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कागज और प्लास्टिक के कमरों में ठूँसे गए थे श्रमिक, छत पर लॉक लगा था: कुवैत के जिस भवन में आग लगने से हुई 45 भारतीयों की मौत, चश्मदीदों ने उसकी हकीकत बताई

कुवैत में आग की घटना में मरे 45 भारतीयों के पार्थिव शरीर को लेकर भारतीय वायुसेना का एक विशेष विमान कोच्चि के लिए रवाना हो गया है। विमान में विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी सवार हैं। वहाँ पहुँचकर विदेश राज्यमंत्री सिंह ने घायल भारतीय श्रमिकों से मुलाकात की और मृतकों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए जल्द से जल्द भारत लाने के लिए कुवैती अधिकारियों के साथ समन्वय किया।

यह विमान आज सुबह करीब 11 बजे केरल के कोच्चि पहुँचेगा और फिर वहाँ से दिल्ली के लिए रवाना होगा। कुवैत में भारतीय दूतावास ने इसके बारे में शुक्रवार (14 जून 2024) सोशल मीडिया साइट एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी। पोस्ट में कहा गया, “विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, जिन्होंने शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए कुवैती अधिकारियों के साथ समन्वय किया, विमान में सवार हैं।”

बता दें कि कुवैत के अल-मंगफ इलाके में प्रवासी श्रमिकों के आवास वाली एक इमारत में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 49 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में 45 भारतीय हैं। मृतकों में 23 केरल से, 7 तमिलनाडु से, 2-2 आंध्र प्रदेश और ओडिशा से और 1-1 बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से हैं।

पीड़ितों में से अधिकांश कुवैत की एक कंपनी एनबीटीसी के लिए काम करते थे। यह कंपनी कुवैत की सबसे बड़ी निर्माण कंपनी है। जिस इमारत में आग लगी, वह भी एनबीटीसी की ही थी। बताया जा रहा है कि इमारत में 196 प्रवासी कामगार रह रहे थे। इनमें 176 भारतीय श्रमिक थे। वहीं, घायल 33 भारतीय श्रमिकों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

प्रारंभिक जाँच में इस अग्निकांड में बड़ी चूक के संकेत मिले हैं। सात मंजिला इमारत के भूतल पर लगभग दो दर्जन गैस सिलेंडर रखे हुए थे। श्रमिकों के रहने के बनाए गए कमरे को कागज, कार्डबोर्ड और प्लास्टिक जैसे ज्वलनशील पदार्थ से कमरे का पार्टिशन किया गया था। ये पार्टिशन कमरे में अधिक-से-अधिक श्रमिकों को रखने के लिए किया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, छत पर लगे बंद दरवाजे थे, जिससे श्रमिक छत पर नहीं जा सके और फँस कर रह गए कमरे में लगाए गए कागज, कार्डबोर्ड और प्लास्टिक के कारण यह आग बहुत तेजी से फैली और लोगों को बचने का मौका नहीं मिल पाया। ये सारी जानकारी जब भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने इस घटना में घायल लोगों से मुलाकात की तो बाहर आई।

इस घटना में बाल-बाल बचे केरल के कासरगोड जिले के टिकरीपुर के रहने वाले नलिनाक्षन टी.वी. ने अपने डरावने अनुभव को साझा किया। 58 वर्षीय नलिनाक्षन ने बताया कि जब आग की लपटें उठने लगीं तो उनके पास निर्णय लेने के लिए कुछ ही पल थे। उन्होंने इमारत की तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे पानी की टंकी में छलांग लगा दी। इसमें उनकी कुछ पसलियाँ टूट गईं और पैर में चोट आई, लेकिन वे बच गए।

नलिनाक्षन करीब 12 साल से एनबीटीसी के साथ काम कर रहे हैं और वर्तमान में केरल के व्यवसायी के.जी. अब्राहम की कंपनी में जनसंपर्क अधिकारी हैं। बता दें कि इस घटना के पीछे ग्राउंड फ्लोर पर शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा है। इस शॉर्ट सर्किट के कारण वहाँ रखे लगभग दो दर्जन गैस सिलिंडर में ब्लास्ट हो गया और सात मंजिला इमारत धू-धू करके जलने लगी।

‘कश्मीर समस्या का इजरायल जैसा समाधान’ वाले आनंद रंगनाथन का JNU में पुतला दहन प्लान: कश्मीरी हिंदू संगठन ने JNUSU को भेजा कानूनी नोटिस

जेएनयू के प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक आनंद रंगनाथन ने कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए ‘इजरायल जैसे समाधान’ की बात कही थी, जिसके बाद से वो लगातार इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। एएनआई के पॉडकास्ट में आनंद रंगनाथन ने ये सलाह दी थी, जिसके बाद जेएनयू स्टूडेंट यूनियन ने ऐलान किया था कि वो 13 जून की शाम 6 बजे जेएनयू कैंपस में आनंद रंगनाथन का पुतला फूँकेगा और मार्च निकालेगा। इसके बाद कश्मीरी हिंदुओं के संगठन Youth4PanunKashmir ने JNUSU को कानूनी नोटिस भेजा है। यूथ 4 पनुन कश्मीर कश्मीरी हिंदू युवाओं का वैश्विक संगठन है, जो कश्मीर से विस्थापित हुए हिंदुओं की आवाज उठाता है।

यूथ 4 पनुन कश्मीर संगठन ने अपने वकील द्वारा भेजे कानूनी नोटिस में कहा है कि जेएनयू में स्टूडेंट यूनियन जो प्लानिंग कर रहा है, उसका उद्देश्य कश्मीरी समुदाय के खिलाफ हिंसा को भड़काना है। संगठन ने कहा है कि प्रोफेसर आनंद रंगनाथन की सलाह का गलत मतलब लोगों में फैलाया जा रहा है। नोटिस में कहा गया है कि प्रोफेसर आनंद रंगनाथन को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें धमकी दी जा रही है।

संगठन के वकील मुकेश शर्मा द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में लिखा है, “व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से एक सुनियोजित प्रयास किया गया है, जिसमें आपके संगठन (JNUSU) से जुड़े छात्र और बाहरी पक्ष शामिल हैं। जेएनयू कैंपस में प्रोफेसर रंगनाथन के लैब के बाहर प्रो. रंगनाथन का पुतला दहने करने का उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को खराब करना है। ऐसा करना मेरे मुवक्किल (यूथ फॉर पनुन कश्मीर) के साथ-साथ प्रो. रंगनाथन की गरिमा और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला है।”

कानूनी नोटिस में कहा गया है कि पुतला दहन कार्यक्रम से जुड़े पोस्टों में रंगनाथन की टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया है। ऐसा करके प्रो रंगनाथन और मेरे मुवक्किल के खिलाफ दुश्मनीपूर्ण माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के विरोध प्रदर्शन बदनाम करने, उत्पीड़न और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे हैं, जो कानूनी रूप से गलत है। इसलिए यूथ 4 पनुन कश्मीर संगठन जेएनयूएसयू से आनंद रंगनाथन का पुतला जलाने या किसी अन्य तरह के विरोध प्रदर्शन से दूर रहने की अपील करता है।

इस नोटिस में छात्र संगठन से रंगनाथन के खिलाफ सभी अपमानजनक बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी माँगने तथा कश्मीरी हिंदुओं और रंगनाथन के बारे में आगे से झूठे और भड़काऊ बयान देने से बचने को कहा गया है।

कानूनी नोटिस पोस्ट करते हुए, यूथ 4 पनुन कश्मीर समूह ने कहा कि कश्मीरी हिंदू नरसंहार के शिकार हैं। कश्मीरियों द्वारा पास साल 1991 के रिजोल्यूशन के मुताबिक, कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में वापसी के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। नोटिस के मुताबिक, ‘हम न तो डरेंगे और न ही किसी को हमारी मातृभूमि पनुन कश्मीर में वापसी की हमारी उचित माँग का समर्थन करने वाली आवाज को चुप कराने की अनुमति देंगे।’

बता दें कि रंगनाथन ने यह टिप्पणी एएनआई संपादक स्मिता प्रकाश द्वारा आयोजित पॉडकास्ट में की थी, जिसमें अभिजीत अय्यर-मित्रा, सुशांत सरीन और तहसीन पूनावाला भी शामिल थे। चर्चा के दौरान रंगनाथन ने कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर अपना असंतोष व्यक्त करते हुए पिछली सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। उन्होंने भारतीयों, खासकर कश्मीरी हिंदुओं को निराश करने के लिए हर पार्टी के नेतृत्व वाली सरकारों की आलोचना की थी।

रंगनाथन ने कहा था, “आपने 7 लाख कश्मीरी हिंदुओं का पुनर्वास नहीं किया है। पर्यटकों से आने वाला सारा पैसा आतंकवादियों के पास जा रहा है। यह आतंकवाद/उग्रवाद और आप इसे जो भी कहें, जारी रहेगा।” सभी विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के पुनर्वास का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “आपको कश्मीर के लिए इज़रायल जैसा समाधान चाहिए। इज़राइल इसे हल करने में असमर्थ है, इसका कारण यह नहीं है कि इज़रायल इसे हल करने के लिए काम नहीं कर रहा है। इज़राइल ने अपने लोगों की ज़रूरतों को पूरा किया है, लेकिन हमने नहीं किया है।”

हालाँकि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जाने लगा, जिसमें बताया गया कि रंगनाथन इजरायल की तरह कश्मीर में लड़ाई की वकालत कर रहे हैं। बाद में 11 जून को उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट डालकर सफाई भी दी थी, जिसमें उन्होंने लिखा कि ‘वो कश्मीर में हिंदुओं के पुनर्वास की माँग कर रहे थे, जैसे यहूदियों को इजरायल में फिर से बसाया गया। ये नरसंहार का आह्वान नहीं है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है।’

उन्होंने लिखा, “इजरायल जैसे समाधान की माँग करना – पीड़ितों का पुनर्वास करना, बस्तियाँ बनाना, आतंकवाद से लड़ना, सीमाओं को सुरक्षित करना – नरसंहार की माँग नहीं है, बल्कि यह एक और नरसंहार को रोकने की माँग है। मैं इजराइल के साथ खड़ा हूँ। मैं कश्मीरी हिंदुओं के साथ खड़ा हूँ। और मैं हर एक शब्द के साथ खड़ा हूँ।”

जेएनयूएसयू को भेजे गए कानूनी नोटिस को लेकर रंगनाथन ने संगठन को धन्यवाद कहा और लिखा, “ये मेरे बारे में नहीं है और न ही इसके बारे में कि वो मुझे टारगेट कर रहे हैं और मार देंगे, बल्कि उन इस्लामिक कट्टरपंथियों के बारे में है, जो 7 लाख कश्मीरियों के पुनर्वास को नरसंहार बताने का काम साबित कर रहे हैं। वो आपको और 7 लाख कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।”

यह समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल लेख को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

शादीशुदा महिला ने ‘यादव’ बता गैर-मर्द से 5 साल तक बनाए शारीरिक संबंध, फिर SC/ST एक्ट और रेप का किया केस: हाई कोर्ट ने कहा – पुरुष हमेशा गलत नहीं, किया बरी

यौन उत्पीड़न जैसे मामलों में कानून महिलाओं की पक्ष लेता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हमेशा पुरुष ही गलत हो। यह बात इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई करते हुए कही, जिसमें महिला ने एक व्यक्ति पर शादी का झाँसा देकर सालों तक रेप करने का आरोप लगाया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों का आँकलन करना हमेशा बेहद महत्वपूर्ण होता है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस राहुल चतुर्वेदी और जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सबूत पेश करने की जिम्मेदारी सिर्फ आरोपित का ही नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता का भी है। हाई कोर्ट ने रेप के आरोपित को बरी करने के सेशन कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए ये टिप्पणी की।

हाई कोर्ट ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है अध्याय XVI के तहत यौन अपराधों में एक महिला/लड़की की गरिमा और सम्मान की रक्षा को प्रमुखता देते हुए कानून महिला केंद्रित हैं। ये जरूरी भी है, लेकिन परिस्थितियों का आँकलन भी जरूरी है। हर बार ये जरूरी नहीं कि पुरुष ही गलत हो।” इस मामले में महिला ने आरोपित के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में भी मामला दर्ज कराया था।

महिला ने साल 2019 में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपित ने उससे शादी का वादा करके शारीरिक सम्बंध बनाए, लेकिन बाद में वो अपने वादे से मुकर गया। यही नहीं, उसने पीड़ित महिला की जाति को लेकर भी अपमानजनक बातें कही। इस मामले में आरोपित के खिलाफ 2020 में चार्जशीट दाखिल की गई थी। हालाँकि ट्रायल कोर्ट ने आरोपित को रेप के आरोपों से बरी कर दिया था और सिर्फ आईपीसी की धारा 323 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद महिला हाई कोर्ट पहुँची थी।

इस मामले में आरोपित व्यक्ति ने हाई कोर्ट से बताया कि महिला के साथ उसके संबंध सहमति थे। महिला ने उससे खुद को ‘यादव’ जाति का बताया था, लेकिन उसकी जाति कुछ और थी, जिसके बाद उसने शादी से मना किया। कोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि महिला ने साल 2010 में शादी की थी, लेकिन 2 साल बाद ही वो अपने पति से अलग हो गई थी, हालाँकि दोनों का तलाक नहीं हुआ था।

ऐसे में कोर्ट ने अहम टिप्पणी की और कहा, “परिस्थितियों के मुताबिक, इस बात की संभावना कम है कि आरोपित ने महिला को शादी के झूठे वादे में फँसाया हो। दूसरी बात ये है कि महिला पहले से ही विवाहित थी और उसका विवाह अब भी कानून की नजर में मौजूद है। ऐसे में शादी का वादा करने का आरोप अपने आप खत्म हो जाता है।” हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। यही नहीं, कोर्ट ने कहा था कि समाज में किसी भी रिश्ते को स्थायित्व देने में दोनों पक्षों की जाति की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जबकि ये साफ है कि महिला ने अपनी जाति छिपाई थी।

कोर्ट ने कहा, “महिला पहले से शादीशुदा थी और पिछली शादी को खत्म किए बिना और बिना किसी आपत्ति के वो 5 साल तक आरोपित से संबंध बनाए रखती है। दोनों ने इलाहाबाद, लखनऊ के कई होटलों और लॉज में एक-दूसरे के साथ का आनंद लिया। ऐसे में ये तय करना मुश्किल है कि कौन किसे बेवकूफ बना रहा था। ऐसे में यौन उत्पीड़न या रेप का मामला सही नहीं लगता।” हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत का फैसला सही था। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपित के खिलाफ ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

जहीर इकबाल के साथ हीरामंडी की फरीदन बसा रही घर! 23 जून की पार्टी में दोस्त ‘इन्वाइट’: TMC के सांसद पिता और भाई बोले- ‘इन्विटेशन का इंतजार’

नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ में तवायफ फरीदन का किरदार निभाकर चर्चा बटोर रहीं सोनाक्षी सिन्हा अब घर बसा रही हैं। सोनाक्षी सिन्हा ने अपने कथित बॉयफेंड जहीर इकबाल के साथ जिंदगी आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस बात से जुड़ा एक इन्विटेशन लेटर सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

हालाँकि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद और बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार किया है, वहीं सोनाक्षी के भाई लव सिन्हा ने भी मामले से अनभिज्ञता जताई है। ये अलग बात है कि मीडिया रिपोर्ट्स सोनाक्षी के दोस्तों के हवाले से इस बात पर मुहर लगा रहे हैं कि जश्न 23 जून को मुंबई के एक रेस्टोरेंट में होगा, जिसकी मालकिन शिल्पा शेट्टी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल ने जिंदगी आगे बढ़ाने का फैसला किया है, इसके लिए उन्होंने अपने दोस्तों को मुंबई के बास्तियन रेस्टोरेंट में 23 जून को इन्वाइट किया है। कथित रूप से सोनाक्षी के दोस्त ने बताया है कि सोनाक्षी और जहीर उस दिन कोई शादी या निकाह नहीं करने वाले हैं, या तो वो रजिस्टर्ड मैरिज कर चुके हैं या फिर उस दिन करेंगे। ऐसे में 23 जून की पार्टी में बहुत कुछ खुलासा हो सकता है। उस दोस्त के हवाले से बताया गया है कि सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल से जुड़ा ये कार्ड खास दोस्तों जैसे हुमा कुरैशी, आयुश शर्मा और वरुण शर्मा को भेजा जा चुका है।

Sonakshi & Zaheer, wedding confirmed on June 23! ?
byu/FleaBird_ inBollyBlindsNGossip

पिता ने जताई अनभिज्ञता, क्या है सच्चाई?

इस मामले में सोनाक्षी सिन्हा के पिता शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ तौर पर कहा है कि उन्हें कुछ भी पता नहीं है। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि सोनाक्षी मेरी इकलौती बेटी है। उसके हरेक फैसले में मैं उसके साथ हूँ। ‘अगर’ वो ‘ऐसा कुछ’ करती है, तो पिता के तौर पर मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘आज कल के बच्चे कंसेंट नहीं लेते माँ-बाप का, सिर्फ इन्फॉर्म करते हैं। हम ‘इन्फॉर्म’ होने का इंतजार कर रहे हैं।’ वहीं, सोनाक्षी के भाई लव सिन्हा ने भी साफ कहा कि उन्हें सोनाक्षी के इस फैसले से जुड़ी कोई भी बात पता नहीं है। और न ही वो ‘इसमें शामिल हैं’।

बता दें कि सोनाक्षी-जहीर से जुड़ा जो कार्ड वायरल हो रहा है, उसमें कथित तौर पर सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की आवाज है, जिसमें वो अपने 7 साल के अफेयर के बारे में बता रहे हैं। बहरहाल, इन बातों में कितनी सच्चाई है, ये तो आने वाले समय में पता चल ही जाएगा।

14 साल की हिंदू लड़की के सिर पर तमंचा रख ‘अल्लाहू अकबर’ बोलने की धमकी, 2 साल से कर रहा परेशान: मिर्जापुर में एक्शन में UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में समीर नाम का मुस्लिम दबंग एक हिंदू परिवार के घर में घुस गया। उसके हाथ में तमंचा था। उसने हिंदू परिवार की 14 साल की नाबालिग लड़की के सिर पर तमंचा लगा दिया और ‘अल्लाहू अकबर’ के साथ ही ‘अस्सलामु अलैकुम’ बोलने का दबाव डालने लगा। यही नहीं, वो नाबालिग लड़की के पीछे 2 साल से पड़ा है और उसे परेशान भी करता रहता है। हिंदू परिवार ने आरोप लगाया है कि समीर दबंग और प्रभावशाली मुस्लिम परिवार का लड़का है, उसका परिवार भी उसकी कोई सुनवाई नहीं करता। अब पीड़ित परिवार ने पुलिस की शरण ली है और न्याय की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला मिर्जापुर जिले के विंध्याचल कस्बे का है, जहाँ दबंग समीर हिंदू लड़की को पिछले दो साल से डरा- धमका कर परेशान कर रहा था। आरोपित समीर पीड़ित के घर में कई दफे घुस चुका है। लड़की और उसके भाई को मारने पीटने की धमकी देकर उसको ब्लैकमेल करता था। समीर का घर पीड़ित हिंदू परिवार के पास ही है। लड़की के परिजनों ने जब इसकी शिकायत समीर के परिजनों से की, तो उल्टा दबंग परिवार उनके ही ऊपर दबाव बनाने लगा और मारने-पीटने की कोशिश की।

हद तो तब हो गई, जब समीर तमंचा लेकर उनके घर में ही घुस गया और बेटी को ‘अस्सलामु अलैकुम’ और अल्लाहू अकबर कहने के लिए दबाव डालने लगा। इस मामले में परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

मिर्जापुर के एसपी अभिनंदन ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि पीड़ित लड़की और समीर एक-दूसरे से बात करते थे। इसके बाद लड़का उसके ऊपर दबाव बनाने लगा। फिलहाल मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपितों की धरपकड़ के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है। कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है, जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।

जान से मार देंगे तुझे… हिंदुस्तानी बन रहा: ‘All Eyes on Vaishno Devi Attack’ पोस्ट करना पाकिस्तानी क्रिकेटर हसन अली को पड़ा भारी, भड़के इस्लामी कट्टरपंथी

जम्मू-कश्मीर के रियासी इलाके में रविवार (9 जून 2024) को मंदिर में दर्शन करने जा रहे श्रद्धालुओं की बस पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 9 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें मासूम बच्चे और महिलाएँ भी शामिल हैं। आतंकियों के इस कृत्य की दुनिया भर में आलोचना हो रही है। हमले को लेकर सोशल मीडिया पर ‘All eyes on reasi’ और ‘All eyes on Vaishno Devi attack’ नाम से ट्रेंड भी चलाया गया। पाकिस्तानी क्रिकेटर हसन अली ने भी इसी ट्रेंड की एक पोस्ट को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के तौर पर शेयर किया था, तब से सोशल मीडिया पर भड़क कर उनको कई कट्टरपंथी गालियाँ दे रहे हैं।

पाकिस्तान के मध्यम तेज गेंदबाज हसन अली की पत्नी भारतीय हैं। उनकी ससुराल मेवात के नूहं इलाके में है। जम्मू के आतंकी हमले में कत्ल हुए श्रद्धालुओं के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर एक स्टेटस लगाया था। इसमें ‘All eyes on Vaishno Devi attack’ लिखा हुआ था। कुछ ही देर में यह स्टेटस वायरल हो गया और कई कट्टरपंथी हसन को अपशब्द बोलने लगे। इन कट्टरपंथियों के स्क्रीनशॉट लेकर लोग सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं

टाइगर खान ने हसन अली को तू बोलते हुए ‘शिया’ कह डाला। शेख इबादत ने हसन अली को हड़काते हुए पोस्ट को डिलीट करने के लिए कहा। अब्दुल्ला बेग और अर्बा सिद्दीकी ने तो हसन अली को गोली मारने की इच्छा जताई है। नूर ने लिखा है कि अगर हसन अली को भी आएशा उमर के साथ शूट करवा देते तो ये दिन नहीं देखना पड़ता। या कुर्बान का मन है कि हसन अली एक हिंदुस्तानी जैसे ट्वीट कर रहा है इसलिए उसे पाकिस्तान आते ही मार डालना चाहिए। के मुस्तफ़ाई ने हसन अली को थूक फाँकने की नसीहत दे डाली है।

इन सभी के अलावा जीशान ने हसन अली को माँ की गाली दी है। गाजी हसन ने सलाह दी कि अब हसन अली को सिर्फ टिकटॉक बनाने पर ध्यान देना चाहिए। प्रिक कलीम ने लिखा, “कुत्ता, पेन$द, $डू, सेमीफाइनल – मरवा दी।” सोशल मीडिया के X यूजर @JohnyBravo183 ने इन तमाम कमेंट के स्क्रीनशॉट हसन अली के उस ट्वीट के नीचे डाले है जिसमें वो अपनी सफाई पेश कर रहे हैं। इन तमाम गालियों के बाद हसन अली ने बुधवार (12 जून) को सफाई दी है कि वो किसी भी इंसान की मौत पर दुखी होते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने गाजा का भी नाम लिया है।

‘शौहर जल्लाद है, उसे दोजख में भी जगह न मिले’: मोहम्मद अतहर से निकाह करके पाकिस्तान से भारत आई थी ईरम, 16 साल बाद मिला तीन तलाक

पाकिस्तान के लाहौर में पैदा हुई ईरम के अब्बू ने कहा था कि ‘बेटी हिंदुस्तान में औरतों पर जुल्म नहीं होता, तू वहाँ खुश रहेगी।’ साल 2008 में बुआ के दिखाए रिश्ते पर बरेली के मोहम्मद अतहर से मेरा निकाह कराया गया। निकाह के बाद अतहर 6 माह लाहौर में ही रहा। लेकिन इसके बाद उसे बरेली ले आया गया। एक साल तो सबकुछ ठीक रहा, लेकिन फिर ईरम के ऊपर जुल्म होने लगा। उससे दहेज माँगा जाने लगा और न लाने पर उसके साथ मारपीट की जाने लगी। अब 11 जून 2024 को मोहम्मद अतहर ने एक बार फिर से दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी। उसे रात भर जमकर पीटा और तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया है। ईरम की चिंता ये है कि उसके पास अभी तक भारत की नागरिकता नहीं है। उसके 2 बच्चे हैं। शौहर घर से निकाल चुका है। ईरम ने पुलिस की शरण ली है और कहा है कि उसे अब लाहौर भेज दिया जाए, क्योंकि मेरा शौहर जल्लाद है। मैं उसके पास नहीं रह सकती। उसे दोजख़ में भी जगह नहीं मिलेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के लाहौर शहर की ओसामा ब्लॉक के नस्तर कॉलोनी की ईरम का निकाह साल 2008 में बरेली के बिहारीपुरा में रहने वाले मोहम्मद अतहर के साथ पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। बारात लेकर 9 लोग हिंदुस्तान से पाकिस्तान गए थे। फिर 5-6 महीने बाद उसे बरेली ले आया गया और फिर मोहम्मद अतहर और उसके परिवारी जनों की हकीकत सामने आई।

ये पूरा मामला बरेली के बिहारीपुर का है। यहाँ के रहने वाले अतहर ने साल 2008 में पाकिस्तान के लाहौर की रहने वाली महिला से पाकिस्तान में जाकर मुस्लिम रीति रिवाज से निकाह की थी और वह पाँच महीने तक पाकिस्तान में ही रहा था। पीड़िता का आरोप है कि पहले उसका शौहर उसे बहला फुसलाकर बरेली ले आया और बरेली लाकर उससे दो बच्चे पैदा हुए। महिला के एक बेटा (15 साल) और बेटी (7 साल) है। लेकिन इसके बाद अतहर और उसके परिजन महिला से मारपीट करने लगे। उसे तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया और महिला को यातनाएँ भी दी।

ईरम का कहना है कि उसे अभी तक हिंदुस्तान की नागरिकता नहीं मिली है। उसका शौहर उसके वीजा में अड़ंगे लगाता है। इस बार उसे वीजा भी नहीं मिला है। उसकी जान को खतरा है। दहेज के मामले में पहले से पुलिस केस चल रहा है। पीड़िता ईरम ने बताया कि शौहर शराब पीकर घर आता है। उसे और बच्चों को चाकू दिखा कर धमकाता है। अब उसने अपनी बुआ के घर शरण ली है। अपनी बुआ और आला हजरत दरगाह के पदाधिकारियों की मदद से वो कोतवाली पुलिस पहुँची और शौहर के खिलाफ लिखित शिकायत दी है।

कोलवाली पुलिस का कहना है कि इस मामले की जाँच की जा रही है। कोतवाल डी के शर्मा ने कहा कि महिला की शिकायत दर्ज कर ली गई है। आरोपित शौहर को थाने बुलाया गया है और अब आगे नियमों के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अब ईरम का कहना है कि उसे अपने बच्चों और खुद की जान का खतरा है और उसके ससुराल वाले उसकी जान भी ले सकते हैं, इसलिए वह अपने वतन पाकिस्तान वापस जाना चाहती है।

अपहरण, धर्मांतरण और फिर निकाह… पाकिस्तान में 14-15 साल की हिंदू बच्चियों पर अत्याचार जारी, 10 दिन में आए 2 मामले

पाकिस्तान में एक बार फिर से एक हिंदू लड़की के अपहरण और जबरन धर्मांतरण करवाए जाने की खबर है। मामला कराची के शाहदाबकोट टाउन का है। वहाँ समीर अली नाम के मुस्लिम युवक ने 15 साल की हिंदू लड़की का अपहरण किया, फिर उसे इस्लाम कबूल करवाया और फिर उससे निकाह कर लिया।

अब इस मामले में पाकिस्तान के ईसाई एक्टिविस्ट फराज परवेज ने आवाज उठाई है। उन्होंने ये मामला दुनिया के सामने रखते हुए बताया कि लड़की का नाम संगीता है और उसे मुस्लिम लड़के ने जबरन इस्लाम कबूल करवाया है।

अब लड़की का नाम हामिदा रख दिया गया है। वो अभी सिर्फ 15 साल की है लेकिन समीर अली उसके डॉक्यूमेंट्स से छेड़छाड़ करते हुए उसे 19 साल का दिखाने की कोशिश कर रहा है। उसने निकाह से पहले एक हलफनामा दिया जिसमें लिखा था कि लड़की बालिग है वहीं परवेज द्वारा दिखाए जा रहे डॉक्टयूमेंट साफ कहते हैं कि लड़की अभी 19 की नहीं है।

इसी तरह परवेज ने बताया है कि हलफनामे में लड़की की रजामंदी भी लिखाई गई है। हलफनामे के अनुसार- “मेरा किसी ने अपहरण नहीं किया है और ये हलफनामा मैं पूरे होश में दे रही हूँ बिन किसी दबाव, प्रेशर या प्रभाव के। मैं समीर अली से निकाह करने जा रही हूँ और ये मेरा निजी निर्णय है। किसी ने मुझपर कोई दबाव नहीं बनाया।”

इसके अलावा हलफनामे में ये भी लिखाया गया है कि अगर किसी ने समीर अली के खिलाफ शिकायत दी तो वो पूरी तरह से फर्जी होगी।

बता दें कि पहली दफा नहीं है हिंदू लड़कियाँ पाकिस्तान में मुस्लिमों द्वारा किडनैप की जा रही हों। 2 जून को ही 14 साल की लड़की का किडनैप हुआ था। बाद में उसे इस्लाम कबूल करवा दिया गया था और पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मुस्लिम युवक से उसकी शादी करवा दी गई थी। लड़की का नाम सोहाना शर्मा था। वह बेनजीराबाद जिले के रहने वाले थे।

लड़की का अपहरण उसके ट्यूशन टीचर ने उसकी माँ के सामने किया था। जब पिता ने इसकी शिकायत कराई तो एक वीडियो सामने आई जिसमें लड़की से बुलवाया गया था कि उसने इस्लाम कबूल कर लिया है और उसका मुस्लिम व्यक्ति से निकाह हो गया है।

घरवालों ने फिर भी आपत्ति जताई तो करीबन 5 दिन बाद उसे कोर्ट में लाया गया। वहाँ लड़की ने बताया कि उसके साथ सब जबरन हुआ था और वो अपने पिता के साथ रहना चाहती है। बावजूद इसके कोर्ट ने उसे उसके पिता के साथ नहीं भेजा।

नेता खाएँ मलाई इसलिए कॉन्ग्रेस के साथ AAP, पानी के लिए तरसते आम आदमी को दोनों ने दिखाया ठेंगा: दिल्ली जल संकट में हिमाचल का खेला

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में जल संकट को लेकर एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें हर रोज राज्य सरकारें ही अपनी बातों से पलट जा रही हैं। शुरुआत में दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट ये कहकर पहुँची थी कि हिमाचल प्रदेश सरकार उसे 136 क्यूसेक पानी दे रही है, लेकिन हरियाणा सरकार उसे दिल्ली में नहीं आने दे रही है। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसके पास एक्स्ट्रा पानी है ही नहीं, तो वो दिल्ली को क्या ही देगा?

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को जब टैंकर माफिया के मुद्दे पर घेरा और उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए पूछा, तो पहले तो दिल्ली सरकार ने ये बहाना बनाया कि टैंकर माफिया पर उसका बस नहीं चलता, क्योंकि दिल्ली पुलिस उसके कब्जे में नहीं है, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को डाँटा कि अगर तुम कार्रवाई नहीं कर सकते, तो हम दिल्ली पुलिस को कार्रवाई का आदेश देंगे, इसके बाद अब दिल्ली सरकार ने कहा है कि टैंकर माफिया तो यमुना के उस पार यानी हरियाणा से ऑपरेट करते हैं, वो दिल्ली सरकार का इलाका ही नहीं है।

वैसे, ये साफ है कि लोकसभा चुनाव तक दिल्ली और हिमाचल की सत्ताधारी पार्टियाँ एक पक्ष में खड़ी थी। उन्होंने हरियाणा को घेरने की भरपूर कोशिश की। हिमाचल प्रदेश सरकार के वादे को लेकर दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी और कहा था कि हिमाचल सरकार पानी दे रही है, लेकिन हरियाणा उसे दिल्ली तक नहीं पहुँचने दे रहा, लेकिन अब जब कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अलग-अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, तो सुप्रीम कोर्ट में भी हिमाचल सरकार पलट गई और कहा कि उसके पास एक्स्ट्रा पानी नहीं है। ऐसे में पार्टियों और सरकारों की आपसी नूरा-कुश्ती में आम जनता पिस रही है और वो प्यास से तड़प रही है।

बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की सरकार को डाँट भी लगाई थी कि कोर्ट में सरकार झूठ बोल रही है। दिल्ली सरकार न तो टैंकर माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रही है और न ही जल संकट से निपटने के लिए कोई स्थाई कदम उठा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने तो यहाँ तक कहा था कि दिल्ली सरकार अगर कार्रवाई नहीं कर रही है, तो बता दे, खुद सुप्रीम कोर्ट दिल्ली पुलिस को टैंकर माफिया के खिलाफ कार्रवाई के आदेश देगी। अब सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने एक और दावा किया है कि दिल्ली में सक्रिय टैंकर माफिया सारे हरियाणा वाले हैं और वो दिल्ली को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

बहरहाल, अभी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो अपर यमुना रिवर बोर्ड से अपील करे कि वो ज्यादा पानी दिल्ली के लिए छोड़े। चूँकि सुप्रीम कोर्ट पानी के बँटवारे की एक्सपर्ट नहीं है, इसलिए यमुना के पानी के बँटवारे की जिम्मेदारी अपर यमुना रिवर बोर्ड पर छोड़ दें। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि वो जल संकट से निपटने की क्या कोशिशें कर रही है, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने हलफनामा दायर किया है और कहा है कि वो दिल्ली में पानी की बर्बादी रोकने के लिए कदम तो उठा रही है, लेकिन यमुना पार सक्रिय हरियाणा के टैंकर माफिया की वजह से पानी ही नहीं मिल पा रहा है और वो उनके खिलाफ कोई कदम इसलिए नहीं उठा पा रही, क्योंकि वो इलाका हरियाणा का है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ही सभी सरकारों को डाँट लगाई थी कि वो उसके सामने झूठ बोला जा रहा है, लेकिन दिल्ली में सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी और हिमाचल की सत्ताधारी कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकारें अब भी अपना बयान बदलती जा रही हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या कदम उठाती है, ये देखने वाली बात होगी।

पापुआ न्यू गिनी में चली गई 2000 लोगों की जान, भारत ने भेजी करोड़ों की राहत (पानी, भोजन, दवा सब कुछ) सामग्री

भारत ने पापुआ न्यू गिनी को एक बार फिर से विकट परिस्थितियों से निपटने के लिए सहायता भेजी है। पिछले महीने पापुआ न्यू गिनी के एगा प्रांत में विनाशकारी भूस्खलन आया था जिसकी वजह से जान-माल दोनों का काफी नुकसान हुआ। ऐसे में भारत ने अपनी ओर से उन्हें करीबन 1 मिलियन डॉलर की आपदा राहत सामग्री भेजने को कहा था।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पापुआ न्यू गिनी के एंगा प्रांत में विनाशकारी भूस्खलन के कारण पैदा हुई स्थिति को देखते हुए, भारत ने करीबी एफआईपीआईसी भागीदार को 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तत्काल सहायता की घोषणा की थी। जिसके तहत लगभग 19 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री (HDR) आपूर्ति लेकर एक विमान पापुआ न्यू गिनी के लिए रवाना हुआ है।

सहायता में 13 टन आपदा राहत सामग्री शामिल हैं। इसमें अस्थायी आश्रय, पानी के टैंक, स्वच्छता किट और खाने के लिए तैयार भोजन और 6 टन आपातकालीन उपयोग की दवाएँ, चिकित्सा शामिल हैं। इसके अलावा डेंगू और मलेरिया डायग्नोस्टिक किट, शिशु आहार आदि सहित उपकरण हैं।

बता दें कि बीती 24 मई को पापुआ न्यू गिनी के एंगा प्रांत में भारी भूस्खलन हुआ था। इस दौरान वहाँ बहुत तबाही हुई थी, साथ ही सैकड़ों लोग भी जान भी गई थी। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार भूस्खलन में दो हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है। वहीं सोशल मीडिया पर सामने आई वीडियोज तो और डराने वाली हैं। लोग जमीन से मलबा हटा हटाकर उसमें अपने अपनों को खोज रहे हैं।

विकिपीडिया पर मौजूद जानकारी के अनुसार, पापुआ न्यू गिनी इंडोनेशिया के समीप प्रशांत महासागर क्षेत्र में एक स्वतंत्र राष्ट्र है जो दक्षिण पश्चिम प्रशांत महासागर क्षेत्र में द्वीपों का एक समूह है। यहाँ की राजधानी पोर्ट मोरेस्बी है। केवल 60 लाख जनसंख्या वाला देश विविधताओं के देश के रूप में भी जाना जाता है।