आरोपी का नाम कलाम अंसारी है, जो मस्जिद टोला का निवासी है, उसे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है और नाबालिग बच्ची को मेडिकल के लिए भेज दिया गया है।

शिवहर के निवासी अनीस झा ने बताया कि उन्होंने शिवहर के वकीलों से अपील की है कि वो कलाम अंसारी का केस न लड़ें। साथ ही बलात्कारी अंसारी के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई की माँग भी की।

इस घटना से नाराज़ ग्रामीणों ने अंसारी को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की माँग की है। शिवहर क्षेत्र की सांसद रमा देवी, पूर्व सांसद लवली आनंद, पूर्व विधायक ठाकुर रत्नाकर, जेडीयू नेता विजय विकास, फॉरवर्ड ब्लॉक के बिहार प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र कुमार, श्री राजपूत करणी सेना के ज़िलाध्यक्ष राजेश टाइगर, बीजेपी युवा मोर्चा के ज़िला मंत्री छोटे कुमार साह ने इस दुष्कर्म मामले को धरती का कलंक कहा और ये पुरज़ोर माँग उठाई कि स्पीडी ट्रायल कराकर दोषी को जल्द से जल्द फाँसी की सज़ा दी जाए।

जानकारी के अनुसार, 12 जून को विश्व हिन्दू परिषद ज़िला कार्यालय में एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें अलीगढ़ और शिवहर में बच्चियों के साथ हुए बलात्कार की घटना की कड़ी निंदा की गई। शिवहर के सभी सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं के द्वारा सर्व सहमति से यह निर्णय लिया गया कि देश में सुनियोजित तरीके से लड़कियों के साथ जो बलात्कार कि घटना हो रही है, इसके लिए सरकार क़ानून बना कर 30 दिनों के अंदर बलात्कारी को फाँसी की सज़ा का प्रावधान करे। साथ ही यह निर्णय भी लिया गया कि बच्ची को न्याय दिलाने के लिए 14 जून को पूरे शिवहर के बजार पूर्णतः बंद रखे जाएँगे।

सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने सभी व्यापारी बंधुओं से एक दिन के बंद का अनुरोध किया है और कहा है कि इस बंद को सफल बनाएँ, जिससे ज़िला प्रशासन और कोर्ट इसे गंभीरता से ले और बलात्कारी को जल्द से जल्द सज़ा मिले। ऐसा होने से भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर लगाम लग सकेगी। इस बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओं में अशोक उपाध्याय, कमलेश्वरीनंदन सिंह, संजय सिंह, माधुरेंद्र कुमार, संदीप कुमार, कुणाल गुप्ता, संजय गुप्ता, अजय कुमार, अजय आर्य, शिवम सिंह, संतु कुमार, अनिल पटेल, छोटेलाल साह, पंडित वेदप्रकाश शास्त्री के अलावा दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे।

इसके अलावा, 12 जून को बिहार के बेगूसराय में हुई एक अन्य घटना में, मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू परिवार के घर में घुसकर दो महिलाओं से छेड़छाड़ की और उस समय वहाँ मौजूद अकेले पुरुष सदस्य को मारने की कोशिश की। दूसरे मजहब वाले चाहते थे कि हिंदू अपनी ज़मीन और घर बेचकर इलाक़े को छोड़ दें।

Forbes: दुनिया की शीर्ष 500 कंपनियों में भारत की 10 कम्पनियाँ शामिल, Reliance टॉप 100 में

गुरुवार (जून 14, 2019) को फोर्ब्स की ग्लोबल 2000 लिस्ट 2019 की रिपोर्ट सामने आई। इस रिपोर्ट में दुनिया की 2000 सबसे बड़ी कंपनियों की सूची में भारत की 57 कंपनियों को जगह मिली है। इनमें रिलायंस एक मात्र ऐसी कंपनी है जो शीर्ष 100 कंपनियों में जगह बना पाई है। रिलायंस को इस सूची 71वाँ स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि ऑयल एंड गैस सेक्टर की कंपनियों में रिलायंस 11वें नंबर पर है। इसके बाद इस सूची में एचडीएफसी बैंक का नाम है, जिसे 209वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। सूची में ओएनजीसी 220वें स्थान पर है, जबकि इंडियन ऑयल 288वें और एचडीएफसी लिमिटेड 332 वें पायदान पर है।

इसके अलावा टीसीएस (374), आईसीआईसीआई बैंक (400), एलएंडटी (438), भारतीय स्टेट बैंक (460) और एनटीपीसी (492) का नाम शीर्ष 500 कंपनियों में शुमार है। इस सूची में कोल इंडिया, कोटक महिंद्रा बैंक, भारत पेट्रोलियम, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडसइंड बैंक, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, इंफोसिस, एक्सिस बैंक, टाटा मोटर्स, आईटीसी, भारती एयरटेल, विप्रो, जेएसडब्ल्यू स्टील, पावर ग्रिड, हिंडाल्को, एचसीएल टेक, गेल, पंजाब नेशनल बैंक, ग्रासिम, बैंक ऑफ बड़ौदा, पावर फाइनेंस और केनरा बैंक शामिल हैं।

इस लिस्ट में 61 देशों की कंपनियाँ शामिल है, जिसमें सबसे ज्यादा जगह अमेरिका की कंपनी को मिली है। इस सूची में 575 नाम अमेरीका की कंपनी के हैं। जबकि चीन और हांगकांग की 309 और जापान की 223 कंपनियाँ शामिल हैं। फोर्ब्स ने बिक्री, मुनाफा, संपत्ति और शेयर बाजार के चार पैमानों पर इन कंपनियों की रैंकिंग की है।

टॉप 10 में चीन की आईसीबीसी(1), चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक(3), एग्रीकल्चर बैंक ऑफ चाइना (5), पिंग एन इंश्योरेंस ग्रुप(7), बैंक ऑफ चाइना अमेरिका(8); अमेरिका की जेपी मॉर्गन(2), बैंक ऑफ अमेरिका(5), एपल(3), वेल्स फार्गो(10); और नीदरलैंड की रॉयल डच शैल शामिल हैं।

बंगाल में एक साथ 69 डॉक्टरों ने सौंपा इस्तीफा, ममता से बिना शर्त माफ़ी की माँग

पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के हड़ताल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य में जूनियर डॉक्टर के साथ हुई मारपीट के बाद साथी डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। कोलकाता में एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को लेकर बंगाल में दो प्रोफेसरों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रोफेसर सैबाल कुमार मुखर्जी ने एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल कोलकाता के प्रिंसिपल और मेडिकल सुपरिटेंडेंट के पद से इस्तीफा दिया तो वहीं, प्रोफेसर सौरभ चट्टोपाध्याय ने वाइस-प्रिंसिपल पद से इस्तीफा दे दिया था और अब डॉक्टर्स के इस्तीफे की झड़ी सी लग गई है। सीनियर डॉक्टर भी ममता बनर्जी के विरोध में उतर आए हैं।

कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल के 80 डॉक्टर्स के इस्तीफा देने की खबर आ रही थी, लेकिन जानकारी के मुताबिक, अब तक कम से कम 69 डॉक्टरों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया और साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी से कल दिए बयान के लिए के लिए बिना शर्त माफी माँगने की भी बात कही है। आर जी कर कॉलेज के डॉक्टरों का इस्तीफा यहाँ पढ़ा जा सकता है

बता दें कि, कल ममता बनर्जी ने डॉक्टरों को अल्टीमेटम देते हुए 4 घंटे में वापस काम करने पर लौटने के लिए कहा था और साथ ही कहा था कि अगर वो ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं, पश्चिम बंगाल में हो रहे विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और मुंबई में भी डॉक्टर्स विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं।

जिस तरह से पिछले पाँच दिनों से यह सब घटित हो रहा है, और ममता सरकार का जो रवैया रहा है, लगता ही नहीं कि उन्हें सिवाय अपनी राजनीति और वोट बैंक के, डॉक्टरों की सुरक्षा या आम मरीज़ के जीवन की कोई चिंता है। ममता ने न सिर्फ इस मुद्दे को राजनैतिक रंग देने की कोशिश की, बल्कि एक आसान सी माँग पर अभी तक कुछ भी ढंग का नहीं बोल पाई है कि क्या उनकी सरकार डॉक्टरों के काम करने हेतु सुरक्षित माहौल दे सकेगी?

जब कोई व्यक्ति अपने बूढ़े अब्बू की हॉस्पिटल में हुई मौत पर 200 लोगों की भीड़ ले आता है, तो पता चलता है कि प्रशासन को समाज का एक हिस्सा कैसे देखता है। उसके बाद ममता का यह कहना कि ‘पुलिस वाले भी तो मरते हैं ड्यूटी पर लेकिन उनके सहकर्मी हड़ताल नहीं करते’, एक मूर्खतापूर्ण बयान है। या फिर यह बयान उस नेत्री का है जो सोचता है कि वो कुछ भी कह सकती है क्योंकि वो चुनी हुई सरकार चला रही है।

डॉक्टरों का इस तरह से हड़ताल पर जाना और दसियों की संख्या में इस्तीफ़ा देना बताता है कि ममता सरकार में काम करते हुए सुरक्षा की उम्मीद उन्हें नहीं दिख रही। जब सरकार आपको धमकाने पर उतर आए और बुनियादी सुविधा मुहैया न करा सके तो फिर डॉक्टरों के पास ज्यादा विकल्प नहीं दिखते।

बशीरहाट में महिला BJP कार्यकर्ता की निर्मम हत्या, लोगों का गुस्सा अब BJP पर फूटा

पश्चिम बंगाल में गुरुवार (मार्च 13, 2019) को नॉर्थ 24 परगना जिले के बशीरहाट इलाके में महिला भाजपा कार्यकर्ता की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। कार्यकर्ता की पहचान सरस्वती दास के रूप में हुई है। भाजपा ने सरस्वती की हत्या के लिए टीएमसी के गुंडों को ज़िम्मेदार बताया है।

गुरुवार की रात को बंगाल भाजपा इकाई ने ट्विटर पर इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “बशीरहाट में तृणमूल के गुंडों ने सरस्वती दास की निर्मम हत्या कर दी। बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह ढह चुकी है, यहाँ कोई भी सुरक्षित नहीं हैं।”

गौरतलब है सरस्वती दास ने लोकसभा चुनावों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी। भाजपा द्वारा इस घटना की जानकारी ट्विटर पर दिए जाने के बाद यूजर्स ममता बनर्जी के साथ भाजपा पर भी जमकर बरस रहे हैं।

लोग बंगाल में राष्ट्रपति शासन गुहार लगाने की माँग कर रहे हैं। कुछ का ये भी कहना है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं को जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए कार्य करने वालों की अब कदर नहीं रही हैं, तो कुछ का कहना है कि इसके लिए भाजपा पर ऊँगली क्यों उठाई जा रही है, सवाल ममता बनर्जी और बंगाल पुलिस से होना चाहिए।

डॉक्टरों के साथ खड़ा हुआ ममता बनर्जी का भतीजा, हाइकोर्ट पहुँचा हड़ताल का मामला

पश्चिम बंगाल में पिछले चार दिनों से अस्पतालों में ताला लटका हुआ है। डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। राज्य में जूनियर डॉक्टर पर हमले के बाद सभी जूनियर डॉक्टर मंगलवार (जून 11, 2019) से आंदोलन कर रहे हैं। डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री की अल्टीमेटम को खारिज करने और अपनी माँग पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने का भी फैसला किया है। ममता सरकार ने डॉक्टरों की माँग पर अब तक फैसला नहीं किया है।

इस हमले के बाद, देश भर के लाखों डॉक्टरों ने पश्चिम बंगाल में अपने प्रदर्शनकारी सहयोगियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए एक दिन के लिए अपने काम को बहिष्कार करने का फैसला किया है। इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने इस घटना के खिलाफ शुक्रवार को “ऑल इंडिया प्रोटेस्ट डे” घोषित किया है और हड़ताली डॉक्टरों के साथ एकजुटता व्यक्त की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर असंवेदनशीलता जाहिर करते हुए डॉक्टरों को चार घंटे का अल्टीमेटम दिया था। जिसमें डॉक्टरों को 4 घंटे के भीतर काम पर लौटने के लिए और ऐसा न करने पर कार्रवाई का सामना करने की बात कही थी। कथित तौर पर, टीएमसी के समर्थक भी इस घटना से नाखुश हैं और ममता बनर्जी के खिलाफ डॉक्टरों के साथ मिलकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

हैरानी की बात तो ये है कि ममता बनर्जी डॉक्टरों को धमकी दे रही हैं और उनके भतीजे आबेष बनर्जी डॉक्टरों के समर्थन में प्रदर्शन उतर आए हैं। आबेश बनर्जी, ममता के भाई कार्तिक बनर्जी के बेटे हैं, केपीसी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर हैं। आबेश ने बुधवार को केपीसी अस्पताल से एनआरएस अस्पताल तक विरोध रैली का नेतृत्व किया।

शब्बा हकीम के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

पश्चिम बंगाल में मंत्री फिरहाद हकीम की बेटी शब्बा हकीम ने भी डॉक्टरों के प्रदर्शन का समर्थन किया है। शब्बा हकीम खुद भी डॉक्टर हैं और उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना अधिकार है। साथ ही शब्बा ने ये भी कहा कि टीएमसी समर्थक होने के रुप में ममता सरकार की निष्क्रियता और नेताओं की चुप्पी पर शर्म आती है।

इस आंदोलन की आग दिल्ली तक पहुँच गई है। एम्स के डॉक्टर भी अब बंगाल के डॉक्टरों के समर्थन में आ गए हैं। वहीं, कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल के चार प्रोफेसरों ने इस्तीफा दे दिया तो सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज के 18 डॉक्टरों ने भी इस्तीफा दे दिया और जिस एनआरएस मेडिकल कॉलेज में हंगामा हुआ उसके प्रिंसिपल ने भी इस्तीफा सौंप दिया है। एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से मुलाकात की।

जानकारी के मुताबिक, डॉक्टर कुणाल साहा ने डॉक्‍टरों की हड़ताल के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट में गुरुवार (जून 13, 2019) को याचिका दायर की है। दायर की गई याचिका में हड़ताली डॉक्‍टरों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की अपील की गई है। कोलकाता हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में इसकी सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि, कोलकाता स्थित नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार (10 जून) को एक बुजुर्ग मरीज मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टर परिबाह मुखोपाध्याय पर घातक हमला किया। डॉक्टर्स के मुताबिक, करीब 200 की भीड़ ने मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद अस्पताल में जमकर उत्पात मचाया। इस घटना के बाद राज्य के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर न्याय की माँग करते हुए हड़ताल पर चले गए।