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चित्रदुर्ग-जयपुर भाजपा जीती, जालंधर कॉन्ग्रेस के खाते में: देश में गठबंधन सरकार के संकेत

लोकसभा चुनाव 2024 के रुझान परिणामों में परिवर्तित होने लगे हैं। कुछ सीटों का परिणाम भी सामने आ गया है। देश में जहाँ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है, वहीं कॉन्ग्रेस को भी बड़ा फायदा हुआ है। भाजपा के 2 और कॉन्ग्रेस के 1 उम्मीदवार चुनाव जीत भी गए हैं। रुझानों से देश में गठबंधन सरकार के संकेत लग रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी की जयपुर शहर से उम्मीदवार मंजू शर्मा को जीत हासिल हो गई है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार प्रताप सिंह खाचरियावास को हराया है। मंजू शर्मा को 8.86 लाख वोट मिले हैं, उन्होंने 3.31 लाख वोट से खाचरियावास को हराया है। खाचरियावास को 5.55 लाख वोट मिले हैं। चित्रदुर्ग से भाजपा प्रत्याशी गोविन्द करजोल भी जीत गए हैं। उन्हें 6.84 लाख वोट मिले हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस उम्मीदवार बीएन चन्द्रप्पा को 48,000 वोट से हराया है।

वहीं कॉन्ग्रेस ने भी पंजाब से अपना खाता खोला है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी जीत हासिल की है। वह जालन्धर लोकसभा सीट से जीते हैं। उन्होंने भाजपा के सुशील रिंकू को हराया है। चरणजीत सिंह चन्नी को 3.9 लाख हासिल हुए हैं। उन्होंने सुशील रिंकू को 2.14 लाख से हराया है। आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए सुशील रिंकू को 2.14 लाख वोट मिले। वह 2019 में AAP से सांसद बने थे।

इसके अलावा रायबरेली और वायनाड से राहुल गाँधी की जीत तय मानी जा रही है। इसके अलावा अमेठी से किशोरी लाल शर्मा की जीत भी तय है। उत्तर प्रदेश के अंदर सपा 30 से अधिक सीट पर आगे चल रही है। भाजपा को 240 के आसपास सीटों पर देश में आगे है। हालाँकि, NDA को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है। NDA को 290 से अधिक सीट मिली हैं। ऐसे में देश आगे NDA की गठबंधन सरकार बनेगी। इसको लेकर बुधवार (4 जून, 2024) को NDA की दिल्ली में बैठक है, जिसमें NDA पार्टियाँ शामिल होंगी।

मंडी की ‘क्वीन’ बनीं कंगना रनौत, मथुरा में जीत की हैट्रिक लगाने की राह पर हेमा मालिनी: जानिए निरहुआ से लेकर पवन सिंह तक भोजपुरी स्टारों का क्या है हाल

साल 2024 के लोकसभा चुनावों में कई टीवी-फिल्मों के जाने-माने चेहरे भी प्रत्याशी बनकर उतरे थे। मतगणना वाले दिन उनकी अपनी-अपनी सीटों पर क्या स्थिति है ये देखने लायक हैं। इस बार के चुनावी मैदान में हिमाचल के मंडी से बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत पहली बार उतरी हैं। वहीं तीसरी बार मथुरा से हेमा मालिनी, पूर्वी दिल्ली से मनोज तिवारी और गोरखपुर से रवि किशन हैं। मेरठ से अरुण गोविल हैं, पवन सिंह काराकाट से हैं और दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ आजमगढ़ से हैं।

आइए जानते हैं कि इन सभी नेताओं की स्थिति क्या है।

कंगना रनौत

हिमाचल के मंडी से कंगना रनौत भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी हैं। अभी तक इस सीट पर नतीजे घोषित नहीं हुए लेकिन सुबह से लेकर अभी तक कंगना रनौत ने यहाँ से बढ़त बनाई हुई है। कंगना खबर लिखने तक 71 हजार वोटों से आगे चल रही हैं। उन्हें अब तक 5 लाख 12 हजार वोट मिले हैं। वहीं कॉन्ग्रेस प्रत्याशी विक्रमादित्य सिंह को 4लाख 41 हजार के आसपास वोट मिले हैं।

अरुण गोविल

मेरठ सीट से भाजपा प्रत्याशी बनकर खड़े हुए अरुण गोविल को अभी तक के आँकड़ों के हिसाब से 3 लाख 85 हजार वोट मिले हैं, लेकिन इतने वोट पाने के बाद अभी वो दूसरे नंबर पर हैं क्योंकि समाजवादी पार्टी की सुनीता वर्मा को 3 लाख 92 हजार वोट मिले हैं। ईसी साइट के अनुसार सुनीता वर्मा करीबन 7603 वोटों से आगे हैं।

हेमा मालिनी

उत्तरप्रदेश राज्य की मथुरा लोकसभा सीट से खड़ी हेमा मालिनी धर्मेंद्र यादव 2 लाख 24 हजार के आसपास वोटों से लीड कर कर रही हैं। अभी तक उन्हें 3 लाख 64 हजार+ वोट मिले हैं। वहीं कॉन्ग्रेस प्रत्याशी मुकेश ढांगर के हिस्से सिर्फ 1 लाख 39 हजार वोट मिले हैं।

रवि किशन

उत्तरप्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने रवि किशन को उतारा हुआ है। रवि किशन को इस समयट तक 3 लाख 42 हजार वोट मिले हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी की काजल निशाद को 43 हजार वोटों से पीछे किया हुआ है।

दिनेश लाल यादव

आजमगढ़ की लोकसभा सीट से किस्मत आजमाने उतरे दिनेश लाल यादव दूसरे नंबर पर है। उन्हें 1 लाख 36 हजार वोट मिले हैं और जो समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव इस सीट से लीड कर रहे हैं उन्हें 2 लाख 27 हजार के आसपास वोट मिल चुके हैं। वो 91 हजार वोटों से आगे हैं।

पवन सिंह

बिहार के काराकाट से चुनावी मैदान में निर्दलीय उतरे पवन सिंह तीसरे नंबर पर हैं। उन्हें अब तक 1 लाख 18 हजार+ वोट मिले हैं, लेकिन उनसे आगे उपेंद्र कुशवाहा हैं तो 1 लाख 25 हजार के करीब वोट पाकर और फिर सीपीएम पार्टी के राजा राम सिंह हैं जो इस सीट पर लीड कर रहे हैं। राजा राम सिंह को अभी तक 1 लाख 81 हजार के करीब वोट मिला है।

मनोज तिवारी

राजधानी की उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से चुनावी मैदान में खड़े मनोज तिवारी 5 लाख 67 हजार वोट पाकर आगे हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के कन्हैया कुमार को 1 लाख 37 हजार वोटों से पीछे किया हुआ है। कन्हैया को 4 लाख 30 हजार वोट मिलते दिखाई दे रहे हैं।

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे अभी स्पष्ट सामने नहीं आए हैं। लेकिन एनडीए गठबंधन को इस समय 294 सीट मिल चुकी है और इंडी गठबंधन को 232 सीट मिलती दिखाई दे रही है। भाजपा के प्रत्याशी 241 सीट पर लीड कर रहे हैं। इनमें से 3 की जीत हो चुकी है।

इंदौर में बीजेपी उम्मीदवार शंकर लालवानी की 11.75+ लाख वोटों के अंतर से रिकॉर्ड तोड़ जीत : 2 लाख मतों के साथ दूसरे नंबर पर नोटा

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ रहे हैं। मध्य प्रदेश में सभी 29 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को जीत मिल रही है। इसमें से इंदौर लोकसभा सीट पर बीजेपी उम्मीरवार ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की है। ये वही सीट है, जहाँ से कॉन्ग्रेस कैंडिडेट ने आखिरी समय में अपना नाम वापस ले लिया था। इस सीट पर बीजेपी कैंडिडेट ने 1,17,5092 मतों से जीत दर्ज की है। हालाँकि यहाँ सबसे ज्यादा चौंकाने वाला प्रदर्शन नोटा ने किया है। बीजेपी कैंडिडेट के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा वोट नोटा को मिले हैं, जो 2 लाख से भी ज्यादा है।

इंदौर लोकसभा सीट पर मतगणना में बीजेपी कैंडिडेट को 12 लाख 26 हजार 751 वोट मिले हैं। दूसरे नंबर पर नोटा है। नोटा को 2 लाख 18 हजार 674 वोट मिले हैं। तीसरे नंबर पर बीएसपी का कैंडिडेट है, जिसे नोटा के चौथाई से भी कम वोट मिला है। बीएसपी कैंडिडेट संजय को 51 हजार 659 वोट ही मिल पाए। बीएसपी कैंडिडेट के मुकाबले नोटा को 4 गुना से भी ज्यादा वोट मिले हैं।

इंदौर में शंकर लालवानी की रिकॉर्ड जीत (फोटो साभार : चुनाव आयोग वेबसाइट)

इंदौर में बना रिकॉर्ड, बीजेपी कैंडिडेट को अब तक की सबसे बड़ी जीत

लोकसभा चुनाव में अब तक सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड माकपा के अनिल बसु के नाम था। उन्होंने साल 2004 में पश्चिम बंगाल में बीजेपी के स्वप्न कुमार नंदी को 5 लाख 92 हजार 502 वोटों से हराया था। आज तक लोकसभा चुनाव में कोई भी उम्मीदवार 6 लाख के अंतर से नहीं जीता था, लेकिन इंदौर में नोटा को हटा दें कि 11 लाख 75 हजार 092 वोटों से बीएसपी उम्मीदवार को हार मिली है। हालाँकि दूसरे नंबर पर नोटा को कैंडिडेट माना जाए, तो भी ये अंतर 10 लाख से ज्यादा का है।

गौरतलब है कि इंदौर से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने नामांकन वापसी के आखिरी दिन अपना पर्चा वापस ले लिया था और वो बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस सीट पर कॉन्ग्रेस का कोई उम्मीदवार ही नहीं था। ऐसे में कॉन्ग्रेस पार्टी ने नोटा को वोट देने की मुहिम चलाई, जिसकी वजह से नोटा को 2 लाख से ज्यादा वोट मिले।

पुलिस ने रोका तो गोतस्कर बरसाने लगे गोलियाँ; छाती में गोली लगी पर बुलेटप्रूफ जैकेट से बची SHO की जान, राजस्थान में महमूद और इदरीस गिरफ्तार

राजस्थान के डीग जिले में रविवार (2 जून 2024) को पुलिस और गोतस्करों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में पुलिस ने इदरीस और महमूद के पैरों में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया। मुठभेड़ में थाना प्रभारी के सीने में गोली लगी है। हालाँकि, बुलेट प्रूफ जैकेट की वजह से उनकी जान बच गई। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। कुल 3 गोवंशों को मुक्त भी करवाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना डीग जिले के थानाक्षेत्र कामां की है। यहाँ रविवार को पुलिस टीम गश्त कर रही थी। तभी SHO मनीष शर्मा को अपने क्षेत्र में गोतस्करों के मौजूदगी की सूचना मिली। पुलिस को पता चला कि 2 गोतस्कर 3 गोवंश लेकर चनिया खुर्द के जंगल वाली राह पर जा रहे हैं। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर तस्करों को घेर लिया और उन्हें खुद को पुलिस के हवाले करने के लिए कहा।

सरेंडर करने के बजाय दोनों आरोपितों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। एक गोली SHO के सीने में लगी। बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के कारण थानेदार की जान बच गई। आखिरकार पुलिस को अपने आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। जवाबी कार्रवाई में महमूद और इदरीस घायल हो गए। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। महमूद इलाके में भोला नाम से कुख्यात है और उस पर 19 मुकदमे दर्ज हैं।

दोनों गोतस्करों को आरबीएम अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। इनके पास से काटने के लिए ले जाए जा रहे 3 गोवंश बरामद किए गए हैं। महमूद पर दर्ज 19 मुकदमों में अधिकांश गोतस्करी के हैं। दोनों आरोपितों के पास से 3 देसी कट्टे, 6 जिंदा कारतूस और 3 खाली कारतूस बरामद हुए हैं। अस्पताल में इन दोनों ने भविष्य में कभी गोहत्या न करने का वादा किया है।


                

जम्मू कश्मीर के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों की हार, संसद नहीं पहुँच पाए उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती: जम्मू की दोनों सीटों पर लहराया भगवा

जम्मू कश्मीर में बड़ा उलटफेर हो गया है। वहाँ दशकों से प्रभावशाली रहीं दोनों प्रमुख दलों के मुखिया चुनाव है गए हैं। ‘जम्मू एन्ड कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस’ (JKNF) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुला और ‘जम्मू एन्ड कश्मीर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी’ (JKPDP) अपने-अपने सीटों से चुनाव हार गए हैं। उमर अब्दुल्ला बारामूला तो महबूबा मुफ़्ती अनंतनाग-राजौरी से लोकसभा चुनाव 2024 में ताल ठोक रही थीं। जम्मू कश्मीर में भाजपा 2 सीटें जीत रही हैं, JKNF 2 और एक पर निर्दलीय की जीत हो रही है।

सबसे पहले बात करते हैं बारामूला की। यहाँ से निर्दलीय अब्दुल रशीद शेख की जीत हो रही है। खबर लिखे जाने तक उन्हें 3.12 लाख वोट मिल चुके थे, वहीं उमर अब्दुल्ला 1.44 लाख वोटों से पीछे 1.68 लाख वोटों पर अटके हुए थे। उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर अपनी हार भी स्वीकार कर ली है। उन्होंने अपने विजय सांसदों रहुल्लाह मेहंदी और मियाँ अल्ताफ को बधाई देते हुए कहा कि वो इसके लिए माफ़ी माँगते हैं कि संसद में उनका साथ नहीं दे पाएँगे, लेकिन उन्हें विश्वास है कि दोनों वहाँ जम्मू कश्मीर का सही तरीके से प्रतिनिधित्व करेंगे।

अब बात करते हैं अनंतनाग-राजौरी सीट की, जहाँ से PDP की मुखिया महबूबा मुफ़्ती लड़ रही हैं। यहाँ से उमर अब्दुल्ला की ही पार्टी के मियाँ अल्ताफ अहमद की जीत हो रही है। उन्हें खबर लिखे जाने तक 4.59 लाख वोट मिले थे, जबकि महबूबा मुफ़्ती 2.22 लाख वोट ही पा सकी थीं। इस तरह से वो 2.36 लाख वोटों से पीछे चल रही हैं। ‘जम्मू एन्ड कश्मीर अपनी पार्टी’ के ज़फर इक़बाल खान मन्हास ने भी इस चुनाव में 1.17 लाख वोट अब तक बटोरे हैं।

उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती, दोनों जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 1998, 1999 और 2004 में लगातार जीत कर जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। उनके पिता फारूख अब्दुल्ला भी 4 बार यहाँ से जीत चुके हैं। वहीं महबूबा मुफ़्ती 2004 और 2014 में अनंतनाग से सांसद रही हैं। उनके पिता भी यहाँ से 1998 में जीत दर्ज कर चुके हैं। फारूख अब्दुल्ला और मुफ़्ती मुहम्मद सईद, दोनों मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

परषोत्तम रूपाला, महेश शर्मा, ढुल्लू महतो, अतुल गर्ग… जिन-जिन का सोशल मीडिया में ‘खास समूह’ कर रहा था ‘प्रचंड विरोध’, सारे चल रहे हैं आगे

लोकसभा चुनाव 2024 के रुझान लगातार आ रहे हैं। वोटों की गिनती के साथ ही चुनाव के दौरान रहे फैक्टर्स पर भी विश्लेषण चालू हो गया है। 2024 लोकसभा चुनावों में कई सीटों को लकर सोशल मीडिया में भी बड़ा अभियान चलाया गया था। यह अभियान राजपूत वोटरों को लेकर था।

अधिकांश सीटों पर भाजपा को हराने की बात कही गई थी। भाजपा नेता परषोत्तम रुपाला का बयान और राजपूत नेताओं के टिकट बदलने को लेकर सोशल मीडिया पर कई एकाउंट्स ने भाजपा को वोट ना देने के लिए अभियान चलाया था। इसमें दावा किया गया था कि भाजपा राजपूतों का राजनीतिक नेतृत्व घटा रही है। जिन सीटों को लेकर यह आरोप लगाए गए थे, उनकी स्थिति जान लेते हैं।

राजकोट: परषोत्तम रुपाला पर कोई असर नहीं

राजपूत विरोध का सबसे बड़ा केंद्र गुजरात के राजकोट से भाजपा प्रत्याशी परषोत्तम रुपाला थे। उनके एक बयान को लेकर राजपूतों के बड़े वर्ग ने नाराजगी जताई थी। उनके विरोध में सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया था। परषोत्तम रुपाला ने इस बयान को लेकर माफ़ी भी माँगी थी। हालाँकि, चुनावों तक उनके विरुद्ध बड़ा कैम्पेन चलाया गया और उन्हें हराने की बात कही गई। रुपाला के खिलाफ चलाए गए अभियान का उन पर कोई असर पड़ता नहीं दिखा है।

रुपाला गुजरात की राजकोट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें 1:30 बजे तक 6.78 लाख वोट हासिल हो चुके थे। वह कॉन्ग्रेस प्रत्याशी धनानी परेश से 3.96 लाख वोट से आगे हैं। ऐसे में उनकी जीत तय मानी जानी चाहिए। राजपूत विरोध का असर जमीन पर नहीं दिख रहा है।

नोएडा: जमीन पर नहीं दिखा विरोध

उत्तर प्रदेश की गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) सीट पर भी भाजपा के उम्मीदवार महेश शर्मा का विरोध हुआ था। महेश शर्मा को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध जताया गया था और उनके बदले सपा और बसपा को वोट देने की अपील की गई थी। हालांकि, जमीन पर यह असर नहीं दिखा। गौतम बुद्ध नगर सीट पर महेश शर्मा को 12:30 तक 4.4 लाख से अधिक वोट मिल चुके थे। वह सपा से 2.72 लाख वोट मिले हैं। यहाँ सोशल मीडिया पर गुर्जरों के मुद्दे उठाने को लेकर समर्थन को लेकर भाजपा का विरोध करने को कहा गया था जिसका असर नहीं दिख रहा।

धनबाद: टिकट काटने को लेकर विरोध

झारखंड की धनबाद सीट पर मौजूदा सांसद पशुपति नाथ सिंह का टिकट काट कर ढुल्लू महतो को देने को लेकर काफी विरोध जताया गया था। इसे राजपूत उम्मीदवार की राजनीति खत्म करने का प्रयास बताया गया था।

ढुल्लू महतो विरुद्ध सोशल मीडिया पर अभियान चला था और इस सीट पर कॉन्ग्रेस की अनुपमा सिंह को जिताने की अपील की गई थी। इस सोशल मीडिया के विरोध का असर जमीनी मतदाताओं पर नहीं दिखा है। ढुल्लू महतो 2.05 लाख वोटों के साथ अनुपमा सिंह से आगे चल रहे हैं। उन्हें 57,594 वोटों की बढ़त हासिल है। ऐसे में इस सीट पर सोशल मीडिया का असर नगण्य हुआ है।

गाजियाबाद: अतुल गर्ग आगे

गाजियाबाद सीट को लेकर भी सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया था। गाजियाबाद की सीट से सांसद रहे जनरल वीके सिंह ने सांसद चुनाव ना लड़ने का निर्णय किया था। जिसके बाद भाजपा ने अतुल गर्ग को टिकट दिया था। सोशल मीडिया पर यह अभियान चलाया गया था कि राजपूत उम्मीदवार का टिकट काट कर वैश्य समाज को दिया गया है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर राजपूत हैंडल्स ने भाजपा के बायकाट करने को कहा था।

हालाँकि, यह सोशल मीडिया का विरोध जमीन पर नहीं पहुँचा। अतुल गर्ग 3.6 लाख वोट पा चुके हैं और अपनी प्रतिद्वंदी डॉली शर्मा से 1.24 लाख से आगे हैं। आगे यह अंतर और बढ़ने के कयास हैं। सोशल मीडिया पर चले इस अभियान को लेकर यह भी आरोप लगे गए थे कि राजपूत राजनीति के नाम पर सोशल मीडिया चलाने वाले कई लोग मुस्लिम हैं जो कि हिन्दू वोटों को बाँटना चाहते हैं।

कॉन्ग्रेस के नफरती एजेंडे पर राहुल कँवल ने किया सवाल तो दर्द से बिलबिला उठे राजदीप सरदेसाई, डिबेट छोड़ इंडिया टुडे के स्टूडियो से निकले की दी धमकी

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 4 जून (मंगलवार) की सुबह मतगणना शुरू हो गई। भाजपा को मिल रही बढ़त के बाद विपक्ष के कई नेताओं और पत्रकारों में निराशा की लहर दौड़ गई। इन्हीं में से एक हैं इंडिया टुडे के ‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई। एक बहस के दौरान राजदीप ने चुनावी कवरेज के बीच में ही स्टूडियो छोड़ने की धमकी दे डाली। इस धमकी की वजह उनके सहयोगी राहुल कँवल द्वारा कॉन्ग्रेसी नेताओं द्वारा फैलाए जा रहे उत्तर-दक्षिण जैसी विभाजनकारी मुद्दे को उठाना था।

दक्षिण भारत में भाजपा के प्रदर्शन के बारे में चर्चा के दौरान राहुल कँवल ने कॉन्ग्रेस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “फर्जी बातें फैलाई गईं और दक्षिण व उत्तर भारत को अलग-अलग रूप में पेश करने की कोशिश की गई।” उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष ने दक्षिण भारत और उत्तर भारत को अलग-अलग कहानी के रूप में पेश करने का प्रयास किया गया। विपक्ष के कई नेताओं ने कहा कि मोदी का जादू दक्षिण में काम नहीं करता। यह अलग है। उत्तर भारत अलग है, क्योंकि वे इसे दो अलग-अलग देशों के रूप में देखते है।”

राहुल कँवल की यह टिप्पणी कॉन्ग्रेस के वफादार राजदीप सरदेसाई को नागवार गुजरी। राजदीप सरदेसाई ने राहुल कँवल को ‘एंग्री यंगमैन’ बताया। हालाँकि, इस पर ध्यान नहीं देते हुए राहुल कँवल ने राजदीप से ही पूछ लिया कि कॉन्ग्रेस उत्तर और दक्षिण की बातें करती है या नहीं। जवाब में सच्चाई कबूल करने के बजाय राजदीप ने राहुल कँवल को ऐसी टिप्पणी करते समय सावधानी बरतने की सलाह दे दी। राजदीप ने कॉन्ग्रेस नेता डीके सुरेश द्वारा दक्षिण भारत के अलग देश बन जाने जैसी टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बयान जरूर कहा, लेकिन कई मौकों पर वो कॉन्ग्रेस का बचाव करते दिखे।

अंत में राजदीप सरदेसाई ने इस पूरी चर्चा को आँकड़ों की तरफ मोड़ दिया। शो के एक पैनलिस्ट ने जब डीके सुरेश की टिप्पणी को देशद्रोही बयान बताया तो राजदीप सरदेसाई ने उत्तर और दक्षिण भारत के बीच नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए चर्चा को बीच में ही छोड़ देने की धमकी दी। दरअसल, दिसंबर 2023 में भी कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं ने छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों में अपनी हार को तर्कसंगत बनाने के लिए उत्तर-दक्षिण विभाजन को हवा दी थी।

यहाँ ध्यान देने वाली ये बात है कि इसी साल 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024 का अंतरिम बजट पेश किया था। तब इस बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस नेता डीके सुरेश ने केंद्र पर बजट में दक्षिण भारतीय राज्यों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए एक तरह से धमकी दे डाली थी। इसको लेकर काफी बवाल हुआ था।

डीके सुरेश ने कहा था कि भविष्य में दक्षिण भारतीय राज्य अपने लिए एक अलग देश की माँग कर सकते हैं और इसे बनवा भी सकते हैं। कॉन्ग्रेस नेता ने आगे कहा था कि दक्षिण भारतीय राज्यों का पैसा उत्तर भारत में प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने इसे अन्याय बताते हुए चेतावनी दी थी कि यही हाल रहा तो दक्षिणी राज्य एक अलग देश की माँग कर सकते हैं।

‘रीढ़विहीन लोग जो अपने जुबान पर कायम नहीं रहते’: ‘पंचायत’ वाले ‘विधायक जी’ ने अनुराग कश्यप के धोखे को किया याद, पंकज त्रिपाठी पर भी बरसे

अगर आपने ‘पंचायत’ का तीनों सीजन देखा है तो आपको ‘चंद्रकिशोर सिंह’ (चंदू) का किरदार याद होगा। अरे, वही अपने ‘विधायक जी’। इस किरदार को बिहार के सहरसा में जन्मे पंकज झा ने निभाया है। पंकज झा का ‘पंचायत’ में किरदार कॉमेडी वाला है, जिसे गंभीर रह कर कॉमेडी करनी है। अब उन्होंने बॉलीवुड के एक अन्य अभिनेता पंकज त्रिपाठी और निर्देशक अनुराग कश्यप पर निशाना साधा है। पंकज त्रिपाठी ‘मिर्जापुर’ सीरीज से शोहरत बटोर चुके हैं, वहीं अनुराग कश्यप ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी फिल्म सीरीज बना चुके हैं।

पंकज झा ने कहा है कि कुछ अभिनेता दूसरे बड़े अभिनेता की चप्पल चुराने के अपने ‘संघर्ष’ का भी महिमामंडन करते हैं। उनका इशारा पंकज त्रिपाठी की तरफ था, जिन्होंने बताया था कि कैसे संघर्ष के दिनों में जब वो किसी होटल में काम करते थे तो उन्होंने मनोज वाजपेयी की चप्पल अपने पास रख ली थी क्योंकि वो उनके पसंदीदा अभिनेता थे। पंकज झा ने इस दौरान पीठ पीछे राजनीति करने वालों पर भी निशाना साधा और कहा कि ऐसी चीजों से वो टूटने वाले नहीं हैं।

पंकज झा ने कहा कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके पीठ पीछे कौन लोग क्या बात कर रहे हैं, ऐसे लोग डरपोक होते हैं क्योंकि वो सामने ये बातें नहीं कर सकते। वहीं उन्होंने अनुराग कश्यप की बात करते हुए कहा कि ‘सत्य’ और ‘गुलाल’ जैसी फ़िल्में सिर्फ अभिनेता ही नहीं, बल्कि निर्देशक भी बनाती हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ इतने डरपोक और रीढ़विहीन लोग हैं जो अपनी जुबान पर टिके नहीं रह सकते। बकौल पंकज झा, उन्हें पता चला कि निर्देशक खुद इतनी बुरी हालत में थे कि उन्हें काम नहीं मिल रहा था और एक साथ 36 जगह काम कर रहे थे।

अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के दिनों को याद करते हुए पंकज झा ने बताया कि जब वो शूटिंग के लिए पटना गए हुए थे तो वहाँ उन्हें अनुराग कश्यप का मैसेज मिला कि ‘आ जाओ।’ उन्होंने बताया कि पंकज झा ने जवाब दिया कि वो शूट के बीच में हैं और 2-3 दिन में आएँगे। बाद में उन्हें पता चला कि इस रोल में किसी और को कास्ट कर लिया गया है। उस रोल में पंकज त्रिपाठी को ले लिया गया। हालाँकि, झा कहते हैं कि उन्हें कश्यप से कोई शिकायत नहीं।

खालिस्तानी अमृतपाल सिंह खडूर साहिब में आगे, जेल से लड़ रहा है चुनाव: शुरुआती रुझानों के बाद बोले नेटीजन्स- शर्म आनी चाहिए

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुए हैं, लेकिन अभी तक के रुझानों में एनडीए गठबंधन बहुमत पाकर सरकार बनाती नजर आ रही है। इस बीच कुछ लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहाँ कुछ प्रत्याशियों की बढ़त हैरान करने वाली दिख रही है।

इसमें एक नाम खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह का है। अमृतपाल ने पंजाब के खडूर साहिब से लोकसभा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था। अब खबर है कि वो कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों से ज्यादा वोट पाकर लीड कर रहा है।

ताजे आँकड़ों के अनुसार, असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह इस समय बड़ी मार्जिन से आगे चल रहा है। चुनाव आयोग की साइट के मुताबिक अभी अमृतपाल सिंह को 241540 वोट मिले है। वहीं कॉन्ग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा और आम आदमी पार्टी ललजीत सिंह भुल्लर पीछे जा रहे हैं। ये नतीजे देख लोग कह रहे हैं कि मतदाताओं को शर्म आनी चाहिए कि वो खालिस्तान समर्थकों को वोट दे रहे हैं।

अमृतपाल सिंह का रुझानों में आगे जाना इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि उसने ये चुनाव असम की डिब्रूगढ़ जेल में रहते हुए लड़ा है। ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया खालिस्तानी अमृतपाल सिंह पर अजानला पुलिस थाने पर हमला करके फरार होने का आरोप लगा हुआ है। पुलिस ने उसे काफी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह का जन्म जल्लूपुर खेड़ा गाँव में 1993 में हुआ था। 12 क्लास पास करने के बाद वो दुबई गया। वहाँ उसे ट्रांसपोर्ट का बिजनेस किया और 2022 में दीप सिद्धू की मौत के बाद वो ‘वारिस पंजाब दे’ का नया प्रमुख बन गया। इसी के बाद से वो प्रशासन को चुनौती देने लगा था और 2023 में थाने पर हमला किया था।

24 साल बाद ओडिशा, 5 साल बाद आंध्र प्रदेश परिवर्तन की राह पर: चंद्रबाबू की आँधी में उड़ गए जगनमोहन, नवीन बाबू से सत्ता छीनती दिख रही BJP

लोकसभा चुनाव 2024 के साथ ही 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी कराए गए थे। इनमें से 2 राज्यों सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए ने विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ कर दिया, तो बाकी बचे दो राज्यों, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 जून 2024 को आ रहे हैं। इन दोनों ही राज्यों में मौजूदा सत्ताधारी पार्टियों को झटका लगा है।

आंध्र प्रदेश में एनडीए ने सत्ताधारी पार्टी YSRCP का सूपड़ा साफ कर दिया है। आंध्र प्रदेश में बीजेपी-जनसेना पार्टी और तेलुगू देशम पार्टी क्लीन स्वीप करते हुए सरकार बना रही है। इसके साथ ही ओडिशा में लंबे समय सत्ता में बने बीजेडी को बीजेपी सत्ता से बाहर करती दिख रही है। अभी तक के आँकड़ों में बीजेपी ओडिशा में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार अपने दम पर बनाती दिख रही है। ये आँकड़े दोपहर 12.30 बजे तक के है।

आंध्र प्रदेश में एनडीए का कमाल, YSRCP का सूपड़ा साफ

आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की सत्ताधारी पार्टी YSRCP का सूपड़ा साफ होते दिख रहा है। यहाँ बीजेपी, तेलुगू देशम पार्टी और जनसेना पार्टी तीन चौथाई से भी अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर रही हैं। आंध्र प्रदेश की कुल 175 विधानसभा सीटों में तेलुगू देशम पार्टी 131 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज कर रही है। जनसेना पार्टी 20 सीटों पर आगे है। बीजेपी को 7 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है, तो YSRCP को महज 17 सीटें मिलती दिख रही हैं। आंध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस पूरी तरह से गायब हो गई है। वो एक भी सीट पाती नहीं दिख रही।

ओडिशा में नवीन पटनायक को झटका, बीजेपी आगे

ओडिशा में साल 2000 से मुख्यमंत्री पद पर टिके नवीन पटनायक को इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका लगता दिख रहा है। ओडिशा में बीजेपी अपने दम पर पूर्ण बहुमत पाती दिख रही है। ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों में से 74 पर बीजेपी आगे है, तो बीजेडी सिर्फ 57 सीटों पर आगे है। कॉन्ग्रेस 13 विधानसभा सीटों पर आगे है, तो 2 निर्दलीय और एक सीपीआई(एम) का उम्मीदवार आगे है। यहाँ बहुमत का आँकड़ा भी 74 सीटों का ही है।