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भारत में घुसने की कोशिश कर रहा था Pak ड्रोन, सुखोई ने मार गिराया

राजस्थान में सीमा पार से घुसपैठ कर रहे पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया गया। भारतीय एयर डिफेंस रडार द्वारा मिली जानकारी के बाद बीकानेर जिले के नाल सेक्टर इलाक़े में स्थित सीमा पर एक ड्रोन को सोमवार सुबह 11:30 बजे एयर फोर्स ने मार गिराया। उक्त पाकिस्तानी ड्रोन को भारतीय राडार ने डिटेक्ट कर लिया, जिसके बाद उसे मार गिराया गया। बीकानेर जिले के नाल सेक्टर इलाके में स्थित सीमा पर एक ड्रोन को सोमवार सुबह 11:30 बजे एयर फोर्स ने ड्रोन को मार गिराने के लिए सुखोई-30 एमकेआई का प्रयोग किया।

ज्ञात हो कि दोनों देशों के बीच बढ़ रहे तनाव के बाद पाकिस्तान से लगातार घुसपैठ की कोशिश हो रही है। पाकिस्तान सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ के अलावा लगातार सीजफायर का उल्लंघन किया जा रहा है। भारतीय सेना द्वारा इसका कड़ा प्रत्युत्तर दिया जा रहा है। याद हो कि 26 मार्च को गुजरात के कच्छ में ऐसे ही एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया गया था। उस दौरान इजराइल से लाए गए एयर डिफेंस सिस्टम ‘स्पाइडर’ के प्रयोग से उस ड्रोन को डिटेक्ट किया गया था। इसके बाद डर्बी मिसाइल ने उस ड्रोन को मार गिराया।

आज सोमवार (मार्च 3, 2019) को यह ड्रोन सोमवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे पाक सीमा की तरफ से आया और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करते हुए अनूगढ़ सेक्टर से भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहा था। इस ड्रोन को देखते ही हरकत में आई वायुसेना ने इसे मार गिराया। भारतीय वायु सेना ने जेट विमानों से मिसाइलें दागी। आपको बता दें कि 27 फरवरी को भी पाकिस्तान के 10-12 फाइटर जेट्स ने राजस्थान के अनूपगढ़ इलाके में हवाई अंतरिक्ष उल्लंघन का प्रयास किया था, लेकिन वायु सेना की सतर्कता से पाकिस्तान की यह हरकत नाकाम रही।


चौतरफा घिरा पाकिस्तान, ईरान ने भी दी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने की चेतावनी

पाकिस्तान स्थित आतंकी कैम्पों पर भारत द्वारा की गई ‘एयर स्ट्राइक’ के बाद ईरान ने भी वहाँ कुछ इसी तरह की कार्रवाई करने की धमकी दी है। ईरान सरकार ने पाकिस्तान से कड़े शब्दों में कहा है कि वो आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करे वरना अंजाम बुरा होगा। बता दें कि इस से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर कई वैश्विक नेता पाकिस्तान को उसकी ज़मीन पर लगातार पनप रहे आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दे चुके हैं। भारतीय एयर स्ट्राइक के बाद ईरान ने पाकिस्तान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है क्योंकि वह भी सीमा पर पाक समर्थित आतंकियों से पीड़ित है।

आइआरजीसी कुर्द सेना के प्रमुख जनरल कासिम सोलेमानी ने पाकिस्तान सरकार व वहाँ के सैन्य प्रतिष्ठान को आगाह करते हुए कहा:

“मैं पाकिस्तान की सरकार से सवाल करना चाहता हूँ कि आप किस ओर जा रहे हैं? सभी पड़ोसी देशों की सीमा पर आपने अशांति फैला रखी है। क्या आपका कोई ऐसा पड़ोसी बचा है जहाँ आप असुरक्षा फैलाना चाहते हैं। आपके पास तो परमाणु बम हैं, लेकिन आप इस क्षेत्र में एक आतंकी समूह को खत्म नहीं कर पा रहे जिसके सदस्यों की संख्या सैकड़ों में है। पाकिस्तान को ईरान के सब्र का इम्तेहान नहीं लेना चाहिए।”

आतंकवाद के मुद्दे पर ईरान और भारत इस तरह से एक ही तरफ हैं। हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत और ईरान के रिश्ते अच्छे रहे हैं। भारत ने ईरान से तेल की एवज में चावल और चीनी देने का भी निर्णय लिया है। व्यापारिक रिश्तों के साथ-साथ भारत और ईरान का सम्बन्ध काफ़ी प्राचीन रहा है। बता दें कि जिस दिन पुलवामा में हमारे 40 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे, उसी दिन ईरान में भी पाक पोषित आतंकियों ने एक आत्मघाती हमले को अंजाम दिया था।

13 फरवारी को पाकिस्तान से सटी ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान सीमा में एक आत्मघाती हमले में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के 27 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले में पाकिस्तानी ज़मीन पर पल रहे आतंकियों का हाथ सामने आया था। इसके बाद से ही ईरान ने सख़्त तेवर अपना लिया। कुर्द सेना के कमांडर ने कहा कि अगर समय रहते पाकिस्तान नहीं चेता तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। भारत द्वारा पाकिस्तान में घुस कर एयर स्ट्राइक करने के बाद अब पाक से ट्रस्ट सभी पड़ोसी आवाज उठा रहे हैं।

उधर अफ़ग़ानिस्तान से भी पाक के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। अफ़ग़ानिस्तान तो पाकिस्तान से इतना ट्रस्ट है कि उसने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिख कर कहा है कि पाकिस्तान वहाँ कुछ ज़्यादा ही हस्तक्षेप कर रहा है। भारत द्वारा एयर स्ट्राइक के बाद चीन ने भी लगभग हाथ खड़े करते हुए पाकिस्तान की किसी भी प्रकार की मदद नहीं की। इमरान ख़ान और तालिबान के बीच बैठक को लेकर भी अफ़ग़ानिस्तान ख़फ़ा है। कुल मिला कर देखें तो पड़ोसियों के कड़े तेवर के बाद पाकिस्तान के पास अब आतंकी सगठनों पर कार्रवाई करने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है।

ओडिसा में पटनायक को झटका, BJP में शामिल हुए पूर्व BJD सांसद बैजयंत जय पांडा

ओडिसा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल को झटका देते हुए पूर्व सांसद बैजयंत जय पांडा ने भाजपा का दामन थाम लिया है। हालाँकि, उन्होंने 9 महीने पहले ही बीजेडी छोड़ दी थी। उसके बाद से वह पार्टी के ख़िलाफ़ ख़ासे मुखर रहे थे। पांडा ने पीएम मोदी और राजग सरकार की योजनाओं की तारीफ़ करते हुए कई लेख भी लिखे। उनके कई दिनों से भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। ओडिसा के तटीय इलाक़ों में प्रभाव रखने वाले पांडा की उपस्थिति से भाजपा आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों में काफ़ी उम्मीद लिए बैठी है।

बीजद द्वारा निलंबित किए जाने के बाद पांडा ने लोकसभा व पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। पांडा ने भाजपाध्यक्ष अमित शाह से मुलाक़ात कर पार्टी मुख्यालय में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी वहाँ मौजूद थे। इसके बाद अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा:

“नौ महीने का आत्मचिंतन और सहयोगियों एवं लोगों से व्यापक विचार विमर्श हुआ। सभी ओर से प्राप्त समर्थन के लिए आभारी हूं। महाशिवरात्रि के पवित्र अवसर पर मैंने भाजपा में शामिल होने तथा नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के अनुरूप ओडिशा और भारत की सेवा करने का निर्णय लिया है।”

इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेस में उन्होंने ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राज्य में शासन व्यवस्था का स्तर काफ़ी तेजी से नीचे गिर रहा है। महिलाओं व बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध बढ़ रहे हैं। 2009 और 2014 में केंद्रपाड़ा लोकसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले पांडा उस से पहले 9 वर्षों तक राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। संसद में अपनी सक्रियता के लिए जाने जाने वाले पांडा ने 2017 के ओडिसा पंचायत चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद बीजद को आत्मविश्लेषण की सलाह दी थी।

वैसे, यह अचानक नहीं हुआ है। जून 2018 में जब उनके पिता बंसीधर पांडा का निधन हो गया था, तब प्रधानमंत्री मोदी ने संवेदना पत्र भेजा था। इस से अभिभूत पांडा ने ट्वीट कर पीएम को धन्यवाद कहा था।

इसके बाद से ही भाजपा और पांडा में नज़दीकियाँ बढ़ने लगी थीं। ओडिसा में विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ ही होने की संभावना है। बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक पिछले 19 वर्षों से राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

एयर स्ट्राइक के दौरान बालाकोट आतंकी कैम्प में सक्रिय थे 300 मोबाइल: NTRO का बड़ा ख़ुलासा

भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर की गई एयर स्ट्राइक में क़रीब 300 से ज़्यादा आतंकियों के मारे जाने का सबूत सामने आया है। ANI के अनुसार, नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) के सर्विलांस से खुलासा हुआ है कि जब बालाकोट में भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक की, उस समय वहाँ पर 300 के क़रीब मोबाइल फोन सक्रिय थे। इससे साफ़ होता है कि भारतीय वायुसेना ने जिस समय बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के कैंपों पर हमला किया, उस समय वहाँ पर 300 के आसपास आतंकी मौजूद थे।

सूत्रों के मुताबिक NTRO ने भारतीय वायुसेना को बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के कैंप में 300 के क़रीब मोबाइल फोन सक्रिय होने की जानकारी दी थी। इसके अलावा बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के कैंप में 300 के आसपास आतंकियों के मौजूद होने की जानकारी RAW ने भी उपलब्ध कराई थी। ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी सैटेलाइट के जरिए जैश के बालाकोट कैंप में काफी संख्या में आतंकियों के मौजूद होने की जानकारी जुटाई थी। कुछ सूत्रों के हिसाब से ये संख्या 300-700 तक हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि आतंकी कैंप में नए रिक्रूट हुए आतंकियों से मोबाइल छिन ली जाती है। वहाँ सिर्फ सीनियर आतंकियों को ही मोबाइल रखने की छूट होती है।

तीनों एजेंसियों की जानकारी के बाद भारतीय वायुसेना के मिराज लड़ाकू विमानों ने जैश के कैंप पर एयर स्ट्राइक की थी। भारतीय वायुसेना का बालाकोट मिशन पूरी तरह सफल रहा था। भारत द्वारा की गई ‘एयर स्ट्राइक’ से बौखलाए पाकिस्तान ने इसके बाद भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्र में हवाई हमला किया, जिसका भारतीय वायुसेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया। इस हवाई भिड़ंत में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी वायुसेना के एफ-16 लड़ाकू विमान को भी मार गिराया था।

इस दौरान भारतीय वायुसेना का मिग-21 विमान भी हादसे का शिकार हो गया था। साथ ही इसको उड़ा रहे विंग कमांडर अभिनंदन वर्द्धमान पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले इलाक़े में पहुँच गए थे, जहाँ उनको पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया था। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वो अभिनंदन को तुरंत रिहा करे। भारत के सख़्त रुख के आगे पाकिस्तान को झुकना पड़ा और वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान खान को विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़ने का ऐलान करना पड़ा। पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की घोषणा के बाद शुक्रवार को अभिनंदन को अटारी-वाघा बॉर्डर से भारत को सौंप दिया गया। फिलहाल दिल्ली में विंग कमांडर अभिनंदन का मेडिकल चेकअप और इलाज चल रहा है।

आपको बता दें कि भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक को लेकर राजनीतिक पार्टियाँ लगातार मोदी सरकार को घेर रही हैं। साथ ही कई राजनीति पार्टियों और उनके नेताओं ने बालाकोट एयर स्ट्राइक में आतंकियों के मारे जाने के सबूत मांगे हैं। ऐसे में यह खबर मोदी सरकार के लिए राहत भरी हो सकती है। इससे पहले जैश-ए-मुहम्मद के सरगना मसूद अजहर के भाई ने भारत की एयर स्ट्राइक की तबाही का रोना रोया था। इसका ऑडियो भी सामने आया था। हाल ही में दिग्विजय सिंह, ममता बनर्जी, नवजोत सिंह सिद्धू सहित कई नेताओं ने आतंकियों के मरने के सबूत माँगे थे।

DD न्यूज़ ऑफिस में बाँटी गई थी मिठाइयाँ, जब मोदी को नहीं मिला था US वीजा: किताब में खुलासा

डीडी न्यूज़ यानी कि दूरदर्शन समाचार का यूपीए सरकार द्वारा 2004-2014 के बीच किस तरह से दुरुपयोग किया गया था, इसका  खुलासा डीडी न्यूज़ के एंकर और पत्रकार अशोक श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक “नरेंद्र मोदी सेंसर” में हुआ है।

यह पुस्तक मुख्य रूप से नरेंद्र मोदी के एक साक्षात्कार के बारे में है, जो 2014 के लोकसभा चुनावों में डीडी न्यूज पर प्रसारित किया गया था। यह साक्षात्कार अशोक श्रीवास्तव द्वारा संचालित किया गया था, लेकिन इसका प्रसारण काफी देर से और सेंसर करने के बाद किया गया था।

प्रसारित होने के बाद भी, यह विवादों में घिर गया क्योंकि ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने डीडी न्यूज़ द्वारा सेंसर की गई इस गलतफहमी को और भी ज्यादा फैला दिया था। अशोक श्रीवास्तव उस साक्षात्कार के आसपास की घटनाओं से जुड़े तारों को याद करते हुए अपनी किताब में यह भी बताते हैं कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा एक सार्वजनिक संस्थान का इस्तेमाल एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को निशाना बनाने के लिए किया गया था।

इस पुस्तक के अनुसार दूरदर्शन का इस्तेमाल यूपीए सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों के समर्थन में सामग्री बनाने के लिए भी किया गया था। उस समय दूरदर्शन में काम कर रहे कुछ लोग वहाँ के ‘पावर सेंटर’ बन गए थे। पत्रकारिता करने वाली यह सरकारी जगह बहुतों को शर्मिंदगी महसूस करवाने के लिए 9 दिसंबर को मिठाईयाँ बाँटकर सोनिया गांधी का जन्मदिन भी मनाती थी।

अशोक श्रीवास्तव बताते हैं कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन्हें वीजा देने से मना कर दिया गया था तो मिठाईयाँ बांंटकर उन्हें और उनके जैसे कुछ और पत्रकार, जो कि वहाँ पर काम करते थे, को काफी शर्मिंदगी महसूस करवाई गई थी।

हालाँकि, किसी ने भी इस तरह की प्रथाओं के खिलाफ कुछ नहीं बोला क्योंकि ‘पावर सेंटर’ में कॉन्ग्रेस के सदस्य थे और ‘दूरदर्शन के कर्मचारी’ इस बात के गवाह थे कि दर्जनों पत्रकार – मुख्य रूप से जो दीपक चौरसिया के साथ शामिल हुए थे, को 2004 में मज़बूरन इस्तीफा देना पड़ा था, जब कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में आई थी। इसीलिए कोई भी पत्रकार कॉन्ग्रेस के खिलाफ कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।

इतना ही नहीं, इस किताब का दावा है कि साल 2007 के गुजरात चुनाव के दौरान दूरदर्शन के संवाददाता संपादकीय सलाह के तौर पर एक ‘कंसलटेंट’ और तीस्ता सीतलवाड़ से आदेश लेते थे। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनावों के बाद इस ‘पावर सेंटर’ की विशेष शक्तियाँ कम हो गई थीं। संभवतः ऐसा कॉन्ग्रेस की आंतरिक राजनीति के कारण हुआ था। लेकिन फिर भी यह ‘पावर सेंटर’ मोदी पर निशाना बनाने के लिए तुली हुई थी।

दूरदर्शन में मोदी से जुड़ी अच्छी खबरों पर और उनके द्वारा किए गए कार्यों पर बैन लगना जारी रहा। जिसके कारण अशोक श्रीवास्तव को उस समय काफ़ी हैरानी हुई, जब पब्लिक ब्रॉडकास्टर ने नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार को आगे बढ़ाने को कहा।

हिंदी में लिखी यह किताब इस बात का सबूत है कि कॉन्ग्रेस के समय में मीडिया किस हद तक ‘स्वतंत्र’ थी। इस किताब से मालूम चलता है कि आज मीडिया पर खतरा बताने वाली बातें भी केवल एक प्रोपेगेंडा का ही हिस्सा है।

यह किताब इस बात की भी याद दिलाती है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी प्रियंका गांधी का इस्तेमाल किया गया था और 2019 के आते-आते भी स्थितियाँ बदली नहीं हैं। चीजें आपके सामने हैं, उस समय प्रियंका को प्रचारक के रूप में उतारा गया था और अब महासचिव का चेहरा दिया गया है।

महाशिवरात्रि पर तनाव: शिव-प्रतिमा को लेकर चश्मुद्दीन के गैंग ने वाल्मीकि समुदाय के लोगों से की मारपीट

आगरा में महाशिवरात्रि के अवसर पर साम्प्रदायिक तनाव भड़कने की ख़बर आई है। ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, लोहामंडी के मोहल्ला पुरानी गढ़इया में खाली जमीन पर वाल्मीकि बस्ती के लोग भगवान शिव की प्रतिमा स्थापना करना चाहते थे। लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया। बताया जाता है कि प्रतिमा स्थापना की तैयारी काफ़ी दिनों से ज़ोर-शोर से चल रही थी। आज सोमवार (मार्च 4, 2019) को सांप्रदायिक तनाव ने मारपीट का रूप ले लिया, जिसके कारण तीन थानों की पुलिस को घटनास्थल पर कैम्प करना पड़ा।

उक्त खाली ज़मीन किदवई पार्क के पीछे मोहल्ला पुरानी गढइया में स्थित है। यहीं के अखाड़ा मोहल्ले का एक परिवार मूर्ति स्थापना का विरोध कर रहा था। मामले की शुरुआत तब हुई जब चश्मुद्दीन ने इस ज़मीन पर दावा ठोकते हुए कहा कि यह ज़मीन उसकी है और वह प्रतिमा स्थापना नहीं करने देगा। इधर वाल्मीकि बस्ती के कुसुम साहू ने बताया कि उक्त ज़मीन नजूल की है। 300 गज की इस ज़मीन के बारे में चश्मुद्दीन का कहना है कि पूरा मोहल्ला मिल कर इस पर कब्ज़ा करना चाहता है। चश्मुद्दीन ने दावा किया कि ये उसके पुरखों की ज़मीन है और उसके पास इस से जुड़े दस्तावेज भी हैं।

स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद थाने को को सूचना दी गई और पुलिस के पहुँचने से पहले वाल्मीकि बस्ती के लोगों ने प्रतिमा की स्थापना कर दी थी। प्रतिमा स्थापना की सूचना मिलते ही चश्मुद्दीन गिरोह के लोगों ने आकर मारपीट शुरू कर दी। इलाक़े में अफरातफरी मचने के बाद पुलिस वहाँ पर पहुँची। उस समय दोनों पक्षों के बीच पथराव हो रहा था। पुलिस के आने पर पथराव करने वाले तो भाग गए लेकिन मारपीट नहीं थमी। पुलिस के सामने भी मारपीट चलती रही।

स्थिति बेक़ाबू होने पर लोहामंडी, जगदीशपुरा और हरीपर्वत- इन तीनों थाने की फोर्स पहुँच गई। इसके बाद जाकर लोगों को वहाँ से हटाया जा सका। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों से दस्तावेज दिखाने को कहा गया है, जिसके बाद झगड़े के कारणों का पता चलेगा। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अभी इस विवाद की वजह नहीं पता।

पाक के झूठ का पर्दाफाश: नहीं लगा आतंकी हाफिज सईद के संगठनों पर बैन

पाकिस्तान भले ही अमेरिका और भारत समेत सभी देशों से ये कह रहा है कि उसने आतंकी हाफिज सईद के संगठनों जमात-उद-दावा पर बैन लगा दिया है, लेकिन ये सच नहीं है। पाकिस्तान का झूठ एक बार फिर से सामने आ गया है। मुंबई हमले सहित कई अन्य हमलों का मास्टरमाइंड हाफिज का संगठन जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत आज भी पाकिस्तान में खुलेआम चल रहा है।

बता दें कि पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के बाद इमरान खान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई, जिसमें आर्मी के शीर्ष ऑफिसर मौजूद थे। इस बैठक में इमरान खान ने बढ़ते वैश्विक दवाब के बाद आतंकी हाफिज सईद के नेतृत्व वाले जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।

लेकिन अभी हाल ही में एक रिपोर्ट आई है। जिसके मुताबिक पाकिस्तान द्वारा कही ये बात भी झूठी निकली, क्योंकि जो लिस्ट सामने आई है उससे खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान सरकार की तरफ से इन संगठनों पर बैन नहीं लगाया गया है। इसमें उन संगठनों पर सिर्फ निगरानी रखने की बात कही गई है।

पाकिस्तान के इस झूठ से साफ जाहिर हो रहा है कि पाकिस्तान जो शांति और आतंकवाद से लड़ने की बात कर रहा है, वो महज एक दिखावा भर है।

BBC का J&K प्रोपगैंडा: भारत-विरोधी राय को प्रसारित कर भारतीय विचार को जान-बूझ कर छिपाया

14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। इसके बाद भारत सरकार ने चुप रहना उचित नहीं समझा और पाकिस्तान को उसी की भाषा में करारा जवाब दिया गया। चूँकि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मुहम्मद’ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी, भारत ने उसके ठिकानों को तबाह कर सैकड़ों आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। भारतीय वायु सेना द्वारा की गई बहुचर्चित ‘एयर स्ट्राइक’ के बाद पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसका उसे कड़ा प्रत्युत्तर दिया गया।

भारतीय मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक- सभी की इस पूरे घटनक्रम पर पैनी नज़र थी क्योंकि दक्षिण एशिया में युद्ध के बादल मँडराने लगे थे। वैसे स्थिति अब भी तनावपूर्ण है लेकिन बड़ी चालाकी से नैरेटिव बदलने की कोशिश की जा रही है। आतंक की समस्या को कश्मीर समस्या से जबरदस्ती जोड़ने की कोशिश इसी का एक हिस्सा है, ताकि पाकिस्तान को जिम्मेदार न ठहराया जा सके। हमने देखा कि कैसे भारतीय पत्रकारों और लिबरल्स के एक समूह ने इमरान ख़ान को शांति के देवता के रूप में प्रचारित किया। इसी क्रम में बीबीसी ने भी कुछ ऐसा किया है, जो उसके पूर्वाग्रह से भरे पक्षतापूर्ण रवैये को प्रदर्शित करता है।

बीबीसी ने क्या किया?

बीबीसी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कश्मीर की जनता की राय जानने और उसे प्रसारित करने के लिए एक श्रृंखला बनाई, जिसमें ऐसे लोगों की राय ली गई जो लाइन ऑफ कण्ट्रोल (LOC) के पास रहते हैं। ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (BBC) की इस श्रृंखला में उन कश्मीरियों की राय को प्रदर्शित किया गया, जो पाकिस्तान की पैरवी करते हैं या उसे पाक-साफ बताते हैं। अगर आपको नहीं पता है तो यह जानना ज़रूरी है कि बीबीसी ने पाकिस्तानी मुस्लिमों द्वारा बच्चों के यौन शोषण को ढकने का पूरा प्रयास किया था। इसके अलावा ऑपइंडिया द्वारा बीबीसी की फेक रिसर्च का भी पर्दाफाश किया गया था।

इस श्रृंखला में दो लोगों की राय प्रसारित की गई, जो समान धर्म से ताल्लुक रखते हैं। हालांकि, शुरुआत में बीबीसी ने कश्मीर मसले और इस से जुड़े धार्मिक संघर्षों का उल्लेख तो किया लेकिन बाद में उन्होंने एक साज़िश के तहत अपना एजेंडा चलाना शुरू कर दिया।

चैनल पर प्रसारित हुए इस प्रोग्राम के दौरान पहले व्यक्ति ने कहा कि भारत और पाकिस्तान ने कश्मीर को खेल का मैदान बना डाला है। बकौल अनजान शख्स, इस प्रक्रिया में महिलाओं की जानें ली जा रही हैं और बच्चों को मारा जा रहा है। उसने कहा कि पाकिस्तान ने भारत द्वारा की गई ‘एयर स्ट्राइक’ को फेक बता दिया है। साथ ही, उसने भारत-पाकिस्तान तनाव को भी फेक करार दिया।

दूसरे व्यक्ति की पहचान हंदवारा के शौकत के रूप में कराइ गई। उसने कहा कि वह “कश्मीरियों की आम धारणा को उजागर करना” चाहता था। उसने यह भी कहा कि भारत ने “बदला” के रूप में जवाबी कार्रवाई (एयर स्ट्राइक) की और यह संघर्ष का समाधान नहीं था। उसने पूरे भारत-पाकिस्तान तनाव को ‘मोदी स्टंट’ करार दिया। अव्वल तो यह कि उसने दावा किया कि लगभग सभी कश्मीरियों की यही राय है।

अर्थात यह, कि इसे कश्मीरियों के बीच आम धारणा बता कर पेश किया गया। उस व्यक्ति ने इंडो-पाक तनाव को नकारते हुए कहा कि युद्ध जैसी कोई स्थिति नहीं है। साथ ही, उसने भारत और पाकिस्तान- दोनों ही देशों को ‘अति राष्ट्रवाद (Jingoism)’ को काबू में करने की सलाह दी।

बीबीसी ने दूसरे पक्ष की राय को कोई महत्व नहीं दिया

यह स्पष्ट है कि बीबीसी ने केवल दो लोगों की राय को साझा किया और एक एजेंडे के तहत मोदी विरोधी और भारत विरोधी बयानों को आम धारणा बता कर प्रसारित किया। अब, हमें एक और बात यह पता चली है कि बीबीसी ने जम्मू-कश्मीर की एक मोदी समर्थक महिला से भी बात की, लेकिन उनकी राय को प्रसारित नहीं किया। बीबीसी ने उस महिला से ट्विटर के अलावा फोन से भी बात किया। प्रत्येक अवसर पर, ब्रिटिश समाचार एजेंसी ने काफ़ी समय तक उनसे बात की, पूरे मामले पर उनकी राय के बारे में विस्तार से जाना।

डॉक्टर मोनिका लंगेह जम्मू में रहती हैं और एलओसी के पास राजौरी में उनके कुछ रिश्तेदार रहते हैं। उनकी राय बीबीसी चैनल पर प्रसारित अन्य व्यक्तियों की राय से अलग थी। उनका मानना था कि अगर पाकिस्तान अपनी ज़मीन पर स्थित आतंकी संगठनों पर लगाम नहीं लगाता है तो युद्ध ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने भारत और भारतीय सेना की तारीफ़ की, जो अन्य दोनों व्यक्तियों की राय से अलग थी। क्षेत्र में समस्याओं के लिए उन्होंने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था।

बीबीसी और डॉक्टर लंगेह की बातचीत का स्क्रीनशॉट

आतंकवाद पर बात करते हुए डॉक्टर मोनिका ने याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर के 60% हिस्से यानी लद्दाख में आतंकवाद जैसी कोई समस्या नहीं है। इसी तरह उन्होंने जम्मू की बात करते हुए कहा कि राज्य के इस 26% क्षेत्र में भी आतंकवाद मुद्दा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद की समस्या सिर्फ़ कश्मीर में है और वह भी उसके एक छोटे हिस्से तक सीमित है।

अफ़सोस यह कि बीबीसी ने उनकी राय को तवज्जोह नहीं दी और उसे प्रसारित नहीं किया। अगर चैनल चाहता तो उनकी राय को प्रसारित कर यह बता सकता था कि भारतीय कश्मीर समस्या के बारे में क्या सोचते हैं। लेकिन, बीबीसी ने अपने प्रोपगैंडा को चोट पहुँचाना उचित नहीं समझा और केवल उन्हीं की राय को प्रसारित किया, जो उसके एजेंडे में फिट बैठते थे।

यह कहा जा सकता है कि बीबीसी ने डॉक्टर लंगेह की राय को उनकी धार्मिक भावनाओं के कारण प्रसारित नहीं किया। बीबीसी ने उनसे उनकी धार्मिक आस्था के बारे में भी पूरी जानकारी ली थी। इस से यह साफ़ हो जाता है कि सिर्फ़ एक पक्ष की राय को प्रसारित करने वाले बीबीसी ने डॉक्टर लंगेह की राय को उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि के कारण प्रसारित नहीं किया।

(यह खबर हमारी अंग्रेजी वेबसाइट (OpIndia.com) पर प्रकाशित के भट्टाचार्जी के लेख का अंग्रेजी अनुवाद है)

दौर-ए-खास और दौर-अल-राद: पकड़े गए जैश के आतंकियों ने खोली बालाकोट की सच्चाई

साल 2014-17 के बीच पकड़े गए जैश-ए-मुहम्मद के आतंकियों में से 4 आतंकियों को प्रशिक्षण बालाकोट के उसी कैंप में मिला है जहाँ पर वायु सेना द्वारा हाल ही में हमला किया गया। इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट में बताया गया है कि जैश के यह चारों आतंकी पाकिस्तान से हैं, जिन्होंने पूछताछ में बालाकोट में प्रशिक्षित हुए आतंकियों से जुड़ी कुछ खास बातों का खुलासा किया है।

अधिकारियों के अनुसार, वकास मंसूर खैबर पख्तूनख्वा का निवासी है। उसे 2014-15 में सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान मंसूर ने बताया कि उसे 100 युवकों के साथ प्रशिक्षित किया गया था। साल 2007 से मंसूर घाटी में सक्रिय था, यहाँ उसके साथ के 40 और आतंकी थे जबकि 60 को अफगान में युद्ध छेड़ने के लिए भेज दिया गया था।

अधिकारियों के अनुसार घाटी में हुए दो बड़े हमलों में मंसूर का नाम आया था। साल 2009 के मार्च में वह आतंकियों के उस समूह का हिस्सा था, जिसने कुपवाड़ा के पास लोलब में सेना के जवानों पर हमला किया था। इसके अलावा वह जून 2009 में एक ऐसे हमले में भी शामिल था जिसमें छह जवानों की मौत की हुई थी।

इन हमलों के बाद वो 2010 में पाकिस्तान लौट गया था और लश्कर से जुड़ गया और लश्कर-ए-तैयबा के केन्द्र में ट्रेनिंग लेने लगा था।

अधिकारियों की मानें तो जैश के आतंकियों से पूछताछ में पता चला कि प्रशिक्षण देने के दौरान उनके लिए कई तरह के प्रशिक्षण कोर्स भी चलाए जाते हैं। तीन माह के अग्रिम युद्ध कोर्स को दौर-ए-खास कहा जाता है और अग्रवर्ती हथियारों के प्रशिक्षण कोर्स को दौर-अल-राद कहा जाता है।

साल 2016 में पकड़े गए जैश आतंकी जिसकी पहचान अब्दुल रहमान मुगल अलियास राजा के नाम से की गई, वह बताता है कि कश्मीर में भेजे हर आतंकी का एक कोड नाम होता है। अधिकारियों के अनुसार मुगल का नाम रोमियो था और उसका काम कश्मीर में प्रशिक्षण केन्द्रों को सेट करना था।

मुगल से हुई पूछताछ में उसने बताया कि फिदायिन बनने से पहले किसी को भी अपनी इच्छा जाहिर करनी होती है। साथ ही बालाकोट स्थित कैंप के कमांडर को लिखित रूप में भी देना होता है कि वह ऐसा करने के लिए इच्छुक है।

अधिकारियों के अनुसार, 2014 में कश्मीर में गिरफ्तार किए गए एक अन्य जैश आतंकवादी नासिर मोहम्मद अवान ने पूछताछ के दौरान कहा था कि बालाकोट शिविर में 80 से अधिक प्रशिक्षक थे। अधिकारियों ने बताया कि नासिर 2003 में रेडियो कश्मीर पर हमले में शामिल था, जिसमें सीआरपीएफ के एक जवान और बीएसएफ के एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

इन सबके अलावा अधिकारियों ने पाकिस्तान के सियालकोट के निवासी मोहम्मद साजिद गुज्जर से पूछताछ का भी हवाला दिया, जिसे 2015 में गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि गुर्जर 3 नवंबर 2015 को तंगधार के एक आर्मी कैंप पर हुए हमले में शामिल था, जिसमें उसके साथ मौजूद तीन आतंकवादी मारे गए थे, जबकि वह भागने में सफल रहा था।

अधिकारियों ने कहा कि हमले के दौरान मारे गए तीनों की पहचान गुर्जर ने बाद में रिजवान, हुसैन पठान और मुइवा के रूप में की थी। अधिकारियों की मानें तो वे सभी पाकिस्तानी नागरिक थे, जिन्होंने बालाकोट कैंप में गुर्जर के साथ प्रशिक्षण लिया था और एक साथ घाटी में घुसपैठ की थी।

29 सेकंड में ख़ून से लथपथ और दुश्मन से घिरे अभिनन्दन ने Pak सेना को यूँ किया ट्रोल!

विंग कमांडर अभिनन्दन की वतन वापसी पर देशवासियों ने ख़ूब जश्न मनाया। पाकिस्तान की ज़मीन पर भी वह इसी तरह कूल बने रहे, जैसे एक ओवर में 20 रन की ज़रूरत हो और भारत की तरफ से महेंद्र सिंह धोनी डटे हुए हों। हालाँकि, क्रिकेट और सैन्य कार्रवाई में काफ़ी अंतर है लेकिन आम जनों के एक बड़े वर्ग को सरल शब्दों में समझाने के लिए यह उदाहरण बुरा नहीं। नीचे ये वीडियो देखें और जानें कि दुश्मन से घिरे, ख़ून से लथपथ और आँखों पर पट्टी बंधी होने के बावजूद भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान ने पाकिस्तानी सेना को कैसे ट्रोल किया।

अभिनन्दन से पाकिस्तानी सेना ने पूछा की वह पाक सेना के बारे में क्या सोचते हैं? जवाब में उन्हें उम्मीद रही होगी कि वह डर के कारण पाकिस्तानी सेना की तारीफ़ों के पुल बाँधेंगे लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। अभिनन्दन ने उसी तरह का जवाब दिया जो सैन्य अनुशासन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तानी सेना की इज्ज़त करते हैं क्योंकि पाकिस्तानी सेना भी किसी अन्य देश की सेना जैसी ही है। लेकिन अंत में उन्होंने पाक सेना को ट्रोल करते हुए कहा- “इसीलिए मैंने आपसे सबसे पहला प्रश्न यही किया था कि क्या आप रेगुलर पाक सेना से हो?”

ऐसे मुश्किल क्षणों में भी ऐसी धीरता और गंभीरता के साथ-साथ मज़ाकिया अंदाज में दुश्मन को ट्रोल करने वाले जांबाज अभिनन्दन ही हो सकते थे। सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके इस अंदाज को ख़ूब सराहा।