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सीटों के सन्नाटे के बाद AAP ने स्वीकारा, EVM पर शक नहीं है, मोदी को हराना था लक्ष्य

लोकसभा चुनाव 2019 में हुई शर्मनाक हार को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 26 मई को कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत कर लोकसभा चुनाव में पार्टी की शर्मनाक हार पर चर्चा करेंगे। इसके लिए दिल्ली के पंजाबी बाग क्लब में पार्टी नेताओं को बुलाया गया है। खबर है कि इस हार की समीक्षा से सबक लेकर आम आदमी पार्टी नई रणनीति के साथ आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव की तैयारी में तत्परता से जुटेगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक एवं कैबिनेट मंत्री गोपाल राय ने प्रेसवार्ता बुलाई। इसमें उन्होंने कहा कि इस लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर कराए गए एक आकलन से पता चलता है कि एक तरफ लोग मोदी को जिताने के लिए वोट कर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ लोग मोदी को हराने के लिए भी वोट कर रहे थे।

पार्टी का साफ़ मानना है कि मोदी जी को जिताने वालों की संख्या ज्यादा थी। जिससे दिल्ली में भी मोदी जी को एक बड़ी जीत हासिल हुई। लेकिन साथ ही आम आदमी पार्टी का अभी भी मानना है कि विधानसभा चुनाव में लोग दोबारा से केजरीवाल को ही मुख्यमंत्री चुनेंगे।

यहाँ तक कि 24 मई को अलका लाम्बा ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “काश किसी की कुछ तो सुनी होती, जीतते ना सही, कम से कम जमानत तो जप्त ना होती। 2015 में 70 में से 67 जीतने वाले 2019 आते-आते 7 में से 3 पर जमानत ही जब्त करवा बैठे। अभी भी देर नही हुई, जनता को हमेशा एक अच्छे विकल्प की तलाश रहती है, बस जरूरत है फ़ालतू के घमंड को छोड़कर, हार से सबक लेने की।”

पार्टी की तरफ से बोलते हुए गोपाल राय ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पूर्ण राज्य के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था। पार्टी का मानना था कि अगर आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी जीत कर संसद जाते हैं तो दिल्ली के लिए केंद्र से लड़कर और बेहतर काम करा सकेंगे। लेकिन चुनाव में जो वोट पड़े वो नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी के नाम पर पड़े।

गोपाल राय ने कहा कि हमें ईवीएम पर किसी भी तरह का संदेह नहीं है। हम दिल्ली लोकसभा चुनाव पर मंथन कर रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और जीतेगी।

AAP ने अलका लाम्बा को किया व्हाट्सएप्प ग्रुप से पदच्युत, जोड़ने-निकालने पर अलका ने किए मार्मिक ट्वीट

आम आदमी पार्टी के सबसे ख़ास बात ये है कि दुनिया में चाहे कुछ भी चल रहा हो, ये पार्टी लोगों के मनोरंजन में कमी नहीं होने देती है। इस पार्टी नेताओं की हरकतों से ऐसा महसूस होता है मानो इस पार्टी का जन्म व्हाट्सएप्प ग्रुप में जोड़ने और निकालने को राष्ट्रीय चर्चा बनाने के लिए ही हुआ था।

ताजा प्रकरण दिल्ली, चाँदनी चौक से AAP विधायक अलका लाम्बा को लेकर है। अलका लाम्बा से पार्टी की नाराजगियाँ सास-बहू धारावाहिक की तरह ही हर दूसरे दिन ट्विटर पर देखने को मिलती हैं। इस बार दिल्ली में लोकसभा चुनाव में एक भी सीट जीत पाने में नाकाम रही अरविन्द केजरीवाल की यह पार्टी अंदरूनी उठापटक झेल रही है।

अलका लाम्बा ने चुनाव नतीजे आने के बाद ट्विटर पर अरविन्द केजरीवाल को कुछ नसीहत दे डाली थी, जिसका परिणाम ये हुआ कि आम आदमी पार्टी ने अपनी विधायक को व्हाट्सएप्प ग्रुप से ही निकाल दिया। इस दुखद और बेहद मार्मिक घटना ने अलका लाम्बा के मन को गहरी ठेस लगाईं और उन्होंने ट्विटर पर अपना दुःख व्यक्त कर फिरसे व्हाट्सएप्प ग्रुप की चर्चा छेड़ दी है।

24 मई को अलका लाम्बा ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “काश किसी की कुछ तो सुनी होती, जीतते ना सही, कम से कम जमानत तो जप्त ना होती। 2015 में 70 में से 67 जीतने वाले 2019 आते-आते 7 में से 3 पर जमानत ही जब्त करवा बैठे। अभी भी देर नही हुई, जनता को हमेशा एक अच्छे विकल्प की तलाश रहती है, बस जरूरत है फ़ालतू के घमंड को छोड़कर, हार से सबक लेने की।”

शायद इस घमंड वाली बात से ही अरविन्द केजरीवाल ‘ट्रिगर’ हो गए और उनके हारे हुए प्रत्याशियों ने उनके इशारे पर अलका लाम्बा को ग्रुप से बाहर कर दिया। इसके बाद आज अलका लाम्बा ने कुछ और बेहद करुणामय और मार्मिक ट्वीट के माध्यम से अपनी बात सामने रखते हुए लिखा है कि बार-बार व्हाट्सएप्प ग्रुप में जोड़ने-निकालने से बेहतर होता, इससे ऊपर उठकर कुछ सोचते, बुलाते, बात करते, गलतियों और कमियों पर चर्चा करते, सुधार करके आगे बढ़ते। बता दें कि विगत मार्च के महीने ही उन्हें आम आदमी पार्टी के MLA वाले ग्रुप से निकाल दिया गया था। लेकिन, उस समय उन्हें फिरसे जोड़ लिया गया था।

इसके बाद अलका लाम्बा ने शक जाहिर करते हुए कल का ही एक ट्वीट रीट्वीट किया, जिसमें उन्होंने ओडिशा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व की तारीफ़ की थी। इसमें अलका लाम्बा ने लिखा है कि महागठबंधन के लिए इधर-उधर भागने से बढ़िया था कि नवीन पटनायक की तरह एक राज्य पर फोकस करते।

आत्ममुग्ध बौने के नाम से ट्विटर पर प्रसिद्द अरविन्द केजरीवाल को फिरसे ‘ट्रिगर’ करते हुए अलका लाम्बा ने लिखा है कि कुछ अंदरूनी सूत्र उन्हें बता रहे हैं कि अरविन्द केजरीवाल को नवीन पटनायक की तारीफ पसंद नहीं आई इसलिए उन्हें व्हाट्सएप्प ग्रुप से निकाल दिया गया है। हालाँकि, अलका लाम्बा ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह अंदरूनी सूत्र उस व्हाट्सएप्प ग्रुप में अभी तक मौजूद हैं या फिर उनको भी निकाल दिया गया है।

Breaking: जेट एयरवेज़ के पूर्व-चेयरमैन को मुंबई एयरपोर्ट पर रोका गया, विदेश जाने पर रोक

प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इण्डिया के हवाले से आई खबर के अनुसार घाटे में चल रही जेट एयरवेज़ के पूर्व-चेयरमैन नरेश गोयल को सपत्नीक विदेश जाने से रोक दिया गया है। वह मुंबई हवाई अड्डे से विदेश जाने की फ़िराक में थे तभी मुंबई आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। माना जा रहा है कि यह 1.2 बिलियन डॉलर के कर्ज को देखते हुए एहतियातन किया गया है, ताकि विजय माल्या वाले प्रकरण की पुनरावृत्ति न हो।

कई वरिष्ठ अधिकारीयों ने भी दे दिया है इस्तीफा

जेट एयरवेज़ की माली हालत इस समय काफी ख़राब चल रही है। घाटे और कर्जे में डूबी कंपनी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जाँच शुरू किए जाने की भी खबरें आईं हैं। इसके अलावा कंपनी ने अपने स्टाफ की तनख्वाह भी नहीं दी है। 17 अप्रैल से कंपनी की वायुसेवा का परिचालन ठप है।

बड़बोलेपन पर मोदी का अपने ही सांसदों पर कटाक्ष, बोले ‘छपास’ और ‘दिखास’ से बचिए

भाजपा संसदीय दल द्वारा नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा और एनडीए के संसदीय साथियों को संबोधित किया। संदेश में उन्होंने जनता के प्रति सभी उपस्थित सांसदों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया और सांसदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी आश्वासन दिया।

नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत के लोकतांत्रिक जीवन में, चुनावी परंपरा में देश की जनता ने एक नए युग का आरंभ किया है। हम सब उसके साक्षी हैं। भारत के लोकतंत्र को हमें समझना होगा। भारत का मतदाता, भारत के नागरिक के नीर, क्षीर, विवेक को किसी मापदंड से मापा नहीं जा सकता है। हम कह सकते हैं सत्ता का रुतबा भारत के मतदाता को कभी प्रभावित नहीं करता है। सत्ताभाव भारत का मतदाता कभी स्वीकार नहीं करता है।

2014 से 2019 तक देश हमारे साथ चला है, कभी-कभी हमसे दो कदम आगे चला है, इस दौरान देश ने हमारे साथ भागीदारी की है। ये देश परिश्रम की पूजा करता है, ये देश ईमान को सर पर बिठाता है। यही इस देश की पवित्रता है।

मोदी ने पार्टी के बड़बोले नेताओं पर कटाक्ष करते हुए उन्हें बड़ी नसीहत देते हुए कहा, “मैं कहता हूँ कि छपास (छपने का मोह) और दिखास (टीवी पर दिखने के मोह) से बचना चाहिए। इससे बचकर चलें तो खुद भी बचेंगे और दूसरों को भी बचाएँगे। कुछ लोग बड़बोलेपन में कुछ भी बोल देते हैं। मीडिया के लोगों को भी पता होता है कि यह 6 नमूने है, उनके घर के पास पहुँच जाओ कुछ भी बोलेगा।

मोदी ने कहा, “मेरे जीवन के कई पड़ाव रहे, इसलिए मैं इन चीजों को भली-भांति समझता हूँ, मैंने इतने चुनाव देखे, हार-जीत सब देखे, लेकिन मैं कह सकता हूँ कि मेरे जीवन में 2019 का चुनाव एक प्रकार की तीर्थयात्रा थी।”

2019 का चुनाव समता और ममता के भाव से सामाजिक आंदोलन का हिस्सा बन गया: नरेंद्र मोदी

“मुझे संसदीय दल का नेता चुनने के लिए बीजेपी और एनडीए के सभी सांसदों का धन्यवाद” भारत के संविधान को प्रणाम करने के बाद इन्हीं शब्दों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने भाषण की शुरुआत की। भाजपा संसदीय दल द्वारा नेता चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा और एनडीए के संसदीय साथियों को संबोधित किया। संदेश में उन्होंने जनता के प्रति सभी उपस्थित सांसदों की जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया और सांसदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत केंद्रीय और राज्य के चुनाव आयोग और सुरक्षाबलों का इस चुनाव के आयोजन के लिए धन्यवाद के साथ की। नरेंद्र मोदी ने कहा, “सेंट्रल हॉल की यह घटना असामान्य घटना है। हम आज नए भारत के हमारे संकल्प को एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने के लिए एक नई यात्रा को यहाँ से आगे बढ़ाने वाले हैं”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की कुछ प्रमुख बातें

  • आज एनडीए के सभी वरिष्ठ साथियों ने मुझे आशीर्वाद दिया है। आप सबने मुझे नेता के रूप में चुना है, मैं इसे व्यवस्था का हिस्सा मानता हूँ। मैं भी आपमें से एक हूँ, आपके बराबर हूँ, हमें कंधे से कंधा मिलाकर चलना है।
  • भारत के लोकतंत्र को हमें समझना होगा। भारत का मतदाता, भारत के नागरिक के नीर, क्षीर, विवेक को किसी मापदंड से मापा नहीं जा सकता है। हम कह सकते हैं सत्ता का रुतबा भारत के मतदाता को कभी प्रभावित नहीं करता है। सत्ताभाव भारत का मतदाता कभी स्वीकार नहीं करता है।
  • विनोबा भावे कहते थे कि चुनाव बाँट देता है, दीवार खड़ी कर देता है, लेकिन 2019 के चुनाव ने सभी दीवारें गिरा दी हैं।
  • विश्वास की डोर जब मजबूत होती है तो प्रो-इनकम्बेंसी की लहर चलती है।
  • पूरी दुनिया में भारतीयों ने विजय उत्सव मनाया।
  • देश की राजनीति में जो बदलाव आया है, आप सभी ने इसका नेतृत्व किया है। आप सभी का अभिनंदन, लेकिन जो सदस्य पहली बार चुनकर आए हैं उनका विशेष अभिनंदन है।
  • जनप्रतिनिधियों के लिए कोई पराया नहीं हो सकता, दिलों को जीतने जीतने की कोशिश करें।
  • आम तौर पर चुनाव बाँट देता है, दूरियाँ पैदा करता है, दीवार बना देता है, खाई पैदा कर देता है। लेकिन 2019 के चुनाव ने दीवारों को तोड़ने का काम किया है। दिलों को जोड़ने का काम किया है।
  • 2019 का चुनाव सामाजिक एकता का आंदोलन बन गया, समता भी, ममता भी, समभाव भी, ममभाव भी। इस वातावरण ने इस चुनाव को एक नई ऊँचाई दी।

परिणाम के एक दिन बाद ही तृणमूल के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी

लोकसभा चुनाव खत्म होने और नतीजे सामने आने के बाद भी पश्चिम बंगाल में हिंसा लगातार जारी है। जानकारी के अनुसार, नादिया में भाजपा के एक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने इस खबर को साझा करते हुए इस हत्या का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी की इस रक्त और हिंसा की राजनीति का जवाब जनता मौजूदा सरकार को जड़ से उखाड़ कर देगी। बीजेपी बंगाल के ट्विटर ने भी यही आरोप लगाया है कि भले ही चुनाव खत्म हो गया है, लेकिन टीएमसी द्वारा जारी हिंसा से कोई राहत नहीं मिली है।

खबर के अनुसार, जिस भाजपा कार्यकर्ता संतु घोष की गोली मारकर हत्या की गई है, वो हाल ही में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। ये घटना शुक्रवार (मई 24, 2019) की रात की है। गोली लगने के बाद संतु घोष को घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पिछले कई सालों से भाजपा कार्यकर्ता की हत्या के मामले सामने आते रहे हैं। 23 मई की शाम, चुनाव नतीजों के ठीक बाद भी बीजेपी कार्यकर्ताओं को पीटने की घटना की सामने आई थी। चुनावों के अंतिम चरण के एक रात पहले भी भाजपा नेता अर्जुन सिंह को टीएमसी के गुंडों ने गोली मार दी थी। इस दौरान बम भी फेंके गए और दो वाहनों में आग भी लगा दी गई। पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान व्यापक हिंसा के बाद, चुनाव आयोग को राज्य में सातवें चरण के चुनाव के लिए चुनाव प्रचार के समय सीमा में कटौती करने जैसे कड़े कदम उठाने पड़े।

लोकसभा चुनाव में बंपर जीत के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली बीजेपी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल और केरल में मारे गए कार्यकर्ताओं को जीत समर्पित की थी।

दुष्प्रचार से बाज नहीं आ रहा The Wire, समुदाय विशेष के मोदी-समर्थक लोगों को समाज से अलग-थलग करने की कोशिश

मोदी की भीमकाय जीत से शायद विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने सबक ले लिया है (शायद इसीलिए अब तक किसी ‘सेक्युलर’ पार्टी ने इफ्तार पार्टी नहीं दी है), लेकिन द वायर जैसे प्रपोगंडाबाजों ने न सुधरने की कसम खा रखी है। पहले पाँच साल न केवल यह समाचार प्रपोगंडा पोर्टल मोदी को गाली देता रहा बल्कि लोगों को यह भी फुसफुसाता-उकसाता रहा कि भाजपा और मोदी को वोट देने वालों का सामाजिक  बहिष्कार किया जाना चाहिए। हिन्दुओं पर जब इसका असर नहीं हुआ, और भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापिस है, तो अब यही सोशल मॉब-लिंचिंग मोदी-समर्थकों की करने की कोशिश हो रही है ताकि उन्हें चुप कराया जा सके, और समुदाय विशेष को डराना बदस्तूर जारी रहे।

वह महिलाएँ केवल अपनी नहीं, कम-से-कम समुदाय के 70,000 लोगों की प्रतिनिधि हैं  

द वायर के इस गंदले प्रपोगंडे में केवल एक बात तथ्य के आधार पर काटे जाने लायक है, और वह उनका यह दावा कि जिन दो महिलाओं पर उन्होंने यह लेख लिखा, वह अपने अलावा समुदाय के वाराणसी के किसी आदमी की नुमाइंदगी नहीं करतीं। इसका जवाब यूँ दिया जा सकता है:

बनारस में इस बार कुल 10 लाख के करीब वोट पड़े, जिसमें से 6.74 लाख मोदी के खाते में गए। बनारस में समुदाय विशेष का जनसांख्यिक अनुपात करीब 30 प्रतिशत है। यानि वोट देने वालों में लगभग तीन लाख मजहब विशेष से थे। अब, लोकसभा निर्वाचन की घोषणा के पहले, लोकनीति-सीएसडीएस ने एक सर्वेक्षण किया था जिसमें समुदाय के 26 प्रतिशत लोगों ने मोदी सरकार को एक और कार्यकाल दिए जाने से सहमति जताई थी। इसे अगर बनारस की समुदाय विशेष की संख्या पर लागू करें तो कम-से-कम 70,000 की संख्या बनती है मजहब के मोदी-समर्थकों की। यानि वह महिलाएँ 70,000 लोगों की नुमाइंदगी कर रहीं थीं।

और सत्तर हजार लोगों की नुमाइंदगी को, उनकी आवाज़ और उनके मत को सिरे से ख़ारिज करने के लिए वायर केवल समुदाय के दो लोगों की बात सामने रखता है, और उसके आधार हेडलाइन बना देता है कि यह दो मोदी-समर्थक मजहबी महिलाएँ मीडिया का बनाया शिगूफा हैं। लेकिन बात केवल 70,000 बनाम 2 जितनी सीधी नहीं है। अगर लेख को पढ़ेंगे- और सरसरी निगाह की बजाय ध्यान से पढ़ेंगे, तो पंक्तियों के बीच में स्टॉकिंग, धमकी, सब दिखेंगे, ‘फैक्ट्स’ के आवरण में, धमकियों की तलवार subtext में लिए।

खोजी पत्रकारिता के नाम पर स्टॉकिंग

यह सच है कि कई बार खोजी पत्रकारिता और किसी के निजी जीवन में बेजा ताक-झाँक में अंतर बताना मुश्किल हो जाता है, लेकिन द वायर इस लाइन के इर्द-गिर्द नहीं टहलता, बल्कि मर्यादा की सीमा तोड़कर मीलों आगे निकल जाता है। शुरुआत होती है ANI के वीडियो में दिखाई जा रही दो महिलाओं के वर्णन से, जो भाजपा की मजहब विशेष में सुधारवादी नीतियों का बखान करतीं दिखीं थीं मार्च 2017 में। और फिर वायर उनके एक-एक ‘पाप’, जैसे ट्रिपल तलाक से बचने के लिए हनुमान चालीसा पढ़ना, मोदी के लिए राखी बनाना, राम आरती करना, आदि का ‘कच्चा चिट्ठा’ खोल के रख देता है।

यही नहीं, बनारस में उनके घर पहुँचने के लिए किस मोहल्ले जाकर किससे पूछना होगा, इसकी भी विस्तृत जानकारी इस आलेख में है। यह पत्रकारिता नहीं है- स्टॉकिंग है। उनके जरिए मोदी का खुल कर समर्थन करने वाले लोग समुदाय में बढ़ रहे तबके को यह चेतावनी है कि संभल जाओ, मुँह बंद कर लो, वरना तुम्हारा भी पता कट्टरपंथियों को दे देंगे। यह ‘डॉक्सिंग’ का ऑफलाइन संस्करण है। इसी आवरण में लिपटी गुंडागर्दी को नंगा करते हुए ANI की सम्पादिका स्मिता प्रकाश ने ट्वीट कर सवाल उठाए, और उन मजहबी महिलाओं के निजी और सामाजिक जीवन में हस्तक्षेप को ललकारा:

नैरेटिव जर्नलिज़्म का दुरुपयोग  

कहने को कोई कह सकता है कि यह सब तो मामूली बातें हैं- वह महिलाएँ आख़िरकार समुदाय विशेष के लगभग तीस प्रतिशत लोगों वाले बनारस में रहतीं ही हैं, उनकी गतिविधियाँ आखिर ANI समेत कई समाचार माध्यमों में चल ही रहीं थीं, तो वायर के लिख देने से क्या बदल गया? तो साहब, जवाब होगा कथानक, यानि नैरेटिव। नैरेटिव बदला। अब तक मीडिया में इन महिलाओं की चर्चा हो रही थी सम्मानजनक रूप से, इन्हें प्रशासनिक से लेकर सामाजिक समर्थन प्राप्त था। और इसी ताकत के दम पर न केवल वे मजहब में, समुदाय विशेष में सकारात्मक बदलाव की वाहक बन रहीं थीं बल्कि उनकी बढ़ती सामाजिक शक्ति और प्रभाव को देखते हुए उनसे नहीं जुड़े समुदाय के लोगों में भी यह संदेश जा रहा था कि वक्त बदल गया है, अगर ताकत चाहिए, देश-समाज से लेकर गली-मोहल्ले तक अगर प्रभावशाली बनना है तो आगे की राह कट्टरपंथ और मदरसों से नहीं, आधुनिक शिक्षा और देशभक्ति के चौराहों से होकर गुजरती है। द वायर ने इसके ठीक उल्टा संदेश दिया।

बिना कुछ बोले, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर ऐसा कपटी ताना-बाना बुना कि पढ़ने पर पहली बारगी में यह महिलाएँ कोई समुदाय विशेष की बच्चियों (और बच्चों) को शिक्षा देने, बाल-मजदूरी और बाल-विवाह से बचाने, ट्रिपल तलाक से लड़ने वाली सुधारक नहीं, भाजपा और संघ के तलवे चाटने वाली कठपुतलियाँ प्रतीत होतीं हैं। यही नैरेटिव जर्नलिज़्म की ताकत है- बिना अपने मुँह से झूठ बोले सामने वाले के मन में अपना एजेंडा बैठा देना, किसी को हिंसा के लिए उकसा देना तो किसी को धमका देना कि जब चाहें ऐसा ही कुछ लिख देंगे कि शहर भर के नाराज मजहबी भीड़ तुम पर टूट पड़ेगी।

लेकिन द वायर यह भूल रहा है कि ‘ये नया भारत है’ केवल एक सियासी नारा भर नहीं है, बल्कि जमीनी हकीकत है- और मोदी को टूट कर मिला वोट इस बदलाव की केवल एक बानगी है। हिन्दू तो अब बदल ही रहा है, बदल गया है बल्कि, और उनमें भी सुधारवादी आवाज़ें, प्रगतिशील आवाज़ें अब वायर द्वारा सामाजिक-बौद्धिक रूप से, और उसके माई-बापों द्वारा आर्थिक रूप से, पाले जाने वाले मुल्ला-मौलवियों, कट्टरपंथियों की गुलामी और नहीं सहेंगी। इस नए भारत में नफरती चिंटुओं और अनर्गल प्रलाप वाली पत्रकारिता नहीं चलेगी, फर्जी भय का नैरेटिव भी नहीं चलेगा, सो बेहतर होगा वायर प्रपोगंडाबाजी छोड़ या तो सच्चाई प्रतिबिम्बित करने वाली पत्रकारिता सीखने की जहमत उठाए, या दुकान समेटने की तैयारी करे- और यह subtext में छुपी धमकी नहीं, नेक नीयत वाली सलाह है।

दूसरे समुदाय के समर ने भाईयों संग लात-घूँसे, सरिये से कपड़ा व्यापारी को पीटा, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश के मेरठ में दो समुदायों के बीच आपसी विवाद होने की ख़बर सामने आई है। यह घटना भगत सिंह नामक मार्केट में एक कपड़े की दुकान की है, जहाँ आधा दर्जन समुदाय विशेष के लोगों ने कपड़ा व्यापारी की जमपर पिटाई की है। उनकी गुंडागर्दी इस क़दर बढ़ गई कि उन्होंने कपड़ा व्यापारी और सेल्समेन को पीटने के लिए लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो UttarPradesh.ORG के ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया, जो अब वायरल हो चुका है।

मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, यह घटना लोकसभा चुनाव की मतगणना के पहले दिन बुधवार की रात की है। किसी पुराने विवाद को मुद्दा बनाकर दूसरे सम्प्रदाय के लोग कपड़ा व्यापारी की दुकान में जबरन घुसे और फिर लोहे की सरियों और लात-घूँसों से व्यापारी और दुकान में उपस्थित सेल्समैन के साथ मारपीट शुरू कर दी। आसपास के लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत करवाया।

एक अन्य ख़बर के अनुसार, भगत सिंह मार्किट में देव कलेक्शन के नाम से देवराज की कपड़े की दुकान है। इस दुकान पर सचिन नाम का एक लड़का काम करता है। किसी बात को लेकर सचिन और दूसरे समुदाय के समर से विवाद हो गया और बात मार-पिटाई तक पहुँच गई। अगले दिन समर अपने भाईयों के साथ उसी दुकान में जा पहुँचा और गुंडागर्दी शुरू कर दी। इस बीच बीच-बचाव के लिए आगे आए अन्य व्यापारियों को भी समर और उसके भाईयों ने मारा-पीटा।

घटना का एक वीडियो शुक्रवार (24 मई) को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। मारपीट की इस घटना से पूरे क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव का माहौल बना हुआ है। घटनास्थल पर पुलिस के पहुँचने से पहले ही हमलावर वहाँ से भाग गए। सीओ कोतवाली दिनेशचंद्र मिश्रा ने बताया कि मामला दो पक्षों में आपसी विवाद का है। फ़िलहाल, पुलिस ने इसकी जाँच शुरू कर दी है और साथ ही वहाँ पीएसी और पुलिस की तैनाती भी कर दी है।

Breaking News: NDA संसदीय दल के नेता चुने गए नरेंद्र मोदी

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी संसदीय दल के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव का राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी ने समर्थन किया। इसके बाद औपचारिक रूप से अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर से नरेंद्र मोदी के बीजेपी संसदीय दल के नेता चुने जाने की घोषणा की।

बीजेपी संसदीय दल के नेता चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी ने पार्टी संरक्षक लालकृष्ण आडवाणी से आशीर्वाद लिया।

लोकसभा चुनाव में एनडीए को ऐतिहासिक बहुमत मिला है। एक बार फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। जानकारी के मुताबिक, नरेंद्र मोदी 30 मई को शपथ ले सकते हैं। शपथ से पहले पीएम अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी जाएँगे, लेकिन उससे पहले वह अपने गृह राज्य गुजरात जाएँगे। यहाँ मोदी अपनी माँ से जीत का आशीर्वाद लेने भी जाएँगे। इससे पहले शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंपा था। इस इस्तीफे को राष्ट्रपति कोविंद ने मंजूर कर लिया और लोकसभा को भंग कर दिया। राष्ट्रपति ने 16वीं लोकसभा भंग कर दी है।

इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए एनडीए गठबंधन के सभी दलों के नेता पहुँचे हैं। अमित शाह, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह समेत सभी नेता मौजूद हैं।

यह बैठक संसद के सेंट्रल हॉल में शाम 5 बजे शुरु हुई। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा 303 सीटें मिली हैं और राजग (एनडीए) गठगबंधन को 353 सीटें हासिल हुई है। बैठक में शामिल होने के लिए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी पहुँचे।

लोकसभा चुनाव में करारी हार से दुखी ममता बनर्जी ने की इस्तीफे की पेशकश

लोकसभा चुनाव नतीजों में टीएमसी की करारी हार के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वो अब मुख्यमंत्री के रूप में कार्य जारी नहीं रखना चाहती हैं और पार्टी अध्यक्ष के रुप में अपनी सेवा देना चाहती हैं।

ममता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तीफे की पेशकश कर दी है। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी ने यह निर्णय लिया है। हालाँकि, खबरों के मुताबिक ममता बनर्जी की इस्तीफा बैठक में स्वीकार नहीं किया गया है।
टीएमसी पार्टी की आपात बैठक में ममता बनर्जी ने ये बातें कही। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बल ने उनके खिलाफ कार्रवाई की, एक आपात स्थिति पैदा की गई। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम के बीच भेदभाव किया गया साथ ही वोटों की हेराफेरी हुई। ममता दीदी ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग में शिकायत की, लेकिन कोई भी कदम नहीं उठाया गया।

बता दें कि भाजपा ने इस चुनाव में बंगाल में बड़ी सेंध लगाई है और 42 में से 18 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। इस हार की वजह से ममता बनर्जी बौखलाई हुई हैं।