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नाइट स्कोप से लेकर सैटेलाइट वाली डिवाइस तक, आतंकियों को आधुनिक उपकरण दे रहा पाकिस्तान: देखिए रियासी के हमलावरों के पास से क्या-क्या मिला

कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को पाकिस्तान पूरी मदद कर रहा है। दशकों से भारत के खिलाफ कश्मीर में प्रॉक्सी वॉर लड़ रहा पाकिस्तान अब आतंकियों को दवाइयाँ और हथियार तो देता ही रहा था, अब हाईटेक कम्यूनिकेशन डिवाइस भी दे रहा है, ताकि वो भारतीय सुरक्षाबलों से सुरक्षित रहते हुए भारतीयों पर हमले कर सकें। हाल ही में रियासी में हुए आतंकी हमले में शामिल 2 आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया है, जिनके पास से पाकिस्तानी डिवाइस बरामद हुई है। बरामद हुए सामानों से स्पष्ट है कि पाकिस्तान अब तक जिन आतंकियों की चोरी-छिपे मदद करता था, वो अब खुलकर सामने आ चुका है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर के घाटी वाले इलाकों की तुलना में हाल के दिनों में जम्मू वाले इलाकों में आतंकी हमलों में तेजी आई है। पाकिस्तान अब इधर आतंकियों को सक्रिय कर चुका है। इसी कड़ी में रियासी में बस पर हुए आतंकी हमलों में शामिल रहे दो आतंकी कठुआ जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास हीरानगर इलाके में ढेर हुए हैं। मारा गया एक आतंकी जैश-ए-मोहम्मद का टॉप कमांडर रिहान था, तो दूसरा कथित तौर पर उसका पीएसओ था।

दोनों आतंकियों के पास से बरामद सामान बता रहे हैं कि दोनों आतंकवादियों को पाकिस्तानी सेना से मदद मिल रही थी। मारे गए आतंकी रिहान के पास से नाइट स्कोप और फ्रीक्वेंसी सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस वाली एम-फोर राइफल मिली है। इसके अलावा वह माइक्रो कंपनी का सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस भी इस्तेमाल कर रहा था। माइक्रो कंपनी की डिवाइस पाकिस्तान की सेना, नौसेना और वायु सेना करती है। जो इस बात की पुष्टि करती हैं कि आतंकियों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में एक हफ्ते के अंदर रियासी, कठुआ और डोडा जिलों में आंतकी हमले हुए हैं। इन हमलों में कम से कम 11 लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें एक सीआरपीएफ का जवान भी शामिल है। सुरक्षी बलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकी भी ढेर हुए हैं। इस हमले के बाद पाकिस्तान के रावलकोट में जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के नेताओं की बैठक हुई थी। इसमें जैश कमांडर रजाक और हिजबुल का डिप्टी कमांडर खालिद शामिल हुआ था। बैठक में दिए गए भाषणों के दौरान भारत को कल (9 जून) की तरह और अधिक नुकसान पहुँचाने का आह्वान किया गया।

हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान पर ‘मत देखो’, इस्लामी कुरीति पर सवाल उठाना ‘आपत्तिजनक’: PK और ‘हमारे बारह’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दोहरा रवैया क्या कहता है?

एक फिल्म आ रही है – ‘हमारे बारह’। जनसंख्या नियंत्रण की समस्या और इस्लाम में महिलाओं के अपमान पर बन रही अन्नू कपूर अभिनीत इस फिल्म की रिलीज पर देश के सर्वोच्च न्यायालय ने ब्रेक लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी स्क्रीनिंग पर रोक लगाते हुए कहा कि उन्होंने इसका ट्रेलर देखा तो काफी आपत्तिजनक है। इसके डायलॉग्स पर भी आपत्ति जताई गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपत्तिजनक चीजें भरी पड़ी हैं। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

‘हमारे बारह’: मुस्लिम महिलाओं की व्यथा दिखाना जुर्म?

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उच्च न्यायालय को ये आदेश देना चाहिए था कि CBFC (सेंसर बोर्ड) एक समिति बना कर इस मामले की जाँच करे। अज़हर बाशा तम्बोली ने जहाँ इस फिल्म के पक्ष में याचिका दायर की थी, वहीं जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की वैकेशन बेंच ने इस पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की तरफ से फौजिया शकील बतौर अधिवक्ता पेश हुईं। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार पहले ही ‘हमारे बारह’ को प्रतिबंधित कर चुकी है।

आखिर ‘हमारे बारह’ में ऐसा क्या दिखाया गया है जो सुप्रीम कोर्ट को सब कुछ आपत्तिजनक ही लग रहा है। ट्रेलर में मौलवी का किरदार निभाने वाले अभिमन्यु सिंह कहते हैं, “औरतें सलवार के नाड़े की तरह होनी चाहिए। जब तक अंदर रहेंगी, बेहतर रहेंगी। तुम्हारी औरतें तुम्हारी खेती हैं, अपनी मर्जी से खेती करो।” ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे मुस्लिम महिलाओं को मुल्ले-मौलवियों की इस सोच के कारण समस्या का सामना करना पड़ता है, प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

क्या इस्लाम में महिलाओं को बुर्के और हिजाब में रहने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है? उन्हें भी तो आखिर स्वच्छंद हवा में साँस लेने का अधिकार है। ‘हलाला’ जैसी कुप्रथा के तहत शादीशुदा महिलाओं के साथ रात गुजारने के लिए ये मौलवी हजारों-लाखों रुपए वसूल करते हैं। ये मौलवी खुद एक से अधिक महिलाओं से निकाह करते हैं, फिर दूसरी महिलाओं से ‘हलाला’ भी करते हैं। मौलवियों का दाम तय है। ‘हलाला’ के बहाने मदरसों के लिए फंडिंग भी ले ली जाती है।

क्या ये मौलवी जन्नत की ’72 हूरों’ का विवरण देते समय महिलाओं का अपमान नहीं करते? इस समस्या को दिखा देने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़ हो जाता है। कोई मौलाना इन हूरों के ‘बड़े-बड़े स्तन’ होने के दावे करते है तो कोई पत्नियों को ‘मैली-कुचली’ कह कर संबोधित करता है। इसी समस्या को तो दिखाया गया है ‘हमारे बारह’ फिल्म में। हूरों का ‘दबा कर इस्तेमाल करना’, ‘पेट भरना’ और ‘कपड़ों में गूदा नज़र आना’ जैसी चीजें आपत्तिजनक हैं, इन पर सवाल उठाना नहीं।

PK फिल्म पर क्या बोला था सुप्रीम कोर्ट

फिर सुप्रीम कोर्ट ऐसी फिल्म को आपत्तिजनक क्यों बता रहा है, जिसमें इस्लाम की कुरीति पर बात की गई है। वहीं फिल्म में जब हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाया जाता है तो यही सुप्रीम कोर्ट ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करता। आज से एक दशक पीछे चलते हैं, आमिर खान की फिल्म PK आपको याद होगी। दिसंबर 2014 में आई इस फिल्म को लेकर काफी विवाद हुआ था, लेकिन चूँकि पीड़ित पक्ष हिन्दू थे इसीलिए उन्हें हर जगह झटका ही मिला।

इस फिल्म को भगवान शिव को सड़क पर भागते हुए और बाथरूम में छिपते हुए दिखाया गया था, पाकिस्तानी सरफ़राज़ को हिन्दू लड़की को गर्लफ्रेंड बनाते हुए दिखाया गया था, हिन्दू संत को लोगों को झाँसा देते हुए दिखाया गया था। और हाँ, ‘सरफ़राज़ धोखा देगा’ वाला बयान एक हिन्दू संत से कहलवा कर अंत में दिखाया गया था कि वो एक ‘सच्चा पाकिस्तानी मुस्लिम’ है। फिल्म में हिन्दुओं को अंधविश्वासी दिखाया गया था। आपको वो दृश्य भी याद होगा जब आमिर खान मंदिर में भगवान शिव की वेशभूषा वाले कलाकार को खदेड़ते हैं। महादेव को कॉमेडी का विषय बना दिया गया था।

“अगर आपको पसंद नहीं है तो मत देखिए” – PK को लेकर जब सुप्रीम कोर्ट में याचिका पहुँची थी तो कुछ ऐसी ही टिप्पणी देश की सर्वोच्च न्यायालय से सुनने को मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे कला और मनोरंजन बताते हुए कहा था कि आपको नहीं पसंद है तो मत देखिए, दूसरों को तो देखने दीजिए। 3 जजों (RM लोढ़ा, कुरियन जोसेफ, RF नरीमन) की बेंच ने ‘ह्यूमन राइट्स एन्ड सोशल जस्टिस’ नामक NGO से ऐसा कहा था। पूछा गया था कि आपका संवैधानिक या कानूनी अधिकार इससे कैसे बाधित होते हैं, क्या इसे सेंसर बोर्ड ने पास नहीं किया?

सुप्रीम कोर्ट ने तब आजकल के युवाओं को बहुत स्मार्ट बताते हुए पूछा था कि आप क्या-क्या छिपाओगे, ये इंटरनेट का ज़माना है। क्या अब ये सब चीजें सुप्रीम कोर्ट भूल चुका है? 10 वर्ष बाद इंटरनेट का और भी तेज़ी से प्रसार हुआ है और युवा तो और अधिक स्मार्ट हुए होंगे न। फिर जो चीजें PK पर लागू होती हैं वही ‘हमारे बारह’ पर क्यों नहीं? क्या मुस्लिम महिलाओं की व्यथा दिखाना पाप है? और अन्नू कपूर तो खुद को नास्तिक भी बताते हैं। फिल्म की टीम को ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ भी मिल रही हैं।

‘सेक्सी दुर्गा’ से लेकर ‘सेक्सी राधा’ तक

इसी तरह जानबूझकर 2017 में एक मलयालम हॉरर फिल्म का नाम ‘सेक्सी दुर्गा’ रखा गया। विवाद हुआ तो इसे ‘S दुर्गा’ कर दिया गया। भारत में माँ दुर्गा का क्या महत्व है, ये बताने की ज़रूरत नहीं है। उन्हें ईश्वर की ऊर्जा कहा गया है, साल में 4 बार नवरात्रि आती है। शाक्त संप्रदाय भी हिन्दू धर्म का एक अंग है। केरल के हाईकोर्ट ने इसे गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल तक में दिखाने का आदेश दिया, जबकि केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण ने इसे सूची से हटा दिया था।

इसी तरह ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ (2012) में राधा के लिए ‘सेक्सी’ शब्द का प्रयोग किया जाता है, लेकिन कोर्ट को कोई आपत्ति नहीं होती। भगवान श्रीकृष्ण को मानने वाला हर एक व्यक्ति राधा को माँ कहता है और सम्मान की दृष्टि से देखता है। उनकी भावनाओं का क्या? वेब सीरीज ‘पाताल लोक’ (2020) में मंदिर प्रांगण में ब्राह्मण को मांस खाते हुए और गंदी गालियाँ बकते हुए दिखाया जाता है। इसी तरह ‘मिर्जापुर’ (2018) वेब सीरीज में ‘मुन्ना भैया’ को एक पंडित को डाँटते हुए दिखाया जाता है।

सैफ अली खान वाली सीरीज ‘तांडव’ (2021) में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाया गया। ऐसा एक बार नहीं, कई बार, बार-बार हो चुका है। इसे इतना सामान्य बना दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट तो दूर की बात, स्थानीय प्रशासन तक हिन्दुओं की आपत्तियाँ नहीं सुनता। जबकि बात जब इस्लाम या ईसाइयत की आती है तो पूछिए मत। बाइबिल के एक शब्द का मजाक बनाने पर फराह खान, रवीना टंडन और भारती सिंह जैसी बॉलीवुड की हस्तियों को वेटिकन सिटी के प्रतिनिधि पादरी से मिल कर हस्तलिखित माफीनामा सौंपना पड़ा था।

विदेश में आतंकी हमलों पर जलता है दिल, हिन्दुओं के नरसंहार पर ‘चुप्पी’ क्यों साध जाते हैं विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे भारतीय क्रिकेटर?

भारत देश में सुपरस्टार्स का कल्चर हमेशा से रहा है। कुछ रीढ़विहीन सुपर स्टार रहे हैं, तो कुछ रीढ़ वाले। समय समय पर ये बातें सामने आती भी रही हैं, लेकिन मौजूदा समय में देखें तो आज के समय के कुछ सबसे बड़े स्टार्स में हिप्पोक्रेसी इतनी बढ़ गई है, जितनी पहली कभी नहीं थी। हम बात कर रहे हैं भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे बड़े सितारों की… हम बात कर रहे हैं विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे सुपरस्टार्स की। जो क्राइस्टचर्च में होने वाले आतंकी हमले पर तो छाती फाड़कर रोते दिखते हैं, लेकिन जब बात भारत पर हमलों की आती है, तो चुप्पी साधकर बैठ जाते हैं।

अभी कुछ दिन पहले ही रियासी में आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें आतंकियों ने श्रद्धालुओं से भरी बस पर फायरिंग की। ये बस शिवखोड़ी से वैष्णोदेवी जा रही थी। इस आतंकी हमले में 10 लोगों की मौत हो गई, तो तीन दर्जन लोग घायल हो गए थे। सोशल मीडिया पर लोगों ने #AllEyesOnReasi #AllEyesOnVaishnoDeviAttack जैसे हैशटैग का इस्तेमाल कर अपना गुस्सा और दुख दोनों ही जाहिर किया। यहाँ तक कि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट ट्रेविस हेड तक ने इस पर ट्वीट किया।

मुंबई के क्रिकेटर सौरभ नेत्रावलकर अब अमेरिकी टीम के लिए खेलते हैं, लेकिन वैष्णो देवी जा रहे तीर्थयात्रियों पर हुए आतंकी हमले पर उन्होंने भी दुख जताया। सौरभ नेत्रावलकर ने ‘All Eyes On Vaishno Devi Attack’ लिखा और आतंकी हमले से जुड़ा पोस्टर शेयर किया।

वहीं, दूसरी ओर भारत के सबसे बड़े खिलाड़ियों की ओर से इस आतंकी हमले को लेकर चुप्पी साध ली गई। लोगों का अब गुस्सा भी सामने आ रहा है। शशांक शेखर झा ने एक्स पर लिखा, ‘आपके विराट कोहली कहाँ हैं? जब जम्मू और कश्मीर में हिंदुओं का हिंदू होने के कारण नरसंहार किया जा रहा है!’ शशांक ने विराट कोहली की ओर पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी लगाया है, जिसमें वो न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुए आतंकी हमले पर दुख और गुस्सा जाहिर कर रहे थे।

बता सिर्फ विराट कोहली की नहीं है, बल्कि रोहित शर्मा हो या अन्य बड़े सितारे। सचिन तेंदुलकर हों या महेंद्र सिंह धोनी। ये सारे बड़े खिलाड़ी, जो देश के आईकॉन हैं, वो देश पर हो रहे आतंकी हमलों को लेकर चुप्पी साध जाते हैं। अब अगर लोग अपना गुस्सा निकाल भी रहे हैं, तो उसमें गलत क्या है? लोग भी चाहते हैं कि वो जिन्हें अपना स्टार मानते हैं, वो भी उनके साथ खड़े रहें या फिर उनका गुस्सा सिर्फ विदेशियों पर हो रहे अत्याचार पर सामने आता है।

हैदराबाद में चलती सड़क पर समीर को चाकुओं से गोदा, फिर हथियार लहराकर भागे हमलावर: BJP नेता बोले- सोचो Video भाजपा शासित राज्य की होती तो क्या होता

हैदराबाद में चलती सड़क पर एक युवक की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई। सोशल मीडिया पर घटना की वीडियो वायरल है। मृतक की पहचान 28 साल के मोहम्मद समीर के तौर पर हुई है। इस मामले को भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने उठाया है। उन्होंने कहा सोचो, अगर ये वीडियो किसी भाजपा शासित राज्य की होती तो कितना हंगामा किया जाता।

जानकारी के मुताबिक, घटना को अंजाम बालापुर की रॉयल कॉलोनी में दिया गया। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि मेन रोड के सामने वाली सड़क पर समीर पर धारदार हथियार से वार करने के बाद कुछ लड़के उसे दौड़ा रहे हैं। वह अपनी जान बचाने के भाग रहा है, लेकिन लड़के नहीं रुक रहे। नीचे गिरने पर और अपना बचाव करने पर उसे मोटे डंडे से मारा जाता है।

इस बीच आसपास के लोग सारा तमाशा देखते हैं मगर बचाने कोई नहीं आता। बीच में दो लोग हमलावरों से रुकने को कहते हैं पर उनकी भी कोई सुनवाई नहीं होती। समीर को पीटा जाता रहता है। हमलावर खुलेआम हथियार लहराते हैं। समीर को पटकते हैं, फिर उसे मारकर भाग जाते हैं। इसके बाद वहाँ लोग जुटना शुरू होते हैं। उसे ऑटो में लेकर जाया जाता है।

अब इसी घटना की वीडियो को शेयर करते हुए भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस मामले में साधी गई चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि हैदराबाद में मोहम्मद समीर को निर्ममता से चाकू घोंप-घोंपकर मार दिया गया वो भी जनता के सामने। तेलंगाना में जब से कॉन्ग्रेस आई है कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है। सोचिए अगर समीर के साथ ऐसा किसी भाजपा शासित प्रदेश में होता तो ये लोग UN तक पहुँच गए होते, लेकिन तेलंगाना में किसी का ध्यान इस पर नहीं गया।

वहीं कॉन्ग्रेस नेता जी निरंजन ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि घटना दुखद है जो भी इस हत्या में शामिल है उसे नहीं छोड़ा जाएगा। आगे उन्होंने ये भी कहा कि कॉन्ग्रेस आने के बाद राज्य में क्राइम रेट घटा है।

बता दें कि घटना के वायरल होने के बीच आसिफनगर थाने की पुलिस इस मामले की तलाश में जुटी है। फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन सीसीटीवी फुटेज आदि खंगालकर आरोपितों का पता लगाने की कोशिश हो रही है। शव का पोस्टमार्टम ओसमानिया जनरल अस्पताल में कराया गया है।

जयपुर में घर से सोना-नगदी-गाड़ी लेकर भागी युवती, आगरा में नाबालिग के साथ कई बार रेप: हिन्दू लड़कियों से ‘लव जिहाद’, कहीं फिरोज तो कहीं सरफराज

तमाम कानून एवं जागरूकता अभियान के बावजूद देश में लव जिहाद के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। राजस्थान के जयपुर और उत्तर प्रदेश के आगरा से लव जिहाद के दो मामले सामने आए हैं। जयपुर के मामले में मुस्लिम समुदाय के आरोपित फिरोज ने एक हिंदू लड़की को ब्लैकमेल कर अपने साथ ले गया। वहीं, आगरा में शादी का झाँसा देकर दुष्कर्म करने और धर्मांतरण का दबाव बनाने का आरोप है।

राजस्थान के जयपुर में 11 जून 2024 को एक लड़की कॉलेज जाने के लिए निकलती है, लेकिन वह लौटकर नहीं आई। इसके बाद परिजनों ने नजदीक के बिंदायका थाने में शिकायत दी। परिजनों का आरोप है कि लड़की घर से एक सोने की चैन, 20 हजार रुपए नगद और भाई की स्कूटी लेकर घर से गायब हुई है। लड़की के भाई का आरोप है कि फिरोज उसे शादी के लिए ब्लैकमेल कर रहा था। 

लड़की के परिजनों ने फिरोज खान नामक युवक और उसके सहयोगियों पर लड़की को ब्लैकमेल कर अपने साथ ले जाने का आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि फिरोज और उसके साथी गिरोह बनाकर हिंदू लड़कियों को फ़ँसाते हैं और फिर ब्लैकमेल करके उन्हें निकाह के लिए मजबूर करते हैं। इस मामले में हिंदू संगठनों के हस्तक्षेप का मामला दर्ज किया गया है।

युवती के भाई ने शिकायत देतेे हुए खुद पर और उसकी माँ पर फिरोज खान और उसके साथियों द्वारा जानलेवा हमला करने की आशंका जताई गई है। बताया जा रहा है कि फिरोज खान ने युवती के साथ स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी के लिए एडीएम चतुर्थ के यहाँ आवेदन कर रखा है। डीसीपी वेस्ट अमित कुमार ने बताया कि एफआइआर दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। 

आगरा में भी लव जिहाद

दूसरी तरफ आगरा में सरफराज नाम के एक मुस्लिम युवक ने राज नाम बता हिंदू समाज की नाबालिग से दोस्ती की और उसे अपने प्रेम जाल में फँसा लिया। इस दौरान उसने किशोरी को शादी का झाँसा देकर उसके साथ कई बार रेप किया। इतना ही नहीं, बाद में उसने किशोरी पर धर्मांतरण करके निकाह करने का दबाव बनाने लगा। बता नहीं मानने पर उसने किशोरी और परिजन की हत्या की धमकी भी दी।

छत्ता थाना क्षेत्र निवासी किशोरी ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया कि उसके पिता का पाँच साल पहले निधन हो गया। उसकी माँ दूसरे के घरों में झाड़ू-पोछा लगाने और बर्तन साफ कर परिवार का खर्च चलाती है। किशोरी का कहना है कि जब वह टयूशन पढ़ने जाती थी तो करीब एक साल पहले राज उर्फ राजा से उसकी दोस्ती हुई। आगे चलकर दोनों मिलने-जुलने लगे।

इस दौरान राज ने उससे बताया कि वह उससे प्यार करता है और उससे शादी करना चाहता है। किशोरी ने भी अपनी सहमति देती। इसके बाद शादी का झाँसा देकर आरोपित ने किशोरी के साथ कई बार दुष्कर्म किया। किशोरी का आरोप है कि जब वह उससे शादी के लिए कहती तो वह टाल देता था। एक दिन बहुत जिद करने पर राज ने कहा कि शादी के लिए किशोरी को धर्म बदलकर मुस्लिम बनना पड़ेगा।

किशोरी ने बताया कि उसे पहली बार पता चला कि जिसे वह राज समझ रही थी, असल में वह सरफराज है। इस घटना के बाद किशोरी उससे दूरी बनाने लगी। इसके बावजूद सरफराज लड़की और परिजनों पर शादी का दबाव डालता था। इससे तंग आकर पीड़िता और उसके परिजनों ने आरोपित से कहा कि लड़की बालिग हो जाएगी तो वह शादी करेंगे। इसके बाद सरफराज उन्हें धमकाना शुरू कर दिया।

पीड़िता और परिजनों का आरोप है कि सरफराज ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद लड़की के परिजनों ने हिंदू संगठनों से मदद माँगी और उनके सहयोग से छत्ता थाने में मामला दर्ज कराया है। लड़की के भाई की शिकायत पर आरोपित के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं, पुलिस आरोपित की तलाश कर रही है।

‘इंशाअल्लाह, राम मंदिर को गिराना हमारी जिम्मेदारी बन चुकी है’: धमकी के बाद अयोध्या में अलर्ट जारी कर कड़ी की गई सुरक्षा, 2005 में भी जैश ने बोला था हमला

आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। अयोध्या का राम मंदिर का हाल ही में निर्माण हुआ है और अभी भी इसमें कई कार्य जारी हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहाँ दर्शन करते हैं। इससे संबंधित एक ऑडियो जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अलर्ट जारी किया है। अयोध्या में तैनात सुरक्षाकर्मियों को अतिरिक्त सुरक्षा बरतने के लिए कहा गया है।

अयोध्या में रामकोट के सभी बैरियरों पर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, पुलिस जाँच में जुट गई है। जिस मार्ग से रामलला का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु जाते हैं, वहाँ भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सामने आए ऑडियो में जैश-ए-मुहम्मद का आतंकी कहता है, “बाबरी मस्जिद की जगह तुम्हारा मंदिर बना हुआ है और वहाँ हमारे 3 साथी शहीद हुए हैं। इंशाअल्लाह, इस मंदिर को गिराना हमारी जिम्मेदारी बन गई है।” जैश-ए-मुहम्मद का गढ़ पाकिस्तान में है।

पाकिस्तान से ही इसे पोषण मिलता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को इस ऑडियो की जाँच के लिए लगाया गया है। केंद्र और प्रदेश सरकार की सुरक्षा एजेंसियाँ मिल कर काम कर रही हैं। जैश-ए-मुहम्मद 2005 में राम मंदिर पर हमला भी कर चुका है। तब रामलला टेंट में विराजमान थे और मंदिर बना नहीं था। बस अड्डों पर भी संदिग्ध वस्तुओं की जाँच चल रही है। अयोध्या में NSG (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स) का हब भी बनाया जा रहा है। ये देश का छठा ऐसा हब होगा।

अयोध्या देश के सबसे संवेदनशील और व्यस्त स्थलों में से एक बन गया है, ऐसे में NSG का हब यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का काम करेगा। 5 जुलाई, 2005 को जैश के 5 आतंकियों ने यहाँ हमला बोला था, CRPF ने इन सभी को मार गिराया था। 2023 में भी राम मंदिर पर हमले की धमकी दी गई थी, जो फर्जी निकली थी। भारत के कट्टर मुस्लिम भी अक्सर ‘बाबरी ज़िंदा है’ का नारा लगाते हैं, जिसे असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता भी हवा देते रहे हैं।

मृतकों के शव लेकर कुवैत से भारत पहुँचा विशेष विमान, इमारत में आगजनी मामले में 3 गिरफ्तार: मृतकों में इंजीनियर से लेकर अकाउंटेंट तक

कुवैत में आग की घटना में मरे 45 भारतीयों के पार्थिव शरीर को लेकर भारतीय वायुसेना का एक विशेष विमान शुक्रवार (14 जून 2024) को भारत पहुँच गया। मृतकों के पार्थिव शरीर को लाने के लिए देश के विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह अधिकारियों के साथ कुवैत पहुँचे थे। इस मामले में कुवैत के अधिकारियों ने इमारत के मालिक एवं गार्ड सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

भारतीय वायुसेना का एक विशेष विमान आज सुबह शवों को लेकर केरल के कोच्चि पहुँचा। वहाँ से यह विमान दिल्ली आया। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि मृतकों में केरल के 23, तमिलनाडु के सात, उत्तर प्रदेश के तीन, ओडिशा के दो और बिहार, पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड और हरियाणा के एक-एक व्यक्ति शामिल हैं।

इनमें से अधिकांश मृतक कुवैत की सबसे बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBTC में काम करते थे। जिस इमारत में आग लगी, वह भी NBTC की ही थी। मृतकों में इंजनीनियर और अकाउंटेंट भी हैं। वहीं, नलिनाक्षन करीब 12 साल से एनबीटीसी के साथ काम कर रहे हैं और वर्तमान में केरल के व्यवसायी के.जी. अब्राहम की कंपनी में जनसंपर्क अधिकारी हैं। वे इस घटना में घायल हो गए हैं।

विदेश मंत्रालय में राज्यमंत्री का एवं गोंडा के सांसद कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि कागजी कार्रवाई में कम से कम 10 दिन लगते, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के कारण अधिकारियों ने इसे जल्दी से पूरा कर लिया। जब विमान भारत पहुँचा, उस समय केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन भी हवाई अड्डे पर मौजूद थे।

आज विशेष विमान से वापस लौटे मंत्री ने कहा, “मैं अधिकारियों को धन्यवाद देना चाहता हूँ, क्योंकि उन्होंने हर संभव प्रयास किया और सभी कागजात पूरे करने में पूरा सहयोग किया। इसके कारण इन शवों की पहचान इतने कम समय में हो गई। सामान्य तौर पर इसमें एक सप्ताह या कम से कम दस दिन लग सकते थे। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर अधिकारी इस काम में बहुत तत्पर थे।”

इस मामले में कुवैत के अधिकारियों ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है। गिरफ़्तार किए गए लोगों में छह मंज़िला इमारत का मालिक है, जो कथित तौर पर एक कुवैती नागरिक है। इसके अलावा इमारत के सुरक्षा गार्ड और कंपनी अधिकारी शामिल हैं। ये दोनों आप्रावासी हैं। बताया जा रहा है कि ये फिलिपींस के रहने वाले हैं। इस घटना में फिलिपींस के भी तीन लोग मारे गए हैं।

शुरुआती जाँच में सामने आया है कि सुरक्षा गार्ड को ग्राउंड फ़्लोर पर तैनात था। आग लगने के बाद गार्ड एवं इमारत के अधिकारियों ने लिफ्ट बंद कर दिया, जिससे ऊपरी मंजिलों के लोग नीचे भागे, लेकिन सीढ़ियों पर धुआँ भर जाने के कारण कई लोग ने छत की ओर भागे। वहाँ छत पर जाने के दरवाजे में ताला लगा हुआ था। ऐसी स्थिति में कुछ लोग बालकनी से कूद गए।

कहा जा रहा है ज्यादातर मौत आग में जलने के बाद धुएँ से दम घुटने के कारण हुई है। कहा जा रहा है कि इस मकान में अनुमति से अधिक लोगों को इमारत के मालिक द्वारा रखा गया था। वहीं, इस घटना के बाद UAE में भारत के व्यवसायी और लुलु कंपनी के मालिक एमए यूसुफ अली ने मृतक परिवारों को लगभग 5 लाख रुपए देने की घोषणा की है। ये राशि केरल के मुख्यमंत्री के माध्यम से दी जाएगी।

बता दें कि बुधवार (12 जून 2024) को अल मंगाफ शहर में छह मंजिला (कुछ रिपोर्ट में सात मंजिला) इमारत में भीषण आग लग गई। इसमें 49 लोगों की मौत हो गई। दूतावास ने कहा कि इस आवास में 176 भारतीय श्रमिकों में से 45 की मौत हो गई और 33 अस्पताल में भर्ती हैं। बाकी कथित तौर पर सुरक्षित हैं।

जब तक नहीं हटेगा टाइटल से करण और जौहर, तब तक रिलीज नहीं होगी पिक्चर: बॉलीवुड फिल्म निर्माता की याचिका पर बॉम्बे HC का फैसला

बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर करण जौहर द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट में डाली गई याचिका पर अदालत ने फैसला दे दिया है। करण जौहर ने माँग की थी कि एक फिल्म जिसमें उनका नाम का सीधे तौर पर इस्तेमाल है उसे रोका जाए। ऐसे में कोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज रोक दी। फिल्म आज (14 जून 2024) ही सिनेमाघरों में आने वाली थी।

फिल्म का नाम ‘शादी के डायरेक्टर करण और जौहर’ है। ऐसे में फिल्म डायरेक्टर करण जौहर ने कहा था कि इस फिल्म में उनके नाम का सीधे तौर पर इस्तेमाल हुआ है वो भी इजाजत के, इसलिए उन्हें इससे आपत्ति है और वो माँग करते हैं कि फिल्म को बैन किया जाए।

उनकी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने फिल्म पर रोक लगाने का फैसला दिया। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि फिल्म को सिनेमाघरों या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मपर तब तक रिलीज नहीं किया जाएगा जब तक फिल्म के टाइटल और फिल्म में से करण जौहर नाम और उनकी व्यक्तिगत विशेषताओं को हटाया नहीं जाता है।

उल्लेखनीय है कि फिल्म शादी के डायरेक्टर करण और जौहर के निर्माता इंडिया प्राइड एडवाइजरी और संजय सिंह के खिलाफ फिल्म करण जौहर ने याचिका दायर की थी। एक दिन बाद ही हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई हुई। जस्टिस रियाज चागला ने करण जौहर के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि फिल्म के टाइटल में बिना करण जौहर की इजाजत के उनके नाम का रिफरेंस देना उनके मौलिक अधिकार और पर्सनालिटी राइट का उल्लंघन है।

‘हरियाणा से समझौता करो’: दिल्ली में जल संकट पर लड़ रहे I.N.D.I. गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस और AAP, सुप्रीम कोर्ट में अपने कहे से पलटी हिमाचल सरकार

दिल्ली में जल संकट का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकार की तरफ से बोला जाता है कि उसके पास ‘एक्स्ट्रा’ पानी नहीं है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को डाँट भी लगाई थी और कहा था कि क्यों न आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए। ये मामला ही दिल्ली सरकार की उस याचिका के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें दिल्ली सरकार से सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हिमाचल प्रदेश सरकार 135 क्यूसेक पानी दिल्ली को देना चाहता है, लेकिन हरियाणा वो पानी आने नहीं दे रहा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकार पलट गई। अब एक बार फिर से हिमाचल प्रदेश सरकार की तरफ से ट्विस्ट आया है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल के पास जितना ‘एक्स्ट्रा’ पानी है, वो दिल्ली ही नहीं किसी भी अन्य राज्य को देने को तैयार हैं, लेकिन पहले दिल्ली सरकार हरियाणा के साथ सहमति बनाए।

दिल्ली में जल संकट का पूरा मामला घूम फिर कर वहीं आ गया है, जहाँ से शुरू हुआ था। हालाँकि सुखविंदर सिंह सुक्खू का बयान सुप्रीम कोर्ट में नहीं, बल्कि मीडिया से बातचीत में आया है। यही नहीं, सुक्खू ने ये भी नहीं बताया है कि हिमाचल प्रदेश के पास कितना पानी है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, “हिमाचल के पास जितना भी पानी है, हमारे राज्य की जरूरत के पानी को छोड़कर, हम दिल्ली या किसी अन्य राज्य को सारा पानी देने के लिए तैयार हैं… हिमाचल प्रदेश इस देश का हिस्सा है। अगर पानी हरियाणा से आना है, तो दिल्ली को हरियाणा सरकार के साथ समझौता करना होगा। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है।”

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के बयान को देखें, तो ये जनता में भ्रम फैलाने का मामला साफ तौर पर लगता है। एक तरफ तो राजनीतिक रूप से आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस पार्टी लोकसभा चुनाव में साथ चुनाव लड़ती हैं, जिनकी हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में सरकार है, तो दूसरी तरफ वो हरियाणा की बीजेपी सरकार को निशाना बनाने की कोशिश करती है, ताकि जनता में अविश्वास फैले।

इसे इसी बात से समझा जा सकता है, कि सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकार कुछ और बोलती है, जबकि मीडिया में कुछ और कहती है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार लगातार अपनी बातों से पलट रही है, तो हिमाचल सरकार को डाँट पड़ चुकी है। यहाँ तक कि टैंकर माफिया पर कार्रवाई के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा तो आम आदमी पार्टी ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि माफिया तो हरियाणा से ऑपरेट करते हैं। ऐसे में सुखविंदर सिंह सुक्खू के बयान को जनता किस तरह से देखती है, अब गेंद उसके पाले में है। बाकी ये साफ है कि दिल्ली को हिमाचल प्रदेश से पानी नहीं ही मिलने वाला है।

हिजाब पहनने से रोका तो मुस्लिम शिक्षिका ने कॉलेज ही छोड़ दी, मजहब के नियमों का दिया हवाला: बंगाल में अल्पसंख्यक आयोग में भी दर्ज करा दी शिकायत

पश्चिम बंगाल एक मुस्लिम महिला शिक्षिका ने हिजाब के मुद्दे पर कॉलेज ही छोड़ दिया है। मामला राजधानी कोलकाता के एक प्राइवेट लॉ कॉलेज का है, जहाँ उक्त शिक्षिका को हिजाब पहन कर क्लास चलाने से मना किया गया था। हालाँकि, विरोध होने के बाद में उसे दुपट्टा डालने की अनुमति दे दी गई। अब उसने कहा है कि वो वापस कॉलेज नहीं जा रही हैं। इस पर कॉलेज ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वो उक्त मुस्लिम शिक्षिका के निर्णय का सम्मान करता है।

शिक्षिका संजीदा क़दर ने कॉलेज प्रबंधन को एक ईमेल भेज कर बताया कि वो अब वहाँ नहीं पढ़ाएँगी। टॉलीगंज स्थित LJD लॉ कॉलेज के प्रबंधन ने सोमवार (17 जून, 2024) को एक ईमेल के जरिए संजीदा क़दर को सन्देश भेज कर कहा था कि वो शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए कॉलेज द्वारा बनाए गए ड्रेस कोड का पालन करते हुए यहाँ वापस ज्वाइन कर सकती हैं। साथ ही ये सहूलियत भी दी गई थी कि वो इस दौरान अपना सिर ढँकने के लिए दुपट्टे का इस्तेमाल कर सकती हैं।

इसके बाद शिक्षिका ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय माँगा था। गुरुवार को कॉलेज को भेजे गए ईमेल में शिक्षिका ने कहा कि कॉलेज के निर्णय पर सावधानी से विचार करने के बाद उसने फैसला लिया है कि वो इस संस्थान में फिर से नौकरी नहीं करेगी और अपने लिए नए मौके की तलाश करेगी। मुस्लिम शिक्षिका ने कहा कि वो समझती है कि उसके करियर के लक्ष्य के लिए ये फ़िलहाल सर्वश्रेष्ठ विकल्प नहीं है। उसने कहा कि परिस्थितियाँ उसके लिए सामान्य हो जाएँगी।

कॉलेज ने इसके बाद उसने निर्णय का सम्मान करते हुए उसे बेहतर भविष्य की शुभकामनाएँ दी। रमजान के महीने से ही संजीदा क़दर ने कॉलेज में क्लास के दौरान हिजाब पहनना शुरू कर दिया था। हालाँकि, अप्रैल से चले आ रहे इस सिलसिले पर जून में विवाद हो गया। संजीदा क़दर ने कहा कि इस कॉलेज में वापस पढ़ाने के लिए जाना उसके लिए सुविधाजनक नहीं होगा। उसने कहा कि हिजाब पहनने से रोका जाना उसके सिद्धांतों के खिलाफ है। पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई गई है।