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INDI गठबंधन के साथी अरविन्द केजरीवाल की तरह अंतरिम जमानत लेने गए थे हेमंत सोरेन, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार: याचिका अवकाश बेंच को भेजा

शुक्रवार (17 मई, 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई अब 21 मई, 2024 को एक अवकाश बेंच करेगी। हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट से चुनाव प्रचार के आधार पर जमानत की माँग की थी।

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच के सामने लगाई गई थी। शुक्रवार को कोर्ट ने इस याचिका को लेकर कोर्ट ने सुनवाई करने से मना किया और कहा कि इसे 21 मई, 2024 को एक अवकाश बेंच के सामने लगाया जाए जहाँ इसकी सुनवाई होगी।

हेमंत सोरेन की इस याचिका को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से पेश हो रहे एडिशनल सोलिसिटर जनरल एसवी राजू ने और समय की माँग की, इस पर बेंच ने कहा कि अब इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह की जाए। इस दौरान एसवी राजू ने हेमंत सोरेन को अंतरिम जमानत का विरोध भी किया।

ED की तरफ से पेश हो रहे एसवी राजू ने कहा कि 4 चरणों का चुनाव पहले ही हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि सोरेन को 31 जनवरी, 2024 को ही गिरफ्तार कर लिया गया था और उनकी सामान्य जमानत के लिए लगाई गई याचिका भी खारिज हो चुकी है।

गौरतलब है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 31 जनवरी, 2024 को ED ने जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार कर लिया था। इसे पहले ED ने उनको कई समन भेजे थे जिन पर उन्होंने जवाब नहीं दिया था। इसके बाद ED ने उन्हें उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया था।

हेमंत सोरेन की चुनाव प्रचार सम्बन्धित अंतरिम जमानत की यह याचिका दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को मिली जमानत के बाद लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में ED द्वारा गिरफ्तार अरविन्द केजरीवाल को चुनाव प्रचार के लिए 1 जून तक की जमानत दे दी थी।

हेमंत सोरेन द्वारा लगाई गई याचिका में इसी आदेश का उदाहरण दिया गया था और कहा गया था कि उन्हें भी इसी आधार पर चुनाव प्रचार के लिए जमानत दी जाए। हालाँकि, यह मामला अब 21 मई को सुना जाएगा।

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कनाडा में खिसक रही है जमीन, सर्वे में आए चौंकाने वाले नतीजे: हिंदू और सिखों में ही नहीं, मुस्लिम और यहूदियों में भी है नाराजगी

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और उनकी लिबरल पार्टी की लोकप्रियता देश में लगातार घट रह है। उनसे सिर्फ मुस्लिमों और यहूदियों ही दूर नहीं जा रहे हैं, बल्कि सिख और हिंदुओं में भी उनकी लोकप्रियता घटी है। कनाडा में अगले साल अक्टूबर में चुनाव होने की उम्मीद है। ऐसे में इस तरह की रिपोर्ट आना, ट्रूडो सरकार के लिए बेहद परेशानी की बात है।

मुस्लिमो और यहूदियों के बीच ट्रूडो और लिबरल पार्टी की लोकप्रियता घटने की प्रमुख वजह गाजा में इजरायल और हमास के बीच जारी लड़ाई है। एंगस रीड इंस्टीट्यूट (एआरआई) के एक हालिया सर्वे में कहा गया है कि मुस्लिम और यहूदी मतदाता लिबरल पार्टी से दूर जा रहे रहे हैं। ये दोनों समुदाय कुछ समय पहले तक ट्रूडो और लिबरल पार्टी पर बेहद विश्वास करते थे।

इस समय ट्रूडो की लिबरल पार्टी पर 22 प्रतिशत हिंदू और 21 प्रतिशत सिख विश्वास करते हैं। वहीं, सिर्फ 41 प्रतिशत मुस्लिम ही लिबरल्स का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, यहूदियों का 42 प्रतिशत वोट कंटरवेटिव पार्टी को जा रहा है। साल 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 8.30 लाख हिंदू रहते हैं, जो कुल जनसंख्या का 2.30 प्रतिशत हैं। वहीं, सिख आबादी 7.70 लाख है।

‘द ग्लोब एंड मेल’ के लिए 28 अप्रैल से 1 मई के बीच कराए गए सर्वेक्षण में जस्टिन ट्रूडो के लिए नतीजे और भी बुरे हैं। सर्वे में भाग लने वाले 10 में से सात से अधिक कनाडाई लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री को सुनने से मूर्खता, क्रोध, रोष, घृणा और अयोग्यता जैसी भावनाएँ या प्रतिक्रियाएँ उनके अंदर उत्पन्न होती हैं।

सर्वेक्षण में भाग लेने वाले उत्तरदाताओं ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को 10 में से 3.7 की औसत विश्वसनीयता रेटिंग दी है। उनसे बेहतर स्थिति उनके विपक्षी दल कंटरवेटिव पार्टी के प्रमुख पियरे पोइलिवरे है। उनकी एवरेज क्रेडिबलिटी रेटिंग 10 में से 3.9 अंक है। हालाँकि, सर्वे में यह नतीजा भी निकल कर आया है कि ट्रूडो के साथ-साथ पियरे के प्रति भी लोगों में नराजगी बढ़ी है।

नैनो रिसर्च के संस्थापक निक नैनो ने एक साक्षात्कार में कहा, “लोग नहीं सोचते कि कोई भी विकल्प विश्वसनीय है। आज देश का मूड पियरे पोइलिवरे के दृष्टिकोण या स्वयं पियरे पोइलिव्रे से अधिक बदलाव को लेकर है।” एंगस रीड इंस्टीट्यूट द्वारा ट्रैक और संकलित किए गए 50 वर्षों के आँकड़ों के अनुसार, कनाडा के तीन मुख्य राजनीतिक नेता कभी इतने अलोकप्रिय नहीं रहे।

ट्रूडो इस बात पर अड़े हुए हैं कि वह अगले चुनाव में लिबरल्स का नेतृत्व वही करेंगे़। हालाँकि, इस सप्ताह जब उनसे पूछा गया कि यदि वह पद पर बने रहेंगे तो उनकी पार्टी की क्या संभावनाएँ होंगी तो उन्होंने इस प्रश्न को ओटावा “प्रक्रिया” कहानी के रूप में खारिज कर दिया और कहा कि उनका ध्यान कनाडाई लोगों के लिए परिणाम देने पर केंद्रित है।

मुंबई में गिरी थी जो होर्डिंग, उसके नीचे दबकर मरने वालों में अभिनेता कार्तिक आर्यन के आंटी-अंकल भी, आरोपित भावेश भिंडे गिरफ्तार: 16 की हुई थी मौत

मुंबई के घाटकोपर में तेज तूफ़ान के कारण गिरी एक विशाल होर्डिंग के नीचे दब कर मरने वालों में बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन के अंकल-आंटी भी शामिल थे। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। होर्डिंग लगाने वाली कम्पनी के मालिक भावेश भिंडे को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, घाटकोपर इलाके के छेदापुर में गिरी इस होर्डिंग की चपेट में मनोज चनसोरिया और अनीता चनसोरिया भी आ गए और उनकी मौत हो गई। मनोज रिटायर्ड एयर ट्रैफिक कंट्रोलर थे और हादसे के बाद गुरुवार (16 मई, 2024) को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसमें कार्तिक आर्यन भी शामिल हुए।

गौरतलब है कि सोमवार (13 मई,2024 ) को मुंबई में आए तेज आंधी-तूफ़ान के कारण एक विशाल होर्डिंग गिर गया था। यह होर्डिंग लगभग 250 टन के वजन वाला था। इसे 15 हजार वर्गफीट के क्षेत्रफल में लगाया गया था। जब यह लगा था, तब इसे लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया था।

इस घटना की जाँच के बाद बताया गया था कि यह होर्डिंग अवैध था। जब यह गिरा तो इसके नीचे बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। यह एक पेट्रोल पम्प के ऊपर गिरा था। इस होर्डिंग के नीचे कई गाड़ियाँ भी दब गईं। मृतकों और घायलों को ढूँढने के लिए 60 घंटे से अधिक का रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।

जब इस मामले की जाँच की गई तो पता चला कि यह होर्डिंग एग प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कम्पनी का है जिसका डायरेक्टर भावेश भिंडे है। यह जानकारी सामने आने के बाद भावेश भिंडे के खिलाफ मामला दर्ज किया था। भिंडे इस घटना के बाद फरार हो गया था।

मुंबई पुलिस ने भिंडे को राजस्थान के उदयपुर से गुरुवार (16 मई, 2024) को गिरफ्तार किया। मुलुंड को पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस की कई टीमें लगाई थी। भिंडे को पकड़ने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि वह लगातार अपनी पहचान भी छुपा रहा था। मुंबई में इस होर्डिंग के गिरने के बाद BMC ने अन्य सभी बड़ी होर्डिंग के ऑडिट करने के आदेश दिए हैं। BMC ने कई होर्डिंग हटाए भी हैं।

‘नरसिंह को रोकने के लिए उसके खाने में मिलाया था नशीला पदार्थ’: बृजभूषण शरण सिंह ने बताया क्यों उनके खिलाफ हुआ पहलवानों का एक गुट

उत्तर प्रदेश से बीजेपी सांसद और कुश्ती फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने बड़ा खुलासा किया है। बृजभूषण शरण सिंह ने शुक्रवार (17 मई 2024) को कर्नलगंज में अपने बेटे करण भूषण सिंह के समर्थन में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘नरसिंह यादव’ जैसे कमजोर घरों से आने वाले पहलवानों का साथ देने पर उनके खिलाफ विरोध शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि नरसिंह यादव के पक्ष में खड़े होने की वजह से ये पूरा बखेड़ा खड़ा किया गया।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “आज जो मेरा विरोध कर रहे हैं वह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि मैं कमजोर का साथी हूँ। नरसिंह यादव 5 साल पहले जो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था, वह जीत करके आया तो इन लोगों ने कहा हमारा ट्रायल कराइए, ट्रायल करने की परंपरा नहीं थी, हमने कहा ट्रायल नहीं करेंगे, वहीं से मेरा विरोध शुरू हुआ। क्योंकि, नरसिंह बनारस का रहने वाला है और गरीब परिवार का था। उसका हक ये लोग मारना चाहते थे। हमने मना कर दिया था। तब इन लोगों ने उसके खाने में धोखे से नशीला पदार्थ मिलाया, ताकि वो क्वॉलिफाई न कर पाए।”

सब लोग मेरे हाथ से डेढ़-डेढ़ लाख रुपए पाते रहे, अहसान धरा का धरा रह गया

पहलवानों के आरोपों पर बोलते हुए बृजभूषण ने कहा कि जब मैंने मिजोरम, नागालैंड, बिहार, बंगाल के रेसलर्स के हित में काम करना शुरू किया तो कुछ लोगों की नजरों में चढ़ गया। मैंने कमजोर प्रांत के खिलाड़ियों को संरक्षण प्रदान करना शुरू किया, उसी दिन से ये लोग मेरे विरोधी हो गए। ये सब मेरे हाथ से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये महीने पाते थे। कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ है जो डेढ़ लाख रुपये मेरे हाथ से न लिया हो, लेकिन सब एहसान धरा का धरा रह गया। इसीलिए तो नगर-नगर बदनाम हो गए।

किस बात का जिक्र कर रहे ब्रजभूषण शरण सिंह?

बृजभूषण शरण सिंह साल 2016 के रियो ओलंपिक के दौरान डोप टेस्ट में फंसे नरसिंह यादव की बात कर रहे हैं। नरसिंह यादव ने साल 2015 में लॉग वेगास में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में 4-12 से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए ब्रॉन्च मेडल जीता था। उन्होंने 2016 के ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई किया था। उन्हें ओलंपिक में उनके मुकाबले से ठीक 12 घंटे पहले डोपिंग केस में वाडा ने प्रतिबंध लगाते हुए उन पर 4 साल का बैन लगा दिया था। नरसिंह यादव ने आरोप लगाया कि उनके खाने में कुछ मिला दिया गया था। भारत की डोपिंग एजेंसी ने नरसिंह यादव को छूट दी थी और मामला कोर्ट में था, लेकिन वाडा ने नरसिंह यादव पर 4 साल का बैन लगाते हुए उन्हें ओलंपिक से बाहर कर दिया था।

सुशील कुमार थे बड़ी वजह?

दरअसल, साल 2012 के लंदन ओलंपिक में योगेश्वर दत्त ने 60 किलो वर्ग भार में, सुशील कुमार ने 66 किलो वर्ग भार में नरसिंह यादव ने 74 किलो वर्ग भार में हिस्सा लिया था। योगेश्वर ने ब्रॉन्च मेडल जीता था, और सुशील कुमार ने 66 किलो वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था। सुशील कुमार पर सेमीफाइनल मुकाबले में प्रतिद्वंदी पहलवान ने कान काटने का आरोप लगाया था।

हालाँकि लंदन ओलंपिक के अगले साल दिसंबर 2013 में इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एसोसिएटेड रेसलिंग स्टाइल्स (FILA) ने नियम बदले थे और रियो ओलंपिक के लिए भार वर्ग को बदल दिया था। इसके बाद योगेश्वर दत्त 60 किलो भार वर्ग से 65 किलो भार वर्ग में खेले, तो सुशील कुमार 74 किलो भार वर्ग में। यहीं से उपरोक्त विवाद की नींद पड़ी थी। चूँकि नरसिंह 74 किलो भार वर्ग में खेलते थे, ऐसे में सुशील कुमार की दावेदारी के बाद साजिशों का दौर शुरू हो गया और फिर आया साल 2015-16 का वो समय, जब नरसिंह यादव के रेसलिंग करियर को खत्म कर दिया गया और आगे सुशील कुमार ही 74 किलो भार वर्ग में हिस्सा लेने लगे।

नरसिंह यादव के साथ हुआ था ये खेल?

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि नरसिंह यादव 2016 के रियो ओलंपिक गेम्स के लिए क्वॉलिफाई कर चुके थे, लेकिन भारत में उनके साथ खेल हो गया था। दरअसल, सुशील कुमार और उनके ग्रुप के लोगों ने ओलंपिक के लिए ट्रायल्स की माँग की थी, जिसमें सुशील कुमार और नरसिंह की कुश्ती कराई जानी थी, इसके बाद ही रियो ओलंपिक में पहलवान के चयन की बात कही जा रही थी, जबकि ऐसा कोई नियम नहीं था।

ऐसे में कुश्ती फेडरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह अड़ गए और सुशील कुमार ग्रुप की तरफ से पड़ रहे दबावों को दरकिनार करते हुए उन्होंने ट्रायल्स की अनुमति नहीं दी और रियो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कर चुके नरसिंह यादव को ही रियो ओलंपिक के लिए भेजा गया। इसके खिलाफ सुशील कुमार ने दिल्ली हाई कोर्ट का भी रुख किया, लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, और नरसिंह यादव का रियो ओलंपिक में जाना पक्का हो गया।

रियो में क्यों लगाया गया बैन?

नरसिंह यादव को 18 अगस्त 2016 को वाडा ने बैन कर दिया। वो भी उनकी ओलंपिक बाउट से सिर्फ 12 घंटे पहले। इसके लिए भारत की तरफ से अपील की गई और 4 घंटे तक सुनवाई की गई, लेकिन उन्हें बैन कर दिया गया और रियो ओलंपिक से बाहर भेज दिया गया। इसकी नींव पड़ी थी, 25 जून 2016 और 5 जुलाई 2016 को हुए डोप टेस्ट के नतीजों के सामने आने के बाद, जिसमें नरसिंह यादव पर प्रतिबंधित ड्रग्स लेने के आरोप लगे।

नरसिंह यादव ने आरोप लगाया कि उनके खाने में धोखे से कुछ मिलाया गया था। उनके साथ साजिश की गई थी। इस मामले की सीबीआई जाँच भी की गई। नरसिंह यादव के आरोप शुरुआती जाँच में सही पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें रियो ओलंपिक में भेजा गया था, लेकिन वाडा ने नरसिंह यादव को कोई छूट नहीं दी थी और उनपर 4 साल का बैन लगा दिया गया। नरसिंह यादव ने साल 2020 में कहा था कि उनके करियर को जान बूझकर साजिश के तहत खत्म किया गया था। बीते कुछ समय के घटनाक्रमों को देखकर कड़ियों को देखें, तो बहुत सारी कड़ियाँ बृजभूषण के बयान से जुड़ती नजर आ रही हैं।

कौन है ‘हिटमैन’, स्वाति मालीवाल को क्यों करना चाहता है बदनाम? CM केजरीवाल के घर जिस दिन हुई मारपीट उसका पहला Video आया सामने, दिल्ली पुलिस लेगी संज्ञान

एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। कुछ मीडिया संस्थानों ने भी इसे जारी किया है। कहा जा रहा है कि यह वीडियो 13 मई, 2024 का है जिस दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के आवास में AAP महिला सांसद स्वाति मालीवाल बिभव कुमार पर है।

IANS द्वारा जारी किए गए इस वीडियो में कुछ सुरक्षाकर्मी दिखते हैं और एक महिला की आवाज सुनाई पड़ती है। इस वीडियो में सुरक्षाकर्मी उसे बाहर चलने को कहते हैं। महिला 112 पर फ़ोन करने की बात भी कहती है। महिला उन पर इस बात के लिए जोर डालती है कि पुलिस को अंदर आने दिया जाए। सुरक्षाकर्मी उसे बताते हैं कि पुलिस उस परिसर के भीतर नहीं आएगी।

महिला इन सुरक्षाकर्मियों को उनकी नौकरी खाने की बात करती है। इस दौरान सुरक्षाकर्मी लगातार उससे बाहर चलने को कहते हैं। महिला इस दौरान बाहर ना जाने पर अड़ जाती है। एक सुरक्षाकर्मी कहता इस दौरान कहता है कि आप पढ़े लिखे लोग हैं आपके साथ ऐसा नहीं होगा। वीडियो कुल 52 सेकंड का है। वीडियो में एक महिला किसी को गंजा भी कहती है।

बताया जा रहा है कि वीडियो में बात कर रही महिला स्वाति मालीवाल हैं और यह वीडियो उनके साथ CM आवास पर हुई मारपीट की घटना के बाद का है। एक अन्य वीडियो भी टाइम्स नाउ ने जारी किया है जिसमें मारपीट के बाद स्वाति मालीवाल के सोफे पर बैठने की बात कही जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस इन वीडियो का संज्ञान लेगी।

स्वाति मालीवाल ने इन वीडियो के ऊपर एक ट्वीट करके जवाब दिया है। उन्होंने लिखा है, “हर बार की तरह इस बार भी इस राजनीतिक हिटमैन ने ख़ुद को बचाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। अपने लोगों से ट्वीट्स करवा के, आधी बिना संदर्भ की वीडियो चलाके इसे लगता है ये इस अपराध को अंजाम देके ख़ुद को बचा लेगा।”

आगे उन्होंने लिखा, “कोई किसी को पीटते हुए वीडियो बनाता है भला? घर के अंदर की और कमरे की CCTV फ़ुटेज की जाँच होते ही सत्य सबके सामने होगा। जिस हद तक गिर सकता है गिर जा, भगवान सब देख रहा है। एक ना एक दिन सब की सच्चाई दुनिया के सामने आएगी।”

स्वाति मालीवाल ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को एक FIR भी दर्ज करवाई है। इस FIR में उन्होंने कहा है कि 13 मई, 2024 को वह CM केजरीवाल से मिलने के लिए उनके घर में प्रतीक्षा कर रहीं थी। इसी दौरान उनके पूर्व निजी सचिव बिभव कुमार वहाँ आए और उनके साथ मारपीट चालू कर दी।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि उन्हें 7-8 थप्पड़ मारे गए, उनकी शर्ट खोल दी गई, उनको सोफे से खींचा गया और जमीन पर गिराकर लातों से मारा गया। उनका मेडिकल भी करवाया गया है। स्वाति मालीवाल की FIR के आधार पर दिल्ली पुलिस बिभव कुमार की तलाश कर रही है।

PM मोदी ने रमजान में गाजा पर बंद करवाई थी बमबारी, विशेष दूत भेजा था इजरायल: इंटरव्यू में किया खुलासा, कहा- यहाँ मुझे मुस्लिमों को लेकर घेरते हैं

तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले विपक्षी दल हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुस्लिम विरोधी दिखाने की कोशिश करते हैं। हालाँकि, इससे अलग पीएम मोदी मुस्लिमों की बेहतरी के लिए लगातार कदम उठाते रहे हैं। इस बीच पीएम मोदी ने खुलासा किया है कि उन्होंने गाजा में कार्रवाई के दौरान अपने ‘विशेष दूत’ को इजरायल भेजा था, ताकि रमजान में संघर्ष विराम लागू किया जा सके।

इंडिया टुडे/आजतक को दिए इंटरव्‍यू में पीएम मोदी ने कहा, “अभी रमजान का महीना था। तब अपने विशेष दूत को इजरायल भेजा। इजरायल के पीएम और राष्‍ट्रपति सबसे मिलना था। मैंने कहा कि इन्‍हें समझाइए कि कम से कम रमजान में गाजा में बम न गिराएँ और उन्‍होंने इसका पालन करने का भरपूर प्रयास किया।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “मित्र भारत के अनुरोध को इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्‍याहू मान गए और उन्‍होंने संघर्ष विराम को मंजूरी दे दी। यहाँ तो मुझे आप मुस्लिमों को लेकर घेर लेते हैं, लेकिन मोदी ने गाजा में रमजान के महीने में बम हमले को रुकवाया। हालाँकि, मैं इसकी पब्लिशिटी नहीं करता हूँ।”

पीएम मोदी जिस विशेष दूत की बात कर रहे हैं, वह राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल हैं। अजीत डोवाल ने रमजान से ठीक पहले 11 मार्च 2024 को इजरायल की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्‍याहू से मुलाकात की थी और उनसे क्षेत्रीय विकास पर चर्चा की थी।

इसके साथ ही अजीत डोवाल ने गाजा में मानवीय सहायता की तत्काल जरूरत पर जोर दिया था और इसे पूरा करने के लिए अनुरोध किया था। गाजा में उन दिनों खाद्यान की भारी कमी हो गई थी। इजरायल के पीएम ने सोशल मीडिया एक्‍स पर पोस्‍ट करके कहा भी था कि उन्‍होंने भारतीय राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मुलाकात की है।

पीएम मोदी इस दौरान यूएई, कतर, सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन के नेताओं के साथ भी संपर्क में थे। इजरायल-हमास युद्ध से पहले पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी पुतिन और जेलेंस्‍की से बात की थी और कुछ समय के लिए संघर्ष विराम कराया था। संघर्ष विराम के दौरान भारत ने वहाँ फँसे अपने छात्रों को निकाला था। इसकी दुनिया भर में तारीफ हुई थी।

इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी ने आगे कहा कि विपक्ष की पिछली सरकारें धर्मनिरपेक्ष होने का ढोंग रचती थीं। उन्होंने कहा, “हमारे यहाँ पहले यह फैशन था कि इजरायल जाओ, फिलिस्तीन जाओ और सेक्यूलरिज्म का फैशन करके वापस आ जाओ। मैंने कहा कि मुझे ऐसा कुछ नहीं करना है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “मैंने निर्णय लिया कि मैं सीधे इजरायल जाऊँगा, सीधे वापस आऊँगा। मुझे ये ढोंग करने की जरूरत नहीं है। और मैं इजरायल गया भी। मैंने कहा कि अगर मैं फिलिस्तीन जाऊँगा तो मेरी वो यात्रा बस फिलिस्तीन की ही यात्रा होगी।”

पीएम मोदी ने कहा, “मजे की बात देखिए। जब मैं फिलिस्तीन गया तो बात आई कि इससे आगे हेलिकॉप्टर से जाना होगा। जॉर्डन के राष्ट्रपति जी को पता चला कि मैं जॉर्डन से होकर फिलिस्तीन जाने वाला हूँ तो वो जॉर्डन के प्रधानमंत्री मोहम्मद साहब के सीधे वारिस हैं, उन्होंने कहा कि मोदीजी आप ऐसे नहीं जा सकते, आप मेरे मेहमान हैं। मेरे ही हेलिकॉप्टर में आप जाएँगे। मेरे घर खाना खाकर जाएँगे।”

अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने आगे कहा, “मैं उनके घर गया। वहाँ खाना खाया। मैं जॉर्डन के हेलिकॉप्टर से फिलिस्तीन जा रहा था तो इजरायल हमें हवा में सुरक्षा दे रहा था। इन तीनों देशों की दुनिया अलग है, लेकिन मोदी के लिए आसमान में सब साथ थे।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं मानता हूँ ये सब तब होता है जब आपके इरादे नेक हों। आपके प्रति विश्वास हो। मैं चोरी छिपे या अमेरिका को कुछ बताकर नहीं करता। मुझे उससे कुछ पूछना नहीं होता है। रूस से अगर मेरे देश को सस्ता पेट्रोल चाहिए तो मैं लूँगा। मैं छिपाता नहीं हूँ और अपनी शर्तों पर देश को चलाता हूँ।”

लंदन में समलैंगिक होना अपराध नहीं, इसलिए जाते हैं शाहरुख खान और करण जौहर: महिला सिंगर का दावा, कहा- गे एनकाउंटर में मेरे पूर्व पति भी थे शामिल

बॉलीवुड की दुनिया के किंग खान कहे जाने वाले शाहरुख खान और मशहूर डायरेक्टर करण जौहर को लेकर एक गायिका का चौंकाने वाला दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ये दावा सुचित्रा नाम की तमिल गायिका ने किया है। वीडियो में वो शाहरुख और करण को गे कहती सुनाई पड़ रही हैं।

सुचित्रा इस वीडियो में बताती हैं कि उनके पूर्व पति समलैंगिक हैं। उन्हीं की बात को आगे करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार उनके पूर्व पति कार्तिक कुमार का करण जौहर और शाहरुख खान के साथ गे एनकाउंटर हुआ था।

वायरल वीडियो में सुचित्रा कहती सुनाई पड़ती हैं, “एक बार जब कार्तिक लंदन ट्रिप पर थे, तो उनकी मुलाकात करण जौहर और शाहरुख खान से हुई और वे बार से भरी एक गली में घूमे। वे क्रॉस-ड्रेस्ड (दूसरे जेंडर के कपड़े में) थे। यह कुछ ऐसा है जो करण और शाहरुख अक्सर विदेश जाने पर करते हैं। वे इस तरह के कपड़े पहनकर गे एरिया में जाते हैं। वे उस माहौल में घुलमिल जाते हैं और रात का मजा लेते हैं।”

बता दें कि एक तरफ जहाँ सुचित्रा की वीडियो वायरल होने के बाद लोग करण जौह और शाहरुख खान पर अपनी मिलीजुली प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं तो वहीं इस बीच शाहरुख की साल 2010 की एक वीडियो क्लिप भी वायरल है जिसमें उन्होंने एक पत्रकार के सवाल का तंज भरा जवाब देते हुए कह दिया था- “हाँ हम दोनों साथ सोते है और ज्यादातर समय एक दूसरे से प्यार करते रहते हैं।”

इसके अलावा सुचित्रा की वीडियो को देख उनके एक्स हसबैंड ने भी इस मुद्दे पर कहा है कि अगर वह समलैंगिक होते, तो इसे गर्व से स्वीकार करते। कार्तिक ने कहा, “अगर मैं समलैंगिक हूँ, तो मुझे समलैंगिक होने पर शर्म नहीं आएगी। मुझे किसी भी तरह का यौन संबंध रखने पर बहुत गर्व होगा।”

‘साली तेरी औकात क्या है, नीच औरत, ऐसी जगह गाड़ेंगे पता तक नहीं चलेगा’: पीरियड में थीं स्वाति मालीवाल, फिर भी टांगों के बीच मारता रहा विभव कुमार

AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ दिल्ली CM केजरीवाल के आवास पर हुई मारपीट के मामले में FIR सामने आई है। इसमें स्वाति मालीवाल ने बताया है कि कैसे उनके साथ केजरीवाल के पूर्व निजी सचिव बिभव कुमार ने बर्बरता से मारपीट की। उन्होंने इस FIR में बताया है कि उन्हें बर्बरता से पीटा गया और जान से मार देने तक की धमकी दी गई।

FIR में स्वाति मालीवाल ने बताया कि वह 13 मई, 2024 की सुबह केजरीवाल से मिलने उनके घर पहुँची थीं। यहाँ केजरीवाल से मिलने के लिए उन्हें थोड़ी देर प्रतीक्षा करने को कहा गया था। स्वाति मालीवाल ने बताया कि वह CM केजरीवाल की प्रतीक्षा ड्राइंग रूम में कर रहीं थी तभी वहाँ बिभव कुमार आ गए।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि बिभव कुमार ने आते ही उन पर चिल्लाना और गालियाँ देना चालू कर दिया। स्वाति ने कहा कि उन्होंने बिभव से शांत होने की बात कही लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल से कहा, “तू कैसे हमारी बात नहीं मानेगी? कैसे नहीं मानेगी? साली तेरी औकात क्या है कि हमको ना करदे। समझती क्या है खुद को नीच औरत। तुझको हम सबक सिखाएँगे।” बिभव कुमार इसके बाद स्वाति मालीवाल पर हमलावर हो गए।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि उन्हें बिभव कुमार ने उन्हें एक साथ 7-8 थप्पड़ मारे। जब स्वाति मालीवाल ने इसका विरोध किया और उन्हें पीछे धकेला तो बिभव कुमार उन पर टूट पड़े। बिभव ने मालीवाल को खींचा और उनकी शर्ट ऊपर कर दी। इसके बाद उनकी शर्ट के बटन खुल गए। मालीवाल ने बताया कि खींचे जाने के कारण उनका सर मेज से टकरा गया और वह स्वयं जमीन पर गिर गईं। बिभव कुमार ने इसके बाद उनकी छाती समेत पूरे शरीर पर लातें बरसाईं।

स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि जब उनके साथ मारपीट हुई तब उन्हें पीरियड्स आ रहे थे और इसको लेकर उन्होंने बिभव कुमार से छोड़ देने की अपील भी की। हालाँकि, बिभव नहीं माने और स्वाति को पीटते रहे। स्वाति ने बताया कि इस दौरान उनकी मदद के लिए कोई नहीं आया। स्वाति जब किसी तरह अपने आप को छुड़वाने में सक्षम हुईं तो उन्होंने पुलिस को फ़ोन किया। फोन को लेकर भी बिभव कुमार ने उन्हें गालियाँ दी।

बिभव कुमार ने उनसे कहा, “कर ले तुझे जो कुछ करना है। तू हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। तेरी हड्डी पसली तुडवा देंगे और ऐसी जगह गाड़ेंगे किसी को पता भी नहीं चलेगा।” इसके बाद बिभव कुमार ने CM आवास के सुरक्षाकर्मियों के जरिए उन्हें बाहर फिंकवा दिया। स्वाति मालीवाल ने बताया कि वह इसके बाद किसी तरह पुलिस थाने पहुँचीं लेकिन मामले को राजनीतिक रंग ना दिया जाए इसलिए उन्होंने उस दिन इस मामले में FIR दर्ज नहीं करवाई।

स्वाति मालीवाल ने FIR में बताया है कि इस मारपीट के कारण वह गंभीर रूप से चोटिल हो गई हैं और उनके शरीर के कई हिस्से दर्द कर रहे हैं। उनसे चला भी नहीं जा रहा है। उन्होंने इस मामले में दिल्ली पुलिस से जाँच करके कार्रवाई की माँग की है। मालीवाल के बयान के आधार पर पुलिस ने बिभव कुमार पर धारा 308, 341, 323, 354बी, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इससे पहले इस मामले में दिल्ली पुलिस की एक टीम स्वाति मालीवाल के घर भी पहुँची थी।

स्वाति मालीवाल का इस घटना के बाद मेडिकल भी करवाया गया है। दिल्ली पुलिस वर्तमान में बिभव कुमार को तलाश रही है। बिभव को आखिरी बार 16 मई, 2024 को लखनऊ में अरविन्द केजरीवाल के साथ देखा गया था। मामले में CM केजरीवाल की चुप्पी पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

असम में ब्राह्मण छात्र को परीक्षा देने से पहले जनेऊ उतारने को किया मजबूर, कॉलेज प्रशासन का आरोपों से इनकार

असम में बुधवार (15 मई) को होने वाली कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जामिनेशन (CUET) परीक्षा में बैठने से पहले एक हिंदू छात्र को अपना जनेऊ उतारने के लिए मजबूर किया गया। पीड़ित छात्र की पहचान धृतिराज बशिष्ठ के रूप में हुई है। बशिष्ठ अपनी माँ के साथ परीक्षा केंद्र पर गया था। घटना सामने आने के बाद ब्राह्मण संगठन ने कॉलेज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है।

घटना असम के बजाली जिले के भवानीपुर आंचलिक कॉलेज स्थित एक परीक्षा केंद्र पर हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदू छात्र से कहा गया कि अगर वह परीक्षा में बैठना चाहता है तो उसे अपना जनेऊ उतार देना होगा। मामले के बारे में बात करते हुए पीड़िता की माँ ने कहा, “मुझे उच्च अधिकारी को सूचित करने के लिए कॉलेज में घुसने की अनुमति भी नहीं दी गई।”

छात्र की माँ ने आगे बताया कि उनके बेटे बसिष्ठ को भवानीपुर आंचलिक कॉलेज के गेट पर रोका गया और अधिकारियों ने उसके पहचान पत्र की जाँच की। जब पीड़ित को पता चला कि उसने इस शर्ट के नीचे जनेऊ पहना हुआ है तो उसे अंदर घुसने नहीं दिया गया। उसके बाद बशिष्ठ ने अपनी माँ को फोन किया और कहा कि कॉलेज के अधिकारी उसे अपना जनेऊ उतारने के लिए कहा है।

उनकी माँ के अनुसार, कॉलेज प्रशासन ने दावा किया कि उनके जनेऊ में एक धातु की वस्तु पाई गई थी। महिला ने न्यूज लाइव को बताया, “पवित्र धागे के बिना, वह खा नहीं सकता, बोल नहीं सकता या अपनी आस्था का अभ्यास नहीं कर सकता। एक ब्राह्मण के रूप में हमारी पहचान प्राथमिक है।” महिला ने वह जनेऊ भी दिखाया, जिसे उतारने के लिए मजबूर किया गया था।

ब्राह्मण संगठन करेगा कानूनी कार्रवाई, कॉलेज ने आरोपों से किया इनकार

इस घटना की जानकारी मिलने पर अखिल भारत ब्राह्मण मोर्चा ने आंदोलन शुरू किया है और भवानीपुर आंचलिक कॉलेज प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। इस बीच, कॉलेज ने हिंदू लड़के पर जनेऊ उतारने के लिए दबाव डालने की बात से इनकार किया है। कॉलेज के प्रिंसिपल मानस कुमार चक्रवर्ती ने दावा किया कि क़ॉलेज के खिलाफ लगाए जाने वाले आरोप सही नहीं हैं।

मानस कुमार चक्रवर्ती ने कहा कि बशिष्ठ को केवल जनेऊ में बँधी धातु की अंगूठी हटाने के लिए कहा गया था, न कि जनेऊ को पूरी तरह से हटाने के लिए। मानस कुमार चक्रवर्ती ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पीड़ित को अपना जनेऊ नहीं हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन उसने उनके निर्देश का पालन नहीं किया और पूरा जनेऊ निकाल दिया।

मानस चक्रवर्ती ने कहा, “हम NTA के निर्देशों का पालन कर रहे थे, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि परीक्षा हॉल के अंदर किसी भी धातु की वस्तु की अनुमति नहीं है। निर्देशों के अनुसार, हमने छात्र से अपने जनेऊ से अंगूठी निकालने को कहा, लेकिन उसने जनेऊ निकालकर अपनी माँ को सौंप दिया।”

केरल का वामपंथी टेरर मॉडल: विजयन सरकार के 6 साल में 431 बम हमले, पर सजा किसी को नहीं, अधिकांश केस बंद क्योंकि CPIM से जुड़े हैं आरोपित

केरल में साल 2016 से सीपीआई-एम की कम्युनिष्ट सरकार है। कम्युनिष्ट जिस केरल मॉडल का हौव्वा खड़ा करते हैं, उस केरल में जून 2016 से अगस्त 2022 तक के मौजूदा आँकड़ों में सीपीआई-एम के राज में 431 बम धमाके हो चुके हैं। खास बात ये है कि वामपंथी सरकार के 6 सालों में 431 मामलों में से किसी एक मामले में भी आतंकियों को कोई सजा नहीं हो पाई।

ऑनलाइन मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल पुलिस ने 431 बम धमाकों में से सिर्फ 162 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है। यही नहीं, जाँच में सबूतों का हवाला देते हुए 205 मामलों को तो बंद ही कर दिया गया, जबकि 2 अन्य मामलों को सबूत न मिलने का हवाला देकर बंद कर दिया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केरल पुलिस ने ज्यादातर मामलों की जाँच नहीं की क्योंकि आरोपित सत्ताधारी पार्टी सीपीआई-एम से जुड़े थे।

मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, “अधिकाँश मामलों में शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने जाँच टीमों पर दबाव डाला कि वो केस में ढंग से जाँच न करें और न ही सबूत प्रस्तुत करें।” आतंकी हमलों के अलावा इस रिपोर्ट में ‘गुंडा हमलों’ की भी जानकारी दी गई है। गुंडा हमलों के 150 मामलों में से 142 में चार्जशीट दाखिल कर दी गई, जिसमें 6 को बरी कर दिया गया जबकि सिर्फ 5 अपराधियों को सजा हुई।

केरल में ‘गुंडा‘ शब्द का इस्तेमाल उन मामलों में किया जाता है, जिसमें कोर्ट ने किसी को दोषी पाया हो या केरल के सक्षम अधिकारी द्वारा केरल असामाजिक गतिनिधियाँ (रोकथाम) अधिनियम-2007 के केस में उन्हें शामिल पाया गया हो। ऐसे ममालों में सिर्फ 10 मामले सामने आए, जिसमें आरोपित बम बनाते पकड़े गए, जिसमें से 5 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि 2 मामलों को बंद कर दिया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है, “टॉप पुलिस अधिकारियों ने इन मामलों को दबाने में दिलचस्पी दिखाई और जाँच टीमों पर दबाव बनाया कि वो कोर्ट में पुख्ता सबूत न पेश करें।”

इस तरह का एक हालिया मामला सामने आया है, जिसमें केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक एसआई सभी हिस्ट्रीशीटरों तक पहुँचा और उनसे पुलिस स्टेशन में आकर रजिस्टर पर साइन करने का ‘अनुरोध’ किया।

ये पूरा घटनाक्रम लोकसभा चुनावों के बीच सामने आया है, जहाँ सीपीआई-एम केरल में सुशासन का दावा करती है और अपने दावों को सही ठहराने के लिए भ्रामक ‘केरल मॉडल‘ का प्रचार करती है। बता दें कि मौजूदा समय में केरल राज्य गहने फाइनेंसियल क्राइसिस में है, जहाँ इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते मामलों के बीच, सरकार अपने सबसे बड़े वोट बैंक पर ठोस कार्रवाई से पीछे हट रही है। यही वजह है कि राज्य की हालत और भी खराब होती जा रही है।