मोदी सरकार की चर्चा में न रहनेवाली योजनाओं ने कितने लोगों के जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाला है, वो नीचे दिए गए आँकड़ों से सामने आता है। न सिर्फ़ घर, बल्कि उसमें बिजली, पानी, गैस सिलिंडर की सुविधा के साथ-साथ रोज़गार की गारंटी को सम्मिलित करते हुए सरकार ने साबित किया है कि एक योजना में बाक़ी योजनाओं के समावेश से ग़रीबों के जीवन पर कितना फ़र्क़ पड़ सकता है।
राज्यों के सहयोग से ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2014 से 1.37 करोड़ आवासों का निर्माण कार्य पूरा किया गया। आवासों के निर्माण कार्य पूरा होने का वर्षवार ब्यौरा (प्रत्येक आवास का तस्वीर सहित संपूर्ण ब्यौरा pmay-g.nic.in पर उपलब्ध है) निम्न है :
आवासों के निर्माण कार्य पूरा होने का वर्षवार ब्यौरा
सारणी से स्पष्ट है कि जहाँ 2014-15 में 12 लाख आवासों का निर्माण हुआ था, वहीं 2018-19 में यह संख्या पाँच गुनी बढ़कर 65 लाख हो जाने वाली है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 20 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का शुभारंभ किया था। राज्यों के सहयोग से ग्रामीण विकास मंत्रालय को विश्वास है कि मार्च, 2019 तक एक करोड़ आवासों का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। पीएमएवाई-जी योजना के अंतर्गत निर्धनतम लोगों को आवास देने का लक्ष्य रखा गया है जो अभी कच्चे घरों में रहते हैं। 4.75 लाख घरों के निर्माण की मंजूरी लंबित है क्योंकि राज्य सरकारों द्वारा भूमिहीनों को ज़मीन देने का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे मामले तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और बिहार से संबंधित है।
ग्रामीण आवास कार्यक्रम से न सिर्फ गरीबों को आवास मिलता है बल्कि उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 90/95 दिनों का रोज़गार भी प्राप्त होता है। इन आवासों को सौभाग्य योजना के तहत विद्युत आपूर्ति की जाती है तथा उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन दिए जाते हैं।
इन आवासों में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालयों का निर्माण किया जाता है। 1.37 करोड़ ग्रामीण आवासों के लाभान्वितों के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। पीएमएवाई-जी योजना के तहत निर्धनतम लोगों के चयन के लिए त्रिस्तरीय प्रक्रिया अपनाई जाती है – सामाजिक-आर्थिक जनगणना 2011, ग्राम सभा और जीयो–टैगिंग।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतरमण ने सेना के मिलिट्री पुलिस कोर्प्स में महिला जवानों को शामिल करने के निर्णय को मंजूरी दे दी है। पूरी प्रक्रिया के तहत 20% महिलाएँ शामिल की जाएँगी।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार (जनवरी 18,2019) को कहा कि सरकार ने सशस्त्र बलों में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से सैन्य पुलिस में महिलाओं को शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
अभी तक महिलाएँ सेना में सिर्फ अधिकारी के पद पर, वो भी कुछ सीमित शाखाओं जैसे, मेडिकल, कानूनी, शैक्षणिक, सिग्नल और इंजीनियरिंग जैसी चुनिंदा शाखाओं में ही प्रवेश कर पाती थीं।
To improve representation of women in our armed forces Smt @nsitharaman takes a historic decision to induct women for the first time in PBOR role in Corps of Military Police 1/2 pic.twitter.com/PmEVEZ9h03
महिलाओं को सेना के सैन्य पुलिस के कुल कोर का 20% शामिल करने के लिए एक श्रेणीबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। रक्षा मंत्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस खबर की घोषणा की गई।
इस साल सेना दिवस पर, महिलाओं ने इतिहास में पहली बार एक महिला, लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी ने समस्त पुरुष सेना की टुकड़ी की परेड की, जिसमें 144 पुरुष शामिल थे।
एक अन्य पहल में, एक महिला अधिकारी ने सेना की ‘डेयरडेविल्स मोटरसाइकिल डिस्प्ले’ टीम का नेतृत्व करते हुए मेहमानों को सलामी दी। कप्तान शिखा सुरभि ने 33 पुरुषों की टीम का नेतृत्व किया।
इस निर्णय के अनुसार, महिलाओं को सैन्य पुलिस के कुल कोर का 20% शामिल करने के लिए एक श्रेणीबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा। उनकी भूमिका बलात्कार और छेड़छाड़ के मामलों की जांच करने से लेकर सेना की सहायता के लिए जहां भी आवश्यकता होगी। इसे सेना में लैंगिक समानता की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
इस महीने की शुरुआत में, राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में रक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा था कि सेना के पास महिलाओं के रूप में 3.80% कर्मचारी हैं, वायु सेना के पास 13.09% और नौसेना में 6% हैं।
मित्रो! 2010 में जब लगा था कि कश्मीर में आईएएस अफ़सर बनकर ये फ़ैसल अब उन लोगों से अपने बाप का दादा, परदादा का और बाकी सब का बदला लेगा, जिनकी गोलियों से बचकर वो भारतीय प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बना है, तब किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक दिन यही फैसल ‘डेफिनिट’ बनकर राजनीति में आने का ‘केजरीवाल टर्न’ ले लेगा।
जबसे ‘नई वाली राजनीति’ फ़ेम और मशहूर फ़िल्म समीक्षक सर अरविंद केजरीवाल प्रशासनिक सेवाओं को छोड़कर राजनीति में आए हैं, तब से आम आदमी जब किसी अफ़सर के राजनीति में आने की ख़बरें सुन लेता है, तो हफ़्ता भर वो खुद को चूँटी काटकर यकीन दिलाना चाहता है कि क्या वाक़ई में ये भी फ़िल्म रिव्यु लिखकर देश बदलने आया है?
भाई साहब ,ये किस लाइन में आ गए आप?
देश जानता है कि पिछले कुछ सालों में इस देश में ‘नई वाली राजनीति’ और ‘नई वाली हिंदी’ आज के युवा के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। जो जलवा इन दोनों ने काटा हुआ है, तो जनता बस यही सवाल पूछ पा रही है, “कहें तो कहें क्या, करें तो करें क्या?” जातिवाचक पत्रकार चाहे गोदी मीडिया का नाम लेते हों लेकिन इस देश में छोटी गंगा बोलकर गंदे नाले में कुदा देने का जो गोरखधंधा है, उसकी TRP सबसे ज़्यादा है।
2010 में देश की सबसे प्रतिष्ठित संस्था का हिस्सा बनकर ‘मुस्लिम यूथ आइकन’ बने शाह फ़ैसल जम्मू कश्मीर चुनाव से पहले अपना पद छोड़ देते हैं और सबसे पहले उमर अब्दुल्ला से मिलने पहुंचते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उमर अब्दुल्ला कश्मीर के लिए फ़िक्र करते हैं। जबकि कई पीढ़ियों से कश्मीर पर राज करने वाले अब्दुल्ला परिवार ने कश्मीर की आवाम का आज तक कौन-सा भला किया है, शायद यह सब जानकारी सामरिक कारणों से गुप्त ही रखे गए होंगे, या फिर कभी हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाई में उस भलाई के कुछ अवशेष मिल सकें।
कौन नहीं जानता है कि उमर अब्दुल्ला और उनके परिवार ने कश्मीर की आवाम के लिए उतने ही प्रयास किए हैं, जितने कॉन्ग्रेस दलितों के लिए आज़ादी के बाद से करती आई है। हर चुनाव में दलितों का हितैषी माना जाने वाला राजपरिवार दलितों का कितना हिमायती है इस बात का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंचवर्षीय आती और जाती रहीं, लेकिन देश का पिछड़ा दलित कभी अगड़ा नागरिक नहीं बन सका।
उसी तरह से संसद में पाक अधिकृत कश्मीर के मसले पर “POK क्या तुम्हारे बाप का है?” जैसे नज़रिया देने वाले फ़ारूक़ अब्दुल्ला उसी उमर अब्दुल्ला के बापू हैं, जो आपको कश्मीर के शुभचिंतक नज़र आते हैं। भारत-पाकिस्तान बँटवारे पर इन्हीं फ़ारूक़ अब्दुल्ला साहब की राय थी कि जिन्ना ने नहीं बल्कि नेहरू, गाँधी, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और सरदार पटेल ने मिलकर बँटवारा कराया था।
आपके कथनी और करनी दोनों से ही आप कश्मीर के युवाओं को ही नहीं, उन जैसे, और अपने जैसे युवाओं पर भी भरोसे करने जैसे विचारों को भी एकदम सड़क पर ला देते हैं। शाह साहब, आप वही हैं जिसने भारत को रेपिस्तान कहा था, इसलिए कन्हैया कुमार और JNU के देशद्रोही गिरोह से आपका सहानुभूति रखना तो बनता ही है।
रेपिस्तान वाला बयान सुनकर DSP भूरेलाल भी कह रहे हैं…
तो जनाब! अब बात करते हैं मुद्दे की। कश्मीर के 2010 बैच के IAS अफसर शाह फ़ैसल आ गए हैं नौकरी-पेशा का टंटा खत्म कर के उसी फ़िल्ड में, जिसके लिए प्राचीन दन्तकथाओं में एक राजमाता ने कहा था ‘बेटा सत्ता ज़हर है’। लेकिन क्या इसे महज़ इत्तेफ़ाक़ ही कहेंगे कि दन्तकथा के अगले अध्याय में वही राजमाता कहती हैं कि बेटा ज़हर की खेती करने वालों को सत्ता मत दो।
कितनी बड़ी दुविधा शाह फ़ैसल के जीवन में आ कर खड़ी हो गई है कि एक ओर जहाँ सामान्य श्रेणी का एस्पिरेंट UPSC लिखते-लिखते ‘मनोहर’ कहानियों को टक्कर देने वाला लेखक बन जाता है, लेकिन अफ़सर नहीं बन पाता है, वहीं शाह फ़ैसल अफ़सर बनने के दिन से ही कश्मीर के युवाओं के लिए कभी प्रेरणा बने, कभी क्रन्तिकारी बने, कभी उग्र अभिव्यक्तिकार बने, लेकिन कभी नेता नहीं बन पा रहे थे। सो वो अब दफ़्तर से अपना बोरिया-बिस्तरा उठाकर राजनीति की गलियों में क़दम रखने जा रहे हैं।
जबकि, प्रशासन में रहते हुए शाह फ़ैसल खनन घोटाला अधिकारी भी बन सकते थे, लेकिन अब उन्होंने शायद खनन घोटाला मंत्रालय चुनना बेहतर समझ लिया है। आईएस अफ़सर वाला जो स्वैग आईएस चंद्रकला सोशल मीडिया पर झोंका करती थी, मुखर्जी नगर में आधी भीड़ उसी स्वैग को लेकर उमड़ी हुई है। लेकिन अफ़सर बन जाने के बाद कमाई में इतना इज़ाफा होने की ख़बरें जबसे बाज़ार में गर्म हैं, उस दिन से भीड़ बढ़ ही रही है, कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हालात ये हैं कि आज की डेट पर मुखर्जी नगर में उतने विश्वामित्र नहीं हैं, जितनी मेनकाएँ नज़र आती हैं। हालाँकि, ये मेरे जैसे एक ‘मिसोज़िनिस्ट’ का व्यक्तिगत मत हो सकता है।
सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि शाह फ़ैसल ने यह निर्णय ट्विटर पर चल रहे #10YearsChallenge की वजह से लिया है। 10 साल पहले जो हालात राजनीति में थे, वो उनको ही ‘रीस्टोर’ करने के मकसद से शायद राजनीति में उतरना चाह रहे हों। क्योंकि 10 साल में इस देश में हो चुकी है भैया लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की जमकर हत्या, जिस वजह से गुलफ़ाम हसन साहब का भी दम यहाँ घुटने लगा है।
अब आ ही गए हो तो ये लो यार अँगूर खाओ
मने हम कह सकते हैं कि JNU में जनता के टैक्स के पैसों, जिसमें मनुवादी, ब्राह्मणवादी सवर्णों का भी पैसा शामिल है, से मिलने वाली सब्सिडी पर नारे लगा रहे कन्हैया कुमार पर लगे देशद्रोह के आरोपों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपहास बताकर राजनीति में पहला कदम तो शाह फ़ैसल आज रख ही चुके हैं। इसके बाद हमारी दिलचस्पी इस बात में और बढ़ गई है कि शाह फ़ैसल अब जब इस ज़हरीली राजनीति में उतर ही गए हैं, तो उनके अगले कदम क्या हो सकते हैं?
इसी उत्सुकतावश, हमारे स्लीपर सैल संवाददाता, अलीगढ़ जाकर ‘लाल कुँआ, पिलर लम्बर बारा’ के ठीक नीचे बैठे बाबा से मिले और उनसे आपके राजनीतिक भविष्य के बारे में उन्होंने राय माँगी। जिसके बाद बाबा ने हमें व्हाट्सएप्प यूनीवर्सिटी पर कुछ तस्वीरें भेजकर शाह फ़ैसल के रुझान जारी किए हैं, जिन्हें हम ‘ऐज़ इट इज़’ और बिना किसी एडिटिंग के एक्स्क्लुसिव्ली आपके साथ शेयर कर रहे हैं:
रामभक्तों के बीच अपनी सेक्युलर छवि को बुलंद करते फैजल महागठबंधन को अपनी नम आँखों से साक्षात देखते फैजलफ़िल्म रिव्यू देने की ज़िम्मेदारी लेकर सर केजरी के कामों में हाथ बंटाकर उनका काम हल्का करते फैजलमोदी जी के बदले व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के प्रोपैगेंडापति को इंटरव्यू देते फैजलयोगी जी को गौरक्षा का वचन देते फैजलसामान्य वर्ग को 10% आरक्षण देने पर मोदी जी के गले पड़ते फैजलकुनाल कामरा को राहुल गाँधी से ज्यादा कॉमेडी करने और कट्टर हिन्दुओं के प्रति सतर्क करते फैजलकैंडिड तस्वीर लेते हुए लप्रेकी फैजल लालू जी का चारा तलाशते हुए फैजल
आप हमारे इरादों और मसख़री को दिल पर ना लें साहब! हम केजरीवाल के जले हैं, सो फ़ैसल को फूँक-फूँक कर पीना हमारी मज़बूरी हो चुका है।
किसानों से वादे करके सत्ता में आई कॉन्ग्रेस कर्ज़माफ़ी के नाम पर घोटाला और किसानों को गुमराह कर रही है। मध्यप्रदेश के खरगोन में किसानों से कर्ज़माफ़ी के नाम पर मज़ाक किया जा रहा है। दो महीने से कर्ज़माफ़ी का इंतजार कर रहे कुछ किसानों के पैरों तले जमीन तब खिसक गई, जब कर्ज़माफ़ी की सूची में उन्होंने देखा कि सूची में सिर्फ़ 25 और 300 रुपए माफ़ होना दर्शाया गया है।
अब सवाल उठता है कि 2 लाख रुपए तक कर्ज़माफ़ी का वादा कहाँ गया? मामले पर प्रशासन भी कोई हिसाब नहीं लगा पा रहा है। प्रशासन का कहना है कि 31 मार्च 2018 तक की अवधि में जिन किसानों पर ऋण है, उन्हीं की सूची जारी की गई है। ‘जय किसान ऋण मुक्ति योजना’ के तहत स्थानीय टाउन हॉल में कर्ज़माफ़ी की ये सूची लगाई गई थी।
ढाई लाख के कर्ज़ में हुई 25 रुपए की माफ़ी
जिन किसानों पर हज़ारों का कर्ज़ लदा हुआ था, उनका सिर्फ़ नाम मात्र का कर्ज़ माफ़ किया गया। जैतपुर के किसान प्रकाश की मानें तो उनपर ढाई लाख रुपए का कर्ज़ था लेकिन सिर्फ 25 रुपए माफ़ किया गया। इसी तरह सिकंदरपुरा के अमित के 300रुपए माफ़ होने का जिक्र है। अमित का कहना है कि उन पर 30 हजार रुपए का कर्ज़ था।
किसानों की मानें तो किसी भी असुविधा से बचने के लिए उन्होंने अपने स्तर पर कर्ज़ की राशि जुटाकर बैंक में जमा करवाई और खाता शून्य कर फिर से कर्ज़ लिया, लेकिन जारी की गई सूची में इस बात उल्लेख नहीं किया गया है। कृषि विभाग का कहना है कि जिले में 2,57,600 संभावित ऋणी कृषक हैं। इनमें सहकारी बैंक के 1,52,000 और राष्ट्रीयकृत बैंकों के 20,600 कृषक शामिल हैं।
उड़द खरीदी को लेकर भी नाराज़ है किसान
किसानों की मुश्किल सिर्फ कर्ज़माफ़ी तक ही सीमित नहीं है। शायद यही वजह है कि किसानों को अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करनी पड़ी, और उन्होंने औक दमोह-सागर हाईवे को जाम कर दिया। दरअसल, किसान उड़द ख़रीदी में कई समस्याओं से परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी समस्या नहीं सुनी जा रही है और मामले का निराकरण नहीं हो रहा है।
कर्नाटक में भी मिल चुका है किसानों को धोखा, 397 किसान कर चुके हैं आत्महत्या
मध्यप्रदेश में कॉन्ग्रेस का ये पहला कारनामा नहीं है, यही कारण है कि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाते हुए इस बात को स्पष्ट किया था कि कर्नाटक में 45 हज़ार करोड़ रुपए का कृषि ऋण माफ़ होना था, लेकिन 75 करोड़ रुपए का भी भुगतान नहीं किया।
इसके कारण किसानों को बैंक का नोटिस मिल रहा है। यही कारण है कि कॉन्ग्रेस सरकार के छह महीने के शासनकाल में 397 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। किसानों के कुल 90 हजार करोड़ रुपए के ऋण के लिए कॉन्ग्रेस ने बजट में 3 करोड़ रुपए भी आवंटित नहीं किए हैं।
जिन किसानों ने नहीं लिया ऋण, उनको भी मिली ‘माफ़ी’
बीते दिनों मध्य प्रदेश के ग्वालियर में किसानों के साथ धोखा देने और घोटाला करने का का कारनामा सामने आया था। जिसमें सहकारी समितियों द्वारा जारी की गई ऋणदाताओं की सूची में उन किसानों का नाम भी डाल दिया गया था, जिन्होंने कोई कर्ज़ लिया ही नहीं। बावजूद इसके उनका कर्ज़ माफ़ कर दिया गया। जिसके बाद किसानों ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की शाखा व समितियों पर पहुंच कर आपित्त जताई थी कि बिना कर्ज़ के कैसी कर्ज़माफ़ी?
किसानों के कर्ज़माफ़ी की स्थिति नहीं बता पा रही कॉन्ग्रेस
राजस्थान में किसानों की कर्ज़माफ़ी का विवरण नहीं दिया जा रहा है। विधानसभा में सरकार से किसानों की कर्ज़माफ़ी व इससे जुड़ी औपचारिकताओं पर स्थिति स्पष्ट करने में भी नाकाम साबित हो रही है। प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने कहा, “सरकार ने इस प्रकार का लंगड़ा आदेश निकाल कर किसानों को भ्रमित किया है, सरकार स्पष्ट करे कि कर्ज़माफ़ी की घोषणा के एक महीना एक दिन के बाद कितना पैसा किसानों के खाते में पहुंचा।”
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गांधीनगर स्थित महात्मा गांधी प्रदर्शनी सह सम्मेलन केन्द्र में वाइब्रेंट गुजरात के 9वें संस्करण का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उज़्बेकिस्तान, रवांडा, डेनमार्क, चेक गणराज्य और माल्टा के राष्ट्रप्रमुख उपस्थित थे। इसके अलावा उद्योगजगत के प्रतिनिधियों समेत 30 हज़ार राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों तथा कंपनियों को भारत आने और यहाँ निवेश करने का आमंत्रण दिया क्योंकि अवसंरचना और सुविधाएँ बेहतर हुई हैं और व्यापार की स्थिति निवेशक अनुकूल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान व्यापार करने में आसानी श्रेणी में भारत ने 65 स्थानों की छलाँग लगाई है। भारत को आने वाले वर्षों में इस श्रेणी के 50वें स्थान तक लाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व बैंक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और मूडी जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने भारतीय अर्थव्यवस्था तथा अर्थव्यवस्था के लिए किए गए सुधारों में विश्वास व्यक्त किया है। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के कार्यान्वयन से लेनदेन की लागत में कमी आई है। प्रधानमंत्री ने कहा भारत की औसत विकास दर 7.3 प्रतिशत है जो 1991 के बाद से सर्वाधिक है। इसी के साथ औसत महँगाई दर 4.6 प्रतिशत है जो 1991 के बाद से न्यूनतम है।
प्रधानंमत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों के
दौरान मेरी सरकार का लक्ष्य प्रशासन को बढ़ाना और सरकार को कम करना रहा है। हम
अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार कर रहे हैं। हम
विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने
कहा कि भारत में स्टार्टअप का सबसे बड़ा परितंत्र है। नौजवानों के लिए रोज़गार के
अवसरों के सृजन हेतु सरकार ने विनिर्माण को बढ़ावा दिया है। डिजिटल इंडिया और
स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रमों से मेक इन इंडिया पहल को सहायता मिली है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2017 में भारत में
रिकॉर्ड पर्यटक आए हैं। 2016 की तुलना में पर्यटकों की संख्या में 14 प्रतिशत की
वृद्धि हुई है जबकि पूरे विश्व के संदर्भ में केवल 7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई
है। पिछले चार वर्षों के दौरान हवाई यात्रा में दस से अधिक प्रतिशत की वृद्धि दर्ज
की गई है। भारत असीम संभावनाओं वाला देश है। यह एक मात्र देश है जो लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और
माँग का विकल्प देता है।
वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन के बारे में
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र प्रमुखों की उपस्थिति से यह एक वैश्विक मंच बन गया
है। इससे यह सिद्ध होता है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल राष्ट्रीय राजधानी तक
सीमित नहीं है बल्कि इसका विस्तार राज्यों की राजधानियों तक हो गया है।
गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने
प्रधानमंत्री के नेतृत्व और नीति आधारित प्रशासन की सराहना करते हुए उद्योग जगत के
प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि व्यापार को आसान बनाने के लिए हर संभव सहायता व
सुविधा प्रदान की जाएगी।
इस अवसर पर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति श्री शौक़त मिरजियोयेव, डेनमार्क के प्रधानमंत्री श्री लार्स लोक रासम्युसिन, चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री श्री आंद्रेज बबिज और माल्टा के प्रधानमंत्री डॉ. जोसेफ मस्कट भी उपस्थित थे।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए एक विशेष संदेश देते हुए कहा कि गुजरात हम दो
व्यक्तियों के बीच सुदृढ़ सम्बन्ध को रेखांकित करता है। हम दोनों साथ मिलकर भविष्य
के लिए असीम संभावनाओं का निर्माण कर रहे हैं।
तीन दिवसीय समारोह के दौरान निम्न प्रमुख
कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे – वैश्विक कोष के प्रमुखों के साथ गोलमेज सम्मेलन, अफ्रीका दिवस, एमएसएमई
सम्मेलन, विज्ञान, तक़नीकी इंजीनियरिंग और गणित शिक्षा व शोध में संभावनाओं पर गोलमेज बैठक आदि।
इसके अतिरिक्त भविष्य के तक़नीकों व अंतरिक्ष में खोज पर प्रदर्शनी का आयोजन किया
गया है। बंदरगाह आधारित विकास विषय पर एक सेमिनार आयोजित किया जाएगा।
वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन के पहले संस्करण का
आयोजन 2003 में किया गया था। उस समय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के
मुख्यमंत्री थे। सम्मेलन का उद्देश्य गुजरात में निवेश को आकर्षित करना था।
ज़ी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग मार्च के पहले सप्ताह में लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है। ज़ी न्यूज़ के अनुसार, आयोग के सूत्रों ने शुक्रवार को यह संकेत देते हुए लोकसभा चुनाव के साथ कुछ राज्यों – आंध्र प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश – के विधानसभा चुनाव भी कराने की संभावना व्यक्त की है। उल्लेखनीय है कि मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल आगामी तीन जून को समाप्त होने वाला है।
बता दें, आयोग ने 2004 में लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की 29 फ़रवरी को चार चरण में, 2009 में 2 मार्च को पाँच चरण में और 2014 में 5 मार्च को नौ चरण में कराने की घोषणा की थी। उल्लेखनीय है कि पिछले तीनों लोकसभा चुनाव अप्रैल से मई के दूसरे सप्ताह में संपन्न करा लिए गए थे।
लोकसभा के साथ कुछ राज्यों में विधान सभा का कार्यकाल ख़त्म होने की वज़ह से चुनाव के क़यास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि, सिक्किम विधानसभा का कार्यकाल आगामी मई तथा आंध्र प्रदेश, ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल आगामी जून में पूरा हो रहा है।
इस बीच जम्मू कश्मीर विधानसभा भी पिछले साल नवम्बर में भंग किए जाने के कारण नई विधानसभा के गठन की छह महीने की निर्धारित अवधि इस साल मई में पूरी होने से पहले चुनाव आयोग के लिये, राज्य में चुनाव कराना अनिवार्य है। जम्मू कश्मीर विधानसभा का छह साल का निर्धारित कार्यकाल 16 मार्च 2021 तक था लेकिन बहुमत वाली सरकार के गठन की सम्भावनाएँ समाप्त होने के कारण, इसे नवंबर 2018 में ही भंग कर दिया गया था।
आयुष्मान भारत योजना की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल 2018 के बजट में भाषण में की थी। और इस योजना को आरएसएस विचारक दीन दयाल उपाध्याय की जयंती (25 सितंबर) पर झारखंड के रांची से लॉन्च किया गया था। इसके तहत ग़रीब परिवारों को सालाना 5 लाख रुपए के मुफ़्त इलाज की व्यवस्था की है। इस योजना को ‘सर्वश्रेष्ठ सरकारी हेल्थकेयर योजना’ के रूप में पेश किया गया था और आज ये योजना अपनी उम्मीदों पर खरा साबित हुआ है।
इस योजना के दायरे में, 10 करोड़ से अधिक BPL (ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले नागरिक) परिवारों, अर्थात 50 करोड़ बीपीएल लोगों को 5 लाख रूपए का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करने की सम्भावना व्यक्त की गई थी। इस योजना के तहत, सभी योग्य लाभार्थियों को पैनल में शामिल किसी भी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मुफ़्त इलाज की सुविधा का प्रावधान है।
लगभग 4 महीने के अंदर ही इस योजना के परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं। प्रमाण स्वरुप दुनिया की दिग्गज टेक्नॉलजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और गेट्स फाउंडेशन के को-चेयरमैन बिल गेट्स ने केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत योजना’ की तारीफ़ की है। बिल गेट्स ने इस योजना की लॉन्चिंग के 100 दिनों में 6 लाख से ज़्यादा मरीजों द्वारा लाभ उठाए जाने पर सुखद आश्चर्य प्रकट किया। उन्होंने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर लिखा, “आयुष्मान भारत के पहले 100 दिन के मौके पर भारत सरकार को बधाई। यह देखकर अच्छा लग रहा है कि कितनी बड़ी तादाद में लोग इस योजना का फ़ायदा उठा चुके हैं।”
Congratulations to the Indian government on the first 100 days of @AyushmanNHA. It’s great to see how many people have been reached by the program so far. @PMOIndiahttps://t.co/AHHktUt95z
पिछले दिनों, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 2 जनवरी को ट्वीट कर देशवासियों को बताया था कि 100 दिनों के अंदर ही 6 लाख 85 हजार लाभार्थियों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त उपचार लाभ लिया। उन्होंने कहा था कि लाभार्थियों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। बिल गेट्स ने स्वास्थ्य मंत्री के इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए भारत सरकार को बधाई दी।
आयुष्मान भारत योजना ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है| इस योजना को अभी 100 दिन भी पूरे नहीं हुए और 6 लाख से ज्यादा लोगों ने अपना उपचार करवाया|
इस योजना के लाभ से अब किसी माँ की ज़िन्दगी बच जाती है और पैसों के आभाव में किसी का बेटा नहीं मरता: प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी pic.twitter.com/nRGrwiSBAT
इससे पहले भी नड्डा ने एक ट्वीट कर सूचना दी थी कि ‘आयुष्मान भारत योजना’ एक नया कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है।
Today a record >2.73 lakh #AyushmanBharat#PMJAY beneficiary e-cards were generated, bringing the total to >62.22 lakh e-cards so far, & 9,368 hospital admissions across the country bringing the total to >8.50 lakh since the launch @PMOIndia@JPNadda@amitabhk87#PMJAY24HrUpdate
ग़ौरतलब है कि मीडिया संस्थानों ने इसे ‘मोदीकेयर’ का नाम भी दिया है। आयुष्मान भारत के सीईओ डॉ. इंदु भूषण ने बताया कि बुधवार (जनवरी 16, 2019) तक तक़रीबन 8.50 लाख लोग आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभान्वित हुए।
बता दें, इस योजना को सफ़ल बनाने के लिए, केंद्र सरकार ने पीएम जन आरोग्य योजना टोल-फ़्री नंबर भी जारी किया है- 14555 । आप इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ऑनलाइन पंजीकरण के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आप इस टोल-फ़्री नंबर पर कॉल करके प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लाभार्थियों की सूची में अपना नाम भी देख सकते हैं।
यदि आपका नाम लाभार्थियों की सूची में मौजूद नहीं है, तो आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। आप अपने निकटतम आरोग्य मित्र/आयुष मित्र के पास जाकर पीएम जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों की सूची में अपना नाम जोड़ सकते हैं। आयुष मित्र आपको प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलेंगे। वे सूची में नाम शामिल करने में आपकी सहायता करेंगे। सूची तैयार होने के बाद तब इस योजना का लाभ लेने के लिए किसी भी पहचान पत्र की जरूरत नहीं होगी।
पंजीकरण
आपको इस योजना के लिए कोई आवेदन पत्र और पंजीकरण भरने की आवश्यकता नहीं है। जिन लोगों का नाम सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना सूची 2011 (एसईसीसी 2011) में पंजीकृत है। वे इस योजना के लाभार्थी होंगे और इस स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभों का लाभ उठा सकते हैं। सरकार इसके बारे में सभी लाभार्थियों को एक आयुष्मान भारत योजना पत्र भेजकर सूचित करेगी।
अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका रजिस्ट्रेशन हो गया? या नहीं। योजना में आपका नाम है या नहीं यह आप https://mera.pmjay.gov.in/search/login पर चेक कर सकते हैं। सबसे पहले आप इस वेबसाइट पर जाएँ। यहाँ होम पेज पर एक बॉक्स मिलेगा। इसमें मोबाइल नंबर डाले। उस पर ओटीपी आएगा। इसे डालते ही पता चल जाएगा कि आपका नाम इसमें जुड़ा है या नहीं।
अस्पताल में कैसे मिलेगा लाभ?
आयुष्मान भारत योजना के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता नहीं है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद आपको अपने बीमा दस्तावेज़ देने होंगे। इसके आधार पर अस्पताल इलाज के ख़र्च के बारे में बीमा कंपनी को सूचित कर देगा। इस योजना के तहत बीमित व्यक्ति सिर्फ सरकारी ही नहीं बल्कि इस योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में भी अपना इलाज करवा सकेगा।
कौन-सी बीमारी है इस योजना के दायरे में
इस योजना के अन्तर्गत मैटरनल हेल्थ और डिलीवरी की सुविधा, नवजात और बच्चों के स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य सुविधा, कॉन्ट्रासेप्टिव सुविधा, संक्रामक, ग़ैर-संक्रामक रोगों के प्रबंधन की सुविधा, आँख, नाक, कान और गले से संबंधित बीमारी के इलाज के लिए अलग से यूनिट होगी। बुजुर्गों का इलाज भी करवाया जा सकेगा।
किन-किन राज्यों में है सेंटर
इसके दो कंपोनेंट हैं- पहला, 10.74 लाख परिवारों को मुफ़्त 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा; दूसरा, हेल्थ वेलनेस सेंटर। इसमें देशभर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपडेट होंगे। इन सेंटर्स पर इलाज के साथ मुफ़्त दवाएँ भी मिलेंगी: छत्तीसगढ़ में 1000, गुजरात में 1185, राजस्थान में 505, झारखंड में 646, मध्यप्रदेश में 700, महाराष्ट्र में 1450, पंजाब में 800, बिहार में 643, हरियाणा में 255।
दिल्ली, केरल, ओडिशा, पंजाब और तेलंगाना राज्य सरकारों ने इस योजना को लागू करने से इनकार कर दिया था।
कुछ सूचनाएँ आयुष्मान भारत के आधिकारिक वेबसाइट pmjay.gov.in से ली गई हैं
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बात के संकेत दिए हैं कि चुनावी साल में अंतरिम बजट लेखानुदान (Vote on Account) से बढ़कर होगा। इंडिया बिज़नेस लीडर अवार्ड्स समारोह में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने कहा कि सामान्यतः चुनावी साल में प्रस्तुत किया जाने वाला बजट लेखानुदान ही होता है परंतु अंतरिम बजट में परंपरा से हटकर जो कुछ भी घोषणा की जाएगी वह भारतीय अर्थव्यवस्था के हित में ही होगा।
राष्ट्रहित और परंपरा की दुहाई देते हुए जेटली ने कहा कि अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है। उन्होंने कहा: “परंपरा यही रही है कि चुनावी साल का बजट अंतरिम बजट होता है। देश के लिए क्या ज़रूरी है इससे तय होता है कि अंतरिम बजट में क्या होगा।”
हालाँकि अरुण जेटली ने यह बताने से मना कर दिया कि अर्थव्यवस्था के किस क्षेत्र विशेष में कौन सी घोषणाएँ हो सकती हैं लेकिन उन्होंने साफ़ संकेत दिया कि अंतरिम बजट मामूली वोट ऑन अकॉउंट नहीं होगा।
वित्त मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों से निपटने के लिए चुनावी साल की परंपरा से अलग हटकर कुछ कर सकती है। वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि एक क्षेत्र हो सकता है जिसपर अंतरिम बजट में परंपरा से हटकर कुछ प्रावधान किए जा सकते हैं।
जेटली मेडिकल चेक-अप के लिए फिलहाल न्यूयॉर्क में हैं। चर्चा के दौरान उन्होंने अंतरिम बजट प्रस्तुत करने में अक्षम होने की आशंकाओं को खारिज कर दिया। वित्त मंत्री ने टैक्स स्लैब में बदलाव के सवाल पर कुछ नहीं कहा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुग़लसराय रेलवे स्टेशन के बाद अब तहसील का भी नाम बदल दिया गया है। राज्य सरकार के कैबिनेट मीटिंग में मुग़लसराय तहसील को पंडित दीन दयाल उपाध्याय तहसील का नाम दिया गया। मुग़लसराय तहसील उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के अंतर्गत आता है।
1968 में मुग़लसराय तहसील कार्यालय से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित रेलवे स्टेशन पर संघ विचारक दीन दयाल उपाध्याय मृत अवस्था में पाए गए थे। इसी वजह से स्थानीय लोग इस क्षेत्र के नाम को बदलकर दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रखने की माँग कर रहे थे।
Uttar Pradesh Cabinet approves decision to rename Mughalsarai tehsil to Pandit Deen Dayal Upadhyay tehsil pic.twitter.com/oBFBLQcLg4
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुग़लसराय रेलवे स्टेशन के नाम को बदलने के लिए केंद्र सरकार को एक सुझाव भेजा गया। केंद्र सरकार को भेजे अपने सुझाव में उत्तर प्रदेश सरकार ने मुग़लसराय का नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन रखने की बात कही थी।
केंद्र सरकार ने राज्य की इस माँग को जून 2018 में स्वीकार कर लिया। इसके बाद मुग़लसराय रेलवे स्टेशन का नाम पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन हो गया। रेलवे स्टेशन के नाम को बदले जाने के करीब छ: महीने बाद अब उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मुग़लसराय तहसील का भी नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय तहसील करने का फ़ैसला किया है।
दीन दयाल उपध्याय नाम पर कई योजनाएँ भी चला रही है
पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर देश में कई सारी बड़ी सरकारी योजनाएँ चल रही हैं। इन योजनाओं में मुख्य रूप से दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना है।
यही नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों व पेंशनर्स तथा उनके परिवार के सदस्यों के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय राज्यकर्मी कैशलेस चिकित्सा योजना भी शुरू की है, जिसमें उन्हें किसी भी बड़े रोग के इलाज की कैशलेस सुविधा दी जाएगी। इस तरह भाजपा सरकार ने संघ विचारक व एकात्म मानवतावाद का सिद्धांत देने वाले दीन दयाल उपाध्याय जी को सालों बाद सही मायने में वह सम्मान दिया है, जिस सम्मान के वो सच्चे हक़दार थे।
गुजरात और झारखण्ड के बाद, अब यूपी में योगी कैबिनेट ने सामान्य वर्ग के ग़रीब लोगों को आरक्षण देने वाले प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। योगी कैबिनेट की मुहर के बाद सामान्य वर्ग वंचितों को शिक्षा व नौकरियों में 10 फ़ीसदी आरक्षण दिया जाएगा।
कैबिनेट में इसके अलावा डॉ. राम मनोहर लोहिया नलकूप योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 1.00 क्यूसेक क्षमता के 2000 नवीन नलकूपों के निर्माण संबंधी प्रस्ताव को भी पास किया गया।
सामान्य वर्ग के किन लोगों को मिलेगा आरक्षण का लाभ?
हालाँकि, इस बिल को ‘सवर्ण आरक्षण विधेयक’ कहकर दुष्प्रचारित किया गया लेकिन सत्य यह है कि यह धर्म और जाति से परे, सामान्य वर्ग के ग़रीब नागरिकों को लाभान्वित करने की योजना है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई मुस्लिम सामान्य वर्ग में आता है, और आर्थिक रूप से कमज़ोर है तो उसे 10 फ़ीसदी आरक्षण का फायदा मिलेगा। इसके अलावा बिल को स्वीकृति मिलने से पटेल-जाट-मराठाओं को भी इसका लाभ मिलेगा, क्योंकि ये सभी जातियाँ ‘सवर्ण’ के अंतर्गत ही आती हैं।
गुजरात, झारखंड में लागू हो चुका है आरक्षण
सामान्य वर्ग (आर्थिक रूप से कमजोर) आरक्षण बिल के तहत शिक्षा और रोज़गार के क्षेत्र में मिलने वाले आरक्षण को गुजरात सरकार पहले ही लागू कर चुकी है। गुजरात पहला ऐसा राज्य बना था जहाँ आरक्षण लागू किया गया हो। वहीं, गुजरात के बाद झारखंड ने समान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए आरक्षण लागू करने का प्रावधान किया था।