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महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस: राधाकृष्ण पाटिल के बाद अब्दुल सत्तार ने भी दिया MLA पद से इस्तीफा, BJP में शामिल होने की अटकलें

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कॉन्ग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अब पार्टी को महाराष्ट्र से एक और झटका लगा है, जहाँ पार्टी विधायक राधाकृष्ण विखे पाटिल ने अपने पद से मंगलवार (जून 4, 2019) को इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसी सम्भावना है कि वह महाराष्ट्र में कैबिनेट विस्तार से पहले बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।

पाटिल महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। इस्तीफा देने के बाद राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा, “मैंने लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के लिए प्रचार भी नहीं किया था। मुझे हाईकमान पर संदेह नहीं है। उन्होंने मुझे विपक्ष का नेता बनाकर अच्छा मौका दिया था। मैंने अच्छा काम करने की कोशिश की, लेकिन हालात ने मुझे इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया है।”

एक तरफ कहाँ कॉन्ग्रेस की लोकसभा में हार के बाद राहुल गाँधी के इस्तीफे की चर्चा थी, वह तो नहीं हुआ लेकिन अलग-अलग राज्यों में हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफों का सिलसिला जारी है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि कुछ नेता पार्टी के भविष्य को लेकर सशंकित हैं। इसलिए कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देकर अपने लिए बीजेपी में मुकाम ढूँढ रहे हैं।

कॉन्ग्रेस की समस्या को और बढ़ाते हुए, पाटिल के साथ पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार ने भी कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने तो यहाँ तक दावा किया कि जल्द ही 8-10 और विधायक भी कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। इन घटनाओं को देखने से एक बात स्पष्ट है कि लोकसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के बेहद ख़राब प्रदर्शन प्रदर्शन से निराश पार्टी नेता महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के गठजोड़ की लगातार बढ़त को देखते हुए, आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस की डूबती नाव छोड़कर कहीं और ठाँव ढूँढने लगे हैं और इस समय बीजेपी से मजबूत ठिकाना किसी भी नेता को नज़र नहीं आ रहा है। इस तरह से लगातार कॉन्ग्रेस की हालत पतली और बीजेपी मजबूत होती जा रही है।

गौरतलब है कि राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल भी कॉन्ग्रेस छोड़कर कुछ समय पहले ही सीएम देवेंद्र फड़नवीस की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए थे। वैसे राधाकृष्ण विखे पाटिल के नेता प्रतिपक्ष के पद छोड़ने की सबसे बड़ी वजह अहमदनगर लोकसभा सीट को बताया जा रहा है। इस सीट से वो अपने बेटे के लिए टिकट माँग रहे थे। लेकिन ये सीट एनसीपी के खाते में चली गई। इसके चलते पहले उनके बेटे ने पार्टी छोड़ी और अब राधाकृष्ण विखे पाटिल ने विधायक पद से भी दे दिया है।

रेप आरोपित पूर्व मंत्री को 1 साल से बचा रही केजरीवाल सरकार, दिल्ली पुलिस को भेजना पड़ा रिमाइंडर

दिल्ली पुलिस ने राज्य के पूर्व मंत्री संदीप कुमार के खिलाफ यौन उत्पीड़न के एक मामले में केजरीवाल सरकार को रिमाइंडर भेजा है। पुलिस की ओर से भेजे गए इस रिमाइंडर में दिल्‍ली सरकार से संदीप कुमार के खिलाफ बनाई गई चार्जशीट को मंजूरी देने की माँग की गई है। पुलिस का कहना है कि केजरीवाल सरकार की ओर से मंजूरी न मिलने के कारण चार्जशीट पिछले एक साल से पेंडिंग है। दरअसल, अगर किसी जनप्रतिनिधि (आरोपी) के खिलाफ पुलिस को चार्जशीट दाखिल करनी होती है, तो इसके लिए राज्य सरकार (अगर आरोपी विधायक हो तो) से अनुमति लेनी पड़ती है।

गौरतलब है कि, संदीप कुमार के खिलाफ राशन कार्ड बनवाने के नाम पर एक महिला से रेप करने का आरोप है। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में दिख रही पीड़ित महिला ने आरोप लगाया था कि राशन कार्ड बनवाने और बच्चों को अच्छी नौकरी दिलाने के नाम पर संदीप कुमार ने उसका शारीरिक शोषण किया था। महिला की शिकायत पर साल 2016 में दिल्ली के सुल्तानपुरी थाने में संदीप कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था और फिर उनको गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया था। हालाँकि, कुछ दिनों बाद ही उन्हें जमानत मिल गई थी। इस घटना के बाद अपनी किरकिरी होते देख केजरीवाल सरकार ने संदीप को मंत्री पद से हटा दिया था और पार्टी से भी निकाल दिया था।

आगामी चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में महिलाओं के लिए मेट्रो और बस सफर मुफ्त करने की घोषणा की है, लेकिन रेप के आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दायर करने की मंजूरी में देरी को लेकर लोग केजरीवाल पर निशाना साध रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ तो केजरीवाल महिलाओं की सुरक्षा की बात करते हैं, वहींं दूसरी तरफ रेप के आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दायर करने के लिए मंजूरी नहीं दे रहे हैं। ये उनका कैसा दोहरा रवैया है!

नीतीश की इफ्तार Vs नवरात्रि पे फलाहार: ‘हिंदू हृदय सम्राट’ को लोगों ने कहा – आप बनें बिहार के CM

बिहार में इन दिनों सियासी पारा बहुत गरमाया हुआ। चुनावों के दौरान एक दूसरे के विरोधी अब एक दूसरे की इफ्तार पार्टी में शिरकत करने के कारण चर्चा का विषय बन गए हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार पर एक ट्वीट किया है, जिसके बाद लोगों ने नीतीश की आलोचना में और गिरिराज सिंह की तारीफ़ में ट्वीट्स की झड़ी लगा दी।

दरअसल, पटना के हज भवन में जदयू द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में ‘हम'(हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) के अध्यक्ष जीतनराम माँझी शामिल हुए, और माँझी द्वारा आयोजित इफ्तार में नीतीश कुमार पहुँचे। इसके बाद इफ्तार पार्टी के बहाने मेल-जोल बढ़ाने पर भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने नीतीश पर तीख़ी टिप्पणी करते हुए लिखा, “कितनी खूबसूरत तस्वीर होती जब इतनी ही चाहत से नवरात्रि पे फलाहार का आयोजन करते और सुंदर सुदंर फ़ोटो आते??…अपने कर्म धर्म में हम पिछड़ क्यों जाते और दिखावा में आगे रहते हैं???”

गिरिराज सिंह की इस टिप्पणी पर अधिकांश ट्विटर यूजर उनसे सहमत नजर आए और अप्रत्यक्ष रूप से यूजर्स ने नीतीश के इस मेल-जोल पर खूब तंज कसा। नीतीश पर गिरिराज की दिखावे वाली टिप्पणी पर सबसे पहले तो लोगों ने गिरिराज की बेबाकी की तारीफ़ की।

कुछ लोगों ने यहाँ तक इच्छा जताई कि वो उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं। यूजर्स ने उन्हें ‘हिंदू हृदय सम्राट’ भी बताया।

अधिकतर यूजर्स सोशल मीडिया पर गिरिराज के समर्थन में नजर आए और उन्होंने नीतीश के इफ्तार को नाटक करार दिया। एक यूजर का ये भी कहना रहा कि अगर अब इन्होंने नवरात्रि में फलाहार का आयोजन नहीं करवाया तो आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें करारा जवाब मिलेगा।

कार्यकाल पूरा नहीं करेंगी ममता, BJP सत्ता में आई तो डेमोग्राफी बदल देंगे: कैलाश विजयवर्गीय

भाजपा के बंगाल प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया है कि ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल सरकार अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए उन्होंने ‘जय श्री राम’ के घोष को अपने साथ दुर्व्यवहार बताने के ममता बनर्जी के दावे पर भी सवाल खड़ा किया और यह भी दावा किया कि किसी भी समय तृणमूल के विधायक जत्थे-के-जत्थे बनाकर पार्टी छोड़ सकते हैं, जिससे ममता बनर्जी की सरकार खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने तृणमूल के विधायकों में असंतोष का एक और बड़ा कारण पार्टी में ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी का परिवारवाद के चलते बढ़ता कद बताया है।

‘जय श्री राम’ के पोस्टकार्डों पर, ‘बाहरियों’ के सवाल पर

ममता बनर्जी को भाजपा नेताओं द्वारा ‘जय श्री राम’ वाले पोस्टकार्ड भेजे जाने के सवाल पर विजयवर्गीय बताते हैं कि लोकसभा के नतीजे आने पर ख़ुशी मनाते हुए तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की बंगाल में हत्या कर दी गई थी। ममता बनर्जी ‘जय श्री राम’ सुनकर भड़क उठतीं हैं। वह पूछते हैं कि लाखों लोगों का धार्मिक उद्घोष गाली कैसे हो सकता है। वह देश के लोगों से अपील करते हैं कि अगर ममता बनर्जी को ऐसा ही लगता है तो देश के लोग उनका भविष्य तय कर दें। ममता ने भाजपा समर्थकों से इंच-इंच इंतकाम लेने की बात की थी, जिसे उन्होंने करना शुरू कर दिया था।

ममता बनर्जी के ‘बाहर से आए लोग राज्य की शांति भंग कर रहे हैं’ के वक्तव्य पर कैलाश विजयवर्गीय ममता बनर्जी के विरोधाभासों की ओर ध्यान खींचते हैं। वह बताते हैं कि रोहिंग्याओं जैसे असली बाहरियों को तो ममता बनर्जी खुद पाल रही हैं (और भारतीयों को ‘बाहरी’ बता रहीं हैं)। वह दावा करते हैं कि 1.5 करोड़ अवैध अप्रवासी बांग्लादेशियों को ममता बनर्जी ने बंगाल में बसा रखा है और उन्हें नागरिकता प्रमाणपत्र से लेकर राशन कार्ड तक दे रखे हैं। इन अवैध निवासियों के लिए ममता सरकार राज्य के असली बाशिंदों का हक लूट रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अपनी संस्कृति पर हो रहे आक्रमण से चिंतित बंगाली समुदाय क्रुद्ध है।

ममता खुद शपथ-ग्रहण से कतरा रहीं थीं, ‘निजी’ बताकर भाजपाईयों की हत्या का बचाव

लोकसभा निर्वाचन के दौरान मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार वालों को प्रधानमंत्री के शपथ-ग्रहण समारोह में बुलाने को ‘राजनीतिकरण’ कहे जाने पर कैलाश विजयवर्गीय पलट कर पूछते हैं कि जिन्होंने संगठन के लिए परिवारजन कुर्बान कर दिए, उन्हें भला पार्टी के लिए ख़ुशी के समारोह में क्यों नहीं बुलाया जाए? यह कोई पहले से की गई तैयारी पर आधारित नहीं, स्वःस्फूर्त निर्णय था। और ममता बनर्जी ने उन्हें बुलाए जाने का बहाना बना कर समारोह से किनारा कर लिया। ममता बनर्जी का इन हत्याओं को ‘निजी कारण से की गई’ बताया जाना एक तरह से उचित सिद्ध करने का प्रयास है।

अभिषेक बनर्जी, जीतने पर भाजपा क्या करेगी

ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद को विजयवर्गीय परिवारवाद का कारण बताते हुए इसे तृणमूल के विधायकों में बढ़ते असंतोष की एक प्रमुख वजह बताते हैं। वह दावा करते हैं कि पार्टी के बहुत से विधायक असंतुष्ट हो विद्रोह के लिए तैयार हैं, और उनके एक साथ पार्टी छोड़ देने के चलते तृणमूल कॉन्ग्रेस राज्य सरकार में 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। भाजपा के राज्य सरकार में आने पर प्राथमिकताओं की सूची में विजयवर्गीय कानून व्यवस्था, विकास के अलावा सीमावर्ती जिलों की डेमोग्राफी बदलने पर भी जोर देते हैं। उनके मुताबिक पार्टी ने डेमोग्राफिक असंतुलन को सुधारने का भी प्रण ले रखा है।

प्रियंका गाँधी ने खूब मेहनत की, हार के लिए कार्यकर्ता ज़िम्मेदार: राज बब्बर

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राज बब्बर ने पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी के बचाव किया है। राज बब्बर ने कहा कि हार के लिए प्रियंका नहीं बल्कि कार्यकर्ता और स्थानीय नेतागण ज़िम्मेदार हैं। राहुल और प्रियंका की तारीफ करते हुए राज बब्बर ने कहा कि उन दोनों ने ख़ूब मेहनत की। प्रियंका गाँधी को लोकसभा चुनाव से ऐन पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रभारी बना कर भेजा गया था। इसके बाद मीडिया के हलकों में यह चर्चा थी कि प्रियंका संगठन में नई जान फूँकेंगी और राज्य में कॉन्ग्रेस का जीर्णोद्धार होगा, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी का प्रदर्शन बदतर रहा।

यहाँ तक कि ख़ुद कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी अपने परिवार की पारंपरिक सीट अमेठी से हार गए। प्रियंका गाँधी द्वारा धुआँधार प्रचार करने का पार्टी को कोई फायदा नहीं मिला और भाजपा ने बड़ी बढ़त बनाई। पूर्व सांसद राज बब्बर ने प्रियंका का बचाव करते हुए कहा:

“प्रियंका गाँधी ने अपना काम किया। लेकिन, पार्टी कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं, प्रत्याशियों और संगठन उनसे चुनावी लाभ नहीं ले सके। राहुल जी ने इस चुनाव के बहुत कड़ी मेहनत की और प्रियंका जी ने भी उसी दमखम के साथ उनसे ताल मिलाई। हम लोग (पार्टी कार्यकर्ता, स्थानीय नेता और उम्मीदवार) ख़ुद को साबित करने में नाकाम रहे। अमेठी को उन्होंने कभी भी अपना संसदीय क्षेत्र नहीं माना बल्कि परिवार माना। अब, घरवालों (अमेठी की जनता) ने इस तरह का निर्णय दे दिया है।”

राज बब्बर ने ख़ुद फतेहपुर सिकरी से चुनाव लड़ा था, जहाँ उन्हें बुरी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के राजकुमार चाहर ने उन्हें लगभग 5 लाख मतों के भारी अंतर से बुरी तरह मात दिया। चाहर को कुल मतों का 64% प्राप्त हुआ जबकि बब्बर को सिर्फ़ 16% से संतोष करना पड़ा। राज बब्बर ने कहा कि राहुल गाँधी के मन में एक पीड़ा है, जो साफ़ नज़र आ रही है। उन्होंने अमेठीवासियों के मन में भी पीड़ा होने का दावा किया। बब्बर ने कहा कि राहुल भले ही वायनाड से सांसद बन गए हों, लेकिन उनके मन में कहीं न कहीं एक टीस ज़रूर है।

उत्तर प्रदेश में इस बार कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन पिछले चुनाव के मुक़ाबले भी बहुत बुरा रहा। हालाँकि, कॉन्ग्रेस की पूरे देश में जितनी सीटें आई हैं, उससे ज्यादा भाजपा को अकेले यूपी से मिल गई। यूपी में वोटरों ने जातीय अंकगणित के आधार पर बने महागठबंधन को भी नकार दिया और चुनाव परिणाम के बाद अब सपा-बसपा की राहें भी जुदा हो गई हैं। राज बब्बर ने हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए प्रदेश अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा भी सौंपा था। हालाँकि, कई राज्यों में कॉन्ग्रेस के पदाधिकारियों ने अपना इस्तीफा सौंपा था।

राज बब्बर ने कहा कि जीते हुए 52 कॉन्ग्रेस सांसदों से बातचीत कर यह जानना पड़ेगा कि उनकी रणनीति क्या रही। उन्होंने कहा कि मौका मिलने पर वे इस काम को करेंगे। राज बब्बर ने कहा कि इस हार के मंथन के लिए ऊपर से नीचे तक, सभी को बैठ कर विचार करना पड़ेगा। बब्बर ने कहा कि किसी को दोष देने के बजाए अपनी हार को स्वीकार करना ज्यादा बेहतर है। ये सारी बातें उन्होंने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कही।

100 दिनों में भारत में शुरू हो जाएगा 5G का ट्रायल, BSNL-MTNL को दौड़ में वापस लाएँगे: रविशंकर

भारत में अब ज़ल्द ही 5G इन्टरनेट की सुविधा मिलने लगेगी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसकी पुष्टि की है। भारत जल्द ही 5G के लिए फील्ड ट्रायल शुरू करने वाला है। इस प्रक्रिया को पूरे देश में 100 दिनों के भीतर शुरू किया जाएगा। इसके अलावा 5G की सर्विस के लिए एक मेगा स्पेक्ट्रम ऑक्शन भी होगा। इसमें 5G के अलावा अन्य रेडियो वेव भी शामिल होंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक बार ट्रायल सही से ख़त्म हो जाए, फिर आम जनता के प्रयोग के लिए भी 5G उपलब्ध हो जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि Huwaei कम्पनी के 5G ट्रायल में हिस्सा लेने के बारे में अभी कुछ तय नहीं है और वह इस मामले में गंभीरता से विचार करेंगे। बता दें कि Huwaei और इसकी अन्य सहयोगी कम्पनियों को अमेरिका की ट्रम्प सरकार ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है, जिसके बारे में बात करते हुए प्रसाद ने कहा कि किसी कम्पनी को परीक्षण में भागीदारी लेने की इजाजत देना या नहीं देना सेफ्टी का मुद्दा है। बता दें कि Huwaei टेलीकॉम सेक्टर में 5G की अग्रणी कम्पनी मानी जाती है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने टेलीकॉम फ्रीक्वेंसी के लगभग 8,644 एमएचजेड की नीलामी की सिफारिश की है, जिसमें 5G सर्विस के लिए 4.9 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित क़ीमत है, लेकिन टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि वे क़ीमत का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। केंद्रीय मंत्री प्रसाद को उम्मीद है कि क़ीमत को लेकर टेलीकॉम पर संसद की स्टेंडिंग कमेटी या फाइनेंस कमेटी कोई न कोई समाधान ज़रूर निकाल लेगी।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार 5G का प्रयोग विकासोन्मुखी कार्यों के लिए करने का पूरा प्रयास करेगी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का प्रयोग वंचित वर्गों और ग्रामीणों के हित में होगा। साथ ही उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के जनहितकारी कार्यों के लिए 5G तकनीक का इस्तेमाल करने की बात कही। सरकारी कम्पनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल का जिक्र करते हुए प्रसाद ने कहा कि सरकारी कम्पनियों को वापस प्रतिस्पर्धा में लाना उनका उद्देश्य है। साथ ही उन्होंने इन कम्पनियों को प्रोफेशनल तरीका अपनाने की सलाह भी दी।

पशुओं के अवशेष, गोहत्या का आरोप: UP के बागपत से शाहरुख़, इनाम, कल्लू गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश के बागपत में एक बार फिर से गोहत्या के आरोप का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में शाहरुख़, इनाम, और कल्लू नाम के 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इन तीनों को सोमवार (जून 3, 2019) को बागपत जिले के सिटी कोतवाली थाना अंतर्गत पुराण कस्बा इलाके से गिरफ्तार किया गया। इलाके में गोहत्या के शक और पशुओं के अवशेष मिलने की खबर से तनाव का माहौल पैदा हो गया है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस को पुराना कस्बा इलाके के 3 घरों में पशुओंं के अवशेष रखने की खबर मिली थी, जिसके बाद पुलिस वहाँ पहुँची। यहाँ इन तीनों घरों में ताला लगा हुआ था। जब पुलिस इन घरों के ताले तोड़कर अंदर गई तो वहाँ से 40 पशुओं की खाल, हड्डियाँ और अवशेष बरामद हुए। ये तीनों घर इनाम, शाहरुख और कल्लू के थे। तीनों के घरों से पशुओं के अवशेष मिलने की वजह से इनको हिरासत में लिया गया है। तीनों आरोपितों का कहना है कि वो लोग पशुओं के ये अवशेष मेरठ के बूचड़खानों से लेकर आए हैं और ज्यादा कीमत पर बेचने के लिए स्टोर करके रखा था।

फिलहाल, पुलिस ने इन आरोपितों के ऊपर गोहत्या और पशुओं के साथ क्रूरता से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। सर्किल ऑफिसर ओमपाल सिंह ने बताया कि इन आरोपितों ने पशुओं की खाल को सुरक्षित रखने के लिए केमिकल का प्रयोग किया था। इसके साथ ही उनका कहना है कि बरामद अवशेषों में से अधिकतर खाल भैंसों की है। बागपत के चीफ वेटनरी ऑफिसर डॉक्टर रवींद्र कुमार का कहना है कि बरामद की गई खालों में 7 नई खालें हैं। फिलहाल खालों और हड्डियों के सैंपल लैब में भेज दिए गए हैं। इसके अलावा एक बछड़े का सिर भी बरामद हुआ है। सर्किल ऑफिसर के अनुसार, लैब रिपोर्ट से ही इस बात की पुष्टि हो पाएगी कि इनमें गाय के अवशेष हैं या नहीं।

इस बारे में जब ओमपाल सिंह ने वहाँ के स्थानीय लोगों से बात की, तो उन्होंने बताया कि पिछली सरकार में यहाँ पर पशुओं की कटाई का काम अवैध रुप से जारी था, लेकिन भाजपा सरकार के आने के बाद गैरकानूनी बूचड़खानों पर रोक लगा दी गई, जिसके बाद से ये काम रुक गया। वहीं, भारतीय जनता युवा मोर्चा और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं का आरोप था कि पशुओं की अवैध रूप से कटाई पुलिस की मिलीभगत से हो रही है। हालाँकि, बागपत के एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने आश्वासन देते हुए कहा कि वो इस बात की जाँच करेंगे कि पुलिसवालों को इन गतिविधियों के बारे में जानकारी थी या नहीं।

…तो अच्छा ही है कि अलग-अलग होकर चुनाव लड़ा जाए: मायावती ने लगाया महागठबंधन पर ब्रेक

उत्तर प्रदेश में करारी शिकस्त पाने के बाद महागठबंधन की मजबूती कुछ ही दिनों में कमजोर हो गई है। खबर के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने घोषणा की है कि सपा-बसपा का महागठबंधन आने वाले चुनावों में एक होकर चुनाव नहीं लड़ेगा।

मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान मायावती ने कहा कि फिलहाल राज्य की स्थिति देखते हुए उनके लिए बेहतर है कि उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़े। मायावती के मुताबिक प्रदेश में लोकसभा चुनाव के नतीजों की तस्वीर इस बात का सबूत हैं कि यादव समुदाय के लोगों ने ही पार्टी का साथ नहीं दिया। मायावती का मानना है कि सपा की सबसे मजबूत प्रत्याशी डिंपल यादव तक इन चुनावों में कन्नौज से जीत हासिल नहीं कर पाईं। ऐसी स्थिति में पार्टी बहुजन समाज पार्टी की क्या सहायता कर पाएगी।

हालाँकि, गठबंधन को लेकर दिए स्पष्ट बयान के बाद मायावती ने ये भी कहा कि समाजवादी पार्टी और बसपा के बीच के रिश्तों पर इस फैसले से कोई फर्क़ नहीं पड़ेगा। वो हमेशा अखिलेश यादव के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ता निभाएँगी।

मायावती का कहना है कि अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने उन्हें बहुत इज्जत दी है और उन्होंने भी राष्ट्रहित के लिए अपने मतभेदों को भुलाकर उन्हें सम्मान दिया। बसपा सुप्रीमो का कहना है कि उनका रिश्ता सिर्फ़ राजनैतिक नहीं था, ये आगे भी इसी तरह का रहेगा। लेकिन, इन अच्छे संबंधों के बावजूद वो लोकसभा चुनावों में आए नतीजों को भूल नहीं सकती हैं। इसी वजह से उन्हें अपने फैसले पर दोबारा सोचना पड़ा।

मायावती ने इस बातचीत में ये भी साफ़ किया कि गठबंधन पर लगा ब्रेक स्थायी (पर्मानेंट) नहीं है। अगर उन्हें आने वाले समय में लगेगा कि राजनैतिक कार्यों में सपा अध्यक्ष अच्छा कर रहे हैं, तो वे दोबारा साथ काम करेंगी। लेकिन अगर वो राजनीति में अच्छा काम नहीं कर पाते हैं, तो अच्छा ही है कि अलग-अलग काम किया जाए। इसलिए अभी के लिए उन्होंने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

कलकत्ता यूनिवर्सिटी के कर्मचारी का किया तबादला, ‘जय श्रीराम’ का लगाया था नारा

पश्चिम बंगाल में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाना एक अपराध बन चुका है, जिसके लिए सज़ा भी दी जाती है। ताज़ा मामला कलकत्ता यूनिवर्सिटी का है जहाँ एक कर्मचारी का तबादला सिर्फ़ इसलिए कर दिया गया क्योंकि उसने इंस्टीट्यूट में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाया था। ख़बर के अनुसार, पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी कर्मचारी परिषद ने यह दावा किया है कि कलकत्ता यूनिवर्सिटी अथॉरिटी ने कॉलेज कैंपस के एक कर्मचारी का तबादला मात्र इस बात पर कर दिया क्योंकि उसने ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाया था।

कर्मचारी परिषद ने इस संबंध में विश्वविद्यालय की कुलपति सोनाली चक्रवर्ती बनर्जी को एक प्रतिनियुक्ति सौंपी है। जानकारी के अनुसार, परिषद के सदस्य और नॉन टीचिंग स्टाफ़ प्रॉलोय दत्ता का तबादला स्ट्रीट कैंपस से नादिया ज़िले के हरिंगटा में कर दिया है।

प्रॉलोय दत्ता ने कहा:

‘‘मैं 6 साल से कुलपति के ऑफिस में काम कर रहा था। मैंने काफी लगन से काम किया। कुछ दिन पहले मैंने एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, जिसमें मैंने जय श्रीराम का नारा लगाया था। अब मेरा तबादला हरिंगटा कर दिया गया है, जो मेरे घर से काफी दूर है। कुलपति को अपने कर्मचारी का तबादला करने का पूरा अधिकार है, लेकिन मैंने कोई क्राइम नहीं किया है। मैंने उनसे अनुरोध भी किया था कि मेरा तबादला कैंपस के पास ही कर दिया जाए।’’

इस मामले की ख़बर जब पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी कर्मचारी परिषद तक पहुँची तो उन्होंने इसकी कड़ी निंदा करते हुए 31 मई को यूनिवर्सिटी परिसर में ही विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने महँगाई भत्ते की मंज़ूरी की माँग भी उठाई। विरोध-प्रदर्शन में ‘जय श्रीराम’ के नारे भी जमकर लगाए गए। पश्चिम बंगाल में ‘जय श्रीराम’ नारे को लेकर हर दिन बवाल होता रहता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को यह नारा इतना नागवार गुज़रता है कि वो नारा लगाने वालों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई तक का निर्देश दे डालती हैं।

‘जय श्रीराम’ नारे को लेकर ममता बनर्जी की तिलमिलाहट आए दिन उजागर होती रहती है। हद तो तब हो गई जब ममता सरकार ने ख़ुफ़िया एजेंसियों को उन स्थानों का पता लगाने का आदेश दिया, जहाँ ममता बनर्जी को देखकर ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए जाते हैं।

कार्ल मार्क्स के जीवन का राज़: नौकरानी हेलेन, अवैध संबंध और बेटा फ्रेड्रिक – जिसे पूरी दुनिया से छिपाया गया

14 मार्च, 1883 को कार्ल मार्क्स इस दुनिया को अलविदा कह गए। कुछ वर्षों बाद उनकी मौत को 150 वर्ष हो जाएँगे लेकिन आज भी उनके बात-विचार वामपंथ के अनुयायियों में नई उर्जा और जोश का संचार करते हैं। हालाँकि गौर से देखेंगे-पढ़ेंगे तो वैज्ञानिक समाजवाद की परिभाषा देने वाले मार्क्स विभिन्न वर्गों के बीच संघर्ष के कपटी सिद्धांत के पैगम्बर मात्र थे। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो उन्हें आर्थिक समतावाद का जनक मानते हैं। ऐसे में कार्ल मार्क्स की जिंदगी के बारे में बहुत कम चीजें ही हैं, जिनके बारे में लिखा-सुना गया हो, अन्यथा उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में बहुत कम ही लोगों को पता है। ग़रीबी और संताप्त्ता से पीड़ित मार्क्स एक मिथ्यावादी और अव्यावहारिक व्यक्ति थे, जो पूरी दुनिया पर अपने विचार थोपना चाहते थे।

उन्हें लगता था कि दुनिया उनके विचारों से प्रभावित नहीं हो रही है, इसीलिए वह लगातार पहचान पाने के लिए लालायित रहते थे। मार्क्स के जीवन का एक ऐसा राज़ भी है, जिसे छिपाने की उन्होंने भरपूर कोशिश की और वह उसमें सफल भी हुए, लेकिन उनकी मौत के बाद कई लोगों को इस विषय के बारे में पता चला। मार्क्स के घर में लम्बे समय तक काम करने वाली हेलेन देमुथ से उसका अवैध सम्बन्ध था और दोनों को एक बेटा भी हुआ था, जिसका नाम था- फ्रेड्रिक देमुथ। अपनी सार्वजनिक छवि को बिगड़ने और शादी को टूटने से बचाने के लिए मार्क्स ने बड़ी चालाकी से अपने इस कृत्य को छिपाने के लिए एक योजना तैयार की थी।

मार्क्स ने इसके लिए अपने दोस्त फ्रेड्रिक एंजेल्स की मदद ली थी, जिसने उस बच्चे के पिता होने का दावा किया और हेलेन देमुथ ने इस बात की सार्वजनिक पुष्टि की। इस तरह से मार्क्स और हेलन का बेटा अब एंजेल्स और हेलेन का बेटा हो गया। 40 वर्षों तक इस राज़ को कोई और नहीं जान पाया। 1895 में जब एंजेल्स मृत्युशैया पर थे, तब उन्होंने मार्क्स की बेटी इलिनर मार्क्स को यह बात बताई। इलिनर यह बात सुन कर सन्न रह गई। हालाँकि, मार्क्स की संतानों में तब तक 2 ही बचे थे, और 3 वर्षों बाद इलिनर ने भी आत्महत्या कर ली। इसी तरह 1911 में मार्क्स की एक अन्य बेटी लौरा ने भी आत्महत्या कर ली।

इस तरह अकेलेपन से पीड़ित फ्रेडिक देमुथ एक उपेक्षित बच्चे के रूप में बड़ा हुआ। मार्क्स उसके लिए कुछ नहीं कर सके। मार्क्स गुज़र-बसर के लिए एंजेल्स पर निर्भर थे और वह कभी-कभी कुछ रुपए-पैसे भी भेज दिया करते थे। ऐसे में मार्क्स और एंजेल्स, दोनों ने ही फ्रेडिक देमुथ से दूरी बना ली। मार्क्स कभी उसे देखने भी नहीं जाते थे, जिस कारण फ्रेडिक देमुथ की शिक्षा-दीक्षा अच्छे से नहीं हो पाई। वो जिंदगी भर मजदूर और कल-पूर्जे बनाने वाला काम करता रहा।

मार्क्स और एंजेल्स दोनों ने अपनी संपत्तियों में से कुछ भी फ्रेडिक देमुथ के लिए नहीं छोड़ा था हालाँकि मार्क्स की बेटियों ने अपनी संपत्ति में से कुछ रुपए फ्रेडी को दिए थे। आखिरकार 1929 में 78 वर्ष की उम्र में फ्रेडिक देमुथ की मृत्यु हुई, लंदन की एक ग़रीब बस्ती में – वो भी इस विश्वास के साथ कि वो फ्रेडिक एंजेल्स का बेटा है, ऐसा बेटा जो नालायक है, दुष्ट है, नकारा है। मार्क्स के अलावा जीवन भर हेलेन और एंजेल्स ही थे, जो इस राज़ को जानते थे। किसी और को इस राज़ के बारे में भनक तक नहीं लगी।

मार्क्स के अनुयायी फ्रेड्रिक देमुथ का जिक्र तक नहीं करते, जैसे इस विषय को दूर से देखना भी उनके लिए एक महापाप हो। मार्क्स के इस ‘नैतिक’ रवैये को छिपाकर उनका जो महिमामंडन किया गया है, आखिर वामपंथी उसे कैसे मिटने दे सकते हैं! आखिर मार्क्स भी ब्रिटेन के अन्य लोगों की तरह ही थे, वैसे ही विचार रखते थे, जो चीजें सबको डराती थीं, वो मार्क्स के लिए भी डरावनी थीं। तभी तो मार्क्स के मरने के बाद एंजेल्स ने उन सारी चिट्ठियों को भी लापता कर दिया, जिसमें फ्रेड्रिक देमुथ का जिक्र था।

(यह लेख ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के एक लेख पर आधारित है, जो जनवरी 14, 1983 को प्रकाशित किया गया था।)