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इमरान खान, AK47 गाड़कर आतंकियों के ग्रेनेड से रिवर्स स्विंग मत कराइए, फट जाएगा

झंडा लगाकर, सीरियस चेहरा बनाकर इमरान खान ने एक वीडियो के माध्यम से जो बातें कही हैं उससे एक बात जो ज़ाहिर है कि इस व्यक्ति को पाकिस्तान के बारे में कुछ ज़्यादा जानकारी नहीं है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने लगातार दबाव बनाया है, कुछ निर्णय लिए हैं जो कि पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था से लेकर उसके प्रायोजित आतंकवाद के लिए सही नहीं दिख रहे। 

पूरे विडियो में, जो कि अपने हिसाब से तथाकथित जमहूरियत के असली मालिकों को खुश रखने के लिए एडिट किया गया है, एक भी बार इमरान खान ने पुलवामा जैसे हमले की निंदा नहीं की, बल्कि यही गुनगुनाते रहे कि दहशतगर्दों से पाकिस्तान को बड़ा नुकसान हुआ है, और सौ बिलियन डॉलर के साथ 70,000 पाकिस्तानियों की जान गई है। 

मतलब, क्या कहना चाह रहा है ये आदमी? तुम दहशतगर्दी से परेशान हो तो बाक़ियों की परेशानी तुम्हारे कारण नहीं हो सकती? इनिंग के उत्तरार्ध में रिवर्स स्विंग डालकर बल्लेबाज़ों को कन्फ्यूज किया जा सकता है, लेकिन ग्रेनेड से गेंदबाज़ी नहीं चल सकती। क्योंकि तथ्य सामने हैं कि पाकिस्तान में मसूद अज़हर से लेकर हाफ़िज़ सईद तक परोपकारी संस्थाओं के नाम पर आम जीवन जी रहे हैं। यही किसी दिन बिलबिला कर पेशावर जैसा कांड करेंगे तो पता चलेगा कि पालतू कुत्ते ठीक होते हैं, आतंकी नहीं।

सबूत माँगे हैं इमरान ने यह कहकर कि ये नया पाकिस्तान है और सबूत देने पर वो कार्रवाई करेंगे। ‘नया पाकिस्तान’ सिर्फ कहने से नहीं बन जाता, या फिर अपनी भैंस बेचकर, गधे एक्सपोर्ट करके पैसे जुटाना किसी राष्ट्र को नई दिशा नहीं देता। नयापन आमूलचूल परिवर्तन से, या उसकी इच्छा से आता है। इस मामले में पाकिस्तान वहीं है, जहाँ वो अलग इस्लामी देश बनने के समय में था। नया पाकिस्तान का मतलब यह तो नहीं कि इन आतंकियों को अब व्यवस्थित तरीके से अपनी सेना में रखने का विचार चल रहा है?

क्या सबूत चाहिए? एलओसी के पास के आतंकियों की ट्रेनिंग कैम्प के बारे में इमरान को पता नहीं है, या फिर लॉन्च पैड के बारे में जहाँ से भारत में होनेवाले आतंकी हमलों की प्लानिंग की जाती है? अगर ये नहीं पता तो आईएसआई वालों को बहुत निराशा होगी, क्योंकि प्रधानमंत्री को इतना तो जानना ही चाहिए कि वो आतंकी देश के प्रधानमंत्री हैं और वहाँ की सत्ता सेना और आतंकी चलाते हैं, जबकि चेहरा जमहूरियत का रहता है। 

भारत से पाकिस्तान में आतंकियों के होने के सबूत माँगना उतना ही हास्यास्पद है जितना यह कहना कि आतंकवादी ने अगर गोली चलाई तो हमें यह बताइए कि उसके हाथ थे! लेकिन पाकिस्तान के पीएम जैश-ए-मोहम्मद और जमात-उद-दवा के पाकिस्तान में सक्रिय होने के बावजूद, उनके द्वारा हमलों की ज़िम्मेदारी लेते रहने के बाद भी, यही रिकॉर्ड बजाते हैं कि उन्हें सबूत चाहिए! वैसे, इमरान जी, ओसामा जहाँ था उसका नाम ‘चाँद’ तो नहीं रख दिया था आप लोगों ने क्योंकि उसके होने को तो उसके मरने तक आप लोग नकारते रहे थे। 

मुझे याद है जब पेशावर के आर्मी स्कूल के हमले में 105 बच्चों की जान गई थी। पूरा भारत उठ खड़ा हुआ था आतंकियों के ख़िलाफ़। जब सच में इस तरह की घटनाएँ होती हैं तो देश की भावना से ऊपर उठकर व्यक्ति मानव मात्र के तौर पर सोचता है, द्रवित हो उठता है। ऐसी घटना दोबारा होगी, तो दोबारा भारत के लोग खड़े होंगे क्योंकि वही मानवता है। 

इतना बड़ा विडियो बनाया तो दो शब्द उन जवानों के नाम भी कह देते जो किसी युद्ध में वीरगति को प्राप्त नहीं हुए, बल्कि अकारण ही वो चले गए। किसने किया, ये तो अलग बात है लेकिन मानव मात्र के नाम पर, एक पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के नाम पर आपके पास संवेदना के दो शब्द नहीं हैं, लेकिन आप सबूत माँगे जा रहे हैं! 

अगर ये नया पाकिस्तान है, तो भारत भी पुराना नहीं रहा। यही कारण है कि आपको सामने आकर ये सब कहना पड़ रहा है। आपके यहाँ चीन का पैसा लगा हुआ है, और अगर भारत ने थोड़ा सा भी रुख़ कड़ा किया, बलूचिस्तान आदि जगहों पर थोड़ी-सी एक्टिविटी बढ़ी तो पैसों के वापस जाने में देर नहीं लगेगी। आपको भी पता है कि नया भारत कहाँ मारता है, कैसे मारता है। 

खासकर, मोदी सरकार ने जो आतंकी हमले के बाद सीधा फ़ैसला सेनाओं के हाथ छोड़ दिया है, तब से खलबली मचनी उचित है। पाकिस्तान में जो पानी जाता है, वो भी भारत से होकर जाता है, जिस पर मोदी ने पहले ही कह रखा है कि पानी और ख़ून एक साथ नहीं बह सकते। अमेरिका अब ट्रम्प के आने के बाद से तुम्हारे साथ रहा नहीं। ले-दे कर चीन है, और अगर हालात खराब हुए तो वो भी अपना पैसा लेकर चला जाएगा। अब आपको डर है कि अगर भारतीय सेना ने बिना युद्ध छेड़े पाकिस्तान को सीमित तरीके से तबाह करना शुरु किया, तो आप कहीं के नहीं रहेंगे। ये जो क्राउन प्रिंस आए थे डॉलर लेकर, वो भी शायद ऐसे पाकिस्तान में पैसे न लगाना चाहें जहाँ लगातार युद्ध जैसी स्थिति बनी रहे।  

ज़लालत और जहालत का पर्याय बन रहे इमरान खान ने ये भी कहने की कोशिश की कि भारत में चुनाव होने वाले हैं तो ये सब किया जा रहा है! पाकिस्तान में तो आप ही कह रहे हैं कि बहुत दहशतगर्दी है, फिर क्या वहाँ भी चुनाव होने वाले हैं? आतंकवाद से अगर आप परेशान हैं तो फिर नामी आतंकी वहाँ कैसे रह रहे हैं? क्या आप उनका इस्तेमाल चुनावों के दौरान करने वाले होते हैं? जिस देश में चुनाव जीतने का एक ही फ़ंडा हो कि कौन सी पार्टी भारत के नाम पर कितना ज़हर उगल सकती है, वो ‘चुनावों के साल’ की बात न ही करे तो बेहतर है।

इमरान ख़ान ने एक और ग़ज़ब की बात कही कि भारत को सोचना चाहिए कि कश्मीर का युवा अपने आपको मारने पर क्यों उतारू है! अब अगर यह बात भी इमरान को समझ में नहीं आ रही तो लानत है पाकिस्तान के मदरसों पर जो उन्हें बहत्तर हूर के कॉन्सेप्ट ठीक से नहीं समझा पाया!

इमरान अगर आतंक को लेकर गम्भीर हैं तो पुरानी स्क्रिप्ट देखकर बोलना बंद करें और सही मायनों में नई सोच दिखाएँ। नई सोच यही कहती है कि अपनी गिरती इकॉनमी की चिंता करें और आतंक के इन्फ़्रास्ट्रक्चर में कम बजट लगाएँ। भैंस, गधे और कार बेचकर पैसे जुटाने वाले प्रधानमंत्री को यह सोचना चाहिए कि बंदूक़ों और आरडीएक्स के साथ-साथ आतंकियों को सैलरी पर रखना पाकिस्तानी हुकूमत की अजीबोग़रीब नीतियों की तरफ इशारा करता है।

कश्मीरी राष्ट्रवादी, जो माँ-पिता को खो चुका है, PM से सुरक्षा की गुहार कर रहा है

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवम् गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह के नाम खुला ख़त 

महोदय,

नमस्ते, आदाब! 

मैं श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) का रहने वाला हूँ। मैं यह खुला ख़त आपको इसलिए लिख रहा हूँ ताकि मैं अपनी तरफ आपका ध्यान आकर्षित कर सकूँ। कश्मीर घाटी के हालात से आप अच्छी तरह से वाक़िफ़ हैं। साथ ही, आप यह भी जानते हैं कि हर राष्ट्रवादी कश्मीरी यह मानता है कि कश्मीर का भविष्य भारत के साथ ही सुरक्षित है। यहाँ के अलगाववादियों और आतंकियों का एक ही मक़सद है कि निर्दोष कश्मीरियों को जिहाद के नाम से काट दिया जाए और कश्मीर को नरसंहार और बर्बादी का पर्याय बना दिया जाए। ऐसे लोगों को रोकने के लिए और कश्मीर के लोगों को उनका असली एजेंडा समझाने के लिए मैं रात-दिन काम कर रहा है।

सर, मैं अपने कई दोस्तों के साथ कश्मीर के युवाओं को मुख्यधारा में लाने और उन्हें भारत देश की परिकल्पना समझाने की पुरज़ोर कोशिश कर रहा हूँ। हम देशभक्त लोग हैं और अपने देश के लिए बहुत बड़े बलिदान कर चुके हैं, जिसमें हमारे माता-पिता, भाई-बहन और कई क़रीबी संबंधियों की शहादत शामिल है। हमने कई सारे इनिशिएटिव लिए हैं ताकि युवा इस चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनें और शांति के प्रयास में हमारा साथ दे सकें। मेरे परिवार के कुछ सदस्य आतंकियों द्वारा पिछले कुछ सालों में मारे जा चुके हैं और यह बताता है कि यहाँ मेरी ज़िंदगी को कितना ख़तरा है। 

हम लगातार यहाँ पर यह प्रयास कर रहे हैं कि युवावर्ग इलेक्टोरल पॉलिटिक्स का हिस्सा बने और यही कारण है कि हम आतंकियों की निगाह पर चढ़ चुके हैं, और हमें लगातार डराया-धमकाया जाता है। मैं कई बार अपने ऊपर हुए आतंकी हमले से बच चुका हूँ। मुझे सोशल मीडिया पर भी लगातार जान से मारने की धमकियाँ मिलती रही हैं जिसे मैं संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाता रहा हूँ। हुर्रियत और उनके कई एजेंट्स कई बार मुझे धमकी दे चुके हैं कि मैं कश्मीर में अपना काम रोक दूँ।

मैं कई बार राज्य की पुलिस और जम्मू-कश्मीर के ADGP (सिक्योरिटी) के संज्ञान में इन सब बातों को ला चुका हूँ। मैंने होम मिनिस्ट्री, जम्मू कश्मीर के गवर्नर, गवर्नर के सलाहकार एवम् जम्मू कश्मीर DGP तक, सबको लिखा है, उन्हें हर बात बताई है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। 

सर, सरकार तो उन लोगों को भी सुरक्षा दे रही है जिनके माता-पिता आतंकियों द्वारा मारे गए थे लेकिन वो लगातार देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं, जैसा कि श्री राम माधव जी ने अपने बयान में कहा था।  सर, जैसा कि मैंने आपको अपने काम और अपने परिवार के बारे में बताया है, मैं आपसे गुज़ारिश करता हूँ कि आप इन बातों की तरफ़ अपना ध्यान देंगे और मुझे सुरक्षा प्रदान करवाएँगे ताकि मैं अपने राष्ट्रवादी गतिविधियों को आगे बढ़ाता रहूँ। 

इस मदद के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा। 

सादर,

ट्विटर हैंडल @ibne_sena

श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर


हिंदी हृदय सम्राट रवीश कुमार जी! थोड़ी अंग्रेजी भी पढ़ लीजिए, फ़र्ज़ीवाड़ा कम फैलाएँगे… हेहेहे!

ऐसा लगता है कि आदरणीय प्राइम कुमार उर्फ रवीश कुमार ने प्रोपेगेंडा फैलाने का ठेका ले रखा है। दैनिक जागरण में रुपए की जिस ख़बर का हवाला देते हुए उन्होंने एक लंबा फर्जी लेख ”मीडिया विजिल” में लिख मारा है, वह पूरी स्टोरी विशेषज्ञों के हवाले से लिखी गई है। लेकिन उन्हें न तो विशेषज्ञ नजर आ रहे हैं, और नहीं स्टोरी समझ में आ रही है।

दैनिक जागरण (अख़बार) की वो स्टोरी, जिसे फ़र्ज़ी कहते हुए लिख मारा लेख

बात करते हैं स्टोरी पर। मूल स्टोरी ब्लूमबर्ग में प्रकाशित हुई है और उसे देश के सभी महत्वपूर्ण अखबारों ने प्रकाशित किया है। बिजनेस स्टैंडर्ड में ”Rupee could weaken past 75 if Modi fails to win second term: Expert”, हेडलाइन के साथ।

फाइनैंशियल एक्सप्रेस में ”Rupee vs Rupiah: Indonesian currency holds edge as polls near”, हेडलाइन के साथ। इसके अलावा ब्लूमबर्ग क्विंट में यह खबर छपी।

ब्लूमबर्ग में प्रकाशित ऑरिजिनल स्टोरी

ऐसे में रवीश के हिंदी विरोध की ग्रंथि फट पड़ी और उन्होंने प्रवचन दे मारा, ”हिन्दी अख़बारों से सावधान रहें। इस पर विचार करें कि या तो हिन्दी के अखबार बंद कर दें या हर महीने अख़बार बदल दें। आख़िर झूठ पढ़ने के लिए आप क्यों पैसा देना चाहते हैं? किसी दिन हॉकर के आने से पहले उठ जाइए और मना कर दीजिए। एक दिन जाग जाइए बाकी दिनों के लिए अंधेरे से बच जाएँगे। हिन्दी के अख़बार हिन्दी के पाठकों की हत्या कर रहे हैं। सावधान!”

लेकिन पूरी स्टोरी को देखने के बाद लगता है कि रवीश कुमार अंधे हो गए हैं, ज्ञान के गुमान में। उनका कई दफे बर्ताव ट्रोल से बुरा होता है, उन्हें इस बात भ्रम हो गया है कि जो मैं कह रहा हूँ, वही सही है, जो और जहाँ से मैं देख रहा हूं, वह सही है, बाकी सब कुएं में पड़े हैं।

हिंदी खबर में दो विशेषज्ञों के जरिए बात रखी गई है, जिसे हूबहू अंग्रेजी की मूल खबर में पढ़ा जा सकता है। लेकिन रवीश कुमार ने फिर भी फर्जीवाड़ा फैलाया।

पहला, सिंगापुर स्थित टॉरस वेल्थ एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक रेनर माइकल प्रीस ने कहा, ‘रुपए के मुकाबले रुपया निवेशकों के लिए बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड ऑफर कर रहा है। इंडोनेशिया के मामले में हमारी राय है कि वहां यदि यथास्थिति बनी रहती है, तो यह अच्छी बात होगी। दूसरी तरफ यदि मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनने में सफल नहीं हो पाते हैं तो लोग इसे नकारात्मक परिघटना मानेंगे, नतीजतन रुपए में भारी गिरावट आ सकती है।’

अंग्रेजी का पैरा वो भी ग्राफ के साथ

अगला पैरा, जिसमें रुपए के एक तय स्तर से नीचे जाने का जिक्र है, उसे भी विशेषज्ञ के हवाले से लिखा गया है।

आइएनजी का आकलन: सिंगापुर स्थित आईएनजी ग्रुप एनवी के अर्थशास्त्री प्रकाश सकपाल का कहना है कि यदि मोदी एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री नहीं चुने जाते हैं तो ऐसी स्थिति में रुपया कमजोर होकर 75 प्रति यूएस डॉलर से भी नीचे आ सकता है।

अंग्रेजी का पैरा रुपया और रुपैया के डेटा के साथ

ब्लूमबर्ग की मूल स्टोरी और हिंदी की खबर में साफ लिखे जाने के बाद प्राइम कुमार को यह नजर नहीं आया, और उन्होंने यह फर्जीवाड़ा कर डाला। वह लिखते हैं, ”कहीं इन बातों की आड़ में भ्रम फैला कर माहौल तो नहीं बना रहे हैं? इनका कहना है कि मोदी दोबारा नहीं चुने गए तो इंडोनेशिया की मुद्रा भारत के रुपए से आगे निकल जाएगी। ये नहीं बताया कि भारत का रुपया किन मुद्राओं से पीछे है? क्यों इंडोनेशिया के रुपैया से ही अचानक तुलना करने लगे हैं? डॉलर छोड़ अब हमें इंडोनेशिया के रुपए से होड़ करनी है क्या?”

लेकिन अगर श्रीमान ने एक बार खबर के मूल सोर्स को पढ़ने की कोशिश की होती है, तो उन्हें यह भान होता कि खबर अंग्रेजी में लिखी गई थी और यह उसका अनुवाद था। दूसरी सबसे अहम बात उनके इस प्वाइंट को लेकर है,

”क्यों इंडोनेशिया के रुपैया से ही अचानक तुलना करने लगे हैं? डॉलर छोड़ अब हमें इंडोनेशिया के रुपैया से होड़ करनी है क्या?”

स्टोरी का पहला पैरा (सबसे ऊपर लगाई गई इमेज) ही इसका जवाब देता है, जिसमें साफ कहा गया है कि ”Two of Asia’s biggest emerging economies will soon elect leaders, and wagers are already being placed on their currencies। The consensus: Indonesia’s rupiah will trump India’s rupee।”

मतलब ”एशिया की दो बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं जल्द ही चुनाव का सामना करने जा रहे हैं और सबसे बड़ा दांव इन दोनों देशों की मुद्राओं पर लगा हुआ है।” जिन्होंने स्टोरी लिखी, उन्हें यह एंगल दिलचस्प लगा होगा क्योंकि इस साल भारतीय रुपया जहां 2 फीसद तक लुढ़क चुका है, वहीं इंडोनेशियाई रुपैया 2 फीसद से अधिक मजबूत हो चुका है। इंडोनेशियाई रुपैया थाई करेंसी के बाद सबसे शानदार प्रदर्शन वाली करेंसी है जबकि रुपए की चाल बेहद खराब रही है।

इसका यह मतलब नहीं होता कि रुपया की तुलना डॉलर के बदले इंडोनेशियाई रुपैया से होगी। लेकिन प्राइम कुमार आज कल जज की भूमिका में हैं। उन्हें जजमेंट देने की पुरानी आदत हैं। वह भावुक होते हैं तो कोई बात नहीं होती है, दूसरा भावुक होता है तो उन्हें दुनिया में अंधेरा छाता दिखने लगता है।

अब रही बात हिंदी की तो प्राइम कुमार अक्सर अपील करते रहते हैं। लेकिन प्राइम कुमार यह भूल जाते हैं कि हिंदी जगत की अधिकांश खबरें अनुवादित होती हैं और उनका सोर्स एजेंसियां होती हैं। बिजनेस के मामले में यह प्रतिशत और भी ज्यादा होता है। लेकिन लगता है रवीश खुद कभी अनुवाद नहीं किए हैं… हेहेहे!

पाकिस्तानी आतंक की सड़ाँध ईरान और अफ़ग़ानिस्तान तक है

दुनिया के पहले इस्लामिक स्टेट पाकिस्तान से केवल भारत ही नहीं अपितु उसके पड़ोसी ईरान और अफ़ग़ानिस्तान भी त्रस्त हैं। कुछ दिनों पहले ही पाकिस्तान द्वारा समर्थन प्राप्त आतंकी संगठन जैश-अल-अदल ने एक आत्मघाती हमला कर ईरान रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के 27 फ़ौजियों को मार डाला और 10 अन्य को घायल कर दिया। यह हमला भी उसी प्रकार किया गया था जैसे कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफ़िले पर 14 फरवरी को किया गया था।

जैश-अल-अदल नामक सुन्नी सलाफ़ी विचारधारा वाला आतंकी संगठन ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय है और इसे पाकिस्तान का परोक्ष समर्थन प्राप्त है। ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से सटा हुआ है। ईरान ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वो जैश-अल-अदल पर तुरंत कार्रवाई करे अन्यथा ईरान अपने तरीके से बदला लेगा।

पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकवाद से भारत के बाद जो देश सबसे ज्यादा त्रस्त है वह है अफ़ग़ानिस्तान। हाल ही में पाकिस्तान में तालिबान और इमरान खान के बीच मीटिंग होने वाली थी जिसके लिए सारी तैयारियाँ की जा चुकी थीं। इस्लामाबाद में स्कूल कॉलेज बंद कर दिए गए थे और सार्वजनिक छुट्टी का ऐलान कर दिया गया था। जिस दिन तालिबान के साथ मीटिंग होने वाली थी उसी दिन सऊदी अरब के प्रिंस को भी इस्लामाबाद बुलाया गया था।

कहा तो यह भी जा रहा था कि इस्लामाबाद में तालिबान के साथ अमरीकी अधिकारियों की मीटिंग होने वाली थी। हास्यास्पद रूप से यह मीटिंग आखरी वक्त में निरस्त कर दी गई क्योंकि तालिबान के लीडरों को संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया है इसलिए वे अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार नहीं जा सकते।

अफ़ग़ानिस्तान ने इस मीटिंग पर संयुक्त राष्ट्र में अपने स्थाई मिशन के हवाले से कड़ी आपत्ति जताते हुए पाकिस्तान से अपनी सरज़मीं पर पनपने वाले आतंकवाद को खत्म करने को कहा। अमेरिका के साथ होने वाली कथित गुप्त मीटिंग से करीब एक पखवाड़े पहले तालिबान के ‘प्रवक्ता’ ने एक साक्षात्कार दिया था जिसमें उसने कहा था कि तालिबान चाबहार परियोजना की सुरक्षा करेगा और अफ़ग़ानिस्तान में रहने वाले हिन्दुओं और सिखों के हितों की रक्षा करेगा।

वह गुप्त मीटिंग तो नहीं हो पाई लेकिन इस पूरे प्रकरण से जो बात निकलकर सामने आई वह यह है कि तालिबान आज भी खुद को एक शासक (ruling regime) की तरह प्रोमोट करता है। वह अमेरिका से सैन्य टुकड़ियों की वापसी (withdrawl of troops) के बारे में बात करने को इच्छुक है, वह चाबहार परियोजना और हिन्दू और सिख जैसे समुदायों की रक्षा की बात करता है। वह भी तब उसके कथित ‘लीडर’ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर घोषित आतंकवादी हैं।

इन आतंकवादियों को पाकिस्तान और सऊदी से निरंतर खाद-पानी मिलता है। जानने लायक बात यह है कि अफ़ग़ानिस्तान की आम जनता पाकिस्तान की जनता की भाँति भारत विरोधी नहीं है। अफ़ग़ानिस्तान के लोग भारत से प्रेम करते हैं। अफ़ग़ानिस्तान के उप विदेश मंत्री हेकमत खलील करज़ई Terrorism in Indian Ocean Region पुस्तक में प्रकाशित अपने लेख में भारत और अफ़ग़ानिस्तान के मध्य संबंधों पर लिखते हैं “ये मुहब्बत है दिलों का रिश्ता, ऐसा रिश्ता जो ज़मीनों की तरह, सरहदों में कभी तक़सीम नहीं हो सकता।”

करज़ई लिखते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान के बॉर्डर पर सर्वाधिक आतंकी कैंप मौजूद हैं। ये अफ़ग़ानिस्तान को विश्वभर में आतंक फ़ैलाने के लॉन्च पैड के रूप में प्रयोग करते हैं। ज़ाहिर है कि इन सभी गुटों को पाकिस्तान द्वारा समर्थन और आर्थिक सहायता प्राप्त है। इनमें प्रमुख रूप से तालिबान, हक़्क़ानी नेटवर्क, तहरीक़-ए-तालिबान पाकिस्तान, लश्कर-ए-तय्यबा आदि के अलावा चीन में ऑपरेट करने वाला संगठन ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट और जुंदल्लाह भी शामिल है। जुंदल्लाह ही वह संगठन है जिसने 2012 में जैश-अल-अदल को जन्म दिया था जो आज ईरान में आतंकी गतिविधियों के ज़िम्मेदार है।    

सवाल यह है कि इतने सालों तक अमरीकी फ़ौज की मौजूदगी होते हुए भी अफ-पाक सीमा पर से आतंकवादियों का ख़ात्मा क्यों नहीं हो सका? उप विदेश मंत्री करज़ई इसके कारण बताते हुए लिखते हैं कि इन आतंकियों को ‘स्टेट’ (अर्थात पाकिस्तान) द्वारा संरक्षण प्राप्त है। इसके अतिरिक्त ड्रग्स, ग़ैर क़ानूनी रूप से खुदाई इत्यादि से भी होने वाली कमाई भी आतंक को पोषित करती है। यही नहीं इस क्षेत्र में सऊदी अरब से काफी पैसा आता है जो ‘टेरर फाइनेंसिंग’ में मददगार है।  

पाक ने ICJ में कुलभूषण जाधव को RAW एजेंट साबित करने को लिया ‘The Quint’ का सहारा

सोमवार (फरवरी 18, 2019) को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भारत द्वारा पाकिस्तान की बखिया उधेड़ने के बाद आज मंगलवार को पाकिस्तान ने अपना पक्ष रखा। कुलभूषण जाधव मामले में सुनवाई चार दिनों तक चलेगी, जिसका आज दूसरा दिन था। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि पाकिस्तान ने जाधव को भारतीय एजेंसी RAW का जासूस साबित करने के लिए भारतीय मीडिया का सहारा लिया। भारत द्वारा दी गई दलीलों के जवाब में पाकिस्तान के वकील क़ुरैशी ने कहा कि जाधव रॉ के एजेंट थे।

पाकिस्तानी वकील ने पत्रकार करण थापर द्वारा लिखे लेखों से यह साबित करने की कोशिश की कि जाधव रॉ के जासूस थे। पाकिस्तान ने 2017 में थापर द्वारा इंडियन एक्सप्रेस में लिखे लेख का सहारा लिया। इस लेख में थापर ने भारतीय विदेश मंत्रालय को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा था कि जाधव को लेकर उनका स्टैंड क्या है? आपको बता दें कि करण थापर कपिल सिब्बल और पी चिदंबरम समर्थित समाचार चैनल हार्वेस्ट टीवी में नज़र आने वाले हैं।

तत्पश्चात कुरैशी ने फ्रंटलाइन में प्रवीण स्वामी द्वारा लिखे गए लेख का जिक्र किया। यह लेख जनवरी 2018 में ‘India’s Secret War’ की हैडिंग के साथ लिखा गया था। इस लेख में स्वामी ने दावा किया था कि जाधव पाकिस्तान में भारत के गुप्तचर थे और भारत द्वारा इस से इनकार करना असंभव है।

इन दोनों लेखों के अलावा पाकिस्तानी पक्ष ने चन्दन नंदी द्वारा ‘दी क्विंट’ में लिखे गए एक लेख का भी सहारा लिया। इस लेख में नंदी ने दावा किया था कि जाधव के पास दो पासपोर्ट थे- एक उनके असली नाम से, और एक हुसैन मुबारक पटेल के नाम से। अब यही सारे लेख अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान द्वारा सबूत के तौर पर पेश किए जा रहे हैं।

ज्ञात हो कि इस लेखों को पाकिस्तानी मीडिया द्वारा भी ख़ूब प्रचारित एवं प्रसारित किया गया था। आपको यह भी जानना चाहिए कि यह पहली बार नहीं है जब भारतीय मीडिया के लेखों का भारत के ख़िलाफ़ ही प्रयोग किया जा रहा हो। जब लंदन की अदालत में विजय माल्या को भारत में प्रत्यर्पण संबंधी सुनवाई चल रही थी, तब माल्या के वकील ने भारतीय मीडिया द्वारा सीबीआई के ख़िलाफ़ लिखे गए लेखों को दिखाया था, जिसे जज ने नकार दिया था।

पुलवामा आतंकी हमला: 23 जवानों के कर्जे को SBI ने किया माफ़

गुरुवार (फरवरी 14, 2019) को हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जबकि 5 जवान जख्मी हुए। देश पर बलिदान हुए इन जवानों के जाने के बाद इनके परिवारों में मातम का माहौल पसरा हुआ है। ऐसे में एसबीआई ने इन जवानों के परिवार वालों को राहत देने के लिए एक घोषणा की है। इस घोषणा में एसबीआई ने बलिदान हुए जवानों के कर्ज को माफ़ करने का निर्णय लिया है।

भारतीय स्टेट बैंक ने बताया है कि बलिदान हुए 40 जवानों में से 23 सीआरपीएफ कर्मियों ने बैंक से कर्ज लिया हुआ था और इसी दिशा में बैंक ने तत्काल प्रभाव से बकाया कर्ज माफ़ करने का निर्णय किया है।

बता दें कि यह सारे जवान एसबीआई के ही ग्राहक थे। उनका वेतन भी इसी में आता था। इन
खातों पर बैंक प्रत्येक रक्षाकर्मियों को 30-30 लाख रुपए का बीमा कवर उपलब्ध कराता है।

एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि आतंकवादी हमले में हमेशा देश की सुरक्षा के लिए खड़े सुरक्षाकर्मियों का वीरगति को प्राप्त होना बहुत दु:खद और पीड़ादायी है।

इसलिए एसबीआई ने उन परिवारों को राहत देने के लिए छोटा सा कदम उठाया है, जिसमें उन्होंने एक यूपीआई बनाया है ताकि इन जवानों के परिजनों की मदद के लिए लोग अपना हर संभव योगदान दे सकें।

‘मेक इन इंडिया’ ने भारतीय वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग क्षमता का लोहा मनवाया – PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को काशी पहुँचे। यहाँ पर क़रीब चार घंटे रहकर चार स्थानों का दौरा किया। इस दौरान पीएम मोदी ने 3,382 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने कई अहम् बातें कहीं, जो इस प्रकार हैं:

  • 2016 में मैंने इस प्रांगण को विकसित करने और इसके सौन्दर्यीकरण की बात कही थी, जिसकी माँग दशकों से हो रही थी, लेकिन किसी सरकार ने उसे पूरा नहीं किया था। आज इन सभी कार्यों का शुभारंभ हुआ है।
  • संत रविदास जी की जन्मस्थली करोड़ो लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का स्थल है। आपका सांसद होने के नाते मुझे भी यहां सेवा करने का मौका मिल रहा है।
  • गुरु जी ने ऐसे भारत की कल्पना की थी, जहां बिना किसी भेदभाव के हर किसी का ख्याल रखा जाए। हमारी सरकार पिछले साढ़े चार साल से इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए लोक कल्याण के काम कर रही है।
  • आज वाराणसी में जिन लोक कल्याणकारी योजनाओं का उद्घाटन हुआ, उन सभी योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग को समान रूप से मिलने वाला है। हमारी सरकार का हर कदम, हर योजना पूज्य संत रविदास जी की भावनाओं के अनुरूप है।
  • गरीब परिवारों को मुफ्त में बिजली का कनेक्शन, मुफ्त में गैस कनेक्शन, 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज, किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था और 6,000 रुपये वार्षिक अनुदान के साथ ही अन्य कई ऐसी योजनाएं शुरू की गई हैं, जो वंचित वर्ग को ऊपर उठाने के लिए हैं।
  • हमारे नौजवान साथी जो डिजिटल इंडिया के युग में सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं, हम उनके साथ मिलकर वर्तमान स्थिति को बदलने वाले है। हमें उन लोगों को पहचानना होगा, जो अपने स्वार्थ और राजनीतिक लाभ के लिए जात-पात का मुद्दा उठाते हैं।
  • संत रविदास जी के आशीर्वाद से #NewIndia में बेईमानी के लिए, भ्रष्ट आचरण के लिए कोई स्थान नहीं। ईमानदारी से जो आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए हमारी सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी मिलेगी।
  • हम सभी भाग्यशाली हैं, जिन्हें गुरुओं, संतो और ऋषियों-मुनियों का मार्गदर्शन मिला। गुरुओं का ये ज्ञान और महान परम्परा ऐसे ही हमारी पीढ़ियों को रास्ता दिखाती रहे, इसके लिए भी हमारी सरकार लगातार कार्य कर रही है।
  • पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद, वाराणसी के वीर सपूत रमेश यादव को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
  • राष्ट्ररक्षा के लिए अपने स्वजन को न्यौछावर करने वाले हर परिवार का ऋण हम सभी पर हमेशा-हमेशा के लिए रहेगा।
  • आज स्वराज, स्वतंत्रता, स्वालंबन और शौर्य के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज जी की जयंती पर पूरे राष्ट्र को शुभकामनाएं देता हूँ। शिवाजी महाराज ने अपने सुशासन से हमें वो पथ दिखाया था जिस पर चल कर हम एक सशक्त राष्ट्र बन सकते हैं।
  • काशी को नए भारत की नई ऊर्जा का केंद्र बनाने में हम आज सफल हुए है। थोड़ी देर पहले ही एक ऐसे इंजन को हरी झंडी दिखाने का अवसर मुझे मिला है जो पहले डीजल से चलता था। अब वही इंजन बिजली से चला करेगा।
  • ‘मेक इन इंडिया’ के तहत किए गये इस काम ने एक बार फिर दुनिया में भारतीय वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग क्षमता का लोहा मनवाया है। इस प्रयोग के सफल हो जाने के बाद भारतीय रेलवे को और सशक्त बनाने, क्षमता और रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी।
  • दिल्ली से काशी के बीच चल रही देश में बनी पहली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन, वंदे-भारत एक्सप्रेस को कुछ लोगों द्वारा जिस तरह निशाना बनाया जा रहा है, उसका मजाक उड़ाया जा रहा है, वो बहुत दुखद है। क्या वन्दे भारत ट्रेन बनाने वाले इंजीनियर और technician को अपमानित करना उचित है?
  • मैं चेन्नई रेल कोच फैक्ट्री के इंजीनियरों, टेक्नीशियनों, हर कर्मचारी से भी कहूंगा कि भारत को उन पर गर्व है। मैं उनकी मेहनत को प्रणाम करता हूं, उन्हें नमन करता हूँ।
  • आप जैसे इंजीनियर-प्रोफेशनल्स ही कल भारत में बुलेट ट्रेन भी बनाएंगे और सफलता-पूर्वक चलाएँगे भी।
  • आज जिन दो बहुत बड़े कैंसर अस्पतालों का लोकार्पण हुआ है, उनमें से एक BHU में है और दूसरा लहरतारा में बना है। BHU का कैंसर अस्पताल तो सिर्फ 10 महीने में ही तैयार किया गया है।
  • सड़क और रेलवे से जुड़े जितने भी काम बनारस और आसपास के क्षेत्रों में हो रहे हैं, इससे आवाजाही आसान होने के साथ ही किसानों को और व्यापारियों को लाभ मिल रहा है। बनारस में और पूर्वांचल में नए-नए उद्यमों के लिए रास्ते खुल रहे हैं।
  • हमारी सरकार देश के विकास को दो पटरियों पर एक साथ आगे बढ़ा रही है। पहली है इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे: हाईवे, रेवले, एयरवे, बिजली, इंटरनेट, ऐसी सुविधाओं का विकास है। और दूसरी पटरी गरीब, किसान, श्रमिक, मध्यम वर्ग का जीवन आसान बनाने की है।
  • आपने देखा होगा कि पहले 10 वर्ष के बाद कर्जमाफी का ढिंढोरा पीटा जाता था और 50-55 हज़ार करोड़ रुपए की कर्जमाफी की जाती थी। अब जो योजना हमने बनाई है, इससे 10 वर्ष में साढ़े 7 लाख करोड़ रुपए किसानों के खाते में सीधे पहुंचेंगे।
  • दिल्ली से काशी के बीच चल रही देश में बनी पहली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन, वन्दे भारत एक्सप्रेस हमारे इंजीनियरों का कमाल है। लेकिन ये बड़े दुःख की बात है कि कुछ लोग उनका मजाक उड़ा रहे हैं।

कपिल शर्मा जी, सही बात है, आतंक बड़ा मुद्दा नहीं, बड़ा मुद्दा घटिया चुटकुलों पर लोगों का ना हँसना है

‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ और ‘दी कपिल शर्मा शो’ जैसे कॉमेडी प्रोग्राम से दर्शकों को हँसाने वाले कपिल शर्मा ने शायद आतंकवादी हमलों को भी कॉमेडी सर्कस समझना शुरू कर दिया है। तभी तो शायद उन्हें नवजोत सिंह सिद्धू के बयान में कोई दोष नहीं दिख रहा और वह जनभावनाओं का मज़ाक उड़ाने व्यस्त हैं। कपिल शर्मा के बयान से पहले सिद्धू के बयान को समझना ज़रूरी है। सिद्धू ने पुलवामा हमले पर बोलते हुए कहा था:

“आतंकवाद का कोई देश नहीं होता। आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता। पुलवामा हमला एक कायरतापूर्ण कार्रवाई है। मैं इस घटना की निंदा करता हूँ। जो भी लोग इस आतंकी हमले के लिए ज़िम्मेदार हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। क्या इससे ज्यादा कुछ बोलना ज़रूरी है?”

सिद्धू के इस बयान के बाद लोगों ने उनका विरोध किया लेकिन उन्होंने माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, सिद्धू ने अपने बयान का बचाव भी किया। पंजाब विधानसभा से लेकर ट्विटर तक- हर जगह सिद्धू के इस बयान की कड़ी निंदा हुई। जनता ने कैप्टेन अमरिंदर सिंह से नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब मंत्रिमंडल से बरख़ास्त करने की भी माँग की। ताज़ा ख़बरों के अनुसार, शुरूआती जाँच में भी इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ सामने आ रहा है। ऐसे में, वास्तविकता की दुनिया से कोसो दूर कपिल शर्मा ने सिद्धू का बचाव करते हुए कहा:

“मुझे लगता है कि ठोस चीजें होनी चाहिए। ये छोटी-छोटी चीजें होती हैं, उसको बैन कर दो, सिद्धूजी को शो से निकाल दो। अगर सिद्धूजी को शो से निकालने से इस समस्या का हल हो जाता है तो सिद्धूजी ख़ुद इतने समझदार हैं कि वे शो से चले जाएँगे। हैशटैग चलाकर लोगों को गुमराह किया जाता है। मुझे लगता है मुद्दे की बात करनी चाहिए और जेनुइन प्रॉब्लम पर फोकस करना चाहिए। इधर-उधर भटकाकर आप लोग यूथ का ध्यान डाइवर्ट कर रहे हो ताकि हम असली मुद्दे से हट जाएँ।”

कपिल शर्मा के इस बयान ने जले पर नमक छिड़कने का कार्य किया और सोनी चैनल का विरोध कर रहे लोगों ने कपिल शर्मा का बायकॉट किया। ट्विटर पर कपिल शर्मा का बायकॉट किया गया। लेकिन, नवजोत सिंह सिद्धू का समर्थन करने वाले कपिल शर्मा को परिस्थितियों को समझने की ज़रूरत है। हम यहाँ उन्हें समझा कर उनका ज्ञानवर्द्धन करने का प्रयास करेंगे।

आतंकवाद जेन्युइन समस्या नहीं है क्या?

कपिल शर्मा के अनुसार, जनता की समस्या असली नहीं है, वास्तविक नहीं है। कपिल शर्मा से पूछा जाना चाहिए कि वास्तविक समस्या क्या है? ऐसे समय में, जब पूरा देश पाकिस्तान की एक सुर में निंदा कर रहा है और पुलवामा आतंकी हमले के पीछे उसकी साज़िश साफ़-साफ़ नज़र आ रही है, क्या पाक का बचाव कर अपने देश को नीचे दिखाना सही है? सिद्धू ने यही किया है। अब जनता जागरुक है, वो सिद्धू का विरोध कर रही है तो कपिल शर्मा को लगता है कि यह असली समस्या नहीं है। कपिल शर्मा को पुलवामा हमले को गम्भीरतापूर्वक समझना चाहिए। वह कॉमेडी सर्कस नहीं है। उस हमले ने 40 परिवारों से उनके बेटे छीन लिए।

कपिल शर्मा को अपने शो के प्रोड्यूसर सलमान ख़ान से पूछना चाहिए कि उन्होंने अपनी फ़िल्म ‘भारत’ से पाकिस्तानी गायक आतिफ़ असलम का गाना क्यों हटाया? सलमान ख़ान भी विवादित बयान देते रहे हैं लेकिन जनाक्रोश के बाद उन्होंने माफ़ी भी माँगी है। शायद यही कारण है कि वह 30 वर्षों से इंडस्ट्री में जमे हुए हैं। और हाँ, यही कारण है कि क्षणिक सफलता का ख़ुमार कपिल शर्मा पर ऐसा चढ़ा कि उनका शो बंद हुआ और अब उन्हें टीआरपी मिलनी बंद हो गई है।

वास्तविक समस्या आतंकवाद है। वास्तविक समस्या भारत में आतंकवाद फैलाने वाला पाकिस्तान है। वास्तविक समस्या भारत में बैठ कर पाकिस्तान का समर्थन करने वाले सिद्धू जैसे लोग हैं। वास्तविक समस्या सिद्धू जैसे लोगों का बचाव करने वाले कपिल शर्मा हैं। सिद्धू को हटाने को कपिल शर्मा भले ही छोटी-मोटी बात बतातें हों लेकिन जिस चीज से जनभावना जुड़ जाती है, वह छोटी नहीं रह जाती। जनाक्रोश ने आपातकाल लगाने वाली इंदिरा गाँधी तक को सत्ता के सिंहासन से उठा कर बाहर फेंक दिया था।

जनता की मदद से अपना व्यापार चलाने वाले सेलिब्रिटी गैंग को यह सीखना पड़ेगा की जनभावनाओं की क़द्र कैसे की जानी चाहिए? कपिल शर्मा पर एक पत्रकार को कॉल कर के भर-भर कर गालियाँ देने का आरोप है। अपने स्टारडम के आवेश में आकर उन्होंने अपने शो के स्तम्भ सुनील ग्रोवर तक से बदतमीजी की। मराठी फ़िल्म फेस्टिवल में अभिनेत्री दीपाली सैयद ने उन पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। उन पर मोनाली ठाकुर और तनीषा मुखर्जी से भी दुर्व्यवहार के आरोप हैं। अपने शो में गर्भवती महिला को लेकर मज़ाक बनाने वाले कपिल शर्मा पर इस मामले में केस तक दर्ज हो चुके हैं।

आज कपिल शर्मा कैसी विश्वसनीयता लेकर सिद्धू का बचाव करने निकले हैं? क्या नवजोत सिंह सिद्धू उनके मेंटॉर हैं, इसीलिए? पंजाब के पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू से उनका व्यक्तिगत रिश्ता है- यह समझ में आता है, लेकिन क्या देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुए 40 जवानों के लिए उनके मन में कोई सम्मान है भी या नहीं?

कौन ध्यान भटका रहा कपिल शर्मा का?

कपिल शर्मा का कहना है कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। कौन भटका रहा है? क्या वह आम जनता पर आरोप लगा रहे हैं? क्या जनता के दिए स्टारडम पर गर्व करने वाले कपिल शर्मा के लिए आज वही जनता ध्यान भटकने वाली बन गई है? कपिल को आँखें खोल कर देखना चाहिए कि यह भारत की आम जनता है, जो आक्रोशित है, जो बदला चाहती है, जो बलिदानियों के ख़ून का हिसाब लेना चाहती है। प्रधानमंत्री भी अपने भाषण की शुरुआत जनता को समझाते हुए करते हैं कि उनके रोष को बाकी नहीं जाने दिया जाएगा।

लेकिन कपिल देश के एक नागरिक का धर्म निभाने की बजाय आग में घी डाल रहे हैं। जनता गुस्से में है, आपके मार्गदर्शक सिद्धू ने जिस देश का बचाव किया है, जनता उसी देश को सबक सिखाना चाहती है। जनता को समझाने की ज़रूरत है लेकिन कपिल जैसे लोग भड़काने में लगे हैं। आग में घी डालने की सज़ा पब्लिक ही उन्हें देगी। सोनी चैनल ने सिद्धू को निकाल बाहर किया लेकिन शो चलाने वाले कपिल ने ही सारे किए-कराए पर पानी फेर दिया। जैसा कि वह बताते रहे हैं, उन्हें शराब की लत है। हो सकता है बाद में उनका बयान आए कि ऐसा उन्होंने नशे में कहा था। सेलिब्रिटी हैं, सब चलता है।

‘दुर्गावतार’ प्रियंका वाड्रा ने चमत्कार दिखाने से पार्टी कार्यकर्ताओं को किया साफ़ मना

कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनावों में खुद को बचाए रखने के लिए प्रियंका को राजनीति में इक्के की तरह उतारा। इसके बाद कॉन्ग्रेस समर्थकों में किसी ने उन्हें इंदिरा जैसी आँधी कहा तो किसी ने उन्हें दुर्गारूप ही कह डाला। लेकिन, चुनाव के पास आते ही दुर्गारूप प्रियंका ने अपने कार्यकर्ताओं को किसी भी तरह का चमत्कार दिखाने से मना कर दिया है।

सोमवार को दिल्ली के 15, गुरूद्वारा रकाबगंज रोड पर स्थित कॉन्ग्रेस के वार रूम में आयोजित हुई बैठक में इस बात को खुद कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने कहा है। बैठक में शामिल एक नेता ने प्रियंका के हवाले से कहा कि वह कोई चमत्कार नहीं कर सकती हैं।

लोकसभा चुनावों के नज़दीक आते ही प्रियंका के बदले सुरों ने कहा कि पार्टी का प्रदर्शन बूथ स्तर पर पार्टी की मजबूती पर ही निर्भर होगा। साथ ही उन्होंने पार्टी को मज़बूत बनाने के लिए कार्यकर्ताओं का समर्थन माँगा। प्रियंका गाँधी वाड्रा ने बुंदेलखंड में आने वाली सभी 19 विधानसभा और चार लोकसभा सीटों के बूथ स्तरीय संगठन की समीक्षा की।

कार्यकर्ताओं की बैठक में मौजूद एक नेता ने इस बात की भी जानकारी दी कि प्रियंका ने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं के सख्त चेतावनी दी है कि अगर कोई भी कार्यकर्ता विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाया गया तो उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।

इस बैठक में शामिल नेताओं ने प्रियंका में इंदिरा की झलक बताते हुए रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा भी भेंट की। इसपर प्रियंका ने कहा कि उन्हें रानी लक्ष्मीबाई से प्रेरणा मिलती है।

मठाधीश पत्रकारों को औकात दिखाती सोशल मीडिया

याद कीजिए सोशल मीडिया से पहले का वह दौर जब हम टीवी पर बोलने वालों, अखबारों में लिखने वालों और सिनेमा में दिखने वालों की शख़्सियत पर अतिशय मोहित रहते थे, उनके फैन होते थे, उनको खत लिखते थे, उनसे मिलना चाहते थे, उनके ऑटोग्राफ और फोटोग्राफ के लिए लालायित रहते थे।

वे जो कहते, करते और बोलते थे हम उसे सत्य का दस्तावेज मान कर सहेज के रख लेते थे। उस वक्त किसी में इतना दुस्साहस नहीं होता था कि इन हस्तियों के कंटेंट में लेफ्ट, राइट, कम्युनलिज्म, सेकुलरिज्म, नेशनलिज्म और एंटी-नेशनलिज्म खोजे और अगर कोई दुर्लभ ज्ञानी ऐसा करने में सक्षम होता भी तो उसे अपना पक्ष रखने के लिए कोई ठौर नहीं था। टीवी, अखबार, पत्रिकाएँ सभी सिंडिकेट के हाथ में थे।

नतीजतन दृश्य, श्रव्य और छपाई के माध्यम के चुने हुए लोग खबरों और जानकारी पर एक संगठित नियंत्रण करके रखते थे, जो वह परोसते थे उसे पहले नोटों में तौल लेते थे, और इसके एवज में जहाँ वह मोटा फायदा कमा रहे थे वहीं तमाम पुरस्कारों, पदवी, सम्मान और सुविधाओं को ताश की तरह फेंट कर आपस में बांट लेते थे।

लेकिन समय के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि वह बदलता है, और यह समय भी बदला, सोशल मीडिया आया। लोगों ने कौतूहल वश लिखना शुरू किया, मन में जो दबा था उसे धीरे-धीरे बाहर लाना शुरू किया और उन्हें हैरानी तब हुई जब पता चला कि उनकी तरह तो लाखों लोग सोचते हैं, उनकी तरह तो लाखों लोगों को शिकायतें और आक्रोश हैं, जिसे न आवाज़ मिल रही थी न जगह।

और यहीं से एक सिलसिला शुरू हुआ बेबाक बोलने, लिखने का। जहाँ कोई लिहाज नहीं, कोई सेंसरशिप नहीं, किसी भाषाई अशुद्धि का कोई मलाल नहीं। हालाँकि लिबर्टी का लोगों ने अतिक्रमण भी किया, वे अभद्र हुए, अमर्यादित भी। लेकिन वो तथाकथित लेखकों, संपादकों, बुद्धिजीवियों, विचारकों, चिंतकों और कलाकारों का हुक्का भरना बन्द कर चुके थे, लोगों ने ‘महानताओं’ की पालकी को कंधे से उठाकर चौराहे पर रख दिया था।

जिसका परिणाम हुआ कि अंग्रेज़ी पत्रकारिता के कुलदीपक राजदीप सरदेसाई अमरीका में जाकर पिट गए, अपनी हथेलियाँ रगड़ कर जीरो वॉट बिजली उत्पादन करने की क्षमता रखने वाले पुण्य प्रसून वाजपेयी पत्रकारिता के तमाम घाटों का पानी पीकर अब एक बिस्कुट मालिक के चैनल में क्रांति कर रहे हैं। रवीश कुमार का तो यह हाल है कि वे प्रनॉय रॉय के घर में तीसरी सबसे पुरानी चीज हो चुके हैं, लेकिन तब भी उनकी नौकरी छोड़ नहीं सकते क्योंकि उन्होंने इतना ‘यश’ कमाया है कि यहाँ से जाने के बाद उन्हें शायद ही कोई रोजगार दे।

और जिनका सितारा बीते पाँच बरस में 18वीं बार गर्दिश में गया है वह बरखा दत्त हैं। आज जो हुआ, उस जिक्र को क्या दोहराना, लेकिन उसके बाद जो हो रहा है वह बड़ा दिलचस्प है कि महीने भर पहले वे ट्विटर के CEO जैक डोरसी के साथ ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता को पीटने’ का प्लाकार्ड लहरा रहीं थीं, उनके बगल में फोटो खिंचवाकर, ट्विटर यूजर्स को अपनी पहुँच का संदेश दे रही थीं, आज उन्हीं को अदालत में घसीटने की धमकी दे रही हैं, क्योंकि उनकी आज की ‘हरकत’ पर ट्विटर ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू नहीं किया, सपोर्ट बरखा हैश टैग ट्रेंड नहीं किया। उल्टा उन्हें हड़का दिया और बौखलाहट में वे अब ऑलमोस्ट ‘नग्न’ नृत्य करने पर उतारू हो गई हैं। यह ताकत है सोशल मीडिया की।