Home Blog Page 858

राजकुमार ने जिस मुस्लिम लड़की से की शादी, उसने ही बेटे का करवा दिया खतना: पुलिस की नौकरी लगते ही घर पर किया कब्जा, तारिक से किया निकाह

मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक दलित युवक राजकुमार झंझोट ने मुस्लिम युवती से साल 2006 में लव मैरिज की। साल 2007 में एक बेटा हुआ। इसके बाद दलित युवक ने अपनी मुस्लिम बीवी रानी बेग को पढ़ाया-लिखाया, उसे एमपी पुलिस में नौकरी के लायक बनाया। बीवी को नौकरी मिली, तो उसने वाल्मीकि समाज के युवक के साथ रहने से भी इनकार कर दिया। उसने साथी पुलिस वालों के साथ मिलकर उससे जबरन प्रॉपर्टी के कागजात पर दस्तखत करा लिए और घर से निकाल दिया। यही नहीं, बिना तलाक के ही उसने एक मुस्लिम मोहम्मद तारिक से निकाह कर लिया। साल 2007 में पैदा हुए नाबालिग बेटे का साल 2020 में खतना कराकर उसका धर्म परिवर्तन करा दिया। अब राजकुमार झंझोट वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उज्जैन के राजकुमार झांझोट ने कलेक्टर ऑफिस में जन सुनवाई के दौरान अपनी बीवी की करतूत बताई। राजकुमार झांझोट ने कहा, “साल 2006 में रानी बेग से प्रेम विवाह किया था। दोनों के 2007 में एक बेटा हुआ। साल 2012-13 में उसकी नौकरी लगी, जिसके बाद उसका व्यवहार बदल गया। वो धीरे-धीरे मुझसे अलग रहने लगी और मेरी प्रॉपर्टी अपने नाम करा ली। यही नहीं, वो मेरे ऊपर भी धर्म परिवर्तन का दबाव डालती थी।” राजकुमार ने आरोप लगाया कि तलाक का केस चलने के दौरान ही उसने तारिक हुसैन से निकाह कर लिया और बेटे का भी धर्म परिवर्तन कर दिया।

राजकुमार ने बताया कि उसे पिछले महीने रमजान के दौरान ही इस बात का पता चला कि बेटे का धर्म परिवर्तन करा दिया गया है। बेटा अभी 17 साल का है, लेकिन उसका खतना कराकर धर्म परिवर्तन 2020 में ही करा दिया गया था। राजकुमार ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है। बताया जा रहा है कि राजकुमार पर रानी बेग ने साल 2018 में दहेज प्रताड़ना का केस भी दर्ज कराया था। ये मामला अभी तक कोर्ट में है। वहीं, रानी ने आरोप लगाया है कि राजकुमार अपराधी प्रवृत्ति का है। वो पहले से शादीशुदा था, उसने ये बात छिपाई।

इस पूरे मामले में उज्जैन के कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने कहा कि राजकुमार झांझोट ने शिकायत दी है, बेटे के धर्मपरिवर्तन के मामले की जाँच के लिए पुलिस को निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि कलेक्टर ने कहा कि दोनों में अलगाव हो चुका है।

खाली घरों में CPM कार्यकर्ता बम बनाते, मना करने से घरों पर फेंक देते हैं: केरल की महिला का खुलासा, विपक्ष ने सीएम विजयन को घेरा

माकपा का गढ़ कहे जाने वाले केरल के कन्नूर की एक महिला ने मंगलवार (18 जून 2024) को खुलासा किया है कि इस इलाके में पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा बड़े पैमाने पर बम बनाने का काम किया जा रहा है। लोग डर के कारण उनके खिलाफ नहीं बोलते। इस खुलासे के बाद मुख्यमंत्री पी विजयन के नेतृत्व वाली केरल की माकपा सरकार मुश्किल में पड़ गई है।

दरअसल, कन्नूर के थालास्सेरी के पास एरनहोली में मंगलवार (18 जून) को हुए विस्फोट में 85 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई। 85 वर्षीय रवींद्रन की मौत एक खाली घर के परिसर में छोड़े गए स्टील कंटेनर में रखे विस्फोटकों के फटने से हुई थी। उन्होंने उसे खोलने की कोशिश की थी। इस घटना के बाद हालात से त्रस्त होकर मृतक की पड़ोसी शीना नाम की महिला ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।

कॉन्ग्रेस नेता और क्षेत्र के निर्वाचित सांसद शफी परमबिल बुधवार (19 जून 2024) को घटनास्थल पर पहुँचे। उस दौरान बगल में रहने वाली एक महिला ने उनसे मुलाकात की और अनुरोध किया कि क्षेत्र के लोग शांति से रहना चाहते हैं और कहा कि ये उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता खाली घरों में बम बनाने का काम कर रहे हैं। इससे इलाके में अशांति फैल गई है।

महिला ने कहा, “यहाँ बम बनाने का काम धड़ल्ले से चल रहा है। कई खाली पड़े घर बम बनाने के अड्डे हैं। पिछले दिनों कुछ पार्टी कार्यकर्ता पास के घर से तीन बम ले गए। यहाँ के लोग डर से आवाज नहीं उठाते। अब एक निर्दोष बुजुर्ग की हत्या हो गई। कल यह हमारे साथ भी हो सकता है। हमारे बच्चे इन सभी जगहों पर खेलते थे। हम विस्फोट में मरना नहीं चाहते। कृपया हमें शांति से जीने दें।”

शीना ने कहा कि अगर किसी ने इस बारे में कुछ कहा तो बम बनाने वाले उनके घरों पर बमबारी करके उन्हें नष्ट कर देंगे। जब महिला दुखड़ा रो रही थी, उस समय उसकी माँ ने डर के कारण उसे रोकने की कोशिश की। हालाँकि, शीना इसे ने अपनी माँ से पूछा कि वे कब तक इसे बर्दाश्त करते रहेंगे। इसके बाद उन्होंने सांसद से सारा वाकया कह सुनाया।

बता दें कि मंगलवार को हुए विस्फोट के लिए भाजपा और कॉन्ग्रेस ने सत्ताधारी सीपीआई (एम) को जिम्मेदार ठहराया है। इस मुद्दे पर केरल विधानसभा में भी हंगामा हुआ। कॉन्ग्रेस ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया और अनुमति नहीं मिलने पर सदन से निकल गए। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विपक्षी दलों पर इस घटना को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।

मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि क्रूड बम बनाने में शामिल सभी लोगों को पकड़ा जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि कन्नूर में अवैध क्रूड बम बनाना कुटीर उद्योग हो गया है और सीपीआई (एम) इसे फंड कर रही है। सीएम विजयन का आशीर्वाद इन सबको प्राप्त है।

वहीं, विपक्षी नेता वीडी सतीशन ने आलोचना की कि सीपीआई (एम) बम बनाने के दौरान मारे गए लोगों के लिए स्मारक भी बना रही है। बता दें कि इस साल अप्रैल में थालास्सेरी के पास पनूर में एक क्रूड बम बनाने वाली इकाई में विस्फोट के दौरान एक सीपीआई (एम) कार्यकर्ता की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

14 फसलों पर MSP की बढ़ोतरी, पवन ऊर्जा परियोजना, वाराणसी एयरपोर्ट का विस्तार, पालघर का पोर्ट होगा दुनिया के टॉप 10 में: मोदी कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (19 जून, 2024) को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में 5 महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सबसे बड़ी बात – 14 खरीफ फसलों का ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। इससे किसानों के खाते में सीधे 2 लाख करोड़ रुपए जाएँगे। वाराणसी में एयरपोर्ट का विस्तार किया जाएगा। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया। साथ ही 2 लाख गोदामों को बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा केंद्र सरकार ने 76,200 करोड़ रुपए की लागत से पालघर के वधावन पोर्ट का भी विस्तार किया जाएगा। इससे 12 लाख रोजगार के मौके पैदा होने की संभावना है। इसके अलावा हर राज्य में फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का कैम्पस खोला जाएगा। केंद्रीय रेलवे, I&B और MeitY मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अन्नदाताओं को प्राथमिकता देते हैं, वो चाहते हैं कि MSP डेढ़ गुनी होनी चाहिए।

धान का नया MSP 2300 रुपए प्रति क्विंटल होगा, वहीं 2013-14 में यह 1310 रुपए था। इसमें ताज़ा बढ़ोतरी 170 रुपए की हुई है। कॉटन की MSP 501 रुपए बढ़ करअब 7121 रुपए से 7521 रुपए हो गई है। वहीं मूँग का 8682, तूर का 7550, मक्का का 2225, ज्वार का 3371 और मूँगफली का 6783 रुपए होगा। NAFED के एप्लिकेशन के जरिए किसानों को तिलहन बेचने में आसानी होगी। पालघर के वधावन पोर्ट की क्षमता अब 298 मिलियन टन यूनिट की जाएगी।

इससे भारत-मिडिल ईस्ट कॉरिडोर भी मजबूत होगा। यहाँ 9 कंटेनर टर्मिनल और मेगा टर्मिनल पोर्ट बनेगा। फ्यूल व अन्य कंटेनरों के लिए अलग बर्थ होंगे। ये दुनिया के शीर्ष 10 पोर्ट में से एक होगा। 2029 तक इसका निर्माण कार्य पूरा होगा। वहीं रिन्यूवेबल एनर्जी के क्षेत्र में ‘ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट’ (पवन ऊर्जा परियोजना) को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत समुद्र में फ्लोटिंग टर्मिनल बनेंगे। गुजरात और तमिलनाडु में 500-500 मेगावाट के टर्मिनल बनाने के साथ इसकी शुरुआत होगी।

पश्चिमी और पूर्वी तटों पर चलने वाली अच्छी हवाओं का फायदा उठाते हुए 7000 किलोमीटर की तटीय रेखा के इर्दगिर्द 70,000 मेगावाट उत्पादन की क्षमता आँकी गई है, जिसके लिए सरकार 7453 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसे भारत के लिए बहुत बड़ा अवसर बताया जा रहा है। वाराणसी एयरपोर्ट से अब हर साल 39 लाख यात्री यात्रा कर पाएँगे। ये अब एक ग्रीन एयरपोर्ट भी बनेगा। रनवे, हाइवे और अंडरपास बनेगा। इसमें 2870 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

जिस मोहम्मद अरमान के लिए छोड़ा था हिन्दू धर्म, उसी ने सब छिनकर घर से किया बेदखल: अब्बू इमरान ने भी की छेड़छाड़, सास और ननदों ने मिलकर पीटा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मोहम्मद अरमान ने एक दिव्यांग हिन्दू लड़की को इस्लाम कबूल करवाकर उससे निकाह किया और फिर दहेज की माँग करते हुए छोड़ दिया। पीड़िता के गहने और रुपए भी हड़प लिए गए। ससुर इरफ़ान ने पीड़िता से छेड़खानी और सास ने अपनी बेटियों के साथ मिलकर उससे मारपीट भी की। पुलिस ने 17 जून 2024 को 5 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी।

घटना बरेली के थाना क्षेत्र भोजीपुरा का है। यहाँ 17 जून को पीड़िता ने शिकायत में बताया कि वह एक पैर से दिव्यांग है। एक्सीडेंट के एवज में उसे 7 लाख रुपए मिले थे। इसी के लालच में बरेली के जादोपुर निवासी मोहम्मद अरमान ने पीड़िता से निकाह करने का वादा किया। इसके लिए उसने लड़की से इस्लाम कबूलने को कहा। पीड़िता अरमान की बातों में आ गई।

आरोपित अरमान के झाँसे में आकर पीड़िता ने हिन्दू धर्म का त्याग कर दिया और इस्लाम कबूल करने के बाद अपना नाम जोया रख लिया। 30 मार्च 2024 को वह अरमान से निकाह करके उसके घर चली गई। कुछ ही दिनों के भीतर अरमान ने पीड़िता को बहला-फुसला कर उससे 3 लाख रुपए हड़प लिए। बाद में वह लड़की पर एक्सीडेंट में मिले बाकी 4 लाख रुपए देने का दबाव बनाने लगा।

पीड़िता ने जब बाकी रुपए देने से इनकार किया तो मोहम्मद अरमान उसे तलाक देने की धमकी देने लगा। इस बीच में ससुर इरफ़ान, सास शहाना के साथ फ़राना और सन्नो नाम की ननदों ने भी पीड़िता को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इन सबने 5 लाख रुपए में मोहम्मद अरमान की कहीं और शादी की बात भी चलानी शुरू कर दी। दबाव देखकर पीड़िता ने ससुर इरफ़ान को 75 हजार रुपए और दे दिए।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। इसमें आगे बताया गया है कि पैसे लेने के बाद भी आरोपितों के व्यवहार में बदलाव नहीं हुआ। लड़की की शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ना जारी रही। मोहम्मद अरमान ने पीड़िता से कहा, “तू हिन्दू है। हमने तो लालच में आकर तुझ से निकाह कर लिया।” इसके बाद सभी आरोपितों ने लड़की से उसके निकाह के मूल कागजात छीनने का प्रयास किया।

जब पीड़िता ने मना किया तो उसे गंदी-गंदी गालियाँ दी गईं और बेरहमी से पिटाई की गई। 10 जून 2024 को पीड़िता के ससुर इरफ़ान ने गंदी नीयत से उसका हाथ पकड़ लिया। जैसे-तैसे लड़की खुद को बचाने में सफल रही। लड़की की शोर सुनकर उसकी सास, ननद और शौहर ने मिलकर उसकी बुरी तरह से पिटाई की। अगले दिन आरोपितों ने उसके तमाम कागजात, 23 हजार नकद और गहने छीन लिए।

इसके बाद उन्होंने लड़की को मारपीट कर घर से निकाल दिया। आखिरकार लड़की ने थाने में जाकर शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपित शौहर अरमान, ससुर इरफ़ान, सास शहाना और ननद फ़राना एवं सन्नो के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। इन पर IPC की धारा 498A, 323, 504, 354 (क़) और 506 के अलावा दहेज़ अधिनियम और धर्मान्तरण निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

‘4 दिनों से सोया नहीं था लोको पायलट’: कंचनजंगा एक्सप्रेस दुर्घटना में PIB ने एसोसिएशन के दावे को नकारा, कहा – 30 घंटे मिला आराम

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मालगाड़ी और कंचनजंगा एक्सप्रेस के बीच हुई टक्कर को लेकर कई बातें कई जा रही हैं। रेलवे बोर्ड ने प्रथम दृष्ट्या इसके लिए मालगाड़ी के लोको पायलट को दोषी बताया है। वहीं, लोको पायलट एसोसिएशन का कहना है कि मालगाड़ी का लोको पायलट लगातार चार दिनों से सोया नहीं था। हालाँकि, PIB ने इसे फर्जी बताया है और कहा कि उसने पर्याप्त आराम किया था।

दरअसल, कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसे को लेकर रेलवे बोर्ड का कहना है कि लोको पायलट ने रंगापानी स्टेशन से टीए 912 अथॉरिटी पास ली थी। इसके बाद उसने मालगाड़ी को खराब सिग्नलों के बीच तय लिमिट से ज्यादा गति से निकाला, इसलिए हादसा हुआ। हालाँकि, लोको पायलटों के संगठन ने इसे पूरी तरह नकार दिया।

ऑल इंडिया रनिंग लोको स्टाफ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एसएस ठाकुर ने बताया कि सिग्नल फेल होने पर वैकल्पिक फॉर्म टीए 912 के जरिए ट्रेनें चलाई जाती हैं। उससे जुड़ा नियम है कि जब तक आगे वाली ट्रेन अगला स्टेशन पार न कर ले, तब तक दूसरी ट्रेन को पिछले स्टेशन से आगे नहीं बढ़ाते हैं। रंगापानी स्टेशन पर के स्टेशन मास्टर ने कंचनजंगा के आगे बढ़ने के 15 मिनट बाद ही मालगाड़ी को टीए 912 पेपर दे दिया था।

उन्होंने कहा कि उस वक्त कंचनजंगा एक्सप्रेस कुछ किलोमीटर आगे ट्रैक पर खड़ी थी। उन्होंने यह भी कहा कि जिस लोको पायलट पर हादसे का दोष मढ़ा जा रहा है वो लगातार 4 रातों से सोया नहीं था, जबकि नियम अधिकतम लगातार 2 रात ड्यूटी का है। उन्होंने स्टेशन मास्टर की जाँच करने की बात कही। साथ ही यह भी कहा कि लोको पायलटों को दोषी बताने की परंपरा पुरानी है।  

एसोसिएशन के उपाध्यक्ष के बयान पर कई मीडिया रिपोर्ट हुईं। इसको लेकर अब PIB FactCheck ने सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया है। इस पोस्ट में न्यूज 24 के उस खबर का स्क्रीनशॉट भी लगाया गया है, जिसमें एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एसएस ठाकुर का चार रातों तक नहीं सोने वाली बयान है।

PIB FactCheck ने लिखा, “एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि कंचनजंगा रेल दुर्घटना में मालगाड़ी का लोको पायलट 04 रातों से सोया नहीं था। यह दावा फर्जी है। मालगाड़ी के लोको पायलट को अपनी ड्यूटी से पहले 30 घंटों से अधिक विश्राम मिला, जिसमें रात्रि विश्राम भी शामिल था।” अगले पोस्ट में लिखा है, “लोको पायलट ने इस माल गाड़ी में मॉर्निंग ड्यूटी की थी।”

बता दें कि कंचनजंगा ट्रेन हादसे को लेकर एक महिला पैसेंजर चिन्मय मजूमदार ने मालगाड़ी के दोनों ड्राइवरों (लोको पायलट और को-लोको पायलट) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता कंचनजंगा एक्सप्रेस में बैठी थीं। हादसे में उन्हें भी चोटें आई हैं। वहीं, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घटना में जान गँवाने वालों के परिजनों को 10 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 2.50 लाख रुपए और मामूली घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। 

जिस घोटाले में संदेशखाली वाला शेख शाहजहाँ हुआ गिरफ्तार, उसी में अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता से 5 घंटे पूछताछ: चिट फंड स्कैम में भी आ चुका है नाम

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता से राशन घोटाला के मामले में पूछताछ की है। बुधवार (19 जून, 2024) को वो कोलकाता स्थित ED के सिटी साफ्टर में पूछताछ के लिए हाजिर हुईं। ED ने अभिनेत्री से कहा कि वो अपने बैंक के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज पेश करें। अभिनेत्री से कुछ सवाल भी पूछे गए, साथ ही कई अन्य विवरण भी खँगाले गए। उनके बैंक खातों से हुए कुछ लेनदेन के स्रोत और गंतव्य को लेकर जानकारी चाहिए थी।

इससे पहले 5 जून को जाँच एजेंसी ने ‘मैं, मेरी पत्नी और वो’ (2005) में काम कर चुकीं अभिनेत्री रितुपर्णा सेनगुप्ता को पेश होने के लिए कहा था। उस समय वो अमेरिका में थीं और उन्होंने ED से और समय की माँग की थी। इससे पहले 2019 में रोज वैली चिट फंड स्कैम में भी ED उनसे पूछताछ कर चुकी है। राशन घोटाले में ED तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता ज्योतिप्रिया मलिक को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। कई करोड़ रुपए के इस घोटाले में जाँच एजेंसी लगातार कार्रवाई कर रही है।

बता दें कि ‘पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS)’ में पश्चिम बंगाल में बड़ा घोटाला हुआ है। PDS के लीजो राशन आया था, उसे लाभार्थियों को देने की बजाए बाजार में बेच दिया गया। बाकिकुर रहमान नामक एक कारोबारी को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ के बाद बाहर निकलीं अभिनेत्री ने कहा कि राशन घोटाले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। 12:55 से लेकर 5:49 तक, लगभग 5 घंटे तक रितुपर्णा सेनगुप्ता से ED ने पूछताछ की।

बाहर निकलीं रितुपर्णा सेनगुप्ता के चेहरे पर थकान दिख रही थी। उन्होंने कहा कि ED ने भी उनके साथ सहयोग किया, उन्होंने भी जाँच में सहयोग किया। उनकी माँ शर्मिष्ठा मुखोपाध्याय और वकील बिप्लब गोस्वामी भी इस दौरान उनके साथ थे। इसी मामले में संदेशखाली में TMC नेता शेख शाहजहाँ को गिरफ्तार करने गए ED की टीम पर हमला हुआ था, उसके फरार होने के बाद कई महिलाओं के यौन शोषण का मामला सामने आया और वो गिरफ्तार हुआ।

अजमेर के बाजार में बाइक सवार ने गिराए मांस, लोगों ने जमकर किया हंगामा: पुलिस बोली- यह गोमांस नहीं, भैंस का मांस और अनजाने में गिरा

राजस्थान के अजमेर स्थित एक बाजार में बुधवार (19 जून 2024) को मांस बिखेरने पर तनाव फैल गया है। CCTV फुटेज में एक व्यक्ति को बाइक से यह हरकत करते देखा गया है। हिन्दू संगठनों ने इसे गोमांस बताया और प्रदर्शन शुरू कर दिया। नाराज लोगों ने बाजार बंद करवा दिया। हालात तनावपूर्ण होता देखकर पुलिस ने लाठीचार्ज करके भीड़ को तितर-बितर किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमेर के मदनगंज इलाके के ओसवाल मोहल्ले में सब्जी मंडी लगती है, जहाँ भीड़भाड़ बनी रहती है। बुधवार को लगभग 11:45 बजे एक बाइकसवार मंडी से गुजरा। उसने रास्ते में मांस बिखेर दिए और फरार गया। आरोप है कि इन अवशेषों में कटे पैर और कुछ अन्य अंग थे। इसको लेकर बाजार में गुस्सा और तनाव फैल गया।

कुछ ही देर में वहाँ हिन्दू संगठनों का जमावड़ा शुरू हो गया। आक्रोशित हिन्दू संगठन बाजार बंद करवाने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। इस दौरान हिंदू संगठनों से पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। नाराज लोगों ने डिप्टी एसपी की गाड़ी में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

लोगों द्वारा गुस्से में की गई तोड़फोड़ के कारण डिप्टी एसपी की गाड़ी का शीशा टूट गया और गाड़ी के ड्राइवर को चोटें भी आईं। हालात को गंभीर होता देखकर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। बल प्रयोग के बाद प्रदर्शनकारियों में आफरा-तफरी मच गई। लगभग डेढ़ घंटे तक हुए हंगामे के बाद बाजार फिर से खोल दिए गए।

इस घटना को लेकर DSP सिटी महिपाल सिंह ने बताया कि बिखरे मांस का परीक्षण करवाया गया, जो कि भैंस का निकला। फ़िलहाल आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। SDM अर्चना चौधरी के मुताबिक, मांस जानबूझ कर नहीं बल्कि अनजाने में गिरा था। फ़िलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

किताब से बहती नदी, शरीर से उड़ते फूल और खून बना दूध… नालंदा की तबाही का दोष हिन्दुओं को देने वाले वामपंथी इतिहासकारों का ‘हैरी पॉटर’, 2 ‘धर्मान्धों’ ने जला दिया विश्वविद्यालय?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (19 जून, 2024) को नालंदा विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया। नालंदा में प्राचीन काल में भी विश्वविद्यालय रहा है, लेकिन इस्लामी आक्रांता बख्तियार खिलजी ने इसे तबाह कर दिया था। अब इस तबाही के 800 वर्षों के बाद भाजपा की सरकार ने यहाँ नव-निर्माण करवाया है। 1749 करोड़ रुपए की लागत से ज्ञान का नया परिसर स्थापित हुआ है। जहाँ प्राचीन विश्वविद्यालय का खँडहर है, राजगीर में उससे कुछ ही दूरी पर नया परिसर बना है।

नालंदा में कई स्तूप, विहार और मंदिर हुआ करते थे। जहाँ तक नालंदा विश्वविद्यालय की बात है, यहाँ कई देशों के 10,000 छात्र पढ़ते थे और 2000 आचार्य विद्यादान में तल्लीन रहते थे। छात्रों के रहने, खाने-पीने और शिक्षा निःशुल्क होती थी। नए कैम्पस में 40 क्लासरूम हैं, जिनमें 1900 छात्र बैठ सकते हैं। 300 सीटों वाले 2 ऑडिटोरियम भी हैं और 550 छात्रों की क्षमता वाला एक हॉस्टल भी। 2000 की क्षमता वाला एक एम्पीथिएटर भी है। 12वीं सदी में ध्वस्त हुए प्राचीन विश्वविद्यालय को UN ने 2016 में धरोहर घोषित किया था

नालंदा विश्वविद्यालय को लेकर इतिहासकारों ने किया ‘खेल’

क्या आपको पता है कि नालंदा विश्वविद्यालय के सहारे भी वामपंथी इतिहासकारों ने जम कर ‘खेला’ किया है। चूँकि नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध आचार्य भी थे, इसीलिए वामपंथी इतिहासकारों ने इसे ‘बौद्ध बनाम हिन्दू’ का रंग दिया। बौद्ध और हिन्दू, दोनों ही सनातन धर्म के अंग हैं। बुद्ध ने कभी वेदों को नहीं नकारा, उन्होंने वही सन्देश दिया जो उपनिषदों का है। बौद्ध धर्म में भी रामायण-महाभारत की कथाएँ हैं, भले ही बदले हुए स्वरूप में। ऐसे में मार्क्सिस्ट इतिहासकारों ने खूब प्रोपेगंडा रचा।

इससे उनके 2 हित पूरे होते हैं – पहला, इस्लामी आक्रांता को क्लीनचिट, और दूसरा, सनातन धर्म में विभाजन पैदा करना। इसी में से एक नाम आता है DN झा का। उन्होंने तो नालंदा विश्वविद्यालय की तबाही के लिए ‘धर्मान्ध हिन्दुओं’ को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। हिन्दू राजा वहाँ दान देते थे, हिन्दू छात्र वहाँ पढ़ते थे, हिन्दू शिक्षक उन्हें पढ़ाते थे और वहाँ हिन्दू साहित्य थे – फिर भला हिन्दू क्यों अपने ही विश्वविद्यालय को जलाएँगे? DN झा ने तिब्बती साहित्य का सहारा लेकर अलूल-जलूल निष्कर्ष दिए।

DN झा ने तिब्बती साहित्य के हवाले से दावा किया कि कलचुरि वंश के कर्ण नामक राजा ने कई बौद्ध विहारों को तबाह किया। एक तरफ DN झा का कहना है कि अंग्रेजों के आने से पहले हिन्दू कोई धर्म था ही नहीं, दूसरी तरफ वो ‘धर्मान्ध हिन्दुओं’ को नालंदा विश्वविद्यालय में स्थित 90 लाख पुस्तकों वाले पुस्तकालय को जलाने का ठीकरा फोड़ते हैं। इतना विरोधाभास? इसके लिए उन्होंने जिस Pag Sam Jon Zang नामक पुस्तक का हवाला दिया है, उसे तिब्बती लेखक Sumpa Khan-Po Yece Pal Jor ने लिखा है।

यानी, DN झा ने हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय को जलाए जाने के 500 वर्ष बाद की पुस्तक का हवाला दिया। जबकि, 13वीं शताब्दी में लिखी गई फ़ारसी किताब तबकात-ए-नासिरी में स्पष्ट दर्ज है कि नालंदा को किसने जलाया। जिस तिब्बती किताब का DN झा ने हवाला दिया है, उसमें भी लिखा है कि 2 युवा भिक्षुओं ने 2 भिखारियों पर पानी छींट दिया, जिस कारण गुस्साए भिखारियों ने 9 मंजिले पुस्तकालय ‘रत्नोदधि’ को आग के हवाले कर दिया।

क्या ये विश्वास किया जा सकता है कि जहाँ हजारों लोग रह रहे थे, वहाँ 2 भिखारियों ने तबाही मचा दी? 12000 लोगों की मौजूदगी वाले विशाल परिसर में 2 भिखारी इमारत दर इमारत घूमते रहे, आग लगाते रहे और उन्हें किसी ने रोकने की हिम्मत नहीं की? आज अगर कोई कहानीकार ये लिख दे कि मंगल ग्रह से उतरे एलियनों ने नालंदा विश्वविद्यालय को जलाया था, तो ये वामपंथी इतिहासकार बख्तियार खिलजी को क्लीन-चिट देने के लिए ये भी मान लेंगे, साथ ही कहने लगेंगे कि वो एलियन हिन्दू थे।

नालंदा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय 3 इमारतों में फैला हुआ था, जिनमें से एक नौ मंजिला था। विश्वविद्यालय की मुख्य इमारत 1400 * 400 फ़ीट की थी, जो खुदाई में पता चला। ह्वेनसांग ने अपनी याददाश्त के हिसाब से 7 विहार और 8 हॉल होने की बात बताई है। अफगानिस्तान से जब इस्लामी आक्रांता भारत में घुसे, उत्तर-पश्चिमी हिस्से से इधर आए और रास्ते में जितने भी बुद्ध विहार या बुद्ध की प्रतिमाएँ आईं, उन्हें वो तोड़ते गए। आज भी उनकी यही सोच कायम है, उदाहरण के लिए बामियान के बुद्ध की प्रतिमा को देख लीजिए। सदियों साल पुरानी इस मूर्ति को मार्च 2001 में तालिबान ने उड़ा दिया।

आचार्यों का नरसंहार, किताब समझाने वाला भी कोई नहीं बचा: फ़ारसी इतिहास

आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि बख्तियार खिलजी मात्र 200 घुड़सवारों को लेकर नालंदा विश्वविद्यालय पहुँचा था। उस समय के इतिहासकार मिन्हाजुद्दीन ने लिखा है कि ऊँची दीवारों और बड़ी-बड़ी इमारतों के कारण नालंदा विश्वविद्यालय बख्तियार खिलजी को किसी किले की तरह लगा और उसने हमला बोल दिया। उसने लिखा है कि वहाँ रहने वालों में अधिकतर ऐसे ब्राह्मण थे जिन्होंने अपने बाल मुँडा रखे थे, उन सभी का सामूहिक नरसंहार कर दिया गया।

इसमें लिखा है कि वहाँ बड़ी संख्या में पुस्तकें मिलीं, लेकिन चूँकि सारे हिन्दू मारे जा चुके थे इसीलिए उन किताबों में क्या लिखा है ये समझाने वाला एक व्यक्ति भी नहीं था। अंत में अवलोकन के बाद इस्लामी आक्रांताओं को पता चला कि वो किला नहीं बल्कि एक यूनिवर्सिटी था। जीत के बाद बख्तियार खिलजी सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक के पास पहुँचा और उसने इतना लूटा हुआ धन दिया कि उसे सुल्तान ने उपहारों से नवाजा। अन्य दरबारी उससे जलने लगे।

ये सब सन् 1197 के करीब हुआ। 2004 में ‘इंडियन हिस्ट्री कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष रहे DN झा ने अपने उद्बोधन में ये बात कही थी कि तिब्बती स्रोतों के हिसाब से कर्ण ने बौद्ध विहारों को ध्वस्त किया, जलाया। उन्होंने जिस किताब का हवाला दिया उसमें शिक्षक की हत्या के बाद उसके खून के दूध में बदलने, शरीर से फूल निकल कर आकाश में उड़ने, भिखारी द्वारा 12 साल गड्ढे में बैठ कर साधना करने, अग्नि की राख को भिक्षुओं पर फेंकने से उनके जले और शास्त्रों से जल की धारा बह निकलने के कारण कई किताबों के बच जाने की बातें लिखी हैं

बताइए, कल को ये वामपंथी इतिहासकार हैरी पॉटर की फिल्म देख कर भी इसे इतिहास बताने लगेंगे, अगर उसमें से हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए कुछ मसाला उन्हें मिले। आपने कभी किताबों से पानी की धारा निकलते देखी है? राख फेंके जाने से इमारतों को जलते देखा है? खून को दूध में परिवर्तित होते देखा है? शरीर से फूल निकल कर आकाश में उड़ते देखा है? 12 साल गड्ढे में साधना करने से चमत्कारिक सिद्धि मिलते देखा है? ये सारे चमत्कार उन वामपंथी इतिहासकारों के लिए ‘इतिहास’ हैं, जो रामायण-महाभारत को फिक्शन बताते हैं जबकि इसके कई सबूत मौजूद हैं आज भी।

90 साल का शिक्षक, 70 छात्र… क्या से क्या हो गया नालंदा

कलचुरि वंश के कर्ण के संबंध में भी DN झा ने BNS यादव की किताब ‘द सोसाइटी एन्ड कल्चर इन नॉर्दर्न इंडिया इन द 12th सेंचुरी’ का उदाहरण दिया है। इसमें लिखा है कि तिब्बती साहित्य लिखते हैं कि कर्ण ने मगध के विहारों को तबाह किया। हालाँकि, अगली ही पंक्ति में वो लिखते हैं कि इस पर विश्वास करना कठिन है। इस पंक्ति को DN झा ने छिपा लिया। झा ने 2 भिखारियों को ‘हिन्दू’ कैसे कह दिया, इसका तो कोई स्रोत ही नहीं है। जबकि यादव ने इस प्रकरण पर शक जताया है।

इसी तरह भारत विरोधी विदेशी इतिहासकार ऑड्रे ट्रश्के लिखती हैं कि भारत में बौद्ध धर्म के पतन के पीछे इस्लाम नहीं है। इसके लिए वो कहती हैं कि नालंदा विश्वविद्यालय स्वाभाविक रूप से हिन्दू था, बौद्ध परंपरा भी उसका हिस्सा था। ये थी इवन डेज की बात। ऑड डेज पर यही इतिहासकार कहते हैं कि बौद्ध धर्म का हिन्दू धर्म से कोई वास्ता नहीं और नालंदा यूनिवर्सिटी हिन्दू था ही नहीं। इतना ही नहीं, बख्तियार खिलजी को क्लीन चिट देने के लिए वामपंथियों ने जगह का भी हेरफेर किया।

ऑड्रे ट्रश्के का मानना है कि नालंदा विश्वविद्यालय इस घटना के कई दशक बाद तक संचालित होता रहा। जबकि सच्चाई में भिक्षु धर्मस्वामिन ने लिखा है कि सारे आचार्य तुर्कों के खौफ से भाग गए थे, सारी इमारतें तबाह कर दी गई थीं और वहाँ कुछ बचा ही नहीं था। इसके बाद भी बचे-खुचे ढाँचों में मात्र 70 छात्र पढ़ रहे थे। खँडहरों में 90 वर्षीय राहुल श्रीभद्र उन छात्रों को पढ़ाते थे। बोधगया के राजा बुद्धसेन और ओदंतपुरी (अब बिहारशरीफ) के समृद्ध ब्राह्मण जयदेव वित्तीय रूप से विश्वविद्यालय की मदद करते रहे।

तेलंगाना में महिला पत्रकार पर FIR, बिजली विभाग द्वारा उत्पीड़न की खोली पोल तो हो गया पुलिस केस: राहुल गाँधी को दिलाई लोकतंत्र की याद

तेलंगाना पुलिस ने बुधवार (19 जून) को एक पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। यह पत्रकार राज्य में बिजली कटौती और उसके बाद बिजली विभाग द्वारा ग्राहकों के कथित उत्पीड़न से संबंधित जनता की शिकायतों को लगातार उजागर कर रहा था। इसको लेकर पुलिस ने पत्रकार पर जानबूझकर झूठ फैलाने और राज्य सरकार एवं उसके बिजली विभाग TGSPDCL को बदनाम करने का आरोप लगाकर मामला दर्ज किया है।

अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हैदराबाद स्थित पत्रकार रेवती ने इसे अपने पत्रकारीय प्रयासों के लिए ‘सम्मान का पदक’ बताया है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के चयनात्मक प्रयोग को लेकर कॉन्ग्रेस के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाया। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को टैग किया।

पत्रकार रेवती ने लिखा, “एक विचित्र कदम उठाते हुए मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि तेलंगाना पावर एंड कंपनी के असली अपराधी घूम रहे हैं, जिन्होंने दिनदहाड़े एक महिला उपभोक्ता को परेशान किया!” कॉन्ग्रेस नेताओं से उन्होंने पूछा, “क्या मीडिया की स्वतंत्रता पर आपका यही रुख है? क्या आपकी सरकार सच को उजागर करने वाले पत्रकारों को चुप कराने की कोशिश कर रही है?”

रेवती ने राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और सीएम रेवंत रेड्डी से कहा, “अगर आप लोकतंत्र में विश्वास करते हैं तो न्याय के लिए हमारी लड़ाई में हमारे साथ खड़े हों और प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करें! मैंने प्रताड़ित महिला की निजता की रक्षा के लिए उसका वीडियो पोस्ट नहीं करने का फैसला किया। अगर यही अधिकारी मीडिया से गुंडागर्दी करते हैं तो लोगों की रक्षा कौन करेगा?”

रेवती की एक्स (ट्विटर) टाइमलाइन के अनुसार, वह बिजली विभाग से जुड़ी जनता की शिकायतों को उजागर करती रही हैं। इससे पहले की एक पोस्ट में रेवती ने एक महिला की चिंताओं को साझा किया था, जिसे अपने क्षेत्र में लगातार बिजली कटौती के खिलाफ पोस्ट करने पर बिजली विभाग द्वारा कथित रूप से परेशान किया गया था।

पत्रकार रेवती ने महिला की पहचान को उजागर नहीं करते हुए कहा कि उस महिला ने उन्हें बताया था कि एक लाइनमैन उसके घर आया था और उसे अपनी पोस्ट हटाने के लिए कहा था। आरोप यह भी है कि जब महिला ग्राहक ने बिजली विभाग के अधिकारियों को इस बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ट्वीट करने के बजाय उन्हें फोन करना चाहिए था।

महिला ग्राहक के अनुसार, उन्हें बताया गया, “बिजली विभाग पर ऊपर के लोगों का बहुत ज़्यादा दबाव है।” पत्रकार रेवती ने कहा कि उन्होंने घटना की जाँच की है और उनके पास उस बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग है। हालाँकि, सुरक्षा कारणों से और महिला की निजता का सम्मान करते हुए वे इस रिकॉर्डिंग को साझा नहीं करना चाहती हैं।

पत्रकार रेवती के अनुसार, जिस महिला ग्राहक ने बिजली कटौती के बारे में ट्वीट किया था, वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है, क्योंकि वह किराए के घर में रहती है और बिजली विभाग के कर्मचारी उसका पता जानते हैं। संयोग से हैदराबाद की एक पत्रकार नवीना ने कहा कि जब से उसने बिजली कटौती के बारे में ऑनलाइन शिकायत की है, तब से वह एक चिंतित हो गई हैं।

एक अन्य ट्वीट में रेवती ने तेलंगाना पुलिस की चुनिंदा प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया, क्योंकि उन्होंने अपनी दो शिकायतों पर उनकी प्रतिक्रिया को उजागर किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने एक छिपी हुई धमकी जारी करके जवाब दिया। बाद में उसी के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। सीएम के भाई के खिलाफ उनकी दूसरी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया।

महिला पत्रकार के अनुसार, 12 जून 2024 को सैयद सलीम नामक व्यक्ति पर राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के भाई तिरुपति रेड्डी के गुर्गों ने कथित तौर पर हमला किया था।

FIR में उल्लेखित विवरण

रेवती द्वारा साझा की गई FIR की कॉपी के अनुसार, पुलिस को 19 जून 2024 की तड़के एलबी नगर क्षेत्र में कार्यरत एक सहायक अभियंता एम दिलीप (33) से शिकायत मिली। शिकायतकर्ता ने कहा कि 18 जून की शाम करीब 5 बजे उन्हें अपने उच्च अधिकारियों से एक मैसेज मिला था।

उन्होंने आगे कहा कि उच्च अधिकारियों ने कहा कि एक्स हैंडल @revathitweets ने एक मैसेज पोस्ट किया है कि एलबी नगर क्षेत्र में 7 घंटे से बिजली बाधित है। हालाँकि, सबस्टेशन की डाटा शीट की जाँच के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों ने पाया कि पिछले 6 महीनों में एलबी नगर क्षेत्र में 7 घंटे की बिजली कटौती की समस्या नहीं आई थी।

शिकायतकर्ता ने आगे कहा, “यह केवल एक झूठा आरोप है और जानबूझकर राज्य सरकार एवं उसके संगठन टीजीएसपीडीसीएल को बदनाम किया जा रहा है।” इसलिए, उन्होंने ट्विटर (एक्स) अकाउंट धारक @revathitweets के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया। इसलिए एफआईआर दर्ज की जाए, एफआईआर कॉपी में जोड़ा गया।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने सीआर नंबर 662/2024 में धारा 505 आईपीसी और आईटी एक्ट की धारा 66 (डी) के तहत मामला दर्ज किया और जाँच इंस्पेक्टर एल रामंजनेयुलु को सौंप दी गई। हैदराबाद के कई पत्रकारों-नेताओं और एक्स यूजर्स ने बिजली विभाग से संबंधित सार्वजनिक शिकायतों को फैलाने के लिए एक पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कॉन्ग्रेस की आलोचना की।

उनमें से कई लोगों ने तर्क दिया कि भले ही उसके दावे सच न हों, लेकिन बिजली विभाग द्वारा बिजली कटौती और उसके बाद बिजली विभाग के कर्मियों द्वारा ग्राहकों को परेशान करने के मुद्दों को उजागर करने पर आपराधिक मामला दर्ज करने के बजाय जवाबी कार्रवाई के साथ उन्हें स्पष्ट किया जा सकता था।

केसीआर मंत्रिमंडल में पूर्व मंत्री और बीआरएस नेता केटीआर ने पूछा कि क्या पुलिस विभाग ही ऊर्जा विभाग चला रहा है या फिर राज्य में पुलिस राज है।

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गाँधी के ‘खटाखट खटाखट’ मुफ्त चुनावी वादों पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना में लंबे समय तक बिजली कटौती की शिकायत करने पर महिला को परेशान किया गया।”

कनाडा का आतंकी प्रेम देख भारत ने याद दिलाया कनिष्क ब्लास्ट, 23 जून को पीड़ितों को दी जाएगी श्रद्धांजलि: जानिए कैसे गई थी 329 लोगों की जान

कनाडा की संसद में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर के सम्मान में उसकी बरसी पर मौन रखने की घटना के जवाब में वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने दुनिया को एयर इंडिया की उड़ान 182 (कनिष्क) को बम से उड़ाने की घटना की याद दिलाई जिसमें 86 बच्चों समेत 329 लोग मारे गए थे। इस बम विस्फोट का आरोप सिख आतंकवादियों पर लगते हैं, जिन्होंने 1984 में स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए किए गए ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ के जवाब में प्लेन को हवा में ही उड़ा दिया था।

कनाडा की संसद में आतंकी के महिमामंडन और खालिस्तान चरमपंथियों को खुली छूट पर भारत ने कनाडा को करारा जवाब दिया है। भारत ने एयर इंडिया के विमान कनिष्क को बम से उड़ाने की बरसी याद दिलाते हुए कनाडा में वर्षों से पल रहे आतंकवाद को निशाने पर लिया है। कनाडा के वैंकूवर स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने 23 जून को कनिष्क विमान हादसे की याद में मेमोरियल सर्विस की योजना बनाई है।

एयर इंडिया मेमोरियल में 23 जून को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

वैंकूवर स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारत आतंकवाद के खतरे का मुकाबला करने में सबसे आगे है और इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करता है। 23 जून 2024 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (कनिष्क) पर कायरतापूर्ण आतंकवादी बमबारी की 39वीं वर्षगाँठ होगी, जिसमें 86 बच्चों सहित 329 निर्दोष लोगों ने सिविल एविएसन के इतिहास में सबसे जघन्य आतंकवाद-संबंधी हवाई दुर्घटनाओं में से एक में अपनी जान गँवा दी थी। 23 जून, 2024 को 1830 बजे स्टेनली पार्क के सेपरले प्लेग्राउंड क्षेत्र में एयर इंडिया मेमोरियल में एक मेमोरियल सर्विस निर्धारित की गई है। वैंकूवर का दूतावास कनाडा में रहने वाले भारतीय प्रवासियों को आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करता है।”

कनिष्क हादसा कैसे हुआ?

बता दें कि 23 जून, 1985 को, कनाडा से लंदन होते हुए भारत जा रहे एयर इंडिया के विमान में विस्फोट हुआ था। एयर इंडिया की फ्लाइट-182 ने 23 जून 1985 को कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर से उड़ान भरी थी। इस फ्लाइट को मॉन्ट्रियल से ब्रिटेन के लंदन, फिर भारत के दिल्‍ली होते हुए मुंबई पहुँचना था। बोइंग 747-237B का नाम सम्राट कनिष्क के नाम पर रखा गया था। इस विमान को आयरलैंड के हवाई क्षेत्र में 31,000 फीट की ऊँचाई पर बम से उड़ा दिया गया। हादसे के बाद विमान अटलांटिक महासागर में गिर गया। इस विमान हादसे में 329 लोगों की मौत हुई। मारे गए लोगों में 22 हवाई यात्री भारत में जन्मे थे, जबकि 280 लोग भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे। यह घटना आधुनिक कनाडा के इतिहास में सबसे बड़ी सामूहिक हत्या थी।

कनाडा इस घटना की जाँच कभी पूरी नहीं कर पाया और आज तक हादसे के किसी भी आरोपी को सजा नहीं हो पाई है। जब भारत की ओर से सीबीआई ने हादसे की जाँच करने की कोशिश की तो कनाडा ने कानून का सहारा लेकर रुकावटें खड़ी कीं और जाँच पूरी नहीं होने दी। बता दें कि हादसे के बाद सिर्फ 131 यात्रियों के शव ही बरामद किए जा सके थे। विमान हादसे की जाँच कर रही सीबीआई ने भी पाया था कि धमाके में आतंकी संगठन बब्‍बर खासा इंटरनेशनल का हाथ था, इसका मास्‍टरमाइंड बब्‍बर खालसा इंटरनेशन का नेता तलविंदर सिंह परमार था।

इसी कड़ी में भारत ने खालिस्तानी आतंकी तलविंदर सिंह परमार को प्रत्यर्पित करने को कहा था, जो उस समय कनाडा में रहता था। परमार ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ का पहला मुखिया था। वह 1970 में कनाडा भाग गया था और वहीं से खालिस्तानी गतिविधियों को संचालित करता था। तलविंदर पर वर्ष 1981 में पंजाब पुलिस के 2 जवानों की हत्या का आरोप भी है, जिसके लिए उसे 1983 में जर्मनी में गिरफ्तार किया गया था। तलविंदर परमार ने पंजाब के बड़े नेता लाला जगत नारायण की भी वर्ष 1981 में हत्या कर दी थी। तलविंदर इसके अतिरिक्त अन्य कई हत्याओं में भी शामिल रहा था। तलविंदर ने 1985 में एयर इंडिया के एक बोईंग 747 विमान जिसका नाम ‘कनिष्क’ था, उसे बम से उड़ा दिया था। यह विमान कनाडा के शहर मॉन्ट्रियल से लंदन के रास्ते भारत आ रहा था।

इस विमान में तलविंदर ने इन्दरजीत सिंह रैयत तथा अन्य कुछ आरोपितों के साथ मिलकर बम रखा था जो कि विमान की उड़ान के बीच प्रशांत महासागर में फट गया था और इस हादसे में 329 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। इस हादसे में मरने वाले 268 व्यक्ति कनाडाई नागरिक ही थे। उसने इसी दिन एक और विमान को बम से उड़ाने के लिए एक बैग में बम रखा था, लेकिन वो इसे विमान के भीतर नहीं डाल पाया और टोक्यो में ही फट गया। तलविंदर ने यह बम एयर इंडिया के टोक्यो से बैंकाक जाने वाले विमान में रखने का प्लान बनाया था।

जस्टिन के पिता पियरे ट्रूडो की एक गलती के कारण 329 निर्दोष व्यक्तियों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी और लोग हवाई यात्रा करने से भी डरने लगे थे। जस्टिन यही गलती फिर दोहरा रहे हैं। गौरतलब है कि उनकी सरकार पिछले कुछ सालों से ऐसे कृत्यों पर एकदम शांत है जिनमें भारत को सीधे सीधे धमकी दी गई है।