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मोदी की माँ की तस्वीरों से जूतों की कहानी तक, लिबरलों के धुआँ क्यों निकल रहा है

लिबरलों की जो ब्रीड है वो कई मायनों में आपको अचंभित करती है। खुद को स्वघोषित विद्वान मानते हैं, ब्रीड का नाम ही लिबरल है तो खुले विचारों के तो वैसे ही क्लेम करने लगते हैं, हर तरह के ‘वाद’ से परे बताते हैं खुद को, हर तरह के विचारों का सम्मान इनकी प्रस्तावना का हिस्सा है, लेकिन क्या ऐसा सच में है? बिलकुल नहीं, क्योंकि ये सारी परिभाषाएँ और परिमितियाँ तब ही सही होती हैं, जब एक लिबरल ब्रीड वाला, दूसरे लिबरल के बालों को जीभ से चाट रहा हो।

कहने का मतलब यह है कि इस ब्रीड की सारी ख़ासियतें इन पर ही जब लगाई जाएँ तो परिभाषाएँ एक तरफ, इनका आचरण दूसरी तरफ। दोनों में दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं। ये वैसे बॉलर हैं जो नाम के आगे स्पिनर लिखवाते हैं और गेंद की गति 120 से कम नहीं रहती। खेलने वाला यह सोचता है कि गेंद घूमेगी, और गेंद सीधी रहने से वो एलबीडब्ल्यू हो जाता है।

जैसे कि लिबरल ब्रीड का व्यक्ति जब असहिष्णुता का डिबेट शुरू करता है तो वो सिर्फ शब्द पकड़ लेता है। वो ऐसा इसलिए करता है कि इनके व्हाट्सएप्प ग्रुपों में कहा जाता है कि इसको चर्चा में लाना है। भले ही इनकी ब्रीड के पुरोधा लिफ़्टों में लड़कियों का मोलेस्टेशन करते पाए जाते हैं, दंगा फैलाने वाली बातें करते हैं, इन फैक्ट जिनके बाप दंगाई रह चुके हों, पार्टी के काडर दूसरी पार्टियों के लोगों को सरेबाजार काट देते हों, वैचारिक असहमति रखने वाले विरोधियों को नमक की बोरियों के साथ ज़िंदा दफ़ना देते हों, ये जिनके साथ खड़े होते हों, उनके राज्य में हर ज़िला साम्प्रदायिक दंगों से पीड़ित हो, और राजनैतिक हत्याओं का क़ब्रिस्तान बन चुका हो, लेकिन ये कहलाते लिबरल ही हैं।

कहलाने में कोई कमी नहीं रखते। इनके लिए किसी नेता के अपनी माँ के पैर छूना अपनी माँ को राजनीति में घसीटना हो जाता है। मैं मोदी द्वारा अपने पैतृक आवास पर, चुनावों में वोट देने से पहले अपनी माँ के पाँव छूने की तस्वीर की बात कर रहा हूँ। मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं। आज के दौर में जब तैमूर के नैपी देखने को बेताब ये लिबरल ब्रीड के लोग, मोदी की माँ की तस्वीर पर बौखला रहे हैं तो वो कुछ भूल रहे हैं, जो बहुत ही बुनियादी बात है।

चुनावों के दौरान हर रैली की लाइव कवरेज होती है, हर बड़े नेता की हर बात पर मीडिया नजर रखती है। चाहे ज़मानत पर बाहर घूम रहे राहुल गाँधी की ज़मानत पर बाहर घूम रही माता सोनिया गाँधी के नामांकन से पहले उनके आवास पर हो रहे हवन में शामिल ज़मीन डील के आरोपित रॉबर्ट वाड्रा और उनकी पत्नी प्रियंका गाँधी जो स्वयं जमीन मामलों में संलिप्त होने की आरोपित हैं, इन सबकी तस्वीर भी तो आई थी, वो तो बड़ा क्यूट मोमेंट था!

प्रियंका की नाक से लेकर राहुल के जनेऊ तक की तस्वीरों पर लिबरल ब्रीड स्खलित होता रहा, चरमसुख पाता रहा। दक्षिणपंथियों ने तो कभी नहीं कहा कि बहन और जीजा के साथ, भाँजे-भाँजी को राजनीति में खींच रहे हैं ज़मानत पर बाहर चल रहे घोटालों के आरोपित राहुल और घोटालों के आरोपित सोनिया। न तो लिबरलों की ब्रीड ने इस बात पर अपनी नग्नता दिखाई। उस समय तो वो स्वामिभक्ति दिखा रहे थे कि आह राहुल, वाह राहुल, कितने क्यूट डिंपल हैं!

यही अदा तो एक सितम है!

जब आपकी हर मूवमेंट पर मीडिया कैमरा लेकर दौड़ रहा हो, तो आपके पास छुपाने को बहुत कुछ नहीं रहता। दूसरी बात, मोदी के लिए इन बातों का महत्व है। आज के समय में जब लिबरल ब्रीड अपनी माँ-बाप को ओल्ड ऐज होम और वृद्धाश्रमों में भेजने की वकालत करता दिखता हो, जिनके लिए माता-पिता का उनको घरों में होना अपमान की बात हो, उनके लिए ऐसी तस्वीरें आँखों में सौ-सौ सुइयाँ चुभाने वाली तो लगेगी ही।

ये तस्वीर महज़ एक व्यक्ति का अपनी माँ के पैर छूने जैसा नहीं है। ये उन संस्कारों का मूर्त रूप है कि हम चाहे जो भी हो जाएँ, हर शुभ कार्य से पहले उस शक्ति का, उस माता-पिता का आशीर्वाद लेना न भूलें जिनके कर्म और शुभाशीषों ने हमें वो बनाया जो हम हैं। अगर, दिखावे के लिए ही सही, आशीर्वाद लिया जा रहा है, तो भी यह एक प्रतीक है, एक तरीक़ा है उन लाखों बच्चों में अपने माता-पिता के लिए सम्मान का भाव जगाने का।

यहाँ एक छोटी कहानी सुनाना चाहूँगा। दो युवा साधु थे, सामने नदी थी और एक युवती जिसे पार जाना था। युवती को तैरना नहीं आता था, और काफी डर रही थी। साधु ने अपने मित्र से कहा कि वो जा रहा है उसकी मदद करने। पहले साधु ने कहा कि स्त्री को छूने से ब्रह्मचर्य नष्ट हो जाएगा। दूसरे ने कहा कि मन में पाप न हो तो ब्रह्मचर्य क्योंकर नष्ट होगा। पहला अड़ा रहा कि वो तो मदद नहीं करेगा।

दूसरे ने युवती से अनुमति माँगी और उसे कंधे पर लेकर नदी को पार कर गया। युवती ने साधु का धन्यवाद किया और अपने रास्ते चली गई। दोनों साधु आश्रम पहुँचे। पहला साधु गुरु के पास गया और सारी बात बताई कि उसके साथी ने युवती को कंधे पर लाद कर नदी पार करा दी। गुरुदेव ने कहा, “तुम्हारे साथी ने तो युवती को वहीं पार करा दिया, और तट पर ही छोड़ आया, लेकिन तुम तो उसे अभी भी कंधे पर लिए चल रहे हो।”

उसी तरह, मोदी ने तो माताजी का आशीर्वाद लिया और चले गए, लेकिन लिबरल ब्रीड अभी भी उस तस्वीर को अपने वीआर हेडसेट का वालपेपर बनाए पागल हो रहा है। मोदी रैली में व्यस्त है, इंटरव्यू खत्म हो गया, लेकिन लिबरल ब्रीड कंधे पर लेकर घूम रहा है। लिबरलों के पोस्टर ब्वॉय लिंगलहरी कन्हैया की गरीब माँ पर खूब आहें निकलीं, कैमरा तो उसके घर में भी घुसा था, उसके घर का राजनीतिकरण हुआ कि नहीं?

अक्षय कुमार द्वारा लिए गए नॉन-पोलिटिकल इंटरव्यू में अपने कैनवस जूतों के बारे में बताने पर भी कई लोग मानसिक रूप से परेशान हो गए हैं और फिर चाय बेचने वाली बात को ले आए। ये बातें उनकी वैचारिक नग्नता का परिचायक हैं कि तुम चुनावों में मोदी की ही पिच पर घूमते रहो, मोदी आया, बैटिंग की, खूब धोया और निकल गया। तुम घास छू कर पगलाते रहो। तुम खेल को खेल के समय, उसके नियमों के मुताबिक़ मत खेलो, तुम उसे अपने पूर्वग्रहों के आधार पर, खेल की समाप्ति के बाद खेलो।

ज़ाहिर है कि विरोधियों की हालत फिर वैसी ही होगी, जैसी है। उन्हें सिर्फ नकारने के लिए और उनकी नग्नता पर ध्यान खींचने के लिए लोग याद करते हैं। यह समय चुनावी मुद्दों पर मोदी के बयानों के पोस्टमार्टम में जाता, तो एक डिबेट हो सकती थी। एक चर्चा का जन्म होता, जिस पर लोग राय रखते। लेकिन लिबरल गैंग और मीडिया गिरोह इस बात पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है कि मोदी चाय बेचता था कि नहीं, उसके जूतों पर चॉक रगड़ता था कि नहीं।

अपनी माँ के पैर छूना कोई अवगुण नहीं, न ही गरीब परिवार में पैदा होना और उस गरीबी को आजीवन याद रखना। लोग तो थोड़ा पैसा या पद पाते ही अपने भूत को मिटाने की हर संभव कोशिश करते हैं। लेकिन मोदी उसे अपना संबल बना कर, दूसरों के लिए एक प्रतीक बन कर आया है कि हर व्यक्ति अपने जीवन में मेहनत, लगन, उत्साह और जीवटता से जो चाहे पा सकता है।

लिबरल ब्रीड भी मेहनत, लगन, उत्साह और जीवटता दिखा रही है, लेकिन उनका लक्ष्य एक व्यक्ति से घृणा है। समाज के लिए ऐसे लोग भी ज़रूरी हैं, ऐसे प्रतिमान भी समाज में होने चाहिए जिसे आम जनता देखे तो कहे कि आदमी मर जाए, लेकिन ऐसा घृणित जीवन जीना पसंद न करे।

पुलवामा से भी बड़े फिदायीन हमले की साजिश नाकाम, कश्मीरी छात्र हिलाल अहमद गिरफ्तार

भटिंडा की सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब से एम एड कर रहे एक कश्मीरी छात्र को जम्मू कश्मीर की पुलिस ने मंगलवार (अप्रैल 23, 2019) को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। इस छात्र का नाम हिलाल अहमद है और इस पर आरोप है कि ये पुलवामा हमले की तरह ही सीआरपीएफ के काफिले में घुसकर बम धमाका करने की प्लानिंग कर रहा था। कश्मीरी छात्र हिलाल अहमद की गिरफ्तारी की पुष्टि भटिंडा के एसएसपी नानक सिंह ने की है।

जानकारी के मुताबिक, हिलाल 30 मार्च 2019 को जम्‍मू-कश्‍मीर के बनिहाल में आत्‍मघाती कार बम हमले की योजना बनाने में शामिल था। बता दें कि आतंकवादियों की 30 मार्च 2019 को बनिहाल में पुलवामा हमले की तर्ज पर एक सेंट्रो कार में विस्‍फोटक भरकर सीआरपीएफ काफिले पर हमले की योजना थी। लेकिन आतंकवादी धमाके से पहले ही विस्‍फोटकों से भरी कार छोड़कर भाग गए।

हिलाल अहमद पुलवामा में हुए धमाकों में भी टाडा के तहत नामजद है। उसका संबंध हिजबुल मुजाहिद्दीन की ब्रांच इस्लामी जमात तोलबा के साथ है और जम्मू-कश्मीर पुलिस काफी समय से उसकी तलाश कर रही थी। मंगलवार (अप्रैल 23, 2019) को सुबह जब जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी इफ्तीकार की अगुआई में पुलिस केंद्रीय यूनिवर्सिटी पहुँची, तो यूनिवर्सिटी के प्रबंधक हैरान रह गए। इस दौरान पुलिस ने हिलाल अहमद की गिरफ्तारी के वारंट दिखाए, जिसके बाद प्रबंधकों ने उसे बुलाकर पुलिस के हवाले कर दिया।

इस बार पुलवामा से भी दोगुनी ज्यादा क्षमता वाला आईईडी लगाया गया था, जिसमें 100 जवानों को मारने का टारगेट था। मगर आखिरी वक्त पर सुरक्षाकर्मियों को देखकर हिलाल डर गया और विस्फोटकों से भरी कार छोड़कर फरार हो गया, जिससे वो अपनी साजिश में असफल हो गया। बता दें कि बनिहाल पुलिस ने 30 मार्च को ही आईपीसी की धाराओं 307, 120, 120ए, 121, 121ए, और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर के पुलमवामा में 14 फरवरी को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने सीआरपीएफ के जवानों पर फिदायीन हमला किया था, जिसमें 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए।

फैक्ट चेक: ‘आतंकी’ की ‘फर्जी’ फोटो वायरल करवा मुफ्ती-शेहला कर रहीं रहम की अपील, कश्मीर बंद का ढोंग

अलगाववादी ‘आतंकवादी’ नेता यासीन मलिक इन दिनों टेरर फंडिंग केस में NIA की ट्रांज़िट रिमांड पर तिहाड़ जेल में कैद है। दर्जनों हत्या के केस होने के बावजूद भी 30 सालों तक यासीन मलिक ने कभी अपनी शानो-शौकत में कमी नहीं आने दी थी। लेकिन मोदी सरकार के दौरान समीकरण कुछ उल्टे नजर आने लगे हैं।

यासीन मलिक को इस बार जब तिहाड़ का मुँह देखना पड़ा, तो तुरंत उसे महात्मा गाँधी जी याद आ गए। यासीन मलिक ने गिरफ्तारी के विरोध में खाना-पीना छोड़ दिया है। 2-3 दिन में ही यासीन मलिक की हालत पस्त हो गई, जिसके चलते 16 अप्रैल को यासीन मलिक को दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा था।

इस बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर ‘वायरल’ की जा रही है, जिसके कारण JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद से लेकर कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती तक का दिल दुखा है और वो यासीन मलिक को इस फर्जी तस्वीर के अनुसार मिलने वाली यातनाओं के खिलाफ सरकार से रहम की अपील कर रही हैं।

सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ की जा रही इस तस्वीर में यासीन मलिक की दयनीय हालत देखकर कश्मीर में महबूबा मुफ्ती, फारूख अब्दुल्ला और ताजा-ताजा नेता बनीं शेहला रशीद ने अश्रु बहाने शुरू कर दिए हैं। तीनों ने अलगाववादी ‘आतंकी’ नेता को न सिर्फ मानवीय आधार पर छोड़ने की अपील का कैंपेन शुरू कर दिया है, बल्कि सोशल मीडिया पर खुलेआम यासीन मलिक के पक्ष में माहौल भी बना रहे हैं। महबूबा मुफ्ती ट्वीट के जरिए या फिर मीडिया बाइट्स देते वक्त दिन में कई बार यासीन मलिक को छोड़ने की गुहार लगाती दिख रही हैं।

उधर अलगावावादी गिरोह हुर्रियत ने भी घाटी में बंद की घोषणा कर रखी है। हालाँकि, घाटी में इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके अनंतनाग में उम्मीद से कहीं बेहतर वोटिंग हुई है। साफ है कि कश्मीरी नेता भले ही पाकिस्तानी प्रोपगैंडा फैलाने में व्यस्त हों, लेकिन स्थानीय लोग इससे ऊब चुके हैं।

क्या है तस्वीर का सच?

सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही अलगाववादी ‘आतंकवादी’ यासीन मलिक की टूटी हुई हड्डी वाली तस्वीर वर्ष 2016 की है, जब आतंकवादी बुरहान वाणी के मारे जाने से नाराज अलगावादियों ने घाटी में उत्पात मचाने की कोशिश की थी। जेल जाते ही बीमार हो जाना यासीन मलिक और सजायाफ्ता कैदी लालू यादव का पुराना तरीका रहा है। इसलिए इस प्रकार की उनकी तस्वीरें देखकर एक बार जरूर सोचा जाना चाहिए कि यह आखिर किस समय की रही होगी। सोशल मीडिया पर अपनी जैसी मानसिकता के लोगों को द्रवित करने के लिए आतंकवादियों के नेता अक्सर ऐसी तस्वीरों का सहारा लेते हैं, ताकि देश के नामी संस्थानों में बैठे समान मानसिकता और विचारधारा वाले उनके अनुयायी और फ्रीलांस प्रोटेस्टर इनके पक्ष में माहौल तैयार करना शुरू कर दें।

यासीन मलिक की यह तस्वीर 2016 से भी पुरानी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तानी समाचार प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित खबर की वास्तविकता पर यकीन नहीं किया जा सकता है। लेकिन यह तो निश्चित है कि यह तस्वीर यासीन मालिक के इस बार यानी 2019 के अस्पताल दौरे की नहीं है।

यासीन मलिक को छोड़ने के इस कैंपेन की शुरुआत पाकिस्तान में बैठी यासीन मलिक की पत्नी मशाल मलिक ने की है, जो सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ कैंपेन चलाती रहती है। मशाल मलिक यासीन मलिक के स्वास्थ्य का बहाना बनाकर एंटी-इंडिया भावनाएँ भड़काने की कोशिश में लगी रहती है। कश्मीर में बैठे नेता मशाल के कैंपेन को आगे फैलाने में मदद कर रहे हैं। देखिए शेहला रशीद का ट्वीट, ताकि उनका दर्द समझने में सहायता मिले।

BJP ने नहीं दिया टिकट तो कॉन्ग्रेस में गए उदित राज; हटाया, लगाया, फिर हटाया ‘चौकीदार’

नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से भाजपा के टिकट पर सांसद बने उदित राज कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए हैं। भाजपा ने मंगलवार (अप्रैल 23, 2019) को उदित राज का टिकट काट दिया था। नॉर्थ वेस्ट सीट के लिए टिकट जारी करने में हुई देरी के बाद से ही उदित राज पार्टी से नाराज़ चल रहे थे। उन्होंने पहले ही ऐलान कर दिया था कि अगर उन्हें टिकट नहीं मिलता है तो वो भाजपा को ‘गुड बाई’ कह देंगे। टिकट काटने के बाद उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से अपने नाम से ‘चौकीदार’ शब्द हटा लिया था। इसके बाद कल दोपहर तक उन्होंने फिर से अपने नाम में ‘चौकीदार’ लगा लिया। तब लोगों को लगा कि सब कुछ ठीक हो गया है और उदित राज मान गए हैं। लेकिन अब उनके कॉन्ग्रेस में शामिल होने की ख़बर आ रही है। वैसे उदित राज ने पहले ही बयान देते हुए कहा था कि उन्हें राहुल गाँधी और केरीवाल ने टिकट कटने को लेकर पहले ही आगाह किया था।

इससे पता चलता है कि वो शायद पहले से ही आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के साथ संपर्क में थे। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से भाजपा ने पंजाबी गायक व सूफी संगीत के लिए प्रसिद्ध हंस राज हंस को अपना उम्मीदवार बनाया है। हंस राज हंस ‘सिली-सिली हवा’, ‘दिल टोटे-टोटे’ और ‘नित खैर मँगा’ जैसे चार्टबस्टर गानों के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं। हंस राज हंस को संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री भी मिल चुका है। वाल्मीकि समुदाय से आने वाले हंस राज हंस कॉन्ग्रेस से भाजपा में आए हैं। उन्हें टिकट देने के लिए भाजपा ने उदित राज का टिकट काटा है। उदित राज के टिकट कटने के पीछे कई वजहें थी।

उदित राज लगातार विवादित बयान देकर चर्चा में रहे हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस में शामिल होने के बाद कहा कि उन्हें अब ख़ुशी का अनुभव हो रहा है। चूँकि कॉन्ग्रेस दिल्ली के सातों सीटों से उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर चुकी है, ऐसे में उदित राज के दिल्ली से चुनाव लड़ने की सम्भावना नहीं ही है। अब देखना है कि कॉन्ग्रेस में उन्हें कौन सा पद दिया जाता है।

नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से हंस राज हंस का मुक़ाबला कॉन्ग्रेस उम्मीदवार राजेश लिलोठिया से होगा। आम आदमी पार्टी से गठबंधन के विरोधी रहे लिलोठिया दिल्ली कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। आप से यहाँ गुगन सिंह लड़ रहे हैं जो 2017 में भाजपा छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। जालंधर से ताल्लुक रखने वाले हंस राज हंस ने 2016 के अंत में भाजपा जॉइन की थी। उन्होंने कॉन्ग्रेस में शामिल होने के कुछ महीनों बाद ही उसे छोड़कर भाजपा जॉइन की थी। भाजपा में शामिल होने के बाद हंस राज हंस ने कहा था, “मेरी इमेज के हिसाब से जहाँ मेरी ड्यूटी लगाई जाएगी, वहाँ करूँगा। जहाँ मोदी जी हैं, कमजोरी नहीं हो सकती। वह बब्बर शेर हैं।

अतीक अहमद जाएँगे गुजरात के जेल में: 5 बार विधायक और एक बार के सांसद पर चला SC का ‘डंडा’

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (अप्रैल 23, 2019) को पूर्व सांसद और ‘गुंडा’ (मेनस्ट्रीम मीडिया ऐसे लोगों के लिए बाहुबली शब्द का इस्तेमाल करती है, जो निंदनीय है) अतीक अहमद व उसके साथियों द्वारा रियल एस्टेट डीलर मोहित जायसवाल के कथित अपहरण और अत्याचार के मामले में सीबीआई जाँच का आदेश दिया है। यह आदेश चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के नैनी जेल में बंद अतीक को गुजरात के जेल में ट्रांसफर करने का भी आदेश है। अतीक अहमद को कुछ दिन पहले ही नैनी जेल लाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद के खिलाफ सभी लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने के साथ ही इस मामले में सभी गवाहों को संरक्षण देने के लिए भी कहा है। सर्वोच्‍च अदालत ने अतीक अहमद के खिलाफ लंबित 106 मामलों में उत्तर प्रदेश प्रशासन से चार हफ्ते में स्‍टेटस रिपोर्ट माँगी है। कोर्ट ने लापरवाही बरतने वाले जेल अधिकारियों को निलंबित किया और उसके खिलाफ मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए भी कहा है।

गौरतलब है कि अतीक अहमद पर आरोप है कि दिसंबर 2018 में देवरिया जेल में बंद रहने के दौरान अतीक ने अपने साथियों के द्वारा लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र के निवासी मोहित जायसवाल को अपहरण करवा लिया और फिर जेल में ले जाकर उसके साथ मारपीट की गई। मोहित का आरोप है कि इस दौरान उनसे संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करा लिए गए। राज्य सरकार ने भी इस घटना की पुष्टि की थी और कहा था कि उस दिन जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। 5 बार विधायक और एक बार सांसद रहे अतीक अहमद 11 फरवरी, 2017 से जेल में बंद हैं। अतीक के खिलाफ 1979 से 2019 तक कुल 109 केस लंबित है।

VIDEO: जब राह चलते काले कुत्ते को दिख गया कॉन्ग्रेस का झंडा, फिर गुस्से में उसने…

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो को शेयर करते हुए लोग कह रहे हैं कि आदमी तो छोड़िए, जानवर भी अब कॉन्ग्रेस से तंग आ चुके हैं। दरअसल, इस वीडियो में एक अकेले कुत्ते को कॉन्ग्रेस का झंडा दिख जाता है। इसके बाद वो कुत्ता उस झंडे को नोच डालने के लिए बेचैन हो उठता है। वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि कुत्ता झंडे को उखाड़ने की कोशिश कर रहा है और अंततः वह झंडे के कपड़े को अपने मुँह से नोचकर अलग कर देता है। इसके बाद कुत्ते ने उस झंडे को ज़मीन पर घसीट कर गन्दा भी किया। लोग इस वीडियो को देख ख़ूब मज़े ले रहे हैं। आप भी देखिए।

वीडियो के अंत में देखा जा सकता है कि कुत्ते ने कॉन्ग्रेस के झंडे को सीढ़ियों पर यूँ ही छोड़ दिया और फिर निकल गया। एक यूजर ने लिखा कि आजकल भारत में कुत्ते भी होशियार हो गए हैं। ये तो थी सोशल मीडिया पर मज़ाक की बातें। अगर गम्भीरतापूर्वक कहें तो राजनीतिक दलों को अपने झंडों का ध्यान रखना चाहिए। इन्हें इधर-उधर यूँ ही नहीं छोड़ना चाहिए और लगाना भी चाहिए तो उचित ऊँचाई देख कर।

LS चुनाव 2019 में रचा इतिहास: BJP ने वो कर दिखाया जो आज तक सिर्फ कॉन्ग्रेस ही करती आई थी

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब भाजपा कॉन्ग्रेस से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 2019 का लोकसभा चुनाव कई मायनों में अहम है और ये पिछले सारे चुनावों से अलग भी है। जहाँ पहले कॉन्ग्रेस का ही चारो तरफ़ दबदबा होता था और दक्षिण से लेकर उत्तर-पूर्व तक कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन के लिए क्षेत्रीय दल बेचैन रहते थे, वहीं अब पार्टी को गठबंधन में सीटें ही नहीं दी जा रही है। यूपी में कॉन्ग्रेस को महागठबंधन से निकाल बाहर किया गया और बिहार में काफ़ी मशक्कत के बाद जूनियर पार्टनर के रूप में रखा गया। इसके विपरीत भाजपा को हर राज्य में सहयोगी मिले हैं और पहले के दिनों में विरोधियों ने उस पर जो ‘अछूत’ का ठप्पा लगाया था, वो अब हट गया है। नरेंद्र मोदी को 2014 में मिले स्पष्ट जनादेश ने सब कुछ बदल कर रख दिया है।

भारतीय जनता पार्टी आज दुनिया की सबसे बड़ी लोकतान्त्रिक पार्टी बन गई है। भाजपा द्वारा इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारना पार्टी की बढ़ती पहुँच, स्वीकार्यता और प्रभाव का परिणाम है, तो कॉन्ग्रेस का कम सीटों पर चुनाव लड़ना यह बताता है कि पार्टी में अब पुराना दम-खम नहीं रहा। अभी तक घोषित हुई उम्मीदवारों की सूची पर गौर करें, तो भाजपा ने अब तक 437 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है, जबकि कॉन्ग्रेस ने 423 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की सूची जारी की है। चूँकि अब इक्के-दुक्के सीटों पर ही उम्मीदवारों के नामों का ऐलान बाकी है, ये तय हो गया है कि भाजपा इस बार कॉन्ग्रेस से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

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हमेशा से कॉन्ग्रेस को पैन-इंडिया पार्टी माना जाता रहा है और जनसंघ से निकली भाजपा को राष्ट्रीय स्तर का पार्टी नहीं समझा जाता था। 1998 और 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पार्टी की जीत के बावजूद दक्षिण भारत, बंगाल और उत्तर-पूर्व में पार्टी की स्थिति कमज़ोर होने के कारण इसे काऊ बेल्ट या हिंदी बेल्ट की पार्टी कहकर चिढ़ाया गया। आज स्थिति ये है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के ग्रोथ रेट ने सबको मात दे दी है और उत्तर-पूर्व की सभी राज्यों से कॉन्ग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में भी भाजपा सफल हुई है। तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी अन्नाद्रमुक के रूप में दक्षिण भारत में एक अहम सहयोगी मिला है।

हिंदी बेल्ट में भाजपा पहले से कहीं और मज़बूत होकर उभरी है। कॉन्ग्रेस के नेताओं का कहना है कि भाजपा के कई सहयोगी दल अलग हो गए हैं। देखा जाए, तो कश्मीर में पीडीपी और आंध्र में टीडीपी ऐसी अहम पार्टियाँ रहीं जिन्होंने राजग गठबंधन से किनारा किया, लेकिन बिहार में जदयू और महारष्ट्र में शिवसेना जैसे पुराने सहयोगियों के वापस आ जाने या साथ बनाए रहने से भाजपा को मज़बूती मिली है। 1999 में भाजपा ने 339 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें 182 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, 2004 में भाजपा ने 364 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस दौरान कॉन्ग्रेस ने 414 सीटों पर चुनाव लड़ भाजपा को पीछे छोड़ दिया था।

2014 के पिछले आम चुनाव में भी भाजपा ने कॉन्ग्रेस से कम सीटों पर ही चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में भाजपा ने 428 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जबकि कॉन्ग्रेस ने 464 उम्मीदवारों को टिकट दिया था। 2009 में दोनों दलों के उम्मीदवारों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं था। उस वक़्त भाजपा ने 433 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, तो कॉन्ग्रेस ने 440 उम्मीदवारों को टिकट दिया था।

326 रन, 20 ओवर: 2 शतक, 30 छक्का – 25 गेंद में सेंचुरी ठोक बनाया नया World Record

डीए मिलर और रोहित शर्मा 35-35 गेंदों में शतक ठोक कर विश्व रिकॉर्डधारी हैं अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट के। आधिकारिक क्रिकेट मैचों की बात करें तो 2013 में क्रिस गेल ने पुणे वॉरियर्स के खिलाफ RCB की ओर से खेलते हुए 30 गेंदों में शतक जड़ दिया था। लेकिन जॉर्ज मुनसे (George Munsey) ने मात्र 25 गेंदों में सेंचुरी मार इन बड़े नामों को पीछे धकेलते हुए सनसनी मचा दी है।

ग्लोसेस्टरशर सेकंड XI टीम Vs बाथ सीसी टीम

जॉर्ज मुनसे ने अपनी टीम ग्लोसेस्टरशर सेकंड XI की ओर से ओपनिंग की। उनके साथी ओपनर थे जीपी विलोज़। जॉर्ज मुनसे ने शुरू से ही अटैकिंग क्रिकेट खेली और मैदान में जलजला ला दिया। इसका प्रमाण नीचे का ट्वीट है। जलजला इसलिए क्योंकि जब 13.2 ओवर में आउट होकर गए तो सिर्फ 39 गेंदों में 147 रन बना चुके थे – 20 छक्के और 5 चौकों के साथ। जबकि उनके साथी ओपनर भी तब तक 35 गेंद खेल चुके थे लेकिन उनका स्कोर था मात्र 72 रन।

धीमा-तेज-धीमा

स्कॉटलैंड के बल्लेबाज जॉर्ज मुनसे ने वैसे तो काफी तेज खेल शुरुआत से ही दिखाया लेकिन पहला अर्द्धशतक उन्होंने ‘धीमा’ खेलते हुए बनाया – 17 गेंदों में। फिर न जाने क्या हुआ और किन-किन गेंदबाजों के साथ हुआ, अगले 8 गेंदों में उनका शतक बन चुका था। मतलब कुल 25 गेंदों में शतक – मतलब दूसरा अर्द्धशतक भयंकर ‘तेज’ खेलते हुए। इसके बाद के 47 रन उन्होंने 14 गेंदों में बनाया – ‘धीमा’ खेलते हुए।

कुछ ऐसे ढाया जॉर्ज मुनसे ने कहर

50 से 100 रन के बीच में जॉर्ज मुनसे ने युवराज सिंह वाला कारनामा भी किया – एक ओवर में 6 छक्के लगाने का। जिस गेंदबाज को शिकार बनाया, वो थे – ए हेवेट।

टीम ने भी दिया साथ

जॉर्ज मुनसे के साथी ओपनर जीपी विलोज़ ने भी शानदार खेल दिखाते हुए 59 गेंदों में 115 रन बनाए। मुनसे के आउट होने के बाद आए टीजे प्राइस ने भी 23 गेंदों में 50 रन बनाए। तीनों बल्लेबाजों ने पिच पर जो धुआँ-धुआँ किया, उसके दम पर ग्लोसेस्टरशर सेकंड XI टीम ने 20 ओवर में 326 रन का ODI टाइप स्कोर बना डाला।

गेंदबाजों ने भी बाथ सीसी टीम को बांधे रखा। उनकी पूरी टीम मात्र 214 रन बना पाई और 112 रनों से हार गई।

PS: यह एक नॉन-ऑफिशियल मैच था। जानकारी इसलिए ताकि गेल-शर्मा के फैन हल्ला न मचाने लगें कि अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की तुलना लोकल खिलाड़ियों से क्यों की जा रही है। क्योंकि वो ये मानने को तैयार नहीं होंगे कि खिलौने से खेलते-खेलते बच्चे जवान हो जाते हैं। क्योंकि वो शायद ये भी मानने को तैयार नहीं होंगे कि भले ही यह एक नॉन-ऑफिशियल मैच था लेकिन रिकॉर्ड ऐसा तगड़ा ICC को भी ट्वीट करना पड़ गया।

EVM के बारे में झूठ फैलाने और नकली शिकायत पर होगी जेल, केरल में हुआ एक अरेस्ट

केरल के तिरुवनंतपुरम में एक युवक को गिरफ़्तार कर लिया गया है। उसने यहाँ एक बूथ पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ख़राब होने की शिकायत की थी लेकिन जाँच में उसकी शिकायत झूठी पाई गई। पुलिस के अनुसार, बिन बाबू नामक व्यक्ति पर धारा 177 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। जब उसने इवीएम में गड़बड़ी को लेकर शिकायत की थी, तब निर्वाचन अधिकारियों ने ‘टेस्ट वोटिंग’ की। टेस्ट वोटिंग में उक्त युवक द्वारा कही गई बातें झूठ निकलीं और अंततः उसे गिरफ़्तार कर लिया गया। हालाँकि, बाद में उसे ज़मानत पर रिहा भी कर दिया गया।

उक्त युवक ने शिकायत की थी कि उसने एक विशेष उम्मीदवार को वोट दिया था लेकिन वीवीपैट में किसी अन्य उम्मीदवार को वोट जाता हुआ दिखा। इसके बाद पीठासीन अधिकारियों व पोलिंग एजेंट्स की मौजूदगी में एक ‘टेस्ट वोटिंग’ आयोजित किया गया। इसमें युवक के आरोप सरासर झूठे पाए गए। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि ईवीएम को लेकर बढ़ रहे अफवाहों के मद्देनज़र उक्त युवक को पुलिस को सौंप दिया गया। क्षेत्र के सांसद शशि थरूर ने भी ईवीएम में गड़बड़ियाँ होने की बातें कही थीं।

केरल में कल तीसरे चरण के तहत मतदान हुआ, जिसमें शशि थरूर और राहुल गाँधी की सीटें भी शामिल हैं। राज्य की सभी 20 लोकसभा सीटों पर मंगलवार (अप्रैल 24, 2019) को मतदान संपन्न करा लिया गया। राहुल गाँधी इस बार अमेठी के अलावा वायनाड सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर 2014 में 73% वोटिंग हुई थी लेकिन 2019 में कल 79% मतदान हुआ। 6 बजे शाम तक पूरे केरल में 69% लोगों ने अपना मताधिकार का प्रयोग कर लिया था।

इस बीच राजनीतिक दलों द्वारा ईवीएम पर सवाल उठाना शुरू हो गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि गोवा में दोषपूर्ण ईवीएम सभी वोट्स भाजपा को ही ट्रांसफर कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये इस तरह से प्रोग्राम किए गए भी हो सकते हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तो चुनाव आयोग को ही भाजपा की शाखा बता दिया। उन्होंने कहा कि असंवेदनशील, अवास्तविक, गैरजिम्मेदार और बेकार चुनाव आयोग ने लोकतंत्र का मज़ाक बना कर रख दिया है। उन्होंने राज्य में 4500 ईवीएम ख़राब होने की बात कही।