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PM मोदी के कार्यकाल में चौचक है भारत की वैश्विक चमक, 3 ग्लोबल रिपोर्ट के आँकड़ों ने लगाई मुहर

वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम के मंच पर भारत की जो छवि उभरी, वह चुनौतियों के साथ-साथ उम्मीदों पर भी खरी है। इसमें दो राय नहीं कि पिछले पाँच सालों में तमाम उतार-चढ़ाव के बाद भी भारत की छवि वैश्विक मानदंडों पर पहले से मज़बूत हुई है।

चाहे वो वैश्विक सलाहकार कंपनी प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स (Pricewaterhouse Coopers-PwC) की वैश्विक CEO सर्वे रिपोर्ट हो या ऑक्सफ़ैम रिपोर्ट या एडलमैन ट्रस्ट बैरोमीटर रिपोर्ट, इन तीनो के पैमानें पर भारत की छवि वैश्विक सन्दर्भों में निखरती नज़र आई है।

वैश्विक CEO रिपोर्ट के अनुसार, 2018 की तुलना में 2019 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार हालाँकि धीमी रहने के आसार हैं। लेकिन इसी रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सुखद भविष्यवाणी की गई है। बता दें कि प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स की वैश्विक CEO सर्वे रिपोर्ट के अनुसार यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ते हुए भारत 2019 में दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

वैश्विक CEO सर्वे रिपोर्ट में भारत के लिए क्या है ख़ास

प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स ने 90 से अधिक देशों में सितंबर-अक्तूबर 2018 के दौरान वैश्विक स्तर पर 1378 CEOs का वार्षिक सर्वे किया। दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर इस सर्वे रिपोर्ट को पेश किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, 2012 के बाद सबसे धीमी वृद्धि का अनुमान 2019 में लगाया गया है। अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों में यह धीमी वृद्धि देखने को मिलेगी। उत्तरी अमेरिका और यूरोप में यह अंतराल ज़्यादा दिखाई देगा।

अगस्त-2018 में अनुमानित विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत की ग्रोथ रेट

सर्वे में 29 फीसदी CEOs ने इस बात पर सहमति जताई थी और इनमें से बड़ी संख्या इन्हीं क्षेत्रों के CEOs की थी। इससे पहले, वर्ष 2018 में 48 फीसदी CEOs ने मंदी के आसार जताए थे। हालाँकि, सर्वे में 42 फीसदी CEOs ने यह भी माना कि 2019 में वृद्धि में सुधार की सम्भावना भी है, लेकिन यह 2018 के 57 फीसदी की तुलना में कम होने का अनुमान है। रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक के आँकड़ों के हवाले से कहा गया है कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ने 2011 से ही 4% के बैरियर को पार नहीं किया है।

2019 में निवेश के हिसाब से भारत सबसे भरोसेमंद देशों में शामिल

इस रिपोर्ट का ख़ासा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की सम्भावना है। जिसका कारण ये है कि भारत में निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद करने वाले CEOs की तादाद थोड़ी कम है। जबकि, 2019 में कहाँ निवेश किया जाए इसको लेकर अनिश्चितता की स्थिति में रहने वाले CEOs की सँख्या ज़्यादा है। लेकिन फिर भी भारत को सबसे भरोसेमंद देशों की सूची में रखा गया है। इसके पीछे भारत में राजनीतिक स्थिरता के साथ शासन का कठोर निर्णय लेने के साथ व्यापार के लिए भारत में समुचित माहौल उपलब्ध कराना भी है।

रिपोर्ट में लगभग  8% CEOs का स्पष्ट मानना है कि भारत उनकी वृद्धि के लिये अहम है। जबकि 15 फीसदी CEOs यह नहीं जानते कि कहाँ निवेश किया जाए। सर्वे रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बेहतर निवेश बाज़ार के तौर पर भारत अब जापान और ब्रिटेन से आगे निकल गया है। इस रिपोर्ट के ही अनुसार, ज़्यादातर निवेश बाजारों की सूची में भारत एक उभरता हुआ आकर्षक निवेश अनुकूल देश है।

विश्व अर्थव्यवस्था में भारत के पाँचवें स्थान पर आने की संभावना

प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स की वैश्विक CEO सर्वे रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है कि 2019 में भारत विश्व अर्थव्यस्था में पाँचवां स्थान प्राप्त कर सकता है। वैश्विक अर्थव्यस्था में भारत की रैंकिंग अभी छठवीं है।

रिपोर्ट में बताया गया है लगभग समान विकास दर और जनसंख्या के कारण ब्रिटेन और फ्राँस दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में अक्सर आगे-पीछे होते रहते हैं। लेकिन यदि भारत इस सूची में आगे निकलता है तो उसका स्थान स्थाई रहेगा।

प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स की वैश्विक अर्थव्यवस्था निगरानी (ग्लोबल इकोनॉमी वॉच) रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस वर्ष (2019 में) ब्रिटेन की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 1.6%, फ्राँस की 1.7% तथा भारत की 7.6% रहने की सम्भावना है।

एडलमैन ट्रस्ट बैरोमीटर रिपोर्ट-2019: भारत विश्वसनीय देशों में शामिल

वैश्विक CEO रिपोर्ट और ऑक्सफ़ैम रिपोर्ट के अलावा एडलमैन ट्रस्ट बैरोमीटर रिपोर्ट भी दावोस में विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम) के वार्षिक सम्मेलन शुरू होने से पहले जारी की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत कारोबार, सरकार, NGOs और मीडिया के मामले में दुनिया के सबसे विश्वसनीय देशों में शामिल है। हालाँकि, देश के कारोबारी ब्रांडों की विश्वसनीयता थोड़ी कम ज़रूर हुई है। जिसके जल्द ही सुधरने के आसार हैं।

वैश्विक विश्वसनीयता के पैमाने पर देंखे तो भारत की वैश्विक विश्वसनीयता सूचकांक 3 अंक के सुधार के साथ 52 अंक के आँकड़े पर पहुँच गया है। इस रिपोर्ट में चीन जागरूक जनता और सामान्य आबादी के भरोसा सूचकांक में क्रमश: 79 और 88 अंकों के साथ शीर्ष पर है। जबकि, भारत इन दोनों श्रेणियों में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहा। बता दें कि एडलमैन ट्रस्ट बैरोमीटर की यह रिपोर्ट NGOs, कारोबार, सरकार और मीडिया में भरोसे के औसत पर आधारित है।

ऑक्सफैम रिपोर्ट: क्या कहती है भारत के बारे में

प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स की वैश्विक CEOs की उपरोक्त रिपोर्ट के साथ ऑक्सफैम ने भी अपनी रिपोर्ट जारी की। जानकारी के लिए बता दूँ कि 1942 में स्थापित ऑक्सफैम 20 स्वतंत्र चैरिटेबल संगठनों का एक संघ है। यह वैश्विक स्तर पर ग़रीबी उन्मूलन के लिये काम करता है और ऑक्सफ़ैम इंटरनेशनल इसकी अगुवाई करता है। वर्तमान में विनी ब्यानिमा इस गैर-लाभकारी समूह की कार्यकारी निदेशक हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अरबपतियों की संपत्ति में 2018 में प्रतिदिन 2,200 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। इस दौरान देश के शीर्ष 1% अमीरों की संपत्ति में 39 % की वृद्धि हुई। हालाँकि इस दौरान 50% ग़रीब आबादी की संपत्ति में भी 3% की बढ़ोतरी हुई है। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश के शीर्ष 9 अमीरों की संपत्ति 50 फीसदी ग़रीब आबादी की संपत्ति के बराबर है। यह आँकड़ा पहली नज़र में भयावह दिखता ज़रूर है, लेकिन आय की अवधारणा पर एकदम सामान्य बात है, चूँकि अमीरों के पास पहले से ही ज़्यादा संपत्ति है, इसलिए उनके निवेश की तुलना में वृद्धि भी उसी अनुपात में होती है। इस अंतराल को भरने में अभी काफ़ी वक़्त लगने के आसार हैं।

इस रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि भारत में रहने वाले 13.6 करोड़ लोग वर्ष 2004 से कर्ज़दार बने हुए हैं। यह देश की सबसे ग़रीब आबादी का 10% है। जिसे अधिकांश मीडिया रिपोर्टों में इस तरह पेश किया गया कि भारत की ये 10% आबादी 2014 के बाद ग़रीबी के दायरे में आई है। जबकि ये आँकड़ा 2004 के बाद का है। 2014 के बाद मोदी सरकार की तमाम योजनाओं के फ़लस्वरूप ग़रीबी रेखा के नीचे के लोगों को जहाँ मनरेगा से निश्चित रोज़गार मिला, वहीं उन्हें डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम के तहत सीधे लाभ भी। साथ ही उज्ज्वला, जन-धन योजना, मुद्रा योजना एवं अन्य योजनाओं के तहत भी ग़रीबों-किसानों की स्थिति में काफ़ी सुधार आया है।

हालाँकि, आय में बढ़ोतरी के बाद वर्ग अंतराल में कमी आने के बावजूद भी भारत में विषमता बनी हुई है, रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि भारत की शीर्ष 10% आबादी के पास देश की कुल संपत्ति का 77.4% हिस्सा है और इनमें से सिर्फ़ 1% आबादी के पास देश की कुल संपत्ति का 51.53% हिस्सा है। जबकि, 60% आबादी के पास देश की सिर्फ़ 4.8% संपत्ति है।

ऑक्सफ़ैम रिपोर्ट में संभावनाशील भारत की तस्वीर पेश करते हुए यह भी कहा गया है कि 2018 से 2022 के बीच भारत में प्रतिदिन 70 नए करोड़पति बनेंगे। पिछले साल, 2018 में देश में 18 नए अरबपति बने और इस प्रकार, अरबपतियों की कुल संख्या बढ़कर 119 हो गई है। इनकी संपत्ति 2017 में 325.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2018 में 440.1 अरब डॉलर हो गई है।

दुनिया भर में 10 अरब डॉलर का काम महिलाएँ मुफ़्त में करती हैं

ऑक्सफ़ैम रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में घर और बच्चों की देखभाल करते हुए घरेलू महिलाएँ सालभर में कुल 10 हज़ार अरब डॉलर के बराबर काम करती हैं, जिसका उन्हें कोई भुगतान नहीं किया जाता। यह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ऐपल के वार्षिक कारोबार का 43 गुना है।

इसी सन्दर्भ में, रिपोर्ट में भारत की महिलाओं का भी जिक्र है, भारत में महिलाएँ घर और बच्चों की देखभाल जैसी जो अवैतनिक काम करती हैं, उसका मूल्य देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3.1% के बराबर है। इस तरह के कामों में शहरी महिलाएँ प्रतिदिन लगभग 312 मिनट और ग्रामीण महिलाएँ 291 मिनट लगाती हैं। इसकी तुलना में शहरी क्षेत्र के पुरुष बिना भुगतान वाले कामों में सिर्फ 29 मिनट ही लगाते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले पुरुष 32 मिनट ख़र्च करते हैं।

फ़िलहाल भारतीय सन्दर्भ में अभी घरेलू श्रम का भुगतान दूर की कौड़ी है। फिर भी यहाँ की मेहनतकश आबादी अनेक संभावनाओं से भरपूर है। आज वैश्विक पटल पर भारत की असीम संभावनाओं पर दुनिया की नज़र है। आने वाले दौर में निवेश और व्यापार दोनों के लिए भारतीय माहौल अनुकूल होगा।

इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और रिस्क लेने की क्षमता की सराहना करनी होगी। पिछले पाँच सालों में उनके द्वारा चलाई गई विभिन्न योजनाओं के साथ, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाये गए कई कठोर क़दम हैं जिनके परिणाम न सिर्फ़ भारत में बल्कि विश्व पटल पर भी नज़र आ रहें है। चाहे वह इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के रूप में हो, बिजली उत्पादन और वितरण में सुधार, मेक इन इंडिया, भ्रष्टाचार पर लग़ाम कसने के लिए नोटबंदी जैसा कठोर कदम, जिसका परिणाम टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी के रूप में नज़र आया।

किसी भी देश में विकास योजनाओं को लागू करने में धन की आवश्यकता होती है। जिसकी भरपाई सरकार विभिन्न प्रकार के करों से करती है। टैक्सेशन में सुधार के लिए ही GST लागू हुआ, जिससे एक तरफ़ जहाँ मुद्रास्फीति में सुधार हुआ वहीं सरकार का कर दायरा भी बढ़ा। जिसका उपयोग मुद्रा योजना, उज्ज्वला योजना, जन आरोग्य योजना के साथ ही ‘सबका साथ, सबका विकास’ को मूलमंत्र मानते हुए मोदी सरकार ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जन-जन के सम्पूर्ण विकास का ख़ाका खींचते हुए बदलते भारत की तस्वीर पेश कर वैश्विक धरातल पर भी सुनहरे व संभावनाशील भारत से दुनिया का परिचय कराया।

SC ने भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले विदेशियों का ब्यौरा माँगा

असम में विदेशी बंदियों के लिए चलाए जा रहे हिरासत केंद्रों के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने जानकारी माँगी है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 10 साल के दौरान असम में हिरासत में लिए गए विदेशी नागरिकों की संख्या समेत कई अन्य जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता हर्ष मदर की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने यह निर्देश दिया।

दरअसल, यह याचिका राज्य के हिरासत केंद्रों और यहाँ लंबे समय से हिरासत में रखे गए विदेशी नागरिकों की स्थिति को जानने के लिए दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से हिरासत केंद्रों, वहाँ बंद बंदियों की अवधि और विदेशी नागरिक अधिकरण के समक्ष दायर उनके मामलों की स्थिति को लेकर सरकार से विवरण माँगा। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी इस संबंध में ब्यौरे उपलब्ध कराने को कहा है।

पीठ ने कहा कि सरकार 10 साल के दौरान भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले विदेशियों का साल के हिसाब से ब्यौरा दे। बता दें कि, अधिकारियों को सभी विवरण उपलब्ध कराने के लिए तीन हफ़्ते का समय दिया गया है, और अब पीठ ने मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय की है।

हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय को सौंपे गए हैं कुछ घुसपैठिए

बीते दिनों 21 बांग्लादेशी नागरिकों को असम बॉर्डर पुलिस और बीएसएफ की अगुवाई में बांग्लादेश राइफल्स और बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को सौंप था। बता दें कि, आए दिन बांग्लादेशी नागरिकों के चोरी-छिपे भारतीय सीमा में घुसने का मामला सामने आता रहता है। चूँकि बांग्लादेश के गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों के लिए भारत में आसानी से मज़दूरी करने और रोज़गार के मौके मिल जाते हैं, इसी आस में सीमा पार कर ये लोग अक्सर भारत में घुस आते हैं।

घुसपैठ के खिलाफ हो चुका है आंदोलन

बांग्लादेशी घुसपैठ से परेशान होकर 1979 से 1984 तक 6 साल ‘अखिल असम छात्र संघ’ ने इनके खिलाफ आंदोलन किया था। इसके बाद असम में 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के साथ असम समझौता (असम एकॉर्ड) पर हस्ताक्षर हुआ था। इसमें असम की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा और उनके क्रियान्वन के लिए कई माँगों पर सहमति बनी थी।

मध्य प्रदेश: भाजपा नेताओं की मौत के बीच राज्य के गृह मंत्री का शर्मनाक बयान

मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद भाजपा के कई नेताओं पर जानलेवा हमला हो चुके हैं। यही नहीं राज्य के कई नेताओं को अपनी जान भी गँवानी पड़ी। भाजपा नेताओं की मौत के बीच राज्य के गृहमंत्री बाला बच्चन ने बेहद शर्मनाक बयान दिया है।

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री बाला बच्चन ने कहा, “भाजपा राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार बनने की बात को पचा नहीं पा रही है। रतलाम व मंदसौर घटना में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ व भाजपा नेताओं के हाथ होने की संभावना है।” जबकि सच्चाई यह है कि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद राजनैतिक हत्याओं का दौर रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है।

21 जनवरी 2019  को ग्वालियर भाजपा के ग्रामीण जिला मंत्री नरेंद्र रावत के भाई छतरपाल सिंह रावत की लाश पार्वती नदी के पुल के पास मिली थी। प्रथम दृष्टया यह धारदार हथियार से गोदे जाने का मामला लगता था। छतर सिंह के शरीर पर ज़ख़्म के कई निशान भी मिले थे।

मृतक छतरपाल सिंह रावत खुद भी भाजपा कार्यकर्ता थे। हलाँकि, पुलिस ने पहली नजर में इसे आपसी रंजिश बताया था और पंचनामे के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया था। ‘आपसी रंजिश’ शब्द को भी अगर अंतिम सत्य मान लिया जाए तो भी मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए कानून-व्यवस्था की लचर स्थिति पर खुद को पाक-साफ़ बताना बहुत मुश्किल होगा। चुनाव से पहले कमलनाथ ने ‘उन्हें देख लेंगे’ की धमकी भी दी थी।

मध्य प्रदेश में राजनैतिक हत्याओं की बात करें तो पिछले छह दिनों में अब तक पाँच भाजपा नेताओं/कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है:

16 जनवरी (बुधवार) – इंदौर में कारोबारी और भाजपा नेता संदीप अग्रवाल को सरेआम गोलियों से भून दिया गया था।

17 जनवरी (गुरुवार) – मंदसौर नगर पालिका के दो बार अध्यक्ष रहे भाजपा नेता प्रहलाद बंधवार की सरे बाजार गोली मारकर हत्या कर दी गई।

20 जनवरी (रव‍िवार) – गुना में परमाल कुशवाह को गोली मारी गई। परमाल भारतीय जनता पार्टी के पालक संयोजक शिवराम कुशवाह के रिश्तेदार थे और खुद भी भाजपा के कार्यकर्ता थे।

20 जनवरी (रव‍िवार) – बड़वानी में भाजपा के मंडल अध्यक्ष मनोज ठाकरे को पत्थरों से कुचलकर बेरहमी से मार डाला गया।

21 जनवरी (सोमवार) – ग्वालियर भाजपा के ग्रामीण जिला मंत्री नरेंद्र रावत के भाई छतरपाल सिंह रावत की लाश मिली। छतरपाल सिंह रावत खुद भी भाजपा कार्यकर्ता थे।

‘हिन्दू अमेरिकी’ के नाम पर टार्गेट करने वालों को सांसद तुलसी गबार्ड ने दिया जवाब

अमेरिका में 2020 में राष्ट्रपति चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करने जा रहीं तुलसी गबार्ड ने उन आलोचकों को करारा जवाब दिया है, जिन्होंने उनपर हिंदू अमेरिकी होने का आरोप लगाया था। डेमोक्रैटिक पार्टी की सांसद तुलसी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेरी मुलाकात को इस बात के साक्ष्य के लिए दर्शाया गया, जबकि किसी पीएम से मिलने वाले गैर हिंदू नेताओं पर कोई सवाल नहीं उठाया गया।

तुलसी ने कहा कि इससे पहले पीएम मोदी से राष्ट्रपति ओबामा, मंत्री (हिलेरी) क्लिंटन, राष्ट्रपति (डॉनल्ड ) ट्रंप और कॉन्ग्रेस के मेरे कई साथी मिल चुके हैं लेकिन उनको लेकर किसी ने कोई टिपप्णी नहीं की थी। यह दोहरे मापदंड को दर्शाता है। बता दें कि, 37 साल की तुलसी ने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फै़सला किया है, और ऐसा करने वाली वह अमेरिकी इतिहास में पहली हिंदू हैं।

अमेरिका कॉन्ग्रेस में चुनी गई पहली हिंदू महिला हैं तुलसी

बता दें कि तुलसी अमेरिकी कॉन्ग्रेस में चुनी जाने वाली न सिर्फ पहली हिन्दू महिला हैं बल्कि राष्ट्रपति की दावेदारी पेश करने वाली पहली हिंदू-अमेरिकी दावेदार भी हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू-अमेरिकी दावेदार होने का मुझे गर्व है।

बता दें कि, ‘रिलिजियस न्यूस सर्विसेज’ में एक संपादकीय में उनके, समर्थकों एवं दानकर्ताओं को टार्गेट करते हुए उन्हें हिंदू अमेरिकी बताया गया था। जिसपर उन्होंने कहा कि उनको, और उनके समर्थकों को, टार्गेट करते हुए ‘हिंदू अमेरिकी’ का टैग लगाया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या धर्म के आधार पर हमें बाँटना ठीक है? कल क्या किसी को यहूदी या मुस्लिम अमेरिकी कहना सही होगा? इन सभी बातों से केवल धार्मिक भेदभाव की ही बात सामने आती है।

‘राहुल को इस क़दर बेनक़ाब करूँगा कि वो लोगों को मुँह दिखाने के लायक नहीं रहेगा’

लोकसभा चुनाव से पहले ओडिशा में कॉन्ग्रेस पार्टी की नैय्या डूबती नज़र आ रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कुछ दिनों पहले स्पष्ट कर दिया था कि लोकसभा चुनाव में बीजू जनता दल, कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेगी।

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा गठबंधन पर दिए गए बयान के बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे वाला काम किया। गठबंधन से अलग होने के ऐलान के बाद राहुल ने चिटफंड घोटाले के बहाने ओडिशा के मुख्यमंत्री पर हमला किया।

राहुल गाँधी ने अपने बयान में कहा कि नवीन पटनायक प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रिमोट कंट्रोल किए जा रहे हैं। जब इस मामले में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने राहुल के इस बयान पर सिर्फ़ दो शब्द ख़र्च करते हुए कहा – “बिल्कुल बकवास।”

ओडिशा में राहुल गाँधी की समस्या कम होने की बजाय और अधिक बढ़ती ही जा रही है। प्रियंका गाँधी को पूर्वी यूपी कॉन्ग्रेस महासचिव बनाए जाने के फ़ैसले ने भले ही हिंदी पट्टी के कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश भरा हो, लेकिन ओडिशा में इसका कोई भी असर देखने को नहीं मिल रहा है। यही वजह है कि एक के बाद एक कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता अपना पाला बदल रहे हैं।

सोमवार को कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व मंत्री श्रीकांत जेना ने राहुल गाँधी पर ज़ोरदार हमला करते हुए कहा कि वह राहुल को इस क़दर बेनक़ाब कर देंगे कि वो लोगों को मुँह दिखाने के लायक नहीं रह जाएँगे। श्रीकांत जेना ने राहुल गाँधी पर आरोप लगाते हुए कहा, “मैं ओडिशा में अवैध खनन, सामाजिक न्याय के मुद्दों पर राहुल गाँधी से उनका रुख़ जानना चाहता हूँ। वह कुछ कहते क्यों नहीं हैं? उन्हें स्पष्ट करना चाहिए, क्योंकि वह दोहरी बात कर रहे हैं।”

जानकारी के लिए आपको बता दें कि पिछले दिनों कॉन्ग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ आवाज उठाने की वजह से पूर्व विधायक कृष्णा चंद्र सागरिया के साथ श्रीकांत जेना को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।  

कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष ने बदला पाला

साल की शुरुआत में ही राहुल बाबा को तब झटका लगा जब उनकी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष नबा किशोर दास ने पार्टी छोड़कर बीजेडी ज्वॉइन कर ली। एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते राहुल गाँधी की असफलता की तौर पर नबा किशोर दास के इस फ़ैसले को देखा जाना चाहिए। ऐसा इसलिए नहीं क्योंकि कॉन्ग्रेस कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी छोड़ा बल्कि इसलिए क्योंकि नबा किशोर दास ने पार्टी छोड़ते हुए कहा कि जनता चाहती है कि वो कॉन्ग्रेस की बजाय बीजेडी से चुनाव लड़े। नबा के इस बयान से साफ़ पता चलता है कि ओडिशा की जनता कॉन्ग्रेस को पसंद नहीं कर रही है।

पहले से कमज़ोर पार्टी की हालत और ख़स्ता हुई

ओडिशा में 147 विधानसभा सीट हैं। पिछले चुनाव में कॉन्ग्रेस सिर्फ़ 16 सीटों पर जीत दर्ज़ करा पाई थी। राज्य में लोकसभा की 21 सीटें हैं,कॉन्ग्रेस को इनमें से एक भी सीट नहीं मिली थी। इससे अंदाज़ा लगाना साफ़ है कि कॉन्ग्रेस पहले ही सरेंडर कर चुकी है। कॉन्ग्रेस से बाक़ी बची उम्मीद इसलिए मद्धिम हो रही हैं क्योंकि पिछले कुछ सालों में भाजपा मज़बूती से राज्य में उभरी है। ऐसे में जब कई विधायक पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं ओडिशा में कॉन्ग्रेस की नैय्या अब डूबती ही नज़र आ रही है।

ग़रीब BJP विधायक को मिला जनता का साथ, पक्के मकान के लिए जनता ने दिया चंदा

मध्य प्रदेश में विजयपुर विधानसभा सीट के आदिवासी बीजेपी विधायक सीताराम का संघर्षपूर्ण जीवन किसी मिसाल से कम नहीं। आपको जानकर हैरानी होगी कि एक विधायक होने के बावजूद उनके सिर पर आज तक पक्की छत नहीं थी। वो अपनी पत्नी के साथ आज भी कच्चे मकान में ही रहते थे। आपको बता दें कि पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने कॉन्ग्रेस के रामनिवास रावत को शिक़स्त दी थी। सीताराम इस सीट से लगातार तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं।

विधायक सीताराम को भले ही ग़रीबी के चलते कच्चे मकान में अपना गुजर-बसर करने में दिक़्कत ना हो, लेकिन उनका इस तरह की तंगी हालत में जीना उनके पड़ोसियों को बिल्कुल नहीं भाया। इसलिए उन सभी ने एकजुट होकर फ़ैसला लिया और ग़रीब विधायक सीताराम के कच्चे घर को पक्के घर में बदलने का बीड़ा उठाया। इसके लिए लोगों ने ₹100-1000 चंदे के रूप में दिए।      

विधायक सीताराम श्योपुर ज़िले के कराहल विकासखंड के पिपरानी गांव के रहने वाले हैं। यही वो गाँव है जहाँ वो दो कमरों के एक छोटे से कच्चे घर में अपना जीवन बिता रहे थे, जिसे अब पक्के मकान का स्वरूप दिया जा रहा है। क्षेत्रीय लोगों को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं थी कि उनका जनप्रतिनिधि झोपड़ीनुमा घर में रहे।

वहाँ के लोगों का कहना है कि सीताराम ने अपने जीवन में हमेशा संघर्ष किया। जिसे जब ज़रूरत होती है विधायक सीताराम उसके साथ होते हैं। किसी भी व्यक्ति की मदद करने में उन्हें कभी कोई संकोच नहीं होता। विधायक सीताराम ने कहा, ”मेरे पास पैसा नहीं है, इसलिए अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में रहता हूँ। लोगों ने सहयोग के तौर पर पक्का मकान बनाने के लिए मुझे 100 से 1000 रुपए दिए हैं। ये पैसे लोगों ने मुझे विजयपुर सीट से जीतने के बाद स्वागत के दौरान दिये। इतना ही नहीं, विजयपुर में मुझे जनता ने सिक्कों से भी तौला है। इस रक़म से मकान निर्माण का शुरू कर दिया गया है।”

विधायक सीताराम की पत्नी इमरती बाई ने कहा कि उनके पति लंबे समय से संघर्ष करते चले आ रहे हैं। स्थानीय लोगों की मदद से अब स्थिति सुधरने के आसार नज़र आ रहे हैं। लोगों के इस व्यवहार के लिए उन्होंने कहा कि उनके पति जनता के काम को अपना काम मानते हैं और इसलिए जनता भी उन्हें अपना मानती है।

जानकारी के मुताबिक, साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के लिए सीताराम को जो शपथ पत्र दिया था, उसके मुताबिक़ अब उनके पास केवल ₹46,733 शेष हैं, जिनमें से ₹25,000 नक़द और ₹21,733 रूपये दो बैंक खातों में जमा हैं। इसके अलावा, उनके पास 2.817 एकड़ ज़मीन और 600 वर्ग फुट की झोपड़ी है, जो उन्हें विरासत में मिले हैं। इसकी अनुमानित क़ीमत क़रीब ₹5,00,000 हो सकती है।

1.8 अरब लोगों के लिए तैयार है ‘सलाम वेब’ ब्राउज़र, ‘शरिया’ के हिसाब से होगा इसका संचालन

अभी तक आपने इंटरनेट को इस्तेमाल करने के लिए बहुत ब्राउज़र्स के अलग-अलग नाम सुने होंगे। ऐसे में मलेशिया का ‘सलाम वेब’ नाम का टेक स्टार्टअप एक अलग ही मोबाइल ब्राउज़र लेकर आया है।

इस मोबाइल ब्राउज़र ‘सलाम वेब’ की ख़ासियत है कि यह शरिया क़ानून के अनुरूप आपको इंटरनेट इस्तेमाल करने का अनुभव प्रदान करेगा। इस्लाम में जिन कार्यों की नामंज़ूरी है उन सभी कार्यों के बारे में सर्च करने पर ये ब्राउज़र आपको अलर्ट भेजेगा। जैसे – पोर्नोग्राफ़ी, शराब और जुआ खेलना आदि।

सलाम वेब टेकनॉलजी की मैनेजिंग डॉयरेक्टर हसनी ज़रीना मोहम्मद ख़ान के अनुसार इस ब्राउज़र को मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया में उपयोगकर्ताओं के लिए बनाया गया है। ये ब्राउज़र मैसेज सेवा और समाचार का आदान-प्रदान करने वाली सेवाओं से भी सुसज्जित है।

मैनेजिंग डॉयरेक्टर का कहना है कि उनकी कंपनी का लक्ष्य है कि वो वैश्र्विक स्तर पर इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली लगभग 1.8 बिलियन मुस्लमान आबादी को अपने साथ लें सकें।

वो इस ब्राउज़र पर बात करते हुए आगे बताती हैं कि इटरनेट पर अच्छी और बुरी दोनों ही चीज़ें उपलब्ध रहेंगी। इसलिए ‘सलाम वेब’ के ज़रिए वो उपभोक्ता के समक्ष सिर्फ़ अच्छी चीजों को लेकर आएँगी।

इस ब्राउज़र पर इस्लाम से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी उपलब्ध होंगी जिसमें आज़ान और दुआ के समय के बार में भी जानकारी दी जाएगी। इसमें ‘क़िबला’ को भी इंगित किया जाएगा जो कि जो मक्का में काबा की दिशा है जिसकी तरफ बैठकर लोगों को दुआ पढ़नी चाहिए।

AAP की विफलताओं को बेनक़ाब करने के लिए BJP ने शुरू किया ढोल आंदोलन

आम चुनावों के लिए अपने अभियान को तेज करते हुए, भारतीय जनता पार्टी ने रविवार (27-01-2019) को राजधानी में आम आदमी पार्टी के ख़राब शासन को बेनक़ाब करने के लिए ढोल आन्दोलन शुरू कर दिया।

अशोक रोड स्थित अपने आधिकारिक आवास से अभियान की शुरुआत करते हुए, केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है।

अपने बयान में उन्होंने कहा कि अस्पतालों की स्थिति ख़राब है, मुहल्ला क्लीनिकों में कोई डॉक्टर नहीं हैं, सरकारी स्कूलों में छात्रों के नामांकन में गिरावट दर्ज़ की गई है और प्रदूषण का स्तर भी काफ़ी बढ़ गया है। टैंकरों के माध्यम से मलिन बस्तियों और पुनर्वास कॉलोनियों में दूषित पानी वितरित किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि न्यूनतम बिजली शुल्क में वृद्धि की गई है। दिल्ली में AAP सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता हर पार्क और इलाक़े में जाएँगे और दिल्लीवासियों को इस बारे में सूचित करेंगे।

दिल्ली भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली में सात सांसदों ने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए ज़बरदस्त काम किया है, जिसे हर दिल्ली की जनता को बताया जाना चाहिए था। तिवारी ने कहा, “दिल्ली में सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए हमें केंद्र से अतिरिक्त 55,000 करोड़ रुपए मिले।”

AAP के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मोदी के ख़िलाफ़ अपनी पार्टी के राष्ट्रव्यापी अभियान ने बीजेपी को केजरीवाल के ख़िलाफ़ अभियान शुरू करने के लिए प्रेरित किया है। “मतदाताओं के हित के लिए दिल्ली में एक ठोस बहस के लिए मैं तिवारी और गोयल जी को आमंत्रित करता हूँ। आइए एक-एक करके मोदी जी और केजरीवाल के चुनावी वादों की चर्चा करें।”

शर्मनाक! कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व सीएम ने की महिला के साथ अभद्रता

कर्नाटक में जहाँ गठबंधन की सरकार आपसी मुद्दे को निपटाने में जुटी है, वहीं कॉन्ग्रेस के पूर्व सीएम सिद्धारमैया अभी भी मुख्यमंत्री वाले अंदाज़ में ही जनता से मिल रहे हैं। अहम इतना हावी है कि एक महिला जब सिद्धारमैया से उन्हीं के बेटे की शिकायत लेकर उनके पास पहुँची, तो उन्होंने अभद्रता की। सिद्धारमैया ने महिला से अभद्रता करते हुए माइक छीन लिया और कंधा पकड़ जबरदस्ती बैठा भी दिया।

रिपोर्ट की मानें तो जमीला नाम की महिला उनके विधायक बेटे की शिकायत लेकर सिद्धारमैया के पास पहुँची थी। लेकिन जैसे ही उसने उनके सामने अपनी बात शुरू की, सिद्धारमैया भड़क गए और महिला से अभद्रता करते हुए उसके कंधे को झटकटे हुए उसे बैठा दिया।

बीजेपी ने की बर्खास्त करने की माँग

मामले के प्रकाश में आने के बाद बीजेपी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से उन्हें बर्खास्त करने की माँग की है। बीजेपी ने इस बहाने कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी, महासचिव प्रियंका गाँधी और अध्यक्ष राहुल गाँधी पर सवालिया निशान भी खड़े किए। बता दें कि, सिद्धारमैया वर्तमान में कर्नाटक में प्रतिपक्ष के नेता हैं और इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

गरीबों को गारंटी करके न्यूनतम आमदनी देंगे: राहुल गाँधी का ‘ऐतिहासिक निर्णय’

राजस्थान और मध्य प्रदेश में आम जनता को कर्ज़माफ़ी के वायदे करके जीतने वाले राहुल गाँधी ने नया चुनावी दाव फेंका है। इस बार उन्होंने एक ‘ऐतिहासिक निर्णय’ लिया है कि 2019 चुनाव जीतने के बाद वो गारंटी के साथ हर गरीब व्यक्ति को एक न्यूनतम आमदनी दिलवाएँगे।

राहुल गाँधी की इस घोषणा को कॉन्ग्रेस पार्टी के हैंडल से ट्वीट किया गया जहाँ उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि 2019 चुनाव जीतने के एकदम बाद कांग्रेस पार्टी गारंटी करके न्यूनतम आमदनी देने जा रही है।”

‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम’ एक ऐसा कॉन्सेप्ट है जहाँ सरकार अपने नागरिकों के लिए एक तय राशि उपलब्ध कराती है जिससे उनका जीवन चलता रहे और उन्हें बुनियादी परेशानियाँ न हों। इस सन्दर्भ में सिक्किम की सत्ताधारी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में इसका ज़िक्र किया है।

राहुल गाँधी का यह कदम सतही तौर पर सुनने में अच्छा लगता है लेकिन उनके इस बयान से उनकी आर्थिक समझ पर भी सवाल खड़े होते हैं। जहाँ सरकारें लगातार फ़िस्कल डेफिसिट को तय दायरे में रखने में जूझती रही हैं, वहाँ इस तरह की बात करना लुभावनी खोखली घोषणा से ज़्यादा कुछ भी नहीं।

भारत में गरीबों के लिए सब्सिडी वाली तमाम योजनाएँ हैं जो उन्हें कम दाम पर अनाज से लेकर, घर, बिजली, पानी और गैस तक उपलब्ध करा रहे हैं। वैसे ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान योजना है जहाँ उनका मुफ़्त उपचार संभव है।

इसके ऊपर से इस तरह की बात करना, और कोई आँकड़ा न देना कि अगर ऐसा होता है तो वो इसे कैसे करेंगे, बताता है कि उनकी समझ में समस्या है। दूसरी बात यह भी है कि राहुल गाँधी के परिवार और पार्टी द्वारा शासित इस देश में आज भी ‘गरीबी हटाओ’ के वेरिएशन में नारे और घोषणाएँ क्यों हैं?

गरीब हैं इस देश में, और उन्हें मनरेगा के तहत रोज़गार देने से लेकर आवास, शौचालय, बिजली, अनाज, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएँ हैं जो उन्हें धीरे-धीरे स्वाबलंबी बनाने की ओर ले जाने वाले हैं। जबकि, हमारे समाज में चुनावों में हर चीज फ़्री में देने के बाद, अब हर महीने एक तय राशि की गारंटी की बात करना न तो आर्थिक रूप से संभव दिखता है, न ही गरीबों के भविष्य के लिए सही होगा।

हाँ, अगर उन्हें दी जाने वाली सब्सिडी से इसके लिए पैसा उपलब्ध कराया जाए तो एक बार ऐसा सोचा भी जा सकता है। राहुल गाँधी को सिर्फ़ घोषणा करने की जगह पूरा प्लान बताना चाहिए कि ये संभव कैसे होगा। सिक्किम एक छोटा राज्य है, वहाँ की सामाजिक स्थिति अलग है, तो वहाँ की सरकार इस पर सोच सकती है। लेकिन, पूरे देश के गरीबों को ये सुविधा देना, अर्थ व्यवस्था पर बहुत ज़्यादा दबाव डाल सकता है।

शुरुआत के लिए उन्हें राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस योजना को लागू करना चाहिए, और फिर लोगों को समझाना चाहिए कि ये करना भी है, तो कॉन्ग्रेस की तरह करो।