कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें खत्म होतीं नजर नहीं आ रही हैं। लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद गाँधी परिवार को एक और झटका लग सकता है, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रॉबर्ट वाड्रा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। खबर के मुताबिक, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में रॉबर्ट वाड्रा की जमानत रद्द करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गौरतलब है कि इस मामले में एक ट्रायल कोर्ट ने 1 अप्रैल को अग्रिम जमानत दी थी।
Enforcement Directorate (ED) approaches Delhi High Court seeking bail cancellation of Robert Vadra in a money laundering case. A trial court had recently granted him anticipatory bail. pic.twitter.com/QZftuXK1VE
मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी रॉबर्ट वाड्रा ने हाल ही में विदेश जाने की अनुमति लेने के लिए दिल्ली की एक अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका डाली थी। अदालत में वाड्रा के वकील ने अनुरोध किया था कि उनकी सुरक्षा के चलते यात्रा कार्यक्रम किसी से साझा न किया जाए।
कोर्ट ने वाड्रा को 1 अप्रैल 2019 को कई शर्तें लगाते हुए उन्हें अग्रिम जमानत दी थी और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाने की बात कही थी। रॉबर्ट वाड्रा लंदन के 12 ब्रायंस्टन स्क्वायर में 19 लाख पाउंड कीमत की संपत्ति की खरीद को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार का ठीकरा ईवीएम के सिर फोड़ा है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल भाजपा ने चुनाव को ईवीएम के जरिए हाईजैक कर लिया है और ये चुनाव परिणाम जनता के गले नहीं उतर रहा। मायावती के अनुसार जनता ने भाजपा और प्रधानमंत्री की गलत नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ी थी, लेकिन जो परिणाम आया, वह जनभावना व जन अपेक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है।
बसपा प्रमुख का कहना है कि ईवीएम से चुनाव कराने की इस व्यवस्था में कई कमियों के बारे में उनको जानकारी मिली है और शायद यही वजह है कि देश भर में ईवीएम का विरोध हो रहा है। मायावती ने गुरुवार (मई 23, 2019) को देर शाम मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद जनता का ईवीएम पर से विश्वास ही खत्म हो जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि जब अधिकतर राजनीतिक पार्टियाँ बैलट पेपर से चुनाव कराने की माँग कर रही हैं, तो इसमें चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी को आपत्ति क्यों हो रही है? सुप्रीम कोर्ट को भी इस ओर गंभीरतापूर्वक सोच-विचार करना चाहिए। वहीं, उन्होंने यूपी में कुछ सीटों पर गठबंधन को मिली जीत को भाजपा की सोची समझी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने ऐसा इसलिए किया है, ताकि चुनाव पूरी तरह से प्रभावित नजर न आए और कोई सवाल न उठा सके।
मायावती ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव व रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने गठबंधन के सभी प्रत्याशियों को जिताने की कोशिश की, लेकिन पार्टी की मेहनत के अनुरुप परिणाम न आने की तकलीफ है। इसके साथ ही उन्होंने गठबंधन के तीनों दलों के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, नेताओं, सांसदों व विधायकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि बसपा, सपा और रालोद के साथ अन्य पीड़ित पार्टियाँ मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगी और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर से प्रेरणा लेकर संघर्ष जारी रखेंगी।
साल 2014 में जब यह बात सामने आई थी कि अमेठी सीट से राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ स्मृति ईरानी चुनावी मैदान में उतरेंगी तो एक सवाल के जवाब में प्रियंका गाँधी ने पूछा था, “स्मृति ईरानी…कौन हैं?” यह वाकया एक रोड शो के दौरान हुआ था जब वो अपने भाई राहुल गाँधी के लिए चुनाव प्रचार कर रही थीं।
Reporter: Ma’am Smriti Irani has hit back at you again… Priyanka Gandhi: Who? pic.twitter.com/vRCn5ubjp2
आज लोकसभा निर्वाचन में स्मृति ईरानी की प्रचंड जीत के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो ट्रेंड कर रहा है। राहुल गाँधी के अमेठी में चुनाव के कड़े मुक़ाबले में हारने के बाद प्रियंका गाँधी की “स्मृति ईरानी…कौन हैं?” वाली टिप्पणी कॉन्ग्रेस पर काफ़ी भारी पड़ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रियंका के मसखरे अंदाज़ का जवाब ईरानी ने अपनी जीत सुनिश्चित करके दिया है। मतलब साफ़ है कि ईरानी ने कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी को हराकर यह दिखा दिया कि देश में लोकतंत्र की व्यवस्था है न कि राजवंश की।
Every historic election has totems in public memory of how countries change. In this historic victory of @narendramodi I was watching RG concede defeat to @smritiirani in Amethi and I remembered this ‘Smriti, who?’ video. Story of how India changed. https://t.co/gF9Ftl8HDE
लोग स्मृति ईरानी की जीत की सराहना कर रहे हैं और साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी पर कटाक्ष भी कर रहे हैं। प्रियंका गाँधी अक्सर ईरानी पर यह आरोप लगाती थी कि वो एक बाहरी व्यक्ति हैं और उन्हें अमेठी के मतदाताओं की कोई परवाह नहीं है। उनके इन बेबुनियादी आरोपों का जवाब, राहुल को न चुनकर अमेठी की जनता ने ख़ुद ही दे दिया।
In 2014 at Amethi, Priyanka Gandhi Vadra laughed & responded “Smriti, who?” on being asked about Smriti Irani by a reporter. Hope she has got her answer by now. #लोकतंत्र_का_त्योहार
कॉन्ग्रेस ने अपने गढ़ अमेठी की सीट पर इतिहास भी रचे हैं। सोनिया गाँधी ने जब 1999 में इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था तब उन्होंने भाजपा के संजय सिंह को 48.07% के स्पष्ट अंतर से हराया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में, राहुल गाँधी ने स्मृति ईरानी को 1.07 लाख वोटों के अंतर से हराया था, लेकिन मार्जिन का प्रतिशत पहले से बेहद कम होकर 12.33% रह गया था। 2009 में राहुल गाँधी ने भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह को 3.70 लाख से अधिक मतों के अंतर से हराकर अमेठी में जीत हासिल की थी।
भारतीय राजनीति में इसे ऐतिहासिक घटना के रूप में दर्ज किया जाएगा, जब गाँधी परिवार को उसके गढ़ में शिकस्त का सामना करना पड़ा। इससे पहले सोशलिस्ट पार्टी के नेता राजनारायण ने स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को 1977 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली से हराया था।
पिछले महीने उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में आए नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने घोषणा की थी कि अगर लोकसभा 2019 में अमेठी से राहुल गाँधी हार जाएँगे तो सिद्धू राजनीति से सन्यास ले लेंगे। अब चूँकि तस्वीर पूरी तरह साफ़ हो चुकी है और स्मृति ईरानी को हर जगह से जीत की बधाइयाँ मिल रही हैं, और राहुल गाँधी खुद अपनी हार स्वीकार चुके हैं तो सोशल मीडिया यूजर्स सिद्धू से उनसे इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।
Rahul Gandhi concedes defeat in Amethi. Congratulates Smriti Irani. Time for Navjot Singh Sidhu to quit politics. Let’s see who follows his word and who turns out to be a liar now. We can totally imagine Captain Amrinder Singh laughing away all the way! pic.twitter.com/8T58YKaBjV
सिद्धू के एक महीने पुराने बयान को प्रासंगिक बनाया जा रहा है। ट्विटर पर लोग इंतजार कर रहे हैं कि सिद्धू अपने बयान पर कायम रह पाएँगे या नहीं। कुछ का कहना है कि अब सिद्धू राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंंट्री में वापस चले जाएँगे। तो, कुछ के मुताबिक अब कैप्टन अमरिंदर सिंह को नवजोत सिंह सिद्धू से राहत मिलने वाली है। ट्विटर पर यूजर्स का कहना है कि सिद्धू को केवल कॉमेडी शो को जज करना चाहिए, राजनीति उनके बस की बात नहीं हैं।
I am 200 % Siddhu ji will quit politics & join ICC WORLD CUP commentary team ..& will cheer for India. .
गौरतलब है 23 मई को चुनाव परिणाम साफ़ होने के बाद स्मृति ईरानी को हर ओर से बधाइयाँ मिल रही है। राहुल गाँधी ने खुद स्मृति ईरानी को संदेश देते हुए कहा कि अमेठी से स्मृति ईरानी ने जीत हासिल की है। वो चाहते हैं कि स्मृति ईरानी प्यार से अमेठी की जनता का ख्याल रखेंं। बता दें राहुल गाँधी लगातार तीन बार से अमेठी में जीत रहे थे लेकिन इन लोकसभा चुनाव में स्मृति ने उन्हें बड़ी टक्कर दी और वहाँ से जीत दर्ज कराई।
चुनाव परिणाम आने के बाद लगभग सभी राजनैतिक दलों की स्थितियाँ साफ़ हो चुकी हैं। एक ओर जहाँ लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज की है वहीं कुछ राजनैतिक पार्टियाँ ऐसी भी हैं जो खाता तक नहीं खोल पाईं। बिहार में तेजस्वी यादव की नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल का कुछ यही हाल हुआ है। 17वें लोकसभा चुनाव में आरजेडी के हिस्से में एक भी सीट नहीं आई।
बिहार में आरजेडी कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करके मैदान में उतरी थी। पार्टी ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट पर जीत नहीं दर्ज कर पाई जबकि कॉन्ग्रेस 9 सीटों पर मैदान में उतरी थी और पार्टी को बिहार में 1 सीट मिली।
Lok Sabha polls: In a first, RJD draws a blank in Bihar
आरजेडी का गठन 1997 में हुआ था। पार्टी ने पहला चुनाव 1998 में लड़ा था तब बिहार में उन्हें 17 सीट मिली थी। इसके बाद 2014 में पार्टी को बिहार में 27 सीटें मिलीं लेकिन 2019 में आरजेडी शून्य पर ही सिमटी रह गई। कॉन्ग्रेस और आरेजेडी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली राष्ट्रीय लोक समता दल और हिंदू आवाम मोर्चा भी अपना खाता नहीं खोल पाई।
वहीं दूसरी ओर भाजपा-जेडीयू-एलजीपी के गठबंधन ने बिहार में ऐतिहासिक जीत हासिल की। भाजपा को बिहार में 17 सीटें मिलीं, जेडीयू को 16 सीटें और राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति दल को 6 सीटें मिली हैं। इस गठबंधन ने बिहार में 37 सीटें जीती हैं।
लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे सामने आने शुरू हुए तो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की पुश्तैनी सीट अमेठी भी हाथ से निकल गई, जो हमेशा से कॉन्ग्रेस का गढ़ रही है। भाजपा की फायरब्रांड नेता और स्टार प्रचारक स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को यहाँ से हरा दिया। राहुल गाँधी की इस अप्रत्याशित हार से कॉन्ग्रेस का विश्वास डगमगा गया है। खबर के अनुसार, हार के बाद राहुल गाँधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का भी प्रस्ताव रखा। हालाँकि पार्टी प्रवक्ता सुरजेवाला ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के इस्तीफे की बात को गलत बताया। वहीं जब राहुल गाँधी से हार की जिम्मेदारी को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा ये उनके और कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी के बीच की बात है।
CWC to meet tomorrow after humiliating defeat in Lok Sabha polls
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में शनिवार (मई 25, 2019) को कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक होगी। जिसमें पार्टी की हार की वजहों पर चर्चा करने करने के साथ ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर किसी बड़े फैसले की भी उम्मीद की जा रही है।
Reports of Congress President Rahul Gandhi offering resignation are incorrect, says Randeep Singh Surjewala. When asked on fixing responsibility for loss, Rahul Gandhi said, “This is between my party and I. Between me and the Congress CWC.” #ElectionResults2019pic.twitter.com/vaTGPNCz7a
हालाँकि मतगणना अभी जारी है, लेकिन अभी तक की गिनती के अनुसार एनडीए को 303 सीटें मिलती दिख रही हैं। भाजपा ने 298 सीटों पर जीत हासिल कर ली है। फिलहाल भाजपा 4 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं कॉन्ग्रेस 52 सीटों पर ही सिमट गई है। पार्टी की हार स्वीकार करते हुए राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पीएम मोदी को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने अमेठी से स्मृति ईरानी की जीत पर भी बधाई देते हुए अमेठी की जनता का भरोसा कायम रखने की बात कही।
कॉन्ग्रेस 21 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में खाता खोलने में भी विफल रही है। मोदी लहर में कॉन्ग्रेस के कई दिग्गज चारों खाने चित हो गए। भोपाल से साध्वी प्रज्ञा ने दिग्विजय सिंह को पटखनी दी। दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को पटना साहिब से हार का सामना करना पड़ा। भाजपा कई राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में धमाकेदार प्रदर्शन करती दिख रही है। ताज़ा रुझानों के अनुसार, पूर्ण बहुमत से आगे निकल चुकी भाजपा ने 300 सीटों का आँकड़ा भी छू लिया है। राहुल गाँधी अमेठी हार चुके हैं। उन्हें स्मृति ईरानी ने पटखनी दी। जिन राज्यों/UT में कॉन्ग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई है, उनके नाम हैं:
गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, ओडिशा, असम, आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, दादर नगर हवेली, अंडमान निकोबार, दमन दीव, लक्षद्वीप, त्रिपुरा।
जम्मू और कश्मीर के त्राल में सुरक्षा बलों ने अंसार गज़वातुल हिन्द के आतंकी सरगना और हिज्बुल ‘पोस्टर बॉय’ बुरहान वानी के ‘उत्तराधिकारी’ माने जाने वाले ज़ाकिर मूसा को मार गिराया है। यह अभी कुछ देर पहले की ही घटना है।
BREAKING: Wanted terrorist Zakir Musa killed in encounter in Tral a short while ago. He was Burhan Wani’s successor. pic.twitter.com/vbEuAYqDpB
ददसारा गाँव में हुए एनकाउंटर में सेना की 42वीं राष्ट्रीय राइफल, एसओजी और सीआरपीएफ ने रिपोर्टों के मुताबिक गाँव को शाम से ही घेर लिया था। उन्हें आतंकी सरगना के वहाँ होने की गुप्त सूचना मिली थी। जॉइंट टीम ने पहले तो मूसा को आत्मसमर्पण के लिए मनाने की कोशिश की। लेकिन उसने सैनिकों पर ग्रेनेडों से हमला कर दिया।
देश में मोदी लहर के रुझान के बाद आदर्श लिबरल गिरोह और पत्रकारिता के समुदाय विशेष के बीच डर का माहौल देखने को मिला है। EVM हैक होने की ख़बरों से भी खुद को और अपने जैसे ही अन्य लगभग लिबरल्स को हौसला दिला पाने में नाकाम रहे मीडिया गिरोह प्रमुखों ने आखिरकार एक बड़ा फैसला लिया है।
मीडिया गिरोह प्रमुखों ने चुनाव नतीजों के इकतरफा होने के कारण देश में होती लोकतंत्र की हत्या को देखकर कमर कसने का फैसला लिया और तुरंत एक उच्चस्तरीय आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में रुझान देखकर बदहवास हालात में यहाँ-वहाँ एक-दूसरे को चूंटियाँ काटकर यकीन दिलाते आदर्श लिबरल को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले लिए गए हैं।
बिकाऊ मीडिया और बिक चुकी संस्थाओं में यकीन ना करने वाले कॉन्ग्रेस के पार्टी प्रवक्ता कुणाल कामरा फैन क्लब ने चुनाव के नतीजों का फैक्ट चेक करने का फैसला लिया है और इस फैक्ट चेक का ठेका उन्होंने MEME और फेकिंग न्यूज़ की ख़बरों का फैक्ट चेक कर के जीवनयापन करने वाले विश्वस्तरीय फैक्ट चेकर्स को देने का निर्णय लिया है। फ्री-ड्रिंकर और चिड़ियाघर के भालू नाम के इन दो कुख्यात फैक्ट चेकर्स की जोड़ी का सोशल मीडिया पर बहुत क्रेज है। कई लोगों का तो यहाँ तक मानना है कि दंत कथाओं में जिन अतापि-वतापि भाइयों का जिक्र मिलता है ये दोनों उन्हीं का पुनर्जन्म है।
सोशल मीडिया पर लोगों की जासूसी करने वाले इस फैक्ट चेक गिरोह ने आदर्श लिबरल्स की भावनाओं को 2 कौड़ी का भाव देते हुए तत्परता से चुनाव के वास्तविक रुझान का फैक्ट चेक करने की जिम्मेदारी अपने कन्धों पर ली है। चूँकि इन चुनावी नतीजों के बाद ही आदर्श लिबरल्स अपने नेता को स्वीकारेंगे, इसलिए इस बड़ी जिम्मेदारी को निभाने के लिए सॉल्ट न्यूज़ ने हिटलर के अंग विशेष की नाप छाप करने वाले मीडिया के नाम पर संक्रामक रोग की भी मदद माँगी है। हालाँकि, एग्जिट पोल के दिन से ही नरेंद्र मोदी की यात्रा और गुफा वाली तस्वीरों को छोड़कर इस संक्रामक मीडिया गिरोह की एक टुटपुँजिया टुकड़ी को गोभी के पत्तों में कीड़े होने की जाँच करते हुए देखा गया है। नाम न बताने की शर्त पर कुछ सूत्रों ने बताया है कि आज चुनाव के नतीजों के बाद ‘छी खल्लनखोट’ नामक यह मीडिया गिरोह अपने नाम के आगे ‘चौकीदार दी खल्लनखोट’ लगाने पर भी विचार कर रहा है।
नहीं, फैक्ट चेक में नहीं नजर आई कोई मोदी लहर
सॉल्ट न्यूज़ ने फैक्ट चेक करने के बाद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आदर्श लिबरल गिरोह और क्रांति के चितेरों में यह देख कर उत्साह का माहौल है। मीडिया गिरोह के कुलपति ने यह चौंकाने वाला फैक्ट चेक सुनते ही खुद को रोक नहीं पाए और अपने विशेष शो में तुरंत नागिन डाँस कर के दिखा दिया। उन्होंने इसके बाद स्पष्टीकरण दिया कि जिस प्रकार बनारस में किए गए सर्वे में नरेंद्र मोदी जी द्वारा किए गए कार्यों को वो नहीं मानते हैं, उसी प्रकार चुनाव आयोग और गोदी मीडिया द्वारा दिखाए जा रहे चुनाव के नतीजों को वो नहीं मानते हैं।
आदर्श लिबरल्स ने भी तुरंत ट्रोलाचार्य निष्पक्ष पत्रकार द्वारा दिए गए ‘इनपुट’ को लोल सलाम करते हुए साथी-शपथ ली कि अब वो भी उसी चुनावी नतीजों को मानेंगे, जो सॉल्ट न्यूज़ द्वारा प्रमाणित है। इसी बीच आदर्श लिबरल्स को ख़ुशी से झूमता देख सॉल्ट न्यूज़ के अतापि-वतापि ब्रदर्स ने लगे हाथ चुपके से 2 और MEME के फैक्ट चेक कर के उन्हें पढ़वाकर शाम को अपनी दुकान बढ़ाई।
वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष ने इन नतीजों के बाद अपनी ख़ुशी प्रकट करने से खुद को नहीं रोक पाई और उन्होंने बेहद सुंदर शब्दों में दिल्ली के नागरिकों की हालत पर ट्वीट करते हुए बताया कि सॉल्ट न्यूज़ के नतीजों के बाद दिल्ली में बहुत ही सुंदर माहौल है, लोग एक-दूसरे को गले लगा रहे हैं। और उम्मीद जताई है कि यह चलता रहे।
Incredible! Delhi feels like one big happy family this morning. Strangers smiling at each other, morning walkers hugging. Hope it lasts 🙂
चुनावी नतीजे लगभग सामने आ चुके हैं अब सिर्फ़ औपचारिक घोषणा बाकी है। ऐसे में विपक्ष को समर्थन देने वाले लोग स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। स्वरा भास्कर उन्हीं लोगों में शामिल हैं जिन्होंने भाजपा को सत्ता से हटाने से लिए विपक्षी नेताओ के लिए कैंपेनिंग की थी। लेकिन मोदी लहर के आगे उनका जलवा नहीं चल पाया। वो सभी कैंडिडेट्स रुझानों में भाजपा नेताओं से पिछड़ते नजर आए, जिनकी कैम्पेनिंग करने के लिए स्वरा ने नए साड़ी ब्लाउज़ लिए थे। रुझानों के आने के साथ स्वरा को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया जा रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स के मुताबिक स्वरा सभी के लिए ‘पनौती’ साबित हुई हैं।
दरअसल स्वरा भास्कर ने आप उम्मीदवार आतिशी मार्लेना, दिलीप सिंह, राघव चड्ढा को समर्थन दिया था लेकिन इनमें से कोई भी दिल्ली में अपनी जीत हासिल नहीं कर पाया। इसके अलावा उन्होंने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह, सीपीएम उम्मीदवार आमरा राम और सीपीआई प्रत्याशी कन्हैया कुमार का प्रचार करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए।
स्वरा, कन्हैया कुमार के चुनावी प्रचार के लिए बेगुसराय तक गई थीं। उन्होंने वहाँ अपने भाषण के दौरान ‘जय हिंद, जय भीम, लाल सलाम’ का नारा तक लगाया था, लेकिन अफसोस उन्हें बेगुसराय में इसका कोई फायदा नहीं दिखा। रुझानों के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह उन्हें 2 लाख वोटों से मात दे रहे हैं।
स्वरा भास्कर ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के लिए जम कर प्रचार किया था लेकिन साध्वी प्रज्ञा के आगे उनका जादू नहीं चल पाया। 1 लाख से ज्यादा वोटों का अंतर से साध्वी प्रज्ञा रुझानों में लीड कर रही हैं और लगातार आगे बढ़ी हुई हैं। उन्होंने आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा के लिए भी चुनावी रैली की थी लेकिन राघव को भी जबरदस्त तरीके से शिकस्त खानी पड़ी है। इसके साथ ही आतिशी भी गौतम गंभीर से हारती नजर आई और दिलीप सिंह अपनी जीत दर्ज नहीं करवा पाए।
बता दें कि स्वरा के ट्विटर पर ट्रोल होने के बाद उन्होंने एक ट्वीट किया है। जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर चुनाव सिर्फ़ इसी बात पर था कि स्वरा ने कितनों को समर्थन दिया तो वो बता दें कि उन्होंने 6 प्रत्याशियों को समर्थन दिया है।