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लड़की हिंदू, सहेली मुस्लिम… कॉलेज में कहा, ‘इस्लाम सबसे अच्छा, छोड़ दो सनातन, अमीर कश्मीरी से कराऊँगी निकाह’: देहरादून के लॉ कॉलेज में The Kerala Story

बॉलीवुड फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ जैसी ही एक कहानी देहरादून में सामने आई है। जहाँ थर्ड ईयर की हिंदू लड़की पर ‘इस्लाम’ का बखान कर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया और न मानने पर उसकी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी गई। ये आरोप लगे हैं लॉ स्टूडेट मुबीना यूसुफ पर, जो कश्मीरी मुस्लिम है। मुबीना ने हिंदू लड़की पर दबाव डाला कि वो धर्म परिवर्तन इस्लाम कबूल कर ले, क्योंकि वही सच्चा और सर्वश्रेष्ठ धर्म है और उसके परिचित कश्मीरी मुस्लिम लड़के से निकाह कर ले। वो युवक अमीर है और हिंदू लड़की को कोई परेशानी नहीं होने देगा। मुबीना इसके लिए ब्लैकमेलिंग भी कर रही थी और अपने द्वारा हिंदू लड़की की खींची गई आपत्तिजनक तस्वीरों को इसका हथियार बना रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित लड़की का नाम सरिता चौधरी (नाम परिवर्तित) है, जो साल 2021 से देहरादून के सिद्धार्थ लॉ कॉलेज में पढ़ती है। उसके साथ ही कश्मीर के अनंतनाग की रहने वाली मुबीना यूसुफ भी पढ़ती है। मुबीना यूसुफ और सरिता में अच्छी बनने लगी, तो मुबीना ने उसे बहकाने की कोशिश शुरू कर दी। वो उससे सनातन धर्म के बारे में उल्टी-सीधी बातें बोलती और कहती कि इस्लाम ही सच्चा धर्म है। वो सबसे अच्छा है। तुम इस्लाम अपना लो, तुम्हें जिंदगी भर कोई दिक्कत नहीं होगी। मैं तुम्हारी शादी अपने अमीर परिचित कश्मीरी लड़के से करा दूँगी, वो तुम्हारा ख्याल रखेगा।

लेकिन जब सरिता ने उसकी बातों को मानने से इनकार कर दिया, तो वो धमकाने पर उतर आई। यही नहीं, मुबीना ने कथित पर गुरुग्राम की जेल में बंद बदमाशों से भी सरिता को धमकी दिलवाई कि उसकी बात न मानने पर उसके साथ कुछ भी हो सकता है। मुबीना उससे बोलती थी कि अगर वो उसकी पसंद के लड़के से निकाह कर लेगी, तो वो फोटो डिलीट कर देगी। यही नहीं, वो पैसों की भी माँग करती थी।

माता-पिता को बदलते व्यवहार पर हुआ शक, तो हुआ मामले का खुलासा

बताया जा रहा है कि मुबीना सरिता के माता-पिता से बाकायदा परमिशन लेकर उसे अपने घर अनंतनाग लेकर गई थी, जहाँ दोनों दस दिन तक रहे। वहाँ मुबीना ने अपने मुस्लिम दोस्त के साथ मीटिंग करके उस पर निकाह करने का दबाव बनाने लगी। वापस आने के बाद लॉ की छात्रा डिप्रेशन में चली गई और घर से बाहर निकलने से डरने लगी। यहाँ तक ​​कि मुबीना की धमकियों के कारण उसने कॉलेज जाना भी बंद कर दिया। बाद में पीड़िता की माँ, जो पेशे से वकील हैं, को लड़की की आपबीती पता चली और उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने को कहा।

इस बारे में सरिता के माता-पिता ने भी मीडिया से बात की और बताया कि हमनें अपनी बच्ची के व्यवहार में बदलाव पाया। लेकिन जब बच्ची ब्लैकमेलिंग नहीं झेल पाई, तब जाकर हमसे पूरी बात बताई। इस मामले में परिवार ने देहरादून के रायपुर थाने में पुलिस से संपर्क किया और एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में 10 जून 2024 को जबरन वसूली, आपराधिक धमकी और उत्तराखंड स्वतंत्रता अधिनियम-2018 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी, पीड़िता ने बताई आपबीती

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है, ‘मुबीना यूसुफ मेरे साथ ही सिद्धार्थ लॉ कॉलेज में पढ़ती है। उसने मुझे भरोसे में लेने के बाद कब मेरी फोटो खींची मुझे पता नहीं चला। उसके बाद वो मुझे अपने मुस्लिम धर्म के बारे में बताने लगी कि मुस्लिम धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है। तुम अपना सनातन/हिन्दू परिवर्तित करके मुस्लिम बन जाओ, मैं अपने रसूखदार मुस्लिम दोस्त से निकाह करा दूँगी। ये सिलसिला काफी समय तक चलता रहा। एक दिन मैंने तंग आकर मना कर दिया, तो मुबीना आग-बबूला हो गई और कहा, ‘मैंने तेरी प्राइवेट फोटो ले रखी है, नहीं मानी तो वायरल कर दूँगी। और कहती कि मुस्लिम लड़के से निकाह के बाद ही फोटो डिलीट करूँगी। मुबीना ने मुझसे कहा कि मेरे संबंध गैंगस्टरों से है, मैं तुम्हें मरवा दूँगी। यही नहीं, मुबीना मुझसे नए-नए लड़कों से दोस्ती करने और पैसे लाकर देने की डिमाँड करने लगी।’

इस मामले में एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि छात्रा की शिकायत के आधार पर आरोपी मुबीना यूसुफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इस मामले जबरन वसूली, आपराधिक धमकी और उत्तराखंड स्वतंत्रता अधिनियम-2018 की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और जाँच के बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जोशीमठ को मिली पौराणिक ‘ज्योतिर्मठ’ पहचान, कोश्याकुटोली बना श्री कैंची धाम : केंद्र की मंजूरी के बाद उत्तराखंड सरकार ने बदले 2 जगहों के नाम

उत्तराखंड में जोशीमठ और कोश्याकुटोली को नई पहचान मिली है। उत्तराखंड सरकार द्वारा भेजे गए नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है, जिसके बाद चमोली जिले के जोशीमठ को ज्योतिर्मठ और नैनीताल जिले की कोश्याकुटोली तहसील का नाम बदलकर श्री कैंची धाम तहसील कर दिया गया है। बता दें कि पिछले साल ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात का ऐलान जनसभा में किया था कि उत्तराखंड सरकार इन दोनों जगहों के नाम बदलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेज रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते वर्ष कैंची धाम मंदिर की स्थापना दिवस (15 जून) समारोह के मौके पर कोश्याकुटोली तहसील को कैंची धाम के नाम पर करने की घोषणा की थी। इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने ये प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया था, जो मंजूर हो गया। भारत सरकार की ओर से मंजूरी मिलने के बाद सभी औपचारिकताएँ पूरी गई और अब उत्तराखंड सरकार ने नाम बदलने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

बीते कई सालों से स्थानीय लोग चमोली जिले में स्थित जोशीमठ का नाम बदलने की माँग कर रहे थे। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए जोशीमठ तहसील को ज्योतिर्मठ नाम देने का फैसला लिया था। बता दें कि ज्योतिर्मठ हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक महत्व रखता है। ज्तोतिर्मठ आदि गुरु शंकराचार्य की तपोस्‍थली रही है। माना जाता है कि वो यहाँ आठवीं शताब्दी में आए थे और अमर कल्‍पवृक्ष के नीचे तपस्‍या के बाद उन्‍हें दिव्‍य ज्ञान ज्‍योति की प्राप्ति हुई थी। ज्‍योतेश्‍वर महादेव और दिव्‍य ज्ञान ज्‍योति की वजह से ही इस जगह को ज्‍योर्तिमठ का नाम दिया गया था। ये जगह बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब और केदारनाथ जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों का प्रवेश द्वार भी है।

वहीं, कोश्याकुटोली तहसील का नाम श्री कैंची धाम हो जाने से बाबा नीम करौली के भक्तों में भारी उत्साह है। श्रद्धालुओं का कहना है कि देश दुनिया के लाखों भक्तों की बाबा नीब करौली महाराज के प्रति भारी आस्था है। कैंची धाम के विकास के लिए इसे मानसखण्ड मन्दिरमाला मिशन में भी शामिल किया गया है।

बाहुबली के ‘कटप्पा’ ने यूपी-बिहार के मजदूरों का उड़ाया मजाक, कहा- ‘इन्हें द्रविड़ियन बनाओ, आत्म सम्मान समझाओ’: ‘सनातन मिटाने’ का भी किया था समर्थन

बाहुबली फिल्म में ‘कटप्पा’ का किरदार निभाने वाले तमिल एक्टर सत्यराज ने यूपी-बिहार जैसे उत्तरी राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों का मजाक उड़ाकर विवाद खड़ा कर दिया है। तमिलनाडु के त्रिची में आयोजित एक कार्यक्रम में सत्यराज ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को “आत्म-सम्मान क्या होता है, यह सिखाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि चूँकि वे पीढ़ियों तक नहीं जाएँगे, इसलिए उत्तरी राज्यों से आए प्रवासी श्रमिकों को “द्रविड़ मॉडल और विचारधारा के सिद्धांत” सिखाना ज़रूरी है। इससे पहले, सत्यराज ने उदयनिधि स्टालिन की ‘सनातन को मिटाओ’ बयान का भी समर्थन किया था और इसके लिए उदयनिधि की तारीफ भी की थी।

डीएमके के समर्थक माने जाने वाले सत्यराज ने तमिलनाडु से विदेशों में पलायन और देश के उत्तरी राज्यों से तमिलनाडु में बस रहे प्रवासियों और उनकी वजह से सामने आ रही समस्याओं के बारे में समझाते हुए ये बयान दिया। उन्होंने तमिलनाडु आने वाले उत्तर भारतीय मजदूरों की तुलना भारत जैसे देशों से अमेरिका और ब्रिटेन जाकर बसने वाले लोगों से की। सत्यराज ने कहा कि अपने जीवन में परेशानियों का सामने करने वाला मजदूर वर्ग तमिलनाडु में आकर अमेरिका की तरह ही तमिलनाडु को अपनी पसंदीदा जगह के तौर पर देखता है।

सत्यराज ने कहा, “उत्तरी राज्यों के श्रमिक यहाँ क्यों आते हैं? वे यहाँ इसलिए आते हैं क्योंकि यहाँ सब ठीक नहीं है, है न? सभी अप्रवासियों को हमारे द्रविड़ मॉडल, द्रविड़ दर्शन को वास्तव में जानने का कोई मौका नहीं मिलता। जबकि ये लोग पीढ़ियों-पीढ़ियों के लिए यहाँ बस जाते हैं। जैसे अमेरिका पहुँचने वाले लोग वहीं बस जाते हैं और अमेरिका को छोड़कर नहीं जाना चाहते, वैसे ही बिहार जैसे उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों से आए लोग भी करते हैं। वो अमेरिका की तरह ही तमिलनाडु को भी नहीं छोड़कर जाना चाहते, उनके लिए तमिलनाडु अमेरिका जैसा ही होगा।”

सत्यनाज ने प्रवासी मजदूरों में ‘द्रविड़ियन विचार धारा को जगाने के लिए’ ट्रेनिंग सेंटर तक खोलने का सुझाव दिया, ताकि लोगों को तमिल और द्रविड़ कल्चर के बारे में बताया जा सके। उन्होंने सुझाव किया कि यूपी जैसे राज्यों में भी ऐसे सेंटर खोले जाने चाहिए, तभी राजनीतिक बदलाव और जागरण होगा। प्रवासी मजदूरों का मजाक उड़ाते हुए सत्यराज ने कहा कि उन्हें सिखाया जाना चाहिए कि आत्म-सम्मान क्या है? महिलाओं की आजादी क्या है? उन्होंने तर्क दिया कि चूँकि वे पीढ़ियों तक तमिलनाडु नहीं छोड़ेंगे, इसलिए उन्हें द्रविड़ मॉडल और विचारधारा की जानकारी दी जानी चाहिए।

सत्यराज ने कहा , “वे निश्चित रूप से यहाँ से नहीं जाएंगे, उन्हें सिखाया जाना चाहिए कि आत्म-सम्मान क्या है? तर्कसंगत सोच क्या है? द्रविड़ मॉडल क्या है? भले ही वे तमिल नहीं जानते हों, वे इसे एक पीढ़ी में सीख लेंगे, बस उन्हें उनकी भाषा में कुछ चीजें सिखाएँ, जैसे कि आत्म-सम्मान क्या है, तर्कसंगत सोच क्या है, महिलाओं की मुक्ति क्या है, कोई भी जन्म से बड़ा या छोटा नहीं होता। ऐसा करना क्रूरता है। उत्तरी भारत के राज्यों में जन्म के आधार पर भेदभाव होता है, जिसकी कोई सीमा नहीं है। उन्हें ये सब समझाया जाना चाहिए।”

बता दें कि सत्यराज द्रविड़ विचारधारा की वकालत करते रहे हैं और अक्सर अपने भाषणों और अपनी फिल्मों के माध्यम से इन विचारों को बढ़ावा देते हैं। वह अक्सर ऐसी फिल्मों में दिखाई देते हैं, जिनमें ब्राह्मणों को गलत तरीके से दिखाया जाता है। उनकी फिल्मों में द्रविड़ किरदारों को सकात्मक दिखाया जाता है और ब्राह्मणों को अक्सर अत्याचारी भूमिका में दिखाया जाता है। यहाँ ये भी बता दें कि सत्यराज ईवी रामास्वामी की बायोपिक में उनकी भूमिका भी निभा चुके हैं। ईवी रामास्वामी को पेरियार नाम से भी जाना जाता है, जो ब्राह्मण विरोधी रहा है और उसे द्रविड़ियन राजनीतिक पार्टियाँ सम्मान की नजर से देखती हैं। असल में, पेरियार उत्तर और दक्षिण भारत बीच विभाजन की रेखा बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है।

इससे पहले सत्यराज उदयनिधि स्टालिन का भी समर्थन कर चुके हैं, जब स्टालिन ने सनातन परंपरा को लेकर विवादास्पद बयान दिए थे और सनातन को मिटाने की बात कही थी। स्टालिन ने सनातन की तुलना डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी। उस समय सत्यराज ने उदयनिधि स्टालिन को अपना समर्थन देते हुए कहा था , “मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म के बारे में स्पष्ट रूप से बात की है। मैं मंत्री उदयनिधि के साहस की सराहना करता हूँ। वो जिस तरह से हर मामले को संभालते हैं, वो शानदार है।”

बकरीद से पहले एक ट्रक में ठूँसे थे 19 ऊँट, गोपालगंज में बरामद: मेवात के जुनैद, साहिल सहित 4 तस्कर गिरफ्तार

बिहार के गोपालगंज जिले में ऊँटों की तस्करी के रैकेट का खुलासा हुआ है। मंगलवार (11 जून 2024) को पुलिस ने एक ट्रक में भर कर ले जा रहे 19 ऊँटों को जीवित बरामद किया है। इन ऊँटों की कीमत लगभग 30 लाख रुपए आँकी जा रही है। ऊँटों के साथ 4 तस्कर भी गिरफ्तार किए गए हैं। तस्करों में 2 के नाम जुनैद खान हैं। बाकि 2 अन्य के नाम शाहनवाज और साहिल हैं। इनमें से जुनैद खान और साहिल हरियाणा के मेवात से हैं। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना गोपालगंज के नगर थानाक्षेत्र की है। मंगलवार को यहाँ के अरार मोड़ पर DSP स्वर्ण प्रभात अपनी पुलिस टीम के साथ चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान एक ट्रक को रोक कर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान ट्रक से 19 ऊँट बरामद हुए हैं।

बरामद किए गए ये ऊँट दुर्लभ प्रजाति के हैं। इन्हें राजस्थान सरकार द्वारा संकटग्रस्त प्रजाति घोषित किया गया है। इनके संरक्षण के भी प्रयास जारी हैं। पुलिस ने ट्रक को कब्ज़े में ले लिया। ट्रक के साथ मथुरा के रहने वाले जुनैद और शाहनवाज के साथ नूहं मेवात के निवासी जुनैद खान और साहिल को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस की पूछताछ में इन आरोपितों ने ऊँटों की तस्करी की बात कबूली है। इन्होंने बतया कि वो ऊँटों को राजस्थान से बिहार के मुजफ्फरपुर ले जा रहे थे। मुजफ्फरपुर से इन्हें किसी और शहर में भेजा जाना था। ऊँटों को बड़ी बेरहमी से एक के ऊपर एक ठूँस कर रखा गया था।

छुड़ाने के बाद पुलिसकर्मियों ने ऊँटों के लिए चारे और पानी की भी व्यवस्था करवाई। अब पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि ऊँटों के ये तस्कर पिछले तमाम बैरियर पार करके बेरोकटोक गोपालगंज तक कैसे पहुँच गए?

गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इन ऊँटों की कीमत लगभग 30 से 40 लाख रूपयों के बीच है। इन सभी को सुरक्षित स्थान पर रखवाया गया है। पकड़े गए तस्करों से पूछताछ करके उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग भी खँगाले जा रहे।

बकरीद में होती है ऊँटों की कुर्बानी

बताते चलें कि आने वाले 16-17 जून को मुस्लिमों के बकरीद (ईद उल अजहा) का त्यौहार है। इस त्यौहार में बड़े पैमाने पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। कई मौकों पर ऊँटों की कुर्बानी के केस भी सामने आए हैं। ऊँट की कीमत उनके वजन के हिसाब से तय होती है।

9 साल पहले वाराणसी के मदनपुरा इलाके में ऊँट की कुर्बानी की खबर काफी प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। मुस्लिम तबका इसे ब्रिटिश काल की परम्परा बताता है। बाद में प्रशासन ने ऊँट की कुर्बानी पर रोक लगाई तो मुस्लिमों ने इस आदेश का विरोध किया था। तब हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि फ़ोर्स लगानी पड़ी थी।

नाबालिग औलाद ने ही अपने इमाम अब्बा का किया सिर तन से जुदा: कट्टर इस्लामी-वामी मचा रहे ‘मुस्लिम टारगेट किलिंग’ का शोर, पुलिस जाँच में सब क्लियर

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में मस्जिद के एक इमाम की हत्या कर दी गई है। इस हत्या को सोशल मीडिया के कई वामपंथी और कट्टर मुस्लिम हैंडल सांप्रदायिक रंग दे रहे। इसे उत्तर प्रदेश में इस्लामी स्कॉलर्स की टारगेट किलिंग के तौर पर बता कर सनसनी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस की जाँच में हालाँकि अब तक किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक एंगल अथवा टारगेट किलिंग जैसी घटना की पुष्टि नहीं हुई है। शामली की घटना में तो मौलाना की हत्या के केस में उनके बेटे को ही जेल भेजा गया है।

यह मामला शामली जिले के थानाक्षेत्र झिंझाना का है। यहाँ के गाँव बल्ला माजरा में 11 जून (मंगलवार) को मस्जिद के इमाम फजलुर्रहमान की सिर काट कर हत्या कर दी गई थी। धड़ से अलग शव लगभग आधे किलोमीटर दूर बरामद हुआ था। इस घटना के सामने आते ही आए दिन भ्रामक खबर उड़ाने वाले तमाम कट्टर मुस्लिम हैंडल फ़ौरन एक्टिव हो गए। उन्होंने इस घटना को फ़ौरन ही टारगेट किलिंग का रूप और रंग देना शुरू कर दिया। निगार परवीन के ट्वीट पर हक की आवाज ने लिखा, “जानबूझकर मुस्लिम धर्मगुरुओं को निशाना बनाया जा रहा है पर अभी तक कुछ नहीं हुआ, आखिर इसके पीछे क्या कारण है?”

इसके अलावा कविश अजीज ने भी इस घटना को अपने शब्दों से हवा दी। उन्होंने इसे प्रतापगढ़ की कड़ी से जोड़ा और उत्तर प्रदेश में सब ठीक होने का व्यंग्य किया।

भ्रामक खबरों में अक्सर अपनी हाजिरी दर्ज करवाने वाले कथित पत्रकार मीर फैज़ल भी इस मामले में पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी शामली की इस घटना को प्रतापगढ़ के मौलाना की हत्या की अगली कड़ी के तौर पर दिखाने का प्रयास किया।
इन सभी के हैंडलों पर हालाँकि शामली पुलिस जाँच जारी होने की बात कह रही थी। इन सभी को पुलिस यह भी बता रही थी कि शक के आधार पर मृतक के बेटे को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बावजूद इसके भ्रामक खबरें फैलाने का सिलसिला जारी रहा।

बेटे ने ही की थी अपने अब्बा की हत्या

आखिरकार पुलिस ने महज 6 घंटों में ही इमाम फजलुर्रहमान की हत्या का खुलासा कर दिया। 11 जून (मंगलवार) को पुलिस ने मृतक के नाबालिग बेटे को ही अपने अब्बा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है।

पुलिस की जाँच में निकल कर सामने आया कि 50 वर्षीय इमाम फजलुर्रहमान मंगलवार को अपने बेटे के साथ काम करने पास की बाग में गए थे। यहाँ सुबह 10 बजे बाप-बेटे में किसी बात को लेकर बहस हो गई थी। इसके बाद तैश में आए बेटे ने पास रखे फावड़े से अपने अब्बा पर ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए।

कुछ ही देर में फजलुर्रहमान की मौत हो गई। हत्या के बाद भी मृतक के बेटे का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसने अपने अब्बा का सिर फावड़े से काट लिया और उसे लेकर मौके से फरार हो गया। गाँव वालों ने इमाम की लाश देख कर पुलिस को सूचना दी।

पुलिस ने मृतक के बेटे को खोज निकला और हिरासत में ले लिया। कुछ ही देर की पूछताछ में आरोपित ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। हत्या में प्रयोग हुआ फावड़ा भी बरामद कर लिया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में नाबालिग आरोपित को मानसिक रूप से बीमार भी बताया जा रहा है। पुलिस इन सभी पहलुओं पर जाँच कर रही है।

कुवैत में आग से 41 लोगों की मौत, कई भारतीय भी : हेल्पलाइन नंबर जारी, कुवैती मंत्री बोले- ‘मकान मालिक की लालच ने ली इतने लोगों की जान’

कुवैत की एक बिल्डिंग में आग लग गई। आगजनी की इस घटना में 41 लोगों की मौत हो गई। बिल्डिंग में फँसे अधिकतर लोगों की मौत दम घुटने की वजह से हुई है। इस हादसे में करीब 3 दर्जन लोगों को बचा लिया गया। बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग में आग लगी, उसमें भारतीतों, पाकिस्तानियों और बांग्लादेशी जैसे विदेशी मजदूर रहते थे।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत के दक्षिणी शहर संगाफ में ये हादसा हुआ। हादसा बुधवार (12 जून 2024) के तड़के हुआ, जब मजदूर लोग सो रहे थे। बताया जा रहा है कि मरने वालों में बड़ी संख्या भारतीयों की है, हालाँकि आधिकारिक रूप से मृतकों की नागरिकता का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन माना जा रहा है कि इस हादसे में भारतीय नागरिकों की ज्यादा मौतें हुई हैं।

इस बीच, कुवैत के उपप्रधानमंत्री शेख फहद यूसुफ सौद अल-सबाह ने घटनास्‍थल का दौरा किया। वो देश के गृह और रक्षा मंत्री भी हैं। उन्‍होंने इस भीषण अग्निकांड के लिए रियल एस्‍टेट ऑनर को जिम्‍मेदार ठहराया। उन्‍होंने कहा कि रियल एस्‍टेट ऑनर की लालच की वजह से यह भयावह घटना घटित हुई है। इस दौरान, कुवैत में भारत के राजदूत आदर्श स्‍वैका ने अल-अदन अस्‍पताल का दौरा किया। इसी अस्‍पताल में पीड़ितों को भर्ती कराया गया है। भारतीय राजदूत ने सभी घायलों को हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया।

भारत के विदेश मंत्री एस जंयशकर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘कुवैत शहर में आग लगने की घटना की खबर से गहरा सदमा लगा है। कथित तौर पर 40 से अधिक मौतें हुई हैं और 50 से अधिक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमारे राजदूत शिविर में गए हैं। हम आगे की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।उन लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना, जिन्होंने दुखद रूप से अपनी जान गँवाई। जो लोग घायल हुए हैं उनके शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। हमारा दूतावास इस संबंध में सभी संबंधित पक्षों को पूरी सहायता प्रदान करेगा।

कुवैत में भारत के दूतावास ने हादसे पर जानकारी देते हुए बताया है कि आज भारतीय कामगारों के साथ हुई दुखद दुर्घटना के संबंध में दूतावास ने एक आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। ये नंबर है- +965-65505246। सभी संबंधित लोगों से अपडेट के लिए इस हेल्पलाइन से जुड़ने का अनुरोध किया जाता है। दूतावास हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सड़क पर सोने से लेकर, बम हमला झेलने तक… जानें ओडिशा के नए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी कौन हैं, कैसे हुई थी राजनीति की शुरुआत

ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद मोहन चरण माझी आज से प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। 52 साल की उम्र में माझी को इस मुकाम पर पहुँचता देख कई लोग बहुत खुश हैं। उनकी माँ और पत्नी ने उन्हें ढेरों शुभकामनाएँ दीं। साथ ही ये भी कहा कि पहले माझी को स्थानीय स्तर पर लोगों का भला करना होता था। अब उनपर राज्य की भी जिम्मेदारी होगी।

आज के दिन मोहन माझी से जुड़ा हर व्यक्ति माझी के संघर्ष के दिनों को भी याद कर रहा है। याद किया जा रहा है कि कैसे माझी ने सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी और बाद में वो राजनीति में आए।

माझी ने सरपंच बनकर पहले लोगों की समस्याओं को समाधान करना शुरू किया और बाद में वो विधायक चुने गए। जानकारी के मुताबिक साल 2000 में विधायक बनने से पहले वो गाँव के सरपंच थे। साल 1997 से 2000 तक उन्होंने सरपंच का पद संभाला था। इसके बाद वो 2000 में पहली बार विधासभा चुनाव जीतकर विधायक बने थे, फिर 2004 में भी चुनाव उन्होंने ही जीता था।

बाद में 2019 में वो पार्टी के मुख्य सचेतक बन गए। 2019 में ही उनकी राजनीति में फिर विधायक बन वापसी हुई। हालाँकि यही वो समय था जब उन्हें क्वार्टर में देरी के कारण फुटपाथ पर सोना पड़ा था। इसका जिक्र उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष एसएन पात्रो से भी किया था। उन्होंने बताया था कि वो कम समय में किराए के घर पर नहीं रह सकते थे और उसके बाद से वो खुले में सो रहे थे। उस दौरान उनका फोन भी चोरी हो गया था।

मालूम हो कि इस बार भी जब वो सीएम बने हैं तो अभी तुरंत उन्हें कोई आवास नहीं मिल रहा। एक दो मंजिला क्वार्टर है जिसे रेनोवेट कराने का काम हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले 24 सालों से ओडिशा के मुख्यमंत्री पद पर बैठे नवीन पटनायक अपने निजी आवास में रहा करते थे ऐसे में अलग से सीएम आवास की जरूरत नहीं हुई। अब जब सीएम बदले हैं तो इस मुद्दे पर काम शुरू हुआ है।

बता दें मोहन चरण माझी के ऊपर 2021 में अज्ञान हमलावरों द्वारा बम भी फेंके गए थे। उस समय वह क्योंझर कस्बे थानांतर्गत मंडुआ इलाके में भाजपा श्रमिक संघ की बैठक में भाग लेकर वापस लौट रहे थी। हमले में वह बाल-बाल भचे थे। उन्होंने उस समय बीजद के स्थानीय नेताओं पर ऐसा करने का आरोप लगाया था।

ICC T20 विश्वकप: IND Vs USA मैच में मुंबई के इन 2 छोरों से बचकर रहे Team India, विराट कोहली-रोहित शर्मा वाले टॉप ऑर्डर पर पड़ सकते हैं भारी

आईसीसी टी-20 विश्वकप में बुधवार (12 जून 2024) को भारतीय क्रिकेट टीम का मुकाबला अमेरिकी क्रिकेट टीम से है। कागजों पर ये तो मुकाबला एकतरफा भारतीय टीम के पक्ष में लग रहा है, लेकिन अभी-अभी अमेरिकी टीम ने पाकिस्तानी टीम को जिस तरह से सुपर ओवर में हराया है, उसके बाद से इस अमेरिकी टीम का मनोबल भी काफी बढ़ चुका है। ऐसे में भारतीय टीम को इस अमेरिकी टीम से बचकर रहना होगा। इस अमेरिकी टीम में 2 ऐसे मुंबई कर शामिल हैं, जो भारत के लिए अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल चुके हैं और वो अपने फन में माहिर माने जाते हैं। इनके नाम हैं सौरभ नेत्रावलकर और हरमीत सिंह।

सौरभ और हरमीत, दोनों ही भारत के लिए अंडर-19 वर्ल्डकप खेल चुके हैं। सौरभ नेत्रावलकर 2010 के विश्वकप में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बॉलर रहे थे, तो 2012 में हरमीत सिंह वाली भारतीय टीम चैंपियन बनी थी। हरमीत ने फाइनल में भले ही कोई विकेट नहीं लिया था, लेकिन कैमरन बैनक्रॉफ्ट, ट्रेविस हेड, एस्टन टर्नर जैसे विस्फोटक बल्लेबाजों को पूरी तरह से बाँधकर रखा था और 10 ओवरों में 1 मेडन ओवर फेंकते हुए महज 36 रन दिए थे। उन्मुक्त चंद उस भारतीय टीम के कप्तान थे, जो अभी अमेरिकी टीम की तरफ से खेलने की कोशिश कर रहे हैं। खैर, इन दोनों खिलाड़ियों के बारे में ऑपइंडिया पहले ही बता चुका है, लेकिन अब हम बता रहे हैं कि क्यों, मुंबई के इन दोनों खिलाड़ियों से टीम इंडिया को सावधान रहने की जरूरत है।

सबसे पहले बात सौरभ नेत्रावलकर की, जो बाएँ हाथ के मध्यम गति के बॉलर हैं और विकेट के दोनों तरफ गेंद को मूव कराने की क्षमता रखते हैं। यही नहीं, वो अपनी तेजी से भी परेशान करते हैं। स्विंग गेंदबाजी में माहिर सौरभ नेत्रावलकर अमेरिकी टीम के 3 साल तक कप्तान भी रहे हैं। खैर, अभी बात उनके उस कौशल की, जो रोहित शर्मा, विराट कोहली, सूर्य कुमार यादव जैसे बल्लेबाजों पर भारी पड़ सकता है। दरअसल, टीम इंडिया के टॉप बल्लेबाज हमेशा से बाएँ हाथ के तेज गेंदबाजों के खिलाफ परेशानी महसूस करते हैं। पिछले कुछ सालों में मिचेल स्टार्क, शाहीन शाह अफरीदी, ट्रेंट बोल्ट, मुस्तफिजुर रहमान जैसे गेंदबाजों ने इसे बार-बार साबित भी किया है। ऐसे में सौरभ से भारतीय टीम के टॉप ऑर्डर को बेहद खतरा हो सकता है।

सौरभ नेत्रावलकर ने पाकिस्तानी टीम के खिलाफ 4 ओवरों में महज 18 रन देकर 2 बल्लेबाजों को आउट किया था। सौरभ ने इंटरनेशनल मैचों में महज 48 वनडे मैचों में 73 विकेट लिए हैं, तो 29 टी-20 मैचों में 29 विकेट ले चुके हैं। दोनों ही फॉर्मेट में वो 5-5 विकेट लेने का भी कारनामा कर चुके हैं। ऐसे में सौरभ नेत्रावलकर से अमेरिकी टीम उसी तरह की गेंदबाजी की आस एक बार फिर से करेगी।

वहीं, हरमीत सिंह ऐसे फन में माहिर हैं, जो दाएँ हाथ के बल्लेबाजों के लिए दिक्कतें खड़ी करता है। वैसे, भारत-पाकिस्तान के मैच में भारतीय टीम ने जिस स्पिनर शादाब के सामने लगभग समर्पण कर दिया था, हरमीत सिंह भी वैसे ही बॉलर हैं। लेकिन हरमीत सिंह शादाब खान से कहीं बेहतर और दिलेर बॉलर हैं। हरमीत सिंह बाएँ हाथ से स्पिन बॉलिंग करते हैं, जो विराट कोहली, रोहित शर्मा जैसे भारतीय बल्लेबाजों के लिए हमेशा से पहेली रहा है। विराट कोहली बीते आईपीएल में भी बाएँ हाथ के स्पिनर्स के सामने संघर्ष करते रहे हैं, यही वजह है कि सनराइजर्स हैदराबाद ने अभिषेक शर्मा जैसे पार्टटाइम बॉलर को भी विराट कोहली के सामने उतारने में कोई झिझक नहीं दिखाई, फिर यहाँ तो हरमीत सिंह हैं, जिनमें दिलीप सरदेसाई जैसे महान खिलाड़ी को बिशन सिंह बेदी जैसे महान स्पिनर की झलक दिखती थी।

आँकड़ों की बात करें, तो हरमीत सिंह भले ही 8 इंटरनेशनल टी-20 मैचों में महज 7 विकेट ले पाए हों, लेकिन उनकी इकॉनमी शानदार रही है। उन्होंने महज 6.72 की इकॉनमी से ही रह दिए हैं। एक बार 4 विकेट भी ले चुके हैं। उनकी बॉलिंग कितनी बेहतरीन है, इसे पाकिस्तान के मैच से ही समझ सकते हैं, जिसमें उन्होंने भले ही किसी पाकिस्तानी बैट्समैन को आउट न किया हो, लेकिन उनके 4 ओवरों में 34 रन ही बने थे। वहीं, कनाडा के खिलाफ हरमीत ने 4 ओवरों में महज 27 रन देकर एक विकेट निकाला था, वो भी तक, जब कनाडा की टीम ने 194 रन बना दिए थे। हालाँकि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में हरमीत के नाम 31 मैचों में 87 विकेट दर्ज हैं, तो वो 1 शतक भी लगा चुके हैं। हरमीत की बल्लेबाजी पर अमेरिकी टीम को कितना भरोसा है, उसे इस बात से ही समझ लीजिए कि पाकिस्तान के खिलाफ हरमीत को सुपर ओवर में बल्लेबाजी के लिए उतारा गया था।

बता दें कि अमेरिकी टीम ने अब तक 2 मुकाबले विश्वकप में खेले हैं और दोनों में ही उसने बड़ी जीत दर्ज की है। अमेरिका ने कनाडा को इस विश्नकप के पहले ही मैच में 7 विकेट से हराया था। कनाडा ने अमेरिका के सामने 195 रनों का लक्ष्य रखा था, लेकिन अमेरिकी टीम ने 197 रन बना दिए, वो भी बिना विकेट खोए। वहीं, पाकिस्तानी टीम द्वारी 159 रन बनाने के बाद अमेरिकी टीम ने न सिर्फ मैच को टाई कराया, बल्कि सुपर ओवर में उसने पाकिस्तान को 5 रनों से हराकर टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट का सबसे बड़ा उलटफेर भी कर दिया था। ऐसे में भारतीय टीम को इस अमेरिकी टीम से बच कर रहने की जरूरत है, खास कर तब, जब उसके बाद बेहतरीन इंटरनेशनल क्रिकेटर हैं।

पोस्ट से छवि बिगड़ी… विपक्ष ने भी किया बदनाम: शांतनु सिन्हा के खिलाफ मानहानि केस करेंगे BJP नेता अमित मालवीय, ट्वीट करके दी जानकारी

भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित मालवीय को लेकर पोस्ट करने वाले आरएसएस कार्यकर्ता शांतनु सिन्हा के खिलाफ मालवीय मानहानि केस करेंगे। ये जानकारी उन्होंने X के ट्वीट में दी। मालवीय का कहना है कि उन्होंने सिन्हा को नोटिस भेजकर बिन किसी शर्त माफी माँगने को कहा था। हालाँकि, नोटिस के बावजूद सिन्हा ने ऐसा नहीं किया इसलिए वह अब आगे एक्शन लेंगे।

उन्होंने अपने बयान में कहा पोस्ट का जिक्र करते हुए पहले बताया कि उन्हें हैरानी नहीं है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस और कॉन्ग्रेस ने इस मामले में झूठ फैलाने का काम किया। वहीं शांतनु सिन्हा पर बयान देते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने शांतनु से बिन किसी शर्त के माफी माँगने को कहा था, लेकिन सिन्हा ने 11 जून को जो अपना बयान दिया, वो वैसे माफी नहीं है जैसी कही गई थी।

मालवीय कहते हैं कि उनके ऊपर किया गया पोस्ट बेहद अपमानजनक था और विपक्षी पार्टियों ने इसे उनकी छवि बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल किया। ऐसे में शांतनु सिन्हा के खिलाफ आईपीसी की सुसंगत धाराओं के तहत केस होगा। जरूरत पड़ने पर और भी सलाह लेकर एक्शन लिया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले अमित मालवीय पर लगाए गए आरोपों को लेकर आरएसएस कार्यकर्ता ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि वो पोस्ट में सिर्फ हनी ट्रैप के बारे में सावधान कर रहे थे, उन्होंने कोई इल्जाम अमित मालवीय पर नहीं लगाया था।

आगे उन्होंने कहा था कि अगर उनकी पोस्ट से मालवीय को ठेस पहुँची है या इस तरह की गलत व्याख्या और संपादित संस्करण के कारण छवि खराब हुई है, तो वो इसके लिए हार्दिक दुख व्यक्त करते हैं। उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा था कि उन्होंने कुछ भी ऐसा अनुचित नहीं लिखा था, जिसका उद्देश्य किसी की छवि खराब करना हो। इतना कहकर उन्होंने पोस्ट के अंत में अपना बयान वापस लेने से मना कर दिया था।

‘रेप कर देंगे… सिर धड़ से अलग कर देंगे’: ‘हमारे बारह’ फिल्म की हिरोइन अदिति धीमान को धमकी, बुर्का पहन घर से निकलने को मजबूर

बॉलीवुड की एक फिल्म ‘हमारे बारह’ आ रही है, जिसमें महिलाओं पर होने वाले घरेलू अत्याचार, सामाजिक दबाव को दिखाने की कोशिश की जा रही है। ये फिल्म 14 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। हालाँकि ये फिल्म लंबी कंट्रोवर्सी में फँस गई थी, क्योंकि इस्लामिक कट्टरपंथी इस फिल्म को रिलीज करने का विरोध कर रहे थे। इस फिल्म में लीड कैरेक्टर अन्नू कपूर का है, जिनके साथ अदिति धीमान उनकी बेटी जरीन का किरदार निभा रही हैं। अब अदिति धीमान ने खुलासा किया है कि उनका ‘सिर तन से जुदा करने’, ‘रेप करने’ और जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

आज तक से एक्सक्लूसिव बातचीत में अदिति धीमान ने कहा कि “इतने रेप और मौत की धमकियाँ मिली की बाप रे! अभी मेरे मैसेजेस में सब पड़े हैं। सोशल मीडिया पर प्राइवेटली मैसेज करते हैं और आधे से ज्यादा तो फेक और फेसलेस अकाउंट्स हैं। मतलब एक दिन मैं अचानक उठी और इतने मैसेजेस देखे। सोचा हम लोग सोसायटी के लिए कुछ अच्छा करना चाह रहे हैं, लेकिन हमें ही जान से मार देंगे, सिर धड़ से अलग कर देंगे। रेप कर देंगे। ऐसे-ऐसे मैसेज आ रहे हैं। एक आर्टिस्ट के तौर पर ये बहुत ज्यादा दिल तोड़ने वाला होता है, लेकिन आपके पास इसे इग्नोर करने के अलावा कुछ नहीं रह जाता है।”

हमारे बारह में अदिति धीमान ने अन्नू कपूर की बेटी जरीन का रोल निभाया रही हैं। फिल्म में उनका किरदार एक ऐसी बेटी का है जो बागी है, लेकिन साथ ही अपने माँ-बाप की इज्जत का भी ख्याल रखती है। उन्हें दुख भी नहीं पहुँचाना चाहती। वो एक ऐसे परिवार में जन्मी है, जिसमें महिलाओं का कोई अस्तित्व नहीं माना जाता है। फिर भी वो सपने देखने से हिचकती नहीं है, इन सब के बीच कैसे जरीन अपनी पहचान बनाती है, ये फिल्म का मूल भाव है।

बता दें कि ‘हमारे बारह’ फिल्म पर रोक लग गई थी, लेकिन ये रोक हट गई है। ये फिल्म 14 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने भी इस फिल्म पर बैन लगाने का ऐलान किया था, वहीं इस्लामिक कट्टरपंथी लगातार इस फिल्म से जुड़े लोगों को धमकियाँ दे रहे हैं।