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राजीव ने ‘शाही छुट्टियों’ के लिए तो नेहरू ने लेडी माउंटबेटन के ‘सम्मान’ में किया था नेवी वॉरशिप का निजी उपयोग

प्रधानमंत्री मोदी के कल एक खुलासे ने चुनावी माहौल में तब हलचल मचा दी जब उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे राजीव गाँधी ने अपने निजी उपयोग के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल किया। युद्धपोत का उपयोग गाँधी परिवार को 10 दिनों की लंबी छुट्टी के लिए लक्षदीप द्वीप समूह के एक छोटे से निर्जन द्वीप पर एक निजी टैक्सी की तरह ले जाने के लिए किया गया था।

पीएम ने 1987 में गाँधी परिवार की छुट्टी का जिक्र किया। मेहमानों की सूची में राजीव गाँधी के साथ, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका और उनके चार दोस्त, सोनिया गाँधी की माँ, उनके भाई और एक मामा शामिल थे। साथ ही तब के सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया बच्चन और उनके बच्चे, अमिताभ के भाई अजिताभ की बेटी और पूर्व मंत्री अरुण सिंह के भाई बिजेंद्र सिंह की पत्नी और बेटी भी मौजूद थे। छुट्टी का स्थान बंगारम था, जो लक्षद्वीप द्वीपसमूह में एक छोटा निर्जन द्वीप है। उस समय भारतीय नौसेना के एकमात्र वाहक आईएनएस विराट का इस्तेमाल गाँधी परिवार और उनके साथियों के परिवहन के लिए किया गया था, जो इस छुट्टी के लिए 10 दिनों के लिए अरब सागर में चले गए थे। बता दें कि एक विमान वाहक युद्धपोत अकेले समुद्र में नहीं चलता है, यह हमेशा कई युद्धपोतों से घिरा रहता है। यहाँ तक ​​कि एक पनडुब्बी भी यात्रा के दौरान मौजूद थी। इसका मतलब इस शाही छुट्टी का खर्च बहुत तगड़ा था।

जैसा कि द्वीप निर्जन था, मेहमानों के लिए आवश्यक सभी चीजों को अन्य स्थानों से ले जाने की भी आवश्यकता थी। लक्षद्वीप प्रशासन ने 10-दिवसीय अवकाश के लिए सभी शाही इंतज़ाम किए, और इस उद्देश्य के लिए लक्षद्वीप प्रशासन के हेलीकॉप्टर को सेवा में लगाया गया।

नई पीढ़ी के लिए यह खुलासा ही अपने आप में आश्चर्यजनक है। लेकिन आपको जानकर और हैरानी होगी कि अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए नौसेना की संपत्ति का उपयोग करने की परंपरा राजीव गाँधी द्वारा शुरू नहीं की गई थी। कायदे से जवाहरलाल नेहरू ने इस चलन की शुरुआत की थी। राजीव ने तो इस ‘पुश्तैनी’ परंपरा को बस आगे बढ़ाया था।

प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सबसे पहले ऐसी शाही परंपरा की शुरुआत करते हुए INS देल्ही (INS Delhi) का इस्तेमाल अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने के लिए किया था। उसकी अब जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनसे भी यह बात साफ पता चलती है कि नेहरू ने उस आईएनएस देल्ही का इस्तेमाल किया था, जो 1933 में नौसेना के लिए बनाया गया एक हल्का क्रूजर था। इसे ब्रिटिश राज में एचएमएस अकिलिस के नाम से जाना जाता था। 1950 में अपने परिवार के साथ छुट्टी मनाने के लिए इसी वॉरशिप का इस्तेमाल नेहरू ने किया था।

इन फोटोज में नेहरू के साथ इंदिरा गाँधी और उनके बच्चों संजय गाँधी और राजीव गाँधी की मौजूदगी को देखा जा सकता है।

1950 में ही भारतीय नौसेना की संपत्ति का दुरुपयोग करने की परंपरा जवाहरलाल नेहरू के साथ शुरू हुई थी। यह एक ऐसी घटना है, जिस पर शायद ही कभी बात की गई हो, जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि किस तरह नेहरू के पूरे परिवार ने अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए भारतीय संपत्ति के निजी इस्तेमाल की अनोखी परंपरा की शुरुआत की थी।

जवाहरलाल नेहरू और एडविना माउंटबेटन के बीच का संबंध कोई रहस्य नहीं है। एक लेख में माउंटबेटन को “आदमखोर” तक कहा गया था। यहाँ “आदमखोर” से संबंध उनके पर-पुरुष प्रेम से था। डेली मेल ने अपने इस आर्टिकल में बताया है कि कैसे माउंटबेटन को नेहरू से प्यार हो गया था और कैसे उनके बच्चों के प्रति वो समय-समय पर प्रेम प्रदर्शित करते रहते थे।

माँ एडविना को लेकर उनकी बेटी पामेला ने कहा, “वह पंडितजी (नेहरू) में साहचर्य और समझ को देखती है, जिसके लिए वह तरसती थी। दोनों ने एक-दूसरे के अकेलेपन को दूर करने में मदद की।”

एडविना की इच्छा समुद्र में दफन होने की थी और जब 1960 में उनकी मृत्यु हुई, तो उनके शव को पोर्ट्समाउथ लाया गया। प्रिंस फिलिप की माँ, ग्रीस की राजकुमारी एंड्रयू सहित परिवार के लोगों के साथ ताबूत को एचएमएस “वेकफुल” पर सवार किया गया था। कैंटरबरी के आर्कबिशप, लॉर्ड माउंटबेटन और उनकी दो बेटियाँ भी राजकुमार प्रिंस फिलिप के साथ थीं। पोर्ट्समाउथ से 12 मील की दूरी पर, ‘वेकफुल के’ इंजनों को रोक दिया गया था, और अंतिम शब्द बोले गए। फिर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

जब 59 वर्ष की आयु में एडविना की मृत्यु 1960 में हुई तो सरकारी खर्चे पर लेडी माउंटबेटन को ऐसी श्रद्धांजलि देने की व्यवस्था की गई थी। उनकी इच्छा के अनुसार लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा उन्हें समुद्र में दफन किया गया। ऐसे में नेहरू भी पीछे नहीं रहे। नेहरू ने भारतीय नौसेना के फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल को एस्कॉर्ट के रूप में और साथ ही उनकी याद में पुष्पांजलि देने के लिए भेजा।

लेडी माउंटबेटन की बेटी लेडी पामेला हिक्स का कहना है, “1960 में उनकी मृत्यु पर, एडविना को उनकी इच्छा के अनुसार समुद्र में दफनाया गया था। जब उनका शोक संतप्त परिवार घटनास्थल पर माल्यार्पण के बाद हट गया, तो भारतीय फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल उस जगह पर आया और पंडितजी के निर्देशों के अनुसार मैरीगोल्ड के फूलों से उस पूरे एरिया को आच्छादित कर दिया गया था।”

दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी द्वारा राजीव गाँधी का उल्लेख किए जाने के बाद भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी ऐसी ही एक कहानी के बारे में ट्वीट किया।

स्वामी ने कहा कि उनके ससुर, जेडी कपाड़िया 1950 के दशक में रक्षा सचिव थे। उन्होंने नेहरू के ‘यूरोपीय महिला मित्र’ को एयरफोर्स के विमान का उपयोग करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। स्वामी ने कहा कि इस घटना के बाद उनके ससुर का तबादला कर दिया गया था और अगले रक्षा सचिव ने ऐसा करने की अनुमति दे दी थी।

नेहरू-गाँधी परिवार ने लंबे समय से भारत और उसकी संपत्ति को अपनी निजी संपत्ति माना है। चाहे राजीव गाँधी छुट्टी के लिए नौसेना के जहाज का उपयोग कर रहे हों, या जवाहरलाल नेहरू ऐसा ही कर रहे हों, या फिर उन्होंने एडविना की मृत्यु के बाद समुद्र में मेरीगोल्ड बिखेरने के लिए नौसेना के जहाज का उपयोग किया हो। सरकारी और देश की संपत्ति को अपनी बपौती समझ कर इस्तेमाल करने का इस परिवार का इतिहास बहुत पुराना है। और भी सच्चाइयाँ हैं जो इतिहास के आगोश में हैं। जब भी उन्हें कुरेदा जाएगा, गाँधी परिवार के ‘कुकर्मों’ का अंगार फूट पड़ेगा।

प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने दिए थे सिखों की हत्या के आदेश: सीनियर एडवोकेट फूलका

दिल्ली उच्च न्यायालय में सीनियर एडवोकेट हरविंदर सिंह फूलका ने दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर संगीन आरोप लगाए हैं। फूलका ने कहा कि 1984 दंगों के समय सिखों की हत्या करने के लिए आदेश सीधा प्रधानमंत्री कार्यालय से आते थे।

फूलका ने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि शांति भूषण (जो मोरारजी देसाई के समय मंत्री थे) ने नानावटी आयोग के सामने बयान दिया था कि उन्होंने 1 नवंबर 1984 को तत्कालीन गृह मंत्री नरसिम्हा राव से सेना बुलाने का आग्रह किया था जो राव ने स्वीकार कर लिया था।

फूलका ने ANI को बताया कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि सिखों को मारने के आदेश सीधा राजीव गाँधी के कार्यालय से आते थे और जानबूझकर दंगों को रुकवाने के लिए सेना नहीं बुलाई गई थी। फूलका के अनुसार उन्होंने दंगों की जाँच कर रहे नानावटी आयोग और मिश्रा आयोग के सामने भी यह बात कही थी।

नरसिम्हा राव ने शांति भूषण के आग्रह पर RAX फोन द्वारा किसी मंत्री से बात की थी लेकिन उधर से दंगों को रोकने के लिए सेना की तैनाती के संबंध में कोई उत्तर नहीं मिला जिसके बाद राव चुप हो गए थे तब शांति भूषण वहाँ से चले गए थे।

उस समय चरण सिंह, देवी लाल, शरद यादव, और रामविलास पासवान ने भी सिखों के कत्लेआम को रोकने के लिए सेना बुलाने का आग्रह राष्ट्रपति से किया था। लेकिन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने सेना नहीं बुलाई और दंगे होने दिए। सेना की एक टुकड़ी सफदरजंग पहुँच चुकी थी और सैनिकों ने दंगे रोकने की कोशिश की थी लेकिन तभी एक सैन्य अधिकारी ने उनसे कहा कि हमें दंगे रोकने के आदेश नहीं मिले हैं, और फिर सेना की टुकड़ी वापस कैंटोनमेंट चली गई।

फूलका के अनुसार ये सभी बातें दंगों की जाँच कर रहे आयोग के सामने दर्ज की गई थीं। फूलका ने कहा कि 1 नवंबर 1984 को सिखों का नरसंहार हो रहा था और 5000 सैनिक दिल्ली में मौजूद थे लेकिन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने उन्हें दंगे रोकने के आदेश नहीं दिए जिसके कारण 2000 सिखों की जान गई।

फूलका ने कहा कि कमलनाथ रकाबगंज गुरुद्वारा गए थे। गुरुद्वारा जल रहा था और गुरुद्वारे में दो सिखों को ज़िंदा जला दिया गया था। यह पुलिस रिपोर्ट में दर्ज है कि कमलनाथ गुरुद्वारा गए थे और उन्हें प्रधानमंत्री ने भेजा था। फूलका के अनुसार कॉन्ग्रेस पार्टी के लोगों ने सत्ता का लाभ उठाते हुए सभी सबूत मिटा दिए लेकिन अभी भी बहुत से साक्ष्य ऐसे हैं जो 1984 के सिख नरसंहार में राजीव गाँधी की प्रत्यक्ष संलिप्तता को सिद्ध करते हैं।   

सिद्धू की रैली में गूँजा ‘मोदी-मोदी’ का स्वर, महिला ने फेंकी चप्पल

लोकसभा चुनाव 2019 की सरगर्मी लगभग हर दिशा में देखने को मिल रही है। कहीं जुमलेबाजी का दौर है तो कहीं व्यक्तिगत हमले थमने का नाम नहीं ले रहे। अभी हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को थप्पड़ मारने की ख़बर सामने आई थी, इसी बीच कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू पर एक महिला द्वारा अपनी चप्पल (स्लीपर) फेंकने की ख़बर का ख़ुलासा हुआ है।

दरअसल, रोहतक में एक रैली को संबोधित करते हुए, एक महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बोलने पर पंजाब के मंत्री पर अपनी चप्पल फेंकी। हालाँकि, उस महिला का निशाना चूक गया और मौक़े पर मौजूद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। महिला ने पुलिस को बताया कि उसने चप्पल इसलिए फेंकी थी क्योंकि वो पीएम मोदी के ख़िलाफ़ बात कर रहे थे।

हालाँकि, इस घटना को दिखाने वाला कोई वीडियो तो सामने नहीं आया है, लेकिन एक छोटा वीडियो सामने आया है जिसमें हिरासत में ली गई महिला पुलिस कर्मियों से बात कर रही है, जिसमें सुना जा सकता कि उसने अपनी चप्पल इसलिए फेंकी थी क्योंकि सिद्धू, नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बात कर रहे थे।

चप्पल फेंकने वाली महिला एकमात्र ऐसी नहीं थी जो सिद्धू की रैली के विरोध में थी, बल्कि वहाँ मौजूद कई लोग मोदी-मोदी के नारे भी लगा रहे थे।

₹33 का रिफंड, 2 साल की लंबी कानूनी लड़ाई: IRCTC ने आखिरकार मानी हार, लौटाए पैसे

भारतीय रेलवे के नियमानुसार जब हम अपनी बुक हुई टिकट को कैंसिल कराते हैं तो हमें रिफंड मिलता है। इस रिफंड में रेलवे हमसे टिकट कैंसिल करने का चार्ज काट लेता है और बाकी पैसे हमें लौटा दिए जाते हैं। लेकिन, दो साल पहले कोटा के सुजीत स्वामी नामक इंजीनियर के साथ ऐसा नहीं हुआ। इसके कारण सुजीत को अपने रुपयों के लिए दो साल की लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।

दरअसल, सुजीत ने साल 2017 में कोटा से दिल्ली जाने के लिए 765 रुपए की टिकट बुक कराई थी लेकिन किसी कारणवश उन्हें अपनी टिकट कैंसिल करनी पड़ी। कैंसिलेशन चार्ज कटने के बाद उन्हें 700 रुपए मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें सिर्फ़ 665 रुपए वापस रिफंड किए गए। 35 रुपए को सर्विस टैक्स बताकर काटा गया।

सुजीत ने अपना पैसा वापस लेने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपनी शिकायत को लोक अदालत में दर्ज कराया लेकिन लोकअदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर मामले को ख़ारिज कर दिया।

सुजीत ने अपने हक के लिए RTI के जरिए जानकारी हासिल करने की ठानी। इसके लिए उन्हें दिसंबर 2018 से अप्रैल 2019 तक में कई बार एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर भी लगाने पड़े। आखिरकार लंबी लड़ाई के बाद बैंक ने 4 मई को उनके बैंक अकॉउंट में 33 रुपए भेजे। मीडिया खबरों के मुताबिक सुजीत कहते हैं कि इस लंबी लड़ाई के कारण उन्हें काफ़ी परेशानी झेलनी पड़ी, और आईआरसीटीसी ने उन्हें क्षतिपूर्ति देने की बजाए 2 रुपए रिफंड में से काट लिए।

दिव्यांग महिला को पति ने WhatsApp से दिया तलाक़, ₹10 लाख के लिए घर से निकाला

महाराष्ट्र के ठाणे में एक शारीरिक रूप से विकलांग महिला को उसके पति द्वारा Whatsapp के माध्यम से तीन तलाक़ देने का मामला सामने आया है। आरोपित ने Whatsapp के माध्यम से तीन बार तलाक़ लिख कर भेजा और रिश्ता ख़त्म करने की बात कही। इसके बाद पीड़िता ने कई बार फोन कॉल किया लेकिन उसने उठाने से इनकार कर दिया। पति द्वारा इस तरह की हरकत किए जाने से दुःखी पीड़िता ने भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में शिकायत की है। भोईवाड़ा थाने के वरिष्ठ निरीक्षक कल्याण कार्पे ने बताया कि उन्हें पीड़ित दिव्यांग महिला की ओर से सोमवार को शिकायत मिली है। पुलिस ने बताया कि वो लोग इस पर क़ानूनी सलाह ले रहे हैं।

शारीरिक रूप से विकलांग 23 वर्षीय महिला के अनुसार, उसका निकाह 18 मई 2014 को हुआ था। उसने अपने सास-ससुर पर भी प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उसके ससुराल पक्ष के लोग उससे 10 लाख रुपए की माँग कर रहे थे। जब वो रुपए देने में असमर्थ साबित हुई तो उसके पति ने उसे घर से निकाल बाहर कर दिया। पुलिस अधिकारी कार्पे ने कहा, “फिलहाल भिवंडी में अपने माता-पिता के साथ रह रही महिला ने आरोप लगाया कि हाल ही में उसके पति ने Whatsapp पर ‘तीन तलाक़’ का संदेश भेजा।” पीड़िता ने महिला संस्थानों से मिल कर भी अपनी बात रखी है।

पीड़िता ने गुहार लगाई है कि उसे तलाक़ नहीं चाहिए और वो अपने पति के साथ रहना चाहती है। अभी तक आधिकारिक रूप से पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया है। इस सम्बन्ध में क़ानूनी सलाह लेने की प्रक्रिया पर कार्य किया जा रहा है। बता दें कि अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने महिला विरोधी तीन तलाक़ प्रक्रिया को ख़त्म कर दिया था और सरकार ने भी तीन तलाक़ पर संसद में बिल पेश किया था। अभी हाल ही में एक मुस्लिम महिला की पति ने पड़ोसी के साथ मिल कर सिर्फ़ इसीलिए पिटाई की क्योंकि उसने मोदी से प्रभावित होकर भाजपा को वोट दे दिया था।

रविवार (मई 5, 2019) को उत्तर प्रदेश के भदोही में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर की मुस्लिम महिलाओं को सन्देश देते हुए कहा था, “मुस्लिम बहनों से एक बात कहना चाहता हूँ। आज कई मुस्लिम देशों में तीन तलाक़ की परंपरा नहीं है। हम भी भारत की मुस्लिम बहनों को वही अधिकार देना चाहते हैं। हम किसी की धार्मिक भावनाओं का अनादर नहीं करते हैं। महिलाओं को समान अधिकार मिले, इसके लिए हम लगातार काम कर रहे हैं।“

स्वरा भास्कर के बाद अरविन्द केजरीवाल के जुमलों की याद दिला रहे हैं The Placard Guy

प्लाकार्ड्स की मदद से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों पर अपनी राय रखने वाले The Placard Guy नाम से मशहूर मधुर सिंह एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं, लेकिन इस बार उनका मुद्दा स्वरा भास्कर की ऊँगली नहीं, बल्कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हैं।

हाल ही में मतदाताओं से अपनी ऊँगली का इस्तेमाल स्वरा भास्कर की तरह नहीं, बल्कि समझदारी से मतदान के लिए करने की अपील करने वाले ‘प्लाकार्ड गाय’ ने नई पहल शुरू की है। इस बार तख्तियों की मदद से मधुर सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल द्वारा उनके राज्य दिल्ली में ही फैलाए गए उनके ‘रायतों’ और धरनों के बीच भुला दिए गए वायदों की याद दिला रहे हैं।

इन प्लाकार्ड्स में अरविन्द केजरीवाल के पर्यावरण के लिए उठाए गए Odd-Even फॉर्मूला से लेकर दिल्ली को सिंगापुर बना देने के उनके वादों को याद दिला कर मतदाताओं से समझदारी से मतदान करने की अपील कर रहे हैं।

अर्बन नक्सल हैं AAP प्रत्याशी
केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली बन गई कचरे के ढेर की ‘सिंगापुर’
ऑड-इवन फॉर्मूला कहाँ गया?
दिल्ली के मतदाताओं की ‘फर्जी गर्लफ्रेंड’
दिल्ली है पूरे भारत की राजधानी
मोहल्ला क्लिनिक में स्वास्थ्य लाभ लेते हुए गाय -बछड़े
‘गन्दी बात’

@ThePlacardGuy ने दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल के उन सभी जुमलों की सच्चाई दिखाने का प्रयास किया है, जिनके दम पर वो पहले भी मतदाताओं की आँखों में धुल झोंककर दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और अब दिल्ली की 7 की 7 लोकसभा सीट जीतने का सपना देख रहे हैं। इन तस्वीरों में अरविन्द केजरीवाल के अनुसार मोहल्ला क्लिनिक में मिलने वाली ‘विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं’ में कचरा खा रही गाय भी देखी जा सकती है।

DU में दाखिले की प्रक्रिया को अति विचित्र बताने वाले अरविन्द केजरीवाल ने राजनीतिक लाभ के लिए अन्य राज्यों से आकर दिल्ली के विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ बयान दिया था। इसके साथ ही दिल्ली को लंदन बना देने वाले अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली हर जगह कूड़े और कचरे के ढेर से भरी पड़ी है। आम आदमी पार्टी प्रमुख के हर गली-मोहल्ले को CCTV से पाट देने जैसे वादे मात्र जुमले साबित हुए हैं। इन्हीं में से एक तख्ती में प्लाकार्ड गाय बता रहे हैं कि AAP नेता मार्लेना आतिशी अर्बन नक्सल हैं और उनके पैरेंट्स ने आतंकवादी अफजल गुरु की रिहाई के लिए दया याचना भी दायर की थी।

इन सबके बीच एक तख्ती में अरविन्द केजरीवाल द्वारा दिल्ली के मतदाताओं को फर्जी कॉल कर के AAP को वोट डालने की कोशिशों पर कटाक्ष करते हुए लिखा है, “इतनी बार गर्लफ्रेंड भी मुझे कॉल नहीं करती है, जितनी बार अरविन्द केजरीवाल फर्जी खबर देने के लिए करते हैं।”

एक आखिरी तख्ती में The Placard Guy ने कॉन्ग्रेस के लिए कुछ ‘गन्दी बात’ लिखी है। हालाँकि, जो लिखा है वह अस्पष्ट है, लेकिन विरोध करने के लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना शोभा नहीं देता है।

अपना मुँह बंद करो पाकिस्तानियो: झंडा ओढ़कर राखी सावंत ने अकेले पाक ‘प्रशंसकों’ को चखाया मजा

टेलीविज़न की जानी-मानी हस्ती और अदाकारा राखी सावंत ने बुधवार (मई 08, 2019) को इंस्टाग्राम पर अपनी कुछ तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें वह पाकिस्तानी झंडे में लिपटी हुई दिखाई दे रही हैं।

पाकिस्तानी झंडे में लिपटी राखी सावंत

इस तस्वीर पर राखी सावंत ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें अपने देश ‘भारत’ से प्यार है और वो ऐसा केवल फ़िल्म “धारा 370” के लिए कर रही हैं। इसमें उन्हें पाकिस्तानी झंडे में लिपटा हुआ दिखाया गया है। इस फ़िल्म में वो एक पाकिस्तानी नर्तकी की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म की कहानी कश्मीरी लोगों के जिहादी बनने पर आधारित है।

इसके अलावा, राखी सावंत ने एक पाकिस्तानी नर्तकी की भूमिका के बारे में बताते हुए एक वीडियो अपलोड किया है। इसमें उन्होंने अपने किरदार के बारे में बताते हुए कहा कि छोटे-छोटे बच्चों और कश्मीरियों को जिहाद का लालच देकर उन्हें जिहादी बनाया जाता है, इस फ़िल्म में वो उन्हीं की पोल खोलती हैं। साथ ही, लोगों से यह अपील भी की है कि वो सिर्फ़ एक भूमिका निभा रही हैं और इसके लिए उन्हें परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

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Im jast plying my character in the film ?

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राखी सावंत द्वारा इस वीडियो को अपलोड किए जाने के बाद उन्हें तीखी आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा, इनमें अधिकतर पाकिस्तानी लोगों ने भद्दे कमेंट किए हैं।


राखी सावंत की पोस्ट पर पाकिस्तानी द्वारा की गई टिप्पणी

पाकिस्तानियों को राखी सावंत के इन कपड़ों पर आपत्ति है

राखी सावंत को गाली देते पाकिस्तानी

राखी सावंत को गाली देते पाकिस्तानी

इस वीडियो पर कुछ लोगों ने राखी सावंत को निशाना बनाकर भद्दे कमेंट्स किए, जिसके जवाब में उन्होंने कमेंट करने वालों को अपना मुँह बंद रखने की राय दी है।


गालियों का जवाब देते हुए राखी

राखी सावंत अपनी हरक़तों के लिए सुर्ख़ियों में रहना पसंद करती हैं। इससे पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना व्यक्तिगत अनुभव शेयर किया था, इसमें उन्होंने लिखा था कि एक चोट लगने के बाद उन्हें फिर से चलने में यीशु मसीह ने मदद की थी। इस पर अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने यीशु मसीह को लेकर किए गए कमेंट के लिए अपनी निराशा जताई थी, और यीशु मसीह व ख़ुद के बीच में किसी एक को चुनने तक के लिए कह दिया था।

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं, गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं: BJP को ट्रोल करने वाले जावेद अख़्तर को समर्पित पंक्तियाँ

“अब तो इस तालाब का पानी बदल दो, ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं” जावेद अख़्तर ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए इन पंक्तियों का इस्तेमाल किया। महान कवि दुष्यंत कुमार की यह कविता इंदिरा गाँधी के दौर में लिखी गई थी, उनके तानाशाही रवैये पर इससे चोट की गई थी। उसी दौर में, जब जावेद अख़्तर और सलीम ख़ान मिल कर अमिताभ बच्चन के लिए दीवार और शोले जैसी फ़िल्में लिख रहे थे। उस दौर में हो सकता है कि जावेद अख्तर जैसे ‘चाटुकारों’ की चाँदी रही हो, लेकिन जयप्रकाश नारायण की विचारधारा पर चलने वाले कवि, जैसे दुष्यंत और दिनकर इंदिरा के प्रखर विरोधी के रूप में सामने आए थे। वो अलग बात है कि कॉन्ग्रेस को अपदस्थ करने के लिए दुष्यंत द्वारा लिखी गई कविता का प्रयोग आज जावेद अख़्तर उसी कॉन्ग्रेस को (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से) सत्ता दिलाने के लिए कर रहे हैं। विडम्बना इसे देख कर हज़ार मौतें मरेंगी।

जावेद अख़्तर द्वारा पिछली कुछ फ़िल्मों में लिखे गए गानों कोई सुनने वाला ही नहीं मिला। अब आपसे कोई पूछे कि ‘रॉक ऑन 2’, ‘पलटन’ और ‘नमस्ते इंग्लैंड’ का कोई गाना बताइए, तो आप क्या जवाब देंगे? कुछ नहीं, क्योंकि ये गाने आप तक पहुँचे ही नहीं, फ्लॉप हो गए। कहानियाँ लिखना तो जावेद लम्बे अरसे पहले छोड़ चुके हैं। सलीम ख़ान के साथ उनकी जोड़ी आज से 3 दशक पहले ही टूट चुकी है। कुल मिलकर जनता ने उन्हें बदल दिया है। अर्थात, उनकी प्रासंगिता ख़त्म हो गई है, उनकी जगह दूसरों ने ले ली है, अब उनमें वो बात नहीं रही। जिन कुम्हलाए हुए कँवल के फूलों का वह उदाहरण दे रहे हैं, उसकी जगह वो ही फिट बैठते हैं क्योंकि इंडस्ट्री में अब उनके गाने नहीं चलते।

ऐसा उन्होंने स्वाति चतुर्वेदी की एक ट्वीट के रिप्लाई में लिखा है। स्वाति चतुर्वेदी ने अपने ट्वीट में दावा किया कि भाजपा का एक पूर्व मंत्री इसलिए नाराज़ है क्योंकि पार्टी ने एक ‘आतंकवादी’ को टिकट दिया है। वो अनाम मंत्री इसीलिए भी नाराज़ हैं क्योंकि पीएम मोदी ने राजीव गाँधी को भ्रष्टाचारी कह दिया है। स्वाति चतुर्वेदी, जो ट्रोल है, बकलोल है, ने उस मंत्री की पहचान नहीं बताई और जताना चाहा कि उनके गुप्त सूत्रों की पहुँच काफ़ी दूर-दूर तक है। स्वाति के बारे में यहाँ चर्चा नहीं की जाएगी क्योंकि उनकी बातों को अब लोगों ने गंभीरता से लेना छोड़ दिया है लेकिन उम्रदराज जावेद अख़्तर की बातों का जवाब देना आवश्यक है।

जावेद अख़्तर ने अगर दुष्यंत कुमार की यह कविता पढ़ी होगी, जिससे उन्होंने ये पंक्तियाँ ली हैं, तो शायद वह ज़रूर ख़ुद को उससे जुड़ा हुआ महसूस कर रहे होंगे। जावेद अख़्तर ने जो पंक्तियाँ ट्वीट की हैं, उसके पहले की पंक्तियाँ कुछ यूँ हैं:

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं,
गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं

गाने लिखते-लिखते जावेद अख़्तर अब चिल्लाने लगे हैं। वह एक ट्विटर ट्रोल हो चुके हैं। वो चिल्लाते हैं, कभी बुर्क़े और घूँघट को समान रूप से दिखाने के लिए तो कभी ओसामा बिन लादेन और साध्वी प्रज्ञा की तुलना करने के लिए। चिल्लाना उनका पेशा हो चुका है, वो भी सोशल मीडिया पर। अब जावेद अख़्तर ने जो पंक्तियाँ भाजपा सरकार के लिए उद्धृत की हैं, उसकी अगली पंक्तियों को देखें, क्योंकि जावेद अख़्तर पर वह भी काफ़ी फिट बैठती हैं:

वो सलीबों के क़रीब आए तो
हम को क़ाएदे क़ानून समझाने लगे है

गानें फ्लॉप होने के कारण अब जावेद अख़्तर नियम-क़ानून बताने पर उतर आए हैं, वरना कॉन्ग्रेस के दौर में शायद ही उन्होंने इस कदर लोगों से लड़ाइयाँ की हों। पंक्तियाँ तो दुष्यंत कुमार की एकदम सटीक हैं, एक महान कवि द्वारा रचित हैं, लेकिन इसे कॉन्ग्रेस सरकार के लिए लिखा गया था। अतः, जावेद अख़्तर ने उसे दोहरा कर अच्छा ही किया है। अगर वो ये पंक्तियाँ आज ट्विटर पर नहीं लिखते तो शायद हम भी आपको दुष्यंत कुमार और उनकी इस कविता के बारे में नहीं बता पाते। धन्यवाद जावेद अख़्तर का, जिनके कारण हमने दुष्यंत कुमार को फिर से विजिट किया। जावेद अख़्तर को दुष्यंत की ही इन पंक्तियों के साथ ‘बुर्का सलाम’:

एक गुड़िया की कई कठपुतलियों में जान है
आज शायर यह तमाशा देखकर हैरान है

मोदी के चाचा ने PM से अपने संबंध छिपाकर सरकारी अस्पताल में कराया इलाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चाचा श्री कांतिलाल मोदी को यूरिन इन्फेक्शन की शिकायत हुई तो वे इलाज के लिए सूरत के सिविल अस्पताल चले गए। अस्पताल में उन्होंने किसी को नहीं बताया कि वे प्रधानमंत्री के चाचा हैं। हालाँकि बाद में यह बात खुल गई तो सभी को आश्चर्य हुआ।

दरअसल प्रधानमंत्री के 81 वर्षीय चाचा जी को यूरिन इंफेक्शन की समस्या हो गई जो आजकल आमतौर पर वृद्ध व्यक्तियों को हो जाती है। गरमी के मौसम में यह समस्या ज्यादा होती है। एक समाचार पत्र के अनुसार कांतिलाल मोदी अपना इलाज कराने सूरत के सिविल अस्पताल चले गए और भरसक प्रयास किया कि प्रधानमंत्री से उनके संबंध की किसी को कानों कान खबर न हो। डॉक्टर ने उन्हें देखा और प्राथमिक जाँच में पाया कि उनका सुगर लेवल 223 और रक्तचाप 150 है।

कांतिलाल मोदी को सर्जरी विभाग में रेफर कर एडमिट कर लिया गया है और उनकी हालत सामान्य है। सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ गणेश गोवेकर को जब यह जानकारी मिली कि नरेंद्र मोदी के चाचा अस्पताल में भर्ती हैं तो उन्होंने फोन कर के हालचाल लिया और डॉक्टरों को अच्छी तरह इलाज करने का निर्देश दिया।

नरेंद्र मोदी के परिवारवाले अत्यंत सामान्य जीवन जीते हैं। कांतिलाल सूरत में 15 वर्षों से बेटे के साथ रह रहे हैं लेकिन उन्होंने किसी को नहीं बताया कि वे प्रधानमंत्री के चाचा हैं। कांतिलाल ने बताया कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब मिलना-जुलना होता था लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद वे उनसे नहीं मिल पाए हैं। कांतिलाल के मुताबिक वे कभी भी किसी को नहीं बताते हैं कि मोदी उनके भतीजे हैं।

तेज बहादुर यादव की याचिका ख़ारिज, चुनाव प्रक्रिया में दखल देने से SC ने किया इनकार

वाराणसी से नामांकन रद्द होने के बाद बीएसएफ से बर्खास्त पूर्व सैनिक तेज बहादुर यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। गुरुवार (मई 9, 2019) को सर्वोच्च न्यायालय ने तेज बहादुर यादव की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग द्वारा उनके नामांकन को खारिज कर दिए जाने को चुनौती दी थी।

दरअसल, तेज बहादुर ने प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ बतौर एसपी प्रत्याशी वाराणसी लोकसभा सीट से पर्चा भरा था, लेकिन नामांकन रद्द होने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने मनमाने ढंग से उनका नामांकन रद्द किया है। जबकि आयोग ने तेजबहादुर के सभी आरोपों को नकारते हुए अपने फैसले को सही ठहराया था।

आज (अप्रैल 9, 2019) इस याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव प्रक्रिया में दखल देने से साफ़ मना किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कोई कारण नहीं दिखाई दिया जिससे कि तेजबहादुर की याचिका पर गौर किया जाए।

बता दें कि नामांकन पत्रों की जाँच के बाद तेजबहादुर यादव द्वारा दाखिल नामांकन पत्रों में बीएसएफ से बर्खास्तगी से संबंधित दो जानकारी सामने आई थीं। इसके कारण उन्हें 24 घंटों के भीतर बीएसएफ से एनओसी लेकर जवाब देने को कहा गया था। तेज बहादुर को जारी किए गए नोटिस में कहा गया था कि वह बीएसएफ से एनओसी लेकर आएँ, जिसमें साफ़ हो कि उन्हें किस कारण से नौकरी से बर्खास्त किया गया था। 1 मई को एनओसी पेश न कर पाने के कारण रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था।