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‘लाडले’ को बचाने के लिए ठीकरा कहाँ-कहाँ फोड़ा जाएगा? Exit Polls के बाद गिरोह तैयार

अगर सारे एग्जिट पोल्स की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ राजग की सरकार बनने जा रही है। एग्जिट पोल को जहाँ विपक्ष एक महज अनुमान बता रहा है, मीडिया के गिरोह विशेष इसको लेकर दो फाड़ हो गए हैं। जहाँ मीडिया का एक धड़ा भाजपा के कथित प्रोपेगेंडे पर विश्वास करने को लेकर जनता को ही गालियाँ देने में लगा हुआ है, वहीं दूसरा धड़ा कॉन्ग्रेस को कड़ी टक्कर न देने के लिए घेर रहा है। उसे अपनों से ही शिकायत है क्योंकि कॉन्ग्रेस ने ‘उस तरह से’ लड़ाई नहीं लड़ी, ‘जिस तरह से’ गिरोह विशेष चाहता था। एग्जिट पोल्स तो आ गए लेकिन मीडिया के गिरोह विशेष के साथ-साथ विपक्ष की तरफ़ से भी कुछ रुझान आ रहे हैं, जिसके आधार पर हम ये तय करने में सक्षम हैं कि इनकी नज़र में हार का कारण क्या होगा।

जैसा कि हमें पता है, मीडिया का गिरोह विशेष और विपक्ष कभी भी मोदी लहर को स्वीकार नहीं करेगा। ये लोग न तो प्रधानमंत्री की लोकप्रियता को मानने को तैयार होंगे और न ही भाजपा की कुशल रणनीतिक व राजनीतिक क्षमता को स्वीकार करेंगे। ईवीएम को लेकर रोना चालू होगा, मणिशंकर अय्यर और सैम पित्रोदा पर बिल फाड़े जाएँगे, मीडिया के उस धड़े को मोदी से ‘कड़े सवाल’ न पूछने के लिए गालियाँ दी जाएँगी और विपक्ष को एकता बनाए रखने में विफल रहने के लिए भी ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा। कुल मिलकर देखें तो पीएम मोदी और भाजपा की प्रशंसा करना छोड़ कर सारी चीजों को मोदी की जीत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा।

ईवीएम का रोना चालू आहे

ईवीएम को लेकर विपक्ष का रोना तो तभी चालू हो गया था, जब चुनाव शुरू भी नहीं हुए थे। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग से लेकर जनता तक, विपक्ष ने ईवीएम का बहाना लेकर हर संस्था के बीच अपनी बात रखने की कोशिश की। इनके इस कुप्रचार अभियान से लग रहा था, इस बात का पूरा प्रयास किया गया कि ईवीएम को भाजपा व संघ का कार्यकर्ता ही क्यों न घोषित कर दिया जाए। लंदन में नकाबपोश से प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाई गई। तरह-तरह के बहाने लेकर कभी ब्लूटूथ वाई-फाई से ईवीएम हैक करने की बात कही गई। लेकिन अंततः, सुप्रीम कोर्ट से भी इन्हें भाव नहीं मिला। कोर्ट ने प्रति विधानसभा 5 बुथों पर वीवीपैट पर्चियों के मिलान का निर्देश देते हुए विपक्ष की माँग को नकार दिया। चुनाव आयोग पहले भी कहता रहा है कि किसी मशीन में कुछ गड़बड़ियाँ आ जाना और उसे हैक कर लेना, ये दो अलग-अलग चीजें हैं।

आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ईवीएम के विरोध में ख़ासी मुखर हैं। दोनों ही अपने-अपने राज्यों को अपना अभेद्द किला मानते थे, और एग्जिट पोल्स के हिसाब से इन दोनों ही राज्यों में इनका किला ध्वस्त होने की कगार पर है। एग्जिट पोल्स के हिसाब से नायडू और रेड्डी में से कोई भी आंध्र का मुख्यमंत्री बन सकता है और जगनमोहन रेड्डी नाकाम भी रहे तो आंध्र की अच्छी-ख़ासी लोकसभा सीटों को जीत कर नायडू के किंगमेकर बनने के सपने को तो ध्वस्त करते दिख ही रहे हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव भी साथ में ही संपन्न हुए हैं। वहीं बंगाल में वाम के अप्रासंगिक होने के बाद ममता बनर्जी के गढ़ में भाजपा बड़ी ताक़त बन कर उभरी है और कुछ एग्जिट पोल्स में भाजपा को तृणमूल से भी आगे दिखाया गया।

ईवीएम को लेकर सबसे ज्यादा चिंता में वही लोग हैं, जहाँ राष्ट्रीय मीडिया में ख़बरें फ़िल्टर होकर आती हैं। बंगाल में मीडिया के लोगों कोई ही पिटाई की जाती है, आंध्र में नायडू अधिकतम सीटें जीत कर किंगमेकर बनना चाहते थे। तभी उन्होंने पिछले 2 दिनों में अध्यक्ष राहुल गाँधी से मुलाक़ात की। ईवीएम को लेकर वही परेशान हैं, जिनके दिवास्वप्न धराशायी हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी भी ईवीएम के विरोध में ख़ासी मुखर है क्योंकि पार्टी के लिए लोकसभा में अस्तित्व का संकट आ खड़ा हुआ है। एग्जिट पोल्स में पंजाब और दिल्ली में उसे शून्य से 1 सीट दी जा रही है, यानी पार्टी के लिए इस बार खाता खोलना भी मुश्किल है।

मणिशंकर और पित्रोदा पर बिल फाड़ा जाएगा

बुधवार (मई 15,2019) को झारखण्ड के देवघर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक रैली हुई। इस रैली में प्रधानमंत्री ने सैम पित्रोदा और मणिशंकर अय्यर के बयानों को लेकर दोनों ही नेताओं को घेरा। जहाँ अय्यर ने मोदी की नक़ल करते हुए कैमरे के सामने अजीब तरीके से व्यवहार किया वहीं पित्रोदा ने 1984 सिख नरसंहार को लेकर ‘हुआ तो हुआ’ कहा। मोदी ने इस रैली में कहा,

विपक्षी पार्टी ने नामदार को बचाने के लिए दो बल्लेबाज खड़े किए हैं। पार्टी ने चुनाव में ख़राब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेने का काम इन दोनों को सौंपा है। एक 1984 के सिख विरोधी दंगों पर कहता है ‘हुआ तो हुआ’ जबकि दूसरा, गुजरात चुनाव के दौरान मुझे अपशब्द कहने के बाद से पर्दे के पीछे थे। वह अब फिर से मुझ पर हमला कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान के पीछे भाव यह था कि हार की ज़िम्मेदारी राहुल गाँधी को न लेनी पड़े, इसके लिए इन दोनों नेताओं पर ठीकरा फोड़ा जाएगा। अगर ऐसी स्थिति आती है कि राहुल गाँधी को हार की जरा सी भी ज़िम्मेदारी लेनी पड़े (जो कि उन्हें लेनी चाहिए क्योंकि उन्होंने 125 रैलियाँ की हैं), इस स्थिति से बचने के लिए मीडिया का राहुल प्रशंसक धरा और कॉन्ग्रेस पार्टी अय्यर और पित्रोदा को बलि का बकरा बना सकते हैं। कुल मिलाकर कोशिश यह की जाएगी कि राहुल गाँधी पर कोई ऊँगली न उठे और अगले कुछ महीनों में अगर किसी यूनिवर्सिटी चुनाव में कॉन्ग्रेस को थोड़ी-बहुत सीटें आ जाती हैं तो इसे राहुल की वापसी या कमबैक की तरह प्रचारित किया जा सके।

और, यह कार्य करेंगे कौन? साधारण पंचायत और वार्ड चुनाव में भाजपा की हार के लिए सीधे मोदी को ज़िम्मेदार ठहराने वाले कॉन्ग्रेस की हार के लिए उसके अध्यक्ष को ज़िम्मेदार नहीं मानेंगे, भले ही उन्होंने 125 रैलियाँ की हो। अगर इतने बड़े स्तर पर दौरा करने के बावजूद भी उन्हें वोट नहीं मिलते हैं तो ये नहीं कहा जाएगा कि जनता के बीच उनकी अस्वीकार्यता है, इसे भी पित्रोदा और अय्यर के पल्ले डाल दिया जाएगा। मीडिया भी यही कहेगी कि इनके बयानों से कॉन्ग्रेस को नुकसान हुआ है। अगर इन दोनों नेताओं के बयानों से पार्टी को कुछ सीटों का नुकसान हुआ भी है तो बड़े स्तर पर हुए नुकसान की ज़िम्मेदारी किसकी? नहीं, पार्टी अध्यक्ष की नहीं।

मीडिया ने भाजपा की मदद की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे चुनाव के दौरान कई मीडिया एजेंसियों व सस्थानों को साक्षात्कार दिए। साल की शुरुआत ही एएनआई को दिए गए उनके साक्षात्कार से हुई। इतने सारे इंटरव्यू के अलावा उनका एक ग़ैर-राजनीतिक इंटरव्यू अभिनेता अक्षय कुमार ने भी लिया। क्या किसी को विश्वास हो सकता है कि क़रीब 20 मीडिया संस्थानों ने प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लिया हो, और उनसे कड़े सवाल न पूछे गए हों? हिंदुस्तान और नवभारत टाइम्स जैसे अख़बारों से लेकर एबीपी न्यूज़ और न्यूज़ नेशन जैसे टीवी न्यूज़ चैनलों तक, तमान मीडिया संस्थानों ने पीएम के इंटरव्यू लिए और राफेल से लेकर साध्वी प्रज्ञा तक, उनसे हर एक विवाद से लेकर आरोपों तक पर सवाल पूछे गए।

राफेल पर सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बावजूद पीएम से सवाल पूछे गए। साध्वी प्रज्ञा के विवादित बयान को लेकर उनसे पूछा गया। विपक्ष के तमाम आरोपों को लेकर उन पर सवालों की बौछाड़ की गई लेकिन रवीश कुमार जैसे कुछ पत्रकार और लिबरल ‘कड़े सवाल-कड़े सवाल’ का रोना रोते रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किस तरह के सवाल पूछे जाने चाहिए थे, ये किसी ने स्पष्ट नहीं किया। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी तक तमाम नेता मीडिया के सवालों का जवाब देने के लिए मुस्तैद दिखे, करण थापर सरीखों ने गडकरी से कथित ‘मॉब लिंचिंग’ पर सवाल भी पूछे, फिर भी गिरोह विशेष को शिकायत है।

कारण स्पष्ट है। कॉन्ग्रेस की बुरी हार हो रही है और अगर पार्टी को रेस में बने रहना है तो राहुल गाँधी को मीडिया का लाडला बनाए रखना होगा, उन्हें लिबरलों का संरक्षण मिलते रहना चाहिए। अगर नहीं, तो इस गिरोह के लिए कोई अन्य नेता है कहाँ? अरविन्द केजरीवाल तमाम ‘क्रान्तिकारी’ इंटरव्यू और प्रचार के बावजूद लोकसभा में अपनी पार्टी के अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। गिरोह विशेष दूसरा लाडला लाए भी तो कहाँ से लाए? लाडले को बचाने के लिए हार के अजीब-अजीब कारण गिनाए जाएँगे लेकिन राहुल की ‘इमेज’ पर आँच न आए, इसका ध्यान रखा जाएगा। मोदी की तारीफ़ तो भला करनी ही नहीं है, चाहे उन्हें कितनी ही बड़ी जीत क्यों न मिले।

’22 दिन भी टिकना मुश्किल, MP में अल्पमत में है कमलनाथ सरकार, राज्यपाल बुलाएँ विशेष सत्र’

लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है और अब परिणाम का इंतजार है। कल (19 मई) को जहाँ सभी एग्जिट पोल में एनडीए को बहुमत से भी अधिक सीटें मिलने का अनुमान है वहीं कॉन्ग्रेस की हालत पतली दिख रही है।

इसी बीच मध्य प्रदेश से खबर आ रही है कि वहाँ नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की माँग की है। मध्य प्रदेश में भाजपा विपक्ष में है और भार्गव के अनुसार कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ चुकी है।

भार्गव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “एग्जिट पोल के अनुसार एक बार फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस को दो से तीन सीटें मिलने वाली हैं, यह इस बात का संकेत है कि मध्य प्रदेश में वर्तमान सरकार ने जनता का भरोसा खो दिया है।”

भार्गव ने यह भी कहा कि भाजपा कॉन्ग्रेस के विधायकों को खरीदने नहीं जा रही है बल्कि उन्होंने दावा किया कि बहुत से कॉन्ग्रेसी विधायक कमलनाथ से परेशान हो चुके हैं इसलिए वो भाजपा में आना चाहते हैं। इसीलिए उनकी माँग है कि विधान सभा का विशेष सत्र बुलाकर कमलनाथ को सदन में बहुमत साबित करने को कहा जाए।

इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय कह चुके हैं कि 23 मई को चुनाव के नतीजे आने के बाद कमलनाथ सरकार 22 दिन भी रह पाएगी इसमें संदेह है। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में 114 सीटों के साथ कॉन्ग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। निर्दलीय, सपा और बसपा के समर्थन से कॉन्ग्रेस ने सरकार बनाई थी और सिख दंगों के आरोपी कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया था। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम आने के बाद गोपाल भार्गव के दावों में कितनी सच्चाई है यह देखना होगा।

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन से चंदा लेने वाले जिग्नेश मेवाणी ने फैलाई फेक न्यूज़, लपेटा PM मोदी को भी

वडगाम के ‘निर्दलीय’ विधायक और कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्ट समर्थक जिग्नेश मेवानी आज (20 मई को) दोपहर सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलाते पकड़े गए। किसी बच्चे की निर्मम पिटाई के वीडियो को पहले तो उन्होंने गुजरात के वलसाड स्थित RMVM स्कूल का बताते हुए शेयर किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल को टैग कर मोदी को लपेटने की कोशिश की और कुछ देर बाद खुद ही लोगों से पूछते नजर आए कि वीडियो हिंदुस्तान का है भी या मिस्र (ईजिप्ट) का है।

वीडियो की जाँच किए बिना शेयर करना जनप्रतिनिधि की गरिमा से नीचे

जिग्नेश मेवानी ने वीडियो शेयर करते हुए पहले लिखा, “मुझे यह संदेश मिला, ‘आप के whatsapp पे जितने भी नंबर एवं ग्रुप हैं एक भी छूटने नहीं चाहिए, ये वीडियो सबको भेजिए ये वलसाड के RMVM SCHOOL का टीचर है, इसको इतना शेयर करो कि ये टीचर और स्कूल दोनों बंद हो जाए।’ @PMOIndia, कृपया हमें बताइए यह क्या हो रहा है।” यानी उन्होंने वीडियो की सत्यता का अप्रत्यक्ष दावा करते हुए सवाल पूछा।

उसके बाद लोगों ने उनके ट्वीट के जवाब में कृत्य की भर्त्सना तो की, पर वीडियो के भारत के होने पर सवाल उठा दिए।

तब अपनी बढ़ती आलोचना पर खिसिया कर जिग्नेश मेवानी ने अपने आरोप और दावे आधे-अधूरे तौर पर वापिस लेते हुए ट्वीट कर पूछा कि यह वीडियो गुजरात की है या इजिप्ट की? विधायक साहब! अगर आपको पता ही नहीं है तो फिर देश के पीएम को संबोधित करते हुए सवाल क्यों दाग दिए थे पिछली ट्वीट में?

हमारी जाँच में पता चला कि इसी स्कूल के नाम से एक बार पहले भी पिछले साल फेक न्यूज़ फ़ैलाने की कोशिश हो चुकी है। उस समय लल्लनटॉप और ऑल्ट न्यूज़ ने इसका फैक्ट चेक कर इसे फर्जी करार दिया था। ऐसे में सवाल यह है कि अपने ही राज्य में फेक न्यूज़ और दुष्प्रचार के पहले भी शिकार हो चुके एक स्कूल के खिलाफ कुछ शेयर करने से पहले एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मेवानी ने खुद जाँच क्यों नहीं की? या एक्ज़िट पोल के नतीजों से वह इतने सदमे में चले गए हैं कि विधायक की गरिमा और जिम्मेदारी से अब उन्हें कोई वास्ता नहीं बचा है?

आपको याद दिला दें कि जिग्नेश मेवानी ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठन से चंदा लेकर राजनीति की पारी शुरू की थी।

अक्षय कुमार की फिल्म ‘Laxmmi Bomb’ से डायरेक्टर हुए अलग, बोला – आत्मसम्मान के लिए!

शनिवार (मई 18, 2019) को अक्षय कुमार की फिल्म ‘लक्ष्मी बम’ का पोस्टर रिलीज किया गया और इसके रिलीज होने के कुछ घंटे बाद ही फिल्म के निर्देशक राघव लॉरेंस ने फिल्म छोड़ने का ऐलान करके सबको चौंका दिया। राघव ने इस फैसले के पीछे कुछ वजह बताई हैं। हालाँकि उन्होंने ये साफ कर दिया है कि उन्हें अक्षय कुमार से कोई दिक्कत नहीं है।

राघव ने फिल्म लक्ष्मी बम को छोड़ने का ऐलान ट्विटर के माध्यम से किया। उन्होंने ट्विटर पर एक नोट लिखकर अपनी बात रखी है। इस नोट से लगता है कि राघव फिल्म के क्रिएटिव फैसलों से खुश नहीं थे। उनका कहना है कि उन्हें बिना बताए फिल्म का फर्स्ट लुक रिलीज कर दिया गया। उन्हें किसी बाहरी व्यक्ति से पता चला कि फिल्म लक्ष्मी बम का पोस्टर जारी किया गया है। राघव ने नोट शेयर करने के साथ कैप्शन में लिखा है कि इस दुनिया में, इंसान के लिए दौलत और शोहरत से ज्यादा जरूरी होता है उसका आत्मसम्मान। इसलिए उन्होंने ‘कंचना’ के हिंदी रीमेक ‘लक्ष्मी बम’ के प्रोजेक्ट से बाहर होने का फैसला किया है।

राघव ने इस नोट की शुरुआत तमिल कहावत से की है। उन्होंने लिखा है, “तमिल में एक कहावत है कि जिस घर में सम्मान ना मिले, उस घर में नहीं जाना चाहिए। इस दुनिया में दौलत और शोहरत से अधिक आत्मसम्मान जरूरी है। इसलिए मैं फिल्म ‘लक्ष्मी बम’ छोड़ रहा हूँ। मैं यहाँ कारण का खुलासा नहीं करना चाहता, क्योंकि कारण एक नहीं, कई हैं। लेकिन, उनमें से एक यह है कि फिल्म का पहला पोस्टर आज मेरी जानकारी के बिना रिलीज कर दिया गया। मुझसे इसके बारे में कोई चर्चा भी नहीं की गई। मुझे किसी तीसरे इंसान ने इसकी सूचना दी। एक निर्देशक के लिए यह बेहद दुखदायी है कि उसकी अपनी फिल्म के फर्स्ट लुक रिलीज के बारे में उसे कोई बाहरी व्यक्ति आकर बताए। मुझे यह बेहद अपमानजनक और निराशाजनक लगता है। एक रचनाशील व्यक्ति होने की वजह से मुझे पोस्टर भी अच्छा नहीं लगा। यह किसी निर्देशक के साथ नहीं होना चाहिए।”

राघव आगे लिखते हैं कि उन्होंने कोई एग्रीमेंट साइन नहीं किया है, इसलिए वो चाहें तो अपनी स्क्रिप्ट वापस ले सकते हैं, लेकिन वो ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि ये प्रोफेशल व्यवहार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वो अपनी स्क्रिप्ट देने के लिए राजी हैं, क्योंकि वो अक्षय कुमार का काफी सम्मान करते हैं। राघव ने कहा कि वो उन्हें हटाकर अपनी इच्छानुसार किसी दूसरे डायरेक्टर को ले सकते हैं। वो जल्द ही अक्षय कुमार से मिलकर उनको स्क्रिप्ट देंगे और फिर प्रोजेक्ट से अलग हो जाएँगे। इसके साथ ही उन्होंने पूरी टीम को शुभकामनाएँ देते हुए फिल्म के सफल होने की कामना भी की।

बता दें कि फिल्म ‘लक्ष्मी बम’ तमिल फिल्म कंचना का ऑफिशियल रीमेक है, जिसे राघव ने ही डायरेक्ट किया था। फिल्म में कियारा आडवाणी फीमेल लीड में हैं। इस फिल्म की कहानी ऐसे शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें एक ट्रांसजेंडर की आत्मा आ जाती है। यह फिल्म अगले साल 5 जून को रिलीज होगी।

47 से लेकर 60 सीटों तक की एरर मार्जिन: 2014 और 2019 के बीच Exit Poll का तुलनात्मक अध्ययन

लोकसभा चुनाव 2019 की मतदान प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद अब जनता के बीच नई सरकार को लेकर काफ़ी उत्सुकता नज़र आ रही है। ख़ासतौर पर रविवार (19 मई) शाम के एग्जिट पोल के आंँकड़ों को देखने के बाद यह उत्सुकता और बढ़ गई है। अगर एग्जिट पोल में दर्शाए गए आँकड़ें सही साबित हो जाएँ तो यह कहना शायद ग़लत नहीं होगा कि देश की बागडोर एक बार फिर से प्रधानमंत्री मोदी के हाथों आ सकती है। ऐसा हम नहीं बल्कि एग्जिट पोल के आँकड़ें कह रहे हैं। एग्जिट पोल के आँकड़ें कैसे तय होते हैं, इस पर हमने एक लेख लिखा था, उसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

इस लेख में हम आपको लोकसभा चुनाव 2014 के एग्डिट पोल और 2019 के एग्जिट पोल को एक ही टेबल के माध्यम से दिखाएँगे, जिससे आप दोनों के बीच के अंतर को समझ सकें।

एजेंसी
NDA- 2014 (रूझान)

UPA- 2014 (रूझान)

कुल सीटें- 2014 (NDA)

कुल सीटें- 2014 (UPA)

NDA- 2019 (रूझान)

UPA- 2019 (रूझान)
चाणक्य टुडे 340 (+/- 14) 070 (+/- 9) 33659350095
CSDS 270-282 092-102
336

59
277 130
C Voter 289 101
336

59
287128
Nielson 281 097
336

59
267127

ऊपर दी गई टेबल को देखने के बाद आप यह बख़ूबी समझ चुके होंगे कि लोकसभा चुनाव 2014 में चाणक्य टुडे के अलावा किसी भी एजेंसी का एग्जिट पोल सटीक नहीं था। इस बार यानी लोकसभा चुनाव 2019 में चाणक्य टुडे के ही आँकड़ों को अगर सही मान लिया जाए तो बीजेपी ही सत्ता पर आसीन हो सकती है।

आइए अब एक नज़र उन एग्जिट पोल एजेंसियों पर डालते हैं जो इस बार मैदान में उतरे थे, 2014 में जो नहीं थे। दिलचस्प यह है कि इन नई एजेंसियों के एग्जिट पोल ने भी पीएम मोदी की वापसी पर ही संभावनाएँ जताईं हैं।

एजेंसीNDA-2019 (रुझान)UPA-2019 (रुझान)
CNX300120
Neta242164
Axis306132
IPSOS336082
VMR306132
VDP Associates333115
Jan Ki Baat305124

जनता द्वारा लिया गया निर्णय तो 23 मई को स्पष्ट होगा। लेकिन, उससे पहले यदि एग्जिट पोल के इन आँकड़ों को ही सही मान लिया जाए तो बीजेपी को कोसने वाले विपक्ष की यह एक क़रारी हार का संकेत साबित हो सकती है। इस परिस्थिति में यह कहना ग़लत नहीं होगा कि विरोधी दलों द्वारा पीएम मोदी की तमाम आलोचनाओं और निजी हमलों का यह एक सही जवाब होगा।

4 सालों में ये PM मोदी का संघ मुख्यालय का पहला दौरा, दो अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

लोकसभा चुनाव के ख़त्म होने और एग्जिट पोल आने के बाद सभी नेता नई सरकार गठन के कवायद में जुटे हैं। हालाँकि, अभी चुनाव का परिणाम आने में तीन दिन बाकी है, लेकिन विपक्ष के खेमे में दलों की संख्या बढ़ाने के लिए सभी नेताओं के एक-दूसरे से मुलाक़ात करने की ख़बरें आ रही हैं। इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने आज सोमवार (मई 20, 2019) को नागपुर में बैठक का आयोजन किया है।

इस बैठक में पीएम मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ ही कई दिग्गज नेता के शामिल हेने की सूचना है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री मोदी के बीच होने जा रही ये मुलाक़ात इसलिए भी अहम है, क्योंकि 4 सालों में ये पीएम मोदी का संघ मुख्यालय का पहला दौरा है।

जानकारी के मुताबिक़, पीएम मोदी आज संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाक़ात करेंगे और कई अहम मुद्दों पर बात करेंगे। चुनाव के नतीजों से पहले हो रही इस बैठक को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इस दौरान सरकार के गठन को लेकर चर्चा होने के साथ ही कई अन्य मुद्दों पर भी बात होने की संभावना है। न्यूज़ 24 के सूत्रों के अनुसार, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि भारतीय जनता पार्टी की सीटें बहुमत से कम रह जाती हैं, तो आरएसएस किसी और बड़े भाजपा नेता के हाथ में एनडीए गठबंधन का नेतृत्व सौंप सकता है।

इस बारे में बात करते हुए भाजपा की नागपुर इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी, लेकिन फिर भी एक आशंका है कि अगर पार्टी को बहुमत नहीं मिलती है, तो आरएसएस पीएम मोदी को दरकिनार कर किसी और भाजपा नेता का नाम आगे कर सकती है। इसके साथ ही एक ख़बर ये भी आ रही है कि इस बैठक में नए भाजपा अध्यक्ष के नाम पर चर्चा की जा सकती है। इसलिए, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी बैठक में बुलाया गया है, लेकिन स्पष्ट तौर पर अभी तक किसी बात की पुष्टि नहीं हो पाई है।

राजनाथ सिंह का समर्थन करने पर मौलानाओं को मिली जान से मारने की धमकी

लखनऊ संसदीय सीट पर भाजपा उम्मीदवार राजनाथ सिंह का समर्थन करने वाले शियाओं के धर्मगुरू मौलाना कल्बे जव्वाद और शिया सूफी संघ के मौलाना हसनैन बकाई को जान से मारने की धमकी मिली है। इस बारे में कोतवाली पुलिस को शिकायत कर दी गई है। दोनों उलेमाओं के मुताबिक, उन्हें इंटरनेट कॉलिंग के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई है।

जनसत्ता में प्रकाशित खबर के मुताबिक, मौलाना कल्बे जव्वाद ने बताया कि रविवार (मई 19, 2019) को उन्हें रात 8 बजे एक फोन कॉल आया। फोन करने वाले ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। जवाब में मौलाना ने भी ऐसी धमकियों से नहीं डरने की बात कही।

वहीं मौलाना सैयद हसनैन बकाई के मुताबिक राजनाथ सिंह को समर्थन करने के कारण ही उनके पास इस प्रकार का कॉल आया और उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई। मौलाना बकाई के अनुसार, फोन करने वाले शख़्स ने अपनी धमकी में उनसे कहा, “तुम्हें पिछले जुमे को भी मारने की कोशिश की थी लेकिन सही मौक़ा नहीं मिला। इस बार कोई नहीं बचेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले राजधानी के एक होटल में 4 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी। इस कॉन्फ्रेंस में मौलाना कल्बे जव्वाद ने खुलकर राजनाथ सिंह को समर्थन देने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वह एक अच्छे उम्मीदवार का समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, राजनाथ सिंह एक अच्छे इंसान हैं और उनके साथ पुराने रिश्ते होने के कारण वह निश्चित ही राजनाथ के साथ हैं। राजनाथ सिंह के ख़िलाफ़ कॉन्ग्रेस से आचार्य प्रमोद कृष्णन और सपा-बसपा महागठबंधन से शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा मैदान में थीं।

‘गालीबाज’ ओमप्रकाश राजभर सहित 8 नेता तत्काल प्रभाव से बर्खास्त: एक्शन में CM योगी

उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से ओमप्रकाश राजभर को राज्यपाल राम नाईक द्वारा बर्खास्त कर दिया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल से उन्हें तत्काल बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। ओमप्रकाश योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण-दिव्यांग जन कल्याण मंत्री हैं। राजभर उत्तर प्रदेश में भाजपा के सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष भी हैं। बीते कुछ समय से ओमप्रकाश अपनी जिद के कारण सत्तारुढ़ व सहयोगी पार्टी के सीएम योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ खुलकर बोलते नजर आए थे। जिस कारण पार्टी की साख को नुकसान पहुँच रहा था। राजभर से पूर्व एसबीएसपी के अन्य सदस्यों को भी तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटाया जा चुका है।

राजभर द्वारा लगातार विवादस्पद बयान देने के कारण योगी आदित्यनाथ को अपनी सहयोगी पार्टी के अध्यक्ष के लिए यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। हालाँकि, लोकसभा चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर ने खुद मंत्रालय से इस्तीफ़ा दिया था लेकिन उस समय इसे स्वीकारा नहीं गया था।

राज्यपाल द्वारा बर्खास्त किए जाने पर राजभर का कहना है, “मैंने तो पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया था, अब उनका जो मन हो वह करें। वह कह रहे थे कि हम उनकी पार्टी से चुनाव लड़ें, ऐसा करने पर तो हमारी पार्टी का अस्तित्व खत्म हो जाता। जिस विचार को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, वह खत्म हो जाता।”

बता दें कि राजभर की पार्टी ने 2017 में भाजपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था और पार्टी से उनके 4 विधायक भी चुने गए थे। लेकिन सरकार बनने के बाद राजभर के सुर बिगड़ने लगे। पहले अफसरों की सिफारिश न सुनने पर उन्होंने हंगामा किया और बाद में अपने बेटों को पद दिलाने पर अड़ गए। हालाँकि भाजपा उनके बयानों को लगातार नजरअंदाज करती रही। भाजपा के बड़े नेताओं ने उन्हें समझाने की भी कोशिश की लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी।

चुनावों के दौरान उन्होंने सीटों की माँग को लेकर धीरे-धीरे सभी हदें पार कर दीं। वे घोसी समेत 2 लोकसभा सीटों का टिकट अपने दल के लिए माँगने लगे। भाजपा इतने के बावजूद भी उन्हें घोसी से टिकट देने के लिए राजी हो गई थी लेकिन बीजेपी ने इन सीटों पर उनसे अपने पार्टी (भाजपा) के सिंबल पर लड़ने की शर्त रख दी। इस पर ओम प्रकाश राजी नहीं हुए और इस्तीफ़ा देने पहुँच गए। उनकी इन्हीं हरकतों के चलते योगी आदित्यनाथ को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा। बता दें कुछ समय पहले ओमप्रकाश जनता के बीच जाकर पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग भी कर चुके हैं।

राजभर की पार्टी एसबीएसपी के अन्य नेता, जिनको निकाला गया

#ExitPoll पर AAP और ममता का रोना-धोना शुरू: कहा चुनाव कैंसिल करवाए जाएँ

कल (19 मई) लोकसभा चुनाव 2019 का अंतिम चरण पूरा होते ही शाम 6:30 बजे से एग्जिट पोल आने शुरू हो गए थे। लगभग सभी एग्जिट पोल में एनडीए को 300 या इससे अधिक सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है और कॉन्ग्रेस की हालत पतली बताई जा रही है।

एग्जिट पोल के अनुसार जहाँ सभी राज्यों में भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में सिमटी हुई पार्टी AAP को 0-1 सीट ही मिलने की संभावना है। जैसे ही यह आँकड़ा न्यूज़ चैनलों पर दिखाई देने लगा AAP के नेता बौखला गए और ‘EVM से छेड़छाड़’ का जिन्न बोतल से निकाल लिया।

AAP नेता संजय सिंह ने ट्वीट किया, “क्या असली खेल EVM है? क्या पैसे देकर EXIT POLL कराया गया? यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, बंगाल हर जगह BJP ही जीत रही है ये कौन यक़ीन करेगा? सभी दल EC से मिलकर VVPAT-EVM के मिलान में गड़बड़ी पर Election रद्द करने की माँग करें।”

संजय सिंह का यह ट्वीट बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए आया जिसमें ममता ने लिखा था, “मुझे एग्जिट पोल की बकवास पर भरोसा नहीं है। इस बकवास के पीछे छिपकर हजारों EVM से छेड़छाड़ करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। मैं सभी विपक्षी दलों से अपील करती हूँ कि वे एक होकर निडरता से मज़बूती से खड़े रहें, हम ये जंग एकसाथ लड़ेंगे।”

आश्चर्य तो तब हुआ जब राहुल गाँधी ने भी एक प्रकार से हार स्वीकार करते हुए ट्वीट किया और ठीकरा EVM पर फोड़ा। राहुल गाँधी ने एग्जिट पोल आने से पहले ही ट्वीट में लिखा, “इलेक्टोरल बॉन्ड से EVM और चुनाव की तारीखें बदलने तक, नमो टीवी, मोदी की सेना और अब केदारनाथ में ड्रामा; निर्वाचन आयोग ने मोदी और उनके गैंग के सामने समर्पण कर दिया है। एक समय में आयोग से लोग डरते थे और इज्जत करते थे लेकिन अब नहीं।”

मस्जिद में अजान को लेकर बवाल: मारपीट के बाद में घरों पर की गई पत्थरबाजी

एक मस्जिद में मुस्लिम समुदाय के 2 युवकों में झड़प देखने को मिली। शनिवार (मई 20, 2019) को झड़प के बाद दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के घरों पर पत्थरबाजी करने की खबर आई।

मामला बुलंदशहर के खन्नीवाड़ा स्थित मस्जिद का है। जहाँ शनिवार की शाम एक युवक ने दूसरे युवक पर मगरिब की अजान दो मिनट पहले देने का आरोप लगाया और फिर उसे दो थप्पड़ मार दिए। हालाँकि वहाँ मौजूद लोगों ने दोनों को समझा-बुझाकर मामले को रफा-दफा कर दिया। लेकिन असली लड़ाई बाद में शुरू हुई।

अमर उजाला के स्थानीय संस्करण में प्रकाशित खबर

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक नमाज के बाद दोनों युवक अपने-अपने घर पहुँचे। जहाँ आरोपित पक्ष को आता देख पीड़ित पक्ष के लोगों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद आरोपित पक्ष के लोगों ने भी जवाब में उनके घर पर पत्थर फेंके।

हिंसा की सूचना मिलते ही पुलिस मौक़े पर पहुँची लेकिन पुलिस को देखते ही पथराव कर रहे लोग मौक़े से फरार हो गए। निरीक्षक सूरत सिंह के मुताबिक इस मामले में उनके पास अभी तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

आपको बता दें कि मगरिब की अजान सुनकर ही लोग रोजा खोलते हैं। ऐसे में वक्त से पहले रोजा खोलने से लोगों का रोजा खराब हो जाता है। यही बात मुख्य रूप से विवाद का कारण बनी और हिंसक झड़प हुई।