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पानी की टंकी में हथियार, जवानों के खाने-पीने की चीजों में ज़हर… जानें क्या था ‘लाल आतंकियों’ का ‘पेरमिली दलम’ जिसे नेस्तनाबूत करने में लगे 39 साल, जंगल में चलाते थे ‘सरकार’

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली इलाके में सोमवार (13 मई, 2024) को सुरक्षा बलों ने पेरमिली दलम नाम के नक्सल गिरोह को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। यह संगठन अबूझमाड़ में नक्सलियों के हेडक्वार्टर का सप्लाई चेन माना जाता था। अबूझमाड़ के लिए नक्सल विरोधी अभियान में लगे पैरामिलिट्री और राज्य पुलिस के जवानों को यह सफलता 39 वर्षों के बाद मिली है। देश विरोधी कार्यों में लगे इस गैंग को खत्म करने में कई जवानों और अधिकारियों ने अपना योगदान दिया जिसमें बलिदान तक शामिल हैं।

सोमवार (13 मई) को सुरक्षा बलों को गढ़चिरौली इलाके में पेरमिली दलम के कुछ सदस्यों की मूवमेंट की सूचना मिली थी। इस सूचना पर खासतौर पर नक्सल विरोधी अभियान के लिए बनी C-60 टीम को मौके पर भेजा गया। तलाशी के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी थीं। जवाबी कार्रवाई में 3 नक्सली मारे गए थे। इनमें महिला नक्सली भी शामिल हैं। मारे गए पुरुष नक्सली की पहचान कमांडर वासु के तौर पर हुई थी। तलाशी के दौरान इन नक्सलियों के पास से एक AK 47, एक कार्बाइन, एक इंसास राइफल, नक्सली साहित्य के साथ कई अन्य चीजें बरामद हुईं थीं।

39 वर्षों के लम्बे संघर्ष के बाद सुरक्षा बलों ने पेरमिली दलम को नेस्तोनाबूत करने में सफलता पाई है। इस संगठन के खात्मे के बाद सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के अंतिम गढ़ अबूझमाड़ की तरफ मजबूती से कदम बढ़ा दिए हैं। अबूझमाड़ को अघोषित तौर पर नक्सलियों का हेडक्वार्टर भी कहा जाता है। पेरमिली दलम इस मुख्यालय के लिए सप्लाई-चेन का काम करता था।

क्या था पेरमिली दलम

पेरमिली दलम की स्थापना कुछ तेलगु युवकों द्वारा साल 1985 में की गई थी। बाद में यह संगठन गढ़चिरौली में सक्रिय हो गया। धीरे-धीरे अपना कैडर को बढ़ाता चला गया। शुरुआत में इस गिरोह ने वन विभाग के अधिकारियों को धमकाना शुरू किया। कुछ समय बाद इस संगठन का कनेक्शन अबूझमाड़ के जंगलों से जुड़ गया। माओवादी सोच को आगे बढ़ाने के लिए इस गैंग ने स्थानीय थानों पर तैनात पुलिस वालों के खिलाफ जनजातीय लोगों को भड़काना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे कैडर का विस्तार करने के साथ पेरमिली दलम ने महिलाओं को भी भर्ती करना शुरू कर दिया। गढ़चिरौली इलाके में पेरमिली दलम द्वारा जब हालात को बदतर कर दिया गया तब से अर्धसैनिक बलों ने वहाँ मोर्चा सँभाला। 39 वर्षों तक संघर्ष चला। सुरक्षा बलों के कई जवानों ने वीरगति पाई। सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचने के साथ क्षेत्र में विकास होने की वजह से तमाम युवाओं ने इस गिरोह से मुँह फेर लिया। अंत में सिमट रहे नक्सली आतंक के अभियान में पेरमिली दलम का सफाया हुआ।

कैसे आतंक फैलाता था पेरमिली दलम

ऑपइंडिया ने नक्सल विरोधी अभियान में तैनात रहे पैरामिलिट्री के एक अधिकारी से बात की। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने हमें बताया कि पेरमिली दलम भी अन्य नक्सली संगठनों की तर्ज पर पहले उन इलाकों को चिह्नित करता था जो शासन की नजर से दूर होते थे। जंगलों के बीच पहले कम संख्या में तैनात वन विभाग और पुलिस वालों को निशाना बनाया जाता था। बाद में इलाके को अपना क्षेत्र घोषित कर दिया जाता था जहाँ से समांतर सरकार चलाने के दावे होते थे।

हमें बताया गया कि पेरमिली दलम ने गढ़चिरौली के घने जंगलों में अपने ट्रेनिंग कैम्प खोल रखे थे। यहाँ वो जनजातीय समुदाय के युवाओं को सरकार के खिलाफ भड़का कर हथियार चलाने की ट्रेनिंग दिया करते थे। नक्सलियों द्वारा झारखंड और छत्तीसगढ़ की खदानों पर हमला कर के डेटोनेटर लूटे जाते थे जो पेरमिली दलम जैसे गिरोहों को बाँटे जाते थे। इन डेटोनेटर का उपयोग लैंडमाइंस बिछाने से ले कर बम बनाने तक में होता था। हथियारों को छिपाने के लिए पेरमिली दलम अन्य नक्सली संगठनों की तरह पानी की टंकियों में उन्हें भर के जमीन में दबा कर रखता था।

वर्तमान में नक्सल विरोधी अभियान में तैनात CRPF के एक अन्य अधिकारी ने हमें बताया कि पेरमिली दलम माओवाद की उस विचारधारा से प्रेरित था जिसका मकसद किसी भी रूप में दुश्मन का खात्मा होता है। उन्होंने हमें बताया कि सुरक्षा बलों पर हथियारों से हमलों के अलावा यह संगठन जवानों के खाने के सामान और पीने के पानी तक में जहर डालने की साजिश रच चुका है। अधिकारी ने आशा जताई कि जिस गति से नक्सल विरोधी अभियान जारी है यह उसमें को बड़ी बाधा नहीं आती तो जल्द ही भारत नक्सल मुक्त होगा।

अबूझमाड़ को ही क्यों बनाया हेडक्वार्टर

नक्सल विरोधी अभियान में तैनात CRPF अधिकारी ने हमें आगे अबूझमाड़ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ का अर्थ है जिसे कोई बूझ नहीं पाया। 4400 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जंगल की मैपिंग भी अभी तक ठीक से नहीं हो पाई है। जनजातीय बहुल होने की वजह से यहाँ किसी आधिकारिक मूवमेंट के लिए पहले राज्यपाल की अनुमति आवश्यक है। हमें यह भी बताया गया कि कई राज्यों से इस जंगल की सीमा लगने की वजह से भी कई बार नक्सलियों को पुलिस के सीमा विवाद का भी फायदा मिल जाता है। अबूझमाड़ का कुछ हिस्सा महाराष्ट्र तो कुछ आंध्र प्रदेश में पड़ता है।

120 लोगों की हुई घर-वापसी, छत्तीसगढ़ में ‘श्री वनवासी राम कथा’ में जुटी श्रद्धालुओं की भारी भीड़: जशपुर राजघराने के लाल ने पाँव पखार कर सनातन धर्म में किया स्वागत

छत्तीसगढ़ में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने पाँव पखारकर 50 परिवारों के 120 लोगों की घर-वापसी कराई। ‘श्री वनवासी राम कथा’ का आयोजन कंदरी स्थित श्री राम मंदिर समिति में आचार्य श्री सतानंद महाराज जी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। शनिवार (18 मई, 2024) को घर-वापसी कार्यक्रम में पहुँचे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव का भव्य स्वागत भी हुआ। उन्होंने 50 परिवारों के 120 लोगो की घर-वापसी संपन्न कराने में बड़ी भूमिका निभाई है। ज्ञात हो कि 9 कुंडीय महायज्ञ एवं ‘श्री वनवासी राम कथा’ का आयोजन श्री राम मंदिर समिति कंदरी में आचार्य सतानंद महाराज जी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ।

इससे प्रभावित होकर ही लोग सनातन धर्म में घर-वापसी कर रहे हैं। बलरामपुर जिले के महज 35 किलोमीटर पर स्थित प्राचीन श्री राम मंदिर कंदरी में 10 मई को भव्य कलश यात्रा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ करीब 5000 महिलाएँ कलश यात्रा में शामिल हुईं। करीब 3 किलोमीटर यात्रा कर रिगड़ नदी जनकपुर से जल लेकर मंदिर प्रांगण पहुँचे जहाँ काशी एवं प्रयागराज से आए ब्राह्मणों ने करीब डेढ़ लाख आहुति एवं करीब 50 लाख राम नाम का जप भक्तों द्वारा मंदिर प्रांगण में किया।

राम कथा सुनने के लिए प्रतिदिन निरंतर भीड़ देखने को मिला। मंदिर समिति के द्वारा प्रतिदिन सुबह शाम भंडारा की भी व्यवस्था की गई थी। लगातार कथा के मंच से जो लोग सनातन धर्म छोड़कर दूसरे धर्म में चले गए थे। करीब 150 महिला-पुरुष ने अपनी घर-वापसी कराई। कार्यक्रम के अंतिम दिन दिवंगत केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह जूदेव जी के बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में घर-वापसी का कार्यक्रम कराया गया।

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इन लोगों के पाँव भी पखारे। कार्यक्रम के आयोजक हनुमान जी महाराज रहे। पहली बार प्राचीन राम मंदिर में ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जशपुर राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनके पिता दिलीप सिंह मध्य भारत में जनजातीय समाज के बीच एक लोकप्रिय नेता थे। उनके 3 बेटों में 2 की बीमारी की वजह से मृत्यु हो गई, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भाइयों में अकेले ही बचे हैं।

निशा हुईं राधिका, निदा बनीं निधि: 2 मुस्लिम लड़कियों की घरवापसी, हिन्दू युवकों से विवाह – एक की शादी के बाद धमकी, दूसरी का गला दबा मारा था भाई

उत्तर प्रदेश के बरेली और सीतापुर जिलों में 2 अलग-अलग मुस्लिम लड़कियों द्वारा हिन्दू धर्म में घर वापसी की गई है। बरेली में निशा नाम की लड़की सत्य सनातन स्वीकार करते हुए राधिका बन गईं। राधिका ने राजेश कुमार नाम के युवक से विवाह किया है। वहीं सीतापुर जिले में निदा बानो ने भी हिन्दू धर्म अपना लिया है। निदा अब निधि नाम से जानी जाएँगी। निधि ने रचित कुमार को अपना जीवन साथी चुना है। शनिवार (18 मई 2024) को सम्पन्न हुए इन दोनों विवाहों में वेदमंत्रों का उच्चारण किया गया और हिन्दू संगठनों द्वारा जय श्री राम के नारे लगाए गए।

बरेली में निशा बनीं राधिका

पहला मामला बरेली जिले का है। यहाँ अगत्स्य मुनि आश्रम में 18 मई को निशा अपने प्रेमी राजेश के साथ पहुँचीं। उन्होंने खुद को बालिग होने के प्रमाण पंडित के के शंखधर को सौंपे और राजेश से विवाह करने की इच्छा जताई। पंडित शंखधर ने राजेश और निशा ने शपथ-पत्र व अन्य कानूनी कागजात लिए और उसकी तस्दीक के बाद दोनों का विवाह वैदिक विधि-विधान के मुताबिक सम्पन्न करवाया। इस अवसर पर निशा ने राजेश के साथ हवन किया और हिन्दू देवी-देवताओं के जयकारे लगाए।

ज़ाकिर की बेटी निशा मूल रूप से बिजनौर के श्योहरा थानाक्षेत्र की निवासिनी हैं। वहीं राजेश भी बिजनौर जिले के नेहटौर इलाके में रहते हैं। निशा ने बताया कि राजेश उनके गाँव में अपनी रिश्तेदारी में आया करते थे। लगभग 5 साल पहले दोनों में जान पहचान हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई। निशा के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे। निशा से विवाह के लिए राजेश कई जिलों में भटकते रहे। आखिरकार उन्हें बरेली के अगत्स्य मुनि आश्रम का पता चला। यहाँ दोनों का विधि-विधान से विवाह सम्पन्न हुआ। ऑपइंडिया के पास विवाह संबंधी सभी कागजात मौजूद हैं।

यह विवाह सम्पन्न करवाने वाले पंडित के के शंखधर ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि विवाह के बाद उनको बरेली के आला हजरत से जुड़े कुछ लोगों ने धमकियाँ दी हैं। उन पर मुस्लिम लड़कियों के अवैध तौर पर धर्मान्तरण का आरोप भी लगाया गया। पंडित शंखधर ने बताया कि विवाह करने वाली तमाम लड़कियाँ बालिग़ हैं और घर वापसी उनका स्वयं का निर्णय होता है। पुजारी ने प्रशासन से उम्मीद जताई है कि वो न सिर्फ धमकी देने वालों पर कड़ी कार्रवाई करेगा बल्कि उनकी सुरक्षा को भी लेकर संजीदगी से विचार करेगा।

सीतापुर में निदा बनीं निधि

घर वापसी का दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से आया है। यहाँ निदा बानो नाम की लड़की ने सत्य सनातन स्वीकार किया है। निदा अब निधि नाम से जानी जाएँगी। उन्होंने रचित कुमार नाम के हिन्दू युवक से वैदिक विधि-विधान से विवाह किया। यह विवाह एक हिन्दू मंदिर में हुआ, जिसमें बाराती और घराती की भूमिका राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना नाम के एक संगठन के सदस्यों ने निभाई। शादी के दौरान जय श्री राम के नारे लगे। निदा और रचित ने एक साथ हवन-पूजन किया।

ऑपइंडिया ने राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना के अध्यक्ष विकास हिन्दू से बात की। उन्होंने हमें बताया कि परवेज की 20 वर्षीया बेटी निदा बानो और रचित में 3 साल से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। निदा मूलतः इमलिया थानाक्षेत्र सीतापुर जिले की रहने वाली हैं। वहीं 22 साल के रचित कुमार निदा के पड़ोसी हैं। दोनों एक साथ एक ही स्कूल में पढ़े थे। निदा के परिजन इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। प्रेम-प्रसंग की जानकारी होने पर निदा के भाई ने अपनी बहन का गला दबा कर मारने की भी कोशिश की थी। इन लोगों ने रचित के घर तक जाकर धमकियाँ दी थीं।

आखिरकार रचित और निदा ने विकास हिन्दू से सम्पर्क किया। विकास ने उन्हें सम्मान और सुरक्षा दिलाने का वादा किया। पहले निदा बानो का शुद्धिकरण करवा कर उनका नामकरण निधि के तौर पर किया गया। बाद में सीतापुर शहर के कालीपीठ मंदिर में दोनों का विवाह सम्पन्न हुआ है।

विवाह से निदा बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें तीन तलाक और हलाला जैसे बातें सुन कर डर लगता था। हिन्दू धर्म में घर वापसी और रचित को अपने पति के तौर पर पाकर निदा बेहद खुश हैं। राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना ने प्रशासन से इस नवदम्पति को सुरक्षा देने की माँग की है। ऑपइंडिया के पास विवाह संबंधी सभी कागजात मौजूद हैं।

‘गिरफ्तारी से आजादी’ अपने घोषणापत्र में लिखने वाली कॉन्ग्रेस ने गिरफ्तार करवाया एक आम नागरिक को… ‘न्याय’ सिर्फ एक परिवार तक सीमित होगा?

कॉन्ग्रेस पार्टी के मेनिफेस्टो के बारे में लिखने पर ‘भीखू म्हात्रे’ नाम के सोशल मीडिया यूजर को बेंगलुरु पुलिस ने गोवा में जाकर गिरफ्तार कर लिया। खास बात ये है कि ‘भिकू म्हात्रे‘ कॉन्ग्रेस पार्टी के उसी मेनिफेस्टो के बारे में बता रहे थे, जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी ने ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ जैसी ‘बड़ी-बड़ी’ लिखी हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में दावा किया है कि वो ‘मीडिया’, ‘सोशल मीडिया’, ‘बिना वजह गिरफ्तारी’ जैसी चीजों से लोगों की रक्षा करेगी। वो ‘जेल नहीं बेल’ को अधिकार बनाएगी। लेकिन ये सब कैसे?

कॉन्ग्रेस की जिन राज्यों में सरकारें हैं या फिर कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाले टूटे-फूटे गठबंधन इंडी अलायंस की, वहाँ सोशल मीडिया से लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया तक का दमन किया जा रहा है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की पुलिस गोवा से ‘भीखू म्हात्रे’ को गिरफ्तार करती है, तो कॉन्ग्रेस की सहयोगी डीएमके की पुलिस की बिहार से, आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार की पुलिस यूपी से बाकायदा ‘गिरफ्तारी के लिए किडनैपिंग’ करती है, तो ममता बनर्जी की सरकार संदेशखाली मुद्दे की कवरेज करने मात्र से मीडिया कर्मियों पर दनादन मुकदमे लाद देती है। वैसे, कॉन्ग्रेस नीत महाविकास आघाड़ी की महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों के खिलाफ क्या क्या कदम उठाए, वो किसी को याद दिलाने भर की जरूरत नहीं। अर्नब गोस्वामी के मामले में उसे कोर्ट से बुरी तरह लताड़ भी मिली और वो बाइज्जत सभी मामलों में बरी भी हुए।

इन सबके बावजूद कॉन्ग्रेस पार्टी की हिम्मत देखिए, वो मेनिफेस्टो में ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ जैसे भारी भरकम शब्द का तो इस्तेमाल करती है, लेकिन भिकू म्हात्रे नाम से एक्स प्रोफाइल चलाने वाले को सिर्फ इसलिए कर्नाटक की बेंगलुरु पुलिस गिरफ्तार करती है, क्योंकि उन्होंने ‘कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में मुस्लिम शब्द के इस्तेमाल’ की बात जोर देकर कही, जिसे खुद कॉन्ग्रेस समर्थक नकार रहे थे। देखिए, कॉन्ग्रेस अपने मेनिफेस्टो में बेलगमा शक्तियों, कुर्की, जब्ती, गिरफ्तारी की सिर्फ ‘बात’ कैसे लिख रही है।

कॉन्ग्रेस मेनिफेस्टो का स्क्रीनशॉट

HT की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु में 29 अप्रैल 2024 को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। ये शिकायत उनके किसी पोस्ट को लेकर थी, जिसमें सेक्शन 153(ए) और आईटी एक्ट की धारा 66(सी) के तहत केस दर्ज किया गया था। हालाँकि कहा ये जा रहा है कि वो ट्वीट भी डिलीट हो चुका है। इसके बावजूद बेंगलुरु पुलिस न सिर्फ गोवा पहुँची, बल्कि उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया।

दरअसल, उन्हें जिस ट्वीट को लेकर गिरफ्तार किया गया है, उसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो की बात कही है। बेंगलुरु पुलिस की एफआईआर में भी इस बात का जिक्र है, जिसमें उन्होंने लिखा है, ‘ये हर लिबरल और पिद्दी के मुँह पर मारो, जो ये कह रहा है कि कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में ‘मुस्लिम’ शब्द का जिक्र नहीं है। इसमें एससी/एसटी का भी जिक्र है।’ उन्होंने कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो से जुड़ी सामग्री भी पोस्ट की थी। ये मामला उस बात से जुड़ा है, जिसमें कॉन्ग्रेस ने वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन की बात कही थी और उसमें इसे मुस्लिमों, एससी-एसटी को देने की बात थी। कॉन्ग्रेस और उसके समर्थक इस बात को नकार रही थी, जिसके बाक भिकू म्हात्रे ने मेनिफेस्टो का वो हिस्सा शेयर किया था, जिसमें मुस्लिमों और एससी-एसटी का जिक्र किया गया था। बस, इतना ही काफी था कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार के लिए, और गोवा तक भेज दी बेंगलुरु पुलिस, करवा लिया भिकू म्हात्रे को गिरफ्तार…

बहरहाल, इस मामले में बीजेपी खुलकर भिकू म्हात्रे के साथ खड़ी हो गई है। बीजेपी ने कहा है कि वो भिकू म्हात्रे के साथ न सिर्फ खड़ी है, बल्कि उन्हें कानूनी सहायता भी प्रदान करेगी। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कड़े शब्दों में कॉन्ग्रेस की निंदा की, तो केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बेंगलुरु के सांसद तेजस्वी सूर्या से बात कर उन्हें कानूनी सहायता देने की बात कही है। वहीं, खुद तेजस्वी सूर्या ने कहा है, कॉन्ग्रेस का कदम बेहद गलत है। हम (बीजेपी) कोर्ट और कोर्ट के बाहर भिकू म्हात्रे के साथ है और लड़ाई पूरी तरह से लड़ी जाएगी।

वैसे, ये पूरा कॉन्ग्रेस की उस मनोवृत्ति को दिखाता है, जिसमें वो न्याय, समानता, अधिकार, गरीबी, ओबीसी और जाने कितनी बड़ी-बड़ी बातें करती रहती है। राहुल गाँधी एक तरफ तो पूरे समुदाय को ही गालियों से नवाजते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पर अभद्र टिप्पणियाँ करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कोई कॉन्ग्रेस की बातों का ही समर्थन कर दे और वो कॉन्ग्रेस पार्टी को अपने खिलाफ जान पड़े, तो तुरंत कानूनी कार्रवाई करती है। जिन राज्यों में कॉन्ग्रेस की सरकारें हैं, वहाँ स्थानीय तौर पर विरोधियों के दमन की बातें आती हैं, तो जहाँ कॉन्ग्रेस की सरकारें नहीं हैं, वहाँ पुलिस भेजकर लोगों को गिरफ्तार करती है। भिकू म्हात्रे का मामला ऐसा ही है। ऐसे में सवाल यही उठता है कि क्या अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार सिर्फ एक ही परिवार के पास है? बाकी लोगों के लिए इसका कोई मतलब नहीं, सिवाय इस बात से कि वो कॉन्ग्रेस को ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर वोट दें और फिर कॉन्ग्रेस उन्हें ही कुचलती रहे।

BJP रैली से लौट रहे दलित को मुस्लिम इलाके में लोहे की पाइप से मारा, दी जाति वाली गालियाँ: जीशान, नसीब, मोंटी खान सहित 30-40 पर FIR

झारखंड के हजारीबाग से दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यहाँ दलित समुदाय के एक युवक को कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा लोहे की पाइप से पीटा गया और जातिसूचक गालियाँ दी गईं। आरोपितों के नाम जीशान, नसीब और मोंटी खान है। घटना में 30-40 अन्य अज्ञात हमलावर भी शामिल बताए गए हैं। घटना के समय पीड़ित दिवाकर नायक अपनी बाइक से भाजपा की रैली से लौट रहे थे। अशोक नायक के साथ विक्की राणा नाम का एक अन्य युवक भी घायल हुए हैं। घटना शनिवार (18 मई 2024) की है। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर के 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने पीड़ित द्वारा थाने में दी गई तहरीर को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। घटना हजारीबाग के बड़कागाँव थानाक्षेत्र की है। यहाँ के रहने वाले अनुसूचित जाति के दिवाकर कुमार नायक ने बताया कि शनिवार को वो अपने 150 साथियों के साथ भाजपा की रैली में शामिल हुए थे। वापसी में वो बाइक से अपने साथी विक्की राणा के साथ गोंदलपुरा लौट रहे थे। दिवाकर की बाइक सबसे पीछे चल रही थी। इसी दौरान बादम नाम के मुस्लिम बहुल मोहल्ले में उनको रोक लिया गया।

दिवाकर को रोकने वाले में बादम निवासी जीशान, नसीब और मोंटी खान के साथ 30 से 40 अन्य अज्ञात लोग बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन सभी ने पीड़ित को जातिसूचक शब्द बोलते हुए गंदी-गंदी गालियाँ देनी शुरू कर दीं। कुछ देर बाद वहाँ मौजूद लोगों ने पास की दुकान से लोहे की पाइप निकाल कर दिवाकर और विक्की राणा को मारना शुरू कर दिया। हमले में दिवाकर के गले और चेहरे पर चोटें आईं। इस दौरान भीड़ में शामिल अन्य लोग दिवाकर और विक्की को लात-घूँसों से भी पीटते रहे।

शिकायत में पीड़ित ने बताया है कि उनके शरीर में आई चोटों की वजह से फिलहाल वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं। विक्की राणा को भी बुरी तरह से घायल बताया गया है। पीड़ित ने अपनी शिकायत के अंत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने 3 नामजदों सहित 30-40 अन्य अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज कर ली है। अब तक 3 हमलावरों के गिरफ्तार होने की खबर है। अन्य आरोपितों की पहचान और पड़ताल की जा रही है। भाजपा ने इस घटना को राज्य सरकार की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान बताया है।

मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले में मुस्लिम पक्ष भी पुलिस में शिकायत देने की तैयारी कर रहा है। उनका आरोप है कि बड़कागाँव मस्जिद के पास आपत्तिजनक नारेबाजी की गई थी, जिससे माहौल बिगड़ गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

‘कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में मुस्लिम’ : सिर्फ इतना लिखने पर ‘भिकू म्हात्रे’ को कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार किया, बोलने की आजादी का गला घोंट लोकतंत्र बचा रही INDI?

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने शनिवार (18 मई 2024) को देर शाम एक सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर को गोवा से गिरफ्तार कर लिया है। सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर ‘भिकू म्हात्रे’ नाम के फिक्शनल नाम से एक्स पर अपनी राय रखते हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो पर बात रखी थी, जिसकी वजह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। खास बात ये है कि कॉन्ग्रेस के जिस मेनिफेस्टो पर लिखने के बारे में ‘भिकू म्हात्रे’ को गिरफ्तार किया गया है, उसी मेनिफेस्टो का प्वॉइंट नंबर-16 ‘अभिव्यक्ति की आजादी‘ की बात करता है।

भिकू म्हात्रे के बेटे नागेश नाईक ने इसकी सूचना एक्स पर दी। नागेश नाईक ने लिखा, “मेरे पिता @MumbaiChaDon को कर्नाटक की बेंगलुरु पुलिस गिरफ्तार करके ले गई है। ट्विटर ने ई-मेल के माध्यम से सावधान किया था, लेकिन अचानक शाम को पुलिस ने दरवाजे पर दस्तक दिया और मेरा पिता को साथ ले गई। महत्वहीन एफआईआर के नाम पर ये किया गया।”

बताया जा रहा है कि उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट किया था, जिसमें कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में मुस्लिम शब्द के इस्तेमाल की बात कही थी। बेंगलुरु पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में उस ट्वीट का जिक्र है। जिसमें भिकू म्हात्रे ने लिखा था, ‘ये हर लिबरल और पिद्दी के मुँह पर मारो, जो ये कह रहा है कि कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में ‘मुस्लिम’ शब्द का जिक्र नहीं है। इसमें एससी/एसटी का भी जिक्र है।’ उन्होंने कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो से जुड़ी सामग्री भी पोस्ट की थी।

इससे पहले, शनिवार (18 मई 2024) को खुद भिकू म्हात्रे (एक्स प्रोफाइल नाम) ने ही एक्स द्वारा भेजे गए मेल की सूचना दी थी, जिसमें एक्स ने एफआईआर की सूचना दी थी और सावधान किया था। उन्होंने लिखा था, ‘ तो कॉन्ग्रेस मुझे सच बोलने के लिए दबाना चाहती है। मैं किसी भी अन्याय के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार हूँ और पूरी न्यायिक लड़ूँगा, चाहे इसके लिए मुझे सर्वोच्च न्यायालय तक ही क्यों न जाने पड़े। मैंने कभी भी किसी को नुकसान पहुँचाने वाला या कम्युनल कमेंट पोस्ट नहीं लिखा है।’

दरअसल, एक्स ने उन्हें मेल के माध्यम से सूचित किया था, “हमें बेंगलुरु सिटी मजिस्ट्रेट की तरफ से आपके एक्स अकाउंट (@MumbaichaDon) को लेकर कोर्ट ऑर्डर मिला है, जिसमें आपके अकाउंट से जुड़ी जानकारी माँगी गई है।” एक्स ने आगे लिखा था कि हम आपको कानूनी सहायता तो नहीं दे सकते, लेकिन आप अपने वकील से इस बारे में जरूर चर्चा कर लें।

भारतीय जनता पार्टी के महासचिव विनोद तावड़े ने कॉन्ग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कॉन्ग्रेस मेनिफेस्टो पर अपनी राय रखने वाले @MumbaiChaDon की कर्नाटक पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की निंदा करता हूँ। ये अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले का बेहद खराब और खतरनाक उदाहरण है। कॉन्ग्रेस वालों को ये समझने की जरूरत है कि विभिन्न विचारों से लोकतंत्र मजबूत होता है, विचारों को कुचलने से नहीं।

इस मामले में एक्स पर कई लोगों ने कॉन्ग्रेस की निंदा की है। बता दें कि ये पहला मामला नहीं है, जिसमें एक्स पर रखे गए विचारों की वजह से कॉन्ग्रेस की सरकारों ने इतना बड़ा कदम उठाया हो। पहले भी ऐसे मामले आ चुके हैं। पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने तो मुजफ्फरनगर से यूट्यूबर रचित को दिन-दहाड़े उठा लिया था। वो दिल्ली से एक पारिवारिक विवाह समारोह में शामिल होने गए थे।

पश्चिम बंगाल में 4 मंदिरों में तोड़फोड़, मूर्तियों को तोड़ा : एक ही रात में प्लानिंग के तहत किया गया हमला? सड़क पर उतरा हिंदू समुदाय

पश्चिम बंगाल में शुक्रवार (17 मई 2024) की रात को एक साथ 4 हिंदू मंदिरों को तहस नहस किया गया। मंदिरों में रखी मूर्तियों को तोड़ डाला गया। ये मंदिर जलपाईगुड़ी जिले के धूपगुड़ी स्थिति खोलई ग्राम में स्थित हैं। जिन मंदिरों को नुकसान पहुँचाया गया, उनमें दो मंदिर काली माता के, एक शिव मंदिर और एक शनि मंदिर है। इन चारों मंदिरों में एक ही रात में हुआ हमला साफ तौर पर बताता है कि मंदिरों पर हमले पूरी तरह से प्लान करके किए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन मंदिरों को नुकसान पहुँचाया गया है, उनके नाम है चौपाथी काली माता मंदिर, सत्वेंदि शिव मंदिर, जंगलीबाड़ी काली मंदिर और गोरेरारी शनि मंदिर। इन मंदिरों को नुकसान पहुँचाने की जानकारी शनिवार की सुबह मिली, जिसके बाद पूरे इलाके में हिंदुओं का गुस्सा भड़क उठा। शनिवार (18 मई 2024) को हिंदुओं ने मंदिरों पर हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने तमाम सड़कों, जिसमें नेशनल हाईवे 27 भी है, को कई जगहों पर जाम कर दिया। इस दौरान शालबारी और पलकटा के साथ ही कई जगहों पर ट्रेन की पटरियों को भी जाम कर दिया गया, वहीं कई रोड क्रॉसिंग भी ब्लॉक कर दी गई।

इस दौरान घटनास्थल की तरफ जा रही पुलिस को भी रास्ते में रोक लिया गया। प्रदर्शन की वजह से कई जगहों पर भयंकर जाम की समस्या भी खड़ी हो गई। इश दौरान खंडबहले के डीएसपी उमेश गनपत ने भारी पुलिस फोर्स के साथ मोर्चा संभाला और स्थिति पर काबू पाया।

इस घटमाक्रम के बाद स्थानीय हिंदुओं ने पंचायत का आयोजन किया, जिसमें स्थानीय संत भी सम्मिलित हुए। हजारों लोगों की उपस्थिति में पुलिस को शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

सत्वेंदि शिव मंदिर के सेक्रेटरी ने अपनी शिकायत में कहा कि ये घटनाक्रम 17 और 18 मई की रात का है, जब खलईग्राम में काली माता की मूर्ति को नुकसान पहुँचाया गया, तो सत्वेंदि के शिव मंदिर में भी तोड़फोड़ की गई। इस घटना से हिंदुओं की धार्मिक आस्थाओं को चोट पहुँचाया गया। इस मामले में खलईग्राम काली मंदिर के सचिव ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया है कि 18 मई की सुबह 5 बजे एक स्थानीय व्यक्ति ने इस तोड़फोड़ को देखा। स्थानीय लोगों ने 19 मई 2024 को धूपगुड़ी सब डिवीजन में बंद का आह्वान किया है।

डीएसपी उमेश गणपत ने कहा कि ये घटना अस्वीकार्य है। हम अपराधियों के खिलाफ कड़े उदम उठाएँगे और पुलिस मामले की जाँच कर रही है। उन्होंने लोगों से कानून को अपने हाथों में न लेने की अपील की है।

इस मामले में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी की नीतियों को लेकर हमला बोला। पश्चिम बंगाल बीजेपी ने एक्स पर लिखा, ‘यह हिंसक कृत्य टीएमसी की निरंतर तुष्टिकरण की राजनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है, जो हिंदू समुदाय को लगातार खतरे में डालता है। स्थानीय निवासी इस ज़बरदस्त आक्रामकता का उचित विरोध कर रहे हैं। हम तत्काल कार्रवाई की माँग करते हैं।’

विहिप के प्रवक्ता ने कहा, ”पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिला अंतर्गत धुपगुड़ी में कल रात (17-18 मई) कॉलेज के पास चार मंदिरों में हुई तोड़फोड़ की घटना स्थानीय प्रशासन की विफलता की वजह से हुई।’

जिसे वामपंथन रोमिला थापर ने ‘इस्लामी कला’ से जोड़ा, वह मस्जिद इब्राहिम शर्की ने मंदिर तोड़ बनवाई थी: जानिए अटाला माता मंदिर लेने क्यों हिंदू पहुँचे कोर्ट

जौनपुर की अटाला मस्जिद को हिंदू मंदिर बताने वाली याचिका कोर्ट में दाखिल हुई है। अब पूरे देश में बहस छिड़ गई है कि क्या अटाला मस्जिद वाकई में हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाया गया है? किवदंतियों को छोड़ दें तो तमाम विद्वानों ने समय-समय पर ये साबित किया है कि अटाला मस्जिद को अटाला माता मंदिर की जगह पर ही बनाया गया है। ऐसे एक नहीं, अनेक प्रमाण है, जिसमें साफ तौर पर दर्ज है कि अटाला माता के मंदिर को तोड़कर अटाला मस्जिद बनाई गई थी और उसका नाम भी इसीलिए अटाला मस्जिद पड़ा। चूँकि जौनपुर में उस समय राज कर रहे मुस्लिम शर्की शासकों द्वारा माता मंदिर को तोड़कर अटाला मस्जिद बनाई गई, बावजूद इसके वामपंथी इतिहासकार इसे इस्लामी वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना बता प्रचारित करते रहे। हालाँकि तमाम तत्थों से ये साफ है कि अटाला मस्जिद का निर्माण अटाला माता के मंदिर पर ही हुआ है।

इस दावे की पुष्टि तमाम विद्वानों की लिखी किताबें भी करती हैं। The Art and Architecture of Islam: 1250-1800 में शीला ए. ब्लेयर और जोनाथन एम ब्लूम ने पेज नंबर 198-199 पर लिखा है, ‘अटाला मस्जिद (1408) में इब्राहीम शर्की ने अटाला माता को समर्पित हिंदू मंदिर को तोड़कर उसी की नींव पर बनवाया था। ये उस समय की बाकी मस्जिदों से अलग भी है।’

The Art and Architecture of Islam: 1250-1800

मध्य कालीन भारतीय समाज एवं संस्कृति में प्रो (डॉ) फणींद्र नाथ ओझा ने पेज नंबर 93 पर ‘हिंदू-इस्लामी वास्तुकला का विकास’ शीर्षक के तहत लिखा है, ‘अटाला मस्जिद वास्तुकला की शर्की शैली का सबसे प्रांरभिक और सर्वाधिक सुंदर नमूना है। जिस जगह पर उसका निर्माण हुआ, वहाँ पहले अटाला देवी का मंदिर था। मंस्जिद का निर्माण उस मंदिर की सामग्री से हुआ।’

हिंदू-इस्लामी वास्तुकला का विकास

The Wonder That Was India Volume 2 में सैय्यद अतहर अब्बास रिजवी ने अटाला मस्जिद के इतिहास को लिखा है। उन्होंने शर्की वंश और अटाला मस्जिद के निर्माण के बारे में लिखा, “शर्की डायनेस्टी कम समय तक जौनपुर में रहा, लेकिन उसके एक रूलर इब्राहीम शाह शर्की (1401-40) एक महान निर्माता थे। साल 1408 में उन्होंने अटाला मस्जिद का काम पूरा करवाया। ये अटाला देवी मंदिर की जगह पर बना था, जिसे फिरूज ने 1376 में तोड़ा था। अटाला मस्जिद में हिंदू मंदिर के पिल्लरों, छतों व अन्य सामानों का इस्तेमाल किया गया। इसे 22.87 मीटर ऊँचा बनाया गया।”

The Wonder That Was India Volume 2

वहीं, रोमिला थापर नाम की वामपंथी इतिहासकार ने रोमिला थापर ने फ्रिट्स लेहमान का नाम लेकर जौनपुर के शर्की वास्तुशिल्प के हिसाब से बने अटाला मस्जिद को मूलत: मंदिर साबित करने की कोशिश की है। रोमिला थापर ने उन तथ्यों और दावों को झुठलाने का भरपूर प्रयास किया है, जिसमें अटाला मस्जिद के वजूद को मूलत: मंदिर पर आधारित बताया गया है।

रोमिला थापर ने अपनी ‘किताब इतिहास की पुनर्व्याख्या’ के पेज नंबर 44 पर लिखा है, ‘अटाला मस्जिद का शिलालेख यह दर्शाता है कि कुशल हिंदू कारीगरों ने इस इमारत पर मुसलमानों के साथ मिलकर काम किया था। लेहमान इस दावे को झूठा साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत करते हैं कि जौनपुर की अटाला मस्रिज (पर्सी ब्राउन के शब्दों में) “अटाला देवी के हिंदू मंदिर के स्थान पर बनी थी, और इसके निर्माण में इस मंदिर की सामग्री और आसपास के मंदिरों की सामग्री को साथ मिलाकर प्रयोग किया गया गया था।” ऐसी एक किवदंती 1802 के एक ग्रंथ जौनपुरनामा में दर्ज की गई थी, मगर ऐसी किसी देवी का उल्लेख न तो प्रतिमाशास्त्र के किसी ग्रंथ में मिलता है और न ही किसी उपसांस्कृतिक परंपरा में। न ही इमारन में (हिंदू समान के विपरीत) इस्लाम-पूर्व सामग्री का पर्याप्त इस्तेमाल हुआ है। लेहमान ने मस्जिद के नाम का स्रोत ‘अट्टाला’ में पाया है, जिसका अर्थ है छावनी या बहुत ऊँची इमारत और यह सुझाया है कि जौनपुरनामा की किवदंती काल्पनिक पुनर्ग्रहण की एक मिसाल है।’

बहरहाल, अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने कोर्ट में जो याचिका दाखिल की है, उसके बारे में उन्होंने विस्तार से मीडिया को भी जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि अटाला मस्जिद मूल रूप से अटाला माता मंदिर है। पुरातत्व विभाग और कई ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार अटाला माता मंदिर का निर्माण कन्नौज के राजा जयचंद्र राठौर ने करवाया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के प्रथम निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अटाला माता मंदिर को तोड़ने का आदेश फिरोज शाह ने दिया था, लेकिन हिंदुओं के संघर्ष के कारण मंदिर को नहीं तोड़ा जा सका। बाद में इब्राहिम शाह ने अतिक्रमण किया और मंदिर का उपयोग मस्जिद के रूप में करने लगा।

उन्होंने कलकत्ता स्कूल ऑफ आर्ट के प्रिंसिपल ईबी हेवेल की पुस्तक का भी हवाला दिया है, जिसमें अटाला मस्जिद की प्रकृति और चरित्र को हिन्दू बताया है। यही नहीं, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अनेक रिपोर्ट्स में अटाला मस्जिद के चित्र दिए गए हैं। इनमें त्रिशूल, गुड़हल के फूल आदि मिले हैं। इसके अलावा साल 1865 के एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल के जनरल में अटाला मस्जिद के भवन पर कलश की आकृतियों का होना बताया गया है।

अटाला मस्जिद को लेकर जो केस दायर किया गया है, उस बारे में मूल खबर ये है।- ‘जिसे कहते हैं अटाला मस्जिद, उसकी दीवारों पर त्रिशूल-फूल-कलाकृतियाँ’: ​कोर्ट पहुँचे हिंदू, कहा- यह माता का मंदिर

रोफिकुल इस्लाम जैसे दलाल कराते हैं भारत में घुसपैठ, फिर भारतीय रेल में सवार हो फैल जाते हैं बांग्लादेशी-रोहिंग्या: 16 महीने में अकेले त्रिपुरा से BSF ने 1000+ घुसपैठिए पकड़े

त्रिपुरा में फिर से 4 बांग्लादेशी पकड़े गए हैं। नाम हैं- जहाँगीर आलम, एमएन हुसैन, ओमरान हुसैन और रियाद हुसैन। इनको घुसपैठ कराने वाला भारतीय दलाल रोफिकुल इस्लाम भी पकड़ा गया है।

हड़बड़ी में अगरतला रेलवे स्टेशन में प्रवेश कर रहे इन चारों बांग्लादेशियों पर सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की एक टीम को संदेह न हुआ होता तो ये चेन्नई या उसके आसपास के इलाकों में उसी तरह बस जाते, जैसे देश के अन्य हिस्सों में ये बसे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 17 मई 2024 की रात चारों बांग्लादेशी चेन्नई जाने के लिए अगरतला-सिकंदराबाद एक्सप्रेस में सवार होने वाले थे। हिरासत में लिए जाने के बाद इन्होंने शुरुआत में खुद को भारतीय बताकर अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश भी की। हालाँकि सख्ती से पूछताछ के बाद यह बात सामने आई कि रोफिकुल इस्लाम की मदद से इनलोगों ने बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत की सीमा में प्रवेश किया है।

रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी तापस दास के हवाले से कहा गया है, “हमने उन्हें संदेह के आधार पर अगरतला रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया। शुरू में उन्होंने भारतीय होने का दावा किया, लेकिन पूछताछ के दौरान हमें पता चला कि उनमें से चार बांग्लादेशी थे।”

हाल के समय में त्रिपुरा से घुसपैठियों के पकड़े जाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 11 मई 2024 को भी आठ बांग्लादेशी और उनकी मदद करने वाले एक भारतीय दलाल को अगरतला रेलवे स्टेशन से ही पकड़ा गया था। ये लोग महाराष्ट्र की ट्रेन में सवार होने वाले थे। उससे पहले 5 मई 2024 को 11 बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए थे, जिनमें 4 बच्चे थे। ये सभी लोग भारत में सफलतापूर्वक घुसपैठ करने के बाद बेंगलुरु चले गए थे। लेकिन वहाँ से लौटते वक्त त्रिपुरा के धलाई जिले के सीमावर्ती गाँव मचकुमिर से पकड़े गए।

उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश से त्रिपुरा 856 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इस सीमा से घुसपैठ धड़ल्ले से बढ़ रहा है जिसकी पुष्टि सीमा सुरक्षा बल (BSF) के आँकड़े भी करते हैं। बीएसएफ ने जनवरी 2023 से 15 अप्रैल 2024 तक यानी करीब 16 महीने में अकेले त्रिपुरा से 1018 घुसपैठिए पकड़े हैं। इनमें 498 बांग्लादेशी हैं। पकड़े गए बांग्लादेशियों में औरतों और बच्चों की भी अच्छी-खासी तादाद है।

2023 में त्रिपुरा से पकड़े गए 337 बांग्लादेशियों में 93 औरतें और 24 बच्चे थे। वहीं इस साल 15 अप्रैल तक पकड़े गए 161 बांग्लादेशियों में 43 औरतें और 19 बच्चे हैं। बांग्लादेश के रास्ते त्रिपुरा में घुसपैठ करने वाले अकेले बांग्लादेशी ही नहीं हैं। इसी समय अंतराल में बीएसएफ 124 रोहिंग्या को भी गिरफ्तार कर चुकी है।

बीएसएफ के अनुसार साल 2023 में उसने 744 घुसपैठिए पकड़े थे। इनमें 112 रोहिंग्या और 337 बांग्लादेशी थे। घुसपैठियों के पकड़े जाने की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। 2022 में बीएसएफ ने 369 घुसपैठिए पकड़े थे। इनमें 150 बांग्लादेशी और 57 रोहिंग्या थे। इसी तरह 2021 में 208 घुसपैठिए पकड़े गए थे, जिनमें 93 बांग्लादेशी थे।

रेप, जबरन निकाह, गर्भपात… बहरीन में नौकरी करती थी UP की हिंदू लड़की, कर्नाटक के सैफुद्दीन ने पहले दोस्ती की फिर जबरन बनाया मुस्लिम

उत्तर प्रदेश की हिंदू लड़की का बहरीन में कर्नाटक के निवासी सैफुद्दीन ने बलात्कार किया। उसका धर्म परिवर्तन कराया और निकाह कर लिया। फिर उसका धोखे से 5 माह के भ्रूण का गर्भपात करा दिया और अब उससे दहेज माँगा जा रहा है। यही नहीं, कर्नाटक में सैफुद्दीन, उसकी मंगेतर और उसके घर वालों ने उस लड़की के साथ मारपीट की और दहेज माँग रहे हैं। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी की रहने वाली हिंदू लड़की 7 साल से बहरीन में काम कर रही थी। वहाँ कर्नाटक का रहने वाला सैफुद्दीन भी काम करता था। दोनों में दोस्ती हो गई, जिसका फायदा उठाकर सैफुद्दीन ने उसका बहरीन में रेप किया। इस मामले में पीड़ित ने सैफुद्दीन के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया। बाद में पता चला कि लड़की गर्भवती हो गई है, जिसके बाद उसके ऊपर दबाव डालकर केस वापस कराया गया और ये कहा गया कि वो अपने बलात्कारी से ही धर्म परिवर्तन कर निकाह कर ले। ऐसे में लड़की का धर्म परिवर्तन का उसका निकाह करा दिया गया। वो कर्नाटक चली गई, लेकिन उसके साथ फिर से बड़ा धोखा हुआ।

सैफुद्दीन उसे जाँच के नाम पर मुंबई ले गया, जहाँ उसने उसका धोखे से गर्भपात करा दिया। यही नहीं, बाद में सैफुद्दीन उसे लेकर कर्नाटक चला गया, जहाँ सैफुद्दीन की मंगेतर, उसके भाई और परिवार के अन्य लोगों ने उसके साथ मारपीट की और दहेज देने का दबाव बनाया जाने लगा। इसके बाद लड़की ने पुलिस से शिकायत की।

अपनी शिकायत में पीड़ित ने पूरी घटना बताई है। पीड़ित ने कहा, “बहरीन में काम करने के दौरान उसकी मुलाकात सैफुद्दीन से हुई और वे करीब आ गए। एक दिन, उसने बहरीन में मेरे साथ बलात्कार किया और मैंने वहाँ बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई। जब मामले की जाँच चल रही थी, तब सैफुद्दीन और उसके परिवार के सदस्यों ने मुझे बलात्कार के परिणामस्वरूप पाँच महीने की गर्भवती होने के बाद शिकायत वापस लेने के लिए राजी किया। उन्होंने मुझ पर धर्म बदलने का भी दबाव डाला। बाद में 13 फरवरी 2024 को मुस्लिम कानून के मुताबिक मेरी शादी सैफुद्दीन से कर दी गई। इसके बाद सैफुद्दीन ने मुझे चिकित्सीय परामर्श के लिए मुंबई आने के लिए बरगलाया और मुझे एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने गुप्त रूप से पाँच महीने के भ्रूण का गर्भपात कर दिया।”

पीड़िता ने कहा कि फिर उसे कर्नाटक के बीदर में सैफुद्दीन के घर ले जाया गया, जहाँ सैफुद्दीन की मंगेतर मोनिका, उसके बड़े भाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। थाना प्रभारी गुडंबा एनके श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस ने सैफुद्दीन समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ दहेज संबंधी उत्पीड़न का मामला दर्ज कर लिया है।