Home Blog Page 6101

मुज़फ़्फ़रनगर दंगे: मुज़स्सिम, मुज़म्मिल, फ़ुरकान, नदीम, जहाँगीर, अफ़ज़ल, इक़बाल को आजीवन कारावास

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के 7 आरोपितों को कोर्ट ने आज 8 फ़रवरी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा इन दोषियों पर दो-दो लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। बता दें कि जुर्माने की इस धनराशि में से अस्सी प्रतिशत पीड़ित परिवारों को दिया जाएगा।

6 फरवरी को अतिरिक्त ज़िला न्यायाधीश कोर्ट ने इन दंगे के जुड़े इन 7 आरोपितों को दोषी करार दिया था। जिसके बाद न्यायाधीश ने इन सभी आरोपितों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा दिया गया। इस मामले में दोषियों को सज़ा सुनाने के लिए कोर्ट ने 8 फ़रवरी की तारीख तय की थी।

बता दें कि साल 2013 में 27 अगस्त को जानसाठ कोतवाली क्षेत्र के कवाल गाँव में मलिकपुर के गौरव और उसके ममेरे भाई सचिन की हत्या कर दी गई थी।

इन दोनों ही लोगों की जघन्य हत्या में ये सभी सात आरोपित शामिल थे। अतिरिक्त ज़िला न्यायाधीश ने जिन सात लोगों को दंगे के लिए दोषी ठहराया है वे सभी एक ही सम्प्रदाय विशेष से हैं।

इन सभी आरोपितों के नाम क्रमश: मुज़स्सिम, मुज़म्मिल, फ़ुरकान, नदीम, जहाँगीर, अफ़ज़ल और इक़बाल हैं। इन सभी को कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

कवाला गाँव की इस घटना के बाद मुज़फ़्फ़रनगर शहर और शामली में भी दो सम्प्रदाय के बीच दंगे हुए थे। इस दंगे में लगभग 60 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे।

इस वीभत्स घटना में कुल 8 आरोपित थे, जिनमें एक आरोपित शाहनवाज़ की मौत पहले ही हो चुकी है।

तो अयोध्या में राहुल गाँधी और ‘गौ भक्त’ कमलनाथ बनवाएँगे भव्य राम मंदिर…

राहुल गाँधी अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण करवाएँगे। जी हाँ, चौंकिए मत क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी के पोस्टर्स में ऐसा ही दावा किया गया है। इन पोस्टर्स में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को भगवान श्री राम तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को ‘गौ भक्त’ हनुमान के रूप में दिखाया गया है। पूरे भोपाल शहर में ऐसे पोस्टर्स की भरमार है। बता दें कि राहुल आज शुक्रवार (फरवरी 8, 2019) को भोपाल दौरे पर हैं जहाँ वह किसानों को सम्बोधित करेंगे।

राहुल गाँधी के दौरे से पहले प्रदेश कॉन्ग्रेस द्वारा इस तरह के पोस्टर्स लगवाना पार्टी के सॉफ्ट-हिंदुत्व दृष्टिकोण को दिखाने की कोशिश है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस का कोई भी नेता इस बारे में बयान देने के लिए तैयार नहीं है। इन पोस्टरों में राहुल गाँधी नरेंद्र मोदी पर निशाना लगा रहे हैं। जी हाँ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रावण के रूप में दिखाया गया है। मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस मीडिया सेल के संयोजक नरेंद्र सालूजा ने कहा:

“कॉन्ग्रेस धर्म आधारित राजनीति में विश्वास नहीं करती है। यह पार्टी ने नहीं, बल्कि हमारे उत्साही कार्यकर्ताओं ने किया है। उन्होंने ही ऐसे होर्डिंग्स लगाए हैं।”

इन पोस्टरों में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, वर्तमान उप-मुख्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई कॉन्ग्रेस नेताओं के चित्र भी हैं। भोपाल के जम्बूरी मैदान में लगे ऐसे पोस्टरों में राम मंदिर को लेकर लिखा गया है:

“सर्वसम्मति से अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनेगा। ऐसे राम भक्त आदरणीय राहुल गाँधी जी का झीलों की नगरी भोपाल में हार्दिक अभिनन्दन। स्वागत है।”

ज्ञात हो कि बुधवार (फरवरी 6, 2019) को अमित शाह ने अलीगढ की रैली में कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी और बसपा पर निशाना साधा था। भाजपा अध्यक्ष ने कहा था:

“BJP का मत साफ है कि राम मंदिर अयोध्या में ही बनेगा। एसपी, बीएसपी और कॉन्ग्रेस को अपना एजेंडा साफ करना चाहिए, वह लोग राम मंदिर बनवाना चाहते हैं या नहीं।”

इस पोस्टरों को लेकर कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष प्रभात झा ने कहा:

“सिर्फ़ पोस्टरों में ही क्यों? कॉन्ग्रेस को आधिकारिक रूप से घोषणा करनी चाहिए कि वे राम मंदिर का निर्माण करेंगे, अगर वे इसे लेकर गंभीर हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उनसे अपना रुख़ स्पष्ट करने को कहा है। ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को भगवान राम की तुलना में राहुल गाँधी में अधिक विश्वास है। भगवान राम में आस्था रखने वाला कोई भी व्यक्ति कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को हिंदू देवता के रूप में चित्रित करने के लिए पोस्टर नहीं लगाएगा, जैसा कि उन्होंने पटना में किया था।”

ज्ञात हो कि कुछ ही दिनों पहले पटना में भी ऐसे ही पोस्टर्स लगाए गए थे, जिनमे उन्हें भगवान का रूप बताया गया था। इसके अलावा अन्य पोस्टरों में कॉन्ग्रेस की नवनियुक्त महसचिव प्रियंका गाँधी को भी माँ दुर्गा के रूप में दिखाया जा सकता है। ऑपइंडिया ने फीचर आर्टिकल के ज़रिए आपको ऐसी कई पोस्टरों से रूबरू कराया था।

ममता को झाँसी की रानी कहना लक्ष्मीबाई के ऊपर गाली होगी, हाँ पूतना हो सकती हैं: गिरिराज सिंह

सीबाआई मामले को लेकर बीजेपी और टीएमसी के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों ही दलों के नेताओं की तरफ़ से बयानों का दौर पिछले कुछ दिनों से चल रहा है। भाजपा ममता बनर्जी को तानाशाह बता रही है, वहीं दूसरी तरफ़ टीएमसी के नेता ममता को रानी लक्ष्मीबाई के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

मामता बनर्जी को रानी लक्ष्मीबाई कहे जाने पर भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बयान दिया है। गिरिराज सिंह ने अपने बयान में कहा है, “ममता को झाँसी की रानी कहना लक्ष्मीबाई के ऊपर एक तरह से गाली होगा।”

उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी लक्ष्मीबाई तो नहीं, हाँ पूतना जरूर हो सकती हैं।” यही नहीं केंद्रीय मंत्री ने ममता के तानाशाही की तुलना किम जोंग से की है। केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि रोहिंग्या व बंग्लादेशी घुसपैठी को समर्थन देकर कोई रानी लक्ष्मीबाई नहीं हो सकती है। गिरिराज सिंह की मानें तो ममता ने पूरे बंगाल को तबाह करके रख दिया है। जो भी ममता के ख़िलाफ़ मुँह खोलता है, उसकी हत्या कर दी जाती है।

जानकारी के लिए बता दें कि पिछले दिनों पुरुलिया में ममता बनर्जी सरकार द्वारा हेलिकॉप्‍टर के लैंडिंग की अनुमति नहीं देने पर यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने ट्वीट कर ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा था।

सीएम योगी ने ममता के नहीं चाहने के बावजूद पुरूलिया में रैली की। रैली के पहले ट्वीट में योगी ने कहा था “मुझे अत्यंत दुःख है कि गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की कर्मभूमि, हमारा बंगाल, आज ममता बनर्जी और उनकी सरकार की अराजकता तथा गुंडागर्दी से पीड़ित है।”

उन्होंने आगे यह भी कहा कि अब समय है कि बंगाल को एक सशक्त लोकतांत्रिक आंदोलन के माध्यम से संविधान की रक्षा हेतु इस सरकार से मुक्त किया जाए। इसके साथ ही पुरुलिया सभा में लोगों के बीच ममता के ख़िलाफ़ आंदोलन की ध्वजा लेकर भ्रष्टाचारियों के गठबंधन के लिए चुनौती बनने की बात योगी आदित्यनाथ ने की थी।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के बिचौलिए क्रिश्चिन मिशेल ने दायर की ज़मानत याचिका

वीवीआईपी हेलीकॉप्टर के सौदा मामले के कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल ने अपनी ज़मानत के लिए दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में ज़मानत याचिका को दायर किया है।

क्रिश्चियन मिशेल पर अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले मामले में ₹3,600 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग, रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप हैं। मिशेल ने सीबीआई और ईडी के चल रहे इन्हीं मामलों से कुछ समय तक राहत पाने के लिए ज़मानत याचिका दायर की है।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कथित बिचौलिए किश्चियन मिशेल की ज़मानत याचिका पर सीबीआई और ईडी से 12 फरवरी तक जवाब माँगा है।

दिल्ली के इसी कोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड मामले में राजीव सक्सेना की हिरासत अवधि चार दिनों तक के लिए बढ़ा दी है। इससे पहले इसी मामले में कथित तौर पर सह-आरोपी और दुबई के बिजनेसमैन राजीव दीक्षित की हिरासत अवधि बढ़ाई जा चुकी है।

सरकार द्वारा भ्रष्टाचार की लड़ाई में सरकार कथित तौर से दो दलालों, राजीव दीक्षित और मिशेल क्रिश्चियन को भारत लेकर आया गया। जिसमें से राजीव ईडी की हिरासत में हैं।

मिशेल के बारे में बता दें कि मिशेल एक ब्रिटिश कंसलटेंट है जिसे कथित तौर पर एंग्लो-इटैलियन कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड ने डील हासिल करने के लिए भारत में तात्कालीन यूपीए सरकार और भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए नियुक्त किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित IPS संजीव भट्ट की याचिका खारिज की, नहीं मिलेगी परिवार को सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी संजीव भट की परिवार को सुरक्षा देने से सम्बंधित याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस ए के सीकरी और एस अब्दुल नजीर की पीठ ने भट से अपनी याचिका के साथ गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को कहा है।

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल 4 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने उनकी पत्नी श्वेता भट की उस याचिका को भी खारिज कर दिया था, जिसमें एक वकील को ड्रग्स प्लांट कर गिरफ़्तार करने के 22 साल पुराने मामले में पुलिस की जाँच और उसकी न्यायिक हिरासत को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा था कि वह राहत के लिए इस मामले को उचित फ़ोरम  के समक्ष रखें। शीर्ष अदालत ने माना था कि इसके लिए चल रही जाँच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं था।

बता दें कि भट को 2011 में आधिकारिक वाहनों के दुरुपयोग और बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था और बाद में अगस्त 2015 में बर्खास्त कर दिया गया था। उनकी पत्नी श्वेता ने 2012 में अहमदाबाद के मणिनगर सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा था।

भट 1996 में बनासकांठा जिले के पुलिस अधीक्षक थे। पुलिस के अनुसार, भट्ट के अधीन बनासकांठा पुलिस ने 1996 में सुमेरसिंह राजपुरोहित नामक एक वकील को लगभग 1 किलो ड्रग्स रखने के आरोप में गिरफ़्तार किया था। उस समय बनासकांठा पुलिस ने दावा किया कि राजपुरोहित के कब्जे वाले एक होटल के कमरे में ड्रग्स मिला था। बनासकांठा पुलिस के साथ जुड़े कुछ पूर्व पुलिसकर्मियों सहित संजीव भट्ट और सात अन्य को शुरू में इस मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था।

हालाँकि, राजस्थान पुलिस की जाँच में ये स्पष्ट हो गया था कि राजपुरोहित को बनासकांठा पुलिस द्वारा कथित रूप से झूठा फँसाया गया था ताकि वह राजस्थान के पाली में एक विवादित संपत्ति को स्थानांतरित करने के लिए मज़बूर हो सके।

यह भी दावा किया गया कि राजपुरोहित को बनासकांठा पुलिस ने पाली स्थित उनके आवास से कथित तौर पर अपहरण कर लिया था। राजस्थान पुलिस की जाँच के बाद, बनासकांठा के पूर्व इंस्पेक्टर बी बी व्यास ने 1999 में गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया और इस मामले की गहन जाँच की माँग की।

जून 2018 में उच्च न्यायालय ने याचिका की सुनवाई करते हुए मामले की जाँच CID को सौंप दी थी और तीन महीने में जाँच पूरी करने को कहा था।

राजदीप सरदेसाई ने ‘बेनामी’ संपत्ति पर वाड्रा को ‘बेगुनाह’ साबित करने की कोशिश

ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर सवाल उठा रही है। ईडी ने आरोप लगाया था कि वाड्रा एक बेनामी संपत्ति के जरिए लंदन में 1.9 मिलियन पाउंड की संपत्ति का मालिक है।

ईडी ने अदालत में दावा किया था कि 12, लंदन में ब्रायनस्टोन स्क्वायर (Brayanstone Square) को वाड्रा के क़रीबी मनोज अरोड़ा के के ज़रिए से ख़रीदा गया था। जाँच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि संपत्ति दुबई के माध्यम से और काले धन अधिनियम के उल्लंघन में मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से ख़रीदी गई थी।

ख़बरों के अनुसार, लंदन में हथियार के डीलर भंडारी और बेनामी सम्पत्तियों के साथ वाड्रा के संबंधों का खुलासा ईडी की जाँच में किया गया था, जब भंडारी पर 2016 में आयकर अधिकारियों द्वारा छापा मारा गया था। इस छापे के दौरान लंदन हाउस के नवीकरण के भुगतान संबंधी वाड्रा के ई-मेल का खुलासा हुआ था।

बता दें कि मनोज अरोड़ा भी ईडी की जाँच के दायरे में हैं और उनसे एजेंसी द्वारा वाड्रा के कई अन्य सहयोगियों के बारे में पूछताछ की गई है।

2016 में, लंदन की संपत्ति का संबंध पहली बार ख़बरों की सुर्ख़ियों में आया था। उस समय वाड्रा पर यह आरोप लगाया गया था कि 12, ब्रायनस्टन स्क्वायर में संपत्ति एक शारजाह-आधारित फ़र्म के माध्यम से ख़रीदी गई थी।

जहाँ एक तरफ तो वाड्रा से ईडी पिछले दो दिनों से पूछताछ कर रही है वहीं दूसरी तरफ राजदीप सरदेसाई ने इंडिया टुडे टीवी में अपने एक शो के दौरान उन्होंने वाड्रा को बेगुनाह साबित करने पर तुले नज़र आए। उन्होंने अपने कार्यक्रम में यह दावा किया कि लंदन में संबंधित संपत्तियाँ रॉबर्ट वाड्रा के नाम से पंजीकृत नहीं हैं।

लंदन की संपत्ति, वास्तविक मालिक के नाम पर पंजीकृत नहीं होने के तथ्य को पूरी तरह से अनदेखा किया गया। आधारभूत जानकारियों का अभाव और इस बात की पुष्टि कि वाड्रा के नाम का उल्लेख संपत्ति के दस्तावेजों में नहीं है, इसलिए ईडी के द्वारा इस मामले को ग़लत तरीके से लक्षित किया रहा है, इसे सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा अनदेखा नहीं किया गया।

राजदीप सरदेसाई ने समाचार वीडियो में बार-बार चिल्लाते हुए कहा कि सम्पत्ति लंदन की सम्पत्ति के विवरण में रॉबर्ट वाड्रा का नाम नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भंडारी ने 2016 में वाड्रा और मनोज अरोड़ा के साथ अपने संबंधों को स्वीकार किया था। इसमें उसने लंदन की सम्पत्ति को लेकर हुए ई-मेल के माध्यम से जानकारी साझा करने संबंधी आपसी बातचीत को भी स्वीकार किया था।

पिछले कुछ दिनों से मुख्यधारा की मीडिया वाड्रा की पत्नी यानी प्रियंका वाड्रा पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान है। मीडिया उनकी हर गतिविधि जिसमें अपने पति वाड्रा को ईडी कार्यालय तक ड्रॉप करने और फिर पिक करने संबंधी ख़बरों को तरजीह देना शामिल है। इससे एक बात और निकलकर सामने आती है कि तथ्यों और महत्वपूर्ण विवरणों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है जिसमें सोशल मीडिया एक अहम भूमिका में है।

ट्रेन पर मिथिला पेंटिंग देख चमत्कृत हुए जापान और कनाडा, कहा ‘हमें भी चाहिए’

बिहार की संस्कृति की धमक अब दुनिया भर में सुनाई देने लगी है। जापान और कनाडा जैसे देश मिथिला पेंटिंग से अभिभूत हैं और उन्होंने इसकी माँग भी कर दी है। जापान को मिथिला पेंटिंग इतना पसंद आ गई है कि उसने मिथिला पेंटिंग करने वाले चित्रकारों की एक टीम की माँग की है। जापान की तरफ से भारत को इसके लिए अनुरोध पत्र भेजा गया है। ऐसे में, कल को अगर आप जापान जाते हैं और आपको वहाँ की रेलगाड़ियों पर मिथिला पेंटिंग्स दिखते हैं, तो चौंकने की ज़रूरत नहीं है।

महानंदा एक्सप्रेस से होकर मिथिला पेंटिंग बंगाल पहुँची

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस बारे में ट्वीट कर जानकारी देते हुए लिखा कि भारत की मिथिला पेंटिंग्स जब ट्रेन पर उकेरी गई तो इसने देश के साथ विदेशियों को भी अपनी सुंदरता से प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि जापान ने मिथिला पेंटिंग्स की ख़ूबसूरती को देखकर इस कला के चित्रकारों की टीम भेजने का अनुरोध किया है। भारत सरकार ने भी मित्र राष्ट्र जापान के इस अनुरोध को सहर्ष स्वीकार कर लिया है।

जापान के बाद अब कनाडा ने भी मिथिला पेंटिंग के चित्रकारों की एक टीम की माँग की है ताकि वहाँ की ट्रेनों पर भी मिथिला पेंटिंग उकेरी जा सके। कनाडा रेलवे बोर्ड के निदेशक ने भारत सरकार को भेजे अपने अनुरोध पत्र में कहा:

“मिथिला पेंटिंग्स न सिर्फ़ पर्यटकों व यात्रियों को आकर्षित करती है, बल्कि इसे देखने के बाद एक सकारात्मक विचार मन में उत्पन्न होता है। जब भी व्यक्ति तनाव में रहता है तो सकारात्मक चित्र या अच्छे माहौल में रहने से वह कम होता है। ऐसे में यदि भारत सरकार कलाकारों की टीम को कनाडा भेजती है तो यहाँ की प्रमुख ट्रेनों की बोगियों पर इस पेंटिंग्स को उकेरा जाएगा ।”

भारत में कई ट्रेनों पर पहले ही मिथिला पेंटिंग उकेरी जा चुकी है और वो लोगों को काफ़ी पसंद भी आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) भी मिथिला पेंटिंग वाले ट्रेनों की प्रशंसा कर चुका है। भारतीय रेलवे ने कहा है कि जापान और कनाडा भेजने के लिए मिथिला पेंटिंग के कलाकारों का चयन किया जा रहा है और जल्द ही टीम तैयार कर उन देशों में भेजी जाएगी। मिथिला पेंटिंग को मधुबनी पेंटिंग भी कहते हैं।

मिथिला पेंटिंग ने संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की सुंदरता में चार चाँद लगा दिए

आपको ये जान कर सुखद आश्चर्य होगा कि यहाँ से हज़ारों कोस दूर जापान के निगाता में एक मिथिला म्यूज़ियम है, जिसमे मिथिला पेंटिंग की एक अलग ही दुनिया बसी हुई है। 15 हज़ार से भी ज़्यादा मिथिला पेंटिंग्स के साथ सुशोभित यह म्यूज़ियम भारत से मिथिला कलाकारों को आमंत्रित करता रहा है और उनके रहने, खाने की भी व्यवस्था करता है।

मृत किसान भी बना दिए गए कर्ज़दार: MP में कर्ज़माफ़ी के नाम पर खेल जारी

देश के किसान अपने जीते-जी तो कर्ज़ लेकर जीवन यापन करते ही हैं, लेकिन अब मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस सरकार ने मृत किसानों को भी कर्ज़दार बना दिया। शिवपुरी के टोढ़ा पिछोर के रहने वाले लाला राम की मौत 25 साल पहले हो गई है। लालाराम ने जिंदा रहते हुए कभी नहीं सोचा होगा कि उसके मृत्यु के 25 साल बाद कोई सरकार उन्हें कर्ज़दारों की लिस्ट में शामिल कर देगी।

लालाराम के पुत्र मोहन लाल ने बताया कि टोढ़ा पिछोर सोसायटी की कर्ज़माफ़ी सूची में 34 हजार 107 रुपए मेरे मृत पिता के नाम दर्ज़ है। यह कहानी सिर्फ़ लालाराम नाम के किसान की नहीं है।

दैनिक भास्कर ने अपने रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है कि सहकारी समितियों द्वारा राज्य में कर्ज़माफ़ी की घोषणा के बाद 300 से अधिक दिवंगत लोगों के नाम कर्ज़दारों की लिस्ट में शामिल किया है।

जानकारी के लिए बता दें कि दिवंगत किसानों के परिजन को गुलाबी फॉर्म भरने के साथ ही साथ लिखित शिकायत करने के लिए भी कहा गया है। किसानों को शिकायत करने की अंतिम तारीख 5 फ़रवरी तय की गई है।

इसके अलावा अधिकारियों द्वारा शिक़ायत वापस लेने के लिए दवाब बनाने के मामले भी सामने आए हैं। ऐसा ही एक मामला दतिया से सामने आया है जिसमें नंदपुर की रहने वाली शकुंतला नामक महिला ने शिक़ायत की तो उसके पास सहकारी बैंक की ओर से समझौते के लिए फोन किया गया।

एक मजेदार बात यह भी है कि अकेले दतिया जिले में बिना कर्ज़ लिए और दिवंगत हो चुके 5 हज़ार किसानों का नाम कर्ज़दारों की लिस्ट में शामिल होने की बात सामने आ रही है।

लोकतंत्र की हिमायती ममता बनर्जी ने Republic TV के फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच की हत्या के लिए थमाया नोटिस

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो हाल ही में तथाकथित देश के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने का दावा करते हुए धरने पर बैठी थी, और जो फ्रीडम ऑफ़ स्पीच की ज़बरदस्त हिमायती हैं, उसी ममता बनर्जी ने अब कोलकाता में उनके धरना प्रदर्शन से उपजे हड़ताल के लगातार कवरेज पर इंग्लिश समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी और उसके हिंदी चैनल रिपब्लिक भारत को नोटिस भेजा है। बता दें कि सीबीआई अधिकारियों द्वारा शारदा चिट फंड घोटाले की जाँच के लिए कोलकाता पुलिस आयुक्त के आवास पर पहुँचने के बाद ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं। कोलकाता पुलिस प्रमुख के पक्ष में माहौल बनाने के लिए, ममता, विभिन्न पुलिस अधिकारियों के साथ धरने पर बैठ गईं।

रिपब्लिक टीवी के अनुसार, मीडिया समूह ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में ‘सीबीआई बनाम कोलकाता पुलिस उपद्रव’ पर रिपोर्ट करने के बाद उन्हें एक नोटिस के साथ धमकी दी है। यहाँ आठ सीबीआई अधिकारियों को कोलकाता पुलिस ने ममता बनर्जी के आदेश पर गिरफ़्तार किया था। सीबीआई अधिकारी कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से पूछताछ करने के लिए कोलकाता के लिए गए थे ताकि बड़े पैमाने पर शारदा घोटाले के से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सके। बता दें कि शारदा चिट-फंड मामले में सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी आरोपित हैं।

हालाँकि, रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने कहा है कि वह ममता बनर्जी सरकार द्वारा घटना पर अपनी रिपोर्ट के लिए गिरफ़्तार होने को तैयार हैं। मीडिया संगठन ने यह भी कहा है कि वे अपनी रिपोर्ट के आधार पर खड़े हैं और पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा इस तरह की धमकी से डरने वाले नहीं हैं।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने ममता सरकार से कहा, “मैं ममता बनर्जी के पुलिसिया गुर्गों द्वारा गिरफ़्तार होने के लिए तैयार हूँ।”

SC ने फिर कहा- ग़रीबों को 10% आरक्षण वाले विधेयक पर रोक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य वर्ग के ग़रीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी विधेयक पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। आज (फरवरी , 2019) दूसरी बार है जब संविधान (103वें) संशोधन विधेयक पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगाने से इनकार कर दिया भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की खंडपीठ ने तहसीन पूनावाला की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए ऐसा कहा, जिसमे संविधान संशोधन अधिनियम को चुनौती दी गई थी।

बता दें कि याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला कॉन्ग्रेसी नेता हैं। पूनावाला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने भारत सरकार के ख़िलाफ़ दायर की गई याचिका में आरक्षण के 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा को पार करने पर चिंता जताई। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जल्द सुनवाई के लिए याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताते हुए कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

बता दें कि आर्थिक आरक्षण विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा दो दिनों के भीतर पारित किया गया था। संसद द्वारा अनुमोदित किए जाने के तीन दिन बाद, राष्ट्रपति ने भी इस बिल पर हस्ताक्षर कर दिए थे। हालाँकि, राष्ट्रपति की सहमति मिलने से पहले ही ग़ैर-सरकारी संगठन यूथ फॉर इक्वेलिटी ने सुप्रीम कोर्ट में इस क़ानून को चुनौती दे दी थी। 14 जनवरी से आर्थिक आरक्षण अधिनियम लागू हुआ।

यूथ फॉर इक्वलिटी’ और कौशल कान्त मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल कर विधेयक के ख़िलाफ़ दलील देते हुए कहा था कि अगर आर्थिक आधार पर आरक्षण मिलता भी है तो उसे केवल सामान्य वर्ग तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता है। बता दें कि इंदिरा साहनी वाले केस में अदालत ने ये फ़ैसला सुनाया था कि केवल आर्थिक स्थिति आरक्षण का आधार नहीं बन सकती।

इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट में इस विधेयक को चुनौती देते हुई कई याचिकाएँ दाख़िल की गई। सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट ही नहीं, बल्कि देश के अन्य न्यायालयों में भी इस विधेयक को चुनौती देती कई याचिकाएँ दाख़िल की गई। तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी डीएमके ने भी मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दाख़िल कर इस अधिनियम को चुनौती दी है।