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तमिलनाडु की प्राइवेट कंपनी में दिहाड़ी मजदूरी कर रहे थे बांग्लादेशी, पुलिस ने 7 को किया गिरफ्तार: उनके पास से आधार बरामद, कई संदिग्धों की निगरानी

बांग्लादेशी घुसपैठिए देश के कोने-कोने में फैल चुके हैं। समय-समय पर विभिन्न राज्यों की पुलिस इनकी पहचान करके गिरफ्तार कर रही है। तमिलनाडु के इरोड में पुलिस ने 7 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी बिना किसी कागजात के अवैध रूप से वहाँ रह रहे थे। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनके अलावा और कौन-कौन से घुसपैठिए यहाँ छिपे हुए हैं।

इरोड जिले की पुलिस ने बुधवार (19 जून 2024) को जिन सात बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया, वे पेरुंदुरई के पणिक्कम्पालयम में रह रहे थे। पुलिस इन सबकी जाँच कर रही है। गिरफ्तार किए गए के नाम- 26 वर्षीय एस मोनिरा, 24 वर्षीय जे मेगामुथा, 33 वर्षीय एस शेखली, 26 वर्षीय बी जाहिद मिया, 35 वर्षीय एम अनारुल इस्लाम, 40 वर्षीय एम मोनिरुल खाजी और 45 वर्षीय एन मेटून हैं।

पुलिस ने बताया, “पेरुंदुरई में SIPCOT कॉम्प्लेक्स में कई उत्तर भारतीय मजदूर काम कर रहे हैं। पेरुंदुरई पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि इनमें कई बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं और वे बिना उचित दस्तावेजों के यहाँ रह रहे हैं और काम कर रहे हैं। मंगलवार (18 जून 2024) को हमने पणिक्कम्पलायम इलाके में जाँच की, जहाँ कई उत्तर भारतीय मजदूर रहते हैं।”

पुलिस ने आगे बताया, “प्रारंभिक जाँच के आधार पर पुलिस ने दो महिलाओं समेत 13 लोगों को उचित दस्तावेजों के बिना क्षेत्र में रहने के संदेह में हिरासत में लिया। इसके बाद सभी को पुलिस स्टेशन लाया गया। जाँच में पुष्टि हुई कि मोनिरा और मेगामुथा समेत सात लोग उचित दस्तावेजों के बिना भारत में अवैध रूप से रह रहे थे। जाँच के बाद बुधवार को सभी सातों को गिरफ्तार कर लिया गया।”

तमिलनाडु पुलिस ने यह भी बताया कि इन 13 लोगों में 6 लोगों ने कहा कि उनके पास रहने और काम करने के लिए उचित दस्तावेज हैं। उन्होंने दस्तावेज जमा करने के लिए थोड़ा समय माँगा है। पुलिस का कहना है कि अगर वे दस्तावेज जमा नहीं करते हैं तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, कुछ बांग्लादेशियों के पास भारत का आधार कार्ड भी मिला है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “गिरफ्तार किए गए लोग पेरुंदुरई में एक निजी कंपनी में काम कर रहे थे। उनके पास पासपोर्ट, वीजा आदि जैसे आवश्यक दस्तावेज नहीं थे। इस कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया है। ये लोग दिहाड़ी मजदूरी करते थे। कुछ के पास भारत द्वारा जारी आधार कार्ड भी मिले हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया। आगे की जाँच जारी है।”

पत्रकार अजीत भारती को ‘नोटिस’ देने के लिए चोरों की तरह आई कर्नाटक पुलिस, UP पुलिस ले गई अपने साथ: बेंगलुरु में FIR दर्ज कर राष्ट्रवादी आवाज को दबाना चाहती है कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस सरकारे राष्ट्रवादी आवाजों को दबाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। अब कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने पत्रकार अजीत भारती के घर पुलिस भेजी है। कर्नाटक पुलिस के कुछ जवान सादी वर्दी में बिना किसी पूर्व सूचना के अजीत भारती के घर पहुँचे हैं।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक पुलिस के तीन जवान गुरुवार (20 जून, 2024) को नोएडा स्थित अजीत भारती के आवास पर पहुँचे। यहाँ वह लोग कुछ देर खड़े रहे। इसके बाद उन्होंने एक नोटिस अजीत भारती को दिया। कर्नाटक पुलिस के जवानों के साथ स्थानीय पुलिस भी नहीं थी।

इस विषय में ऑपइंडिया को अजीत भारती ने बताया कि कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने स्थानीय यूपी पुलिस के थाने को सूचना दी थी लेकिन बिना साथ लिए ही वह उनके आवास पर पहुँच गए थे। यह तीनों अजीत भारती के घर एक कैब से पहुँचे थे और उन्होंने वर्दी भी नहीं पहन रखी थी। अपने घर के आसपास अजीत भारती और उनके परिवार ने संदिग्ध गतिविधि देख कर स्थानीय पुलिस थाने को सूचना दी।

इसके बाद स्थानीय पुलिस यहाँ पहुँची और कर्नाटक पुलिस के इन तीनों जवानों को अपने साथ ले गई। कर्नाटक पुलिस के इन जवानों ने अजीत भारती को हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज किए गए मामले में एक नोटिस भी थमाया है। यह नोटिस बेंगलुरु के हाई ग्राउंड थाने से जारी किया गया है।

अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने यह नोटिस दिया है
अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने यह नोटिस दिया है

नोटिस में कहा गया है कि अजीत भारती ने समाज में घृणा और शत्रुता बढ़ाने के उद्देश्य से राहुल गाँधी को लेकर एक वीडियो बनाया है। इसी को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। अजीत भारती को कर्नाटक पुलिस ने आदेश दिया है कि वह नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर हाई ग्राउंड थाने में पेश हों।

गौरतलब है कि अजीत भारती के खिलाफ यह FIR 15 जून, 2024 को दर्ज करवाई गई थी। ये एफआईआर कॉन्ग्रेस कर्नाटक के कॉग्रेस कमेटी के लीगल सेल सचिव और सचिव बेके बोपन्ना ने कराई थी। FIR दर्ज कराते समय दावा किया गया था कि अजीत भारती ने 13 जून, 2024 को राहुल गाँधी को लेकर एक झूठा वीडियो बनाया जबकि गुरूवार (20 जून, 2024) को उनको दिए गए नोटिस में कहा गया है उनका वीडियो घृणा फैला रहा है इसलिए FIR दर्ज हुई है।

इजरायली मिले तो ‘मानवतावादी’ हो गए शाहिद अफरीदी, इस्लामी कट्टरपंथियों की गाली पड़ते ही जागा ‘उम्माह’: ली थी सेल्फी, दावा- मैंने फैन समझ फोटो खिंचवा ली

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी को एक सेल्फी के कारण अपने मुल्क के लोगों से गाली पड़ रही है। ये सेल्फी उन्होंने इजरायल के लोगों के साथ खिंची थी। बाद में इसे फ्रेंड्स ऑफ इजरायल की ओर से इसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया तो पाकिस्तानी इसे देख अफरीदी से नाराज हो गए कि आखिर उन्होंने इजरायल को समर्थन क्यों किया। अब इतने बवाल के बाद इस मामले में अफरीदी ने अपनी सफाई दी कि फोटो खिंचाते टाइम उन्हें लगा था कि वो लोग उनके फैन हैं। हालाँकि, अफरीदी की पोल फिर तब खुली जब ‘फ्रेंड्स ऑफ इजरायल’ अकॉउंट ने ही रिप्लाई देकर बताया कि फोटो खिंचाने वो लोग नहीं गए थे, बल्कि अफरीदी उनके पास आए थे।

क्या है मामला

अफरीदी की वायरल तस्वीर को ‘फ्रेंड्स ऑफ इजरायल’ ने अपने अकॉउंट पर साझा किया था। तस्वीर के साथ पोस्ट में लिखा था कि हमास द्वारा बंधक बनाए गए इजरायली को छुड़ाने के लिए पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने अपना समर्थन दिया है। इसी पोस्ट के नीचे तमाम पाकिस्तानी और मुस्लिमों ने उन्हें लानत भेजी थी। किसी ने उन्हें यहूदियों का एजेंट कहा था। किसी ने कहा कि उसे अफरीदी से घृणा आती है।

इन्हीं लानतों के बाद शाहिद अफरीदी ने लिखा, “कल्पना कीजिए कि आप मैनचेस्टर (यूके) की किसी सड़क पर टहल रहे हैं और तथाकथित प्रशंसक आपके पास सेल्फी लेने के लिए आते हैं। आप उनकी बात मान लेते हैं और कुछ ही क्षणों बाद, वे इसे ज़ायोनी समर्थन के रूप में अपलोड कर देते हैं। विश्वास नहीं होता! कृपया अपलोड की गई हर चीज़ पर विश्वास न करें।”

आगे अफरीदी ने कहा, “फिलिस्तीन में मासूम लोगों की जान जाते देखना वाकई दिल दहला देने वाला है। इसलिए, मैनचेस्टर में मेरे द्वारा शेयर की गई कोई भी तस्वीर या एसोसिएशन किसी भी ऐसी स्थिति के लिए मेरे समर्थन को नहीं दर्शाती है, जहाँ मानव जीवन दाँव पर लगा हो। मैं दुनिया भर के प्रशंसकों के साथ तस्वीरें लेता हूँ, और यह स्थिति भी अलग नहीं थी। मैं शांति के लिए दुआ करता हूँ, मैं इस जंग के अंत के लिए दुआ करता हूँ, मैं आजादी के लिए दुआ करता हूँ।”

उनके इस ट्वीट के बाद भी मुस्लिमों को यकीन नहीं हुआ कि वो सच बोल रहे हैं। सवाल हुआ कि क्या वो पढ़ नहीं पाए कि उनके फैंस के हाथ में क्या है। इधर ‘फ्रेंड ऑफ इजरायल’ ने भी कहा, “शाहिद अफरीदी तुमने खुद तस्वीर ली थी हमारे प्लेकार्ड के साथ, फिर हमारे साथ पोज करने को तैयार हुए। आप खुद से आए थे और अपनी मर्जी से सेल्फी दी थी। ये बेहद निराशजनक है कि आपउसमें से हैं जो मासूम बच्चों, महिलाओं और पुरुषों की रिहाई का विरोध कर रहे हैं जिन्हें हमास के आतंकियों ने बंधक बनाया हुआ है।”

इस ट्वीट के सामने आने के बाद शाहिद अफरीदी की और भी ज्यादा फजीहत हो रही है। अकॉउंट से कहा गया कि ये सब शाहिद अफरीदी इस्लामवादियों के दबाव में आकर बोल रहे हैं। अकॉउंट से कहा गया कि ये सब शाहिद अफरीदी इस्लामवादियों के दबाव में आकर बोल रहे हैं। अन्य पोस्ट में भी कहा गया है कि जब अफरीदी उनसे मिलने आए थे उन्होंने मास्क लगाया ता। उन्होंने खुद हमारे समूह के लोगों से एक लीफलेट लिया और फिर फोटो खींची। अफरीदी को अंग्रेजी पढ़नी आती है। पूरा समूह बड़े-बड़े पोस्टर लेकर खड़ा था। साफ लिखा था कि वो इजरायली हैं जो बंधक बनाए गए। उन्होंने फिर भी फोट खिंचाई। उन्होंने सब कुछ अपनी मर्जी से किया। अब इस्लामी कट्टरपंथियों की वजह से मुकर रहे हैं।

एक ने परीक्षा से पहले ही सॉल्व कर लिए सवाल, दूसरी परीक्षा देने ही नहीं गई… फिर भी कॉन्ग्रेस राज में बन गईं लेक्चरर: RPSC पेपर लीक में चार्जशीट से चौंकाने वाले खुलासे

कॉन्ग्रेस के शासनकाल में राजस्थान में पुलिस से लेकर हिंदी लेक्चरर की हुई भर्ती परीक्षा में पेपरलीक से लेकर तमाम अनियमितताएँ सामने आई हैं। सब इंस्पेक्टर भर्ती, सीएचओ भर्ती, लाइब्रेरियन भर्ती और वरिष्ठ अध्यापक भर्ती सहित कई परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की लेक्चरर भर्ती परीक्षा 2022 में भी पेपर लीक और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।

इस परीक्षा में फर्जी डिग्री सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी लेने और डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास करने का खुलासा हुआ है। करीब तीन महीने पहले अजमेर की सिविल लाइन थाना पुलिस ने दो युवतियों- ब्रह्मा कुमारी और कमला को गिरफ्तार किया था। इस मामले में जाँच करने वाले एसओजी ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की है। चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

चार्जशीट से पता चला है कि फर्जी डॉक्यूमेंट पेश करने वाली युवती ब्राह्मा कुमारी ने परीक्षा से पहले ही सॉल्व पेपर हासिल कर लिया था। उसने गंगरार (चित्तौड़गढ़) की मेवाड़ यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्री से नौकरी हासिल करने की कोशिश थी। सांचौर निवासी ब्रह्मा कुमारी ने सुरेश बिश्नोई और ओमप्रकाश मांजू के साथ मिलकर परीक्षा से पहले ही पेपर सॉल्व कर लिया था।

इस परीक्षा में ब्रह्मा कुमारी और कमला का चयन भी हो गया और वे मेरिट में आ गईं। इसके बाद RPSC ने दोनों के दस्तावेज चेक किए तो उसमें गड़बड़ी मिली। आवेदन के समय किसी अन्य विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करना बताया था, जबकि चयन होने के बाद किसी दूसरे विश्वविद्यालय की डिग्री पेश की थी। इसके बाद RPSC ने इस मामले में सिविल लाइन थाने में FIR दर्ज करा दी।

इसकी जाँच एसओजी को सौंपी गई थी। जाँच में एसओजी को पता चला कि आरोपित युवती कमला ने खुद लिखित परीक्षा नहीं दी थी। इसके लिए उसने अपने स्थान पर उर्मिला पत्नी पूनमा राम नाम की एक युवती को डमी कैंडिडेट के रूप में इस्तेमाल किया था। उर्मिला खुद एक शिक्षिका है। डमी कैंडिटे के रूप में बैठने के लिए उर्मिला ने कमला से 10 लाख रुपए लिए थे।

एसओजी की जाँच में यह भी पता चला कि दोनों आरोपितों को फर्जी डिग्री उनके भाइयों ने उपलब्ध कराए थे। इनमें से एक आरोपित का भाई शिक्षक है, जबकि दूसरे का भाई डॉक्टर है। जाँच में स्थिति स्पष्ट होने के बाद एसओजी ने आरोपित ब्रह्मा कुमारी और कमला को गिरफ्तार कर लिया था। इसके साथ ही उनके दोनों भाइयों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।

कमला के मौसेरे भाई दलपत फर्जी डिग्री का इंतजाम किया था। ब्रह्मा कुमारी का भाई सुरेश कुमार जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में डॉक्टर है। फर्जी डिग्री के लिए दलपत ने सुरेश कुमार से और सुरेश ने भीनमाल निवासी परिचित महेंद्र सिंह बिश्नोई से संपर्क किया। महेन्द्र ने अपने मित्र अशोक चोटिया से बात की। सुरेश ने पीजी हॉस्टल स्थित कमरे में बैठकर फर्जी डिग्री बनाने की साजिश रची थी।

इसके बाद अशोक चोटिया ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी से सत्र 2017-19 की डिग्री के बदले 70-70 हजार रुपए में सौदा तय किया। अब एसओजी परीक्षा से पहले पेपर लीक कर अभ्यर्थी को सॉल्व कराने वाले सांचौर के मांजू और दूसरी अभ्यर्थी कमला की जगह परीक्षा देने वाली टीचर उर्मिला और परीक्षा नियंत्रक सुशील शर्मा सहित इस गिरोह में शामिल कई लोगों की तलाश कर रही है।

ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती में दाखिल हो चुकी है चार्जशीट

इससे पहले ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती पेपर लीक मामले में ईडी ने कोर्ट में तीन आरोपियों के खिलाफ जयपुर कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। ईडी ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती के अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर भी लीक हुए थे। इन आरोपितों में राजस्थान लोक सेवा आयोग से निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा ने प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक किए थे।

उसने ग्रेड सेकेंड परीक्षा के पेपर की सौदेबाजी अपने भतीजे विजय डामोर के जरिए की थी। एक करोड़ रुपए में आरपीएससी का पेपर लीक कर गिरोह के सरगना शेर सिंह मीणा उर्फ अनिल मीणा को बेचा था।बाद में सरगना अनिल मीणा ने गिरोह के साथी सरगना भूपेंद्र सारण को को पेपर बेचा था।

ऑपइंडिया इंपैक्ट: जामनगर में रंजीत सागर बाँध के पास बनी अवैध दरगाह पर चला बुलडोजर, OpIndia की रिपोर्ट के बाद जागे प्रशासन ने ढाँचे को किया समतल

जामनगर में रंजीत सागर बांध के पास बने अवैध दरगाह को बुलडोजर एक्शन में ध्वस्त कर दिया गया है। इस अवैध दरगाह के बारे में ऑपइंडिया ने स्पेशल रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जिसके बाद इस पर तेजी से काम शुरू हुआ। हालाँकि इसे हटाने का आदेश पहले ही जारी हो चुका था, लेकिन प्रशासन इसे हटा नहीं पाई थी, लेकिन ऑपइंडिया द्वारा मई 2024 में स्पेशल रिपोर्ट करने के बाद जागे प्रशासन ने आखिरकार इस अवैध दरगाह को ध्वस्त कर दिया।

स्थानीय प्रशासन ने बुधवार (19 जून 2024) की रात को इस दरगाह को ध्वस्त किया। इस दौरान भारी संख्या में जामनगर की पुलिस तैनात रही और ध्वस्तीकरण की साइट पर ट्रैफिक को रोक दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान नायब मामलतदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

ऑपइंडिया ने प्रकाशित की थी विशेष रिपोर्ट

बता दें कि 12 मई 2024 को ऑपइंडिया ने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में इस अवैध दरगाह के बारे में बताया था। इस रिपोर्ट में लिखा था, जामनगर में प्रसिद्ध रंजीत सागर बाँध के बाद अवैध दरगाह का निर्माण किया गया है। साल 2022 में इस अवैध कब्जे को हटाने का लिखिति आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन उसे हटाया नहीं गया था। स्थानीय हिंदू कार्यकर्ताओं ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा था कि इस दरगाह को पहले ही हटाया जाना था, लेकिन प्रशासन ध्यान नहीं दिया था, जिसके बाद ऑपइंडिया ने जिला कलेक्टर से लेकर मामलातदार और अन्य अधिकारियों से संपर्क कर कार्रवाई के बारे में सवाल पूछा था। जिसमें ये आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी और अब आखिरकार प्रशासन ने अवैध ढाँचे को नेस्तनाबूद करके हटा दिया है।

जानकारी के मुताबित, ये दरगाह काफी पहले से यहाँ पर है। इसकी देखरेख कासम नाम का व्यक्ति करता है। ये दरगाह बाँध के बिल्कुल करीब बनाया गया था, जो मानसून के समय 4 माह पानी में डूबा रहता है और 8 माह तक दिखता है। सितंबर 2022 में स्थानीय हिंदुओं ने इसे हटाने के लिए याचिका दाखिल की थी। इसके बाद मामलतदार ने सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर कासम हसन उड़िया को नोटिस जारी किया था और लिखित में आदेश दिया था कि अवैध ढाँचे को हटाया जाए। इस आदेश के बावजूद कासम के परिवार ने कोई कदम नहीं उठाया, जिसके बाद प्रशासन ने मानसून आने से ठीक पहले अब पूरे ढाँचे को जमींदोज करते हुए उस जगह को समतल कर दिया है।

ऑपइंडिया की खबर हुई वायरल तो जुबैर एंड गैंग पर दर्ज हुई FIR, मेवात की बड़ी मस्जिद के पास दलित की बेटी को गाड़ी से खींचने का मामला

हरियाणा के नूंह में दलित महिला और उसके परिवार की पिटाई करने वाली मुस्लिम भीड़ पर FIR दर्ज की गई है। यहाँ मुस्लिमों ने दलितों को गाड़ी में बैठने को लेकर मारा पीटा था। उन्होंने एक दलित महिला के साथ भी मारपीट की थी और जातिसूचक गालियाँ दी थीं। यह कार्रवाई ऑपइंडिया के दलितों के साथ मारपीट की खबर प्रकाशित करने के बाद हुई है। पीड़ित ने स्वयं ऑपइंडिया को इस कार्रवाई के लिए धन्यवाद दिया है।

ऑपइंडिया को फोन करके पीड़ित के बड़े भाई ने बताया, “ऑपइंडिया द्वारा खबर प्रकाशित होने की वजह से ही इस मामले में FIR दर्ज हो सकी है। इससे पहले दूसरे पक्ष की तरफ से स्थानीय स्तर पर मामला सुलझाए जाने का प्रयास हो रहा था।” उन्होंने बताया कि ऑपइंडिया की खबर के बाद 18 जून, 2024 को यह FIR दर्ज की गई। उन्होंने ऑपइंडिया को इस मामले में आगे कार्रवाई के विषय में सूचित करने की बात कही है।

ऑपइंडिया ने इस घटना के विषय में 18 जून, 2024 को पीड़िता से बात करने के बाद खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज की है। ऑपइंडिया के पास इस मामले की FIR कॉपी भी मौजूद है।

ऑपइंडिया की खबर

पुलिस ने FIR में घटना के आधार पर जुबैर, अंसार, इम्तियाज, कामिल, जाबिर, शकील और 3 अन्य के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। यह सभी नूंह के बिछौर थाना क्षेत्र के बिछोरडी गाँव के रहने वाले हैं। पुलिस ने इन सभी के विरुद्ध बलवा, रास्ता रोकने, गालियाँ देने, मारपीट और नुकसान पहुँचाने समेत SC/ST एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

क्या थी घटना?

इस घटना की पीड़िता अर्चना ने बताया था कि वह 16 जून को अपनी ससुराल से अपने पति परवीन राय के साथ मायके झारोकड़ी गाँव आ रहीं थीं। जैसे ही वो गाँव की बड़ी मस्जिद के पास पहुँची तो उनकी कार को जुबैर, अंसार, इम्तियाज, कामिल, जाबिर और शकील ने रोक लिया। इनके साथ 3 अन्य अज्ञात लोग भी थे। इन सभी ने अर्चना को कार में से खींच लिया। हमलावरों द्वारा अर्चना के पति परवीन को भी लात घूँसों से पीटा जाने लगा।

इसके कुछ देर बाद आरोपितों ने अर्चना के कपड़े फाड़ डाले। पीड़िता ने अपने पिता डालचंद को फोन कर के मदद के लिए बुलाया। इस दौरान आरोपितों ने एकजुट हो कर लड़की के पिता को फिर से पीटा। तब तक हमलावरों की तादाद लगभग 20 हो चुकी थी। परिवार वालों को पिटता देख कर अर्चना का भाई भी बीच-बचाव में पहुँचा तो उसकी भी पिटाई हुई। अर्चना ने बताया कि कि इस दौरान हमलावरों ने अर्चना का मंगलसूत्र और अंगूठी के साथ उनके पति के गले से सोने की चेन खींच ली।

पीड़िता के मुताबिक, उनको पीटने के दौरान आरोपितों ने उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दीं और जातिसूचक शब्द बोले। हमलावरों ने कहा, “च$रों, तुम्हारी इतनी औकात कहाँ है तुम गाड़ी में बैठ कर हमारे सामने निकलो। च$रों जो तुम पर हो वो कर लेना।” पीड़ित परिवार ने जान बचाने के लिए 112 नंबर डायल कर के पुलिस को बुलाया। पुलिस को आता देख कर आरोपित भाग निकले। अब इस मामले में पुलिस FIR दर्ज करके शिकायत पर कार्रवाई कर रही है।

जयपुर के शिव मंदिर के बाहर स्कूटी सवार युवकों ने फेंके मांस के टुकड़े, वीडियो आया सामने: तनाव के बाद इलाके में पुलिस फोर्स तैनात

राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक शिव मंदिर के सामने फिर से मांस का टुकड़ा फेंकने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया है। वे मंदिर के इकट्ठा होने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुँची और लोगों को शांत कराया। तनाव को देखते हुए इलाके में पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।

जयपुर के सुभाष चौक के चाणक्य मार्ग पर स्थित मंदिर के सामने मांस के टुकड़े डालने का मामला सामने आया है। मंगलवार (18 जून 2024) को कुछ अज्ञात स्कूटी सवार युवाओं ने शिव मंदिर के सामने शाम लगभग 4:30 बजे पर मांस के टुकड़े डाल गए। स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेकर सुभाष चौक थाने में में मामला दर्ज करवाया है।

लोगों का कहना है कि असामाजिक तत्वों द्वारा इलाके की धार्मिक एवं सामाजिक सद्भावना को बिगाड़ने के लिए यह काम किया गया है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मंदिर के सामने मांस के बड़े-बड़े टुकड़े पड़े दिखाई दे रहे हैं। यह घटना गंगा एकादशी के दिन की बताई जा रही है।

स्थानीय लोगों ने पुलिस को इस संबंध में घटना का सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध करवाए हैं। सुभाष चौक थाना प्रभारी धर्म सिंह ने कहा कि इसको लेकर स्थानीय लोगों ने लिखित में शिकायत दी है। मामले की जाँच की जा रही है। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को लेकर इलाके में पुलिस की तैनाती की गई है।

वहीं, राजस्थान के अजमेर स्थित एक बाजार में बुधवार (19 जून 2024) को मांस बिखेरने पर तनाव फैल गया। CCTV फुटेज में एक व्यक्ति को बाइक से यह हरकत करते देखा गया। हिन्दू संगठनों ने इसे गोमांस बताया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। नाराज लोगों ने बाजार बंद करवा दिया। हालात तनावपूर्ण होता देखकर पुलिस ने लाठीचार्ज करके भीड़ को तितर-बितर किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमेर के मदनगंज इलाके के ओसवाल मोहल्ले में सब्जी मंडी लगती है, जहाँ भीड़भाड़ बनी रहती है। बुधवार को लगभग 11:45 बजे एक बाइकसवार मंडी से गुजरा। उसने रास्ते में मांस बिखेर दिए और फरार गया। आरोप है कि इन अवशेषों में कटे पैर और कुछ अन्य अंग थे। इसको लेकर बाजार में गुस्सा और तनाव फैल गया।

कुछ ही देर में वहाँ हिन्दू संगठनों का जमावड़ा शुरू हो गया। आक्रोशित हिन्दू संगठन बाजार बंद करवाने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। इस दौरान हिंदू संगठनों से पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। नाराज लोगों ने डिप्टी एसपी की गाड़ी में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

लोगों द्वारा गुस्से में की गई तोड़फोड़ के कारण डिप्टी एसपी की गाड़ी का शीशा टूट गया और गाड़ी के ड्राइवर को चोटें भी आईं। हालात को गंभीर होता देखकर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बल प्रयोग के बाद प्रदर्शनकारियों में आफरा-तफरी मच गई। लगभग डेढ़ घंटे तक हुए हंगामे के बाद बाजार फिर से खोल दिए गए।

इस घटना को लेकर DSP सिटी महिपाल सिंह ने बताया कि बिखरे मांस का परीक्षण करवाया गया, जो कि भैंस का निकला। फ़िलहाल आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। SDM अर्चना चौधरी के मुताबिक, मांस जानबूझ कर नहीं बल्कि अनजाने में गिरा था। फ़िलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

तेजस्वी यादव के PS ने सिकंदर यदुवंशी के लिए बुक करवाया कमरा: NEET पेपर लीक में बिहार के डिप्टी CM का खुलासा, अमित आनंद ने ₹30-32 लाख में डील कबूला

नीट-यूजी पेपर लीक कांड से बिहार की राजनीति में भूचाल आ चुका है। इस पेपर लीक कांड का सरगना जिस सिकंदर यादवेंदु को बताया जा रहा है, वो बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्‍वी यादव के पीएस प्रीतम कुमार का करीबी है। बिहार के डिप्‍टी सीएम विजय सिन्‍हा ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करके खुद इस बात का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि तेजस्वी यादव के पीएस प्रीतम कुमार ने ही सिकंदर के नाम से कमरे की बुकिंग के लिए बार-बार कॉल किए थे। उसी ने मंत्री जी के नाम से बुकिंग कराई थी। तेजस्वी यादव पहले मंत्री रहे हैं, इसलिए अनुराग नाम के अभ्यर्थी के लिए जो कमरा बुक किया गया था, उसकी बुकिंग के आगे ब्रेकट में (मंत्री जी) लिखा है। इस बीच, नीट पेपर लीक घोटाले के अभियुक्तों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने प्रत्येक अभ्यर्थी से 30-40 लाख रुपए की डील की थी।

बिहार के डिप्टी सीएम ने सिलसिलेवार तरीके से बताई कमरे की बुकिंग की कहानी

उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गेस्ट हाउस की बुकिंग के लिए तेजस्वी यादव के पीएस प्रीतम कुमार और पथ निर्माण विभाग के पदाधिकारी प्रदीप कुमार के बीच बातचीत का रिकॉर्ड भी सामने रखा। उन्होंने मीडिया कर्मियों से कहा, “1 मई को तेजस्वी यादव के निजी सचिव प्रीतम कुमार के मोबाइल नंबर 7488061813 से रात्रि 9 बजकर 7 मिनट में पथ निर्माण विभाग में कार्यरत प्रदीप कुमार के मोबाइल नंबर 9430469924 पर NHAI गेस्ट हाउस में सिकंदर कुमार यादवेंदु के लिए कमरे की बुकिंग कराने के लिए फोन आया था। उस दिन प्रदीप कुमार इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया।”

उन्होंने आगे कहा, “फिर 4 मई सुबह 8.49 मिनट में प्रीतम कुमार के मोबाइल नंबर 7488061813 से प्रदीप कुमार के मोबाइल पर कॉल कर सिकंदर कुमार यादवेंदु के लिए कमरे की बुकिंग के लिए स्मारित किया गया। इस बार पथ निर्माण विभाग में कार्यरत प्रदीप कुमार द्वारा NHAI के गेस्ट हाउस में सिकंदर कुमार के नाम से बुकिंग के लिए पदास्थापित कनीय अभियंता को वॉट्सऐप पर मैसेज भेज दिया। प्रीतम कुमार पहले यहीं पर पीएस थे, जब विभाग के मंत्री थे तेजस्वी यादव, इसीलिए मंत्री शब्द का उपयोग करवा लिए। दोनों अधिकारियों ने ये बात लिखकर दी है।” उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कमरे के आबंटन के लिए कोई लेटर नहीं मिला है। ये बुकिंग फोन पर हुई, जिसकी जानकारी दी जा चुकी है।

नीट-यूजी पेपर लीक काँड में गिरफ्तार अनुराग यादव ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसके साथ कुछ और गिरफ्तार अभ्यर्थियों ने भी अपना गुनाह कबूला है। अनुराग यादव ने बताया है कि उसे उसके फूफा सिंकदर यादवेंदु ने कोटा से बुलाया था और कहा था कि ‘पूरी सेटिंग हो गई है।’

अमित आनंद ने लीक कराया पेपर, सिकंदर लाया अभ्यर्थी

वहीं, नीट घोटाले में शामिल सिकंदर के सहयोगी ने अमित आनंद ने भी अपना गुनाह कबूल कर दिया है। उसने कबूलनामे में कहा कि नीट परीक्षा से एक दिन पहले पेपर लीक हो गया था। परीक्षा से एक दिन पहले अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र रटाए गए थे और प्रश्न पत्र के बदले अभ्यर्थियों से 30-32 लाख रुपये लिए गए थे। उसने यह बात भी कबूली है कि वह पहले भी पेपर लीक कराता रहा है। पेपर लीक का मास्टरमाइंड अमित मुंगेर जिले का रहने वाला है। हालाँकि, वह वर्तमान में पटना के एजी कॉलोनी के एक किराए के फ्लैट में रह रहा था। इस कबूलनामे में उसने बताया है कि किस तरह से उसकी मुलाकात उन छात्रों से हुई, जिन्हें आंसर रटवाए गए थे।

ऐसे कराई गई अभ्यर्थियों को तैयारी

अमित ने अपने बयान में कहा, “मेरी दोस्ती सिकंदर से हुई थी, जो दानापुर नगर निगम कार्यालय में जूनियर इंजीनियर है। मैं अपने एक निजी काम से उससे मिलने गया था। मेरे साथ नीतीश कुमार भी था। बातचीत के सिलसिले में मैंने सिकंदर से कहा था कि मैं किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक कराकर अभ्यर्थियों को पास कराता हूँ। सिकंदर ने इसपर मुझसे कहा कि मेरे पास 4-5 अभ्यर्थी हैं, जो नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें पास करवा दीजिए। बच्चों को पास करने के बदले में मैंने बताया कि 30-32 लाख रुपए लगेंगे। इस पर सिकंदर तैयार हो गया और कहा कि वह 4 अभ्यार्थी की हमें देगा। इसी बीच नीट परीक्षा की तारीख आ गई। सिकंदर ने पूछा लड़कों को कब लाना है। मैंने कहा कि पाँच मई को परीक्षा है। चार मई की रात को अभ्यर्थियों को लेकर आना। चार मई की रात में नीट परीक्षा का क्वेश्चन पेपर लीक करवाकर सभी अभ्यर्थियों को उत्तर के साथ पढ़ाया-रटवाया जा रहा था।”

पुलिस को दिए कबूलनामे में मास्टरमाइंड अमित आनंद ने बताया, “सिकंदर को पुलिस ने पकड़ लिया और फिर उसकी निशानदेही पर हम लोग भी पकड़ गए। हमारे किराए वाले फ्लैट से पुलिस को नीट समेत अलग-अलग एग्जाम का एडमिट कार्ड, नीट का प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका का जला हुआ अवशेष बरामद हुआ है। पुलिस ने इसे जब्त कर लिया है। मैंने पहले भी पेपर लीक करवाए हैं। मैं अपने अपराध को कबूल करता हूँ।”

ता दें कि अब तक इस मामले में अब तक 13 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिसमें 4 अभ्यर्थी भी हैं। इस मामले में सिकंदर की संलिप्तता के बाद बिहार में राजनीतिक भूचाल भी आ गया है। बिहार के उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया है कि सिकंदर तेजस्वी यादव का करीबी है। इस मामले में तेजस्वी यादव के पीएस की भी अहम भूमिका है।

चोर औरंगजेब की पिटाई को इस्लामी कट्टरपंथी बता रहे ‘मुस्लिम को हिंदू भीड़ ने मार डाला’, अलीगढ़ मामले में पुलिस ने बताई सच्चाई

अलीगढ़ में 18 जून 2024 को एक घर में एक चोर घुसते हुए पकड़ा गया। घर के लोगों ने और आसपास की भीड़ ने उसे देखा तो उसे पकड़कर मारा-पीटा गया। इस दौरान चोर को गंभीर चोटें आईं और बाद में अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। चोर का नाम मोहम्मद फरीद उर्फ औरंगजेब था और जिस घर में वो घुसा था वो एक हिंदू का घर था।

अलीगढ़ पुलिस ने इस केस को लेकर अपना बयान भी जारी किया है। एसएसपी अलीगढ़ ने बताया कि थाना गाँधी पार्क में 18 जून को पुलिस को सूचना प्राप्त हुई थी जिसके आधार पर उन्होंने घटनास्थल पर जाकर देखा तो पता कि एक मुस्लिम युवक एक हिंदू के घर में चोरी करने के इरादे से घुसा था। उसके बाद उस परिवार के लोगों ने व स्थानीय लोगों ने उस व्यक्ति के साथ मारपीट की। बाद में उसे तत्काल अस्पताल लेकर जाया गया जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस अलर्ट हो गई। बॉडी का पोस्टमॉर्टम करवाया गया। फिर उसे सुपूर्द-ए-खाक किया गया।

पुलिस ने बताया कि इस घटना के बाद हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष ने प्रदर्शन किया। इस बीच थोड़ा तनाव भी हुआ। लेकिन, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट कह रहे हैं कि इलाके में पथराव हुआ, वो जानकारी गलत है। एसएसपी ने कहा कि अधिकारी मौके पर मौजूद थे, पूरे अलीगढ़ में कहीं पर भी कोई पथराव नहीं हुआ है। स्थिति बिलकुल कंट्रोल में है। जो दोनों पक्षों के बीच टेंशन थी, पुलिस उनसे निरंतर वार्ता में है। पुलिस अपने काम में लगी है।

बता दें कि ये पूरा मामला अलीगढ़ के मामू भांजा इलाके में रात 10:15 का है। 35 साल का औरंगजेब घास की मंडी का रहने वाला था। पुलिस ने उसकी लिचिंग मामले में 10 लोगों पर एफआईआर की है। इनमें से 6 को गिरफ्तार किया जा चुका है।

अब इस मामले में हिंदू पक्ष के लोग गिरफ्तार लोगों को रिहा कराने की माँग कर रहे हैं। उनका कहना है कि औरंगजेब 4-6 अन्य मुस्लिमों के साथ हिंदू के घर में घुसा था। पकड़े जाने पर बाकी तो भाग गए, पर औरंगजेब पकड़ लिया गया। इस मामले में हिंदू पक्ष जाँच की माँग कर रहा है ताकि सिर्फ आरोपित गिरफ्तार हों कोई निर्दोष नहीं।

वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से सपा नेता अज्जू इशाक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा है कि देश संविधान और कानून से चलेगा, किसी व्यक्ति को, भले ही वो संदिग्ध हो, मजहबी पहचान पर नहीं मारना चाहिए था। इनके अलावा सोशल मीडिया पर भी इस नैरेटिव को हवा देते देखा जा सकता है।

पत्रकार जैद मसरूर खान ने इस मामले में नया ही एंगल दे दिया। उन्होंने कहा कि ईद के दिन मुस्लिम युवक अपने दोस्त के घर जा रहा था, गलती से किसी और के घर में घुस गया तो उसे पीट दिया गया।

जैद के इस ट्वीट को मोहम्मद जुबैर द्वारा भी रीपोस्ट किया गया था। इसके अलावा मीर फैजल ने भी इस मामले पर हिंदुत्व भीड़ को जिम्मेदार ठहराया। वहीं खुद को पत्रकार कहने वाले एक अन्य इस्लामवादी अलीशान जाफरी ने इस घटना को ‘मुस्लिम विरोधी हमला’ करार दिया था।

इस मामले में औरंगजेब के भाई ने कुछ अलग ही बयान देते हुए पुलिस में एफआईआर कराई थी। मोहम्मद जकी का कहना था कि उसका भाई अपने काम से लौट रहा था जब मामू-भांजा इलाके में कुछ लोगों ने उसे घेरा और उसकी मुस्लिम आइडेंटी जानकर उसकी पिटाई कर दी।

ऊपर दिए गए सारे बयानों से समझ सकते हैं कि मुस्लिम पक्ष के पास औरंगजेब को लेकर अलग थ्योरी थी, मगर अब जब पुलिस ने इस मामले को साफ कर दिया है कि ये मामला चोरी का था और औरंगजेब चोरी के इरादे से हिंदू के घर में घुस रहा था, तो कुछ बातें समझने की जरूरत है।

पहले तो इस केस में ये मानने से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भले ही औरंगजेब चोरी करने की नीयत से घर में घुसा था… लेकिन फिर भी भीड़ को उसे पकड़ने के बाद कानून हाथ में लेकर उसे पीटना नहीं चाहिए था। उसे पुलिस को सौंपा जा सकता था, उसके खिलाफ कंप्लेन हो सकती थी या फिर उसे समझाकर, चेतावनी देकर मानवता के आधार पर छोड़ा भी जा सकता था, पर हुआ ऐसा कुछ भी नहीं, जो कि गलत था।

दूसरा ये कि जो लोग इस मामले में हिंदुओं को बदनाम कर रहे हैं उन्हें ये जान लेने की जरूरत है कि किसी भी शख्स के घर में जब कोई चोर घुसता है तो पहले उसे उसकी मजहबी पहचान पूछकर नहीं पकड़ा जाता है। लोग उसे पकड़ने दौड़ते हैं और पकड़ने के बाद उनकी प्रतिक्रिया एक होती है। घटना में हिंदुत्वादी भीड़ कह कहकर हिंदुओं को बदनाम करना दुष्प्रचार से अधिक कुछ भी नहीं है। अगर औरंगजेब की जगह वहाँ कोई और धर्म का चोर होता तो भी भीड़ शायद वही प्रतिक्रिया देती और पुलिस की कार्रवाई में तब भी आरोपितों को गिरफ्तार किया जाता।

नोट- ये खबर अमित केलकर द्वारा मूल रूप से अंग्रेजी में लिखे गए लेख पर आधारित है। आप इसे इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

केरल की लेखिका एश्लिन जिम्मी के लिए मुंबई पर आतंकी हमला ठीक, कहा- मुझे शाहरुख-सलमान के साथ काम नहीं करने दिया, इसलिए वहाँ के लोगों को मारें पाकिस्तानी आतंकी

केरल की लेखिका बताई जाने वाली एक महिला का एक विवादित वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में वह देश में आतंकी हमले का समर्थन कर रही है। वह चाहती है कि मुंबई में पाकिस्तान से आतंकी आकर लोगों को मारें तो उसे खुशी होगी। अब उस पर कार्रवाई की माँग हो रही है।

मुंबईकरों पर हमले की इच्छा रखने वाली इस महिला का नाम एश्लिन जिम्मी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए जा रहे एक वीडियो में जिम्मी एक लड़के से अंग्रेजी में बातचीत कीर्ति दिखाई देती है। स्क्रीन देखने पर पता चलता है कि यह बातचीत डिसकॉर्ड नाम के एक एप पर हो रही है।

बातचीत में लड़का उससे पूछता है कि क्या वह 26/11 जैसे मुंबई हमलों का समर्थन करती है। इस पर जिम्मी कहती है, “मैंने कहा कि मैं पाकिस्तानियों के मुंबई आने और लोगों को मारने का समर्थन करती हूँ। क्योंकि मुंबई एक बेकार जगह है।”

इस पर लड़का जिम्मी से इस घृणा का कारण पूछता है तो वह बताती है, “अगर मुंबई के लोग एक दूसरे को स्नेह करते तो वह मुझे बुलाकर शाहरुख़ खान कि हीरोइन बनने का मौक़ा देते। लेकिन मुझे किसी ने नहीं बुलाया। आखिर उन्होंने मुझे शाहरुख या सलमान की हीरोईन बनने का मौक़ा क्यों नहीं दिया।”

सोशल मीडिया पर एश्लिन जिम्मी का यह वीडियो वायरल होने के बाद अब उस पर कार्रवाई की माँग हो रही है। एक्स पर कई यूजर सुरक्षा एजेंसियों से जिम्मी पर नजर बनाए रखने के लिए कह रहे हैं। बताया गया है कि एश्लिन जिम्मी केरल के तिरुवनंतपुरम की रहने वाली है और लेखिका है।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी बताया है कि उसकी परवरिश दुबई में हुई है। उसका वीडियो साझा करते हुए कुछ यूजर्स ने केरल पुलिस से कार्रवाई की माँग भी की है। ऐसे ही एक यूजर ने लिखा, “केरल की लेखिका एश्लिन जिम्मी से मिलिए, जो भारत में आतंकवादी हमलों का समर्थन करती है। वह मुंबई पर आतंकवादी हमले को उचित ठहराती है, क्योंकि उसे शाहरुख खान और सलमान खान के साथ हीरोइन बनने का मौका नहीं मिला। NIA उसकी गतिविधियों पर नज़र रखें।”

एक और यूजर ने भी इस महिला की जाँच किए जाने की माँग की। अभी इस एश्लिन जिम्मी के विषय में और जानकारियाँ सामने नहीं आई हैं। लेकिन उसके विचारों को लेकर सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर किया जा रहा है।