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राजीव गाँधी मरते समय PM थे, सीताराम केसरी अध्यक्ष नहीं: कॉन्ग्रेस अपनी वेबसाइट से फैला रही फेक न्यूज़

परिवारवाद में कॉन्ग्रेस किस कदर डूबी है, इसकी बानगी तो राहुल गाँधी के पैरों में गिरकर उनसे अध्यक्ष पद न छोड़ने की पार्टी की चिरौरी से ही दिख गई थी। लेकिन अब पार्टी परिवार की मुराद में इतना डूब गई है कि इतिहास को भी बदलने पर आमादा है। राजीव गाँधी को पार्टी की वेबसाइट पर मरते समय भारत का तत्कालीन प्रधानमंत्री बताया गया है जबकि सच्चाई यह है कि उस समय भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हुआ करते थे। इसके अलावा पार्टी की वेबसाइट पर पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी को पार्टी के अध्यक्षों की सूची से भी हटा दिया गया है।

राहुल गाँधी की जीवनी में बताया राजीव को तत्कालीन प्रधानमंत्री

अपने (नि?)वर्तमान अध्यक्ष और राजीव गाँधी के बेटे राहुल गाँधी की पार्टी वेबसाइट पर प्रकाशित जीवनी में कॉन्ग्रेस ने लिखा है कि अपनी मृत्यु के समय (21 मई, 1991 को) राहुल के पिता राजीव गाँधी भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री थे। यह पूरी तरह गलत है। राजीव की हत्या के समय उनकी सरकार न केवल जा चुकी थी बल्कि उसके बाद प्रधानमंत्री बनने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह की भी सरकार गिर कर चंद्रशेखर की सरकार आ गई थी, जिसे पहले तो राजीव गाँधी का ही समर्थन जिलाए हुए था, और बाद में राजीव गाँधी ने समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद देश में नई लोकसभा के निर्वाचन की प्रक्रिया चल रही थी। उसी दौरान प्रचार करते हुए राजीव गाँधी की लिट्टे के दहशतगर्दों ने हत्या कर दी थी

राफेल-राफेल का झूठा राग गाने वाले राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस भी उतनी ही झूठी निकली

और ऐसा भी नहीं है कि यह कोई टाइपिंग की गलती, क्लेरिकल मिस्टेक या तथ्यों की ग़लतफ़हमी हो- क्योंकि ऐसा कुछ तो केवल एक बार हो सकता है, बार-बार नहीं। जबकि कॉन्ग्रेस की वेबसाइट पर एक बार नहीं बल्कि दो बार राजीव गाँधी को उनकी हत्या के समय भारत का तत्कालीन प्रधानमंत्री बताया गया है।

न खाता न बही, कॉन्ग्रेस से केसरी की याद मिटी

कॉन्ग्रेस में सीताराम केसरी का 1996 से 1998 तक कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष होना आज गाँधी परिवार की आँखों में चाहे जितना खटके मगर यह एक ऐतिहासिक तथ्य है- उतना ही जितना कि यह कि सोनिया गाँधी को पार्टी अध्यक्षा बनाने के लिए 14 मार्च 1998 को केसरी को एक कमरे में बंद कर एक तरह से जबरदस्ती, गुंडागर्दी का सहारा लिया गया था। और अब कॉन्ग्रेस इस आँखों के काँटे को मिटा कर तारीख बदलने की कोशिश कर रही है।

पार्टी के 1990 के बाद के अध्यक्षों की सूची में से सीताराम केसरी का नाम गायब है।

दोनों घटनाएँ संयोग, या कुछ और?

इन दोनों घटनाओं का इतने आस-पास होना, वह भी उस समय जब कॉन्ग्रेस और देश में ‘गाँधी’ उपनाम की महत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न हैं, महज संयोग है? या फिर कॉन्ग्रेस के इतिहास से (और भारत के भी इतिहास से) गाँधी के इतर चरित्रों को आधिकारिक तौर पर हटाने की कोशिश? यह तो तय है कि कॉन्ग्रेस की वेबसाइट पर राजीव गाँधी के कार्यकाल का ‘विस्तार’ कर दिए जाने से न इस देश का इतिहास पुनर्लिखित कर वीपी सिंह और चंद्रशेखर को भुला दिया जाएगा, न ही सीताराम केसरी को बाकी पार्टियाँ और देश मिटा देगा। लेकिन क्या इससे यह संदेश दिए जाने की कोशिश हो रही है कि “गाँधी इज़ कॉन्ग्रेस, कॉन्ग्रेस इज़ गाँधी”? क्या कॉन्ग्रेस अपने कैडर में राहुल गाँधी के हटने की उम्मीद में महत्वाकांक्षा पाले क्षत्रपों (शशि थरूर लोकसभा में कॉन्ग्रेस के मुखिया बनने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं करण थापर को इंटरव्यू में) को यह संदेश दे रही है कि कॉन्ग्रेस के लिए नेहरू-गाँधी-वाड्रा परिवार इतना जरूरी है कि उसे बनाए रखने के लिए पार्टी इतिहास पुनर्लिखित भी करेगी, अगर जरूरी हुआ- इसलिए क्षत्रप सब्जबाग न पालें…

किशोर कुमार की पत्नी और बीते जमाने की एक्ट्रेस-सिंगर का निधन हो गया, क्या आप उन्हें जानते हैं?

आज सुबह ही मशहूर गायक किशोर कुमार की पूर्व पत्नी और गुजरे जमाने की बंगाली एक्ट्रेस-सिंगर का निधन हो गया, जिनका नाम था रूमा गुहा ठाकुरता। उनकी उम्र 84 साल थी। सोमवार (जून 03, 2019) सुबह कोलकाता के बालीगंगे स्थित अपने घर पर उन्होंने अंतिम साँस ली। आज शाम कोलकाता में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। रूमा, किशोर कुमार की पहली पत्नी थीं। उनकी शादी 1950 में हुई थी और करीब 8 साल बाद दोनों का तलाक हो गया था। सिंगर अमित कुमार (66) रूमा और किशोर के बेटे हैं।

जानी-मानी एक्ट्रेस-सिंगर रूमा गुहा ठाकुरता कुछ दिन पहले ही अपने बालीगंगे प्लेस वाले घर से कोलकाता लौटी थीं। किशोर कुमार की पहली पत्नी रूमा अपने बेटे अमित कुमार से मिलने के लिए मुंबई आई थीं और करीब तीन महीने रुकी थीं। कहा जाता है कि रूमा बुढ़ापे में होने वाली तकलीफों से काफी परेशान थीं।

1944 में हिंदी फिल्म ‘ज्वार-भाटा’ से किया था बॉलीवुड डेब्यू

रूमा गुहा ने साल 1944 में हिंदी फिल्म ‘ज्वार-भाटा’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने बंगाली फिल्मों की ओर रुख कर लिया था। रूमा ने ‘एंटोनी फिरंगी’, ‘गंगा ओभीजान’, ‘बालिका वधू’ और ‘अभिजान’ समेत कई बंगाली फिल्मों में काम भी किया। इसके अलावा वह 36 Chowringhee Lane और The Namesake जैसी हॉलीवुड फिल्मों का भी हिस्सा रह चुकी हैं। एक्टिंग के अलावा रूमा ने प्लेबैक सिंगिंग से भी खूब नाम कमाया था। साल 1958 में रूमा ने कोलकाता यूथ क्वायर (Calcutta Youth Choir) नाम की संस्था बनाई, जो उभरते हुए सिंगर्स को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है।

1960 में हुआ था किशोर कुमार और रूमा गुहा का तलाक

रूमा गुहा मशहूर गायक और कलाकार किशोर कुमार की पहली पत्नी थीं। किशोर कुमार और रूमा गुहा ने साल 1951 में शादी रचाई थी। दोनों का एक बेटा अमित कुमार है, वो भी गायक हैं। हालाँकि, साल 1960 में किशोर कुमार और रूमा गुहा ने एक-दूसरे से तलाक ले लिया था। किशोर से तलाक के बाद रूमा ने अरूप गुहा ठाकुरता से शादी रचाई थी। दोनों की एक बेटी श्रोमोना गुहा ठाकुरता है।

PM मोदी के नाम से ‘लैपटॉप योजना’ चलाने वाला निकला IITian, हुआ गिरफ्तार

पुलिस ने राजस्थान से 23 वर्षीय राकेश जांगिड़ नाम के एक आईआईटी ग्रेजुएट युवक को गिरफ्तार किया है। युवक पर आरोप है कि वो नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाकर एक फर्जी वेबसाइट चलाता था। साथ ही व्हॉट्सएप के जरिए लोगों को बताता था कि मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद एक नई योजना आई है, जिसमें फ्री लैपटॉप बाँटे जाएँगे।

राकेश इन संदेशों में मेक इन इंडिया का लोगो और प्रधानमंत्री की फोटो भी भेजता था, ताकि संदेश की प्रमाणिकता पर संदेह न हो। आरोपित लोगों से इस वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए कहता था, जिससे साइट पर अधिक से अधिक ट्रैफिक आ सके।

23 साल का राकेश राजस्थान में नागौर जिले के पुंदलोता का निवासी है। 2019 में IIT दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद आरोपित अपनी फर्जी वेबसाइट (www.modi-laptop.wishguruji.com) के जरिए लोगों को हैदराबाद में नौकरी का ऑफर देकर ठगता था। जाँच के मुताबिक पिछले 2 दिन में इस फर्जीवाड़े के चलते उसकी वेबसाइट पर 15 लाख से अधिक लोगों ने नौकरी के लिए पंजीकरण किया है।

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक साइबर क्राइम ब्राँच के वरिष्ठ अधिकारी ने मामले पर जानकारी देते हुए बताया है कि आरोपित को उसके घर से गिरफ्तार किया गया है। अधिकारी का कहना है कि संजय बड़ी होशियारी से गूगल एडसेंस का प्रयोग करता था। फिलहाल इस बात की जाँच चल रही है कि इस आईआईटी की पढ़ाई किए युवक ने और किन-किन योजनाओं के नाम पर फर्जीवाड़ा किया है।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता की हत्या में AIMIM नेता तौफ़ीक शेख गिरफ़्तार

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता रेशमा पेडकानुर की हत्या मामले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता तौफ़ीक शेख उर्फ़ पिलवान को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। फ़िलहाल, मामले की जाँच अभी जारी है।

ख़बर के अनुसार, तौफ़ीक शेख को ज़िले के धुलकेड़ गाँव के पास से हिरासत में लिया गया। उस पर रेशमा
पेडकानुर की हत्या का आरोप है। आरोपित को पकड़ने के लिए ऑपरेशन बसावन बागेवाड़ी पुलिस सर्कल इंस्पेक्टर, महादेव शिरहट्टी के नेतृत्व में किया गया था।

रेशमा के पति खाजा बंदे नवाज़ ने तौफ़ीक शेख के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी। हत्या का यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत दर्ज किया गया था। इसकी जाँच के लिए पुलिस ने दो टीमों का गठन किया था, जिनमें से एक बसावना बागेवाड़ी के पुलिस उपाधीक्षक महेश्वर गौड़ा और दूसरी विजयापुर के पुलिस उपाधीक्षक अशोक के नेतृत्व में थी। पुलिस सूत्रों का मानना ​​है कि तौफीक समेत छह लोग इस हत्या में शामिल थे।

दरअसल, कर्नाटक की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया था जब गुरुवार (16 मई) दोपहर से लापता चल रहीं कॉन्ग्रेस नेता रेशमा पेडकानुर की लाश विजयपुरा के कोल्हर गाँव में कृष्णा नदी के किनारे जंगलों में शुक्रवार (17 मई) को सुबह क़रीब छह बजे मिली थी। विजयपुरा ज़िले की रहने वाली रेशमा पहले जेडीएस में थीं। कॉन्ग्रेस नेता के परिवार वालों का कहना है कि आख़िरी बार उन्हें गुरुवार दोपहर में AIMIM के नेता तौफ़ीक के साथ देखा गया था, रेशमा के पति ने भी तौफ़ीक पर ही शक़ ज़ाहिर किया था। इसके अलावा तौफ़ीक और रेशमा के बीच किसी ज़मीन के विवाद का भी ख़ुलासा हुआ था।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में रेशमा नेे जेडीएस के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। 2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट ना मिलने के बाद वो कॉन्ग्रेस में चली गई थीं और तभी से रेशमा कॉन्ग्रेस में सक्रिय थीं।

सूरत अग्निकांड: मृत छात्रा के नाम पर परोसा जा रहा झूठ, जबरदस्ती घुसेड़ा जा रहा जय शाह का नाम

सूरत फायर ट्रेजेडी को लेकर तरह-तरह की अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। जहाँ सरकार और सिस्टम से सवाल पूछे जाने चाहिए, वहाँ अपना ख़ुद का प्रोपेगेंडा चलाने की कोशिश की जा रही है। फेसबुक पर गौरव ज़िब्बू नामक व्यक्ति ने बिना सबूत बहुत सारे लम्बे-चौड़े दावे किए हैं, जिसका दूर-दूर तक सत्य से कोई लेना-देना नहीं है। पहले हम इस पूरे मामले को समझते हैं और फिर हम झूठ की परत दर परत बखिया उधेड़ेंगे।

कुछ दिनों पहले गुजरात के सूरत स्थित तक्षशिला कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग में 22 स्टूडेंट्स की मौत हो गई थी। इसके बाद हरकत में आई राज्य सरकार ने पूरे गुजरात में 9395 भवनों को चिन्हित करके उनके मालिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। ये सभी अग्नि सुरक्षा मानक पर खरे नहीं उतरे।

सूरत अग्निकांड को लेकर फैलाया जा रहा झूठ

गौरव ज़िब्बू ने लिखा कि सूरत अग्निकांड में मृत छात्रा पंचानी के पिता ने सरकार द्वारा दी जा रही 4 लाख रुपए की मुआवजा राशि लेने से मना कर दिया है। उसने दावा किया है कि लड़की के पिता ने कहा कि फायर ब्रिगेड को इन रुपयों की ज्यादा ज़रूरत है और वे अपनी तरफ से 4 लाख रुपए ‘रेस्क्यू लैडर’ खरीदने के लिए अग्निशमन विभाग को देना चाहते हैं। कई अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में भी ये बात कही गई। एशियन एज और डेक्कन क्रॉनिकल जैसे मीडिया संस्थानों से लेकर ट्विटर व फेसबुक पर अन्य लोगों ने भी इस झूठ को आगे बढ़ाने का काम किया।

बड़े मीडिया संस्थानों ने भी झूठ फैलाया

जब एक मीडिया पोर्टल ने मृत छात्रा हैप्पी पंचानी के परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही इन बातों को अफवाह करार दिया। पंचानी के चाचा ने कहा कि ऐसी झूठी बातें एक स्थानीय अख़बार के कारण शुरू हुई। पंचानी के चाचा ने इन अफवाहों को नकारते हुए कहा कि न हैप्पी के पिता ने ऐसा कोई निवेदन किया है न उसके परिवार से किसी और ने मुआवजा न लेने की बात कही है। परिवार ने अफवाह फ़ैलाने वालों से निवेदन भी किया कि ऐसे पोस्ट शेयर न किए जाएँ, वायरल न किए जाएँ, इससे उन्हें समस्या है।

वायरल पोस्ट में और भी कई दावे किए गए हैं। इसमें एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) नंबर भी दिया है और कहा गया है कि ये आरटीआई उनके दावे की पुष्टि करते हैं। लेकिन, गौरव ज़िब्बू द्वारा दिया गया आरटीआई नंबर अपूर्ण है और उसके द्वारा किसी तरह की जानकारी नहीं निकाली जा सकती। इसके अलावा यह भी दावा किया गया है कि अग्निशमन विभाग के संसाधनों को ख़रीदने का कॉन्ट्रैक्ट 2005 में अमित शाह के बेटे जय शाह को दे दिया गया जबकि अमित शाह की शादी ही 1987 में हुई थी।

गौरव ज़िब्बू की फेसबुक पोस्ट, जिसमें किए गए हैं झूठे दावे

इस हिसाब से आप 2005 में जय शाह की उम्र का अंदाजा लगा सकते हैं। जय शाह का जन्म अगर 1988 में हुआ हो, तब भी 2005 में वो नाबालिग ही रहे होंगे। अर्थात, ज़िब्बू व अन्य वायरल पोस्ट्स का मानना है कि एक नाबालिग लड़के को करोड़ों का महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट दे दिया गया। इसके अलावा यह भी दावा किया गया है कि अग्निशमन विभाग की ट्रकों को अडानी ग्रुप को बेच दिया गया। यह सोचा जा सकता है कि बिलियन डॉलर नेट वर्थ वाली इतनी बड़ी कम्पनी क्या 5 लाख में सेकेण्ड हैण्ड ट्रक खरीदेगी? इसके अलावा लेख में सूरत के लोगों पर भाजपा को वोट देने के लिए भी तंज कसा गया है।

कुल मिलाकर देखें तो अपूर्ण आरटीआई नंबर, नाबालिग जय शाह को करोड़ों का प्रोजेक्ट, अडानी ग्रुप जैसी बड़ी कम्पनी द्वारा सेकेण्ड हैण्ड ट्रक खरीदना, हैप्पी पंचानी के परिवार द्वारा मुआवजा न लेने की बात करना- इस पोस्ट में कई सारे झूठ हैं, विसंगतियाँ हैं और ये पूरा का पूरा एक प्रोपेगेंडा है। हास्यास्पद यह कि बड़े-बड़े मीडिया हाउस भी बिना जाँच-पड़ताल किए ही इस खबर को चला रहे हैं और एक तरह से इस प्रोपेगेंडा को हवा दे रहे हैं।

NSA अजीत डोभाल को मिलेगा कैबिनेट मंत्री का दर्जा, बने रहेंगे NSA

देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Advisor ) अजीत डोभाल को केंद्र सरकार से बड़ा तोहफा मिला है। सरकार ने अजीत डोभाल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही अजीत डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी बने रहेंगे।

अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा क्षेत्र में उनके अच्छे काम के लिए मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है। उनकी नियुक्ति पाँच साल के लिए हुई है। NSA अजीत डोभाल की गिनती देश के सबसे ताकतवार नौकरशाहों में होती है।

मई 30, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को देश के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया था। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें NSA के अलावा रणनीतिक नीति समूह (स्ट्रैटिजिक पॉलिसी ग्रुप, SPG) का सचिव भी बनाया गया था। पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक अजीत डोभाल की निगरानी में ही हुई थी। उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी जानकारी दी थी। वह पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी सबसे ज्यादा चर्चा में आए थे।

सितंबर 2016 में पीओके में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक में भी अजीत डोभाल की बड़ी भूमिका रही थी। उन्होंने इस मिशन से पहले सेना के तीनों चीफ और खुफिया एजेंसियों के हेड के साथ आखिरी मीटिंग ली थी। मीटिंग में तय हुआ था कि मिशन के तहत एलओसी के उस पार आठ आतंकी कैंपों पर हमला किया जाएगा।

DTC बसों, Cluster बसों व Metro में महिलाओं के लिए यात्रा निःशुल्क: केजरीवाल की बड़ी घोषणा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली की बसों व मेट्रो में महिलाओं की यात्रा मुफ्त करने का निर्णय लिया है। केजरीवाल ने कहा कि सभी डीटीसी बस, क्लस्टर बस और मेट्रो ट्रेन में महिलाओं को मुफ्त में यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी ताकि वे ख़ुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। केजरीवाल ने कहा कि इस निर्णय से महिलाओं को यात्रा के लिए अपना मनपसंद माध्यम चुनने की स्वतन्त्रता मिलेगी, जो वे ज्यादा यात्रा शुल्क होने की वजह से नहीं कर पा रही थीं। अरविन्द केजरीवाल ने कहा:

“किसी भी प्रकार की सब्सिडी थोपी नहीं जाएगी। कई सारी ऐसी महिलाएँ हैं जो इन यात्रा माध्यमों का प्रयोग कर सकती हैं। जो सक्षम हैं, वे टिकट ख़रीद कर यात्रा कर सकती हैं, उन्हें सब्सिडी की ज़रूरत नहीं है। हम उन महिलाओं को प्रोत्साहित करेंगे, जो टिकट ख़रीद कर यात्रा करने में सक्षम हैं क्योंकि इससे बाकियों को मदद मिलेगी।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए कहा:

“आम परिवारों की बेटियाँ जब कॉलेज के लिए निकलती हैं, महिलाएँ नौकरी के लिए निकलती हैं तो लोगों का दिल धक-धक करता रहता है। उनकी सुरक्षा की चिंता बनी रहती है। उसको ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी डीटीसी बसों, मेट्रो और क्लस्टर बसों में महिलाओं का किराया फ्री किया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि महिलाएँ ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकें। “

विशेष अदालत ने वाड्रा को दी विदेश जाने की छूट, ED ने पूछा ‘अगर वह लौटे ही नहीं तो?’

सीबीआई की विशेष अदालत ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को इलाज कराने के लिए विदेश जाने की अनुमति दे दी है। विवादित कारोबारी वाड्रा को मेडिकल ट्रीटमेंट हेतु 6 सप्ताह के लिए विदेश जाने की अनुमति दी गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के विरोध के बावजूद विशेष अदालत ने वाड्रा को ये अनुमति दे दी। ईडी ने वाड्रा की उस याचिका का विरोध किया, जिसमें उन्होंने मेडिकल आधार पर ब्रिटेन सहित अन्य देशों की यात्रा की अनुमति माँगी थी। वाड्रा ने 29 मई को हुई पिछली सुनवाई में अदालत को बताया था कि सर गंगा राम अस्पताल के अनुसार ‘उनकी बड़ी आँत में एक छोटा ट्यूमर है’।

ईडी ने कहा कि वाड्रा जानबूझ कर लन्दन जाना चाहते हैं क्योंकि वहाँ इस मामले से जुडी कई चीजें हैं। अदालत ने यह भी कहा कि वाड्रा के ख़िलाफ़ जारी किया गया ‘लुक आउट सर्कुलर’ भी इस अवधि के दौरान लागू नहीं होगा। इससे पहले वाड्रा से सरकारी जाँच एजेंसियों द्वारा 7 घंटे तक पूछताछ की गई थी। वाड्रा पर विदेश में संपत्ति अर्जित कर उसका विवरण छिपाने और टैक्स से बचने का आरोप है।

हालाँकि, कोर्ट ने वाड्रा को नीदरलैंड और अमेरिका जाने की अनुमति तो दे दी लेकिन लन्दन जाने की अनुमति नहीं दी क्योंकि उनकी लन्दन की संपत्ति को लेकर ही मामला चल रहा है और वह वहाँ जाकर जाँच में गड़बड़ी कर सकते हैं। वहीं ईडी ने याचिका पर विरोध जताते हुए अदालत को बताया था कि मामले की जांच बेहद गंभीर पड़ाव पर है और ऐसा हो सकता है कि वाड्रा लंदन से लौटे ही नहीं?

इसके अलावा सरकारी एजेंसी ने वाड्रा द्वारा साक्ष्य से छेड़छाड़ करने की भी आशंका जताई है। वाड्रा पर बीकानेर में जमीन खरीद में अनियमितता और दिल्ली एनसीआर में जमीन हथियाने सहित कई मामले चल रहे हैं, जिसमें उनसे पूछताछ होती रहती है। शुक्रवार को भी उन्हें समन जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने अपनी जगह वकीलों को भेज दिया। वाड्रा के विदेश जाने की ख़बर सामने आते ही सोशल मीडिया यूजरों ने पूछा कि कहीं अगर वो विदेश से लौटते ही नहीं हैं, तो क्या होगा?

रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी याचिका में कहा था कि उनकी बड़ी आँत में ट्यूमर है। उन्होंने इसकी पुष्‍ट‍ि के लिए सर गंगाराम अस्पताल का एक प्रमाण पत्र भी अदालत में दाखिल किया था। याचिका में कहा गया था कि डॉक्टर ने दूसरा सुझाव लेने की सलाह दी है। उन्होंने दलील दी थी कि वह चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए विदेश जाना चाहते हैं। ईडी ने अदालत के सामने गंभीर मसला उठाते हुए सम्भावना जताई थी कि ऐसा हो सकता है कि वाड्रा विदेश से लौटे ही नहीं।

BJP विधायक ने NCP की नेता को लात-घूँसों से पीटा, Video वायरल

गुजरात के नरोदा में भाजपा विधायक बलराम थावनी ने पानी कनेक्शन को लेकर शिकायत करने पहुँची एनसीपी की नेता नीतू तेजस्विनी के साथ मारपीट की। ये पूरा वाकया कैमरे में कैद हुआ और इसका वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एनसीपी नेता ने बताया है कि शिकायत का समाधान करने की बजाय विधायक और उसके सहयोगियों ने उनके साथ बदतमीजी की और बीच सड़क पर गिराकर उन्हें खूब पीटा। उन्हें लात, घूसे, थप्पड़ मारे गए। उनके चेहरे पर जूता रख दिया गया। इस दौरान वे चीखती-चिल्लाती रहीं, मगर वहाँ मौजूद किसी शख्स को उसपर रहम नहीं आया। नीतू का कहना है कि उनके साथ-साथ उसके पति को भी पीटा गया है।

वीडियो वायरल होने बाद सोशल मीडिया पर लोग बलराम की खूब आलोचना कर रहे हैं। बलराम की तुलना गुंडे से की जा रही है। कॉन्ग्रेस ने आरोपित विधायक के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई की माँग की है। विपक्षी पार्टी ने माँग की है कि भाजपा विधायक की तुरंत सदस्यता खत्म की जाए। इसके अलावा वड़गाम से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने भी विधायक की गिरफ्तारी की माँग की है।

अपनी वाहियात हरकत पर बलराम ने सफाई देते हुए बयान दिया है कि ऐसा उन्होंने जानबूझकर नहीं किया है। विधायक का कहना है कि वो 22 सालों से राजनीति में हैं इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार ली है और एनसीपी नेता से माफ़ी माँगने की भी बात की है। लेकिन, सोशल मीडिया यूजर्स की नाराज़ प्रतिक्रिया को देखकर लग रहा है कि अब बलराम के ऐसे बयान से उन्हें जनता माफ़ नहीं करने वाली है।

आतंक से लड़ने के नाम पर 50 हज़ार निर्दोषों को मार चुकी है पाकिस्तानी फ़ौज

पाकिस्तान में आतंकवाद से निपटने के नाम पर आम नागरिकों के मानवाधिकारों के हनन की ख़बर सामने आती रहती हैं। अमेरिका में 9/11 आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ‘वॉर ऑन टैरर’ के दौरान हज़ारों निर्दोष नागरिक मारे जा चुके हैं। पाकिस्तान के सैनिकों और विद्रोहियों के आपसी युद्ध में यातना देने और मारने के सबूत अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।

ख़बर के अनुसार, इस बात की पुष्टि सरकारी आंकड़े तो नहीं करते, लेकिन स्वतंत्र शोध संगठनों, स्थानीय अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के आँकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि 2002 से अब तक कम से कम 50 हज़ार लोग के इस लड़ाई में मारे गए हैं और 50 लाख से अधिक के बेघर होकर इधर-उधर भटकने को मजबूर हुए हैं।

एक ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जनवरी, 2014 की शुरुआत में अफ़गान सीमा के क़रीबी उत्तरी वजीरिस्तान के कबीलाई क्षेत्र के हमजोनी एरिया में रात को हुए हवाई हमले में पाकिस्तानी तालिबान के सबसे बड़े कमांडर अदनान राशीद और उसके पाँच परिजनों के मारे जाने का दावा पाक सेना ने किया।

पाकिस्तानी एयरफोर्स का पूर्व तकनीशियन रशीद उस समय चर्चा में आया था, जब उसने एक स्कूली लड़की मलाला यूसुफ़जई को पत्र लिखा था। नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला को 2012 में एक तालिबानी हमलावर ने सिर में गोली मार दी थी। पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर हमला की कोशिश के आरोप में जेल में बंद रह चुके रशीद ने पत्र में मलाला को गोली मारने का कारण समझाने की कोशिश की थी।

ख़बर में यह भी कहा गया है कि एक ही साल बाद रशीद ने एक वीडियो में पेश होकर पाकिस्तानी सेना के दावे को झूठा करार दिया था। उस समय यह बात सामने आई थी कि पाकिस्तानी सेना के विमान ने रशीद के ठिकाने के बजाय दो घर छोड़कर एक निर्दोष परिवार पर बम गिरा दिया था। इस परिवार में जिन लोगों की मृत्यु हुई थी उनमें एक तीन साल की बच्ची भी थी। पाक सेना ने अब तक अपनी इस ग़लती को नहीं स्वीकार किया।

पाक सेना ने वजीरीस्तान क्षेत्र में मानवाधिकार के हनन और यातना व आतंकी झड़पों के कारण मारे जाने वाले निर्दोष नागरिकों का आंकड़ा कभी पेश नहीं किया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तो यहाँ तक दावा किया कि इन मामलों के सबूत जुटाने वालों को भी पाक सेना मार देती है। पश्तून तहाफुज मूवमेंट (पीटीएम) के 13 कार्यकर्ताओं की 26 मई को हुई मौत इसका उदाहरण है। इनकी मौत उस समय हुई थी, जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे संगठन के लोगों पर सेना की तरफ से हमले का आरोप लगाकर सीधी फायरिंग कर दी थी। साथ ही पीटीएम के दोनों संस्थापकों को भी गिरफ़्तार कर लिया गया था।