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जिस महिला ने घूँसों से बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, उसने ‘सौतन’ की न्यूड तस्वीरें कर दी वायरल: गिरफ्तार करने आए अधिकारियों पर भी हमला, जानिए कौन है स्टेफी कोहेन

अमेरिका के फ्लोरिडा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। प्रोफेशनल बॉक्सर और पॉवरलिफ्टिंग के क्षेत्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी स्टेफनी कोहेन ने अपने पूर्व बॉयफ्रेंड से बदला लेने के लिए उसकी वर्तमान गर्लफ्रेंड की न्यूड तस्वीरें वायरल कर दी। इसके लिए उसने अपने एक्स बॉयफ्रेंड का लैपटॉप हैक कर लिया। उसने उस लड़की को अपमानित करने और उसके बारे में दुनिया को बताने की मंशा से ऐसा किया। 32 वर्षीय स्टेफनी कोहेन पर अब मुकदमा चल रहा है।

स्टेफनी कोहेन पर आरोप लगाया गया है कि बिना अनुमति ने उसने अपने एक्स बॉयफ्रेंड के कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया, साथ ही एक लड़की को ऑनलाइन यौन प्रताड़ना का निशाना बनाया और गिरफ़्तारी के समय हिंसा का सहारा लिया। स्टेफनी कोहेन मगरिकी जिस घर में अपने एक्स बॉयफ्रेंड के साथ रहती थी, वहीं जाकर उसने उसका लैपटॉप एक्सेस किया। मार्च 2022 में दोनों यहाँ साथ रहते थे। इंस्टाग्राम पर स्टेफी कोहेन के 10 लाख से भी अधिक फॉलोवर्स हैं, लेकिन उसने अपना अकाउंट प्राइवेट कर रखा है।

वो बतौर फिटनेस इन्फ्लुएंसर भी लोकप्रिय है। उसने कुछ कॉमन पासवर्ड्स का इस्तेमाल कर के अपने एक्स बॉयफ्रेंड के एप्पल आईक्लाउड का पासवर्ड गेस किया और उसमें से उसकी वर्तमान गर्लफ्रेंड की कई नंगी तस्वीरें निकाल ली। इसके बाद वेनेजुएला में जन्मी बॉक्सर ने एक चैट ग्रुप में इन तस्वीरों को शेयर किया, जिसमें कई लड़कियाँ मौजूद थीं। पुलिस की पूछताछ में उसने खुद कबूला कि वो पीड़िता को अपमानित करने की मंशा से ये सब कर रही थी।

नवंबर 2023 में ही स्टेफी कोहेन के एक्स बॉयफ्रेंड और उसकी वर्तमान गर्लफ्रेंड मियामी के डिटेक्टिव्स के समक्ष ये मामला लेकर गए थे। अब पुलिस ने आरोपित युवती को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया है। इस दौरान उसने सहयोग नहीं किया और भागने लगी। उसने एक अधिकारी के पाँव में हथकड़ी भी फँसा दी। किसी तरह हथकड़ी लगा कर उसे नियंत्रित किया गया। कोहेन को जमानत देते हुए एक्स बॉयफ्रेंड और उसकी गर्लफ्रेंड से दूर रहने को कहा गया है। इसके लिए उसे 3300 डॉलर (2.74 लाख रुपए) का बॉन्ड भरना पड़ा।

‘₹2500 करोड़ में CM, 500 करोड़ में मंत्री बनाती है BJP’: बेंगलुरु कोर्ट ने राहुल गाँधी को 7 जून को बुलाया, कहा- हर हाल में पेश हों

बेंगलुरु के एक कोर्ट ने आदेश दिया है कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी 7 जून, 2024 को पेश हों। कोर्ट ने कहा है कि राहुल गाँधी को हर हाल में पेश होना होगा। कोर्ट ने भाजपा नेता द्वारा किए गए एक मुकदमे में यह आदेश दिया है। मामला 2023 विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के विरुद्ध भ्रामक विज्ञापन चलाने से जुड़ा हुआ है।

बेंगलुरु के कोर्ट ने शनिवार (1 जून, 2024) को एक भाजपा नेता एस केशव प्रसाद द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे पर सुनवाई की। इस मुकदमे में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को भ्रष्ट चलाने वाले विज्ञापन चलवाए जिनसे भाजपा की मानहानि हुई।

इस मामले में कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और राहुल गाँधी को आरोपित बनाया गया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सिद्दारमैया और शिवकुमार को जमानत दे दी। इस दौरान राहुल गाँधी नहीं पेश हुए। उनके ना पेश होने पर भाजपा नेता के वकील ने माँग की कि राहुल गाँधी के विरुद्ध गैर जमानत वारंट जारी किया जाए।

कोर्ट में राहुल गाँधी की तरफ से चुनावी व्यस्तताओं के चलते बेंगलुरु जाने में असमर्थता जताई गई थी, जिसे कोर्ट ने 1 जून को मान लिया लेकिन सख्त हिदायत दी कि वह 7 जून को जरूर पेश हों। राहुल गाँधी ने इससे पहले मार्च में अपने विरुद्ध समन जारी किए जाने पर जून में तारीख माँगी थी।

भाजपा नेता द्वारा दायर इस मुकदमे में आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस ने भाजपा पर ₹2500 करोड़ में मुख्यमंत्री और ₹500 करोड़ में मंत्रिपद बेचने की बात कही, इससे भाजपा की छवि खराब हुई। इसके अलावा कॉन्ग्रेस ने मई, 2023 में अखबारों में विज्ञापन छपवा कर दावा किया कि राज्य की भाजपा सरकार के दौरान कोविड से जुड़े ठेकों में 75%, PWD ठेकों में 40% और धार्मिक संस्थानों में दान के मामले में 30% कमीशन लिया गया। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि इससे पार्टी की छवि धूमिल हुई।

गौरतलब है कि 2023 कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को बड़ी जीत हासिल हुई थी और भाजपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा था।

जब मुस्लिम परिवार ने दिखाया ‘भाईचारा’ तो रवीना टंडन के काम न आया ‘खजूर प्रेम’, कठुआ से राफाह तक एक्टिव बॉलीवुड गैंग के मौन पर तमाचा है कंगना की मुखरता

बॉलीवुड गिरोह की सदस्य रवीना टंडन के साथ पिछले 2 दिन में जो कुछ हुआ उससे वो खुद सदमे में होंगी। अक्सर बकरीद पर बधाई का संदेश देने वाली, सोशल मीडिया पर सेवई के साथ फोटो डालने वाली, रवीना ने सोचा भी नहीं होगा कि कभी कोई मुस्लिम परिवार उनके खिलाफ ऐसा झूठा मुकदमा दर्ज करवाएगा कि मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक उनकी छवि पर सवाल उठने लगेंगे।

इस मामले के बाद रवीना को कुछ समझ आया हो या न आया लेकिन अपने गिरोह के लोगों की हकीकत तो वह जान ही गई होंगीं। इस गिरोह ने उनके लिए न तब आवाज उठाई जब उनपर आरोप लगे कि वो नशे में मारपीट कर रही थीं और न ही उन्हें तब समर्थन में कुछ बोला दिया जब पता चला कि सारे आरोप झूठे थे। इस मामले में मुंबई पुलिस ने बयान जारी करके उन्हें निर्दोष तक बताया लेकिन तब भी कोई बॉलीवुड सेलेब उनके समर्थन में बयान देने नहीं खड़ा हुआ। अगर कोई पूरे बॉलीवुड से उनकी आवाज बना तो सिर्फ वो कंगना रनौत हैं।

कंगना ने अपने इंस्टा पोस्ट में रवीना टंडन के साथ हुई घटना पर लिखा, “रवीना टंडन जी के साथ जो हुआ वह बेहद चिंताजनक है। अगर विपरीत समूह में पाँच से छह और लोग होते तो उन्हें मार दिया जाता। हम इस तरह के रोड रेज की निंदा करते हैं। उन लोगों को फटकार लगाई जानी चाहिए। उन्हें इस तरह के हिंसक और जहरीले व्यवहार से बचना नहीं चाहिए।”

रवीना टंडन और कंगना रनौत दोनों की विचारधाराएँ अलग रही हैं। रवीना उस ग्रुप का हिस्सा हैं जो कठुआ से लेकर राफाह तक मामले में प्रोपगेंडा फैलाने में सक्रिय दिखाई देते हैं। वहीं कंगना मुखर होकर हिंदुत्व की बात करती हैं। आज रवीना का सिर्फ कंगना ने साथ दिया है लेकिन यही रवीना जब कंगना पर तरह-तरह के इल्जाम लग रहे थे तब न तो महिला होने के नाते, न बॉलीवुड अभिनेत्री होने के नाते इस पर कुछ बोली थीं।

दरअसल, बॉलीवुड में रवीना जिस गिरोह का हिस्सा हैं वहाँ ईद की इफ्तारी में शामिल होना किसी भी सेलेब के लिए छवि निर्माण का तरीका होता है। रवीना ने अपने अभिनेत्री रहते हुए बॉलीवुड के प्रोग्रामों में शामिल होकर ऐसा खूब किया, मगर आज जब एक मुस्लिम परिवार ने उन्हें घेरकर उनकी लिंचिंग शुरू की, उनपर झूठे इल्जाम लगाए, उन्हें शराब के नशे में चूर बताना चाहा… तब उनका वो भाईचारा काम नहीं आ पाया जो उन्होंने ऐसी पार्टियों में जा जाकर बनाया था।

घटना की वायरल वीडियो को अगर देखें तो पता चलेगा कि रवीना टंडन बेबस और लाचार होकर कहती सुनाई पड़ रही थी कि उन्हें मारा न जाए उन्हें छोड़ दिया जाए यानी उस समय उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। अब जो रवीना को पर्सनली नहीं जानता उसके लिए समझना मुश्किल होगा क्या सही है क्या गलत, मगर जो सेलेब लोग रवीना को जानते हैं वो तो समझ पा रहे होंगे कि वीडियो में वो हकीकत में बेबस थीं थी या वो नशे में कर रही थी… सब जानते समझते हुए इस गिरोह के एक शख्स ने आवाज नहीं उठाई। बाद में पुलिस ने खुद जाँच करके सच्चाई बताई तब जाकर दूसरा एंगल सामने आया।

वीडियो में कहा जा रहा था कि रवीना ने उस परिवार के साथ गाली-गलौच की है जबकि हकीकत यह निकलकर आई कि उन्होंने गाली गलौच नहीं की थी उनके साथ गाली-गलौच हुई थी। रवीना टंडन गाड़ी से निकलकर सड़क पर सिर्फ अपने ड्राइवर को बचाने आई थीं उतने में वो भीड़ उनपर टूट पड़ी और बेबुनियादी इल्जाम लगाए जाने लगे। रवीना के साथ खींचतान हो रही थीं मगर उन्होंने फिर भी कुछ नहीं बोला। शायद उन्हें अंदाजा हो गया था कि जो भीड़ उनसे उलझी है वो उनके साथ कुछ भी कर सकती है। वो लगातार मामले को सुलझाने की बात करती रहीं, पर मामला नहीं सुलझा…। धीरे-धीरे खबरें मीडिया में चढ़ीं, रवीना टंडन पर सवाल उठे… लेकिन बॉलीवुड वाले चुप रहे।

अजीब बात तो ये है कि सारा मामला क्लियर होने के बावजूद बॉलीवुड के गिरोह के लोग अपने ही समूह की महिला के साथ हुई ज्यादती को मुद्दा नहीं बना रहे। राफाह तक पर उनके सोशल मीडिया पोस्ट हो रहे हैं पर रवीना के लिए कहीं नहीं। मीडिया में बयान देना तो दूर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक तौर पर एक पोस्ट करके भी घटना का विरोध नहीं किया जा रहा है। कारण क्या है? शायद सब जानते है।

सोचिए क्या इस मामले में अगर कोई हिंदू रवीना टंडन के साथ ऐसी बदसलूकी कर देता तो क्या ये गिरोह शांत रहता? नहीं, तब उन्हें देश में लोकतंत्र खतरे में दिखाई देता और हिंदुत्व का भयावह चेहरा दिखता। मगर, अभी ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि प्रताड़ित करने वाले एक निश्चित वर्ग से हैं। वो वर्ग जिसे खुद रवीना टंडन चाहती हैं कि वो उनसे नाराज न हो।

यही वजह है कि शायद सारे पक्ष अपने साथ होने के बावजूद रवीना टंडन ने इस मामले में कोई शिकायत नहीं दी जबकि वो अच्छे से जानती है कि अगर उनके पक्ष में सबूत नहीं मिलते तो वो परिवार पूरी तैयारी कर चुका था उनको जेल भेजने की। उनपर बुजुर्ग महिला को पीटने का आरोप लगा दिया गया था। लड़की की नाक फोड़कर खून निकालने जैसे दावे कर दिए गए थे, उन्हें बिन बात के नशेड़ी साबित किया जा रहा था… ये सब जानते हुए रवीना टंडन चुप हैं। शायद वह खुद घबराई हुई हैं ये सोचकर कि इस शांतिप्रिय समुदाय के खिलाफ आवाज उठाने के नुकसान उन्हें न झेलने पड़ें या शायद इस बात का डर है कि उन्हें वो गिरोह न खारिज कर दे जिनका काम ही प्रोपगेंडे को हवा देना। ऐसा भी हो सकता है कि रवीना जानती हों कि उनके साथ इस मुद्दे पर आवाज क्यों नहीं उठा रहे… उन्हें मालूम होगा कि ऐसी परिस्थिति में मीडिया को कैसे डील करना होता है… कैसे समुदाय विशेष की छवि को धूमिल करने से बचाना होता है।

मालदीव की हेकड़ी अब इजरायल ने निकाली, कहा- भारत के लक्षद्वीप जैसे समुद्री तटों पर घूमने जाएँ: यहूदी देश के पर्यटकों पर इस्लामी मुल्क ने लगाया है बैन

मालदीव और उसके राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जु को अब इजरायल ने झटका दिया है। इजरायल ने अपने नागरिकों को कहा है कि वो भारत भ्रमण करें, साथ ही भारत के सुन्दर पर्यटन स्थलों की तस्वीरें भी शेयर की हैं। बता दें कि इस्लामी मुल्क मालदीव ने इजरायल के पासपोर्ट धारकों को अपने देश में प्रतिबंधित कर दिया है, इसीलिए इजरायल ने उसे सबक सिखाया है। भारत स्थित इजरायली दूतावास ने लक्षद्वीप, गोवा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और केरल की मनोरम तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की।

साथ ही लिखा, “जैसा कि मालदीव ने अब इजरायलियों के आने पर बैन लगा दिया हैं, नीचे दिए यह कुछ खूबसूरत और अद्भुत भारतीय समुद्र तट हैं जहाँ इजरायली पर्यटकों का हार्दिक स्वागत होता है और बेहद आदर सत्कार दिया जाता हैं। हमारे डिप्लोमेट्स द्वारा यात्रा की गई जगहों के आधार पर ये हमारे कुछ सुझाव हैं।” नीचे कमेंट्स में भारतीयों ने भी दिल खोलते हुए कहा कि इजरायलियों का हमारे देश में स्वागत है, यहाँ उनका भरपूर स्वागत किया जाएगा।

बता दें कि इजरायल पर गाजा पट्टी में बमबारी और गोलीबारी का आरोप लगाते हुए मालदीव ने वहाँ के पर्यटकों पर बैन लगा दिया है। मुल्क के गृहक्षेत्र सुरक्षा एवं तकनीकी मंत्री अली इहुसान ने कहा कि राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जु की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस बैन के लिए कानूनी बदलाव शुरू करने पर मुहर लगी। इसके लिए मंत्रियों की एक विशेष समिति भी बनाई गई है। मालदीव ने फिलिस्तीन की मदद के लिए एक विशेष राजदूत की नियुक्ति का भी निर्णय लिया है।

साथ ही फिलिस्तीनियों के लिए फंड भी जुटाया जाएगा। फिलिस्तीन के समर्थन में एक राष्ट्रीय मार्च का भी आयोजन किया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका ने भी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजरायल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास आतंकियों ने इजरायल में घुस कर 1200 लोगों का नरसंहार किया था, जिसके बाद से ही इजरायल जवाबी कार्रवाई कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने कहा है कि इजरायल ने सीजफायर का नया प्रस्ताव क़तर के माध्यम से हमास को भिजवाया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2024 में लक्षद्वीप का दौरा किया था और वहाँ से कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जिसके बाद मालदीव भड़क गया था। लक्षद्वीप की सुंदरता देख वहाँ पर्यटन भी बढ़ा। मालदीव के 3 मंत्रियों को पद से हाथ धोना पड़ा, उन्होंने पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। भारतीयों द्वारा बहिष्कार के बाद मालदीव के पर्यटन और राजस्व में भारी कमी आई। अब इजरायल का साथ भी भारत को मिल गया है।

जहाँ भारत में सबसे पहले उगता है सूरज, वहाँ कैसे डूब गई कॉन्ग्रेस: कभी था गढ़-अब उम्मीदवार के पड़े लाले, अरुणाचल में फिर से BJP सरकार

2024 लोकसभा परिमाणों में अभी कुछ समय शेष है। इससे पहले अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के विधानसभा चुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। देश के सरहदी राज्य अरुणाचल प्रदेश में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है और अपनी सत्ता बरकरार रखी है। कॉन्ग्रेस राज्य में खाता खोलने में भी संघर्ष करते दिखाई दी है।

अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अगुवाई में भाजपा को 60 में से 46 सीटें हासिल हुई हैं। भाजपा की इस बार यहाँ 5 सीटें बढ़ गई हैं। 2019 में अरुणाचल प्रदेश में भाजपा को सीट मिली थी। भाजपा का वोट प्रतिशत भी राज्य में 50% के पार रहा है। भाजपा के सामने चुनाव लड़ रही कॉन्ग्रेस राज्य से लगभग समाप्त हो गई है।

कॉन्ग्रेस को राज्य में मात्र 1 सीट मिली है। अरुणाचल के मुख्यमंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता नबाम तुकी तक चुनाव हार गए हैं। राज्य में पार्टी को जहाँ चुनावी हार तो मिली ही है, उसका वोट प्रतिशत भी घट गया है। कॉन्ग्रेस से अधिक सीटें नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPEP) को मिली हैं, जिसने राज्य में 5 सीटें हासिल की हैं।

10 निर्विरोध जीते, दो तिहाई सीट से बनेगी भाजपा सरकार

भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में 60 में से 46 यानि दो तिहाई सीटें जीत ली हैं, उसका वोट प्रतिशत 54% रहा है। उसका यह प्रदर्शन 2019 के मुकाबले और भी बढ़िया है, तब राज्य में भाजपा ने 41 सीटें जीतीं थी और उसे 50% वोट मिले थे। भाजपा की जीत की पटकथा राज्य में पहले ही लिखी जा चुकी थी।

चुनाव के लिए मतदान से पहले ही राज्य में भाजपा की जीत चालू हो गई थी। मुख्यमंत्री पेमा खांडू समेत राज्य में भाजपा के 10 विधायक मतदान से पहले ही निर्विरोध निर्वाचित होने में सफल रहे थे। उसके बाद आए परिणामों में भाजपा ने और बड़ी जीत हासिल की।

अरुणाचल प्रदेश में भाजपा बीते कुछ सालों से लगातार मजबूत होती आई है। 2016 में भाजपा खेमे में पेमा खांडू के आने के बाद से यह राज्य की सत्ता में रही है। 2016 में राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार छोड़ कर पेमा खांडू 43 विधायकों के साथ भाजपा के साथ आ गए थे। वह राज्य के मुख्यमंत्री, जुलाई 2016 में बने थे।

पेमा खांडू के कॉन्ग्रेस से भाजपा में आने के बाद राज्य में कॉन्ग्रेस की स्थिति लगातार बदतर होती गई है। दूसरी तरफ भाजपा की राज्य सरकार को केंद्र की मोदी सरकार का लगातार समर्थन मिला है। इसका फायदा भी चुनावों में उसे हो रहा है। भाजपा की जीत में बड़ा योगदान विकास कार्यों का भी है।

अरुणाचल में इतिहास में सबसे बुरी स्थिति में कॉन्ग्रेस

अरुणाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस अपने इतिहास में सबसे बुरी स्थिति में है। उसे 2024 विधानसभा चुनावों में मात्र 1 सीट मिली है। उसका वोट प्रतिशत राज्य में 5.5% ही रह गया है। जहाँ भाजपा की जीत की पटकथा राज्य में चुनाव से पहले ही लिखी जा चुकी थी, वैसे राज्य में कॉन्ग्रेस की इस फटेहाल स्थिति को भी कोई पहले ही भाँप सकता था।

राज्य में कॉन्ग्रेस का इतना बुरा हाल रहा है कि उसे सभी 60 सीटों पर लड़ने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिले। जो लोग मिले भी उन्होंने चुनाव का पर्चा ही नहीं भरा। कॉन्ग्रेस ने राज्य के विधानसभा चुनाव के लिए मात्र एक ही सूची जारी की थी। इसमें भी कॉन्ग्रेस ने मात्र 34 ही नाम दिए थे। इनमें से भी कई ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया।

कॉन्ग्रेस जहाँ आज अरुणाचल प्रदेश में अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं, वहीं वह 2016 तक राज्य में सत्ता में काबिज थी। वह इससे पहले अरुणाचल की सत्ता से कभी बाहर नहीं हुई थी। राज्य में 2019 चुनावों में कॉन्ग्रेस मात्र 4 सीट ही जीत पाई थी। इनमें से भी कुछ विधायकों ने उसका साथ छोड़ कर भाजपा की सदस्यता ले ली थी।

कॉन्ग्रेस का राज्य में बुरा हाल है और उसका शीर्ष नेतृत्व भी राज्य पर ध्यान नहीं दे रहा है। राज्य में पार्टी के संगठन को मजबूत करने और नए नेता तलाशने में भी कॉन्ग्रेस विफल रही है। पेमा खांडू के कॉग्रेस से 2016 में निकलने के बाद पार्टी को कई संकटों का सामना करना पड़ रहा है।

पेमा खांडू: मैन ऑफ़ द मैच

राज्य में भाजपा की इस जीत का बड़ा श्रेय मुख्यमंत्री पेमा खांडू का है। पेमा खांडू देश के कुछ सबसे युवा मुख्यमंत्रियों में एक हैं। 44 वर्ष के पेमा खांडू राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के बेटे हैं। 2011 में दोरजी खांडू की मौत के बाद वह सक्रिय राजनीति में आए थे। वह इसके बाद नबाम तुकी की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने थे। दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ने वाले खांडू ने 2016 में राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार को गिरा दिया था। उनके साथ 43 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी थी।

खांडू खुद भी मझे हुए नेता हैं, खांडू ने जुलाई 2016 में मुख्यमंत्री बनने के बाद कई बार राजनीतिक झंझावत झेले हैं और उनसे पार पाए हैं। खांडू दिसम्बर 2016 में भाजपा में शामिल हो गए थे। तबसे राज्य की कमान उनके हाथों में है। खांडू के नेतृत्व में राज्य में काफी विकास हुआ है। विशेष कर इन्फ्रा क्षेत्र में राज्य बड़ा बदलाव आया है। पेमा खांडू, गेगोंग अपांग के बाद सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले व्यक्ति हैं। वह 7 वर्षों से अधिक से राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

एक बैठक से बदल गई पूर्वोत्तर की राजनीति

अरुणाचल प्रदेश में जहाँ कॉन्ग्रेस सबसे खराब दौर से गुजर रही है, वहीं उसकी स्थिति पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी कुछ ख़ास अच्छी नहीं है। पूर्वोत्तर के राज्यों में कॉन्ग्रेस का सफाया करने में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का भी बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने एक बार बताया था कि एक बैठक ने कैसे उन्हें कॉन्ग्रेस छोड़ने और कॉन्ग्रेस का उत्तरपूर्व में सफाया करने को लेकर उद्वेलित कर दिया। यह बैठक राहुल गाँधी और कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ हुई थी।

हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उन्होंने सकारात्मक रूप से इस बैठक की शुरुआत की थी और कॉन्ग्रेस पार्टी के हित की बातें कर रहे थे। लेकिन, उन्होंने बताया कि पूरी बातचीत के दौरान राहुल गाँधी बैठक में कोई रुचि ही नहीं दिखा रहे थे और अपने कुत्ते के साथ खेल रहे थे। हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि उन्हें बाद में पता चला कि उसका नाम ‘पीडी’ है।

2016 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को असम की सत्ता से उखाड़ फेंकने में बड़ी भूमिका निभाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया, “बैठक के दौरान वहाँ उपस्थित नेताओं के लिए चाय-कॉफी लाई गई। राहुल गाँधी के कुत्ते ने टेबल के पास जाकर उस पर रखी प्लेट से एक बिस्किट निकाल लिया और खाने लगा। फिर राहुल गाँधी मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने लगे। मैं ये सोच रहा था कि वो भला मुझे देख कर क्यों ऐसा कर रहे हैं?”

दरअसल, हिमंत बिस्वा सरमा इस हाथ में चाय का कप लेकर इस बात का इंतजार कर रहे थे कि राहुल गाँधी कब कुत्ते द्वारा जूठी की गई उस प्लेट के बदले दूसरी प्लेट मँगवाएँगे। उन्होंने 5 मिनट तक इंतजार किया लेकिन फिर देखा कि तरुण गोगोई और सीपी जोशी जैसे वरिष्ठ नेता उसी प्लेट से बिस्किट उठा कर खा रहे हैं। सरमा ने कहा कि वो हमेशा राहुल गाँधी से मिलने तो नहीं जाते थे, लेकिन उस दिन उन्हें एहसास हुआ कि ये सामान्य है।

उन्होंने कहा, “उसी दिन मुझे इसका एहसास हुआ कि अब बहुत हुआ, अब मैं इस व्यक्ति के साथ नहीं रह सकता। लेकिन, मैं उनका धन्यवाद भी करता हूँ। मैं आज इस पद पर हूँ, तो इसका श्रेय उस बैठक को भी जाता है और इस तथ्य को भी कि राहुल गाँधी को मेरा कॉन्ग्रेस में होना पसंद ही नहीं था।” बता दें कि सरमा ने कॉन्ग्रेस में 22 साल बिताए थे।

वही अजमेर, वही शिकारी, सेक्स स्कैंडल की वैसी ही साजिश… सहेली के कहने पर इंस्टाग्राम पर की दोस्ती, हुआ गैंगरेप: अरबाज और इरफान गिरफ्तार

राजस्थान के अजमेर में 11वीं की लड़की के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। मुख्य आरोपित का नाम इरफान है। उसने पहले अपनी एक सहेली के जरिए पीड़िता को इंस्टाग्राम से दोस्ती के जाल में फाँसा, फिर उसके साथ गैंगरेप किया और बाद में लड़की को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर प्रताड़ित करने लगा। उसने उससे 5 लाख रुपए तक ऐंठे और बाद में 10 लाख रुपए माँगने लगा।

अब पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर ये केस दर्ज किया है। पीड़िता के पिता ने पुलिस को बताया कि अक्तूबर 2023 में कोचिंग सेंटर पर उनकी बेटी की एक लड़की से दोस्ती हुई थी। उसी लड़की ने बेटी को इंस्टा पर इस लड़के से दोस्ती करने को कहा। बेटी ने उस समय तो वो आईडी ब्लॉक कर दी, मगर फिर से उस सहेली ने बेटी की दोस्ती उस लड़के से करवाई। फिर एक दिन उसके इंस्टा का आईडी पासवर्ड चुरा लिया और आईडी का दुरुपयोग शुरू कर दिया।

अश्लील चैट्स करके बेटी को ब्लैकमेल किया गया, उस पर शारीरिक संबंध के लिए दबाव बनाया गया, आपत्तिजनक तस्वीरें लेकर उसे वायरल करने की धमकी देकर उससे पैसे माँगे गए। लड़की इतना परेशान हो गई कि वो घर में चोरी करके उन लोगों को पैसे देने लगी। जब भी ये लोग लड़की से पैसे लेने आते तो उसके साथ अश्लील हरकतें करते। इरफान ने पीड़िता के साथ संबंध बनाने को कहता।

मार्च 2024 में इरफान की डिमांड बढ़ने लगी। उसने लड़की से 10 लाख रुपए की डिमांड की। रकम सुनकर लड़की डिप्रेशन में आ गई। वहीं जब घर में रखी नकदी गायब होने के बारे में उससे पूछा गया तो उसने अपने साथ हुई घटना के बारे में सब कुछ बताया। पिता ने लड़की की बातें सुनने के बाद पुलिस को बताया है कि उनकी बेटी के साथ 5 लोगों ने गैंगरेप किया है।

बता दें कि इस मामले में मुख्य आरोपित इरफान, उसके साथी अरबाज सहित एक और को हिरासत में लिया गया है। क्रिश्चियन गंज थाने के सीआई अरविंद सिंह ने इस मामले में कहा कि ये केस गंभीर है और इसमें कई बड़ी गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। बाकी लोगों की तलाश चल रही है। वहीं जिस लड़की ने दोस्ती कराई फसके बारे में भी पता लगाया जा रहा है। जाँच अधिकारी ने बताया कि सीओ नॉर्थ रुद्रप्रताप शर्मा ने जानकारी दी है कि आरोपित इरफान के फोन से अश्लील फोटो मिले हैं। इनकी फॉरेंसिक जाँच कराई जाएगी।

अजमेर सेक्स स्कैंडल

गौरतलब है कि इसी अजमेर से 90 के दशक में एक बड़ा सेक्स स्कैंडन सामने आया था। तब, 100 से ज्यादा लड़कियों को फँसाकर उनके साथ रेप किया गया था। फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती- इस कांड के मुख्य आरोपित थे। तीनों ही यूथ कॉन्ग्रेस के लीडर थे। फारूक उस समय इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस की अजमेर यूनिट का अध्यक्ष था। नफीस चिश्ती कॉन्ग्रेस की अजमेर यूनिट का उपाध्यक्ष था। अनवर चिश्ती अजमेर में पार्टी का ज्वाइंट सेक्रेटरी था। साथ ही तीनों अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम भी थे।

बताया जाता है कि आरोपितों ने सबसे पहले एक बिजनेसमैन के बेटे के साथ कुकर्म कर उसकी अश्लील तस्वीर उतारी और उसे अपनी गर्लफ्रेंड को लाने के लिए मजबूर किया। उसकी गर्लफ्रेंड से रेप के बाद उसकी अश्लील तस्वीरें निकाल ली और लड़की को अपनी सहेलियों को लाने के लिए कहा गया। फिर यह सिलसिला ही चल पड़ा। एक के बाद एक लड़की के साथ रेप करना, न्यूड तस्वीरें लेना, ब्लैकमेल कर उसकी भी बहन/ सहेलियों को लाने के लिए कहना और उन लड़कियों के साथ भी यही घृणित कृत्य करना- इस चेन सिस्टम में 100 से ज्यादा लड़कियों के साथ भी शर्मनाक कृत्य किया।

जनादेश से पहले PM मोदी का जनता से आह्वान, कहा- अगले 25 वर्ष राष्ट्र के लिए समर्पित करें: कन्याकुमारी में साधना के बाद देश से ‘नए संकल्पों’ का किया संवाद

लोकतंत्र की जननी में लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व का एक पड़ाव आज 1 जून को पूरा हो रहा है। तीन दिन तक कन्याकुमारी में आध्यात्मिक यात्रा के बाद, मैं अभी दिल्ली जाने के लिए हवाई जहाज में आकर बैठा ही हूँ। काशी और अनेक सीटों पर मतदान चल ही रहा है। कितने सारे अनुभव हैं, कितनी सारी अनुभूतियां हैं, मैं एक असीम ऊर्जा का प्रवाह स्वयं में महसूस कर रहा हूँ।

वाकई, 2024 के इस चुनाव में, कितने ही सुखद संयोग बने हैं। अमृतकाल के इस प्रथम लोकसभा चुनाव में मैंने प्रचार अभियान 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम की प्रेरणास्थली मेरठ से शुरू किया। माँ भारती की परिक्रमा करते हुए इस चुनाव की मेरी आखिरी सभा पंजाब के होशियारपुर में हुई। संत रविदास जी की तपोभूमि, हमारे गुरुओं की भूमि पंजाब में आखिरी सभा होने का सौभाग्य भी बहुत विशेष है। इसके बाद मुझे कन्याकुमारी में भारत माता के चरणों में बैठने का अवसर मिला।

उन शुरुआती पलों में चुनाव का कोलाहल मन-मस्तिष्क में गूँज रहा था। रैलियों में, रोड शो में देखे हुए अनगिनत चेहरे मेरी आँखों के सामने आ रहे थे। माताओं-बहनों-बेटियों के असीम प्रेम का वो ज्वार, उनका आशीर्वाद, उनकी आंखों में मेरे लिए वो विश्वास, वो दुलार, मैं सब कुछ आत्मसात कर रहा था। मेरी आँखे नम हो रही थीं, मैं शून्यता में जा रहा था, साधना में प्रवेश कर रहा था।

कुछ ही क्षणों में राजनीतिक वाद विवाद, वार-पलटवार, आरोपों के स्वर और शब्द, वह सब अपने आप शून्य में समाते चले गए। मेरे मन में विरक्ति का भाव और तीव्र हो गया, मेरा मन बाह्य जगत से पूरी तरह अलिप्त हो गया। इतने बड़े दायित्वों के बीच ऐसी साधना कठिन होती है, लेकिन कन्याकुमारी की भूमि और स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा ने इसे सहज बना दिया। मैं सांसद के तौर पर अपना चुनाव भी अपनी काशी के मतदाताओं के चरणों में छोड़कर यहाँ आया था।

मैं ईश्वर का भी आभारी हूँ कि उन्होंने मुझे जन्म से ये संस्कार दिये। मैं ये भी सोच रहा था कि स्वामी विवेकानंद जी ने उस स्थान पर साधना के समय क्या अनुभव किया होगा, मेरी साधना का कुछ हिस्सा इसी तरह के विचार प्रवाह में बहा। इस विरक्ति के बीच, शांति और नीरवता के बीच, मेरे मन में निरंतर भारत के उज्जवल भविष्य के लिए, भारत के लक्ष्यों के लिए निरंतर विचार उमड़ रहे थे।

कन्याकुमारी के उगते हुए सूर्य ने मेरे विचारों को नई ऊँचाई दी, सागर की विशालता ने मेरे विचारों को विस्तार दिया और क्षितिज के विस्तार ने ब्रह्मांड की गहराई में समाई एकात्मकता, का निरंतर एहसास कराया। ऐसा लग रहा था जैसे दशकों पहले हिमालय की गोद में किए गए चिंतन और अनुभव पुनर्जीवित हो रहे हों।

कन्याकुमारी का ये स्थान हमेशा से मेरे मन के अत्यंत करीब रहा है। कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला स्मारक का निर्माण श्री एकनाथ रानाडे जी ने करवाया था। एकनाथ जी के साथ मुझे काफी भ्रमण करने का मौका मिला था। इस स्मारक के निर्माण के दौरान कन्याकुमारी में कुछ समय रहना, वहाँ आना-जाना, स्वभाविक रूप से होता था।

कश्मीर से कन्याकुमारी, ये हर देशवासी के अन्तर्मन में रची-बसी हमारी साझी पहचान हैं। ये वो शक्तिपीठ है जहाँ माँ शक्ति ने कन्या कुमारी के रूप में अवतार लिया था। इस दक्षिणी छोर पर माँ शक्ति ने उन भगवान शिव के लिए तपस्या और प्रतीक्षा की जो भारत के सबसे उत्तरी छोर के हिमालय पर विराज रहे थे। कन्याकुमारी संगमों के संगम की धरती है। हमारे देश की पवित्र नदियाँ अलग-अलग समुद्रों में जाकर मिलती हैं और यहाँ उन समुद्रों का संगम होता है। और यहाँ एक और महान संगम दिखता है- भारत का वैचारिक संगम।

यहाँ विवेकानंद शिला स्मारक के साथ ही संत तिरुवल्लूवर की विशाल प्रतिमा, गांधी मंडपम और कामराजर मणि मंडपम हैं। महान नायकों के विचारों की ये धाराएँ यहाँ राष्ट्र चिंतन का संगम बनाती हैं। इससे राष्ट्र निर्माण की महान प्रेरणाओं का उदय होता है। जो लोग भारत के राष्ट्र होने और देश की एकता पर संदेह करते हैं, उन्हें कन्याकुमारी की ये धरती एकता का अमिट संदेश देती है।

कन्याकुमारी में संत तिरुवल्लूवर की विशाल प्रतिमा, समुद्र से माँ भारती के विस्तार को देखती हुई प्रतीत होती है। उनकी रचना ‘तिरुक्कुरल’ तमिल साहित्य के रत्नों से जड़ित एक मुकुट के जैसी है। इसमें जीवन के हर पक्ष का वर्णन है, जो हमें स्वयं और राष्ट्र के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देता है। ऐसी महान विभूति को श्रद्धांजलि अर्पित करना भी मेरा परम सौभाग्य रहा।

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था- हर राष्ट्र को एक सन्देश देना होता है, एक लक्ष्य पूरा करना होता है, एक नियति तक पहुँचना होता है। (Every Nation Has a Message To deliver, a mission to fulfil, a destiny to reach.)

भारत हजारों वर्षों से इसी भाव के साथ सार्थक उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ता आया है। भारत हजारों वर्षों से विचारों के अनुसंधान का केंद्र रहा है। हमने जो अर्जित किया उसे कभी अपनी व्यक्तिगत पूँजी मानकर आर्थिक या भौतिक मापदण्डों पर नहीं तौला। इसीलिए, ‘इदं न मम’ यह भारत के चरित्र का सहज एवं स्वाभाविक हिस्सा हो गया है।

भारत के कल्याण से विश्व का कल्याण, भारत की प्रगति से विश्व की प्रगति, इसका एक बड़ा उदाहरण हमारी आज़ादी का आंदोलन भी है। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। उस समय दुनिया के कई देश गुलामी में थे। भारत की स्वतन्त्रता से उन देशों को भी प्रेरणा और बल मिला, उन्होंने आजादी प्राप्त की।

अभी कोरोना के कठिन कालखंड का उदाहरण भी हमारे सामने है। जब गरीब और विकासशील देशों को लेकर आशंकाएँ व्यक्त की जा रही थीं, लेकिन, भारत के सफल प्रयासों से तमाम देशों को हौसला भी मिला और सहयोग भी मिला।

आज भारत का गवर्नेंस मॉडल दुनिया के कई देशों के लिए एक उदाहरण बना है। सिर्फ 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर निकलना अभूतपूर्व है। प्रो-पीपल गुड गवर्नेंस, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट , एस्पिरेशनल ब्लॉक जैसे अभिनव प्रयोग की आज विश्व में चर्चा हो रही है। गरीब के सशक्तिकरण से लेकर लास्ट माइल डिलीवरी तक, समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को प्राथमिकता देने के हमारे प्रयासों ने विश्व को प्रेरित किया है।

भारत का डिजिटल इंडिया अभियान आज पूरे विश्व के लिए एक उदाहरण है कि हम कैसे तकनीक का इस्तेमाल गरीबों को सशक्त करने में, पारदर्शिता लाने में, उनके अधिकार दिलाने में कर सकते हैं। भारत में सस्ता डेटा आज सूचना और सेवाओं तक गरीब की पहुँच सुनिश्चित करके सामाजिक समानता का माध्यम बन रहा है। पूरा विश्व तकनीक के इस लोकतांत्रिकरण को एक शोध दृष्टि से देख रहा है और बड़ी वैश्विक संस्थाएँ कई देशों को हमारे मॉडल से सीखने की सलाह दे रही हैं।

आज भारत की प्रगति और भारत का उत्थान केवल भारत के लिए बड़ा अवसर नहीं है। ये पूरे विश्व में हमारे सभी सहयात्री देशों के लिए भी एक ऐतिहासिक अवसर है। G-20 की सफलता के बाद से विश्व भारत की इस भूमिका को और अधिक मुखर होकर स्वीकार कर रहा है। आज भारत को ग्लोबल साउथ की एक सशक्त और महत्वपूर्ण आवाज़ के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। भारत की ही पहल पर अफ्रीकन यूनियन G-20 ग्रुप का हिस्सा बना। ये सभी अफ्रीकन देशों के भविष्य का एक अहम मोड़ साबित हुआ है।

नए भारत का ये स्वरूप हमें गर्व और गौरव से भर देता है, लेकिन, साथ ही ये 140 करोड़ देशवासियों को उनके कर्तव्यों का अहसास भी करवाता है। अब एक भी पल गँवाए बिना हमें बड़े दायित्वों और बड़े लक्ष्यों की दिशा में कदम उठाने होंगे। हमें नए स्वप्न देखने हैं। अपने सपनों को अपना जीवन बनाना है, और उन सपनों को जीना शुरू करना है।

हमें भारत के विकास को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखना होगा, और इसके लिए ये जरूरी है कि हम भारत के अंतर्भूत सामर्थ्य को समझें। हमें भारत की शक्तियों को स्वीकार भी करना होगा, उन्हें पुष्ट भी करना होगा और विश्व हित में उनका सम्पूर्ण उपयोग भी करना होगा। आज की वैश्विक परिस्थितियों में युवा राष्ट्र के रूप में भारत का सामर्थ्य हमारे लिए एक ऐसा सुखद संयोग और सुअवसर है जहाँ से हमें पीछे मुड़कर नहीं देखना है।

21वीं सदी की दुनिया आज भारत की ओर बहुत आशाओं से देख रही है। और वैश्विक परिदृश्य में आगे बढ़ने के लिए हमें कई बदलाव भी करने होंगे। हमें रिफॉर्म को लेकर हमारी पारंपरिक सोच को भी बदलना होगा। भारत रिफॉर्म को केवल आर्थिक बदलावों तक सीमित नहीं रख सकता है। हमें जीवन में हर क्षेत्र में रिफॉर्म की दिशा में आगे बढ़ना होगा। हमारे रिफॉर्म 2047 के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप भी होने चाहिए।

हमें ये भी समझना होगा कि किसी भी देश के लिए रिफॉर्म कभी एकाकी प्रक्रिया नहीं हो सकती। इसीलिए, मैंने देश के लिए रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म का विज़न सामने रखा। रिफॉर्म दायित्व नेतृत्व का होता है। उसके आधार पर हमारी ब्यूरोक्रेसी परफॉर्म करती है और फिर जब जनता जनार्दन इससे जुड़ जाती है, तो ट्रांसफॉर्मेशन होते हुए देखते हैं।

भारत को विकसित भारत बनाने के लिए हमें श्रेष्ठता को मूल भाव बनाना होगा। हमें स्पीड, स्केल, स्कोप और स्टैंडर्ड्स, चारों दिशाओं में तेजी से काम करना होगा। हमें मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ क्वालिटी पर जोर देना होगा, हमें जीरो डिफेक्ट- जीरो इफेक्ट के मंत्र को आत्मसात करना होगा।

हमें हर पल इस बात पर गर्व होना चाहिए कि ईश्वर ने हमें भारत भूमि में जन्म दिया है। ईश्वर ने हमें भारत की सेवा और इसकी शिखर यात्रा में हमारी भूमिका निभाने के लिए चुना है।हमें प्राचीन मूल्यों को आधुनिक स्वरूप में अपनाते हुये अपनी विरासत को आधुनिक ढंग से पुनर्परिभाषित करना होगा।

हमें एक राष्ट्र के रूप में पुरानी पड़ चुकी सोच और मान्यताओं का परिमार्जन भी करना होगा। हमें हमारे समाज को पेशेवर निराशावादियों के दबाव से दबाव से बाहर निकालना है। हमें याद रखना है, नकारात्मकता से मुक्ति, सफलता की सिद्धि तक पहुँचने के लिए पहली जड़ी-बूटी है। सकारात्मकता की गोद में ही सफलता पलती है।

भारत की अनंत और अमर शक्ति के प्रति मेरी आस्था, श्रद्धा और विश्वास भी दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। मैंने पिछले 10 वर्षों में भारत के इस सामर्थ्य को और ज्यादा बढ़ते देखा है और ज्यादा अनुभव किया है। जिस तरह हमने 20वीं सदी के चौथे-पांचवे दशक को अपनी आज़ादी के लिए प्रयोग किया, उसी तरह 21वीं सदी के इन 25 वर्षों में हमें विकसित भारत की नींव रखनी है। स्वतंत्रता संग्राम के समय देशवासियों के सामने बलिदान का समय था। आज बलिदान का नहीं निरंतर योगदान का समय है।

स्वामी विवेकानंद ने 1897 में कहा था कि हमें अगले 50 वर्ष केवल और केवल राष्ट्र के लिए समर्पित करने होंगे। उनके इस आह्वान के ठीक 50 वर्ष बाद, 1947 में भारत आज़ाद हो गया। आज हमारे पास वैसा ही स्वर्णिम अवसर है। हम अगले 25 वर्ष केवल और केवल राष्ट्र के लिए समर्पित करें। हमारे ये प्रयास आने वाली पीढ़ियों और आने वाली शताब्दियों के लिए नए भारत की सुदृढ़ नींव बनकर अमर रहेंगे। मैं देश की ऊर्जा को देखकर ये कह सकता हूँ कि लक्ष्य अब दूर नहीं है। आइए, तेज कदमों से चलें…मिलकर चलें, भारत को विकसित बनाएँ।

(यह विचार पीएम मोदी ने 1 जून को कन्याकुमारी से दिल्ली लौटते समय विमान में शाम 4:15 बजे से 7 बजे के बीच लिखे हैं।)

यह लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, इस लिंक पर क्लिक करके आप मूल लेख पढ़ सकते हैं।

कोल्हापुर की जेल में मोहम्मद अली खान को कैदियों ने मार डाला, 1993 के बम धमाकों का था दोषी: RDX-हैंडग्रेनेंड लेकर आया था मुंबई, नाली का ढक्कन सिर पर मारकर हत्या

1993 मुंबई बम धमाका मामलों में सजा पाए हुए मोहम्मद अली खान उर्फ़ मुन्ना उर्फ़ भंवरलाल गुप्ता की साथी कैदियों ने हत्या कर दी। वह महाराष्ट्र के कोल्हापुर की कलाम्बा सेंट्रल जेल में बंद था। उसे साथी कैदियों ने पीट पीट कर मार दिया।

जानकारी के अनुसार, कलाम्बा जेल में सुबह कैदियों की गिनती के बाद नहाने के दौरान यह घटना हुई। मोहम्मद अली खान जब सुबह नहाने गया तो यहाँ उसकी साथी कैदियों से बहस हो गई, इसके बाद साथी कैदियों ने उस पर हमला किया। उससे मारपीट के बाद एक कैदी ने पास ही में नाली के ढक्कन से पीटना चालू कर दिया। यह ढक्कन उसके सर पर मारा गया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया, इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई।

मोहम्मद अली खान जेल के सर्कल 2 की बैरक 4 में बंद था। बताया गया कि नहाने को लेकर झगड़े से पहले उसका बैरक के अंदर इन्हीं हमलावरों से विवाद हुआ था। इसके बाद जब यह बाहर पहुँचा तो फिर से उसकी कहासुनी हुई और विवाद हो गया जिसके बाद यह हत्या हुई। मोहम्मद अली खान पर हत्या करने वालों के नाम प्रतीक उर्फ़ सुरेश पाटिल, दीपक नेताजी, संदीप शंकर चव्हाण, ऋतुराज विनायक इनामदार और सौरभ विकास हैं।

कोल्हापुर के एसपी महेंद्र पंडित ने इस मामले में बताया कि इन हमलावरों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने बताया, “मोहम्मद अली गुस्सैल स्वभाव का था और छोटी-छोटी बातों पर आरोपितों से झगड़ा करता था। पुराना कैदी होने के कारण वह बाकी कैदियों पर हुक्म चलाता था था और अगर उसकी बात नहीं मानते थे तो गाली-गलौज करता था। मैंने जेल का दौरा किया और आरोपितों से उस झगड़े के बारे में पूछताछ की जिसके कारण मुन्ना की मौत हुई।” पुलिस अब इस मामले में जाँच जारी है।

बताया गया कि मोहम्मद अली खान उर्फ़ मुन्ना मुर्फ़ भंवर लाल गुप्ता 1993 के बम धमाकों में हथियार और RDX सप्लाई करने के मामले में दोषी पाया गया था और इसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह 2013 में कलाम्बा जेल में लाया गया था। इससे पहले वह मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद था।

इंस्टाग्राम पोस्ट को इस्लाम विरोधी बता हिंदू के घर पर चढ़ गई ‘भीड़’, पत्थरबाजी के बाद 106 पर केस: 8 गिरफ्तार, MP के बुरहानपुर का मामला

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में सोशल मीडिया पर शेयर हुई एक पोस्ट को इस्लाम विरोधी बता मुस्लिम भीड़ ने जमकर हंगामा किया। हिंसक भीड़ पोस्ट करने वाले हिन्दू युवक के घर पर चढ़ गई, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इस दौरान पत्थरबाजी भी हुई। पुलिस ने दोनों पक्षों से कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। उपद्रव करने वाली भीड़ में शामिल लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। इलाके में पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है। घटना शनिवार (1 जून 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बुरहानपुर जिले के थाना गणपति नाका इलाके की है। शनिवार की रात यहाँ के रहने वाले शोहराबुद्दीन कुरैशी ने पुलिस में जतन नाम के हिन्दू युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में शोहराबुद्दीन ने जतन द्वारा इंस्टाग्राम पर शेयर की गई एक पोस्ट का जिक्र करते हुए उसे इस्लाम विरोधी बताया। पुलिस ने शिकायत पर जाँच शुरू की। लेकिन पुलिस जाँच का निष्कर्ष आए बिना ही मुस्लिम समुदाय के 100 से अधिक लोग उपद्रव पर उतारू हो गए। इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

उपद्रवी भीड़ की शक्ल में बुरहानपुर के ही इतवारा गेट इलाके में रहने वाले जतन के घर की तरफ बढ़ने लगे। जतन के घर पहुँच कर भीड़ हंगामा करते हुए उन्मादी नारे लगाने लगी। हंगामे की सूचना पर जतन के पक्ष में भी लोग जमा हो गए। दोनों तरफ से भीड़ जुटने की वजह से तनावपूर्ण हालत में पत्थरबाजी शुरू हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और भीड़ को तितर-बितर किया। बताया जा रहा है कि हमलावरों द्वारा पुलिस पर भी पत्थर फेंके गए थे। वीडियो में भीड़ को ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते सुना जा सकता है।

घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने वाले युवक जतन को गिरफ्तार कर लिया गया है। जतन पर IPC की धारा 295- A व 188 के तहत कार्रवाई की गई और उसे जेल भेज दिया गया है। वहीं जतन के घर बवाल करने पहुँची भीड़ पर भी पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। 6 नामजदों सहित कुल 106 हमलावरों पर IPC की धारा 147, 336, 353 व अन्य के तहत FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। हमलावरों को चिन्हित कर उनकी धरपकड़ के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

बॉर्डर पर तैनात BSF जवान को बांग्लादेश में खींचने की कोशिश, तस्करों ने हमला कर छीने हथियार और रेडियो सेट: अश्लील इशारे कर उकसाया, लोहे की रॉड से मारपीट

त्रिपुरा के सिपाहीजाला के कलमचेरा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर तैनात बीएसएफ जवान पर बांग्लादेशी उपद्रवियों ने हमला किया। बताया जा रहा है कि इस दौरान उनपर बांस के डंडों और लोहे की छड़ों से हमला किया गया। घटना में उन्हें गंभीर चोट आई। बाद में बांग्लादेश में बीएसएफ ने समकक्ष के साथ इस मुद्दे पर मीटिंग की और घटना का विरोध दर्ज कराया।

समाचार एजेंसी पर प्रकाशित खबर में इस घटना के संबंध में जानकारी दी गई- जिस समय यह घटना घटी उस समय बीएसएफ कांस्टेबल भोले भारत-बांग्लादेश सीमा पर चौकी ड्यूटी कर रहे थे और उन्हें बाड़ गेट को संचालित करने का काम सौंपा गया था। लगभग डेढ़ बजे बांग्लादेशी तस्करों का एक बड़ा समूह अवैध रूप से अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार कर गया और चीनी की तस्करी के इरादे से बाड़ लगाने वाले गेट के पास इकट्ठा हो गया। इसके अलावा, उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और ड्यूटी पर तैनात बीएसएफ कांस्टेबल को उत्तेजक भाषा और अश्लील इशारों से उकसाया।

इसके बाद बांग्लादेशी तस्करों ने कांस्टेबल भोले को घेर लिया और उसके साथ मारपीट की और उसे बांग्लादेश की ओर खींचने का प्रयास किया। इस दौरान उनसे उनका रेडियो और हथियार भी छीन लिया गया। कांस्टेबल किसी तरह अपने भोले भागने में सफल रहे, हालाँकि, उन पर बांस के डंडों और लोहे की छड़ों से हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

इस घटना के बाद समकक्ष के साथ कमांडेंट स्तर की फ्लैग मीटिंग हुई और बीएसएफ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। छीने गए हथियार और रेडियो सेट को बीजीबी ने बीएसएफ को वापस सौंप दिया। बीएसएफ भारत-बांग्लादेश सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के साथ मिलकर काम करना जारी रखता है।

गौरतलब है कि इससे पहले एक ऐसा ही मामला मार्च महीने में आया था। उस समय जवान मगरोली में अपनी ड्यूटी पर थे। उसी समय सुरक्षाकर्मियों ने 15-20 बदमाशों को सिर में सामान लादे भारत की तरफ से बांग्लादेश की सीमा में घुसते हुए देखा।

जवानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। उलटा जवानों को घेर लिया गया। इस मामले में बीएसएफ जवानों पर फायरिंग मामले में एक जवान घायल हो गया था। बाद में डॉक्टरों ने अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया इस दौरान जवानों से उन बांग्लादेशी बदमाशों ने उलझकर हथियार लेने की भी कोशिश की थी।