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PM मोदी ने रखी IIT-धारवाड़ की आधारशिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रैलियों के बाद आज शाम हुबली में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-धारवाड़) और IIIT (धारवाड़) की आधारशिला रखी। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बने 2,350 घरों का ई-गृह प्रवेश भी देखा।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के रायचूर में रैली को सम्बोधित किया।

कर्नाटक के हुबली में प्रधानमंत्री मोदी ने जनता को संबोधित किया, मुख्य बातें इस प्रकार रहीं:

  • गरीबों और वंचितों की सेवा के लिए अपना जीवन देने वाले सिद्धगंगा मठ के शिवकुमार स्वामी जी को मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
  • आज इस मंच पर एक कमी स्पष्ट रूप से हमें महसूस होती है, इस धरती की संतान अनंत कुमार जी हमारे बीच नहीं हैं। गरीबों के लिए उन्होंने जो समर्पण दिखाया है, इसलिए वह हमारे दिल में रहेंगे।
  • विकास की पंचधारा- बच्चों को पढ़ाई, युवाओं को कमाई, बुजुर्गों को दवाई, किसान को सिंचाई और जन-जन की सुनवाई, इसी विज़न पर सरकार आगे बढ़ रही है।
  • गाँवों और शहरों के डेढ़ करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर मिले हैं। बीते साढ़े चार वर्षों में हमने निरंतर सबका, सबका विकास के लिए काम किया है।
  • पिछली केंद्र सरकार 10 साल में शहरी क्षेत्रों में ग़रीबों के लिए केवल 13 लाख घर स्वीकृत किए थे, जिसमें से 8 लाख पूरे हो पाए। NDA की सरकार ने 73 लाख शहरी आवास स्वीकृत किए हैं, जिनमें से 15 लाख तैयार हो चुके हैं और 39 लाख घरों का काम पूर्णता की ओर हैं।
  • आपका ये प्रधान सेवक बिचौलियों को रास्ते से हटा रहा है। ईमानदार को मोदी पर भरोसा है। जो भ्रष्ट है उसे मोदी से कष्ट है। आप देख ही रहे हैं दिल्ली में कैसे कैसों का नंबर लग रहा है। जिनकी कमाई के बारे में लोग बात करने से डरते थे, आज कोर्ट में एजेंसियों के सवालों के सामने हाजिरी लगा रहे हैं, देश-विदेश में बेनामी संपत्तियों का हिसाब दे रहे हैं।
  • जिस रफ्तार से पिछली सरकार घर बनवा रही थी, उस हिसाब से जितने घर हमने बनाए हैं उसे बनवाने में उन्हें 40-50 साल लग जाते। यह काम हमने केवल 55 महीने में करके दिखाया।
  • असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए 3000 रुपये की मासिक पेंशन तय की गई है, इसके लिए श्रमिकों को औसतन 100 रुपये प्रतिमाह देने होंगे।
  • इतिहास में पहली बार 5 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम को टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया गया है।
  • आपका ये प्रधान सेवक बिचौलियों को रास्ते से हटा रहा है। ईमानदार को मोदी पर भरोसा है। जो भ्रष्ट है उसे मोदी से कष्ट है।
  • आप देख ही रहे हैं दिल्ली में कैसे कैसों का नंबर लग रहा है। जिनकी कमाई के बारे में लोग बात करने से डरते हैं, आज कोर्ट में एजेंसियों के सवालों के सामने हाजिरी लगा रहे हैं। देश-विदेश में बेनामी संपत्तियों का हिसाब दे रहे हैं।

दिल्ली में बढ़ा है गर्भपात का आँकड़ा, प्रतिवर्ष औसतन 50 हजार गर्भपात

दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने भले ही लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लाख दावे किए हों, लेकिन RTI (Right to Information) के ज़रिए मिली एक जानकारी के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में पिछले 5 साल के दौरान हर साल औसतन 50 हजार गर्भपात हुए हैं।

ख़बर की मानें तो चौंकाने वाले इस आँकड़े में प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत का आँकड़ा भी लगातार बढ़ा है। जानकारी के अनुसार दिल्ली में 2013-14 से 2017-18 की अवधि में सरकारी और निजी स्वास्थ्य केन्द्रों पर 2,48,608 गर्भपात हुए हैं। इनमें सरकारी केन्द्रों पर किए गए गर्भपातों की संख्या 1,44,864 है। निजी केन्द्रों का आँकड़ा इससे थोड़ा कम यानी 1,03,744 है। आँकड़े से स्पष्ट होता है कि दिल्ली में हर साल औसतन 49,721 गर्भपात हुआ है।

परिवार कल्याण निदेशालय के आँकड़े से हुआ खु़लासा

एक सामाजिक कार्यकर्ता राजहंस बंसल द्वारा RTI आवेदन पर दिल्ली सरकार के परिवार कल्याण निदेशालय से मिले आँकड़ों के मुताबिक़, गर्भपात के दौरान 5 सालों में 42 महिलाओं की मौत भी हुई। इनमें मौत के 40 मामले सरकारी केन्द्रों और दो मामले निजी केन्द्रों में दर्ज किए गए। इसके अलावा 5 सालों में प्रसव के दौरान 2,305 महिलाओं की मौत हुई। इनमें से 2,186 मौतें सरकारी अस्पतालों में और 119 निजी अस्पतालों में हुईं।

आप सरकार के सारे दावे खोखले

सामने आए आँकड़ों से केजरीवाल सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं की पोल तो खुली ही है, साथ ही यह बात भी सामने आई है कि महिलाओं की मौत का सिलसिला सरकारी अस्पतालों में साल दर साल लगातार बढ़ा है। बता दें कि, सरकारी अस्पतालों में यह सँख्या 2013-14 में 389 से बढ़कर 2017-18 में 558 हो गई।

वहीं निजी अस्पतालों में प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत की सँख्या 27 से 2017-18 में 24 पर आ गयी है। बीते 5 सालों के दौरान चार साल तक गर्भपात में बढ़ोतरी के बाद पिछले साल गिरावट दर्ज हुई। आँकड़ों के अनुसार बीते 5 सालों में पश्चिमी ज़िले में सर्वाधिक 39,215 और उत्तर-पूर्वी ज़िले में सबसे कम यानी 8,294 गर्भपात हुए।

गुर्जर आंदोलनः NH-3 पर आगजनी, पत्थरबाज़ी और बढ़ा तनाव

राजस्थान के धौलपुर में आरक्षण की माँग को लेकर गुर्जर समुदाय के लोगों ने आज तीसरे दिन भी अपना आंदोलन जारी रखा। सवाई माधोपुर के मलारना डूंगर में प्रदर्शनकारी अपनी माँग को लेकर रेल पटरियों पर बैठे हुए हैं। दूसरी ओर NH-3 पर आंदोलनकारियों ने ज़बरदस्त हंगामा किया है, जिससे हिंसा भड़क गई है और इलाके में ज़बरदस्त तनाव बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि इस दौरान पुलिस पर पत्थर भी फेंके गए हैं, जिसके जवाब में भीड़ पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी है। मामले को क़ाबू में रखने के लिए भारी मात्रा में पुलिस सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

राजस्थान सरकार ने भेजा मंत्री, नहीं बन रही बात

राजस्थान सरकार ने आंदोलन को शांत करवाने के लिए गुर्जर समुदाय के पास अपने मंत्री को भी भेजा था, लेकिन फ़िलहाल कोई बात बनती नज़र नहीं आ रही है। आंदोलन के चलते कई ट्रेनों की आवाजाही रद्द करनी पड़ी है, जिससे लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। गुर्जर दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर पटरियों पर बैठे हैं। बता दें कि आरक्षण की माँग को लेकर गुर्जरों का ये 5वाँ, आंदोलन है।

राजनीतिक लाभ का नतीजा आ रहा सामने

बता दें कि, राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने गुर्जरों से आरक्षण का वादा किया था। ऐसे में आरक्षण के लोभ से गुर्जर समाज के लोगों ने कॉन्ग्रेस के पक्ष में मतदान किया। यही वजह है कि प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद गुर्जर आरक्षण की माँग को लेकर उग्र हो गए हैं।

गुर्जर समाज अब सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 5% आरक्षण की माँग कर रहा है। गुर्जर, रायका रेबारी, गडिया, लुहार, बंजारा और गडरिया समाज के लोगों को आरक्षण की माँग की जा रही है। फ़िलहाल आरक्षण की 50% कानूनी सीमा में गुर्जरों को अति पिछड़ा श्रेणी में 1% आरक्षण अलग से मिल रहा है।

जेटली ने कसा राहुल पर तंज, ‘फेल स्टूडेंट टॉपर से हमेशा चिढ़ता है’

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने अपने ट्विटर हैंडल से राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी की एक के बाद एक कई ख़ामियाँ गिनाईं। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि पिछले दो महीनों में कई फ़र्ज़ी अभियान देखे गए हैं। फिर भी कॉन्ग्रेस अपनी फ़र्ज़ी हरक़तो से बाज नहीं आ रही है।

जेटली ने राफ़ेल सौदे पर कहा कि इस सौदे ने न केवल भारतीय वायु सेना की युद्धक क्षमता को मज़बूत किया बल्कि सरकारी खज़ाने की भी बचत की। लेकिन इस सौदे को झूठा करार देने के लिए विपक्ष ने आधा-अधूरा पत्र ही दिखाया, इसके बाद सच्चाई सामने आई। विरोधी यह भूल जाते हैं कि सच की हमेशा जीत होती है।

जेटली ने लिखा कि राहुल गाँधी के दो बयानों पर ग़ौर किया जाए तो उससे पता चलेगा कि वो पीएम मोदी से निजी दुश्मनी निकालने जैसे हैं। एक फेल स्टूडेंट हमेशा क्लास के टॉपर से चिढ़ता है।

अपने ट्वीट में जेटली ने बैंकों की ख़राब हालत का भी ज़िक्र किया जिसके अनुसार 2008-2014 के बीच बैंकों को लूटा गया और वो हम पर आरोप लगाते हैं कि हमने इंडस्ट्रियल लोन माफ़ किए, जबकि हमने एक रुपया भी माफ़ नहीं किया। वास्तव में अब डिफॉल्टर्स को मैनेजमेंट से बाहर किया जा रहा है, इससे कॉन्ग्रेस के एक और झूठ का पर्दाफ़ाश हुआ।

जेटली ने सर्जिकल स्ट्राइक पर उठाए गए सवालों के जवाब में लिखा कि सरकार और बीजेपी हमेशा सेना के साथ खड़ी है। विपक्ष ने तो आर्मी चीफ़ को सड़क का गुंडा तक कह दिया।

अपने तमाम ट्वीट के ज़रिए जेटली ने कई मुद्दों का उल्लेख किया। जिसपर आए दिन बेवजह की राजनीति होती रहती है। इन दिनों विपक्ष का काम जनता को असल मुद्दों से भ्रमित करने का है। कभी ईवीएम के नाम पर, कभी गाय की हत्या के बहाने तो कभी जीसटी को लेकर। इन सभी मुद्दों पर कॉन्ग्रेस ख़ुद घिरी हुई है बावजूद इसके वो ऐसा कोई हथकंडा नहीं छोड़ती जिससे केंद्र सरकार को कटघरे में लाया जाए। केंद्र को ग़लत साबित करने की तमाम कोशिशों के बावजूद बीजेपी विपक्ष के सभी झूठे दावों का खंडन करती चली आई है।

लप्रेकी रवीश कुमार! घर लौट आओ, तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा

व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के परम सम्मानित जातिवाचक कुलपति महोदय को ज्ञानवाचक का नमस्कार। क्योंकि मैं आपसे अक्सर सवाल पूछता रहता हूँ, इस कारण आपके अनुसार मैं स्वतः ही एक ट्रॉल भी हो जाता हूँ। लेकिन क्या आपने कभी ख़ुद भी सोचा था कि आपको सुरक्षा कारणों से ड्राइव करते समय ईयरफ़ोन लगाने होंगे और जवाबों की कमी के चलते किसी को ट्रॉल कहना पड़ेगा? ये ट्रॉल आज आपको बताना चाहता है कि यूँ ही नहीं वो ट्रॉल बन जाता है बल्कि वो आप से निराश होने के बाद ही ट्रॉल बनकर उभरा है।

पत्रकारिता के उस सुनहरे दौर को याद करते हैं, यानी वर्ष 2004 से 2014 तक का दशक, जब देश में चुनाव का माहौल नहीं हुआ करता था, प्राइम टाइम में किसी मनगढंत घोटाले के ख़िलाफ़ अख़बार की फ़र्ज़ी अधूरी कटिंग मुद्दा नहीं हुआ करती थी, प्रिंस पूरा दिन गड्ढे में गिरा रहता था, दिल्ली में बर्फ़ गिर जाया करती थी और दर्शकों को बाद में पता चलता था कि दिल्ली में बर्फ़ आसमान से नहीं बल्कि चुस्की बनाने वाली बर्फ़ की सिल्ली गिरी थी।

ये वो समय था जब ‘उभरते हुए कहानीकारों’ की जगह न्यूज़ रूम और अख़बारों में नहीं बल्कि बॉलीवुड और साहित्य में हुआ करती थी। इन सब के बीच दर्शकों को एक राहत की साँस मिली थी, रवीश की रिपोर्ट से। रवीश उस दौर में बहुत ख़ुश रहा करते थे। आपने गिर रही बर्फ़ के बीच गिर रही पत्रकारिता को दिशा दे डाली थी।

उस समय को याद करने में भी गौरव महसूस होता है, जब आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा के लिए नहीं बल्कि ‘लप्रेक’ लिखने के लिए किया करते थे। आप TV देखने पर ज़ोर दिया करते थे, क्योंकि आप जानते थे कि दर्शक TV पर रवीश को देखना चाहते थे। आपको ‘अटेंशन’ के लिए स्टूडियो में कलाकारों को नहीं लाना होता था। ‘साँय-साँय’ की हवा सिर्फ़ मौसम सम्बंधित ख़बरों तक सीमित हुआ करती थी।

अचानक आप नींद से जागे, देश में राजनीति होने लगी। सत्ता के ध्रुव और हेडक्वार्टर बदल गए, और रवीश के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वो छटपटाहट में इधर-उधर भागने लगा। मानो सत्ता नहीं रवीश के सर से आसमान सरक गया हो। उसका शब्दों का जादूगर रवीश कुमार माइक लेकर ग़रीबों की बस्ती और खेतों से उठकर किरण बेदी के क़िस्सों के बारे में रूचि लेने लगा, ख़ासकर कुछ ऐसे क़िस्सों में, जिन्होंने उन्हें एक मज़बूत महिला की छवि दी और अन्य महिलाओं को भी आगे आने लिए प्रेरणा बनाया। रवीश केजरीवाल जैसे अदाकार की खाँसी दिखाने लगा।

कॉन्ग्रेस के हाथों से सत्ता छूटी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री क्या बने कि आप ग़रीबों को भूल गए, लप्रेक की जगह आप मनुस्मृति ढूँढ-ढूँढ़कर पढ़ने लगे, वामपंथियों में आप और ज़्यादा रूचि लेने लगे। आप मेरे जैसे युवा की प्रेरणा हुआ करते थे, लेकिन जिस तरह से आप सरकार और संस्थाओं को नीचा दिखाने के लिए उन पर बेवजह लगातार आरोप लगाने के लिए प्रयासरत रहा करते हैं, उसने मुझे निराश किया है।  

आप ‘ऑड डेज़’ पर संविधान, संस्थान और लोकतंत्र में यक़ीन रखने को कहते हैं और ‘इवन डेज़’ पर कहते हैं कि ये सब संस्थाएँ बिक चुकी हैं। आप एक दिन कहते हैं कि TV मत देखिए, लेकिन दूसरे दिन रोते हैं कि NDTV की TRP नहीं आ रही है, फिर आप कहते हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह लोगों की छत पर चढ़कर उनकी केबल के तार काट रहे हैं और लोग TV नहीं देख पा रहे हैं।

हालात ये हो चुके हैं कि आप में और ‘यो बिक गई गोरमिंट’ वाली काकी में अब फ़र्क़ ख़त्म हो चुका है।आप शादी-विवाहों में दूल्हे के वो फूफा बनकर रह गए हैं, जिसकी ज़िन्दगी का बस ‘एक्के’ मक़सद रह गया है और वो है खिसियाए रहना।

पत्रकार महोदय, आपने अपने विशेष मीडिया गिरोहों, जैसे कारवाँ , द वायर, ऑल्टन्यूज़ आदि से सनसनी मचाते हुए ख़ुलासे किए, लेकिन सबका नतीजा शून्य ही रहा। यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट इन सभी से विनती कर चुकी है कि संस्थाओं का समय बर्बाद ना करें और सलाह दी कि पत्रकारिता में ज़िम्मेदारी को समझें।  

इसके बाद सनसनीखेज़ ख़ुलासे और आरोपों को ठीक से जाँच परख करने के बाद ही जनता के समक्ष लाने के बजाए आपने ‘डिस्क्लेमर’ लगाना बेहतर समझा। ताकि ‘प्रोपेगैंडा ऊँचा रहे हमारा’ की क्रान्ति जारी रहे। आप दर्शकों के इस मनोविज्ञान में अब महारत हासिल कर चुके हैं। आप जानते हैं कि आपको पढ़ने वाले सब भटके हुए और मनचले युवा हैं और जो भी भविष्यवाणी आप उगलेंगे, उसे ‘ब्रह्मवाक्य’ मानकर वो लोगों को गाली देना और नीचा दिखाना शुरू कर देंगे।

हाल ही में राफ़ेल डील की आधी जानकारी को लेकर आपके चरमोत्कर्ष को देखना सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। कॉन्ग्रेस पार्टी की मोदी सरकार को लेकर छटपटाहट एक बार के लिए स्वीकार्य है, क्योंकि वो आम चुनाव से पहले किसी ना किसी तरह से मोदी सरकार को घेरने के लिए कोई न कोई घोटाले का आरोप लगाना चाहते हैं। प्रोपेगैंडा पत्रकारिता का समुदाय विशेष दिन-रात इस मशक्कत में जुटा होने के बावजूद भी इन चार सालों में अब तक विपक्ष के पास कोई भी ऐसा घोटाला नहीं आ पाया है, जिसे लेकर वो मोदी सरकार को घेर सकें।

मोदी सरकार को घेरने के लिए अनाप-सनाप सुबूत हाथ आते ही रवीश कुमार उत्तेजित होकर उन्हें  तुरंत ‘नई सड़क ‘पर खींच लाते हैं

विपक्ष के दलों की छटपटाहट एक बार के लिए वाजिब है, लेकिन एक स्थापित पत्रकार होने के बाद भी राहुल गाँधी जैसे मनचले चिरयुवा के बचपने पर देश और दुनिया को गुमराह करना आपको शोभा नहीं देता था, फिर भी आप राफ़ेल डील पर ‘द हिन्दू’ अख़बार की एक टुकड़ी लेकर लहरा गए। आप जानते हैं कि आपके सारे बयान और प्राइम टाइम बेबुनियाद हैं, फिर भी आप छाती चौड़ी कर के रोज नया प्रोपेगैंडा लेकर बैठ जाते हैं। अगर शाहरुख़ ख़ान की एक के बाद एक फ़्लॉप फ़िल्मों का मुक़ाबला आपके फ़्लॉप प्रोपेगैंडा की सीरीज़ से की जाए तो आप नि:संदेह आगे निकल जाएँगे।

आपने मुझे एक इंटरनेट ट्रॉल की संज्ञा दी है, मेरा स्तर आपको समझाने-बुझाने के लिए बेहद छोटा है, लेकिन फिर भी कोशिश कर के देखिए। आप ग़रीबों की नहीं बल्कि विचारधारा और अहंकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज जो रवीश कुमार लाल माइक पकड़ता है, उसका मुद्दा ग़रीब और विद्यार्थी नहीं बल्कि टकराव है। इस रवीश की कलम लप्रेक नहीं बल्कि चुनावी बागों में बहार तलाश रही है और इस काम के लिए ये किसी भी हद तक जाने के लिए आतुर दिखता है।

रवीश जी, आपकी पत्रकारिता में विश्वास करने वाले युवा का हाल मुहब्बत में धोखा खाए हुए लड़के जैसा हो चुका है, वो चाहकर भी अब मोहब्बत करने को राजी नहीं है। उसे अब किसी भी तरह के लिबास में रंगी गई पत्रकारिता और मीडिया में यकीन नहीं रह गया है। वो बदहवास हालात में न्यूज़ डिबेट्स से लेकर कारवाँ और वायर तक में सत्य ढूँढ रहा है, लेकिन सत्य है कि मिलता नहीं। उसका मन प्रोपेगैंडों से आतंकित है, उसका मानना है कि अगर सस्ती लोकप्रियता के लिए रवीश कुमार प्रोपगैंडा के लिए काम करते हैं, तो फिर किसी और में किस तरह यक़ीन किया जाए?

आज के दिन पर आपको पढ़ने-देखने वालों के दिमाग में बस प्रोपेगैंडा और दिल में ग़ालिब बज रहा है, “ख़ुदा के वास्ते पर्दा न काबे का उठा ज़ालिम, कहीं ऐसा न हो यां भी वही क़ाफ़िर सनम निकले।”

हम सबकी आपसे विनती है: “हे रवीश कुमार, आप भटक चुके हैं। आप घर लौट आइए, आपको कोई कुछ नहीं कहेगा।” हे राजा रवीश कुमार, परमादरणीय रवीश कुमार! अपना ‘कारवाँ’ रोक दीजिए, आपको हिंदी पत्रकारिता का वास्ता। लप्रेक लिखने और पढ़ने वाली प्रजाति विलुप्ति के कगार पर है, उसे बचा लीजिए। जिस तरह तमाम माया-मोह को त्यागकर अर्जुन ने गाण्डीव उठाया था, आप क़लम उठाइये, आप शब्दों के जादूगर हैं। राजनीति नहीं, बस अपने हिस्से की पत्रकारिता शुरू कर दीजिए, TV पर सच सुनने और मीडिया में सच पढ़ने के इच्छुक व्यक्ति की ये बहुत बड़ी जीत होगी।

आपका प्रशंसक: ज्ञानवाचक

IIT बॉम्बे की खोजः कचरे से बनेगा फ़्यूल सेल, घर होंगे रौशन

विज्ञान और तक़नीकी क्षेत्र में हमारा देश लगातार आगे बढ़ रहा है। देश के वैज्ञानिक तमाम शोध के ज़रिए असंभव होने वाली बात को भी संभव बना रहे हैं। आपने गोबर गैस के ज़रिए बल्ब जलते हुए देखा होगा, लेकिन शायद ही आपने यह सोचा हो कि एक दिन आपके द्वारा फेंके जाने वाले कचरे के जरिए बिजली बनाई जाएगी और इससे हजारों घर रोशन हो सकेंगे। लेकिन यह कल्पना अब सच हो गई है, भविष्य में हम कचरे के ढेर से साफ़ पानी और बिजली पैदा कर सकेंगे।

IIT बॉम्बे के एनर्जी डिपार्टमेंट के प्रोफे़सर प्रकाश घोष और उनकी टीम ने इस सपने को साकार किया है। उनकी टीम ने एक ऐसा Microbial (माइक्रोबियल) Fuel Cell बनाया है, जिससे कचरे से निकलने वाले ख़तरनाक लिक्विड से बिजली बनाई जा सकती है।

आपने अक़्सर कचरा जमा किए जाने वाले डंपिंग ग्राउंड्स में एक काले रंग का लिक्विड रिसता हुए देखा होगा, इसे लीचेट कहा जाता है। लीचेट में कई सारे जैविक और अकार्बनिक तत्व पाए जाते हैं, जो ऊर्जा उत्पादन में सहायक होते हैं। इसके अलावा इस तरह के लीचेट में कई बैक्टीरिया भी होते हैं।

बता दें कि, एक पाइप के ज़रिए लीचेट को इस (माइक्रोबियल) Fuel Cell में डालते हैं, जिसके बाद इसमें मौजूद बैक्टेरिया आर्गेनिक तत्वों को अपने आप खाने लगता है। इस दौरान नेगेटिव और पॉजिटिव पार्टिकल्स पैदा होते है, जो इलेक्ट्रोड पर इकट्ठा होने लगते है। ये दोनों पार्टिकल्स अपने विपरीत आवेश वाले अंत की और आगे बढ़ते है और बस इसी से ऊर्जा यानी इलेक्ट्रिसिटी बनती है।

सोच से परे की बात ऐसे हुई सच

इसके एक्सपेरिमेंट के लिए तीन अलग अलग MFC को लिया गया था, जिनमें 17 दिन का एक साईकिल रखी गई थी। जिसमें अधिकतम बिजली 1.23 V, 1.2 V और 1.29 V बनी थी, ये दुनिया में पहली बार Microbial Fuel Cell (एमएफसी) से बनी उच्चतम बिजली है। इसके बाद प्रोफ़ेसर और उनकी टीम ने 18 Microbial Fuel Cell (एमएफसी) का बड़ा सिस्टम बनाया, जिसमें कुल 12 V बिजली बनी और इससे एक LED लाइट को भी जलाया गया था।

प्रोफ़ेसर प्रकाश घोष के मुताबिक़ “ये किसी की सोच से भी परे की बात है की उनका फेंका हुआ कचरा ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है, ये भविष्य की ऊर्जा है, नतीजे बेहद चौंकाने वाले और उत्साह भरने वाले हैं, अब हमें इनके व्यवसायिक उत्पादन और उसके आर्थिक पहलू पर भी काम करने की ज़रूरत है जिससे सस्ती ऊर्जा भारत के लोगो को दी जा सके।”

हिन्दी ने अबू धाबी में बनाई पहचान, तीसरी क़ानूनी भाषा के रूप में मिली मान्यता

हिंदी भाषा बोलने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए, न्याय तक पहुँच बढ़ने के लिए, अबू धाबी में हिंदी भाषा को लेकर ऐतिहासिक क़दम उठाया गया है। दरअसल, अबू धाबी ने अब अरबी और अंग्रेज़ी के बाद हिंदी भाषा को अपनी अदालतों में तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल कर लिया है। इस फै़सले से जहाँ हिंदी भाषा को बढ़ावा मिल सकेगा, वहीं इसके साथ ही वहाँ रहने वाले हिंदी भाषाई लोगों के लिए इसके ज़रिए न्यायिक प्रक्रिया भी आसान हो सकेगी।

अबू धाबी न्याय विभाग (एडीजेडी) ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि उसने श्रम मामलों में अरबी और अंग्रेज़ी के साथ हिंदी भाषा को शामिल करके अदालतों के समक्ष दावों के बयान के लिए भाषा के माध्यम का विस्तार कर दिया है। विभाग ने कहा कि इसका मक़सद हिंदी भाषी लोगों को मुक़दमे की प्रक्रिया, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में सीखने में मदद करना है।

संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं 26 लाख भारतीय

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात की आबादी में क़रीब दो तिहाई हिस्सा विदेशों के प्रवासी लोगों का है। वहीं भारतीय लोगों की सँख्या 26 लाख है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 30% है। बता दें कि यह अबू धाबी का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय भी है।

एडीजेडी के अपर सचिव युसूफ़ सईद अल अब्री ने कहा, “दावा शीट, शिक़ायतों और अनुरोधों के लिए बहुभाषा लागू करने का मक़सद प्लान 2021 की तर्ज पर न्यायिक सेवाओं को बढ़ावा देना और मुक़दमे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।”

भ्रष्टाचार से जुड़े हर शख़्स का रिश्ता कॉन्ग्रेस से होता है: तमिलनाडु से PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (फरवरी 10, 2019) को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में रैली के बाद तमिलनाडु के तिरुपुर पहुँच गए हैं और लोगों को संबोधित कर रहे हैं। वे इस दौरान कई परियोजनाओं का उद्धघाटन करेंगे।

तमिलनाडु के तिरुप्पुर में भी नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने मध्यम वर्ग को हमेशा नकारा है इसलिए जनता ने उन्हें नकार दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की प्रमुख बातें:

  • तिरुप्पुर की भूमि को मैं नमन करता हूँ, यह वीरों की भूमि है।
  • कुछ क्षण पहले ही कई डेवेलपमेंट प्रॉजेक्ट्स का उद्घाटन किया गया है और कई सारे प्रॉजेक्ट्स की आधारशिला रखी गई है।
  • तिरुप्पुर का असंगठित क्षेत्र और एसएसएमई सेक्टर से नाता है। इस बार के बजट में फैक्ट्री, घर, स्मॉल इंटस्ट्री आदि में काम करने वालों की सुरक्षा के लिए ₹3000 तक की पेंशन सुनिश्चित करने का ऐलान किया गया।
  • NDA की सरकार के काम करने का तरीका अलग है, जिसने पिछले कई सालों तक देश पर राज किया उसने डिफेंस सेक्टर पर ध्यान नहीं दिया केवल अपने लोगों की मदद और दलाली की गई।
  • ऐसा क्यों है कि भ्रष्टाचार से जुड़े हर आदमी का रिश्ता कांग्रेस या उसके किसी नेता से मिलता है।
  • जब एक राष्ट्र स्वस्थ होता है तो वह तेजी से विकास करता है, आयुष्मान भारत योजना का लाभ अब तक 11 लाख लोग ले चुके हैं। 18000 गाँवों में बजली पहुँचाई गई है। 2022 तक देश के सभी के लिए घर देने का लक्ष्य है, 1.3 करोड़ घर अभी तैयार हैं।
  • भारत के विकास पर आज के वक्त में पूरी दुनिया की नज़र है, यह करोड़ों ईमानदार टैक्सपेयर्स के सहयोग की वजह से संभव हुआ है। ₹5 लाख तक की सालाना आय पर टैक्स नहीं लगाने का इस बार के बजट में ऐलान किया गया है। यह मिडिल क्लास की सालों पुरानी माँग थी।
  • यूपीए के वक्त में एक बहुत ही बुद्धिमान मंत्री तमिलनाडु से थे, वह रिकाउंटिंग मिनिस्टर थे। उन्हें लगता था वही सबसे ज़्यादा समझदार हैं। उन्होंने एक बार कहा था कि मिडिल क्लास क्यों डरा हुआ है, मिडिल क्लास तो महँगी आइसक्रीम खाता है और मिनरल वॉटर पीता है। उन्हें मैें कहना चाहता हूँ कि मिडिल क्लास ने आपको रिजेक्ट कर दिया है और वे ऐसा करते रहेंगे।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने सर्जिकल स्‍ट्राइक पर सवाल उठा कर सेना के उत्‍साह को घटाने का काम किया। उन्होंने कहा,”एनडीए सरकार देश के सभी लोगों की सरकार है, सरकार ने 2014 के बाद इन्फ्रास्‍ट्रक्‍चर को बेहतर बनाकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है। भारतमाला, सागर, मेट्रो प्रोजेक्‍ट के माध्‍यम से देश को परिवहन के क्षेत्र में जोड़ने का काम किया है। 2022 तक देश के सभी लोगों के लिए मकान उपलब्ध कराएँगे। भारत के विकास को पूरी दुनिया ने सकारात्‍मक रूप से लिया है।”

UPSC के इंटरव्यू राउंड के असफल छात्रों को मिलेगी नौकरी, जानने के लिए पढ़ें पूरी ख़बर

दिन-रात मेहनत करके संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए अच्छी ख़बर है। दरअसल, सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में चूकने वाले अभ्यर्थियों को नौकरी मिल सके इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग ने एक नई पहल की है, जिससे अभ्यर्थियों को नौकरी मिल सकेगी। आयोग ने केंद्र सरकार से उसके मंत्रालयों में सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में फेल होने वाले आवेदकों को भर्ती करने की सिफ़ारिश की है।

UPSC चेयरमैन अरविंद सक्सेना ने की पहल

अब अगर सरकार इस सिफ़ारिश को मान लेती है तो बड़ी संख्या में नौकरी से वंचित रहे युवाओं का सरकारी नौकरी मिल सकेगी। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार ओडिशा में आयोजित राज्य लोक सेवा आयोग के 23वें सम्मेलन में UPSC के चेयरमैन अरविंद सक्सेना ने बताया है कि हमने केंद्र सरकार और मंत्रालयों से सिफ़ारिश की है, कि वे सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में फेल होने वाले उम्मीदवारों की भर्ती करें।

उन्होंने जानकारी दी कि हर साल क़रीब 11 लाख उम्मीदवार सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। जिसमें से विभिन्न चरणों से गुजरते हुए केवल 600 उम्मीदवारों का चयन हो पाता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उम्मीदवारों को दूसरे मंत्रालयों/विभागों में भर्ती पर विचार करती है तो इससे युवाओं का तनाव कम होगा।

दक्षिण कश्मीर में 5 आतंकी ढेर, 4 जवान घायल

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम ज़िले में सुरक्षा बलों को बड़ी क़ामयाबी मिली है। मुठभेड़ में सेना के जवानों ने 5 आतंकियों को मार गिराया। मारे गए आतंकियों के पास से सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया है।

ख़बर की मानें तो सुबह 5 बजे के आसपास आतंकियों के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया। 6 घंटे बीतने के बाद सेना ने यहाँ के दो घरों को उड़ा दिया, जिसमें मकान के अंदर छिपे हुए 5 आतंकी मौके पर ही ढेर हो गए। सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन के बाद इसकी पुष्टी करते हुए सभी आतंकियों के शव के साथ भारी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य सामान बरामद किया। बताया जा रहा है कि मारे गए आतंकियों में एक मोस्ट वॉन्टेड कमांडर भी शामिल है।

ऑपरेशन में ख़लल डालने के लिए की गई पत्थरबाज़ी

आतंकियों पर की गई कार्रवाई के बाद इलाक़े में भारी हिंसक प्रदर्शन हुए। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान कुछ उपद्रवियों ने ख़लल डालने के लिए पत्थरबाज़ी भी की। जवाब में सीआरपीएफ के जवानों ने उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए आँसू गैस के गोले दागे। भारी पथराव के चलते 4 सीआरपीएफ जवानों के गंभीर रूप से घायल होने की बात भी सामने आई है।

बंद की गई इंटरनेट सेवा

सेना द्वारा किए गए ऑपरेशन के बाद इलाक़े में तनाव बना हुआ है, जिसको देखते हुए कुलगाम में मुठभेड़ की शुरुआत से ही इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी। इसके अलावा बनिहाल से बारामुला के बीच चलने वाली रेल सर्विसेज़ को भी बंद करने का आदेश दिया गया है। बताया जा रहा है कि हिंसा के हालात को देखते हुए सीआरपीएफ और पुलिस की अतिरिक्त टीमों को भी तैनात किया गया है।