UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षा परिणाम की घोषणा हो चुकी है। इस परीक्षा में हर किसी के संघर्ष की अपनी अलग कहानी देखने और सुनने को मिलती है। मध्य प्रदेश के प्रदीप सिंह की कहानी इन्हीं में से एक हैं। इस परीक्षा में मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले प्रदीप सिंह को ऑल इंडिया में 93वीं रैंक मिली है। उनकी कामयाबी कई मायनों में अहम है और दूसरों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। कारण ये है कि बेहद साधारण परिवार से आने वाले प्रदीप के पिता पेट्रोल पंप पर काम करते हैं।
प्रदीप के पिता ने बेटे की पढ़ाई के लिए अपना घर तक बेच दिया था और कम पैसों के बावजूद अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कभी कोई कमी नहीं होने दी। शायद यही वजह रही कि प्रदीप ने पहले ही प्रयास में अपने माता-पिता का सपना पूरा कर दिखाया और UPSC परीक्षा में इस वर्ष सफल हुए।
प्रदीप का UPSC का रिजल्ट का समाचार उनके पिता के पास ऐसे समय आया, जब उनके पिता पेट्रोल पंप पर लोगों की गाड़ियों में पेट्रोल भरने का काम कर रहे थे। प्रदीप के पिता इंदौर के एक पेट्रोल पंप पर नौकरी करते हैं।
UPSC-2018 के परिणाम में 93वीं रैंक हासिल करने वाले प्रदीप सिंह मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं, मगर पिछले 25 साल से इनका परिवार इंदौर में रह रहा है। प्रदीप के पिता मनोज सिंह इंदौर के देवास रोड स्थित पेट्रोल पम्प पर काम करते हैं। मनोज सिंह के 2 बेटे हैं। बेटे संदीप ने MBA किया है और दूसरा बेटा, यानि प्रदीप आज IAS बन गया है। प्रदीप ने देवी अहिल्या इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज से 2017 में बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की थी।
UPSC रिजल्ट आते ही प्रदीप के पिता के पास मीडिया भी पहुँच गया। मनोज सिंह ने बताया कि वे बेटे की सफलता से काफी खुश है। बेटे को पढ़ाने-लिखाने में उन्होंने काफी संघर्ष किया, वहीं उनका कहना है कि बेटे ने भी मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, रोजाना 17-18 से घंटे पढ़ता था।
प्रदीप की इस उपलब्धि पर उनके पिता मनोज सिंह ने कहा, “परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, मगर दोनों बेटों को पढ़ने-लिखने का भरपूर अवसर दिया। बेटे प्रदीप ने प्रशासनिक सेवा जाने में इच्छा जताई, तो आर्थिक दिक्कत आ गई थी। बेटे के ख्वाब को पूरा करने के लिए मकान तक बेचना पड़ा, लेकिन अब बेटे की कामयाबी से सातवें आसमान पर हूँ।”
कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी जिस तरह की ओछी बयानबाजी द्वारा जनता का ह्रदय जीतने का प्रयास कर रहे हैं, उसे देखते हुए लग रहा है कि सत्ता में पहुँचने की उनकी छटपटाहट के चलते उनकी मानसिक हालत तेजी से बदलने लगी है। राहुल गाँधी ने शुक्रवार (5 अप्रैल, 2019) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करने के चलते अपनी पारम्परिक संस्कृति का परिचय देते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को लेकर बेहद घृणित बयान दे डाला। इसके बाद राहुल गाँधी आडवाणी के अपमान और पीएम मोदी के खिलाफ दिए बयान के कारण सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं। कई यूजर्स ने उन पर पीएम पद का सम्मान ना करने का भी आरोप लगाया है।
सोनिया गाँधी के बेटे और कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी ने दरअसल महाराष्ट्र के चंद्रापुर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा हिंदुत्व की बात करती है। हिंदू धर्म में गुरु को महान बताया गया है। मोदी के गुरु कौन हैं? आडवाणी। मोदी ने जूता मारकर आडवाणी को स्टेज से निकाला। गुरु का अपमान करना हिंदू धर्म नहीं है।”
इस पर कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने राहुल गाँधी से सवाल किया है कि हाल ही में अल्पकालीन समय के लिए हिन्दू बने राहुल गाँधी को हिन्दू संस्कृति पर ज्ञान देने से बचना चाहिए।
ट्विटर यूजर दीक्षा ने लिखा, “अरे राहुल गाँधी मोदी जी के गुरु आडवाणी जी और फिर उन्होंने जूते मारे और फिर ये हिन्दु धर्म मे कहाँ लिखा है? कर क्या रहे हो महोदय! ठीक से हिंदी तो पढ़ लेते! कहाँ से शुरू होते हो और कहाँ को चले जाते हो। चुनाव में दिमाग तो नहीं खिसक गया न आपका?”
राजीव रंजन राजू लिखते हैं, “राहुल ने पिता तुल्य आडवाणी का अपमान किया, जनता इसका जबाब जूते से देगी।”
— Rajiv Ranjan Raju (@RajivRanjanRa16) April 5, 2019
वहीं @DrAditya_IITBHU ने राहुल गाँधी के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा है, “राहुल गाँधी जी के अनुसार ‘आडवाणी जी को मोदी जी ने जूते से मारकर मंच से उतारा’ सही है, तो जनता के अनुसार ‘इन्दिरा गाँधी जी ने मात्र सत्ता प्राप्ति के लिए अपने पुत्र संजय गाँधी जी की हत्या करवाई और भावनात्मक माहौल बनाने के लिए घड़ियाली आँसू बहाई’ यह भी बात सत्य होनी चाहिए।” देखा जाए तो सोशल मीडिया पर इस तरह के कमेंट निंदनीय हैं, लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद का सपना देख रहे राहुल गाँधी को मर्यादा लाँघते हुए देखने के बाद शायद इंटरनेट पर समय बिताने के लिए कुछ भी लिखने वाले लोगों से मर्यादा जैसी बातों की उम्मीद करना बेकार है।
राहुल गाँधी जी के अनुसार “आडवाणी जी को मोदी जी ने जूते से मारकर मंच से उतारा” सही है, तो जनता के अनुसार “इन्दिरा गाँधी जी ने मात्र सत्ता प्राप्ति के लिए अपने पुत्र संजय गाँधी जी की हत्या करवाई और भावनात्मक माहौल बनाने के लिए घड़ियाली आँसू बहाई” यह भी बात सत्य होनी चाहिए।
— Chowkidar Dr. Aditya Kr. Singh (@DrAditya_IITBHU) April 5, 2019
दूसरे ट्विटर यूज़र ने लिखा है, “पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह के ड्राफ्ट को सरेआम फाड़ने वाला बदजुबान राहुल गाँधी का हिन्दू धर्म व गुरु शिष्य परंपरा की दुहाई देना शर्मनाक है। ये क्या लड़ेगा मोदीजी से? इसे तो संस्कार ही नहीं हैं।
आडवाणी को जूते मार कर निकाल @narendramodi ने,ये कहा राहुल गांधी ने।पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहनसिंह के ड्राफ्ट को सरे आम फाड़ने वाला बदजुबान राहुल गांधी का हिन्दू धर्म व गुरु शिष्य परंपरा की दुहाई देना शरमनाक है।ये क्या लड़ेगा मोदीजी से?इसे तो संस्कार ही नही है। pic.twitter.com/iVK7CT7v26
भाजपा नेता आडवाणी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के बाद राहुल गाँधी ने कहा, “2019 का चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई है और कॉन्ग्रेस की विचारधारा भाईचारा, प्रेम और सौहार्द से मोदी के नफरत, क्रोध और विभाजनकारी विचारधारा पर जीत हासिल करेगी।”
खैर, पहले तो राहुल गाँधी को अपनी धोती संभालनी ही सीखनी चाहिए, लोकतंत्र और प्यार मोहब्बत की बातें तो उसके बाद भी की जा सकती हैं।
अभी कुछ दिन पहले ही अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में आरोप पत्र में कुछ पत्रकारों के नाम का उल्लेख किया गया था। मगर जल्द ही यह पता चला कि शेखर गुप्ता नाम के एक पत्रकार, जिन्हें हथियार दलाल क्रिश्चियन मिशेल ने अगस्ता वेस्टलैंड सौदे के बारे में कम आक्रामक लेख लिखने के लिए ‘प्रभावित’ किया है।
अगस्ता वेस्टलैंड डील के बिचौलिए मिशेल को दिसंबर 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था और फिलहाल वह हिरासत में है। जाँच एजेंसियाँ उससे किकबैग के बारे में पूछताछ कर रही हैं कि वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों को खरीदने के सौदे को कैसे सील कर दिया गया। मिशेल ने कई नामों का खुलासा किया है, कुछ सीधे और कुछ कोड नामों के रूप में जैसे कि FAM अर्थात परिवार, AP, RG, आदि में शेखर गुप्ता का नाम मीडिया आउटलेट्स द्वारा एक्सेस किए गए चार्जशीट के कुछ हिस्सों में सीधे उल्लेख किया गया था।
खबर फैलने के बाद, शेखर गुप्ता ने अपने समाचार पोर्टल ‘द प्रिंट’ के माध्यम से एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि क्रिश्चियन मिशेल के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के आरोप पत्र में किया गया दावा कि अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे घोटाले में एक प्रमुख संदिग्ध मिशेल ने गाय डगलस नाम के व्यक्ति के माध्यम से शेखर गुप्ता को द इंडियन एक्सप्रेस में लिखे लेखों में टोन डाउन करने के लिए कहा था। गुप्ता ने आगे दावा किया कि चॉपर घोटाले की मीडिया जाँच में वह सबसे आगे थे और उनके नेतृत्व में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने सबसे पहले घोटाले की स्टोरी को प्रकाशित किया था। इसके साथ ही उन्होंने क्रिश्चियन मिशेल द्वारा इस कथित रहस्योद्घाटन की ‘टाइमिंग’ पर भी संदेह जताया।
शेखर गुप्ता ने इस बयान के बाद इस घटना के बारे में ज्यादा बात नहीं की। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है, जब शेखर गुप्ता का नाम रक्षा सौदों में लिप्त विदेशी कंपनियों के बारे में बात करते हुए आया है।
लगभग 4 साल पहले, अक्टूबर 2014 में एक विवाद छिड़ गया था, जब एनडीटीवी ने अचानक पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी का एक साक्षात्कार लिया था, जिसका शीर्षक “एक्स-नेवी चीफ एक्सप्लोसिव डिस्क्लोजर्स” था। और फिर इस इंटरव्यू को डिलीट कर दिया गया। जिसके बाद ये सवाल उठने लगा कि कोई मीडिया हाउस अपने एक्सक्लूसिव खबर को क्यों हटाएगा और वो भी तब, जब चैनल ने खुद इंटरव्यू लिया हो। इससे साफ जाहिर होता है कि इस साक्षात्कार में कुछ ऐसा था, जिसे मीडिया हाउस छिपाना चाहती होगी।
फरवरी 2014 में, एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी नौसेना दुर्घटनाओं की एक शृँखला की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देने वाले पहले भारतीय नौसेना प्रमुख बने। आईएनएस सिंधुरत्न में 26 फरवरी, 2014 को मुंबई तट पर आग लगने से दो अधिकारियों की मौत की जिम्मेदारी लेते हुए एडमिरल जोशी ने उसी दिन इस्तीफा दे दिया और उनके इस्तीफे को कुछ घंटों के भीतर स्वीकार कर लिया गया।
कुछ महीनों बाद, एनडीटीवी के वरिष्ठ रक्षा पत्रकार नितिन गोखले को एडमिरल जोशी का एक विशेष साक्षात्कार लेने का मौका मिला, जहाँ उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि पूर्व नौसेना प्रमुख को किन परिस्थितियों में इस्तीफा देना पड़ा था। इंटरव्यू में एडमिरल जोशी ने एक बेकार और अक्षम मॉडल सशस्त्र बलों के बारे में अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि प्रणाली में सुधारों की आवश्यकता थी, लेकिन निहित स्वार्थ ऐसे सुधारों को रोक रहे थे।
पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि ऐसे निहित स्वार्थों के पास अधिकार था, लेकिन कोई जवाबदेही नहीं थी, जबकि सशस्त्र बलों के पास जवाबदेही है। जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया, लेकिन कोई अधिकार नहीं। साक्षात्कार वास्तव में एक्सप्लोसिव था, क्योंकि उसमें यह पता चला था कि कैसे यूपीए शासन काल में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों की उपेक्षा की गई थी।
“एक्सक्लूसिव: पूर्व नौसेना प्रमुख ने यूपीए सरकार पर किया हमला” और “एक्स-नेवी चीफ द्वारा एंथनी के वर्षों का मूल्यांकन किया गया” साक्षात्कार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एनडीटीवी के कुछ सबटाइटल थे।
हालाँकि, कुछ दिनों के भीतर ही, एनडीटीवी द्वारा इस एक्सक्लूसिव और एक्सप्लोसिव इंटरव्यू को डिलीट कर दिया गया। यहाँ तक कि साक्षात्कार के ट्रांसक्रिप्ट के साथ रिपोर्ट को भी गायब कर दिया गया।
क्या एनडीटीवी वालो ने कॉन्ग्रेस नेताओं के दबाव में आकर वीडियो डिलीट किया? हालाँकि, यह दावा किया गया है कि जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब एनडीटीवी ने प्रधानमंत्री कार्यालय से संपादकीय लाइनें भी ली। लेकिन उस संभावना को ज्यादातर खारिज किया जाता रहा है, क्योंकि साक्षात्कार का वह हिस्सा जहाँ एडमिरल जोशी यूपीए सरकार पर हमला बोल रहे हैं, अभी भी एनडीटीवी की वेबसाइट पर बरखा दत्त के एक शो के हिस्से के रूप में उपलब्ध है, जो उस समय एनडीटीवी के साथ थी। इससे जाहिर होता है कि एनडीटीवी ने कॉन्ग्रेस के दबाव में आकर इंटरव्यू डिलीट नहीं किया। तो अब सवाल ये है कि अगर कॉन्ग्रेस पार्टी का दबाव नहीं है, तो फिर इंटरव्यू क्यों डिलीट किया गया?
इस रहस्य को तीन साल बाद अक्टूबर 2017 में काफी हद तक सुलझाया गया, जब नितिन गोखले ने फेसबुक पोस्ट में इसके बारे में बताया। उन्होंने उन परिस्थितियों का खुलासा किया जिसकी वजह से साक्षात्कार को हटाया गया था और इसी कारण उन्होंने एक महीने के भीतर एनडीटीवी से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि इस तरह की सेंसरशिप फिर से हो सकती है।
“हिंदी और अंग्रेजी दोनों में कम से कम पाँच बार टेलीकास्ट होने के बाद, एनडीटीवी प्रबंधन ने एडमीरल डीके जोशी के साथ साक्षात्कार की सामग्री को अपमानजनक माना और इसे हटाने का फैसला किया। मेरा संदेह डिफेम होने से अधिक था, एडमिरल जोशी ने एनडीटीवी के कुछ सहयोगियों और दोस्तों को शायद करारा जवाब दिया था। इसलिए साक्षात्कार और इसके ट्रांसक्रिप्ट को हटाने का निर्णय लिया गया। सभी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करने और सुरक्षा करने के सारे आदर्श, उस पल गायब हो गए जब एनडीटीवी के अपने कर्मी को ही नुकसान पहुँचाया। इसका एडमिरल के FoE से कोई संबंध नहीं था। ”- ये बातें नितिन गोखले ने फेसबुक पर लिखी है।
इस साक्षात्कार में एडमिरल जोशी ने न केवल यूपीए शासन की आलोचना की थी, बल्कि उन्होंने रक्षा मामलों पर अपरिपक्व और दुर्भावनापूर्ण रिपोर्टिंग के लिए मीडिया के कुछ धड़ों और गिरोहों की भी आलोचना की थी। एडमिरल जोशी का निम्न कथन एनडीटीवी के पुराने सहयोगी नितिन गोखले के बारे में उनके फेसबुक पोस्ट पर संकेत देता है।
एडमिरल डीके जोशी ने साक्षात्कार में कहा था कि दो समाचार पत्र थे, जिनमें से एक ने तख्तापलट जैसा शब्द ईजाद किया था, यह रिपोर्टर विदेशी वेंडर्स और हथियार दलालों का प्रिय था, और अपने महत्व को बनाए रखने के लिए वह ऐसे लेख लिख रहे थे जैसे जब रिपोर्टर विदेशी वेंडरों के ठेके पर हो।
यह समझने के लिए किसी विशेष ज्ञान या डिकोडिंग की आवश्यकता नहीं है कि शेखर गुप्ता और इंडियन एक्सप्रेस को किसी को “तख्तापलट सिद्धांत” के बारे में बात करने के लिए भेजा जा रहा है।
हालाँकि, एडमिरल ने सीधे तौर पर शेखर गुप्ता का नाम नहीं लिया, लेकिन जब Opindia ने नितिन गोखले से पूछा कि क्या उन्हें कभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कहा गया था कि शेखर गुप्ता साक्षात्कार से नाखुश थे और चाहते थे कि इसे डिलीट कर दिया जाए। तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए Opindia को बताया कि उन्हें कभी सीधे तौर पर यह नहीं बताया गया कि शेखर गुप्ता साक्षात्कार से नाखुश थे या वह इसे हटाना चाहते थे, लेकिन न्यूज़ रूम की बातचीत से यह स्पष्ट था कि प्रबंधन ने किसी ऐसे व्यक्ति से बात की थी जो उनके करीब था। इसलिए प्रबंधन ने साक्षात्कार को डिलीट कर दिया। नितिन गोखले ने लिखा कि इस घटना के बाद एनडीटीवी से इस्तीफा देने का उन्हें कोई अफसोस नहीं है।
उन्होंने कहा, “मैंने सोचा कि यह समय आगे बढ़ने और एक ऐसी जगह को पीछे छोड़ देने का है, जो बाहरी से रूप भले सुसंगत, परिष्कृत और ‘उदार’ दिखता हो, लेकिन वास्तव में भाई-भतीजावाद, पक्षपात और कुटिलता से भरी है, जिसे विशेषीकृत लोगों की रक्षा करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने निष्पक्ष रूप से अपनी बात रखते हुए कहा कि मेरे जैसे एक व्यक्ति को एनडीटीवी की दुनिया में प्रवेश करने की अनुमति देकर कोई एहसान नहीं किया जा रहा था, उन्हें इसलिए रखा गया था, क्योंकि 2006 में उस समय उनकी आवश्यकता थी। मैंने काम का आनंद लिया और एक उच्च प्रोफ़ाइल प्राप्त की क्योंकि मैंने अपनी काबिलियत साबित कर दी लेकिन एक अनदेखी काँच की दीवार हमेशा हमारे लिए ‘बाहरी लोगों’ के रूप में मौजूद थी।”
एक यूजर द्वारा हटाए गए साक्षात्कार को यूट्यूब पर बैकअप और अपलोड किया गया, जिसे नीचे देखा जा सकता है। अगर एनडीटीवी ने इंटरव्यू डिलीट किया तो इसके कुछ और भी कारण हो सकते हैं, जिसका पाठक खुद पता लगा सकें।
‘मिशन शक्ति’ की सफलता के बाद DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ) ने ‘मिशन शक्ति’ से जुड़ा एक प्रेजेंटेशन जारी किया है। इस प्रेजेंटेशन में दिखाया गया है कि कैसे ‘मिशन शक्ति’ को सफल बनाया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
कॉन्ग्रेस नेता चिदंबरम ने जताई थी मिशन पर आपत्ति, DRDO ने कहा ‘चिल्ल ब्रो’!
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मिशन शक्ति’ की सफलता की घोषणा करने के बाद कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि देश की इस क्षमता को गोपनीय रखना चाहिए था लेकिन ‘नासमझ सरकार’ ने ऐसा नहीं किया। चिदंबरम की चिंता को DRDO ने दूर करते हुए आज शनिवार (अप्रैल 06, 2019) को DRDO प्रमुख जी सतीश रेड्डी ने कहा कि ‘मिशन शक्ति’ की प्रकृति ऐसी थी कि इसे किसी भी हाल में गोपनीय नहीं रखा जा सकता था। उन्होंने कहा कि उपग्रह को दुनिया भर के कई देशों के स्पेस स्टेशनों द्वारा ट्रैक किया जाता है। इसके साथ ही रेड्डी ने बताया कि इस मिशन के लिए सभी जरूरी परमिशन ली गई थी। इस बीच डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने मिशन शक्ति पर एक प्रेजेंटेशन भी जारी किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुमति के बाद इस मिशन को सफल बनाने के लिए 200 वैज्ञानिकों की टीम ने दिन-रात मेहनत की। 27 मार्च को धरती से 300 km दूरी पर स्थित एक लाइव सैटेलाइट को गिराकर वैज्ञानिकों के इस मिशन की सफलता की नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को जानकारी दी थी।
बता दें कि अब तक दुनिया के तीन देश अमेरिका, रूस और चीन को यह उपलब्धि हासिल थी अब भारत चौथा देश है, जिसने यह सफलता प्राप्त की है. PM मोदी ने बताया था कि कि एलईओ सैटेलाइट को मार गिराना एक पूर्व निर्धारित लक्ष्य था, इस मिशन को सिर्फ 3 मिनट में पूरा किया गया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निजी हमला करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी की उपेक्षा की है, वे जनता का ध्यान कैसे रखेंगे। ममता बनर्जी ने यह निजी हमला पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में किया।
प्रधानमंत्री मोदी को झूठा कहते हुए, बनर्जी ने कहा कि TMC मोदी को हराने के बाद केंद्र में नई सरकार के गठन का नेतृत्व करेगी।
विपक्षी पार्टी के नेताओं और समर्थकों के लिए पीएम मोदी पर निजी शिकंजा कसना और उनकी पत्नी को लेकर इस तरह की टिप्पणी ममता की बेहूदी राजनीति का सटीक उदाहरण है। ख़बरों के अनुसार, 2017 में, कॉन्ग्रेस ने गुजरात राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान जशोदाबेन को चपेट में लेने की कोशिश की थी।
बाद में, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी जशोदाबेन को अपनी राजनीतिक लड़ाई में घसीट लिया था। इससे पहले AAP नेता सोमनाथ भारती का नाम भी उजागर हुआ था जब उन्होंने एक महिला पत्रकार को गाली-गलौच देने के साथ-साथ ‘वेश्यावृति का धंधा‘ करने जैसी ओछी बात तक कह डाली थी। इस घटना की सोशल मीडिया पर व्यापक निंदा हुई थी। दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने उनके व्यवहार की निंदा की। इसके बाद सोमनाथ भारती ने शर्मनाक हरक़त की जिसमें उन्होंने पीएम मोदी पर उनकी पत्नी जशोदाबेन को ‘कैद’ करने का आरोप लगाया।
And when will police lodge a case of abduction of Mansi Soni n locate her n quiz Mr. Modi on the same because Mr. Modi hs been alleged to keep chasing her thru Gujarat admin n his strong man Mr. Shah allegedly for his lust for Mansi, a girl of his daughter’s age?..2/2
राजनेताओं के परिवार को राजनीतिक हमलों में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है, ख़ासकर तब, जब परिवार के सदस्य निजी व्यक्ति हों जिनका राजनेता से कोई लेना-देना नहीं होता।
इस सर्वेक्षण में, पूरे देश के 5 लाख लोगों को शामिल किया गया है। इसमें NDA को 304-316 सीटों और भाजपा को 248-260 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की भविष्यवाणी मतदान एजेंसी ने की।
‘जन की बात’ के संस्थापक और मुख्य संपादक, प्रदीप भंडारी ने OpIndia.com से बात करते हुए कहा, “इस सर्वेक्षण से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नरेंद्र मोदी 2019 में प्रधानमंत्री के रूप में वापसी करेंगे और उन्हें यह दूसरा अवसर मिलना तय है। सर्वेक्षण में 2 महीने की अवधि में सीट-दर-सीट और राज्य-दर-राज्य विश्लेषण के आधार पर 5 लाख मतदाताओं का नमूना लिया गया है।”
सर्वेक्षण में यह भी अनुमान लगाया गया है कि कॉन्ग्रेस 2014 में हासिल की गई 44 सीटों से कुछ आगे है। दूसरी ओर, यूपीए 117-126 सीटें जीत सकती है। सीटों की संख्या में असमानता के अनुरूप, NDA के पास वोट-शेयर क़रीब 50% के होने की संभावना है, जबकि UPA का वोट-शेयर केवल 39% तक ही जा सकता है।
मध्य प्रदेश में, एनडीए को 22-25 सीटें जीतने की संभावना है, जबकि यूपीए को 4-7 सीट से ही गुजारा चलाना पड़ सकता है। बिहार में, बीजेपी के 28-33 सीटें जीतने की उम्मीद है, जबकि बाकी यूपीए के खाते में जा सकती हैं। उत्तर प्रदेश, भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है, पार्टी संभवतः उन सीटों को खो सकती है जो उसने पिछले साल जीती थी। हालाँकि, अभी भी 40 से अधिक सीटे जीतने की उम्मीद है। एसपी-बीएसपी गठबंधन 25-33 सीटों के बीच कुछ सीटें जीत सकते हैं।
बीजेपी उत्तर प्रदेश की सीटों के नुकसान की भरपाई ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बड़ी बढ़त बनाकर करेगी। ओडिशा में, नवीन पटनायक को काफी नुकसान होने की उम्मीद है, क्योंकि भाजपा राज्य में प्रवेश कर रही है। भाजपा को 8-12 सीटें जीतने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल में, भाजपा को कम से कम 11 सीटें जीतने की उम्मीद है।
तमिलनाडु से एक बड़ा आश्चर्य सामने आया जहाँ यूपीए की उम्मीद थी कि राज्य की सभी सीटों पर कब्जा करेगी। हालाँकि, जन की बात के अनुसार, दो गठबंधन अब एक भयंकर युद्ध में तब्दील हो गए हैं और वर्तमान में यह एनडीए के लिए अच्छा संकेत है जिससे सीटों की बढ़त में कामयाबी मिल सकती है।
भंडारी ने आगे कहा, “कर्नाटक में, कॉन्ग्रेस-जेडी (S) गठबंधन के बावजूद, भाजपा अधिकतम सीटों के साथ उभरेगी, जिसमें 2-3 सीटें बढ़ सकती हैं। वजह यह है कि कॉन्ग्रेस और जेडी (S) एक-दूसरे के वोटों को काटने का काम कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस और जेडी (S) के कैडर आपस में लड़ रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा, “कांग्रेस केवल 3 राज्यों: पंजाब, केरल और छत्तीसगढ़ में लाभ प्राप्त कर रही है। अन्य कोई राज्य नहीं हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस की कोई बढ़त दिख रही हो। कॉन्ग्रेस अपने दम पर 100 सीटें नहीं पा सकती, यह सच नहीं है। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में, भाजपा बहुमत प्राप्त करने के लिए तैयार है। महाराष्ट्र में, शिवसेना-भाजपा गठबंधन 35 से अधिक सीट जीतने के लिए तैयार है।”
रिपब्लिक टीवी की पत्रकार नलिनी शर्मा को पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और अगस्ता वेस्टलैंड मामले के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के वकील अलजो के जोसेफ ने सवाल पूछने पर धमकी दी है। नलिनी ने ट्विटर पर अलजो से हुई बातचीत का एक हिस्सा भी ट्वीट किया है।
Christian Michel’s lawyer @Aljokjoseph tells me in Court- dont put questions to me on camera. It wont be good for you.
Told him it’s my job to ask questions & his prerogative to reply.
He says “I’m an arrogant man. You have not seen my arrogance yet. Warning you, dont do this”.
नलिनी के मुताबिक जोसेफ का कहना है कि वह एक गुस्सैल आदमी हैं और नलिनि ने अभी तक उनका गुस्सा देखा नहीं है, इसलिए वे नलिनि को चेतावनी देते हैं, कि वो ऐसे सवाल न करें।
यहाँ बता दें कि मिशेल का वकील बनकर पेश होने पर कॉन्ग्रेस द्वारा जोसेफ को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, क्योंकि पार्टी पर ऊँगलियाँ उठनी शुरू हो गईं थी।
गौरतलब है कि इन दिनों पत्रकारों के लिए मसीहा बनकर पहुँचने वाले राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस पार्टी का पत्रकारों को धमकाने का भी अलग इतिहास है। पिछले साल नवंबर में पार्टी के प्रवक्ता ने एक डिबेट के दौरान जी न्यूज़ के पत्रकार को धमकाया था। जून में कॉन्ग्रेस मुख्यालय में एक पत्रकार पर मोदी भक्त होने का आरोप लगाकर हमला किया गया था।
On @ZeeNewsHindi Congress Spokesperson openly threatens a journalist for doing his duty. @AmanChopra_ asked some tough questions to the Congress Spokesperson, he retaliated by saying that if Congress Govt comes all will be put behind bars. Condemn such undemocratic statements pic.twitter.com/aOiiJHPJG7
इसके अलावा कॉन्ग्रेस के दिग्गज़ नेता कपिल सिब्बल ने यहाँ तक कह दिया था कि पार्टी उन अफसरों पर नज़र रख रही है जो भाजपा को अपनी ईमानदारी दिखा रहे हैं। क्योंकि उनकी पार्टी को 2019 में वापस आना है।
Kapil Sibal,Congress:Officials should know that elections come&go,sometimes we’re in opposition&sometimes we are the ruling party.We’ll keep an eye on officials who are over enthusiastic&trying to show loyalty to PM.They should remember that Constitution is bigger than anything. pic.twitter.com/VDqn9cGlwl
नवरात्रि अर्थात स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का पर्व, पारम्परिक रूप से देवी की पूजा करने वाली संस्कृतियाँ इस बात से पूरी तरह अवगत थीं कि अस्तित्व में बहुत कुछ ऐसा है, जिसे कभी समझा नहीं जा सकता। आप उसका आनंद उठा सकते हैं, उसकी सुंदरता का उत्सव मना सकते हैं, मगर कभी उसे समझ नहीं सकते। कहा जाता है कि जीवन एक रहस्य है, ये रहस्य इसलिए भी है कि हमें परिणाम तो दिखता है लेकिन कारण लुप्त है। शायद जीवन हमेशा रहस्य ही रहे, जब तक हम खुद इस खोज के साधक न हो। सनातन सदैव धर्म और अध्यात्म की इसी सतत खोज की परम्परा का वाहक है।
या देवी सर्वभूतेषु…. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: … सनातन परम्परा जिनकी रगों में बहता है, ऐसे आदि गुणों के वाहक हिन्दुओं का नववर्ष विक्रम संवत 2076 चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शनिवार 6 अप्रैल 2019 से वासंती नवरात्र के साथ शुरू हो चुका है। चैत्र नवरात्रि, चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ और रामनवमी को इसका समापन होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र, 6 अप्रैल से शुरू होकर समापन 14 अप्रैल को है। यह त्योहार हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बहुत लोकप्रिय है। महाराष्ट्र राज्य में यह “गुड़ी पड़वा” के साथ शुरू होती है, जबकि आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों में, यह उत्सव “उगादी” से शुरू होता है।
एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीनों में चार बार नवरात्र आते हैं, लेकिन चैत्र और आश्विन माह की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं। यह समय, आदि देवी माँ भगवती की आराधना और स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का उत्सव मनाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। नवरात्र वह समय है, जब दोनों ऋतुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियाँ सतत ऊर्जा के रूप में मानवता का कल्याण करती हैं। बात करें धर्म ग्रंथों, पुराणों की तो उसमें चैत्र नवरात्र का समय सृजन और स्त्री शक्ति के उत्सव का समय है। इसका एक कारण यह भी है कि प्रकृति में इस समय हर तरफ नए जीवन और एक नई उम्मीद का बीज अंकुरित होने लगता है। ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से जनमानस में भी एक नई उर्जा का संचार हो रहा होता है। लहलहाती फसलों से उम्मीदें जुड़ी होती हैं।
नवरात्रि क्या है? मनाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? क्यों है ये आदि सनातन परम्परा का वाहक? कुछ तो होगा इस उत्सव धर्मिता के पीछे का रहस्य? आइए इन सब पर बातें करते हैं। पहली बात सनातन परम्परा में जीवन का रहस्य यही है कि गंभीर न होते हुए भी पूरी तरह शामिल होना, जीवन के हर क्षण का उत्सव मनाना।
नवरात्रि का उत्सव ईश्वर के स्त्री रूप को समर्पित है। दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती स्त्री-शक्ति यानी स्त्रैण के तीन आयामों की प्रतीक हैं। वे धरती, सूर्य और चंद्रमा या तमस (जड़ता), रजस (सक्रियता या जोश) और सत्व (परे जाना, ज्ञान, शुद्धता) की प्रतीक हैं।
तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का मतलब है सक्रियता और जोश। सत्व एक तरह से सीमाओं को तोडक़र विलीन होना है, पिघलकर समा जाना है। इन तीन खगोलीय पिंडों से हमारे शरीर की रचना का बहुत गहरा संबंध है- पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा। इन तीन गुणों को इन तीन पिंडों से भी जोड़ कर देखा जाता है। धरती माँ को तमस माना गया है, सूर्य रजस है और चंद्रमा सत्व। नवरात्रि के पहले तीन दिन तमस से जुड़े होते हैं। इसके बाद के दिन रजस से, और नवरात्रि के अंतिम दिन सत्व से जुड़े होते हैं।
जो लोग शक्ति, अमरता, क्षमता या सृजन की इच्छा रखते हैं, वे स्त्रैण के उन रूपों की आराधना करते हैं, जिन्हें तमस कहा जाता है, जैसे काली या धरती माँ अर्थात सृजन का आदिस्रोत प्रकृति। सद्गुरु कहते हैं, जो लोग धन-दौलत, जोश, उत्साह, जीवन और भौतिक दुनिया की तमाम दूसरी सौगातों की इच्छा करते हैं, वे स्वाभाविक रूप से स्त्रैण के उस रूप की ओर आकर्षित होते हैं, जिसे लक्ष्मी या सूर्य के रूप में जाना जाता है। जो लोग ज्ञान, बोध चाहते हैं और नश्वर शरीर की सीमाओं के पार जाना चाहते हैं, वे स्त्रैण के सत्व रूप की आराधना करते हैं। सरस्वती या चंद्रमा उस शक्ति के प्रतीक हैं।
तमस धरती की प्रकृति है जो सबको जन्म देने वाली है। हम जो समय गर्भ में बिताते हैं, वह समय तामसी प्रकृति का होता है। उस समय हम लगभग निष्क्रिय स्थिति में होते हुए भी विकसित हो रहे होते हैं। इसलिए तमस धरती और मनुष्यता के जन्म की प्रकृति है। हम सब सृजन के इस आयाम का अनुभव कर सकते हैं। हमारा पूरा जीवन इस पृथ्वी की देन है। सनातन में पृथ्वी के इस आयाम से एकाकार होने को महत्वपूर्ण साधना के रूप में विकसित किया गया है। वैसे भी हम सब पृथ्वी के एक अंश हैं। प्रकृति जब चाहती है, एक शरीर के रूप में अपने गर्भ में सृजन कर हमें नया जीवन दे देती है और जब वह चाहती है, उस शरीर को वापस खाक कर अपने भीतर समा लेती है।
सद्गुरु कहते हैं, नवरात्री के अवसर पर इन तीनों आयामों में आप खुद को जिस तरह से शामिल करेंगे, वह आपके जीवन को एक नई दिशा देगा। अगर आप खुद को तमस की ओर ले जाते हैं, तो आप एक तरीके से शक्तिशाली होंगे। अगर आप रजस पर ध्यान देते हैं, तो आप दूसरी तरह से शक्तिशाली होंगे। लेकिन अगर आप सत्व की ओर जाते हैं, तो आप बिल्कुल अलग रूप में शक्तिशाली होंगे। लेकिन यदि आप इन सब के परे चले जाते हैं, तो बात शक्ति की नहीं रह जाएगी, फिर आप मोक्ष की ओर बढ़ेंगे।
कहते हैं, जो पूर्ण जड़ता है, वह एक सक्रिय रजस बन सकता है। रजस पुन: जड़ता बन जाता है। यह परे भी जा सकता है और वापस उसी तमस की ओर भी जा सकता है। दुर्गा से लक्ष्मी, लक्ष्मी से दुर्गा, सरस्वती कभी नहीं हो पाई। इसका मतलब है कि हम जीवन और मृत्यु के चक्र में फँसे हैं। उनसे परे जाना अभी बाकी है।
यह सिर्फ प्रतीकात्मक ही नहीं है, बल्कि ऊर्जा के स्तर पर भी सत्य है। इंसान के रूप में में हम धरती से निकलते हैं और सक्रिय होते हैं। कुछ समय बाद, हम फिर से जड़ता की स्थिति में चले जाते हैं। सिर्फ व्यक्ति के रूप में हमारे साथ ऐसा नहीं होता, बल्कि तारामंडलों और पूरे ब्रह्मांड के साथ ऐसा हो रहा है। ब्रह्मांड जड़ता की स्थिति से निकल कर सक्रिय होता है और फिर जड़ता की अवस्था में चला जाता है। ध्यान रहे, बस हमारे अंदर इस चक्र को तोड़ने की क्षमता है। इंसान के जीवन और खुशहाली के लिए देवी के पहले दो आयामों की जरूरत होती है। तीसरा परे जाने की इच्छा है। कहते हैं, अगर आपको सरस्वती को अपने भीतर उतारना है, तो आपको प्रयास करना होगा। वरना आप उन तक कभी नहीं पहुँच सकते।
सनातन परम्परा में ही स्त्री शक्ति को सर्वाधिक महत्त्व हासिल है। स्त्री शक्ति की पूजा धरती पर पूजा का सबसे प्राचीन रूप है। स्त्री सृजन का पर्याय है। सिर्फ भारत में ही नहीं, अपितु यूरोप, अरेबिया और अफ्रीका के बड़े हिस्सों में भी कभी स्त्री शक्ति की पूजा होती थी। वहाँ देवियाँ होती थीं। दुर्भाग्यवश, पश्चिम में मूर्तिपूजा और एक से ज्यादा देवों की पूजा के सभी नामोनिशान मिटाने के लिए देवी मंदिरों को मिट्टी में मिला दिया गया। दुनिया के बाकी हिस्सों में भी यही हुआ।
धर्म न्यायालयों और धर्मयुद्धों का मुख्य मकसद मूर्ति पूजा की संस्कृति को मिटाना था। मूर्तिपूजा का मतलब देवी पूजा ही था। जो लोग देवी पूजा करते थे, उन्हें कुछ हद तक तंत्र-मंत्र विद्या में महारत हासिल थी। कामरूप कामाख्या मंदिर आज भी अपने तंत्र साधना के लिए ही विख्यात है। चूँकि, वे तंत्र-मंत्र जानते थे, इसलिए स्वाभाविक था कि आम लोग उनके तरीके समझ नहीं पाते थे। कहते हैं, उन संस्कृतियों में हमेशा से यह समझ थी कि अस्तित्व में ऐसा बहुत कुछ है, जिसे साधारण लोग आसानी से नहीं समझ सकते और इसमें कोई बुराई नहीं है। कोई भी उसे समझे बिना भी उसके लाभ उठा सकते हैं, जो हर किसी चीज के लिए हमेशा से सच रहा है।
मगर जब एकेश्वरवादी मज़हब यहुदी, इसाई और इस्लाम अपना दायरा फैलाने लगे, तो उन्होंने इसे एक संगठित तरीके से उखाड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने सभी देवी मंदिरों को तोड़ कर मिट्टी में मिला दिया।
दुनिया में हर कहीं पूजा का सबसे बुनियादी रूप देवी पूजा या कहें स्त्री शक्ति की पूजा ही रही है। भारत इकलौती ऐसी संस्कृति है जिसने अब भी उसे संभाल कर रखा है। सनातन परम्परा ने स्त्री शक्ति की पूजा को जारी रखा है। इसी संस्कृति ने हमें अपनी जरूरतों के मुताबिक अपनी देवियाँ खुद गढ़ने की आजादी भी दी। प्राण प्रतिष्ठा के विज्ञान ने हर गाँव को अपनी विशिष्ट स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपना मंदिर बनाने में समर्थ बनाया। अगम शास्त्र में इसकी पूरी विधि है। धर्म को ज़्यादा संजीदगी से सहेजा है तो वह भारत का दक्षिण का हिस्सा है। दक्षिण भारत के हर गाँव में आपको आज भी अम्मन (अम्मा) या देवी के मंदिर मिल जाएँगे। इसके अलावा शिव की नगरी काशी, विंध्याचल से लेकर शायद ही भारत का ऐसा कोई क्षेत्र हो जहाँ देवी आराध्य न हो।
बेशक, आजकल पुरुष शक्ति समाज में सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि हमने अपने जीवन में गुजर-बसर की प्रक्रिया को सबसे अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। आज सौंदर्य या नृत्य-संगीत, प्रेम, दिव्यता या ध्यान की बजाय अर्थशास्त्र हमारे जीवन की प्रेरक शक्ति बन गया है। जब अर्थशास्त्र हावी हो जाता है और जीवन के गूढ़ तथा सूक्ष्म पहलुओं को अनदेखा कर दिया जाता है, तो पौरुष कुदरती तौर पर प्रभावी हो जाता है। अगर स्त्री शक्ति नष्ट हो गई, तो जीवन की सभी करुणामयी, सौम्य, सहज और पोषणकारी प्रवृत्तियाँ लुप्त हो जाएँगी। (हालाँकि, स्त्रीत्व को इन चार शब्दों में समेटा नहीं जा सकता।) जीवन की अग्नि हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी। यह बहुत बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।
आज जब हम अपनी परम्परा और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं तो ऐसे समय में उसके संरक्षण और संवहन की जिम्मेदारी उन सब पर है जिनकी रगों में आज भी सनातन संस्कृति बह रही है। आज जब हम आधुनिक वामपंथी शिक्षा की वजह से नकार की जड़ता के शिकार हो चुके हैं। इसी शिक्षा का एक दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा यह भी है कि हम अपनी तर्कशक्ति पर खरा न उतरने वाली हर चीज को नष्ट कर देना चाहते हैं। जबकि हमारी तर्क की सीमा सनातन की सीमा नहीं बल्कि हमारी खुद के अज्ञान की सीमा है।
अमेरिका ने फॉरेन पॉलिसी मैगजीन के पाकिस्तानी F-16 को लेकर किए दावे से इनकार किया है। अमेरिका ने कहा कि उसे पाकिस्तानी F-16 विमानों की संख्या से जुड़ी किसी भी जाँच की जानकारी नहीं है।
भारतीय मीडिया ने एक ऐसी अमेरिकी मैगजीन के दावे को कल तत्परता से प्रकाशित किया था, जिसमें भारत का F-16 विमान गिराने के दावे को गलत बताया गया था और कहा गया था कि अमेरिका द्वारा की गई जाँच से पता चला है कि पाकिस्तान का एक भी F-16 लड़ाकू विमान कम नहीं हुआ है।
‘Not aware’: Pentagon on Pak F-16 count after Feb aerial dogfight with IAF https://t.co/e6PfsBfiV1
भारतीय वायुसेना ने अमेरिका की पत्रिका में छपी उस रिपोर्ट को कल शाम (अप्रैल 06, 2019) खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान का कोई भी एफ-16 विमान लापता नहीं है। वायुसेना ने कहा कि उसने पाकिस्तानी एफ-16 विमान को मार गिराया था जिसके सबूत उसके पास हैं।
IAF ने कहा कि 27 फरवरी को हुई हवाई झड़प के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान गिराया था और सबूत के तौर पर इस विमान के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर उसके पास मौजूद हैं। एयर वाइस मार्शल आरजीके कपूर ने इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि 10 सेकेंड के अंदर विंग कमांडर अभिनंदन ने F-16 को लॉक किया और आर-73 मिसाइल दागी थी।
इस फ़र्ज़ी खबर के बाद शुक्रवार (अप्रैल 05, 2019) को अमेरिका ने पाकिस्तान ने F-16 लड़ाकू विमान को लेकर डिफेंस मैगजीन के दावे से इनकार किया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि उसे ऐसी किसी जाँच की जानकारी नहीं है, जिसमें यह निर्धारित किया गया हो कि 27 फरवरी को भारतीय को फाइटर विमानों के साथ संघर्ष के दौरान F-16 विमान को खोया है।
अमेरिका का रुख उस डिफेंस मैगजीन के दावे के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि स्थिति की जानकारी रखने वाले अमेरिका के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका के अधिकारियों ने हाल ही में पाकिस्तान के F-16 विमानों की गिनती की। इसमें कोई विमान गायब नहीं पाया गया।
अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने एक न्यूज़ चैनल को बताया कि विभाग को ऐसी किसी जाँच के बारे में जानकारी नहीं है। इससे पहले फॉरेन पॉलिसी मैगजीन ने 2 अज्ञात अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट दी थी।
वहीं, कल प्रकाशित किए गए अमेरिकी मैगजीन के दावे के बाद पाकिस्तान ने F-16 को मार गिराने के दावे पर भारत को ‘सच’ बोलने को कह रहा था। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा था कि यह वक्त है कि भारत अब पाकिस्तान द्वारा मार गिराए गए दूसरे विमान समेत अपने झूठे दावों पर सफाई दे। गफूर ने डिफेन्स मैगजीन की इस अमेरिकी झूठी रिपोर्ट पर बयान देते हुए ‘सच की हमेशा जीत’ जैसी बड़ी बात भी कही थी।
जिस मैगजीन की फर्जी रिपोर्ट को अमेरिका ने नकारा है, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने उसी के आधार पर ट्वीट करते हुए कहा है कि भाजपा का चुनाव जीतने के लिए F-16 को गिराने का झूठ कामयाब नहीं हुआ है।
The truth always prevails and is always the best policy. BJP’s attempt to win elections through whipping up war hysteria and false claims of downing a Pak F 16 has backfired with US Defence officials also confirming that no F16 was missing from Pakistan’s fleet.
फेक रिपोर्ट्स के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर ऐसा आरोप लगाने वाले इमरान खान अकेले व्यक्ति नहीं हैं। दि प्रिंट के फाउंडर और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता, जिनके नाम पर कल ट्विटर पर “शेखर गुप्ता दलाल है” जैसा शर्मनाक ट्रेंड चल रहा था, ने भी अपने घरेलू रक्षा सलाहकारों की सहायता से अमेरिकी पत्रिका के इस दावे को मान लिया था और रिपोर्ट्स प्रकाशित करते हुए कहा था कि कोई भी पाकिस्तानी F-16 गायब नहीं हुआ।
अमेरिकी पत्रिका का दावा ‘कोई भी पाकिस्तानी एफ -16 गायब नहीं’, भारत बोला- ‘बकवास’
दिप्रिंट के रक्षा सलाहकार स्नेहेश एलेक्स फिलिप @sneheshphilip की रिपोर्ट
इसी मीडिया गिरोह पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि सरकार पर झूठा इल्जाम लगाने के लिए अगर कोई गया-गुजरा आदमी भी कोशिश करता है तो उनका चैनल उसे पकड़कर छाप देता है, जबकि कॉन्ग्रेस परिवार के घोटालों वाली न्यूज़ वेबसाइट्स की रिपोर्ट्स को उनका चैनल कभी भी प्रकाशित नहीं करते हैं।
कॉन्ग्रेस के क़रीबी सैम पित्रोदा आए दिन ऐसा कुछ ऐसा बोल देते हैं जिससे एक नया विवाद जन्म ले लेता है। कभी तो वो पुलवामा हमले के लिए पूरे पाकिस्तान को दोषी न ठहराने की पैरवी कर बैठते हैं, तो कभी मध्यम वर्ग को स्वार्थी न बन कर टैक्स जमा करने की नसीहत तक दे डालते हैं।
इसी कड़ी में एक बार फिर उन्होंने आपत्तिजनक शब्द कह दिए जिस पर हर भारतीय को आपत्ति होगी। उन्होंने कहा कि मोबाइल का इस्तेमाल करते भारतीय उन्हें बंदर जैसे दिखते हैं जो मोबाइल जैसे खिलौने के साथ खेलते रहते हैं।
रिपब्लिक टीवी द्वारा ट्विटर पर शेयर की गई एक वीडियो क्लिप में, राहुल गाँधी के शीर्ष सलाहकार और लंबे समय तक कॉन्गेस के वफ़ादार यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि भारतीय, कनेक्टिविटी का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर रहे हैं।
पित्रोदा कहते हैं, “भारतीय, कनेक्टिविटी का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर रहे हैं। लेकिन आप जानते हैं कि यह आज की दुनिया है, यह एक नया खिलौना (मोबाइल) है। तो अचानक आपके पास मौजूद हर बंदर को एक नया खिलौना दे दिया जाता है और वे उस पर फ़िदा हो जाते हैं। वे नहीं जानते कि इसके साथ क्या करना है। मुझे लगता है कि यह पता लगाने में 5-10 साल लगेंगे कि आप इससे बहुत कुछ कर सकते हैं जितना आप अभी कर रहे हैं। आप जानते हैं, आज यह मनोरंजन है, गपशप झूठ है। झूठ सोशल मीडिया पर बढ़ जाता है।”
पित्रोदा की इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की।
“So all of a sudden, to every monkey, you have given a new toy and they are fiddling with it”
Sam Pitroda summarizes how Congress has always viewed India and Indians. https://t.co/3RMfgxfXGL
The British called us savages and in 2019 the Congress calls us monkeys. Please take the mic away from Mr Pitroda. https://t.co/6TBSQHR0YN
— Advaita Kala / अद्वैता काला (@AdvaitaKala) April 6, 2019
पित्रोदा ने हाल ही में 26/11 के मुंबई हमले को बड़ा न मानकर कम स्तर का आँकने की कोशिश की थी। इस हमले पर उन्होंने कहा था कि सिर्फ़ 8 लोग आए और कुछ किया, आप इसके लिए पूरे देश (पाकिस्तान) को दोष नहीं दे सकते।
Sam Pitroda,Indian Overseas Congress Chief: Eight people(26/11 terrorists) come and do something, you don’t jump on entire nation(Pakistan).Naive to assume that just because some people came here&attacked,every citizen of that nation is to be blamed. I don’t believe in that way. https://t.co/OZTE0san20
पित्रोदा ने हाल ही में राहुल गाँधी की प्रस्तावित NYAY योजना का बचाव करने की कोशिश की थी और यह भी कहा था कि भले ही करों को बढ़ाना होगा इसके लिए मध्यम वर्ग को स्वार्थी नहीं होना चाहिए और इसके उन्हें अपना दिल बड़ा करना होगा। उन्होंने कहा था कि गरीबों की मदद करने के लिए, मध्यम वर्ग को इस योजना को पूरा करने के लिए अधिक कर देने के लिए तैयार रहना चाहिए।