Home Blog Page 5823

तृणमूल के गुंडों ने की बूथ कैप्चरिंग, बमबारी से लेकर वोटरों को धमकी: VotingPhase7

लोकसभा निर्वाचन के अंतिम चरण में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने सभी मर्यादाएँ तोड़ते हुए हिंसा का मुँह पूरी तरह खोल दिया है। बशीरहाट के गाँवों में तृणमूल के गुंडे क्षेत्र के वोटरों को धमकाने से लेकर बूथ के बाहर बम धमाके करने और वोटिंग मशीनों के साथ छेड़-छाड़ करने तक किसी हथकंडे से बाज नहीं आ रहे हैं। भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी ने वहाँ संविधान का राज पूरी तरह खत्म कर दिया है। ताज़ा अपडेट्स के अनुसार ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों और संवाददाताओं पर भी बमों से हमले हो रहे हैं।

‘भाजपा बूथ एजेंट्स को मार डालने की धमकी’: बंगाल भाजपा उपाध्यक्ष

बंगाल भाजपा के उपाध्यक्ष चंद्र कुमार बोस ने आरोप लगाया कि कल रात तृणमूल की ‘जिहादी’ ब्रिगेड उनके कार्यकर्ताओं को धमका रही थी। ANI से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकर्ताओं को फोन कर धमकी दी जा रही है कि अगर वह भाजपा के पोलिंग एजेंट के तौर पर बूथों में बैठे तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। बोस ने तृणमूल कॉन्ग्रेस और किसी दहशतगर्द संगठन में कोई अंतर न होने का भी आरोप लगाया।

बशीरहाट में मतदान में बाधा, भाजपा कार्यकर्ताओं से टकराव  

बशीरहाट के बदुरिया में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर तृणमूल कार्यकर्ताओं का मतदान बूथ के बाहर जमावड़ा देखा। जब वह (भाजपा वाले) देखने गए तो जुबानी जंग जल्दी ही हाथापाई और हिंसा में तब्दील हो गई। न केवल मतदान बूथों के बाहर बम धमाके हुए बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने तृणमूल पर बूथ कैप्चरिंग, बूथ टैम्परिंग और EVM से छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया है। रिपब्लिक टीवी की लाइव रिपोर्टिंग के अनुसार औरतें डर के मारे घरों से निकल ही नहीं रहीं थीं, और मर्दों ने वोट देने जाने से रोके जाने पर सड़क पर ही धरना दे दिया। इन सब के बीच भाजपा प्रत्याशी शायन्तन बासु ने दो-तीन कार्यकर्ताओं को साथ लिया, और वह 2-3 के ही समूह में मतदाताओं को सुरक्षित मतदान बूथ के पास तक ले जाकर वोट डलवा रहे हैं।

बशीरहाट तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बहुत जरूरी सीट बताई जाती है। यहाँ गैर-हिन्दू वोट 54% के आसपास है। यहाँ से तृणमूल ने नुसरत जहाँ को अपना प्रत्याशी बनाया है।

इसके अलावा इस्लामपुर, रायगंज में पत्रकारों पर भी तृणमूल कार्यकर्ताओं के हिंसक हमलों की खबरें आ रहीं हैं।

अपडेट: इस बीच जादवपुर में भी भाजपा प्रत्याशी अनुपम हाज़रा पर हिंसक हमला हुआ और उनकी कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दी गई है। वह लोकसभा क्षेत्र में बूथ कैप्चरिंग की खबर सुनकर पहुँचे थे। भाजपा ने आरोप लगाया कि तृणमूल के स्थानीय नेता अनन्य बनर्जी के नेतृत्व में हमला हुआ था। भाजपा नेताओं ने पुनर्मतदान की माँग की है।

यह डेवलपिंग स्टोरी है। जैसे-जैसे तस्वीर साफ़ होती जाएगी, हम इस आर्टिकल को अपडेट करते रहेंगे।

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को बाहर करने पर विचार करे भाजपा, हमें बर्दाश्त नहीं: नीतीश कुमार

भोपाल सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा गोडसे को देशभक्त कहे जाने वाले बयान पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान बर्दाश्त से बाहर है और भारतीय जनता पार्टी को उन्हें पार्टी से बाहर करने पर विचार करना चाहिए। हालाँकि, नीतीश कुमार ने कहा कि यह मामला बीजेपी का अंदरूनी मामला है इस पर पार्टी ही कोई निर्णय ले सकती है।

ख़बर के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से साध्वी के गोडसे वाले बयान पर प्रतिक्रिया पूछी गई तो उन्होंने कहा, “ये सब हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। बीजेपी को उन्हें बाहर निकालने पर ज़रूर विचार करना चाहिए। ये बीजेपी का अंदरूनी मामला है। एक्शन लेना पार्टी का काम है।हम अपराध, भ्रष्टाचार और साम्प्रदायिकता से बिल्कुल भी समझौता नहीं कर सकते। हमारी राय स्पष्ट है।”

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के इस बयान पर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से नाराज़ नज़र आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साध्वी के इस बयान पर कड़ी निंदा व्यक्त की थी। उन्होंने सख़्त लहज़े का इस्तेमाल करते हुए कहा, “गाँधी जी या गोडसे के बारे में जो बयान दिए गए वो बहुत वह ख़राब हैं।ये अलग बात है कि उन्होंने माफ़ी माँग ली, लेकिन मैं उन्हें मन से कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगा।”

इससे पहले, रविवार (मई 19, 2019) को होने वाले आखिरी चरण के मतदान से पहले भाजपा नेताओं की तरफ से गोडसे पर दिए गए बयान से पार्टी ने किनारा कर लिया था और साथ ही नोटिस भी भेजा था। इन नेताओं में भोपाल संसदीय सीट से प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा, केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े और सांसद नलीन कतील का नाम शामिल था। इन तीनों नेताओं ने गोडसे को लेकर विवादित बयान दिया था।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद अपने ट्विटर हैंडल से ये जानकारी दी गई थी कि नेताओं के बयानों को अनुशासन समिति के पास भेजा गया और उन्हें दस दिन दिनों के भीतर जवाब देना है। इस मामले में उन्होंने शुक्रवार (मई 17, 2019) को तीन ट्वीट किए। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा कि विगत 2 दिनों में अनंतकुमार हेगड़े, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और नलीन कटील के जो बयान आए हैं, वो उनके निजी बयान हैं, उन बयानों से भारतीय जनता पार्टी का कोई संबंध नहीं है।

दरअसल, प्रज्ञा ठाकुर ने विवादित बयान देते हुए महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त करार दिया था। उन्होंने कहा था कि वो देशभक्त थे, देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे। हालाँकि प्रज्ञा ने अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी माँग ली थी। वहीं, अनंत हेगड़ ने भी अपने ट्वीट के लिए माफी माँगते हुए कहा कि उनका ट्विटर अकाउंट हैक हो गया था। उन्होंने कहा कि गाँधी के हत्यारे के लिए कोई सहानुभूति नहीं हो सकती।

इससे पहले हेगड़े के ट्विटर अकाउंट से ट्वीट हुआ था कि गोडसे के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है और माफी माँगने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही नलिन कतील ने भी अपने के लिए माफी माँगी है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की तुलना गोडसे से करते हुए ट्वीट किया था, “गोडसे ने एक को मारा, कसाब ने 72 को मारा लेकिन राजीव गाँधी ने 17000 को मारा। अब आप खुद तय कर लो कि कौन ज्यादा क्रूर है।” नेताओं के माफी माँगने के बाद भी पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है। गौरतलब है कि कमल के हासन के द्वारा गोडसे को पहला हिन्दू आतंकवादी बताने के बाद से ही इस पर सियासी बवाल मचा हुआ है।

डरी सहमी कॉन्ग्रेस को आया सपना कि वोटिंग के दिन मोदी जाएँगे बनारस

कॉन्ग्रेस ने शनिवार (मई 18, 2019) को निर्वाचन आयोग से कहा कि वह रविवार (मई 19, 2019) को मतदान के दिन वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाहनों के काफिले के साथ यात्रा करने की अनुमति न दे।कॉन्ग्रेस का कहना है कि यह रोड शो का रूप ले सकता है, जो आचार संहिता का उल्लंघन होगा। कॉन्ग्रेस की जिला इकाई ने निर्वाचन आयोग और स्थानीय चुनाव प्राधिकरण को एक पत्र लिखकर कहा कि ऐसी स्थिति होने पर उसका उम्मीदवार भी वाहनों के काफिले के साथ यात्रा करने पर मजबूर हो जाएगा, जिससे अनावश्यक विवाद हो सकता है।

कॉन्ग्रेस की दूरदर्शिता और निर्वाचन आयोग से माँग सिवाय उसकी खोखली सोच के और कुछ और प्रतीत नहीं हो रही। कॉन्ग्रेस की इस फर्जी माँग को देखकर ऐसा लग रहा है कि वो बुरी तरह से पीएम मोदी के लोकप्रियता से डरी हुई है और ये डर सपने में भी उसका पीछा नहीं छोड़ रही है। कॉन्ग्रेस ने जिस तरह से काफिले के साथ मोदी को यात्रा करने पर होने वाली घटनाओं के बारे में बात कर रही है, उससे तो यही लग रहा है, जैसे उसने सपने में ये सब कुछ देखा होगा, हकीकत में तो ऐसा होना संभव नहीं है।

इसके पीछे की वजह ये है कि नियम के अनुसार, जिस दिन किसी लोकसभा सीट पर मतदान होता है, तो उस दिन उस लोकसभा क्षेत्र में वहाँ के स्थाई निवासी के अलावा कोई बाहरी नहीं रह सकता है। यानी कानूनी रुप से मतदान वाले दिन सिर्फ उसी लोकसभा क्षेत्र का स्थाई निवासी वहाँ रह सकता है और पीएम मोदी तो बनारस के स्थायी निवासी हैं नहीं, तो जाहिर सी बात है कि वो यहाँ पर क्यों आएँगे? और वैसे भी वो फिलहाल बद्रीनाथ की यात्रा पर हैं और वो भी इस बात से वाकिफ होंगे कि मतदान वाले दिन वो बनारस नहीं जा सकते हैं, तो भला क्यों वो बद्रीनाथ से बनारस आएँगे?

कॉन्ग्रेस जिस तरह सारे नियम-कानून को भूलकर बिना किसी आधार के इस तरह की माँग कर रही है, और उससे होने वाले दुष्परिणामों के बारे में बता रही है, उससे तो साफ तौर पर कॉन्ग्रेस पीएम मोदी और उनकी लोकप्रियता से डरी हुई प्रतीत हो रही है।

‘सेक्युलर’ नशे में फरहान अख्तर ने किया ट्वीट, लोगों ने उड़ाई खिल्ली

फरहान अख्तर ने आज सुबह (19 मई) को एक ट्वीट कर भोपाल वासियों से अपील की कि वह ‘गोडसे-समर्थक’ भाजपा लोकसभा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को वोट न दें।

यह अपील हास्यास्पद इसलिए थी कि भोपाल में पिछले चरण में ही 12 मई को मतदान सम्पन्न हो चुका है। ट्विटर पर इसके बाद लोगों ने फरहान अख्तर की खिल्ली उड़ानी शुरू कर दी।

फरहान अख्तर और उनके पिता जावेद अख्तर ‘कमिटेड सेक्युलरिस्ट’ हैं। इसी नाते दोनों गाहे-बगाहे भाजपा, और उसके बहाने हिन्दुओं पर, निशाना साधते ही रहते हैं। पर मतदान बीत जाने के एक हफ्ते बाद की यह अपील किसी भी एंगल से पल्ले नहीं पड़ रही है।

केजरीवाल से मुस्लिम ही नहीं, दलित भी हैं नाराज: कॉन्ग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार (मई 17, 2019) को दिल्ली में 12 मई को हुए मतदान को लेकर एक बड़ा बयान दिया था कि चुनाव से 48 घंटे पहले तक उन्हें ऐसा लग रहा था कि सातों सीटें आम आदमी पार्टी को जाएँगी, मगर आखिरी वक्त पर पूरे मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस को शिफ्ट हो गए। केजरीवाल के इस बयान पर सियासी बवाल मच गया। कॉन्ग्रेस ने केजरीवाल के बयान को आड़े हाथों लिया।

कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और मुस्लिम नेता हारुन यूसुफ ने इस बारे में कहा कि कॉन्ग्रेस को मुस्लिम वोट शिफ्ट हुआ, ये कहकर केजरीवाल अपना खौफ छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि उनकी ये बात सही है कि मुस्लिम वोटर्स ने भारी तादाद में कॉन्ग्रेस को वोट किया, क्योंकि केजरीवाल ने सिवाय झूठ बोलने के और कोई काम ही नहीं किया। लोगों ने अपने अंदर का आक्रोश और गुस्सा वोटिंग के जरिए निकाला है, क्योंकि उनका काम सिर्फ सरकारी होर्डिंग्स पर ही हुआ है। केजरीवाल ने अपनी असफलताओं का सारा ठीकरा केंद्र पर फोड़ दिया। वहीं, कॉन्ग्रेस के दूसरे नंबर के कार्यकारी अध्यक्ष और दिल्ली के एक मात्र सुरक्षित सीट से नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से प्रत्याशी राजेश लिलोठिया ने कहा कि केजरीवाल से सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि दलित भी नाराज हैं।

वहीं, केजरीवाल के बयान से भड़की शीला दीक्षित ने कहा है कि दिल्ली की जनता न तो इस सरकार के कामकाज को समझ पा रही है न ही केजवाल की बातों को। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता शीला दीक्षित ने नाराजगी जताते हुए कहा कि समझ में नहीं आता कि केजरीवाल ऐसा बोलकर कहना क्या चाह रहे हैं? उन्होंने कहा कि यह जनता का अधिकार है कि वह किस पार्टी या व्यक्ति को वोट देना चाहती है। आज तक दिल्ली के लोग न तो केजरीवाल को समझ सकी है नही इनके कामकाज को पसंद करती है।

इस मामले पर बात करते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशवरात के अध्यक्ष नवेद हामिद ने कहा कि यह कहना गलत है कि पूरा मुस्लिम वोट एकतरफा कॉन्ग्रेस को पड़ा है। इतना जरूर कहा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस और आप को तकरीबन 70:30 के अनुपात में वोट गया है। इसके पीछे की वजह बताते हुए वो कहते हैं कि यह चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा गया था और मुस्लिम वोटर को कॉन्ग्रेस में ज्यादा मजबूती नज़र आई।

इसके साथ ही उन्होंने केजरीवाल की पार्टी में अल्पसंख्यकों को सही रिप्रेजेंटेशन न देने की बात की और साथ ही सवाल भी किया कि उनकी पार्टी की तरफ से किसी अल्पसंख्यक को दिल्ली की किसी सीट से टिकट क्यों नहीं दिया गया? नवेद हामिद ने कहा कि अल्पसंख्यकों ने किसी के कहने से वोट नहीं दिया, बल्कि उसे यह दिखा कि यह लड़ाई नैशनल लेवल पर कॉन्ग्रेस और भाजपा के बीच है, इसलिए सोच समझकर वोट दिया।

Google से नहीं, पहले इतिहास पढ़ो तब बहस किया करो: आशुतोष को TV डिबेट में इतिहासकार की राय

लोकसभा चुनाव के बीच मध्य प्रदेश के भोपाल सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा नाथूराम गोडसे को लेकर दिए गए विवादित बयान पर राजनीतिक और मीडिया में चर्चा का बाजार गर्म है। हालाँकि, साध्वी प्रज्ञा ने माफी माँग ली है, लेकिन टीवी चैनल्स में चर्चा और बहस लगातार जारी है।

पत्रकार से आम आदमी पार्टी नेता और फिर वापस पत्रकार बने आशुतोष का सामना इस बार इतिहासकार से हुआ तो उन्होंने आशुतोष को याद दिला दिया कि उनकी वास्तविक मुद्दों पर पकड़ गूगल की सहायता के बिना शून्य है। साथ ही, यह सलाह भी दी कि उन्हें गूगल से नहीं बल्कि इतिहास पढ़कर ज्ञान बढ़ाना चाहिए।

TV 9 चैनल पर डिबेट के दौरान इतिहासकार प्रो. कपिल कुमार ने वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष को सबक सिखाया और उनकी बोलती बंद कर दी। अक्सर नाराज नजर आने वाले पत्रकार आशुतोष को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि पहले इतिहास पढ़कर आया कीजिए और तभी बहस किया करें।

टीवी पर बहस के दौरान एंकर ने कहा, “क्या देश निर्माण में गोडसे ने इतना बड़ा योगदान दिया? हिंदू राष्ट्र अखबार निकालना या गाँधी अनशन पर थे, पाकिस्तान को ₹55 करोड़ दिया जाना था, उससे नाराजगी, और उसके बाद इस हद तक की गाँधी को मारे बिना कुछ नहीं हो सकता, किताबों में इतिहास में दर्ज है।”

इस पर पत्रकार आशुतोष ने कहा, “क्या अमेरिका के अंदर कैनेडी के हत्यारे की चर्चा होती है? ये जो गोडसे के बारे में बार-बार महिमामंडन करने की कोशिश की जाती है और गाँधी जी की हत्या को जायज ठहराने की कोशिश की जाती है, इसको ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में देखना पड़ेगा। क्या ये तथ्य नहीं है कि जब 11 सितंबर 1948 को जब सरदार पटेल ने गोलवलकर को चिट्ठी लिख कहा था ‘जिस तरीके से आप जहर भरे भाषण देते हैं और उससे जो माहौल बनता है, उस माहौल ने गाँधी जी की हत्या की।’ क्या उन्होंने चिट्ठी में ये नहीं लिखा था कि आरएसएस के लोगों ने मिठाईयाँ बाँटी थी और खुशियाँ मनाई थी?”

आशुतोष ने अपने परिचित नकलची अंदाज में आगे कहा, “क्या ये सच्चाई नहीं है कि गाँधी जी की हत्या के समय सरदार पटेल देश के उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे, और उनके रहते गुरु गोलवलकर को गिरफ्तार किया गया था। गोलवलकर 6 महीने जेल में थे और उसके बाद फिर से वे जेल के अंदर जाते हैं। क्या ये सच्चाई नहीं है कि सावरकर टेक्निकल ग्राउंड पर छूटे थे? जीवन लाल कमेटी ने यह माना था कि आरएसएस का इस हत्या में कोई हाथ नहीं है। हालाँकि, उन्होंने ये कहा था कि इस हत्या में सावरकर का हाथ था। इस समय तक सावरकर की मौत हो चुकी थी।”

आशुतोष को जज्बातों में बहता देखरक एंकर ने कहा, “मैं उस सोच की बात कर रहा, जो कत्ल करती है। चाहे वह सोच राजस्थान के शंभू रैगर की हो या दिल्ली में सिखों की हत्या की हो।” इस पर आशुतोष ने कहा, “जिनकी वो सोच है, वो श्यामा प्रसाद मुखर्जी 1942 में चिट्ठी लिखते हैं, भारत छोड़ो आंदोलन को कुचल दिया जाए।”

हमें गूगल का इतिहास न पढ़ाएँ

इस पर इतिहासकार कपिल कुमार ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा, “इनको (आशुतोष) ये बता दीजिए कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी नहीं होते तो आज का बंगाल नहीं होता। जिन्ना ने जब कलकत्ता माँगा तो कॉन्ग्रेसियों ने क्या किया? पूरा इतिहास पढ़ कर आया कीजिए और तब डिबेट कीजिए। आप हमें गूगल का इतिहास न पढ़ाएँ।”

‘लैला’ हिन्दुओं की छवि विकृत करने का नेटफ्लिक्स का तीसरा प्रयास, लोगों ने जताई आपत्ति

नेटफ्लिक्स, एक अमेरिकन ऑनलाइन मीडिया स्ट्रीमिंग कंपनी, ने एक शो का ट्रेलर रिलीज़ किया है। शो ‘लैला’ 14 जून से आने वाला है। इस शो में एक ऐसे काल्पनिक फ्यूचर की कल्पना की गई है जहाँ ‘हिन्दू राष्ट्रवादियों’ का राज्य की मशीनरी पर कब्ज़ा हो जाता है।

जो ट्रेलर अभी रिलीज़ किया गया है, उसमे एक हिन्दू महिला मुस्लिम पुरुष से शादी करती है, उससे पैदा हुई लड़की का नाम ‘लैला’ है। बेटी, हिन्दू राष्ट्रवादियों द्वारा उससे दूर कर दी जाती है क्योंकि मुस्लिम पिता होने के कारण वह ‘शुद्ध’ नहीं है। तब मुख्य किरदार का आगमन होता है जो उसे राज्य द्वारा संचालित एक शिक्षा केंद्र में भेज देता है जहाँ लोगों का ब्रेन वाश किया जा रहा है।

पूरे ट्रेलर में हिन्दू प्रतीकों का नकारात्मक तरीके से खूब इस्तेमाल हुआ है। ‘जय आर्यावर्त’ उस काल्पनिक अराजक राज्य का नारा है। जहाँ पर लोगों के साथ धर्म के नाम भेदभाव हो रहा है। जिसे राज्य का संरक्षण प्राप्त है। यहाँ तक इस कहानी का खलनायक भी हिन्दू प्रतीकों से लदा है।

ट्रेलर देखकर ये साफ पता चल रहा है कि पूरे शो में एंटी हिन्दू प्रोपेगेंडा की भरमार है। सब कुछ बड़ी चालाकी से वर्तमान सरकार को ध्यान में रखकर, लोगों को एक काल्पनिक माहौल से डराने के लिए इस तरह के शो बनाए जा रहे हैं। वैसे भी तथाकथित ‘लिबरल्स’ बहुत पहले से ही ‘मोदी फोबिया’ से ग्रसित हैं। और हर तरह से देश में एक नकारात्मक माहौल बनाने और दहशत फ़ैलाने में लगे हैं।

सोशल मीडिया पर नेटफ्लिक्स के इस प्रोग्राम के प्रति लोगों ने अपनी नाराजगी ज़ाहिर करनी शुरू कर दी है।

लोगों ने ‘आर्यावर्त’ को इस तरह से बदनाम करने की कोशिश पर भी आक्रोश व्यक्त किया।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है, जब नेटफ्लिक्स ने हिन्दू भावनाओं से खिलवाड़ किया है। उनकी छवि को नकारात्मक तरीके से पेश किया गया हो। नेटफिक्स की लगातार प्रवित्ति रही है, एंटी हिन्दू नैरेटिव को स्थापित करने की। ‘Ghoul’ और  ‘Sacred Games’ के बाद ‘लैला’ के रूप में यह तीसरा प्रयास है। इसका निर्देशन दीपा मेहता, शंकर रमन और पवन कुमार ने किया है। शो प्रयाग अकबर के नॉवेल पर आधारित है। स्क्रीनप्ले लिखा है उर्मि जुवेकर ने और मुख्य किरदारों के रूप में हैं हुमा कुरैशी, सिद्धार्थ, राहुल खन्ना, संजय सूरी और आरिफ ज़कारिया।

अलवर में नाबालिग का रेप करने पर युवक की पीट-पीटकर हत्या,जंगल में फेंकी लाश

राजस्थान का अलवर इन दिनों आपराधिक घटनाओं के चलते सुर्खियों में है। अभी कुछ दिन पहले दलित महिला से गैंगरेप का विवाद थमा नहीं था कि फिर से एक नया मामला सामने आया है। इस बार गैंगरेप के आरोपित की पीट-पीटकर हत्या करने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि अलवर में एक युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई क्योंकि उसने अपने 2 दोस्तों के साथ मिलकर शादी से लौट रही एक बच्ची का रेप किया था। हत्या का आरोप पीड़िता के परिजन पर लगा है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

बुधवार (मई 15, 2019) को पुलिस ने हरसौरा के जंगलों से एक लाश बरामद की। लाश बुरी तरह से क्षतिग्रस्त थी। युवक की पहचान होना मुश्किल हो पा रहा था। पुलिस ने एक स्थानीय अस्पताल में युवक की लाश रखवा दी। कुछ समय बाद जब एक परिवार अपने गुमशुदा बेटे की तलाश में अस्पताल पहुँचा तो उन्होंने शव की पहचान बेटे राहुल गुज्जर के रूप में की।

हरसौरा पुलिस थाने में उसी दिन दो एफआईआर दर्ज हुईं। एक एफआईआर राहुल की हत्या की थी, जबकि दूसरी एफआईआर नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप की दर्ज हुई। इधर गैंगरेप की जाँच कर रही पुलिस ने दो आरोपित लड़कों को उठाया। युवकों से गैंगरेप मामले में पूछताछ की गई। पूछताछ में पता चला कि वे राहुल के दोस्त थे।

दोनों युवकों ने पूछताछ में गैंगरेप किए जाने की बात कुबूली है। बताया जा रहा है कि आरोपित युवक भी नाबालिग हैं, इसलिए उन्हें मेडिकल के लिए भेजा गया है। वहीं पीड़ित नाबालिग छात्रा के बयान दर्ज कर उसे भी मेडिकल जाँच के लिए भेजा गया है।

शादी से लौट रही थी नाबालिग बच्ची

पुलिस के अनुसार, बच्ची के परिजनों का आरोप है कि मंगलवार की रात को उनकी बेटी एक शादी समारोह से लौट रही थी। राहुल और उसके दोस्त भी उसी शादी में मेहमान बनकर आए थे। शादी में डिनर के बाद दोनों ने बच्ची का पीछा किया और मैरिज हॉल के पीछे सुनसान इलाके में उसे दबोच लिया।

इसके बाद तीनों आरोपितों ने बच्ची के साथ रेप किया। घर पहुँचने के बाद बच्ची ने परिजनों को घटना की जानकारी दी। परिजन तत्काल मौके पर पहुँचे और वहाँ बच्ची ने राहुल गुज्जर को पहचान लिया। परिजनों ने राहुल को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया। वहीं, राहुल के दोस्त भागने में कामयाब रहे। पुलिस ने बताया कि बच्ची के परिजनों ने राहुल को तब तक पीटा जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। राहुल के मरने के बाद गुस्साए लोगों ने उसका शव जंगल में ले जाकर फेंक दिया।

इसकी अगली सुबह युवक का शव बृहस्पतिवार को भूपखेड़ा के पास सड़क किनारे पड़ा मिला। लोगों की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में लिया और बानसूर मोर्चरी में रखवाया। जहाँ आज उसका पोस्टमार्टम हुआ। फिलहाल, इस मामले में हत्या व रेप का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। पुलिस ने फरार दोनों युवकों की पहचान कर ली है।

शहीद औरंगज़ेब के कातिल को सेना ने मार गिराया, दो आतंकी साथी भी पुलवामा में हलाक

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में सेना ने शहीद राइफलमैन औरंगज़ेब की हत्या के जिम्मेदार शौकत अहमद डार समेत तीन हिज़्बुल दहशतगर्दों को मार गिराया है। डार और उसके साथियों ने पिछले साल कश्मीर में ही राइफलमैन औरंगज़ेब को अगवा कर उनकी नृशंसतापूर्वक हत्या कर दी थी। पिछले वर्ष हुई इस हत्या के अलावा भी डार कई और दहशतगर्दी के कारनामों की तैयारी और उन्हें अंजाम देने में शामिल रहा है। कश्मीर की पुलिस के मुताबिक उसके खिलाफ आतंकरोधी धाराओं के अंतर्गत कई केस दर्ज थे।

रात भर चली मुठभेड़, बारामूला में भी एक दहशतगर्द ढेर

सेना के द्वारा जारी बयान के मुताबिक पुलवामा के पंजगाम सेक्टर में रातभर चली मुठभेड़ के बाद तीनों आतंकियों को सेना ने शनिवार को मार गिराया। मारे गए दहशतगर्दों में से दो की शिनाख्त सोपोर, बारामूला में रहने वाले मुज़फ़्फ़र अहमद और इरफ़ान अहमद के रूप में हुई है। तीसरा शख्स वही शौकत अहमद डार निकला जिसने पिछले साल राइफलमैन औरंगज़ेब की हत्या कर दी थी। उस समय औरंगज़ेब ईद मनाने अपने परिवार के पास छुट्टी लेकर आ रहे थे।

44 राष्ट्रीय राइफल के जवान औरंगज़ेब को पिछले साल 14 जून को पुलवामा के ही कलमपोरा अगवा कर लिया गया था। बाद में उनकी गोलियों से छलनी लाश उसी जिले के गुलसू गाँव में मिली थी। औरंगज़ेब की हत्या इसलिए की गई थी क्योंकि उन्होंने पिछले साल 30 अप्रैल को हिज़्बुल कमांडर समीर टाइगर को मार गिराने वाले ऑपरेशन में हिस्सा लिया था। वह (टाइगर) बुरहान वानी के मारे जाने के बाद हिज़्बुल का अगला प्रपोगंडा का चेहरा था। इसके अलावा उसे एक बार पत्थरबाजी में भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन पाँच दिन में ही रिहा कर दिया गया

इसके अलावा बारामूला के हथलंगू में भी सेना की सर्च पार्टी पर फायरिंग होने के बाद शुरू हुई मुठभेड़ में एक दहशतगर्द को मार गिराया गया। उसकी पहचान होनी अभी शेष है।

महिला ने कहा पति के साथ नहीं है कोई विवाद, बस PUBG गेमिंग पार्टनर के साथ रहना चाहती है

टेक्नोलॉजी के साथ सामाजिक ट्रेंड्स और व्यवस्थाएँ तेजी से बदल रही हैं और इसी का नतीजा है कि आए दिन हमें इसके नए-नए प्रभाव और स्वरूप हमें देखने को मिल रहे हैं। गुजरात के अहमदाबाद से ऑनलाइन गेम PUBG को लेकर एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। इस घटना में एक बच्चे की 19 वर्षीय माँ ने PUBG गेमिंग पार्टनर के लिए पति से तलाक लेने का निर्णय ले लिया है।

इस महिला ने तलाक के लिए वुमन हेल्पलाइन Abhayam-181 (अभयम-181) की सहायता माँगी है। बताया जा रहा कि भारत में PUBG गेम कई लोगों की मौत का कारण बन चुका है, लेकिन अब यह लोगों के घर तोड़ने का कारण भी बनता हुआ नजर आ रहा है।

PUBG के चक्कर में अपने मोबाइल से ही चिपकी रहती थी शिकायतकर्ता महिला

गुजरात में वुमन हेल्पलाइन अभयम-181 की एक अधिकारी ने बताया कि उनके पास मदद के लिए एक महिला की कॉल आई थी। कॉल (याचिका) के जवाब में ‘अभयम’ के एक परामर्श दल ने महिला के घर का दौरा किया और इस मुद्दे के बारे में परिवार से बात की। बात करने के बाद टीम को पता चला कि महिला PUBG खेलते हुए अपने मोबाइल फोन पर ज्यादा समय बिता रही थी, जिससे उसके और परिवार के बीच मतभेद पैदा हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि 19 वर्षीय महिला का तलाक की अर्जी देने के पीछे घरेलू विवाद नहीं है, बल्कि PUBG से उपजा विवाद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभयम-181 हेल्पलाइन के प्रोजेक्ट हेड नरेंद्र सिंह गोहिल ने बताया कि औसतन हेल्पलाइन को एक दिन में लगभग 550 कॉल आते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरीके का यह पहला मामला था। गोहिल ने कहा कि आमतौर पर माताएँ PUBG के आदी बच्चों की शिकायत करने के लिए फोन करती हैं।

शिकायतकर्ता महिला से मुलाकात करने वाली ‘अभयम’ की काउंसलर सोनल सागरथिया ने उसे अपने फैसले पर फिर से विचार करने की सलाह दी है। इसके अलावा उसे अहमदाबाद में एक पुनर्वास केंद्र में रहने की बात भी कही गई थी। हालाँकि, उसने इसके लिए मना कर दिया, क्योंकि वहाँ उसे मोबाइल फोन के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी थी।

बता दें कि PUBG यानी ‘Player Unknows Bettlegrounds, दक्षिण कोरियाई मूल का एक ऑनलाइन गेम है। भारत में PUBG बैन करने से जुड़ी माँग पर कई शहरों में कानूनी कदम उठाए गए हैं। इस गेम को बैन करने के लिए सरकार कार्रवाई भी कर रही हैं।