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बाल्टीमोर हादसे के 2 महीने बाद भी फँसे हैं 22 भारतीय क्रू मेंबर, फोन भी छीना गया: वीजा से जुड़ी समस्याओं की वजह से नहीं लौट पा रहे स्वदेश

अमेरिका में 2 महीने पहले बाल्टीमोर में एक जहाज पुल से टकराकर वहीं फँस गया था। इस हादसे के 2 माह बीत जाने के बाद भी मर्चेट शिप ‘डॉली’ अब भी वहीं फँसा हुआ है। उस जहाज के साथ ही उसका चालक दल भी उसी पर फँसा हुआ है। उस चालक दल के 22 सदस्य अब भी जहाज पर फँसे हुए हैं। यहाँ तक कि उस क्रू के सभी मेंबर्स के पास फोन तक नहीं है, वो भी उनसे ले लिए गए हैं। बताया जा रहा है कि वीजा से जुड़ी दिक्कतों के चलते सभी लोग वहाँ पर फँसे हुए हैं।

बता दें कि 26 मार्च 2024 को डॉली नाम का जहाज फ्रांसिस स्कॉट ब्रिज से टकरा गया था। इस टक्कर से पुल टूट गया था और पटाप्स्को नदी में गिर गया। इस जहाज पर कुल 22 लोग सवार थे, जिसमें एक व्यक्ति श्रीलंका से था और बाकी के लोग भारत से। इस हादसे के बाद जहाज की बिजली गुम हो गई और जहाज आगे बढ़ने में नाकाम रहा। लेकिन अब जानकारी सामने आ रही है कि पूरा का पूरा क्रू मेंबर उसी जहाज पर फँसा हुआ है। न तो वो बाहर आ पा रहा है और न ही उस क्रू टीम के पास कोई मोबाइल फोन है।

रिपोर्टों में कहा गया है कि चालक दल वीजा प्रतिबंधों, अपेक्षित तट पास की कमी और राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (एनटीएसबी) और एफबीआई की जाँच की वजह से उन्हें जाने नहीं दिया गया है।

द इंडिपेंडेंट से बात करते हुए सिनर्जी मरीन ग्रुप के प्रवक्ता डेरेल विल्सन ने कहा कि एफबीआई ने इस हादसे की जाँच के दौरान क्रू मेंबर्स के फोन जब्त कर लिए थे। हालाँकि उनके फोन क्यों जब्त किए गए, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है और न ही ये बात पता चल पाई है कि उनके फोन कब लौटाए जाएँगे। उन्होंने कहा कि ये पता नहीं चल पा रहा है कि अभी तक क्रू मेंबर्स को जहाज पर क्यों रोक कर रखा गया है।

बाल्टीमोर इंटरनेशनल सीफरर्स सेंटर के कार्यकारी निदेशक जोशुआ मेसिक ने कहा कि क्रू मेंबर ऑनलाइन बैंकिंग तक नहीं कर सकते। वो अपने बिलों का भुगतान भी नहीं कर सकते न ही को किसी से संपर्क कर सकते हैं। वो लोग पूरी दुनिया से अलग-थलग हैं। ये बेहद दुखद स्थिति है। 11 मई को एक संयुक्त बयान में सिंगापुर मैरीटाइम ऑफिसर्स यूनियन और सिंगापुर ऑर्गनाइजेशन ऑफ सीमेन ने भी फँसे हुए क्रू मेंबर्स को लेकर चिंता जताई थी।

गौतरलब है कि 26 मार्च 2024 को बाल्टीमोर के फ्रांसिस स्कॉट ब्रिज से डॉली नाम का मर्चेंट शिप टकरा गया था। इस धमाके की वजह से जहाज में भी थोड़ी आग लग गई थी और पुल भी छतिग्रस्त होकर गिर गया था। इस जहाज पर 22 लोगों का क्रू मेंबर था, लेकिन इसे स्थानीय कैप्टन चला रहे थे। ये शिप बाल्टीमोर बंदरगाह से दूर जा रहा था।

कानपुर में अंकित बनकर फैज मलिक ने हिंदू नाबालिग से की रेप, ब्लैकमेल कर मुस्लिम बनने का डालता दबाव: MP में आशु बन जनजातीय महिला की आबरू लूटता रहा सुलेमान

कानपुर में फैज मलिक नाम के मुस्लिम युवक ने एक नाबालिग हिंदू लड़की को गलत पहचान के साथ अपने जाल में फँसाया और फिर उसके धर्म परिवर्तन की कोशिश की। फैज मलिक ने लड़की के हाथों को कई जगह से काटा भी है। लड़की अनाथ है। उसके माता-पिता नहीं हैं। लव जिहाद का एक अन्य मामला एमपी से सामने आया है, जहाँ सीहोर की एक विधवा जनजातीय महिला के साथ सुलेमान ने आशु बनकर दोस्ती की और फिर अपनी जाल में फँसाकर शादी कर ली। उसने महिला का नाम भी परिवर्तित कर दिया और उसके बच्चे का भी इस्लामिक नाम रख दिया।

कानपुर में फैज बना अंकित, नाबालिग अनाथ हिंदू लड़की पर ढाए जुल्म

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कानपुर के काकादेव पुलिस थाना इलाके में फैज मलिक ने नाबालिग हिंदू लड़की को फाँसने के लिए इंस्टाग्राम का सहारा लिया। फैज मलिका ने अंकित ठाकुर नाम से फेक आईडी बनाई और नाबालिग हिंदू लड़की को अपनी जाल में फाँस लिया। लड़की के माता पिता की मौत हो चुकी है। उसने लड़की का कई बार रेप किया और उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। उसने विरोध किया, तो उसके हाथ को कई जगहों से काट दिया और उसे जान से मारने की कोशिश की। लड़की ने किसी तरह से पुलिस से संपर्क किया और एफआईआर दर्ज कराई। इस दौरान बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनका साथ दिया।

पीड़ित लड़की नवीन नगर की रहने वाली है। उसने बताया कि अप्रैल 2023 में उसकी अंकित ठाकुर नाम के युवक से बातचीक शुरू हुई थी, लेकिन वो फैज मलिक निकला। पीड़ित लड़की के पिता की 2015 में मौत हो गई थी और उसकी माँ फरार हो गई। उसने बताया कि फैज ने उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाया और उसके आपत्तिजनक फोटो-वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करने लगा।

फैज मलिक ने उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव डाला और मना करने पर उसको जमकर पीटा और उसके हाथ को चाकुओं से कई जगह काट डाला। काकादेव पुलिस स्टेशन के इन्चार्ज केपी गौर ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने फैज मलिक को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और अन्य सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया है।

एमपी में सुलेमान ने आशु बनकर आदिवासी महिला के साथ किया लव जिहाद

एमपी के सीहोर में लव जिहाद का मामला सामने आया है। सीहोर के बुधनी थाना इलाके के देवगाँव की रहने वाली एसटी महिला के साथ धर्म-परिवर्तन और रेप का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला ने बुधनी थाने में दुष्कर्म एवं धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम का मामला दर्ज कराया है। वो पहले से अन्य मामले में जेल में है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुलेमान नाम के व्यक्ति ने अपना हिंदू नाम आशु बताया और विधवा महिला से दोस्ती कर के उसे प्रेमजाल में फाँस लिया और उसे भोपाल ले जाकर उसके साथ रेप किया। इसके बाद उसने महिला का धर्म परिवर्तन करके उसका नाम जोया रख दिया और बच्चे का नाम भी बदल दिया। उसके नाम का पता भी उसे 7 दिन बाद पता चला, इसके बाद सुलेमान ने उसे बंधक बना लिया। एक दिन वो मौका पाकर भाग निकली, और अपनी माँ के साथ बुधनी थाने पर पहुँची और मामला दर्ज कराया।

एसडीओपी शशांक गुर्जर ने बताया कि 3 साल पहले सुलेमान ने अपनी पहचान छुपाकर शादी की थी। पीड़ित महिला को इस मामले में जब पता चला तो वहाँ से जाना चाहती थी, लेकिन सुलेमान ने इसे नजरबंद करके रखा। कुछ समय पहले वह अपने दोस्त की सहायता से भाग कर थाने पहुँची और मामला दर्ज कराया। पुलिस ने संबंधित धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। सुलेमान पहले ही अन्य किसी मामले में जेल में है। इस मामले में भी फॉर्मेलिटी कर उसे गिरफ्तार रखा जाएगा।

स्वाति मालीवाल पर AAP का यूटर्न: पहले पार्टी ने कहा कि केजरीवाल के पीए विभव ने की बदतमीजी, अब महिला सांसद के आरोप को बता रही फर्जी

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए विभव कुमार के बीच मारपीट का मामला गंभीर होता जा रहा है। एक तरफ स्वाति मालीवाल ने विभव कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है तो दूसरी तरफ विभव कुमार ने भी क्रॉस FIR दर्ज करवाई है। आम आदमी पार्टी स्वाति मालीवाल के साथ हुई घटना को अब भाजपा की साजिश बता रही है।

बता दें कि 13 मई 2024 को सुबह 9:10 मिनट पर स्वाति मालीवाल सीएम केजरीवाल के आवास पहुँची थीं। मीडिया में कहा गया कि चूँकि केजरीवाल सरकार ने उनसे इस्तीफा माँगा था, इसलिए वो वहाँ बात करने गई थीं। करीबन 24 मिनट बाद 9:34 पर स्वाति मालीवाल के नाम से पीसीआर को कॉल गई। उन्होंने बताया कि उनसे साथ सीएम आवास में हिंसा हुई है।

मामला जब मीडिया में आया तो आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मामले को संभालने की कोशिश की। उन्होंने 14 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि स्वाति मालीवाल के साथ विभव कुमार ने बदसलूकी की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी स्वाति मालीवाल के साथ मजबूती से खड़ी है।

इतना ही नहीं, संजय सिंह ने यहाँ तक दावा किया था कि स्वाति मालीवाल के साथ हई घटना निंदनीय थी और इस पर अरविंद केजरीवाल ने संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। संजय सिंह ने कहा था कि स्वाति मालीवाल मुख्यमंत्री के आवास पर पहुँचकर ड्राइंग रूम में बैठी थीं। तभी केजरीवाल के पीए विभव कुमार वहाँ पहुँचे और स्वाति मालीवाल के साथ बदतमीजी की। 

इस बीच 16 मई को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सांसद संजय सिंह लखनऊ पहुँचे। वहाँ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ उनकी संयुक्त प्रेस वार्ता थी। मजेदार बात यह थी कि इस टीम में अरविंद केजरीवाल के पीए विभव कुमार भी साथ थे। लखनऊ एयरपोर्ट पर केजरीवाल, संजय सिंह के साथ उनकी तस्वीरें भी सामने आईं।

लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे मालीवाल से संबंधित सवाल किया तो वो असहज हो गए। तब अखिलेश यादव ने माइक लेकर कहा कि ‘इससे भी महत्वपूर्ण मामले हैं देश में बात करने के लिए’। इस तरह आम आदमी पार्टी का दोमुँहा चेहरा सामने आ गया। आखिरकार स्वाति मामलीवाल ने थाने में जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए मजबूर हो गईंं।

अब आम आदमी पार्टी की ओर से दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने शुक्रवार (17 मई) को एक एक प्रेस कॉन्ग्रेस किया और पूरे मामले को ही झूठा बता दिया। इस तरह बीतते समय के साथ आम आदमी पार्टी ने अपने स्टैंड से यू टर्न ले लिया। जिस मामले में संजय सिंह बता रहे थे कि बदतमीजी हुई थी, उसमें अब AAP की आतिशी कह रही थीं कि ये झूठे आरोप हैं।

दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने इस मामले को फर्जी बताया और कहा कि ये बीजेपी की साजिश थी। उन्होंने कहा, “बीजेपी ने साजिश के तहत स्वाति मालीवाल को अरविंद केजरीवाल के घर भेजा। इस षडयंत्र का इरादा था अरविंद केजरीवाल पर झूठे आरोप लगाना। स्वाति मालीवाल इस साजिश का चेहरा थी और मोहरा भी। उस समय अरविंद केजरीवाल मौजूद नहीं थे, इसलिए वो बच गए।”

आतिशी ने कहा, “आज एक वीडियो सामने आया है सीएम आवाज के ड्राइंड रूम का। उस वीडियो ने स्वाति मालीवाल के झूठ को पूरे देश के सामने रख दिया है। स्वाति मालीवाल ने दिल्ली पुलिस को जो एफआईआर की है, उसके फैक्टशीट के मुताबिक, स्वाति मालीवाल ने कहा है कि उनकी बेरहमी से पिटाई की गई। उनको मुक्के मारे गए, घूँसे मारे गए। उनसे बोला नहीं जा रहा था।”

दिल्ली सरकार की मंत्री ने आगे कहा, “उन्होंने शिकायत में लिखा है कि उनका सर टेबल पर मारा गया, जो फट गया। उनके कपड़े फाड़े गए। लेकिन जो वीडियो सामने आया है, वो उनके दावे के एकदम विपरीत है। वीडियो में स्वाति ड्राइंग रूम से आराम से बैठी हैं। पुलिस को धमका रही हैं। उनके कपड़े फटे नहीं है। न ही उनके सिर पर चोट दिख रही है। वो बिभव कुमार को धमका रही हैं और अपशब्दों का इस्तेमाल कर रही हैं।”

इस तरह कल तक स्वाति मालीवाल के साथ खड़ी रहने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी अब यू टर्न ले चुकी है और स्वाति मालीवाल को ही दोषी ठहराने लगी हैं। इस पूरे मामले में जिस तरह से पार्टी ने यू टर्न लिया है, उससे साफ लग रहा है कि पार्टी उन्हें बचाने के लिए हर तरह का प्रयास कर रही है।

अरविंद केजरीवाल और हवाला ऑपरेटर के बीच हुई थी चैटिंग: ED ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी, पूरक आरोप पत्र में मुख्यमंत्री और AAP आरोपित

दिल्ली शराब घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार (17 मई 2024) को सुप्रीम कोर्ट में पूरक चार्जशीट दाखिल की। इसमें एजेंसी ने बताया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और हवाला ऑपरेटरों के बीच व्यक्तिगत चैट का पता चला है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर मामले में यह आठवाँ आरोप पत्र है।

प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, इस चार्जशीट में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी का नाम आरोपित के तौर पर दर्ज है। इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ दायर यह पहली चार्जशीट है। बता दें कि तिहाड़ जेल में बंद अरविंद केजरीवाल को चुनाव प्रचार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1 जून तक की अंतरिम जमानत दी है।

ED की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ को बताया, “हमने अभी हवाला ऑपरेटर को गिरफ्तार किया है… केजरीवाल ने कई फोन नष्ट कर दिए थे, अब हवाला ऑपरेटरों से रिकवरी की गई है।” यह बात तब सामने आई, जब जस्टिस खन्ना ने ED से मनीष सिसोदिया के मामले में सभी सामग्रियों को रिकॉर्ड पर रखने के लिए कहा।

एएसजी एसवी राजू ने पीठ को बताया, “अब हमें अरविंद केजरीवाल और हवाला ऑपरेटर के बीच चैट मिली हैं… व्यक्तिगत चैट…।” इसके बाद अरविंद केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने ईडी की दलील पर आपत्ति जताते हुए कहा, “यह अनुचित है… यह जानकारी अब शाम 4:30 बजे दी जा रही है। यह सबूतों का दमन है।”

कल, यानी गुरुवार (16 मई 2024) को ईडी ने अदालत को सूचित किया कि अंतरिम जमानत पर रिहा होने के बाद केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से जो बयान दिए, वह ‘सिस्टम पर तमाचा’ हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने कहा, “वे (अरविंद केजरीवाल) कहते हैं कि मुझे 20 दिनों में वापस जेल जाना होगा। अगर आप झाड़ू को वोट देंगे तो मुझे जेल नहीं जाना पड़ेगा…।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम राहत देने पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने काफी विरोध किया था। ये दोनों प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उस समय अदालत में मौजूद थे। तुषार मेहता ने कहा था कि ऐसी धारणा बनाई जा रही है कि अगर उन्हें प्रचार करने की अनुमति नहीं दी गई तो आसमान गिर जाएगा।

ED ने एक हलफनामा दायर कर तर्क दिया था कि अकेले धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत वर्तमान में कई राजनेता न्यायिक हिरासत में हैं, और ऐसा कोई कारण नहीं है कि केजरीवाल द्वारा विशेष उपचार के लिए विशेष प्रार्थना को स्वीकार किया जाना चाहिए।

स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट को AAP ने बताया BJP की साजिश, कहा – सुरक्षाकर्मियों को धमकाया था, बिभव ने भी कराई क्रॉस FIR

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री के घर पर हुई मारपीट की घटना को लेकर आम आदमी पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने संबोधित किया और स्वाति मालीवाल के पूरे मामले को फर्जी करार दिया और कहा कि ये बीजेपी की साजिश थी। आतिसी ने बताया है कि बिभव कुमार ने भी इस मामले में दिल्ली पुलिस में जाकर एफआईआर कराई है।

आतिशी ने कहा, “जब से अरविंद केजरीवाल को जमानत मिली है और वो बाहर आए हैं, तब से बीजेपी बौखलाई हुई है। इसी बौखलाहट में बीजेपी ने साजिश रची और उसी साजिश के तहत स्वाति मालीवाल को अरविंद केजरीवाल के घर 13 मई की सुबह सुबह भेज दिया गया। इस षड़यंत्र का इरादा था अरविंद केजरीवाल पर झूठे आरोप लगाया। स्वाति मालीवाल इस साजिश का चेहरा थी और मोहरा भी। वो 13 मई को बिना किसी सूचना के सीएम आवास पहुँच गई। उस समय अरविंद केजरीवाल मौजूद नहीं थे, इसलिए वो बच गए।”

आतिशी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “आज एक वीडियो सामने आया है सीएम आवाज के ड्राइंड रूम का। उस वीडियो ने स्वाति मालीवाल के झूठ को पूरे देश के सामने रख दिया है। स्वाति मालीवाल ने दिल्ली पुलिस को जो एफआईआर की है, उसके फैक्टशीट के मुताबिक, स्वाति मालीवाल ने कहा है कि उनकी बेरहमी से पिटाई की गई। उनको मुक्के मारे गए, घूँसे मारे गए। उनसे बोला नहीं जा रहा था। उन्होंने शिकायत में लिखा है कि उनका सर टेबल पर मारा गया, जो फट गया। उनके कपड़े फाड़े गए। लेकिन जो वीडियो सामने आया है, वो उनके दावे के एकदम विपरीत है।”

उन्होंने कहा, “स्वाति मालीवाल का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वो ड्राइंग रूम से आराम से बैठी हैं। पुलिस को धमका रही हैं। उनके कपड़े फटे नहीं है। न ही उनके सिर पर चोट दिख रही है। वो बिभव कुमार को धमका रही हैं और अपशब्दों का इस्तेमाल कर रही हैं। वो आज के इस वीडियो में पूरी तरह से एक्सपोज हो रही हैं। उनके द्वारा लगाए गए सारे आरोप पूरी तरह से झूठे हैं और बेबुनियाद है।”

आतिशी ने कहा कि “आज बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज की है। उन्होंने अपनी शिकायत में 13 मई की पूरी घटना के बारे में बताया है। बिभव की शिकायत के मुताबिक, स्वाति मालीवाल 13 मई 2024 को बिना किसी अपॉइंटमेंट के सीएम आवास पहुँची और गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को धमकाया और अंदर घुस गईं। इसके बाद कर्मचारी फिर से उनके पास पहुँचे और उन्हें वेटिंग रूम पहुँची। इसके थोड़ी देर बाद वो सीएम आवास के अंदर मुख्य ड्राइंग रूम में घुस गई और सीएम को ‘तुरंत’ बुलाने के लिए कहा। इसके कुछ देर बाद सुरक्षाकर्मियों ने बिभव कुमार को बुलाया, जिसके बाद बिभव कुमार ने उन्हें अंदर जाने से रोका। स्वाति मालीवाल ने उन्हें धक्का दिया। इसके बाद बिभव कुमार ने गेट से सुरक्षाकर्मियों से बुलाकर उन्हें गेट तक एस्कॉर्ट करने के लिए कहा।”

आतिशी ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि आज का वीडियो सबकुछ साफ कर दिया है। इस दौरान संजय सिंह की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया, तो आतिशी ने कहा कि तब संजय सिंह को एक ही पक्ष के बारे में बता था, अब सारी बातें सबके सामने आ चुकी हैं। हालाँकि जब पत्रकारों ने पूछा कि ये आधा-अधूरा वीडियो ही है, तब आतिशी प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकल गईं। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया।

कौन है छोटी सी बच्ची लवली, कितना कठिन है उसका संघर्ष, गौतम अडानी को मदद के लिए क्यों आना पड़ा आगे: जानिए सब कुछ

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की एक बच्ची की मदद के लिए उद्योगपति गौतम अडानी सामने आए हैं। उन्होंने बच्ची की मदद का फैसला किया है। बच्ची का नाम लवली है और वो लखीमपुर खीरी के कंधरापुर गाँव की रहने वाली है। लवली की माँ की मौत बचपन में ही हो गई थी, और उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली। बच्ची की देख-रेख उसके बूढ़े दादा-दादी करते हैं। अब अडानी फाउंडेशन बच्ची की न सिर्फ आर्थिक मदद करेगा, बल्कि इलाज का भी पूरा खर्च उठाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लवली का बायाँ पैर और हाथ बचपन से ही टेढ़ा है, जिसकी वजह से उसे रोजमर्रा के कामों में भारी दिक्कत उठानी पड़ती है। बच्ची के दादा-दादी उसके इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। लवली नाम की इस बच्ची के बारे में एनडीटीवी के रिपोर्टर रवीश रंजन शुक्ला ने 13 मई 2024 को वीडियो पोस्ट किया था, जिसे देखने के बाद गौतम अडानी ने बच्ची की मदद का फैसला लिया है।

गौतम अडानी ने शुक्रवार (17 मई 2024) को एक्स पर पोस्ट किया, “एक बेटी का बचपन यूँ छिन जाना दुखद है। छोटी सी उम्र में लवली और उसके दादा-दादी का संघर्ष बताता है कि एक आम भारतीय परिवार कभी हार नहीं मानता। अडानी फाउंडेशन यह सुनिश्चित करेगा कि लवली को बेहतर इलाज मिले। वो भी बाकी बच्चों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सके। हम सब लवली के साथ हैं।”

जानकारी के मुताबिक, बच्ची बचपन से ही दिव्यांग है। वो पाँचवीं कक्षा में पढ़ती है। अदानी फाउंडेशन की तरफ से मदद का हाथ बढ़ाए जाने के बाद बच्ची के दादा ओमप्रकाश ने उम्मीद जताई है कि बच्ची न सिर्फ ठीक हो जाएगी, बल्कि उसका भविष्य भी संवर जाएगा।

CM अरविंद केजरीवाल चाहते थे ‘कम्प्रोमाइज’, सोनी को जहर खाकर देनी पड़ी थी जान: अब स्वाति मालीवाल पर भी वही नीचता दिखा रही AAP और उसके पोषित पत्रकार

साली तेरी औकात क्या है?

नीच औरत

हड्डी पसली तोड़ देंगे तेरी…

तू हमारी बात नहीं मानेगी…

ऐसी जगह गाड़ेंगे किसी को पता भी नही चलेगा

तुझे तो हम लोग सबक सिखाएँगे…

एक के बाद एक झापड़ मारते हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल के पीए बिभव कुमार ने ये बात महिला सांसद स्वाति मालीवाल को कही थीं।

स्वाति की गलती इतनी थी कि वो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास में सवाल-जवाब करने चली गईं थीं।

यही बात मुख्यमंत्री के वफादार बिभव कुमार को नागवार गुजरी।

उसने कमरे में घुसकर पहले महिला सांसद को झापड़ मारे फिर गंदी-गंदी गालियाँ देने लगा।

सांसद बिभव के इस बर्ताव को देख हैरान रह गईं। उन्होंने फौरव उसे चुप होने को कहा।

बिभव कैसे शांत होता… दिल्ली मुख्यमंत्री केजरीवाल का सबसे खास वही तो है। उस पर सत्ता का खुमार आम राजनेताओं से ज्यादा चढ़ा था।

उसने महिला सांसद के पद की परवाह किए बिना, उन्हें पूरे जोर लगाकर झापड़ मारे।

सांसद चिल्लाती रहीं। उन्हें लगा शायद अरविंद केजरीवाल उन्हें बचाने आएँगे, नहीं तो सुनीता केजरीवाल तो रोकने आएँगीं ही… या परिवार कोई सदस्य, नहीं तो कोई सुरक्षाकर्मी…

मगर हुआ क्या? कुछ नहीं। बिभव अपनी हैवानियत दिखाता रहा। गालियाँ देता रहा। सांसद चीखतीं रहीं।

जब उनके दर्द की आवाज पूरे आवास में गूँजने के बाद भी वहाँ कोई नहीं पहुँचा तो उन्होंने खुद के बचाव में बिभव को धक्का दिया।

ये धक्का बिभव को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था। इससे वो और बिदका और उसने जमीन पर गिरी सांसद की जानबूझकर शर्ट खींची।

देखते ही देखते शर्ट के बटन टूट गए, सांसद बार-बार कहती रहीं कि वो ये सब न करें।

मगर बिभव एक बार भी शांत नहीं हुआ। उसने स्वाति को ऐसे मारा कि उनका सिर जाकर सेंटर टेबल पर लड़ा।

वो धड़ाम से गिरीं। बिभव ने उनके पेट पर, पेट के नीचे, छाती पर ताबड़तोजड मारना जारी रखा।

सांसद चिल्लातीं रहीं- मेरे पीरिड्यस चल रहे हैं मुझे मत मारो, बहुत दर्द हो रहा है… लेकिन इतना सब सुनने की बजाय बिभव और जोर से मार रहा था।

ऊपर लिखी बातें एफआईआर पर आधारित हैं।

आप सोच सकते हैं क्या कि महिला सांसद के साथ बदसलूकी का ये पूरा वाकया देश की राजधानी यानी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अपने आवास पर हुआ है। उस आवास पर जहाँ सिर्फ अरविंद केजरीवाल नहीं रहते, जो मान लिया जाए कि शायद उन तक स्वाति मालीवाल की आवाज नहीं पहुँचीं होगी इसलिए उन्होंने उनका बचाव नहीं किया… इसी आवास में केजरीवाल का परिवार भी रहता है। उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल भी रहती हैं जो अपने पति के जेल जाने पर एकदम मीडिया में आ प्रकट हुईं और सिर्फ केजरीवाल के संदेश ही जनता को नहीं दिए बल्कि उनके लिए इंडी गठबंधन की सभा करवाकर उसे संबोधित भी किया था… उस समय सुनीता केजरीवाल जितना दिल्ली की जनता को ये बताने में सक्रिय थीं कि केजरीवाल पूरे दिल्ली को अपना परिवार मानते हैं उस सक्रियता का एक फीसद भी वो इस मामले में नहीं दिखा रही हैं। न ही दिल्ली सीएम की पत्नी होने के नाते, न ही उस घर की निवासी होने के नाते और न ही महिला होने के नाते… सुनीता केजरीवाल इस मामले पर एकदम चुप हैं। उन्हें न तो इस मुद्दे पर सफाई देना जरूरी लग रहा है और ही स्वाति के समर्थन में उतरना।

स्वाति मालीवाल मुद्दे पर मीडिया गिरोह चुप

शर्मनाक बात ये है कि इस मुद्दे पर सिर्फ अरविंद केजरीवाल का और उस घर में मौजूद लोगों का दोहरा रवैया नहीं सामने आया। विपक्ष का भी असली चेहरा उजागर हुआ और साथ ही पूरे मीडिया गिरोह का। सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ उठने वाला एक बिंदु पाकर जो विपक्ष हमेशा बवाल करता है उसका इस मुद्दे पर कहना है कि ये आम आदमी पार्टी का अपना मामला है वो इस पर कुछ नहीं बोलेंगे।

यूपी में अखिलेश यादव इस मुद्दे को मीडिया के आगे स्पष्ट तौर पर गैर जरूरी कहते हैं। खुद को दिल्ली में इंडी ब्लॉक का हिस्सा बताने वाली महिला सीएम भी इस मुद्दे पर चुप हैं। इसके अलावा उन मीडियाकर्मियों में इस मुद्दे को लेकर एकदम चुप्पी है जिन्हें मोदी विरोधी खबरें आते ही वीडियो बनाने में, आर्टिकल लिखने में खासा दिलचस्पी होती हैं। ऐसे ‘निष्पक्ष’ पत्रकारों के लिए आज ये मुद्दा निजी राय छोड़िए, जनता को दिखाने लायक नहीं है।

ज्यादा वक्त नहीं बीता जब पूरे गिरोह ने मोदी के परिवार पर सवाल उठाकर अपनी नीचता का प्रमाण दिया था। उस समय ऐसे दिखाया गया था कि जो व्यक्ति परिवार नहीं चला सकता वो देश क्या चलाएगा….। इस प्रोपगेंडे का जवाब ‘मोदी का परिवार’ ट्रेंड शुरू होने पर मिला। पर, अब इन सवालों को आज की स्थिति से जोड़कर सोचिए तो पता चलेगा कि अगर परिवार वाले राजनेता इतने संवेदनशील होते हैं कि इतनी बड़ी घटना पर उन्हें चुप रहना उचित लगता है, तो इससे बढ़िया तो मोदी ही हैं। कम से कम रेवन्ना मामले में उन्होंने खुलकर विरोध तो किया था… लेकिन यहाँ क्या हो रहा है?

दिल्ली के सीएम केजरीवाल, उनकी पत्नी, उनके घर में मौजूद अन्य लोग सब इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। हो सकता है कि किसी मुद्दे पर बोलना न बोलना किसी व्यक्ति विशेष का अपना अधिकार होता हो…लेकिन क्या सीएम होते हुए ऐसी चुप्पी रखना उचित है। अरविंद केजरीवाल पूरे परिवार को अपना परिवार बताते हैं। यहाँ की महिलाओं और लड़कियों को अपनी माताएँ-बहनें कहते हैं। क्या इस श्रेणी में स्वाति मालीवाल नहीं आतीं…। उनके लिए आवाज उठाना सीएम का फर्ज नहीं है।

बिभव के लिए माहौल बना रहे AAP समर्थक

बता दें कि ये चुप्पी तब देखने को मिल रही है जब AAP के मंच से संजय सिंह आकर खुद इस घटना की पुष्टि कर चुके हैं और आरोपित पर कार्रवाई की बात भी। लेकिन, कार्रवाई तो दूर सीएम केजरीवाल और संजय सिंह बिभव कुमार को अपने साथ लेकर जगह-जगह घूम रहे हैं। मामले में एफआईआर होने के बाद, सारी डिटेल सामने आने के बाद भी सच्चाई पर कोई जिक्र नहीं हो रहा है। उलटा दो ट्रेंड सोशल मीडिया पर शुरू करवाए जा चुके हैं जिसमें से एक में इस बीच आप समर्थक एक वीडियो शेयर करके स्वाति पर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं कि उनके इल्जाम झूठे सकते हैं क्योंकि वो खुद स्टाफ को धमका रही हैं। वहीं दूसरे में बिभव कुमार को बचाने के लिए संवेदनाएँ बटोरी जा रही हैं।

एक ही किस्म का संदेश लिखकर अलग-अलग अकॉउंट हैंडल से शेयर हो रहा है। कोई अपने अकॉउंट पर कहता है कि बिभव तो बहुत शांत, सरल, सहज स्वभाव वाले हैं। तो कोई कह रहा है कि बिभव गुस्सा कर ही नहीं सकते हैं। इन पोस्टों का पूरा सार यही है कि पाठकों के मन में एक ये छाप छोड़ दी जाए कि बिभव ऐसा कर ही नहीं सकता और जो स्वाति मालीवाल आरोप लगा रही हैं वो उन्हें हजम नहीं हो रहा।

वहीं दूसरी ओर बिभव की हकीकत निकालने में वो वीडियो में शेयर हो रही है जिसमें कभी कुमार विश्वास ने बिभव कुमार के बारे में बताया था थे कि पहले पत्रकार थे। बाद में ये अरविंद केजरीवाल का पीए इसलिए बना क्योंकि ये विरोधियों के चरित्र हत्या करने का काम अच्छे से काम करता था, उनके खिलाफ ट्वीट करवाता था, परिवारों के बारे में गंदी बातें फैलाता था। धीरे-धीरे ये केजरीवाल के करीबी बन गए। एक तरह राजदान।

अब हकीकत क्या है? ये पुलिस छानबीन में सामने आ ही जाएगा। अगर स्वाति के इल्जाम सच्चे हैं तो भी अरविंद केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठेंगे और अगर उनका बिभव कुमार निर्दोष है तो भी सवाल उठेंगे कि इतने दिन तक उन्होंने इस मुद्दे की सच्चाई लगाकर लोगों को सच बताने के प्रयास क्यों नहीं किए। फिलहाल स्वाति मालीवाल द्वारा दायर करवाई गई एफआईआर आम जनता के लिए बेहद हैरान करने वाली और डराने वाली है जो सवाल छोड़ती हैं कि जब महिलाएँ सीएम आवास में सुरक्षित नहीं हैं तो कहाँ होंगी।

मालूम हो कि ऐसा पहली बार नहीं है कि पार्टी से जुड़ी महिलाओं के साथ बदसलूकी मामले में सीएम केजरीवाल का ऐसा गैर जिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला हो। इससे पहले साल 2016 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता ने सुसाइड की थी।

सोनी की आत्महत्या से जुड़ी संबंधित खबर

बाद में पता चला था कि पार्टी का कार्यकर्ता उनका यौन उत्पीड़न करता था। उन्होंने इसकी शिकायत केजरीवाल से भी की थी लेकिन उन्होंने कार्रवाई की जगह कहा कि वो इस मामले में समझौता कर लें। वहीं पुलिस ने भी कोई एक्शन नहीं लिया। बाद में अंजाम ये हुआ कि सोनी ने अपना जीवन जहर खाकर खत्म कर लिया।

जिस सैफ से जुनैद के थे समलैंगिक संबंध उसका गला रेता, फिर खुद की भी काटी नस: कहा- उसके साथ रहना चाहता हूँ, UP के बाराबंकी का मामला

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जुनैद नाम के एक युवक ने सैफ नाम के एक दूसरे युवक का चाकू से गला रेत दिया। जुनैद ने इसके बाद खुदकी नस भी काट ली। दोनों के बीच दो वर्षों से अधिक से समलैंगिक संबंध थे। इसी को लेकर हुए विवाद में जुनैद ने सैफ का गला रेता।

जानकारी के अनुसार, फतेहपुर थाना क्षेत्र के रसूलपुर गाँव में बुधवार शाम जुनैद नाम के एक युवक ने सैफ नाम के एक युवक को गाँव के बाहर मिलने बुलाया। इसके बाद उसने सैफ पर चाकू से वार कर दिया और गला रेत दिया, फिर उसने खुद की भी नस काट ली।

जुनैद गला काटे जाने के कारण तड़पने, चिल्लाने लगा तो उसे आसपास मौजूद ग्रामीणों ने अस्पताल भेजा जहाँ उसकी हालत गंभीर होने के कारण लखनऊ रेफर कर दिया गया। सैफ को भी नस काटने के कारण उपचार दिया गया और गिरफ्तार कर लिया गया।

सैफ ने पूछताछ में बताया कि उसका और जुनैद का 2 सालों से समलैंगिक संबंध था। हालाँकि, कुछ दिनों से उनके बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। जुनैद, सैफ की बात नहीं सुन रहा था। इसी से क्रुद्ध होकर उसने यह हमला किया। जुनैद का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसमें वह बताता है कि सैफ उसके साथ संबंध बनाता था। यह दो वर्षों से चल रहा था। उसने बताया कि वह अब सैफ के साथ रहना चाहता है, पहले सैफ जुनैद के बुलाने पर आ नहीं रहा था इसलिए उसने हमला किया। जुनैद ने कहा कि अब दोनों साथ रहने को राजी है और दावा किया कि उन दोनों के घरवाले भी इस बात को मंजूर कर रहे हैं।

जुनैद ने यह भी खुलासा किया कि वह सैफ के साथ कई जगह घूमने भी गया है। उसने बताया कि वह सैफ के साथ हिमाचल, बैंगलोर, चंडीगढ़ और मुंबई गए हैं। मुंबई से दोनों रमजान के पहले दिन ही लौटे थे। ऑपइंडिया ने इस मामले में फतेहपुर थाना की CO डॉ बीनू सिंह से बात की है।

उन्होंने बताया कि पहले भी इन दोनों युवकों के बीच विवाद हो चुका है, लेकिन तब आपस में समझौता हो गया था। दोबारा विवाद होने के बाद यह घटना हुई। हमला करने वाले जुनैद को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है, उसके खिलाफ सैफ के परिजनों ने मामला दर्ज करवाया है, जिसकी जाँच अभी जारी है। सैफ की हालत डॉक्टरों ने खतरे से बाहर बताई है।

मुंबई के कॉलेज ने लागू किया ड्रेस कोड, इस्लामी कट्टरपंथियों ने बुर्के-हिजाब पर बैन बताकर मचाया बवाल: फैसले को बता रहे मुस्लिम विरोधी

मुंबई के उपनगरीय इलाके चेंबूर में स्थित आचार्य मराठे कॉलेज प्रशासन ने डिग्री कॉलेज के छात्र-छात्राओं के लिए ड्रेस कोड जारी किया है। इस ड्रेस कोड के हिसाब से सभी लड़के और लड़कियों को एक समान ड्रेस पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। अब कॉलेज परिसर में हिजाब, बुर्का, नकाब और अन्य धार्मिक कपड़ों के पहनने पर रोक लग गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये ड्रेस कोड जून 2024 से शुरु होने वाले शैक्षणिक सत्र से लागू हो जाएगा। जूनियर कॉलेज के छात्र-छात्राओं के लिए एक साल पहले ही ये ड्रेस कोड लागू कर दिया गया था। नए नियमों के मुताबिक, आचार्य मराठे कॉलेज में डिग्री हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को एक कॉमन रूम में अपनी धार्मिक पोशाकों को उतार कर रख देना होगा, इसके बाद वो क्लास रूम में एंट्री ले पाएँगे।

हालाँकि इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। बल्कि इससे जुड़े निर्देश दूसरे और तीसरे साल के छात्र-छात्राओं के वॉट्सऐप ग्रुपों में शेयर किए जा रहे हैं। ड्रेस कोड में कहा गया है, “बुर्का, नकाब, हिजाब, या बैज, कैप या स्टोल जैसे किसी भी धार्मिक पहचान चिह्न को कॉलेज में घूमने से पहले ग्राउंड फ्लोर पर कॉमन रूम में आने पर हटा दिया जाना चाहिए।”

नए नियमों में कहा गया है कि सभी छात्रों को औपचारिक पोशाक और शालीन पोशाक पहननी होगी। पुरुष छात्रों को फुल या हाफ शर्ट के साथ नियमित पतलून पहनना आवश्यक है। महिला छात्रों को शालीन पश्चिमी या भारतीय कपड़े पहनने का निर्देश दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ मुस्लिम छात्रों ने आचार्य मराठे कॉलेज के प्रशासन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की है। इस बीच, इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ड्रेस को के फैसले को ‘इस्लामोफोबिक’ करार दिया है।

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक फैज़ान ने लिखा, “आचार्य मराठे कॉलेज ने कॉलेज में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। 45 साल के इतिहास में कॉलेज में ड्रेस कोड लागू कर दिया है और अचानक कॉलेज में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह सिर्फ मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाने के लिए इस्लामोफोबिक निर्णय है।”

एक इस्लामी चरमपंथी ने हिंदुओं की तुलना गिद्धों से की और ट्वीट किया, “आचार्य मराठे कॉलेज ने कॉलेज में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। हिंदू ऐसा करते हैं और फिर बहस करने की कोशिश करते हैं कि भारत में मुसलमान पसमांदा क्यों हैं।”

मोहम्मद शेर अली नाम के एक अन्य इस्लामवादी ने लिखा , “आचार्य मराठे कॉलेज ने कॉलेज में बुर्का पहनने पर बैन लगा दिया है। यह केवल मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाने का एक इस्लामोफोबिक निर्णय है।”

INDI गठबंधन के साथी अरविन्द केजरीवाल की तरह अंतरिम जमानत लेने गए थे हेमंत सोरेन, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार: याचिका अवकाश बेंच को भेजा

शुक्रवार (17 मई, 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई अब 21 मई, 2024 को एक अवकाश बेंच करेगी। हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट से चुनाव प्रचार के आधार पर जमानत की माँग की थी।

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच के सामने लगाई गई थी। शुक्रवार को कोर्ट ने इस याचिका को लेकर कोर्ट ने सुनवाई करने से मना किया और कहा कि इसे 21 मई, 2024 को एक अवकाश बेंच के सामने लगाया जाए जहाँ इसकी सुनवाई होगी।

हेमंत सोरेन की इस याचिका को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से पेश हो रहे एडिशनल सोलिसिटर जनरल एसवी राजू ने और समय की माँग की, इस पर बेंच ने कहा कि अब इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह की जाए। इस दौरान एसवी राजू ने हेमंत सोरेन को अंतरिम जमानत का विरोध भी किया।

ED की तरफ से पेश हो रहे एसवी राजू ने कहा कि 4 चरणों का चुनाव पहले ही हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि सोरेन को 31 जनवरी, 2024 को ही गिरफ्तार कर लिया गया था और उनकी सामान्य जमानत के लिए लगाई गई याचिका भी खारिज हो चुकी है।

गौरतलब है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 31 जनवरी, 2024 को ED ने जमीन घोटाला मामले में गिरफ्तार कर लिया था। इसे पहले ED ने उनको कई समन भेजे थे जिन पर उन्होंने जवाब नहीं दिया था। इसके बाद ED ने उन्हें उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया था।

हेमंत सोरेन की चुनाव प्रचार सम्बन्धित अंतरिम जमानत की यह याचिका दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को मिली जमानत के बाद लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में ED द्वारा गिरफ्तार अरविन्द केजरीवाल को चुनाव प्रचार के लिए 1 जून तक की जमानत दे दी थी।

हेमंत सोरेन द्वारा लगाई गई याचिका में इसी आदेश का उदाहरण दिया गया था और कहा गया था कि उन्हें भी इसी आधार पर चुनाव प्रचार के लिए जमानत दी जाए। हालाँकि, यह मामला अब 21 मई को सुना जाएगा।