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मोदी को ‘World’s Most Powerful Person’ बताने वाले ब्रिटिश हेराल्ड के पीछे पड़ा Scroll खुद हो गया नंगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को British Herald द्वारा ‘World’s Most Powerful Person’ घोषित करने से जिनके (दिलों में आग) सुलगनी थी, वह सुलगी। और वे ज़हर उगले बिना रह नहीं पाए। Scroll ने Alt News का छापा हुआ लेख छापा, जिसके शीर्षक को इस ‘सनसनीखेज़’ तरीके से लिखा गया, मानो अभी इसमें यह खुलासा होगा कि British Herald के मालिक अमित शाह और अजित डोवाल के बेटे हैं।

और यह ‘सनसनीखेज़’ शीर्षक केवल वह क्लिकबेट जर्नलिज्म नहीं है, जिसे खबरिया पोर्टल अपने निम्न स्तर की पत्रकारिता को ‘मार्केट की मजबूरियाँ’ को आड़ देने के लिए इस्तेमाल करते हैं, बल्कि इसका इरादा ही मोदी को सकारात्मक रूप में दिखाने का ‘बदला’ लेने के लिए British Herald को नीचे गिराना था।

आगे इस लेख में पोर्टल ही नहीं, इसके मालिक अंसिफ अशरफ़ तक की ‘चीर-फाड़’ ऐसे की गई है मानो अंसिफ अशरफ़ मोदी की तारीफ़ कर देने वाले किसी पोर्टल के मालिक नहीं, अरबों डकार के विदेश में बैठे माल्या या डॉन दाऊद इब्राहिम हों। टोन किसी समाचार पोर्टल के मालिक के विषय में बात करने का नहीं, ऐसा है मानो कोई एंकर लेट नाईट क्राइम शो में दर्शकों को बाँधे रखने के लिए ‘चैन से सोना है तो जाग जाइए, और गौर से देखिए इस दुष्ट को – बताने के लिए बड़बड़ाता है। और फिर इसी टोन को गुर्राहट में बदलते हुए कहता है – इस मालिक का पोर्टल मोदी को दुनिया का सबसे ताकतवर नेता कहता है।

विकिपीडिया के भरोसे होगी खोजी पत्रकारिता!

अभी तक स्कूलों और इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रोजेक्ट्स करने वाले ही रेफरेंस सेक्शन में “credits: Wikipedia” लिख कर कर्तव्य की इतिश्री अहसान जताते हुए करते थे, लेकिन अब लगता है पत्रकारिता का भी स्तर वहाँ आ गया है कि विकिपीडिया ‘भरोसेमंद सूत्रों’ में गिना जाएगा- बावजूद इसके कि इसे कोई भी edit करके किसी के भी विकिपीडिया पेज पर कुछ भी लिख सकता है।

अंसिफ अशरफ़ की तहकीकात भी इस लेख में उनके विकिपीडिया पेज के आधार पर ही की गई है- जब कि उनकी खुद की वेबसाइट है, जिस पर उनके अख़बारों British Herald और Cochin Herald के ज़रिए उनसे सम्पर्क करने के लिए एक-एक ईमेल एड्रेस और फ़ोन नंबर भी दिए गए हैं।

हालाँकि न मोदी या भाजपा से उन्हें जोड़ने वाला कुछ मिलना था, न मिला- पत्रकारिता के इस समुदाय विशेष की किस्मत इतनी खराब निकली कि अंसिफ अशरफ़ का घर तक गुजरात में नहीं है, जहाँ उन्हें राज्य सरकार का पिट्ठू या ‘डरा हुआ शांतिप्रिय’ बताया जा सके; वह तो ‘गॉड्स ओन कंट्री’, कम्युनिस्टों के गढ़ और दहशतगर्द संगठन आइएस को भारत से सबसे ज्यादा ‘सप्लाई’ देने वाले केरला के निवासी निकले।

ये मोदी को स्टार-पावर देने का नहीं, उनसे स्टार-पावर ‘लेने’ का प्रयास था**

अंसिफ अशरफ़ के इन दोनों अख़बारों में से कोचीन हेराल्ड तो 1992 से ही चला आ रहा है। इससे वह शक भी साफ हो जाता है जिसका बीज यह लेख बिना बोले अपने पाठकों के मन में डालने की कोशिश करता है- कि कहीं ऐसा तो नहीं कि मोदी की इमेज चमकाने के लिए पुराने ब्रिटिश अख़बार द डेली हेराल्ड या ऑस्ट्रेलिया के सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड की ‘सस्ती कॉपी’ बनाने का राजनीतिक प्रयास हो। लेकिन ऐसा भी नहीं है। साफ पता चल रहा है कि British Herald नाम रखना एक ब्रांडिंग स्ट्रेटेजी का हिस्सा था, जिसके अंतर्गत 1992 से ही चले आ रहे अख़बार, और उसकी मालिक कंपनी की ब्रांडिंग चमकाने के लिए ब्रिटिश हेराल्ड अख़बार का सृजन किया गया।

और एक बात, मोदी ब्रिटिश हेराल्ड के कवर पर आने वाले इकलौते या पहले नेता नहीं हैं। उनसे पहले यह अख़बार/पोर्टल न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जसिन्डा अडर्न और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी अपने कवर पर ला चुका है। यानी यह मोदी को कोई ‘चमक’ दे नहीं रहा था, बल्कि उनके ज़रिए खुद की इमेज बनाने की कोशिश कर रहा था।

कायदे से जब अंसिफ अशरफ़ के खिलाफ कुछ नहीं साबित हो पाया तो या तो इस लेख का कोई मतलब ही नहीं बनता था (क्योंकि इसमें कोई ‘खुलासा’ हो ही नहीं सकता), और या तो अगर कोई जानकारी देने वाला लेख लिखना ही था, तो उसे उसी रूप में लिखा जाना चाहिए था, न कि उसे ‘हमें-पता-है-ये-बड़ी-conspiracy-है लेकिन-क्या-करें-बोल-नहीं-सकते-क्योंकि-सबूत-नहीं-है-इशारे-में-बात-समझ-जाओ’ के subtext वाले वाहियात लेख के रूप में ‘मार्केट’ में ‘फेंक’ देना चाहिए था।

स्क्रॉल की बात

अब एक बात और। दूसरे समाचार पोर्टलों के ‘अबाउट अस’ में कँस्पिरेसी थ्योरी का कच्चा माल ढूँढ़ने वाले स्क्रॉल का खुद का ना तो ‘अबाउट अस’ का हिस्सा है (वेबसाइट ही नहीं, फेसबुक पेज पर भी कौन मालिक है, कौन पैसा देता है की बजाय गोलमोल बातें ही भरी हैं) और न ही वह यूज़र्स के कमेंट तक लेखों के नीचे ‘बर्दाश्त’ करती है। सार्वजनिक जीवन और राजनीति में लोकतंत्र-लोकतंत्र खेलने के पहले अगर ये लोग खुद का लोकतान्त्रिक स्वभाव बना लें, बहुत अच्छा होगा।

**यह लेख लिखते समय मुझे भी ब्रिटिश हेराल्ड अख़बार के 150+ वर्ष पुराने होने का गुमान नहीं था, अतः मुझे लगा कि कोचीन हेराल्ड का “British Herald नाम रखना एक ब्रांडिंग स्ट्रेटेजी का हिस्सा” और मार्केटिंग गिमिक लगा। लेकिन अंसिफ अशरफ के जवाब से यह साफ हो जाता है कि यह ब्रांडिंग स्ट्रेटेजी तो थी, लेकिन मार्केटिंग गिमिक नहीं, और न ही मोदी को कवर पर जगह देना किसी ‘नए अख़बार’ का अपना ‘ब्रांड रिकग्निशन’ बढ़ाने का प्रयास; और यह अख़बार भी नया नहीं, 150+ वर्ष पुराना है।

कौन था SP मुखर्जी की मृत्यु के बाद उनके भाई को अब्दुल्ला की तरफ़ से कॉल करने वाला अनजान शख़्स?

डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नेहरू कैबिनेट में उद्योग मंत्री की अहम ज़िम्मेदारी दी गई थी – यह तो हम सभी जानते हैं। लेकिन, कॉन्ग्रेस पार्टी से मतभेदों के कारण ‘एक राष्ट्र, एक विधान’ के लिए अभियान चलाने वाले डॉक्टर मुखर्जी ने पार्टी छोड़ दी। फिर जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष रहे मुखर्जी की मृत्यु जम्मू कश्मीर में हुई। उसी जम्मू कश्मीर में- जिसे भारत का बिना शर्त अभिन्न अंग बनाने के लिए वह प्रयासरत थे। वे जम्मू कश्मीर गए, वहाँ उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हिरासत में ही उनकी तबियत ख़राब हुई और उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन, उनकी मृत्यु की सूचना को उनके भाई तक पहुँचाने वाला एक ऐसा शख़्स था, जिसकी पहचान अनजान होकर रह गई।

जब डॉक्टर मुखर्जी की मृत्यु हुई, तब उनके बड़े भाई के पास एक कॉल आया। उनके भाई एक जज थे। वैसे डॉक्टर मुखर्जी के पिता भी कलकत्ता हाइकोर्ट में जज थे। ख़ुद डॉक्टर मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके थे और उन्हें दक्ष शिक्षाविद माना जाता था। डॉक्टर मुखर्जी की मृत्यु के बाद उनके भाई जस्टिस मुखर्जी के पास एक फोन कॉल आया था। फोन कॉल पर कौन था, किसी को नहीं पता। अनजान शख़्स ने जस्टिस मुखर्जी को बताया कि वह जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला की तरफ़ से बोल रहा है। उसी अनजान शख़्स ने जस्टिस मुखर्जी को उनके भाई डॉक्टर मुखर्जी की मृत्यु की सूचना दी।

लेकिन, इसके बाद उसने जस्टिस मुखर्जी से ऐसा सवाल पूछा, जिससे वो अचानक से चौंक गए। उसने पूछा कि डॉक्टर मुखर्जी के पार्थिव शरीर के साथ क्या करना है? उसने अपनी पहचान बताने से साफ़ इनकार कर दिया। आज रविवार (जून 23, 2019) को जब देश डॉक्टर मुखर्जी की पुण्यतिथि मना रहा है, यह सवाल फिर से उठता है कि जम्मू कश्मीर के तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला की तरफ़ से डॉक्टर मुखर्जी के परिवार को कॉल करने वाला व्यक्ति कौन था और उसका श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु से क्या वास्ता था? बाद में डॉक्टर मुखर्जी के भाई जस्टिस मुखर्जी को उनकी मृत्यु की आधिकारिक सूचना पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री विधान चंद्र रॉय से मिली।

डॉक्टर मुखर्जी की मृत्यु के 1 दिन बाद इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर (तारीख: जून 24, 1953)

विधान चंद्र रॉय, जिन्होंने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को पत्र लिख कर डॉक्टर मुखर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जाँच कराने की माँग की थी। लेकिन, भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आज बयान देते हुए कहा कि जनता की माँगों के बावजूद नेहरू ने डॉक्टर मुखर्जी की मृत्यु की जाँच नहीं कराई। क्या आपको पता है कि जब डॉक्टर मुखर्जी का पार्थिव शरीर कश्मीर से कोलकाता लाया जा रहा था, उससे पहले शेख अब्दुल्ला ने उनके पार्थिव शरीर पर कश्मीरी शॉल डाला था? शेख अब्दुल्ला सहित उनकी कैबिनेट के अनेक मंत्रियों ने पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण किया था। अब्दुल्ला ने एक माला बेगम अब्दुल्ला की तरफ़ से भी पेश किया था।

बताया जाता है कि डॉक्टर मुखर्जी लगभग 10 से भी अधिक दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके पार्थिव शरीर को कोलकाता तक लाने के लिए भारत सरकार ने वायुसेना के स्पेशल प्लेन की व्यवस्था की थी। एक सक्रिय सांसद के रूप में पहचाने जाने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु के बाद उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदियों ने भी उनकी प्रशंसा की। एक और बात ध्यान देने लायक है कि उनकी मृत्यु से पहले उनके भाई जस्टिस मुखर्जी के पास उनके नाम से एक टेलीग्राम आया था, जिसमें लिखा था कि वे ठीक हैं और बुखार एवं दर्द इत्यादि भी कम हो गया है। बताया गया कि ये टेलीग्राम उनकी तरफ़ से जेल से ही आया था।

तेलंगाना में नगरपालिका की क्रूरता: 100 कुत्तों को ज़हर देकर मार डाला, ज़मीन में दफनाया

तेलंगाना से एक अमानवीय घटना सामने आई है। सिद्दिपेट के नगरपालिका कर्मचारियों को मरे हुए कुत्तों को असंवेदनशील तरीके से ज़मीन में गाड़ते हुए देखा गया। ट्विटर पर डाले गए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कर्मचारी ट्रक में से मरे हुए कुत्तों को उठा कर नीचे पटक रहे हैं। वीडियो बनाती हुई लड़की इस दृश्य को देख कर सिसक रही है। कर्मचारियों ने उसे बताया कि उन्हें नगरपालिका के अधिकारियों द्वारा कुत्तों को मार डालने को कहा गया है। कर्मचारियों ने कहा कि नगरपालिका द्वारा इलाक़े से कुत्तों का कथित आतंक ख़त्म करने के लिए उन्हें मार डालने का आदेश दिया गया। कुल 100 कुत्तों को ज़मीन में गाड़ दिया गया।

इससे पहले तेलंगाना के विकाराबाद में 30 अन्य कुत्तों को मार कर गाड़ देने का मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक कुल 100 कुत्तों को ऐसे ही निर्मम तरीके से मारा जा चुका है। इस मामले में एक स्थानीय ने कहा, “मैं इस बात को देख कर हैरान थी कि मेरे सारे कुत्ते गायब हैं। उनमें से कोई भी आक्रामक नहीं था और किसी ने भी कभी कोई हिंसक परिस्थिति नहीं पैदा की। अगर लोगों ने शिकायत की ही थी तो नगरपालिका वालों को ‘एनिमल बर्थ कण्ट्रोल’अपनानी चाहिए थी।” बता दें कि उन सभी कुत्तों को ज़हर देकर मारा गया था।

इस घटना की जानकारी मिलते ही हैदराबाद से जानवरों के हितों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक टोली घटनास्थल के लिए निकल गई और उन्होंने सबूत इकट्ठा करने के साथ-साथ ‘Cruelty against animal Act and section 428 and 429’ के तहत पुलिस थाने में केस भी दर्ज कराया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी जाँच के दौरान भी 30 कुत्तों को ज़मीन में गाड़े जाने की घटना को प्रत्यक्ष रूप से देखा। कई लोगों का कहना है कि यह कार्य कर रहे लोगों में से एक भी नगरपालिका का कर्मचारी नहीं था। किसी ने भी ऐसे यूनिफॉर्म नहीं पहन रखे थे।

पूछने पर उन्होंने बताया कि वे देहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर हैं और उन्हें पहले से ही मरे कुत्ते दिए गए थे। एक प्रेस नोट के मुताबिक़, स्थानीय नगरपालिका के अधिकारी इन कुत्तों को ज़हर देकर मारने में शामिल हैं।

भाई उपाध्यक्ष, भतीजा कोऑर्डिनेटर: BSP में बदलाव के नाम पर मायवती का परिवारवाद

बसपा सुप्रीमो मायावती की अहम बैठक में उनके भाई आनंद कुमार को पार्टी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया। वहीं उनके भतीजे आकाश को नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई। बसपा नेता राम जी गौतम को को भी नेशनल कोऑर्डिनेटर चुना गया। दानिश अली को लोकसभा में बसपा संसदीय दल का नेता बनाया गया। लालजी वर्मा को विधानसभा में पार्टी का नेता चुना गया और सतीश चंद्र मिश्रा को राज्यसभा में नेता बनाया गया। गिरीश चंद जाटव मुख्य सचेतक बनाए गए। साथ ही ‘बुआ-बबुआ’ पर लगाम लगाते हुए आगामी उपचुनाव में पार्टी नेताओं को सपा से अलग चुनाव लड़ने की तैयारी करने को कहा गया।

कहा जा रहा है कि मायावती द्वारा अखिलेश यादव को फोन करने के बाद उनके रवैये से वो नाराज़ हैं और इसीलिए वह सपा से अलग चुनाव लड़ने में पूरी ताक़त झोंकना चाहती हैं। मायावती द्वारा अपने भाई व भतीजे को पार्टी में अहम पद देना बसपा के परिवारवाद की तरफ़ ही इशारा करता है।

बसपा की बैठक में लिए गए अहम निर्णय

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद मायावती निराश बताई जा रही हैं और अपनी पार्टी के कई नेताओं से भी वो नाराज़ हैं। यही कारण है कि उन्होंने एक-एक कर संगठन में बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने हाल ही में तीन राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को पद से बेदखल कर दिया था। मायावती ने प्रदेश स्तर पर निष्क्रिय नेताओं को चिह्नित करने पर ज़ोर दिया है और उन सभी पर कार्रवाई की जा रही है।

70 साल की कमरजहाँ को शौहर ने दिया तलाक़: 5 बेटों ने छोड़ा साथ, टॉफी बिस्कुट बेच कर रहीं गुजारा

एक तरफ जहाँ मोदी सरकार तीन तलाक बिल पास कराने में जुटी है, वहीं शनिवार (जून 22, 2019) को गोंडा जिले में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जहाँ एक शौहर ने अपनी 70 वर्षीय बीवी को तीन तलाक दे दिया। मामला कोतवाली नगर के हाफिज़ पुरवा से जुड़ा है। जहाँ की वृद्ध महिला कमरजहाँ का आरोप है कि उनके शौहर ने इस बुढ़ापे में उन्हें तलाक दे दिया।

महिला का आरोप है कि उनके शौहर का चाल-चलन ठीक नहीं है। इस वजह से वह रोजाना उसके साथ मारपीट किया करता था और उसी के चलते उसने एक साथ तीन तलाक बोल कर संबंध खत्म कर लिया। मामले की शिकायत लेकर महिला कई स्थानीय थाने पर गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके बाद पीड़ित वृद्ध महिला ने परिवार न्यायालय में गुजारे के लिए अर्जी लगाई है।

वृद्ध महिला कमरजहाँ ने अपनी बात बताई। उसका कहना है कि इस उम्र में शौहर को खोने का मलाल तो है ही लेकिन उसके साथ बेटों का अलग होने का गम उसके कलेजे को छलनी करने जैसा है। महिला ने कहा कि पहले तो शौहर ने तलाक दे दिया। उसके बाद उनके 5 बेटों ने भी उनसे मुँह फेर लिया। ऐसे में उनके ऊपर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। महिला का कहना है कि शौहर की मार से हाथ पैरों में इतना दर्द है कि वो ठीक से चल भी नहीं पा रही हैं। उन्होंने बताया कि जब उनके शौहर और बेटों ने उन्हें घर से निकाल दिया तो ऐसे में उनके सामने खाने-पीने की एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। घर के खर्च से बचाए हुए ₹1,000 से टॉफी-बिस्किट लाकर, उसे बेचकर जीवनयापन कर रही हैं।

तीन तलाक के मुद्दों पर छिड़ी जंग के बीच शौहरों का तीन तलाक देने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। इसी कड़ी में एक और ख़बर पीलीभीत से सामने आई है। जहाँ पर संभल जनपद के चंदौसी कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला गोलागंज निवासी नौशाद ने थाना कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मोहम्मद फारूख निवासी रोशन को तीन तलाक दे दिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उनके शौहर ने पहले तो उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया, उनके साथ मारपीट की और जब वो प्रताड़ना से तंग आकर मायके चली आई तो नौशाद ने वहाँ पहुँच कर उसे डराया धमकाया और उसे तीन तलाक दे दिया। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी।

जानकारी के अनुसार, नौशाद ₹2 लाख दहेज की माँग कर रहा था। रोशन ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई और कहा कि नौशाद के साथ उनका निकाह 11 अप्रैल 2014 को हुआ था। पीड़िता की तहरीर पर शिकायत दर्ज कर ली गई है। वहीं, पुलिस का कहना है कि ये मामला पहले परिवार परामर्श केंद्र में जाएगा और अगर वहाँ पर समझौता नहीं हो पाया तो फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तौसीफ़ इमरान ने नाबालिग छात्रा को बनाया हवस का शिकार, Tik Tok पर बनाता था बलात्कार का वीडियो

वडोदरा में एक मुस्लिम व्यक्ति ने 14 साल की दसवीं कक्षा की छात्रा के साथ न सिर्फ़ बार-बार बलात्कार किया बल्कि इस कुकृत्य को उसने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी किया। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी ख़बर के अनुसार, कथित तौर पर इमरान उस छात्रा को विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले गया और उसका धर्म-परिवर्तन (इस्लाम में) कराने में लगा रहा।

19 वर्षीय तौसीफ़ इमरान ख़ान जिसने नाबालिग का यौन शोषण किया, वो 12वीं कक्षा का छात्र है और मंझलपुर का रहने वाला है। इमरान के ख़िलाफ़ POCSO अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि वह लड़की को लालबाग के बगीचे में ले जाता था और प्रतापनगर के ओएनजीसी परिसर के पास उसका यौन उत्पीड़न करता था। लड़की के माता-पिता ने दावा किया है कि फोन में रिकॉर्डिंग करने के लिए ख़ान नाबालिग पर सेक्शुअल एक्टिविटीज़ के लिए दबाव बनाता था।

पुलिस जाँच में पता चला है कि खान Tik Tok पर लड़की की तस्वीरें और वीडियो शेयर करता था। फ़िलहाल, उसने लड़की की कोई भी अश्लील सामग्री शेयर नहीं की। हालाँकि, उसने यह धमकी दी थी कि जब भी लड़की के माता-पिता उससे उलझेंगे तो वो उन वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर देगा।

लड़की के माता-पिता को अपनी बेटी के यौन शोषण का पता तब लगा जब उन्होंने 20 जून को उसका पीछा किया। तब उन्हें पता चला कि ख़ान उसे लालबाग बगीचे और फिर प्रतापनगर रोड पर हजीरा मकबरे में ले गया। लड़की के माता-पिता ने अपनी शिक़ायत में यह भी बताया कि ख़ान उनकी बेटी का धर्म-परिवर्तन कराने के मक़सद से उसे विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले जाता था। ख़ान द्वारा शादी का वादा करने पर लड़की ने रमज़ान पर रोज़ा रखना भी शुरू कर दिया था।

पुलिस के अनुसार, ख़ान गुजरात बोर्ड परीक्षा के दौरान एक परीक्षा केंद्र में इस लड़की से मिला था। उसने बार-बार लड़की का पीछा किया, उससे संपर्क किया और उससे शादी का वादा किया। इससे पहले साल 2017 में भी नाबालिग से छेड़छाड़ के लिए उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था।

पिछले कुछ महीनों में नाबालिगों के बलात्कार की कई घटनाएँ सामने आईं हैं। कानपुर में एक मौलवी ने मदरसा में एक नाबालिग के साथ बलात्कार किया था। एक और चौंकाने वाले मामले में, 12 साल की लड़की से बलात्कार के आरोप में 2 मुस्लिम पुरुषों को गिरफ़्तार किया गया था।

गीता है Army Manual, USA ने अपने सैनिकों के लिए मँगाई थी 30000 प्रतियाँ: Maj Gen सुभाष शरण

मेजर जनरल सुभाष शरण ने श्रीमद्भगवद्गीता को लेकर महत्वपूर्ण बात कही है। जनरल शरण ने कहा की श्रीकृष्ण के मुख से निकली गीता एक ‘Military Manual (सैन्य नियमावली)’ है और सेना के हर जवान को इसका अनुसरण करना चाहिए। जनरल शरण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आर्मी में भर्ती के एडिशनल डायरेक्टर जनरल हैं। मेजर जनरल ने कहा कि गीता हमें हमारे जीवन में आने वाले सभी परिस्थितियों के लिए तैयार रखती है। रिक्रूमेंट रैली के पहले राउंड के बाद शुक्रवार (जून 21, 2019) को मेरठ पहुँचे जनरल शरण ने ये बातें कहीं। पहले राउंड की प्रक्रिया बागपत के बड़ौत में 25 मई से 15 जून तक चली थी।

मेजर जनरल शरण ने कहा कि गीता में वो सारी शिक्षाएँ हैं, जिसे एक युद्ध के मैदान में दी गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गीता किसी ख़ास रिलिजन की पुस्तक नहीं है, युवाओं को इसे ज़रूर पढ़ना चाहिए क्योंकि ये हमें जीवन में आने वाली हालातों के लिए पहले से ही तैयार करती है। उन्होंने कहा कि ये एक ऐसी सैन्य नियमावली है जो युद्ध के मैदान में सामने आई थी। उन्होंने कहा, “किसी युद्ध के मैदान में हम केवल युद्ध की ही बात करते हैं और इसीलिए गीता को मैं एक सैन्य नियमावली मानता हूँ।“

मेजर जनरल सुभाष शरण ने इस बात की याद दिलाई कि अमेरिकी सेना ने अपने जवानों को इराक़ में तैनात करने से पहले भगवद्गीता की प्रतियाँ दी थीं और ये पुस्तकें उन्होंने भारत से ख़ास निवेदन कर के मँगवाई थी। शरण के अनुसार, अमेरिका ने भारत से भगवद्गीता की 30,000 प्रतियाँ मँगाई थी ताकि अपने सैनिकों को ‘कर्म योग’ का महत्व समझा सके। इसका अर्थ हुआ कि अपने शत्रु से बिना इस बात की परवाह किए लड़ाई करना कि अंत में क्या होने वाला है या क्या परिणाम निकलने वाले है।

भर्तियों व रोज़गार की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष पिछले वर्ष के मुक़ाबले डेढ़ गुना ज्यादा भर्तियाँ निकाली गई हैं। उन्होंने कहा कि वे और भी ज्यादा भर्तियाँ चाहते हैं, ख़ासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए पिछले वर्ष 900 भर्तियाँ निकली थीं जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़ कर 1500 हो गई हैं।

मेजर जनरल शरण ने भारतीय महिलाओं द्वारा सेना में ‘जवान’ के रूप में शामिल होकर इतिहास रचने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि महिलाओं की भर्तियाँ इसी वर्ष अगस्त-सितम्बर में शुरू हो जाएगी। ये प्रक्रिया लखनऊ में होगी। इन महिलाओं की ट्रेनिंग अगले वर्ष 2020 में जनवरी से शुरू होगी। जनरल शरण ने कहा कि यह तो सिर्फ़ एक शुरुआत है, जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता जाएगा, महिलाओं को सेना में अन्य प्रकार की भूमिकाएँ भी दी जाएँगी।

अफगानिस्तान पर भारत की जीत को पचा नहीं पाईं The Print की पत्रकार, सोशल मीडिया पर उगला जहर

वर्ल्ड कप में भारत-अफगानिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान ‘द प्रिंट’ की पत्रकार ज्योति मल्होत्रा ने क्रिकेट को लेकर अपनी ‘विशेषज्ञता’ का प्रदर्शन किया। पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान पर भारत की रोमांचक जीत से जहाँ पूरा हिंदुस्तान बेहद खुश था तो वहीं, ज्योति काफी क्षुब्ध और व्यथित लग रही थीं। भारतीय टीम की जीत के बाद उन्होंने क्रिकेट के ज्ञान का प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम पर स्पोर्टमैनशिप न दिखाने का आरोप लगा दिया।

मैच तो खैर मैच ही था – एकदम रोमांचक! इसे जीतने के लिए दोनों देशों ने अपनी पूरी ताकत झोंंक दी। दोनों टीम ने खेल भावना के साथ पूरे जोश से खेला। अंत समय तक दोनों टीम के बीच काफी कड़ी टक्कर देखने को मिली, जिसके लिए दोनों देशों के फैंस ने टीम की सराहना भी की। भारतीय भी अपनी पड़ोसी देश की टीम के लिए खुश थे और उन्होंने अफगानिस्तान टीम द्वारा किए गए प्रदर्शन के लिए उसकी प्रशंसा भी की। हालाँकि, ज्योति मल्होत्रा जैसी ‘शांतिप्रिय’ लुटियन पत्रकार भारत की जीत के बाद बेहद परेशान लग रही थीं और उन्होंने अपनी निराशा और भड़ास को दूर करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। उन्होंने इस बारे में ट्वीट करते हुए खासकर भारतीय कप्तान विराट कोहली पर निशाना साधा।

अफगानी क्रिकेटर राशिद खान के आउट होने पर भारतीय टीम द्वारा जश्न मनाने के तरीके को लेकर ज्योति मल्होत्रा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “हर अफगानी विकेट गिरने पर भारतीय जिस तरह से जश्न मना रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है, जैसे मैच अफगानिस्तान के साथ नहीं, बल्कि पाकिस्तान के साथ खेला जा रहा है।” ज्योति के ट्वीट से ऐसा लग रहा है जैसे वो चाहती थीं कि भारत अफगानिस्तान को आसानी से जीतने दे दे। शायद वो ये नहीं जानतीं कि भले ही भारत और अफगानिस्तान एक दूसरे के अच्छे पड़ोसी देश हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि एक टीम दूसरे टीम को आसानी से जीतने दे। खेल में कोई भी टीम जीत की मंशा से मैदान पर उतरता है और आखिरी गेंद तक जीतने की कोशिश करता है।

यहाँ पर ये पेचीदा सा लगता है कि लिबरल्स जहाँ एक ओर राजनीति को खेल से बाहर रखने की बात करते हैं, वहीं भारत-अफगानिस्तान मैच में उनके लिए ये सब मायने रखता है। मल्होत्रा ने भारतीय कप्तान विराट कोहली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें अफगानी टीम से ये सीखना चाहिए कि फाइटर अंत तक हार नहीं मानते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेटरों को स्पोर्ट्समैनशिप सिखाने के लिए अफगानी क्रिकेटर नबी का शुक्रिया भी अदा किया।

हालाँकि, लोग वास्तव में ये नहीं जान पा रहे हैं कि ज्योति किस बात पर नाराज थीं। उनके ट्वीट से केवल ये अनुमान लगाया जा सकता है कि उनको विराट कोहली के आक्रामक खेल से दिक्कत है और उसी को वो बुरी खेल भावना बता रही हैं। उन्होंने शमी के हैट्रिक लेने पर भी ट्वीट करते हुए लिखा कि अब क्या होगा। इससे पहले भी जब भारत ने पाकिस्तान को हराया था, तो कई लिबरल्स चाहते थे कि पाकिस्तान जीते, वो भी सिर्फ इसलिए कि वो ‘अति-राष्ट्रवाद’ को हारते हुए देखना चाहते थे।

CPM नेता के बेटे के ख़िलाफ़ बलात्कार का मामला दर्ज, पिता ने कहा: हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं

मुंबई पुलिस ने केरल सीपीएम के राज्य सचिव कोडियेरी बालाकृष्णन के बेटे बिनॉय बालाकृष्णन के ख़िलाफ़ बलात्कार और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। शनिवार (22 जून) को कोडियेरी बालाकृष्णन ने इस मामले पर शर्मनाक बयान देते हुए कहा, “पार्टी या मैं अपने परिवार के सदस्यों की ग़लतियों की ज़िम्मेदारी नहीं ले सकते… उसे (बिनॉय को) अपने किए का परिणाम ख़ुद ही भुगतना पड़ेगा।”

राज्य सचिव बालाकृष्णन ने इस आरोप से भी इनकार किया कि उनके परिवार ने 33 वर्षीय महिला से संपर्क किया था जिसकी शिक़ायत पर मुंबई पुलिस ने मार्क्सवादी नेता के बड़े बेटे बिनॉय बालाकृष्णन के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है।

कोडियेरी बालाकृष्णन ने तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से कहा, “जाँच में सच्चाई सामने आ जाएगी। मेरी पार्टी या मैं आरोपित की सुरक्षा या मदद करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। बिनॉय एक वयस्क युवक है, जो अपने परिवार के साथ अलग रह रहा है। यह उसकी ख़ुद की ज़िम्मेदारी है कि वो ख़ुद को कैसे निर्दोष साबित करे। मैं इस मुद्दे में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहा हूँ।”

उन्होंने शनिवार को संवाददाताओं से कहा कि वह अपने बेटे के ठिकाने को नहीं जानते हैं और पिछले कुछ दिनों से उन्होंने उसे देखा भी नहीं है। जब पत्रकार उनसे सवालों के जवाब के लिए अड़े रहे, तो उन्होंने कहा कि वो कोई मुंबई पुलिस के अधिकारी नहीं हैं।

मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, महिला ने दावा किया कि मिस्टर बिनॉय ने उससे शादी करने का वादा किया था, लेकिन सालों बाद उसे पता चला कि वह पहले से ही शादीशुदा है। महिला ने दावा किया कि मिस्टर बिनॉय और उनका एक 8 साल का बेटा है।

बिनॉय बालाकृष्णन की अग्रिम ज़मानत सोमवार (24 जून) को होने की संभावना है। कुछ महीने पहले, उन्होंने शिक़ायतकर्ता के ख़िलाफ़ कन्नूर पुलिस स्टेशन में कथित रूप से ब्लैकमेल किए जाने के संदर्भ में शिक़ायत दर्ज की थी।ख़बर के अनुसार, इस मामले की जाँच के लिए पिछले कुछ दिनों से मुंबई पुलिस की एक टीम केरल में मौजूद है। हालाँकि, पुलिस कथित तौर पर आरोपित बिनॉय से संपर्क नहीं कर पाई है। मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों के सामने पुलिस ने बिनॉय को एक नोटिस गुरुवार (20 जून) को भेजा, जिसमें उन्हें 72 घंटे के भीतर पेश होने को कहा गया।

बालाकोट के बाद वो लड़ाई जो भारतीय नौसेना ने लड़ी: कहानी गायब पाकिस्तानी सबमरीन की

बालाकोट में भारतीय वायुसेना द्वारा एयर स्ट्राइक किए जाने के बाद कई ऐसी घटनाएँ हुईं, जो आमजनों की नज़र से तो दूर रहीं लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में इन घटनाओं ने भारत की रणनीति पर असर डाला। पुलवामा हमले के तुरंत बाद भारत ने अपनी नौसेना को उस दौरान चल रही एक एक्सरसाइज से हटा लिया और इसे पाकिस्तान नियंत्रित जलक्षेत्र के आसपास लगा दिया। इसमें न्यूक्लियर कन्वेंशनल सबमरीन्स भी शामिल थे। भारतीय नौसेना के इस आक्रामक एक्शन से पाकिस्तान को ऐसा लगा था कि भारत पानी के रास्ते कोई कार्रवाई कर पुलवामा में वीरगति को प्राप्त 40 जवानों का बदला ले सकता है।

भारत ने पाकिस्तान की सेना के क्रियाकलापों पर कड़ी नज़र रखी थी लेकिन फिर भी हमारी वायुसेना ने पाया कि पाकिस्तान का सबसे एडवांस सबमरीन पीएनएस साद अचानक से गायब हो गया। पीएनएस साद अगोस्टा क्लास सबमरीन है। दरअसल, ऐसा पाकिस्तान ने जानबूझ कर किया था। पाक ने ‘Air Independent Propulsion’ तकनीक का प्रयोग कर के ऐसा किया था। इस तकनीक का प्रयोग कर के कोई एडवांस सबमरीन किसी नॉर्मल सबमरीन के मुक़ाबले काफ़ी ज्यादा देर तक पानी के भीतर रह सकता है। इसके बाद भारतीय नौसेना पाकिस्तान द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई की संभावना को लेकर ख़ुद को तैयार कर रही थी।

एएनआई में अजीत के दूबे के लेख के अनुसार, कराची में जिस आखिरी लोकेशन से पीएनएस साद गायब हुआ था, वहाँ से उसे गुजरात के तटीय स्थल तक पहुँचने में 3 दिन लगते और अगर वो मुंबई स्थित वेस्टर्न फ्लीट के मुख्यालय तक पहुँचने की चेष्टा करता तो उसे 5 दिन लगते। अगर सच में ऐसा होता तो यह देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता है, इसीलिए नौसेना ने सभी तैयारियाँ शुरू कर दी थीं। एंटी-सबमरीन वारफेयर स्पैशलिस्ट वॉरशिप्स और एयरक्राफ्ट्स को तैनात कर दिया गया था, ताकि गायब पाकिस्तानी पीएनएस साद की स्थिति का पता लगाया जा सके।

जहाँ-जहाँ उसके जाने की आशंका थी, वहाँ-वहाँ नौसेना ने नज़र रखनी शरू कर दी। अगर उसने भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश किया (ऐसा सोच कर) तो उसे बाहर लाने के लिए हरसंभव कार्रवाई की गई। गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों पर ख़ास निगरानी रखी गई। स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन आईएनएस कलवरी को भी इस कार्य के लिए लगाया गया और नौसेना ने हर वो कोशिशें की, जिससे पाकिस्तान को एहसास हो जाए की भारतीय जलक्षेत्र में उसने कोई भी गड़बड़ी की तो उसे उसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा। पीएनएस साद को खोजने के लिए सैटेलाइट्स का भी प्रयोग किया गया और जब कुछ दिन बीत गए तब नौसेना को लगा कि इसे पाकिस्तान द्वारा जानबूझ कर छिपाया गया है।

21 दिनों के बाद भारतीय नौसेना ने पीएनएस साद को पाकिस्तान के पश्चिमी क्षेत्र में लोकेट किया। इसे पाकिस्तान ने इसीलिए छिपाया था, ताकि बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद उत्पन्न हुई युद्ध वाली परिस्थितियों में सही समय पर इसका प्रयोग किया जा सके। जैसे ही तनाव बढ़ा, भारत ने उत्तरी अरब सागर में 60 वॉरशिप तैनात कर दिए थे, जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य भी शामिल था। भारतीय नौसेना के आक्रामक रुख से डरे पाकिस्तान ने अपनी नौसेना को मकरन तट तक ही सीमित रखा। उसे खुले समुद्र में निकलने की हिम्मत ही नहीं हुई। ये वो ‘लड़ाई’ थी, जो दुनिया की नज़रों से परे चली।