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ये तो ट्रेलर था, पिक्चर अभी बाक़ी है – मोदी के ‘पायलट प्रोजेक्ट’ वाले भाषण के मायने

पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद से भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की है। इसमें कई ऐसे बड़े क़दम शामिल हैं जिनसे ये स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री की अगुआई में चल रही केंद्र सरकार बड़ी ही मुस्तैदी के साथ पाकिस्तान को जवाब देने की जुगत में है।

अपने इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी आज विज्ञान भवन में शांति स्वरूप भटनागर प्राइज के लिए पहुँचे। वहाँ उन्होंने अपने संबोधन में सीधे और सरल शब्दों में कहा कि अभी-अभी एक पायलट प्रोजेक्ट पूरा हुआ है जो एक प्रैक्टिस थी, लेकिन रियल अभी बाक़ी है। उनके इन शब्दों को अगर एक फ़िल्मी डॉयलॉग से जोड़कर देखें तो वो ये होगा, ‘ये तो ट्रेलर था, लेकिन पिक्चर अभी बाक़ी है’। पीएम मोदी के संबोधन में छिपा संदेश पाकिस्तान के लिए था जिसमें पायलट प्रोजेक्ट का ज़िक्र हाल ही में की गई एयर स्ट्राइक के लिए था और पूरी तरह से सबक सिखाने का मतलब रियल एक्शन से है। यानि अगर आतंकवाद को पालने वाले अपनी हरक़त से बाज नहीं आए तो उसका ख़ामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहे पाकिस्तान।

आज यह बात सभी जानते हैं कि आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है न सिर्फ़ भारत के लिए बल्कि अन्य देशों के लिए भी। इसमें एक बात तो सर्वविदित है कि पाकिस्तान आतंकवाद को न सिर्फ़ पनाह देता है बल्कि अपनी छत्रछाया में आतंकियों को फलने-फूलन के पूरे अवसर भी उपलब्ध कराता है। पाकिस्तान का यह डर ही था कि उसने भारत के डर से LOC के पास से आतंकियों के लॉन्च पैड्स खाली करा लिए थे। 26 फ़रवरी को भारत की ओर से हुए एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने अपने गढ़ में छिपे आतंकवादियों को रावलपिंडी से बहावलपुर में छिपने का रास्ता दिखाया, ये भी पाकिस्तान के थर्रा जाने का साक्षात दर्शन है।

पुलवामा हमले के दौरान 40 भारतीय जवानों के हिस्से आई वीरगति समूचे देश के लिए अविस्मरणीय है। अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारत की ओर से प्रतिक्रियात्मक गतिविधियों में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति को स्पष्ट कर दिया। सत्ता पर आसीन होते ही पीएम मोदी ने देश-दुनिया को यह चेता दिया था कि सीमापार से संचालित आतंकी गतिविधियों के ख़िलाफ़ हमारी नीति और नीयत दोनों स्पष्ट हैं।

14 फरवरी को पाकिस्तान के छद्म वार की जहाँ देश और दुनिया में कड़ी आलोचनाएँ हुईं वहीं भारत के प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया था कि पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले दुनिया के किसी भी कोने में नहीं छिप सकते, उनका बच पाना नामुमकिन है।

प्रधानमंत्री ने अपनी कथनी और करनी में भेद न करते हुए देश की जनता को यह दिखा दिया कि उन्हें वास्तव में देश के हित-अहित की चिंता है। इसी का नतीजा एयरस्ट्राइक के रूप में पूरी दुनिया ने देखा। पीओके में भारतीय वायु सेना द्वारा की गई एयरस्ट्राइक की कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने तो ध्वस्त हुए ही साथ ही वायु सेना ने अपने मात्र 12 मिराज-2000 विमानों ने चंद मिनटों में 300 से अधिक आतंकियों को भी मार गिराया गया।

अगर हम बात करें कि पुलवामा हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी की जो तमाम प्रतिक्रियाएँ आईं वो भले ही सीधे और सरल शब्दों के आवरण में सामने आए हों लेकिन उनके मायने बेहद ही गहन और गंभीर थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ अभियान के तहत नमो एप के ज़रिये देशभर में करीब 15 हजार स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘मैं कभी नहीं चाहता कि मेरी कोई निजी विरासत हो। इस देश के ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति के घर में विकास का जो दीपक जला है, यही मेरी विरासत है।’ इसके उन्होंने आगे कहा, “सेना को हमने न केवल सशक्त बनाया, बल्कि देश की रक्षा के लिए उन्हें खुली छूट दी, यही मेरी विरासत है।”

इससे पहले 26 फरवरी को दिल्ली मेट्रो का सफर करके इस्कॉन मंदिर पर पहुँच कर उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी और वजनी भगवत गीता का अनावरण किया। 670 पृष्ठों वाली 800 किलोग्राम की भगवत गीता के लोकार्पण के दौरान उन्होंने कहा, “मानवता के दुश्मनों से धरती से बचाने के लिए प्रभु की शक्ति हमेशा हमारे साथ रहती है। यही संदेश हम पूरी प्रमाणिकता के साथ दुष्ट आत्माओं, असुरों को देने का प्रयास कर रहे हैं।”

26 फरवरी को ही राजस्थान में रैली के दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने वीर रस से भरी कविता को शामिल किया और कहा कि सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूँगा, मैं देश नहीं रुकने दूँगा, मैं देश नहीं झुकने दूँगा, मेरा वचन है भारत माँ को, तेरा शीश नहीं झुकने दूँगा, सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं मिटने दूँगा… इन पंक्तियों का सीधा मतलब देश की मान-मर्यादा और गौरव से है। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात को भी पूरे जोश के साथ कहा कि देश से बढ़कर उनके लिए कुछ नहीं है, देश की सेवा करने वालों को, देश के निर्माण में लगे हर व्यक्ति को आपका ये प्रधान सेवक नमन करता है।  

इतने के बाद भी विपक्ष द्वारा बेबुनियादी मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी और उनके नेतृत्व वाली सरकार को बेवजह के मुद्दों पर घेरा जाना कहाँ तक सही जान पड़ता है, यह वो प्रश्न है जिसका जवाब बाहर नहीं बल्कि अपने अंतर्मन में झाँककर खोजने की आवश्यकता है। और इसके लिए एक सार्थक प्रयास कम से कम एक बार तो ज़रूर ही करना चाहिए।

मोदी के लिए पाकिस्तान की अहमियत &@%# जितनी ही है

भारत पिछले कुछ समय में मोदी के नेतृत्व में कितना बदला है इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि पहले के नेताओं के पाकिस्तान ऑब्सेस्ड भाषणों से दूर अब बड़े से बड़े हमलों के बाद भी पाकिस्तान का नाम लिए बग़ैर, जो करना होता है, वो कर दिया जाता है। ये पूरी तरह से, नई नीति के तहत पाकिस्तान की समस्या और पाकिस्तान जैसे क्षुद्र देश को देखने जैसा है।

पाकिस्तान की अहमियत मोदी के लिए इतनी भी नहीं है कि उसके द्वारा किए गए हमलों के जवाब में एयर स्ट्राइक होने पर एक भी बार कहीं सीधा बयान दे। पूरे प्रकरण में मोदी ने अपनी रैलियों से लेकर, कई कार्यक्रमों के दौरान कहीं भी पाकिस्तान पर किए गए स्ट्राइक का सीधे ज़िक्र नहीं किया। जैसे कि जिस सुबह यह हुआ, उस दिन मोदी ‘गाँधी शांति पुरस्कार’ दे रहे थे, और दोपहर में दुनिया की सबसे बड़ी गीता के दर्शन कर रहे थे। 

एयर स्ट्राइक की पुष्टि भी विदेश मंत्रालय के सचिव द्वारा कराई गई। ये अपने आप में योजनाबद्ध तरीके से एक संदेश देना है कि एक आतंकी राष्ट्र पर की गई कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री तो छोड़िए, रक्षा मंत्री या विदेश मंत्री भी बयान नहीं दे रहा, बल्कि मंत्रालय का सचिव उसे हैंडल कर रहा है। ये पाकिस्तान को उसकी जगह दिखाने जैसा है।

इसी तरह का वाक़या यूएन में भारत की जूनियर अफसर ईनम गम्भीर द्वारा पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के भाषण पर जवाब देने पर याद आता है। उरी हमलों के बाद पाकिस्तान को धिक्कारते हुए, नवाज़ शरीफ को जवाब देने के लिए ईनम को आगे करना भारत की नीति में बदलाव की ओर इशारा करता है। 

मोदी ने तब बोला, जब उन्हें बोलना चाहिए था। वो समय था हमारे बलिदानियों के सम्मान का, उनके परिवार और पूरे देश को बताने के लिए कि सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। तब मोदी ने आतंक के ख़ात्मे की बात की थी। ये कहा था कि सेना के लोगों को पूरी छूट दी गई है कि वो इसे अपने तरीके से हैंडल करें। 

उसके बाद चाहे एयर स्ट्राइक्स हों, या फिर हमारे एक पायलट द्वारा पाकिस्तानी जेट को मार गिराने के बाद उनकी सीमा में पकड़ा जाना, मोदी ने कभी भी एक भी शब्द सीधा नहीं बोला। सिर्फ सूक्ष्म तरीके से संदेश दिए कि जिनके हाथों में क्षमता है, जो इस मुद्दे पर काम कर सकते हैं, वो अपना काम कर रहे हैं, और पाकिस्तान इतना बड़ा नहीं हुआ है कि भारत का प्रधानमंत्री उसे भाव देता रहे। 

उसके उलट पाकिस्तानी खेमे में उनके पीएम से लेकर सारे बड़े नेता और आला अधिकारी लगातार बयान देते पाए जा रहे हैं। कल की घटना के बाद जहाँ इमरान खान के चेहरे पर खुशी थी, वहीं उन्होंने पुरानी पाकिस्तानी धूर्तता का चेहरा लेकर शांति के पहल की बात की। पाकिस्तान के पीएम ने न सिर्फ लगातार युद्ध की विभीषिका को लेकर अपने तर्क दिए, बल्कि यहाँ तक स्वीकारा कि उनके द्वारा भारतीय पीएम को किए गए फोन कॉल की कोशिश पर कोई रिस्पॉन्स नहीं आया।

कल रात ही कराची से लेकर स्यालकोट, रावलपिंडी आदि बड़े शहरों में खलबली मची हुई थी क्योंकि भारतीय कोस्ट गार्ड और नेवी की मूवमेंट की ख़बर पाकिस्तान पहुँची। सिंध क्षेत्र की असेंबली में किसी भी तरह के युद्ध के हालात को लेकर तैयारी की बातें हो रही थीं, क्योंकि वहाँ कई विदेशी रहते हैं जो चीन एवम् अन्य देशों के हैं। हॉस्पिटलों को तैयार रहने कहा गया था, और सोशल मीडिया पर लगातार कराची के ऊपर पाकिस्तानी जेट की गर्जना सुनाई दे रही थी।

इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान जानता है कि उसके सामने क्या विकल्प हैं। वहाँ का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि छद्म युद्ध आज के भारतीय नेतृत्व के सामने विकल्प नहीं क्योंकि उनके योद्धाओं को भारतीय सेना साल में 250 की दर से निपटा रही है। नर्क के गुप्त सूत्र यह भी बताते हैं कि वहाँ हूरों की सप्लाय कम पड़ गई है। 

सेना द्वारा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों को मारने के तरीके भी बदल गए हैं। अब वो घरों को घेरकर, आतंकियों द्वारा घर के लोगों को बंधक बनाने की बात पर नहीं रुकते, बल्कि घर को ही आग लगा देते हैं। पत्थरबाज़ों पर लगातार पैलेट गन का इस्तेमाल होने से, उनके अलगाववादी नेताओं को उनकी जगह बताने से लेकर हर वो काम किए जा रहे हैं ताकि भारतीय धरती से पाकिस्तान के आतंकी मंसूबों को मदद न मिले। 

मोदी के नेतृत्व में भारत ऐसे ही बदला है। मानवाधिकार लॉबी सिकुड़ी है क्योंकि उन्हें देश का हित सोचने वाले लोग अब ढूँढकर जवाब देना सीख गए हैं। साथ ही, ऐसे तमाम एनजीओ पर सरकार ने कड़ा एक्शन लिया जो बाहर के पैसों पर भारत के अंदर आतंकी या देशविरोधी गतिविधियों को हवा देते थे। 

मोदी के नेतृत्व का दूसरा पहलू यह भी रहा है कि राजनीति ने सेना पर अपना प्रभाव जताया नहीं। मोदी ने सुनिश्चित किया कि सेना का काम, आतंकियों से निपटने का कार्य, पाकिस्तान को जवाब देने की योजना बनाना नेताओं का कार्य नहीं है। नेताओं का काम उनकी बात को समझना और सिर्फ उन्हें भारतीय हितों को सुनिश्चित करते हुए, सेना को स्वतंत्रता से कार्य करने देना है।

इससे पहले हम राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार या सेनाध्यक्षों के नाम याद किया करते थे, लेकिन आज के दौर में उनकी कार्रवाई भी हम देख रहे हैं। आज के दौर में भारतीय सीमाओं से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक हमारे सुरक्षा बलों के अफसर एक्शन में दिखते हैं। हो सकता है कि इसका एक कारण सोशल मीडिया रहा हो, लेकिन लगातार आतंकियों और नक्सलियों के प्रभाव से मुक्त होते भारत में उनका बहुत बड़ा हाथ है। 

इन सबके बीच तीसरा पहलू है हमारे घर के उन चिराग़ों का जो अपने अंदर का तेल पर्दों पर छिड़क कर बत्ती उधर घुमा देते हैं। पत्रकारिता का यह धूर्त समुदाय विशेष अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के ‘नैतिक रूप से बेहतर जगह’ पर होने की बात कर रहा है क्योंकि उसने हमारे पायलट को लौटाने की बात की है। ऐसा नहीं है कि राजदीप सरदेसाई को जेनेवा कन्वेन्शन या भारत द्वारा लगातार की जा रही इंटरनेशनल डिप्लोमैटिक कोशिशों की जानकारी नहीं है, लेकिन बात जब भारत और पाकिस्तान की हो तो, ऐसे सड़े हुए पत्रकार कहाँ खड़े होते हैं, यह किसी से छुपा नहीं है। 

एक क्यूट पत्रकार ने लिखा है कि ‘इसमें मोदी की जीत कैसे है?’ खैर इस पत्रकार का तर्क इतना बेकार है कि इसे जवाब देना भी अपने शब्द बेकार करने जैसा है। इसलिए, आप बस ट्वीट पढ़ लीजिए कि ऐसे लोग जो लिख रहे हैं वो इसलिए लिखते हैं क्योंकि इनके लिए धान और गेहूँ में अंतर नहीं। क्या अभिसार शर्मा, कुछ भी ब्रो?

तीसरी क्यूटाचारी हैं सगारिका जी, जिन्हें पत्रकार इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो टीवी पर आती थीं। इसके अलावा उनका एक ट्वीट या लेख ऐसा नहीं होता जिसे बेकार की श्रेणी में रखकर ‘बेकार’ शब्द का अपमान न किया जाए। इनके अनुसार जो हो रहा है, वो काफी नहीं है, बल्कि डिफ़ेंस मिनिस्टर कहाँ हैं, वो कुछ क्यों नहीं करती नज़र आ रही। 

ऐसे गिरोह की समस्या यही है कि जब मंत्री बोले तो कह दिया जाए कि इसका राजनीतिकरण हो रहा है, और जब सारे काम हो जाएँ, कोई बयान न दे, तो पूछा जाता है कि मंत्री कहाँ हैं। और अंत में चाटुकारिता के उच्चतम स्तर पर इंदिरा गाँधी को याद कर लिया गया। 

धूर्त गिरोह के सदस्यो! पाकिस्तान को उसकी औक़ात बताना भारत का मक़सद है, न कि उसे इतना महत्व देना कि प्रधानमंत्री या रक्षा मंत्री अपने सारे कार्य छोड़कर परेशान होकर पूरे देश को यह संदेश दे कि भारत तनाव में है। मोदी तनाव में नहीं है क्योंकि मोदी को अपनी सेना और उसकी क्षमता पर विश्वास है। मोदी राष्ट्राध्यक्ष है, न कि स्टूडियो में बैठा एंकर जिसका चौबीस घंटा पाकिस्तान-पाकिस्तान रटने में जा रहा है। 

बोलचाल की भाषा में कहें तो मोदी को लिए पाकिस्तान की अहमियत @#&% जितनी ही है। इसलिए उसकी बात करके, उस पर रिएक्शन देकर, भारत को अपनी महत्ता नीचे करने की आवश्यकता नहीं। भारत एक बड़ी अर्थ व्यवस्था है, प्रभावशाली देश है, अंतरराष्ट्रीय जगत में वो एक आगे बढ़ती शक्ति है, वो अब दूसरे देशों से अपनी बात गर्दन तान कर करता है। पाकिस्तान क्या है? 

पाकिस्तान गधे और भैंस बेचकर अपना घर चलाने वाला गुंडा देश है, जिसके बड़े शहरों से बिजली चली जाती है और अपने ही जेट की आवाज सुनकर वहाँ के लोग ‘अल्ला रहम करे’, ‘अल्ला खैर करे’ करने लगते हैं क्योंकि उनको भी पता है कि भारत क्या कर सकता है। 

एयर स्ट्राइक के सबूत हमारे पास हैं : IAF, नेवी, आर्मी की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा किए गए एयर स्ट्राइक को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच आर्मी, नेवी और वायुसेना प्रेस को सम्बोधित कर रहे हैं। आज गुरुवार (फरवरी 28, 2019) सुबह तीनो सेनाओं के प्रमुखों ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाक़ात की। कल बुधवार (फरवरी 27, 2019) को पाकिस्तान द्वारा भारतीय पायलट को हिरासत में लेने के बाद यह पहला मौका है जब द्वारा प्रेस को सम्बोधित किया जा रहा है। चूँकि यह एक काफ़ी संवेदनशील मुद्दा है, इसीलिए राजनेताओं की जगह सेनाधिकारी ही प्रेस को सम्बोधित करेंगे।

मुख्य बातें:

  • 27 फरवरी को पाकिस्तान के जेट को बड़ी मात्रा में आते देखा, हमारे सुखोई, मिग मिराज ने उनका पीछा किया उनका हमला नाकाम किया: आरजीके कपूर
  • पाक ने कहा कि उसने जानबूझकर ओपन स्पेस पर बम गिराया जबकि वह हमारे मिलिटरी इन्सटॉलमेंट को टार्गेट कर रहे थे
  • पाकिस्तान ने कहा कि हमारा एफ16 नहीं था जबकि हमारे पास सबूत है, उनकी मिसाइल हमारी राजौरी एरिया में मिली
  • पाक ने 26 फरवरी की सुबह और रात में अनप्रवॉक्ड सीजफायर वॉयलेशन किया, हमारे मिलिट्री इंस्टॉलेशन को टार्गेट करने की कोशिश की, हमने उनका हमला नाकाम किया: मेजर जनरल सुरेंद्र सिंह बहल
  • बालाकोट अटैक से आतंकवादियों के कैंप डैमेज हुए हैं इसके सबूत हैं, संख्या के बारे में बताना जल्दबाजी होगी: इंडियन आर्मी
  • पाकिस्तान ने जो टुकड़े दिखाए हैं वह मिग 21 के नहीं हैं, वह पाक के एफ 16 के हैं: इंडियन एयरफोर्स
  • ‘आतंकी ठिकानों पर अटैक करने के सबूत हमारे पास हैं’ : जैश के आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई पर सेना ने कहा कि हमारे पास सबूत हैं कि जो हम जो करना चाहते थे, टारगेट को जितना डिस्ट्राय करना चाहते थे। वो हमने किया। अब सरकार के ऊपर है कि वो एविडेंस देना है कि नहीं।
  • हमारी लड़ाई आतंकवाद के साथ है। जब तक पाकिस्तान इन्हें सपोर्ट करता रहेगा, तब तक हम आतंकी कैंम्पों को टारगेट करते रहेंगे। पिछले दो दिनों में 35 सीजफायर हुए हैं। लेकिन हम दुश्मन को वैसे ही जवाब दे रहे हैं।
  • भारतीय वायुसेना ने कहा, “हम खुश हैं कि हमारा पायलट वापस आ रहा है, एक बार वह आ जाए तब हम देखते हैं कि आगे क्या किया जा सकता है।”
  • ‘पाकिस्तान ने F-16 के इस्तेमाल किया, इसका क्या सबूत है’ – इस सवाल के जवाब पर कहा गया कि जिस मिसाइल से भारत की सीमा पर अटैक किया गया वो सिर्फ F-16 से ही संभव है।
  • प्रेस कॉन्फ्रेंस में एम्राम मिसाइल का टुकड़ा दिखाया गया, जिससे पाकिस्तान ने अटैक किया था। सेना के प्रवक्ताओं ने कहा कि ये मिसाइल सिर्फ F-16 से ही फायर की जा सकती है। पाकिस्तान के पास और दूसरा कोई ऐसा विमान नहीं है जिससे इस मिसाइल को फायर किया जा सके।

पाकिस्तानी मीडिया की कवरेज में दिखा INDIA का खौफ़

बालाकोटा में वायुसेना हमले के बाद से भारत-पाक की स्थिति और भी अधिक संवेदनशील हो गई है। जो दोनों देशों की जनता के मन में कई सवाल खड़े कर रही है। हालाँकि जनता के सभी सवालों का जवाब दोनों देशों की सरकार द्वारा दिया जाना है। इन सवाल-जवाब के सम्प्रेषण के बीच जिस मीडिया को सिर्फ माध्यम के रूप में अपनी भूमिका को निभाना होता है, वही मीडिया हेडलाइन और खबरों के जरिए न सिर्फ पाकिस्तान में बल्कि विश्व भर के अपने पाठकों के लिए माहौल का निर्माण कर रहा है। आज हम ऐसी ही चुनिंदा खबरों पर गौर करेंगे। शुरुआत भारतीय मीडिया से।

भारतीय मीडिया के हाल

एक तरफ जहाँ पर पुलवामा हमले के बाद से भारतीय मीडिया के विशेष समुदाय से जुड़े लोगों के सुर बलिदान हुए जवानों की जाति पूछ-पूछकर बदले की गुहार कर रहे थे। वहीं वायुसेना के एक्शन के बाद से #saynotowar पोस्ट कर रहे हैं। भारत में तो खैर सरकार और मीडिया समूहों (अधिकाँश) के बीच इतनी गहरी खाई है कि वास्तविकता जनता तक आते-आते एक सम्पादकीय का रूप धारण कर लेती है। फिर, जो परोसा जाता है वही पाठक ग्रहण करता है और वही ट्विटर पर ट्रेंड बन जाता है।

पाकिस्तानी मीडिया: खबरों के एंगल से बदलना चाहता है हकीकत

पाकिस्तान इस समय भारतीय वायुसेना के हमले से इतना अधिक घबराया हुआ है कि वहाँ के मीडिया कवरेज में खबरों की हैडिंग और सब-हैडिंग में उसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है।

पाकिस्तान इस बात को अच्छे से जानता है कि भारत में केवल सरकार और सेना ही नहीं बल्कि देश के लगभग हर नागरिक के मन में पाकिस्तान और वहाँ पल रहे आतंकवाद के ख़िलाफ़ नफरत और बदले का भाव पनप रहा है। पूरा विश्व इस समय आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में भारत के समर्थन में आ गया है। चारों ओर से दबाव की स्थिति बनने के कारण, पाकिस्तानी मीडिया अमन शांति की बातें कर रहा है। ताकि ऐसे संदेश देकर वास्तविक मुद्दे को बरगलाया जा सके।

हमले की बात करने वाले इमरान चाहते हैं अब मोदी से बात करना

पाकिस्तानी मीडिया में अगर अभी कुछ देर पहले की ख़बर को देखा जाए तो अंदाजा लगेगा कि कुछ दिन पहले तक बदला लेने की बात करने वाले इमरान खान नरेंद्र मोदी से शांति पर बात करने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तानी मीडिया का लगभग हर समूह यह खबर दिखा रहा है। अपने खबर में वो जिस एंगल को पेश करने की कोशिश कर रहे हैं उसमें यह है कि उनके पीएम बात करने को तैयार हैं लेकिन क्या नरेंद्र मोदी इसके लिए तैयार हैं?

डॉन की खबर का स्क्रीन शॉट

पाकिस्तान मीडिया फिलहाल इस समय पर जोरो-शोरों से प्रमाण देने पर तुला हुआ है कि उसे शांति और अमन चाहिए… शायद पाकिस्तान इस बात को अच्छे से जानता है कि अब भारत किसी भी कीमत पर चुप नहीं रहने वाला है। यह एक ख़बर की बात नहीं है, पूरी वेबसाइट भारत संबंधित खबरों से भरी पड़ी है।

Dawn पाकिस्तान की सबसे मशहूर न्यूज़ वेबसाइट है। देख सकते हैं कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हर ख़बर भारत से संबंधित है।

भारतीय पायलट के वीडियो की खबरें

इस समय पाकिस्तानी मीडिया में भारतीय पायलट के हर बयान को खबरों का हिस्सा बनाया जा रहा है। ऐसा करके पाकिस्तान केवल सहानुभूति इकट्ठा करने का प्रयास कर रहा है ताकि लोग पाकिस्तान की उन्मादी हरकतों को भुलाकर अपना सारा ध्यान उसके अमन-शांति वाले रवैये पर लगाएँ। आपको बता दें कि यूएन में हुई जेनेवा संधि के तहत पाकिस्तान इस बंधन में बंधा हुआ कि उसे हमारे पायलट को भारत को सौंपना ही होगा।

पाकिस्तान ऑब्ज़र्वर का स्क्रीन शॉट

पाकिस्तान ने आज इसकी घोषणा भी कर दी है कि कल (मार्च 1, 2019) को भारतीय पायलट को वापस भेजा जाएगा। और ऐसा इमरान खान के शांति प्रस्ताव के कारण नहीं बल्कि जेनेवा संधि के साथ-साथ भारतीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण मुमकिन हो पाया है।

Alexa रेटिंग के अनुसार thenews.com.pk पाकिस्तान की दूसरी सबसे बड़ी न्यूज़ साइट है। यहाँ भी एक ख़बर को छोड़कर बाकी हर ख़बर भारत के संदर्भ में है।

जेट क्रैश होने की झूठी अफवाहें

पाकिस्तान में इस समय इंडियन एयरफोर्य के जेट को गिराए जाने की फेक तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। जबकि भारत में इन ख़बरों का फैक्टचेक करके पोल खोली जा चुकी है।

जेट क्रैश की झूठी खबरें फैला रहा है पाकिस्तान

पाकिस्तान इस समय उस स्थिति से गुजर रहा है कि अगर वो कुछ करता है तो भी आफ़त है और नहीं करता है तो भी उसके लिए मुश्किल है। अपनी खबरों और हेडलाइन से पूरे विश्व में अमन-शांति के प्रयासों को जगजाहिर करने वाला पाकिस्तान मौक़ा मिलते ही कुछ दिन बाद फिर से अपनी धरती पर जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के प्रशिक्षण के लिए जगह उपलब्ध कराएगा।

tribune.com.pk पर भी हर ख़बर भारत से जुड़ी

ऐसे में अगर वाकई में भारत के साथ पाकिस्तान को बातचीत से मसले को सुलझाना है तो इसमें क्या बुराई है कि वो मसूद अज़हर (जो पुलवामा और प्लेन हाईजैक जैसी घटनाओं से जुड़ा है) को भारत को सौंप दे। पूरा विश्व जानता है कि मसूद भारत का गुनहगार है लेकिन फिर भी पाकिस्तान उसके ख़िलाफ़ किसी प्रकार का एक्शन लेने से कतराता है। क्यों?

पाकिस्तानी मीडिया का इन मुद्दों पर न बोलना बताता है कि वो किस तरह अपने देश की सरकार के दबाव में मीडिया के मूल तत्वों को खत्म कर रही है। जिस मीडिया का काम दुनिया के समक्ष सच्चाई को दिखाना है वो इस समय अपनी हुक्मरानों की वाणी बोलने में लगा हुआ है।

शाबाश जैश-ए-पत्रकारिता, ‘दी लल्लनटॉप’

“तुम कौन सा जहाज उड़ा रहे थे?”
पायलट- “यह मैं आपको नहीं बता सकता।”
“तुम किस मिशन पर थे?”
पायलट- “यह मैं आपको नहीं बता सकता।”

ये स्टेटमेंट हैं पाकिस्तानी सेना से घिरे हुए उस पायलट के, जिसके भारतीय होने का दावा कल से पाकिस्तान की सेना कर रही है और साथ ही कह रही है कि पाकिस्तानी सेना उसकी अच्छे से देखभाल कर रही है। (ताज़ा खबरों के अनुसार उन्हें भारत को कल सौंपा जाएगा।)

यह तो है पाकिस्तान की सूचनाओं का हिस्सा। लेकिन अब देखते हैं भारत के ऐसे मीडिया गिरोह की हेडलाइन, जो केजरीवाल की तरह ‘मम्मी कसम’ खाकर ‘एकदम मारक मजा’ देने का वायदा करते हैं-

लल्लनटॉप हेडलाइन 1 – “पायलट अभिनन्दन की पत्नी तन्वी …”
लल्लनटॉप हेडलाइन 2 – “विंग कमाण्डर अभिनन्दन के पिता और पत्नी भी एयरफोर्स में रह चुके हैं”
इस से भी ज्यादा ‘मारक मजा’ है, तीसरी हेडलाइन में-
लल्लनटॉप हेडलाइन 3 –
“क्षमा करें, पृष्ठ उपलब्ध नहीं है” (जो कि शायद इसलिए डिलीट कर दी गई होगी क्योंकि उसमें मारक मजा कम रहा होगा)

पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए पायलट पर डीप रिसर्च करते हुए दी लल्लनटॉप यूट्यूब का भी सहारा ले रहा था

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान द्वारा कल जारी किए गए इस वीडियो की ‘पॉपुलेरिटी’ और ‘रीच क्षमता’ भाँपकर ही शायद ‘दी लल्लनटॉप’ ने अपने पाठकों को ‘मारक मजा’ देने के लिए विदेश मंत्रालय और अन्य आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार ना करते हुए एक कदम जाकर अपनी ‘संवेदनशीलता’ का परिचय दिया और ‘स्वयं सरकार’ बनकर पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए पायलट से सम्बंधित सारी जानकारियाँ अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर डालीं।

दी लल्लनटॉप’ पायलट से सम्बंधित सभी जानकारियाँ सार्वजानिक कर चुका था
‘मारक मजा ‘देने की अपनी कसम निभाती ‘दी लल्लनटॉप’ की खबर

सूचना के इस समय में, सतर्कता और संवेदनशीलता ही हमारा सबसे बड़ा रक्षाकवच हो सकते हैं। उस पर हमारी जिम्मेदारी तब और ज्यादा बढ़ जाती है, जब हम समाज में अफवाह-साथ भ्रामक और संवेदनशील जानकारी भेजने का माध्यम आसानी से बन सकते हैं। भारत के गृह मंत्रालय ने भी पुलवामा हमले के बाद तमाम मीडिया चैनलों और संस्थानों को संवेदनशील खबर फ़ैलाने से रोकने के दिशा निर्देश दिए थे।

सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों का मानना है कि वर्तमान में ‘दी लल्लनटॉप’ खबरों को ‘जरा हट कर’ पेश करने के कारण बहुत लोकप्रिय है। जिसमें हिटलर के जननाँग की जानकारी से लेकर आसमान से गिरने वाली लैट्रिन के भविष्य से सम्बंधित सभी जानकारियाँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। 

देश में लगातार घटने वाली आतंकवादी घटनाओं के कारण देश आज एक प्रकार के अघोषित युद्ध से गुजर रहा है। ऐसे में इस मीडिया पोर्टल का इस प्रकार से, बिना किसी पुख्ता सबूत के ही सेना और किसी भी सैनिक से जुड़ी गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करना यह बताता है कि ये पत्रकारिता के गिद्ध हैं, जिनकी जिम्मेदारी बस अपनी दुकान चलाने और सरकार के खिलाफ गाली-गलौज करने तक ही सीमित है।  

हालाँकि, लोगों के आक्रोश और विरोध के कारण शायद पायलट के परिवार और पिछली जानकारियों से सम्बंधित खबर को वेबसाइट से हटा लिया गया था। लेकिन तब तक यह खबर जरूरत से ज्यादा नुकसान कर चुकी थी। मानवीय स्वभाव के कारण लोगों ने जिज्ञासावश इस खबर को डिलीट किए जाने से पहले ही व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी से लेकर फेसबुक पेजों पर वायरल कर के खूब प्रचारित कर दिया था। यूट्यूब पर डाली गई इस सूचना के वीडियो को करीब 4 लाख से ज्यादा लोग देख चुके थे।

पाठकों के विरोध के बाद आज सुबह इस खबर को डिलीट कर दिया गया, URL में आप देख सकते हैं

कल ही मीडिया में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पाकिस्तान भारतीय सेना से सम्बंधित सूचनाएँ जुटाने के लिए इंटरनेट से लेकर मोबाइल तक पर जानकारी तलाश रही है। जिस पर ग्राम वासियों ने बताया कि वो देश के नागरिक होने के नाते अपनी जिम्मेदारी बखूबी जानते हैं और उन्होंने मोबाइल पर आने वाली कॉल्स को कोई भी जानकारी नहीं बताई।

अब सवाल ये है कि क्या देश का नागरिक होने के नाते एक गाँव में रहने वाले व्यक्ति की संवेदनशीलता और जागरूकता की तुलना शहर में बैठे इन पढ़े-लिखे लोगों से की जा सकती है?

AC कमरों में बैठकर नेताओं के बयानों को तोड़ना-मरोड़ना, अपने ‘प्रेरणास्रोतों’ के कदमों पर चलते हुए भ्रामक जानकारियाँ लिख कर उनके प्रॉपेगैंडा को दिशा देना और MEME बनाने वाले पेजों पर निबंध लिखना ही अगर ‘दी लल्लनटॉप’ गिरोह की पत्रकारिता है, तो वाकई में ये ‘अँधेरे को चीरती हुई सनसनी’ बनकर मारक मजा देने की अपनी कसम पर खरा उतर रहा है। शाबाश जैश-ए-लल्लनटॉप!

पाकिस्तान द्वारा जारी किए गए वीडियो से बढ़ रहे आक्रोश को देखते हुए OpIndia.com संपादक नूपुर शर्मा ने जिम्मेदारी लेते हुए ट्विटर पर घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान द्वारा भड़काने और उकसाने के उद्देश्य से जारी की जाने वाली इस प्रकार की किसी भी अफवाह, सूचना और वीडियो को शेयर नहीं करेंगे।

सीमा के उस पार की चुनौतियों को हम सब जानते हैं लेकिन सीमा के भीतर के आतंकवाद के इस स्वरुप से लड़ना हमारी मुख्य चुनौती है। यदि पत्रकारिता से जुड़े हुए सभी लोग समाज के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को वास्तव में समझें और निभाएँ, तो शायद देश की सेवा में इतना योगदान भी हिमालयी योगदान माना जा सकता है।

बड़ी कूटनीतिक जीत: पायलट शुक्रवार को भारत के हवाले, इमरान खान ने Pak संसद में कहा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारतीय पायलट को लौटाने की घोषणा की है। इमरान खान ने यह बात पाकिस्तानी संसद में कही और कहा कि ये उनकी तरफ से शांति के लिए एक पहल की तरह देखा जाए। मीडिया की ख़बरों के अनुसार भारतीय पायलट को शुक्रवार को भारत को सुपुर्द किया जाएगा। ज्ञात हो कि बुधवार को पाकिस्तानी फ़ाइटर का पीछा करते हुए भारतीय मिग ने उसे गिरा दिया था, लेकिन पाकिस्तानी सीमा में पहुँचने के कारण उनके विमान को भी क्षति पहुँची और उन्हें पाकिस्तान ने पकड़ लिया।  

इससे पहले भारतीय रक्षा मंत्रालय ने यह साफ़ कर दिया था कि पाकिस्तान के मिलिट्री ठिकानों पर घुसपैठ के बदले उसने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय पायलट से बुरे व्यवहार को लेकर मंत्रालय ने पाकिस्तान पर जेनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। इन सबसे पाकिस्तान बैकफुट पर नज़र आ रहा है क्योंकि भारतीय पायलट की रिहाई को लेकर मोलभाव के उसके दिवास्वप्न को तगड़ा झटका लगा है। भारत ने साफ़ कर दिया था कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार तत्काल प्रभाव से अपने पायलट की रिहाई चाहता है और वह भी बिना किसी शर्त के।

मोदी सरकार के कूटनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा घिरे पाकिस्तान के लिए और कोई चारा बचा भी नहीं था। जेनेवा कंवेंशन के उल्लंघन का मतलब था पाकिस्तान का अलग-थलग पड़ जाना। अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान इतना बड़ा खतरा मोल लेने को शायद ही कभी तैयार था। इन सब के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में US, UK और फ्रांस के द्वारा जैश-ए-मुहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को ब्लैक-लिस्ट करने का प्रस्ताव भी पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संकेत था।

आपको बता दें कि 14 फरवरी को पुलवामा आत्मघाती हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान को चौतरफा घेरा था। क्योंकि इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मुहम्मद ने ली थी। और जैश के आतंक का पूरा केंद्र ही पाकिस्तान स्थित है।

इन सब के बीच भारतीय खुफिया एजेंसियों को जैश के द्वारा भारत पर एक और हमले की पुख्ता जानकारी मिली थी। इसी जानकारी के आधार पर भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी की रात को पाकिस्तान में घुस कर बालाकोट स्थित जैश के प्रमुख अड्डे को निशाना बनाया और करीब 300 आतंकियों का खात्मा किया था। इसके विपरीत 27 फरवरी को पाकिस्तानी एयर फोर्स ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय एयर फोर्स ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान का एक F-16 विमान मार गिराया। इस लड़ाई में IAF का भी एक मिग-21 दुश्मन का निशाना बना और उसके पायलट पाकिस्तान के कब्जे में हैं, जिन्हें छोड़ने की बात इमरान खान ने पाकिस्तानी संसद में की।

पायलट को लेकर ब्लैकमेल नहीं होगा भारत, पाक से इस पर कोई मोल-भाव नहीं

पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा किए गए ‘एयर स्ट्राइक’ के बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमे उसके एक लड़ाकू विमान एफ-16 को मार गिराया गया। इस प्रक्रिया में एक भारतीय पायलट पाकिस्तान के कब्ज़े में आ गया। पाकिस्तान ने हिरासत में लिए गए पायलट का वीडियो सोशल एमडीए पर वायरल कर दिया, जिसके बाद लोगों ने उसे जेनेवा कॉन्वेंशन का पालन करने की हिदायत दी। इसके अनुसार, युद्धबंदियों (POW) के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए। उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। साथ ही सैनिकों को कानूनी सुविधा भी मुहैया करानी होती है।

सबसे पहली बात तो यह कि भारतीय पायलट को पाकिस्तानी सेना दुबारा हिरासत में लिए जाने वाला वीडियो वायरल कर पाकिस्तान ने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। पाकिस्तानी अधिकारी पहले भी दावा कर चुके हैं कि हिरासत में लिए गए पायलट के साथ इज्ज़त वाला व्यवहार किया जाएगा। बाद में वायरल हुए एक वीडियो में यह दिखाने की कोशिश भी की गई की पायलट सकुशल हैं और चाय पी रहे हैं। असल में, इस मामले में पाकिस्तान के हाथ बँध चुके हैं। लेकिन फिर भी पाकिस्तान ने एक अंतिम प्रयास करते हुए हिरासत में लिए गए पायलट को भारत के साथ मोलभाव करने के लिए इस्तेमाल करना चाहा।

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने यह साफ़ कर दिया है कि पाकिस्तान के मिलिट्री ठिकानों पर घुसपैठ के बदले उसने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। भारतीय पायलट से बुरे व्यवहार को लेकर मंत्रालय ने पाकिस्तान पर जेनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। इन सबसे पाकिस्तान बैकफुट पर नज़र आ रहा है क्योंकि भारतीय पायलट की रिहाई को लेकर मोलभाव के उसके दिवास्वप्न को तगड़ा झटका लगा है। भारत ने साफ़ कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार तत्काल प्रभाव से अपने पायलट की रिहाई चाहता है और वह भी बिना किसी शर्त के।

इस से दो चीजें जो निकल कर सामने आती है, वो भारत के रुख को काफ़ी स्पष्ट कर देती हैं। सबसे पहली बात तो यह कि भारत ने कंधार प्लेन हाईजैक से सीख ली है और किसी भी तरह के दबाव के सामने झुकने से साफ़ इनकार कर दिया है। कंधार आतंकियों और भारतीय गणराज्य के बीच का मसला था और पाकिस्तान इसमें एक किरदार होने के बावजूद बच कर निकल सकता था। लेकिन, भारतीय पोलोट वाला मसला सीधे दो देशों के बीच का है। अतः भारत आश्वस्त है कि अंतरराष्ट्रीय सस्तर पर पहले से ही अलग-थलग पड़ चुके पाकिस्तान के पास इसे लेकर दम दिखाने की ताक़त नहीं बची है। तभी भारत ने ‘बिना किसी शर्त तत्काल रिहाई’ की माँग की है।

दूसरी बात यह कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने फिलहाल काउंसलर एक्सेस लेने से भी इनकार कर दिया है। यह कुलभूषण जाधव वाले मामले से अलग है जहाँ भारत ने काउंसलर एक्सेस के लिए काफ़ी मशक्कत की थी। कुलभूषण जाधव बस एक भारतीय नागरिक हैं जिनपर पाकिस्तान ने जासूसी का आरोप लगाया और उन्हें सजा सुना दी गई। इस मामले में ऐसा नहीं है। भारत ने अपने पायलट को वापस लाने के लिए कूटनीतिक पहल शुरू कर दी है लेकिन पाकिस्तान के सामने झुकने या इसे लेकर किसी भी प्रकार के मोलभाव से साफ़ इंकार कर दिया है।

तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आतंकवाद पर भारत का रुख नहीं बदलेगा- ऐसा स्पष्ट सन्देश दे दिया गया है। भारतीय पायलट को ‘Bargaining Chip’ की तरह प्रयोग कर के तनाव कम करने का सपना देख रहे पाकिस्तान को यह साफ़ कर दिया गया है कि दोनों देशों के बीच प्रमुख मसला आतंकवाद है और पाकिस्तान स्थित आतंकियों पर कार्रवाई (बातचीत के लिए जो शर्त तय की गई है) के बिना कोई बातचीत नहीं होगी। मुद्दा अभी भी पुलवामा है। मुद्दा अभी भी पुलवामा हमले को लेकर पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठन जैश व उसके सरगना मसूद अज़हर पर कार्रवाई का है।

कुल मिलाकर देखें तो भारत कोई ‘डील’ नहीं करेगा। अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन नहीं करने पर पाकिस्तान को सबक सिखाने की भी पूरी तैयारी है। जिस तरह से अपने एयरस्पेस पर निगरानी रखते हुए पाकिस्तान ने कमर्सियल फ्लाइट्स को बंद कर रखा है, उसे पता है कि अगर जेनेवा कन्वेंशन के आधार पर काम नहीं होता है तो भारत के पास कड़ी सैन्य कार्रवाई करने का एक बड़ा मौक़ा मिल जाएगा- जो पाकिस्तान ‘afford’ नहीं कर सकता। गेंद पाकिस्तान के पाले में ही है लेकिन उसके पास फुल टॉस फेंकने के अलावा कोई चारा नहीं है।

प्रिय इमरान, अगर सीरियस हो तो कुछ ढंग की बात तो करो

भारत और पाकिस्तान के बीच अभी जो माहौल है, उस पर शायद हर भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक के पास ठीक-ठाक सूचना है। पुलवामा में आतंकी हमला हुआ, जैश ने ज़िम्मेदारी ली, भारत ने पाकिस्तान स्थित जैश के ठिकाने को एयर स्ट्राइक से तबाह कर 300-350 आतंकी मार गिराए, पाकिस्तान ने भारतीय आकाश में घुसने की कोशिश करते हुए सैन्य ठिकानों का निशाना बनाया, भारतीय लड़ाकू विमान ने उनका पीछा किया और एक F16 जेट को मार गिराया, इसमें भारतीय मिग भी क्षतिग्रस्त हुआ और हमारे एक पायलट को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। वो पायलट अभी पाकिस्तान के क़ब्ज़े में है, जैसा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमारती खान ने बताया। 

परसों इमरान खान जिस लाल गमछे के साथ मीटिंग में दिखे और कुछ बोला नहीं, उससे लग रहा था कि उनकी नींद गलत समय पर टूट गई। लेकिन ख़ुमारी से बाहर आने तक कल का वाक़या हो चुका था, जिसमें एक-एक विमान गँवाने के बाद, भारत का एक पायलट लापता बताया गया, जो कि पाकिस्तान द्वारा जारी संदेश में उनके क़ब्ज़े में कहा गया। 

ज़ाहिर है कि इमरान के लिए ये मौका एक बेहतर स्थिति में होने जैसे था, अब इमरान बारगेनिंग पोजिशन में थे। साथ ही, जैसा कि पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है, जब उसे डर सताता है, तब वो शांति की बात करने लगता है, तो इमरान ने अपने तालिबानी चेहरे पर बहुत ही शांत और सभ्य मेकअप पोता, और शांति की बात करने लगे। अचानक से एक आतंकी देश का कप्तान दार्शनिक हो गया जो युद्ध की विभीषिका पर ज्ञान देने लगा। 

नई खबरें आईं कि अमेरिका के साथ, ब्रिटेन और फ़्रान्स ने पाकिस्तान से आतंक फैलाकर अशांति और हिंसा उत्पन्न करनेवाले जैश के आतंकी सरगना मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ब्लैकलिस्ट कराने की बात की है। भारत ने कई बार इस संदर्भ में बात की है, लेकिन हर बार चीन ने उस पर असहमति जताते हुए, उसे रोक दिया है। 

मेरी इमरान खान से यही अपील है कि अगर आप इस मुद्दे को लेकर, इस युद्ध के बाद की विभीषिका के दर्शन शास्त्र को लेकर गम्भीर हैं, तो फिर आप इस पर कुछ ऐसा कीजिए जिससे लगे कि आप पुरानी सरकारों की तरह अपनी आर्मी के इशारे पर नाच नहीं रहे। आप कुछ तो ऐसा कीजिए कि लगे पाकिस्तान सही में नया पाकिस्तान बनना चाहता है। अगर आपसे नहीं हो रहा, तो कम से कम सच तो बोलिए कि आपको डर लग रहा है कि अगर भारत ने अपने यहाँ के हजार-दो हजार लोगों की मौत की परवाह न करते हुए, आपको घेरकर मारना शुरू किया तो आप 1947 में पहुँच जाएँगे। 

राजनीति के भी हिसाब से देखा जाए तो जिस आतंकी का आपने, आपके देश ने इतने समय तक लाभ उठाया, उसके कारण अगर आपके देश के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिह्न लग रहा है तो उसे टिशू पेपर की तरह इस्तेमाल करके फेंकने में क्या बुराई है? अगर आप जंग नहीं चाहते, अगर आपको लगता है कि युद्ध में कोई नहीं जीतता, तो फिर या तो मसूद अज़हर की लोकेशन हमें दे दीजिए कि भारतीय वायु सेना रात में आए और उठाकर ले जाए, या आप ही बॉर्डर के पास उसे लेकर आइए, और भारतीय सेना के सुपुर्द कर दीजिए। 

लोकेशन बताकर भारतीय वायुसेना से उठवाने में आपकी असेम्बली में थोड़ी फ़ज़ीहत ज़रूर होगी जैसे कि ओसामा के समय हुई थी, लेकिन पाकिस्तान को तो इसकी आदत है, तो बर्दाश्त कर लीजिए क्योंकि आपको शांति चाहिए। हमें भी शांति चाहिए। या फिर, उसे बॉर्डर के आस-पास छोड़ दीजिए कि किसी को पता न चले कि कहाँ से पकड़ा गया। 

हो सकता है कि मेरी ये अपील मूर्खतापूर्ण लगे, लेकिन ऐसे आतंकी को भारत को सौंप देने में दोनों देशों की भलाई है। मसूद अज़हर कोई लंगर तो चलाता नहीं पाकिस्तान में, और पाकिस्तान स्वयं कहता है कि उसे सौ बिलियन डॉलर और 70,000 पाकिस्तानियों का नुकसान झेलना पड़ा है आतंक के कारण। फिर जैश जैसा संगठन वहाँ है ही क्यों? 

क्या इमरान नहीं जानते कि जैश-ए-मोहम्मद के बाक़ायदा बोर्ड लगे हुए हैं पाकिस्तान में? फिर ये दोगलों जैसी बातें क्यों करता है इमरान? स्वीकार लो कि तुम एक नकारा प्रधानमंत्री हो, जिसके हाथ में न तो सत्ता है, न आर्मी है और न ही वो तमाम आतंकी जो तुम्हारी बात सुनते हों।

अगर, सीरियस हो, तो गम्भीरता से सोचो। अगर पाकिस्तान का भला चाहते हो, क्योंकि युद्ध हुआ तो भारत तो खड़ा हो जाएगा, पाकिस्तान जो पहले से ही गिरा हुआ है, भीख से चल रहा है, वो भीख माँगने लायक भी नहीं रहेगा, तो ऐसे डिस्पोजेबल आतंकियों को बाहर का रास्ता दिखाओ। 

कूटनीति यही कहती है कि अगर छोटे से नुकसान झेलने से बहुत बड़ा ख़तरा टल जाए, तो वो नुकसान सहर्ष झेलना चाहिए। पाकिस्तानियों में ‘अल्लाह रहम करे’, ‘अल्लाह ख़ैर करे’ जैसी बातें आम हो गई हैं क्योंकि भारत की तरफ से रूटीन एक्सरसाइज़ भी होती है तो कराची, रावलपिंडी, स्यालकोट, लाहौर में हाय अलर्ट घोषित हो जाता है।

कल रात ट्विटर पर जिस तरह से पाकिस्तानियों के ‘रहम करे’ वाले ट्वीट बरस रहे थे, उससे यही ज़ाहिर होता है कि आम पाकिस्तानी को भी पता है कि भारत इस बार रुकने वाला नहीं। चाहे अपनी किताबों में जितनी बार तुम ये पढ़ा दो कि तुमने भारत से चार लड़ाइयाँ जीती हैं, सत्य आज भी यही है कि तुम्हारे सबसे बड़े और तथाकथित मॉडर्न शहरों में चौबीस घंटे बिजली नहीं होती और वहाँ के लोग पानी की कमी से जूझते हैं। वहीं भारत, अपने गाँवों में भी चौबीस घंटे बिजली लाने की तरफ अग्रसर है।

ये कोई भावनात्मक पोस्ट नहीं है कि मैं भारतीय हूँ तो पाकिस्तानियों को नीचा दिखाना चाहता हूँ। पाकिस्तानी की आर्थिक स्थिति क्या है इसकी जानकारी सबको है, और वहाँ के प्रधानमंत्री को ऑस्टेरिटी के लिए अपनी कारों के क़ाफ़िले से लेकर भैंस और गधे तक बेचने पड़ रहे हैं। अगर स्थिति अच्छी होती तो चीन का युआन पाकिस्तान में करेंसी के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाता। 

सत्य यही है कि पाकिस्तान यह भलीभाँति जानता है कि यह युद्ध अगर हुआ तो निर्णायक होगा। यह युद्ध अगर हुआ तो वो पाकिस्तान के अंत पर ही जाकर रुकेगा। क्योंकि भारत के पास अब आर्थिक क्षमता भी है, और वैश्विक सहमति भी कि ऐसे मौक़ों पर हमें अपने धरती पर हुए हमलों का बदला लेने की आज़ादी है। 

इसलिए, इमरान खान के लिए सबसे अच्छा रास्ता यही है कि पहले तो भारतीय पायलट को जेनेवा संधि के मुताबिक़ भारत को लौटाया जाए, उसे किसी ‘डील’ के चक्कर में न रोके। और दूसरा काम यह हो कि संयुक्त राष्ट्र संघ में जब मसूद अज़हर को ब्लैकलिस्ट करने की बात हो, तो उस पर चीन को आपत्ति जताने से रोकने के बाद, उसे भारत के पास किसी भी तरीके से भेज दिया जाए। 

अगर ऐसा नहीं होता है, तो ये तनाव युद्ध में बदलेगा। जब युद्ध होगा तो भले ही भारत को कुछ क्षति पहुँचे, लेकिन पाकिस्तान को अपनी अभी की ही लड़खड़ाती स्थिति में भी आने के लिए शायद दशकों लग जाएँगे। 

पुलवामा आतंकी का शव कहाँ है? मोदी ने पुलवामा हमला कराया: कॉन्ग्रेस नेता

पुलवामा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले को लेकर चल रही राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। अंध-विरोध पर आधारित बयानबाज़ी के चक्कर में ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर भी कुछ नेता बेतुके बयान दे रहे हैं। इस सूची में नया नाम गोवा कॉन्ग्रेस के नेता चेलाकुमार का है। उन्होंने न सिर्फ पुलवामा हमले को लेकर मोदी पर निशाना साधा बल्कि कहा कि जैसे मोदी ने गोधरा की प्लानिंग की थी, उसी तरह पुलवामा को भी अंजाम दिया गया। भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा ने उनके इस बयान को लेकर राहुल गाँधी को आड़े हाथों लिया। चेलाकुमार ने पुलवामा पर विवादित बयान देते हुए कहा:

लोग अब मूर्ख नहीं हैं। यह आदमी किसी भी हद तक जाएगा, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह एक साथ है… यहाँ तक कि हाल ही में वीडियो क्लिपिंग भी सामने आई हैभाजपा द्वारा गोधरा की घटना की भी योजना बनाई गई थी, इसी तरह की अन्य घटनाओं की भी। ऐसा ख़ुद उन्हीं के आदमी ने कहा है। किसी कॉन्ग्रेसी नेता ने ऐसा नहीं कहा है, लेकिन बीजेपी सर्कल के किसी व्यक्ति ने दावा किया है कि यह विस्फोट भाजपा ने कराया था। मैं उनका नाम नहीं लूंगा। अगर ऐसा है तो पुलवामा की यह घटना भाजपा ने ही कराई होगी? उन्होंने सभी जवानों के शरीर की पहचान कर ली है। आतंकवादी का शव कहाँ है?”

पुलवामा हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद नामक पाकिस्तानी आतंकी संगठन ने ली थी। मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा ब्लैकलिस्ट कराने के लिए भारत लगातार प्रयास कर रहा है। ऐसे में, इस तरह के असंवेदनशील बयान का आना और ऐसे नेताओं पर पार्टियों द्वारा कार्रवाई न करना शर्म का विषय है। उधर पाकिस्तान रेडियो ने भी अपना पक्ष सही साबित करने के लिए राहुल गाँधी व अन्य विपक्षी नेताओं के संयुक्त बयानों का सहारा लिया।

इसी तरह हाल ही में केरल के एक वामपंथी नेता ने भी पुलवामा हमले को लेकर बेहूदा सवाल खड़े किए थे। बालाकृष्णन ने कहा था कि आगामी आम चुनाव की प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए ‘एयर स्ट्राइक’ की गई। उन्होंने इसे भाजपा और संघ की चाल बताया था। उन्होंने कहा था कि ये दोनों मिलकर युद्ध भड़काने के लिए ऐसी हरकतें कर रहे हैं। उन्होंने मोदी सरकार की कश्मीर नीति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि मुद्दे को सुलझाने की बजाय कश्मीरियों को दुश्मन बनाया जा रहा है।

‘खेलो इंडिया ऐप’ लॉन्च पर बरखा की बेकार आलोचना पर सायना नेहवाल का करारा जवाब

प्रधाममंत्री मोदी द्वारा बुधवार (फरवरी, 27 2019) को नेशनल यूथ पार्लियामेंट फेस्टीवल के मौके पर नई दिल्ली में ‘खेलो इंडिया ऐप’ को लॉन्च किया गया था। इस एप्लीकेशन का उद्देश्य देश के लोगों के भीतर खेल और फिटनेस को लेकर जागरूकता फैलाने से संबंधित है। लेकिन, इस ऐप के लॉन्च से कुछ विशेष समुदाय के लोग बहुत आहत हुए और उन्होंने ट्वीट के ज़रिए पीएम को बताया कि उन्हें कुछ समय तक के लिए इसे टाल देना चाहिए था।

इस प्रकार की सलाह देने वालों में एक नाम बरखा दत्त का भी है। जिन्होंने ट्वीट किया है कि उन्हें लगता है कि पीएम मोदी को इस ऐप को लॉन्च करने का कार्यक्रम कुछ समय के लिए टाल देना चाहिए था क्योंकि इस समय हमारा एक युवा पायलट पाकिस्तान के पास है।

बरखा के इस ट्वीट के जवाब में भारत की बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल ने लिखा कि खेलो इंडिया ऐप की लॉन्चिंग यूथ पार्लियमेंट फेस्टीवल का हिस्सा थी। इसकी लॉन्चिंग का मकसद युवाओं को सांस्कृतिक, भौगोलिक और आर्थिक रूप से जोड़ना था। सायना ने लिखा कि सभी को एक जुट करने के लिए इससे अच्छा समय और क्या हो सकता है। सायना ने बरखा की इस आलोचना को पूर्ण रूप से अनावश्यक बताया।

इस ऐप की लॉन्चिंग पर खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का कहना है कि भारत ने खेलों की दिशा में आज लंबी छलांग लगाई है। साथ ही उन्होंने इस ऐप को देश में फिटनेस और खेल के पहलू के लिहाज़ से ज़रूरी बताया। उनका मानना है कि इससे छोटी उम्र में प्रतिभा की पहचान करने और उसे निखारने में मदद मिलेगी।

बरखा के इस ट्वीट पर न केवल सायना ने बल्कि बहुत से लोगों ने खेलो इंडिया ऐप के लॉन्च का समर्थन किया और उनके ट्वीट को अनावश्यक बताया। दरअसल, जिस समय प्रधानमंत्री को विंग कमांडर के पाकिस्तान में होने की सूचना दी गई, उस समय वह ऐप लॉन्च हो चुकी थी और प्रधानमंत्री जनता को संबोधित कर रहे थे। लेकिन, जैसे ही उन्हें यह ख़बर मिली उन्होंने जल्द से जल्द कार्यक्रम खत्म किया और विज्ञान भवन पहुँचे।

लेकिन, बरखा दत्त और पत्रकारिता के गिरोह से जुड़े कुछ ख़ास लोग इसकी आलोचना करने से बाज नहीं आ रहे हैं। शाह फैसल ने अपने बौद्धिक स्तर पर इस ऐप के उपयोग सिर्फ़ PubG खेलने तक के लिए ही सोच पाए।