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न घर है न गाड़ी… कैश में हैं सिर्फ 52000 रुपए: PM मोदी ने चुनाव आयोग को दिया संपत्ति का ब्यौरा, बताया- जो मिला सब सरकारी वेतन और बैंक के ब्याज से

लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर आज (14 मई 2024) जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी लोकसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया है। लगातार तीसरी बार इस सीट से चुनावी मैदान में उतरते हुए पीएम मोदी ने नामांकन के साथ अपनी संपत्ति का ब्यौरा दिया। उन्होंने इस संबंध में एक हलफनामा ईसी के समक्ष दायर किया, जिसकी हर जानकारी अब मीडिया में है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जमा कराए गए हलफनामे से पता चलता है कि पीएम मोदी के पास निजी जीवन में न तो अपनी कार है और न ही अपना कोई घर है। वहीं कैश की बात करें तो उनके पास 52 हजार कैश है और कुल संपत्ति की बात करें तो उनकी चल-अचल संपत्ति मिलाकर 3.02 करोड़ रुपए संपत्ति बताई गई है।

अपने हलफनामे में उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाई गई उनकी संपत्ति 2018-19 में 11,14,230 रुपए थी; 2019-2020 में ये 17,20,760 हुई, 2020-2021 में ये आय थोड़ी घटी लेकिन 2021-2022 में ये 15,41,870 हो गई और 2022-2023 में ये 23,56,080 हुई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया है कि उनकी बढ़ी इनकम का सोर्स सरकारी वेतन और उनकी बचत पर अर्जित ब्याज है।

उन्होंने ये भी बताया कि उनके पास न तो कोई घर है और न ही कोई गाड़ी है, लेकिन, पिछले पाँच साल में पीएम मोदी की चल संपत्ति में इजाफा हुआ है, साथ ही उनके खिलाफ कोई केस भी नहीं है।

दरगाह पर जियारत करने गई थी विधवा, चादर बेचने वाले राहत ने किया रेप: आवाज निकालने पर मुँह में कपड़ा ठूँसा, बात न सुनने पर कत्ल की धमकी; FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की एक दरगाह पर विधवा महिला से रेप का मामला सामने आया है। पीड़िता यहाँ बड़े सरकार नाम की दरगाह पर अपनी बेटी के साथ जियारत करने आई थी। रेप का आरोप राहत नाम के युवत पर लगा है। उसने मुँह खोलने पर महिला को जान से मार डालने की धमकी भी दी। राहत की दरगाह परिसर में चादर और सिन्नी (चढ़ाने वाली मिठाई) की दुकान है। उस पर आरोप है कि वह इलाज के नाम पर आए दिन नई-नई लड़कियों का बलात्कार करता है। मामले की शिकायत सोमवार (13 मई 2024) को की गई है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला बदायूं के थाना कोतवाली क्षेत्र का है। सोमवार को यहाँ पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि वो विधवा है और मूल रूप से UP के ही बिजनौर जिले की रहने वाली है। पीड़िता 6 वर्षीया बच्ची की माँ है। वह 1 साल से अपनी बेटी के साथ बदायूँ के बड़े सरकार की दरगाह में जियारत करने आ रही थी। इसी दरगाह के परिसर में राहत नाम के युवक ने दुकान खोल रखी है। वह सिन्नी (मजार पर चढ़ाने वाली मिठाई) और चादरें बेचता है।

शिकायत में बताया गया है कि लगभग 15 दिन पहले राहत पीड़िता को बहला-फुसला कर अपने कमरे में ले गया। यहाँ उसने पीड़िता से बलात्कार किया। जब पीड़िता ने राहत का विरोध किया तो उसे गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए पीटा गया। महिला ने शोर मचाने की कोशिश की तो उसके मुँह में कपड़ा ठूंस दिया गया। रेप के बाद राहत ने पीड़िता को धमकाते हुए कहा, “अगर तूने मेरी भविष्य में बात नहीं मानी तो मैं तुझे जान से मार दूँगा”। पीड़िता ने खुद को बेसहारा बताते हुए राहत से अपनी जान का खतरा भी बताया है।

शिकायत में महिला ने आगे बताया है कि राहत आए दिन नई-नई लड़कियों को जियारत के नाम पर बुला कर उनसे बलात्कार करता है। लड़कियाँ विरोध करें तो उन्हें पीटा जाता है। महिला का दावा है कि राहत खुलेआम दावा करता है कि वो पुलिस को पैसा देता है। महिला ने खुद को डरा बताते हुए अपने साथ अपनी बेटी की जान-माल की सुरक्षा की गुहार पुलिस से लगाई है। पुलिस ने राहत को नामजद करते हुए मामले में FIR दर्ज कर ली है। मामले की जाँच की जा रही है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

बदायूँ में दोनों बच्चों का कातिल भी जाता था इसी दरगाह पर

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में गुरुवार (19 मार्च 2024) को 2 हिन्दू बच्चों की गला रेत कर निर्ममता से हत्या कर दी गई थी। इस हमले में तीसरा बच्चा घायल हो गया था। पुलिस ने इस मामले में 20 मार्च को घटना के मुख्य आरोपित साजिद को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था वहीं फरार चल रहे 25 हजार के इनामी जावेद को इसी दिन बरेली से दबोच लिया गया था। दोनों हमलावर सगे भाई ही हैं। ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी में यह बात निकल कर सामने आई थी कि मुख्य आरोपित साजिद भी बचपन से इसी बड़े सरकार की दरगाह पर ले जाया जाता था।

तब, साजिद की दादी ने भी दावा किया था कि उनके पोते की मानसिक बीमारी का इलाज बचपन में बड़े सरकार की ही दरगाह पर ले जाकर करवाया जाता था। साजिद का पूरा गाँव भी खुद को बड़े सरकार की दरगाह का मुरीद बताया था। जिस जगह दोनों बच्चों की हत्या हुई थी वहाँ से महज कुछ ही मिनटों के फासले पर बड़े सरकार की दरगाह मौजूद है। ताजा मामले में पीड़िता ने भी अपना और कई अन्य महिलाओं का इलाज इस दरगाह पर चलने की बात कबूली है।

‘तीसरी बीवी आने वाली है’: सैफ अली खान के बाजू पर नहीं दिखा ‘करीना’ वाला टैटू, सोशल मीडिया में तलाक तक के लग रहे कयास

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान की हाल ही में एक तस्वीर पर चर्चाएँ चालू हो गई हैं। सैफ अली खान की मुम्बई एयरपोर्ट से सामने आई एक तस्वीर पर कहा गया कि उन्होंने अपनी पत्नी कपूर खान के नाम का टैटू कवर करवा दिया है। करीना का नाम ना दिखने को लेकर कई तरह की चर्चाएँ तेज हो गई हैं।

मुंबई एयरपोर्ट से सामने आई एक तस्वीर में दिखता है कि सैफ अली खान के हाथ पर पहले हिंदी में लिखा हुआ ‘करीना’ का टैटू अब नहीं दिख रहा है। इस पर करीना की जगह अब एक नई आकृति बनी है और करीना नाम नहीं दिख रहा है। इसको लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर तरह तरह की टिप्पणियाँ की।

एक यूजर ने इन्स्टाग्राम पर लिखा, “वाइफ भी चेंज होगी।”

एक और यूजर ने लिखा, “अभी टैटू बदला है अब घरवाली बदलेगा”

एक और यूजर ने लिखा, “अब किसी और शिकार के चक्कर में होगा।”

एक और यूजर ने करीना और सैफ के बीच तलाक के कयास भी लगाए।

एक यूजर ने लिखा कि तीसरी बीवी आने वाली है, इसलिए हटवा दिया।

एक और यूजर ने लिखा, “हो गया काम तीसरी बीवी आने वाली है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैफ अली खान ने यह टैटू 2008 में ही बनवा लिया था। यह टैटू तब से बना हुआ था। सैफ ने इस टैटू को लेकर कहा था, “मैं कहना चाहता था, ‘देखिए, मैंने यही किया है और यह एक बहुत गंभीर कमिटमेंट है। जब भी आप मुझे ‘कैसानोवा’ कहेंगे तो मैं इसे आपको दिखा सकता हूँ, ‘लेकिन मैंने पहले ऐसा नहीं किया है।”

हालाँकि, अब इसे सैफ अली खान ने क्यों कवर करवाया है, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी बताया गया है कि इससे पहले भी कुछ फिल्मों के लिए सैफ अली खान इस टैटू को कवर करवा चुके हैं।

मोदी सरकार के 10 वर्षों में हर साल 5 करोड़ रोजगार का सृजन: SKOCH ग्रुप ने रिसर्च में बताया – घटी गरीबी, सरकारी योजनाएँ जमीन पर दिखा रहीं असर

भारत के वित्तीय थिंक टैंक SKOCH ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 10 वर्ष के कार्यकाल में रोजगार के आँकड़ों को लेकर अपना अध्ययन प्रकाशित किया है। संस्था का कहना है कि पिछले एक दशक में भारत में 5.14 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इसका अर्थ है कि 51.40 करोड़ साल के रोजगार मोदी सरकार में पैदा हुए। ये केवल सरकारी प्रयासों द्वारा उत्पन्न रोजगार के आँकड़े हैं। साथ ही ये भी बताया गया है कि 31.61 करोड़ क्रेडिट आधारित प्रयासों से पैदा हुए हैं।

संस्था ने अपने इस अध्ययन को ‘Modinomics’ नाम दिया है। इसे आसान शब्दों में समझें तो 2014 में मोदी सरकार के बनने के बाद से वर्तमान में 2024 तक औसतन 5.14 करोड़ रोजगार का सृजन हर साल किया गया है। पर्सन-ईयर का अर्थ होता है घंटों (वर्क आवर्स) के आधार पर 1 वर्ष में किसी व्यक्ति द्वारा किए गए काम की गणना। इस रिपोर्ट को 80 केस स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है। कई प्रकार के कर्ज और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से भी बात की गई।

ये आँकड़े 2014-24 के बीच के हैं। इस बीच रोजगार के 51.40 करोड़ अवसर पैदा हुए। इनमें से 19.79 करोड़ रोजगार के अवसर सीधे मोदी सरकार के प्रयासों से पैदा हुए। बता दें कि SKOCH ग्रुप भारत की सामजिकार्थिक स्थिति का अध्ययन करता है और समावेशी विकास के लिए 1997 से ही कार्य कर रहा है। रिसर्च में पाया गया है कि माइक्रो लोन से स्थिर और सुरक्षित रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। हर प्रत्यक्ष लोन लेने वाले ने 6.6 रोजगार पैदा किए।

इतना ही नहीं, इस गहन अध्ययन में ये भी पता चला है कि भारत में न सिर्फ गरीबी घट रही है, बल्कि घरेलू उत्पादन भी बढ़ रहा है। इस संस्था की रिपोर्ट्स को इससे पहले भी उच्च-स्तरीय स्वीकृति मिलती रही है। ‘Outcomes of ModiNomics 2014-24: A Report Card by SKOCH Group’ को अर्थशास्त्री समीर कोचर ने जारी किया है, जो कई पुस्तकें लिख चुके हैं। वो इस संस्था का चेयरमैन हैं, साथ ही एक इतिहासकार भी हैं।

‘बड़ी काशी’ में PM मोदी, ‘छोटी काशी’ में कंगना… पग-पग पर शिवधाम, 8 दिन मनता है शिवरात्रि का त्योहार; जानिए क्यों हिमाचल के मंडी को कहते हैं ‘छोटा काशी’

लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जब से बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को प्रत्याशी बनाकर मंडी से उतारा है, उसके बाद से ये क्षेत्र लगातार सुर्खियों में है। आज कंगना ने नामांकन दाखिल करने के बाद भी मंडी की महत्ता का जिक्र करते हुए इसे छोटा काशी कहा।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा- “प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी काशी-वाराणसी से नामांकन पत्र दाखिल किया है जबकि मैंने छोटी काशी-मंडी से नामांकन किया है। ये बहुत महत्वपूर्ण दिन है।” उनकी इस टिप्पणी के बाद से मंडी की चर्चा तेज है। लोग जानने के इच्छुक हैं कि मंडी को आखिर क्यों ‘छोटी काशी’ कहा जाता है उसके आध्यात्मिक महत्व क्या हैं। तो आज चलिए आपको इस खास जगह से परिचय करवाते हैं।

हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय स्थल है लेकिन इस पर्वतीय स्थल पर बसा मंडी क्षेत्र ऐसा है जिसकी सुंदरता उसे अपनी ओर खींचती है। यहाँ से लोग सुंदर पहाड़ियों का आनंद लेते हैं और आध्यात्म की अनुभूति करते हैं। मात्र  3,950 वर्ग किलोमीटर में फैले इस छोटे से क्षेत्र में 81 प्राचीन मंदिर हैं। खास बात ये है कि इनमें से ज्यादातर भगवान शिव के धाम हैं।

माना जाता है कि मंडी रियासत पर राज करने वाले सभी राजाओं की भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था थी। इसके कारण यहाँ के राजाओं ने कई शिव मंदिरों को निर्माण करवाया था। इनमें सबसे खास मंदिर एकादश रूद्र, अर्धनारिश्वर, त्रिलोकीनाथ, पंचवक्त्र, नीलकंठ महादेव, बाबा भूतनाथ, महामृत्युंज्य मंदिर माने जाते हैंये मंदिर इतने भव्य हैं और इनकी इतनी मान्यता है कि इसके दर्शन के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं।

इतना ही नहीं शिवरात्रि के समय में हिमाचल प्रदेश का यह जिला यहाँ की सुंदरता देखने योग्य होती है। शिवरात्रि के समय बड़ी संख्या में शिवभक्त यहाँ आते हैं। सब मंदिरों में पूजा करते हैं और उस माहौल का आनंद उठाते हैं जो स्थानीयों की श्रद्धा के कारण चारों ओर दिखाई देता है। इस जगह शिवरात्रि का इतना महत्व है कि यहाँ किसी के एक दिन इस त्योहार का उत्साह नहीं दिखता बल्कि पूरे 8 दिन तक जब इस त्योहार को मनाते हैं। यहाँ निर्मित शिव मंदिर और उन शिव के लिए स्थानीयों की भक्ति देखकर ही इस जगह को छोटा काशी कहते हैं।

इसके अलावा मंडी का प्राचीन महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस जिले का नाम ऋषि मांडव के नाम पर पड़ा था। बताया जाता है कि तपस्वी मांडव ने मंडी में ही अपनी घोर तपस्या की थी और उन्हें आलौकिक शक्तियाँ मिली थीं। उन्होंने अपनी तपस्या कुल्लू के नजदीक कोलसरा नामक स्थान पर एक चट्टान पर बैठकर व्यास नदी के पास की थी। इसके बाद इस जगह का नाम उनके नाम पर पड़ा। यहाँ नमक की खानें होने की वजह से इस जिले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और लोग यहाँ के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहे।

CM केजरीवाल के घर में स्वाति मालीवाल के साथ हुई थी बदसलूकी, AAP सांसद संजय सिंह ने मानी: बताया ड्राइंग रूम में विभव कुमार ने क्या-क्या किया

राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में सोमवार (13 मई, 2024) को अचानक से भूचाल आ गया था जब 9 वर्षों तक ‘दिल्ली महिला आयोग’ (DCW) की अध्यक्ष रहीं स्वाति मालीवाल के साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास में मारपीट हुई है। इसमें CM के पूर्व PA विभव कुमार का नाम आया था। स्वाति मालीवाल थाने भी पहुँची थीं, लेकिन बिना कोई लिखित शिकायत दर्ज कराए वो ऑटो से लौट गई थीं। उन्हें कुछ फोन कॉल्स आए, जिसके बाद वो वापस गई थीं।

अब पहली बार इस पूरे प्रकरण पर AAP की तरफ से प्रतिक्रिया आई है। पार्टी के राज्यसभा संसद और अरविंद केजरीवाल की तरह ही जमानत पर बाहर चल रहे नेता संजय सिंह ने इसे एक बहुत ही निंदनीय घटना बताते हुए कहा कि सुबह अरविंद केजरीवाल के आवास पर स्वाति मालीवाल मिलने के लिए पहुँची थीं और ड्राइंग रूम में इंतज़ार कर रही थीं, इस बीच विभव कुमार वहाँ पर पहुँचे और उन्होंने स्वाति मालीवाल के साथ बहुत बदतमीजी की, अभद्रता की।

संजय सिंह ने बताया कि इसके बाद स्वाति मालीवाल ने 112 नंबर पर फोन कॉल कर के पुलिस को इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। संजय सिंह का ये भी कहना है कि AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को संज्ञान में लिया है और सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। संजय सिंह ने स्वाति मालीवाल को देश-समाज के लिए बड़ा कार्य करने वाली महिला बताते हुए कहा कि वो पार्टी की वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं, हम सब उनके साथ हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया है, आम आदमी पार्टी ऐसे लोगों का समर्थन नहीं करती है। विभव कुमार को विजिलेंस डिपार्टमेंट ने हटा दिया था, उससे शराब घोटाले में भी ED पूछताछ कर चुकी है। 2007 में उस पर सरकारी कर्मचारी से मारपीट का भी आरोप लगा था। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि केजरीवाल के जेल जाने के बाद मालीवाल निष्क्रिय थीं और अमेरिका चली गई थीं, इसीलिए उन्हें इस्तीफा देने को कहा गया और ये घटना हुई।

‘मेरे बेटे के पेट-छाती में 20 बार चाकू घोंपा’: अंकित मीणा के पिता का दावा- सलमान सहित कई लोग हत्या में शामिल, पत्थर से सिर कूचने का वीडियो भी बनाया

राजस्थान के गंगापुर सिटी में 11 मई 2024 को अंकित मीणा नाम के युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। गला रेत कर हुई इस हत्या का आरोप सलमान और उसके 2 नाबालिग साथियों पर है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। अब मृतक के पिता राम बाबू सामने आए हैं। उन्होंने इस हत्याकांड में कई लोगों के शामिल होने का दावा किया है। रामबाबू ने बताया कि अंकित की कातिलों से कोई दुश्मनी नहीं थी।

ऑर्गेनाइजर की पत्रकार सुभी विश्वकर्मा ने अंकित के पिता से बात की। उन्होंने बताया कि अंकित के हत्यारों को वे नहीं जानते। शादीशुदा अंकित 2 बच्चों के पिता थे। उनका बड़ा बेटा 6 साल और बेटी 2 साल की है। रामबाबू ने बताया कि शुक्रवार (10 मई) की शाम अंकित लगभग 4 बजे अपने घर से निकला था। रात में लगभग 8 बजे अंकित ने अपने पिता को कॉल किया और 160 रुपए भेजने के लिए कहा। इसके बाद अंकित ने अपनी बाइक की चाबी खो जाने की जानकारी दी।

आखिरी कॉल में अंकित ने अपने घर से किसी को चाबी लेकर आने के लिए कहा। रामबाबू ने आगे बताया कि उनके बेटे को मारने में सलमान और उनके 2 नाबालिग साथियों के अलावा कई और लोग शामिल थे। उनका यह भी दावा है कि एक आरोपित ने उनके बेटे की हत्या की रिकॉर्डिंग भी अपने मोबाइल में की थी। यह वीडियो 22 मिनट लम्बा बताया गया है जिसमें कथित तौर पर अंकित को चाकू घोंपने से ले कर सिर को पत्थर तक से कुचलने की घटना रिकॉर्ड है। बकौल रामबाबू अंकित के पेट और छाती में 20 बार चाकू घोंपा गया था।

अंकित के पिता का कहना है कि पेट और छाती में चाकू मारने के बाद हत्यारों ने उनके बेटे का गला रेता और हाथों को काट दिया। किसी लड़की से अंकित के अफेयर की बातों को रामबाबू ने अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा न सिर्फ शादीशुदा, बल्कि 2 बच्चों का पिता भी था। रामबाबू को अपने बेटे की हत्या की जानकारी पड़ोसी शिवराज मीणा से मिली थी। उनका यह भी दावा है कि उनके बेटे ने अपने जीवन में कभी भी इस्लाम या मुस्लिमों के खिलाफ सोशल मीडिया अथवा कहीं भी अन्य जगह कुछ नहीं बोला।

अंकित मीणा केस में ऑर्गेनाइजर द्वारा हासिल की गई एफआईआर की कॉपी का स्क्रीनशॉट

रामबाबू ने कातिलों पर कठोर कार्रवाई की माँग की है। इस मामले में शनिवार (11 मई) को गंगापुर सिटी थाने में FIR दर्ज हो चुकी है। अंकित मीणा की हत्या के विरोध में नाराज व्यापारियों ने बाजार को बंद रखा। पीड़ित परिवार के लिए 50 लाख रुपए मुआवजे की माँग की जा रही है। बताते चलें कि गंगापुर सिटी पुलिस को शुरुआत में शक था कि सलमान की गर्लफ्रेंड से अंकित की नजदीकी होना इस हत्या की वजह बनी है। पीड़ित पिता ने अपने दिवंगत बेटे के लिए इंसाफ की माँग की है।

दिल्ली शराब घोटाले में जुड़ेगा AAP का भी नाम: ED ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया, पहली बार करप्शन केस में राजनीतिक पार्टी बनेगी आरोपित

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि वह दिल्ली शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) को आरोपित बनाएगी। ED ने कोर्ट को बताया है कि वह AAP के एक प्रवक्ता को भी आरोपित बनाने जा रही है। इसके लिए नई चार्जशीट लगाई जाएगी।

मंगलवार (14 मई, 2024) को ED ने दिल्ली हाई कोर्ट में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत का विरोध किया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच कर रही थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान ही ED ने कोर्ट को बताया कि वह AAP को भी इस मामले में आरोपित बनाएगी। ED ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि वह AAP को आरोपित बनाने के लिए मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करेगी, इसी चार्जशीट में ED AAP के एक प्रवक्ता को भी दिल्ली शराब घोटाला मामले में आरोपित बनाएगी।

ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी राजनीतिक दल को भ्रष्टाचार के मामले में आरोपित बनाया जा रहा है। ED ने सुप्रीम कोर्ट में AAP को इस मामले में शामिल करने को लेकर सूचना दी थी। AAP को आरोपित बनाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का एक आदेश काम आया है।

एक सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि PMLA एक्ट के तहत आम आदमी पार्टी को आरोपित बनाया जा सकता है। हाई कोर्ट ने कहा था कि PMLA एक्ट में किसी कम्पनी को धारा 70 के तहत जाँच के दायरे में लाया जा सकता है। चूंकि राजनीतिक दल और कम्पनी, दोनों ही लोगों संगठन होते हैं, ऐसे में राजनीतिक दलों को भी इस धारा के तहत जाँच में लाया जा सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि AAP के मुखिया अरविन्द केजरीवाल थे इसलिए वह AAP द्वारा किए गए घोटाले के जिम्मेदार होंगे।

दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान ED ने आरोप लगाया कि मुकदमे को धीमा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ED ने कहा कि मुकदमे को धीमा करने के लिए याचिकाएँ लगाई जा रही हैं। ED ने कहा कि इस मामले में अब तक 250 याचिकाएँ लगाई गई हैं।

गौरतलब है कि शराब घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार किया था। उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अंतरिम जमानत दे दी थी। उन्हें यह जमानत चुनाव प्रचार के लिए मिली थी। केजरीवाल को 2 जून को सरेंडर करना है।

जिस महिला पत्रकार की मुस्कान कैमरे में दिखाना चाहते थे राहुल गाँधी, अब कॉन्ग्रेस ने बनाया अपना राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक: जानिए कौन हैं सुप्रिया भारद्वाज, क्यों ट्रॉल हो रहीं श्रीनेत

कॉन्ग्रेस पार्टी अक्सर सवाल पूछने वाली मीडिया को ‘गोदी मीडिया’ कह कर संबोधित करती रही है। खुद पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पत्रकारों को भाजपा का एजेंट तक बता कर अपमानित करते हैं। ये अलग बात है कि रवीश कुमार, अजीत अंजुम, पुण्य प्रसून वाजपेयी और ध्रुव राठी जैसे यूट्यूबरों का एक समूह पत्रकारिता के नाम पर इसी कॉन्ग्रेस का प्रोपेगंडा आगे बढ़ाते रहता है। अब पार्टी ने एक पत्रकार को ही राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक के दायित्व से नवाज़ा है।

सुप्रिया भारद्वाज एक पत्रकार रही हैं, जो कम्युनिकेशन स्किल पर लंबे समय तक काम कर चुकी हैं। उनका पत्रकारिता का करियर 16 वर्षों का रहा है। वो TOI, NewsX, TV9 और ‘इंडिया टुडे’ के साथ काम कर चुकी हैं। उन्होंने BAA किया हुआ है, साथ ही उनके पास मास कम्युनिकेशंस में मास्टर्स की डिग्री है। इससे पहले ये पद राधिका खेड़ा सँभाल रही थीं, लेकिन पार्टी में प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया और भाजपा का दामन थाम लिया।

राधिका खेड़ा ने बताया था कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में रामलला का दर्शन करने के बाद उन्हें टॉर्चर किया जा रहा था। सुप्रिया भारद्वाज लंबे समय से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से कॉन्ग्रेस का एजेंडा आगे बढ़ाती रही हैं। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान TV9 के लिए उन्होंने राहुल गाँधी का इंटरव्यू लिया था, जिसमें राहुल गाँधी ने खुद बताया था कि संसद में सुप्रिया भारद्वाज ने उनसे कहा था कि ‘राफेल का मुद्दा खून में घुस गया है।’ याद दिलाते चलें कि तब फ़्रांस के साथ राफेल विमान के सौदों में घोटाले का आरोप लगाया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट और CAG ने नकार दिया था।

उस इंटरव्यू के दौरान ‘चौकीदार चोर है’ के नारे भी लगाए गए थे। इस दौरान मुस्कुराती हुई सुप्रिया भारद्वाज का चेहरा भी राहुल गाँधी ने कैमरामैन को दिखाने को कहा था। सुप्रिया भारद्वाज ने ‘इंडिया टुडे’ में एक लेख भी लिखा था, जिसमें उन्होंने राहुल गाँधी की दाढ़ी, उनके बाल और सूट तक की तारीफ़ की थी। उनकी ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) टाइमलाइन पर कॉन्ग्रेस पार्टी के ही ट्वीट्स मिलेंगे। साथ ही वो 2019 की तरह 2024 में भी राहुल गाँधी के लिए हवा बना रही हैं।

उधर सुप्रिया भारद्वाज को नेशनल मीडिया कोऑर्डिनेटर बनाए जाने पर लोग सुप्रिया श्रीनेत को ट्रॉल कर रहे हैं। वो पार्टी की प्रवक्ता हैं और अक्सर प्रेस कॉन्फ्रेंस और टीवी डिबेट्स में नज़र आती हैं। लोगों का कहना है कि एक तो उन्हें टिकट नहीं मिला, ऊपर से अब सुप्रिया भारद्वाज को लेकर सुप्रिया श्रीनेत को बैकसीट दे दी गई है। कंगना रनौत पर अमर्यादित टिप्पणी को लेकर चुनाव आयोग भी उन्हें फटकार चुका है। सुप्रिया श्रीनेत भी पहले पत्रकार ही हुआ करती थीं।

‘तेरी पत्नी को नंगा कर घुमाएँगे, बेटी के साथ करेंगे रेप, बेटे का तोड़ेंगे जबड़ा’: एक मेजर को किया टॉर्चर ताकि कॉन्ग्रेस के ‘हिंदू आतंकवाद’ की थ्योरी को ठहराया जा सके सही

मालेगाँव बम धमाका मामले में मुकदमे का सामना करने वाले मेजर रमेश उपाध्याय ने कहा है कि उन्हें कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली UPA सरकार ने फँसाया था। उन्होंने कोर्ट को दिए गए एक बयान में बताया है कि UPA सरकार ने हिन्दू आतंकवाद को सच साबित करने के लिए ATS पर दबाव डाला था। मेजर उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि ATS ने उनके साथ बर्बरता की और उनकी पत्नी को नंगा घुमाने और बेटी के रेप तक की धमकी दी।

मेजर रमेश उपाध्याय ने कोर्ट को दिए गए बयान में बताया, “मैं पूरी तरह से निर्दोष हूँ, ATS पर केंद्र और राज्य की UPA सरकार द्वारा हिंदू आतंकवाद थ्योरी को सही ठहराने के लिए राजनीतिक दबाव डाला गया था, इसके कारण मुंबई ATS ने मुझे मालेगाँव धमाका मामले में झूठा फँसाया था।”

उन्होंने कोर्ट को बताया है कि ATS ने 24 अक्टूबर, 2008 को उन्हें उनके घर से ATS ने उठा लिया था। उन्होंने बताया कि उनके घर की तलाशी भी ली गई थी लेकिन वहाँ कुछ नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि ATS मुंबई ने उन्हें उठाने के बाद बुरी तरीके से मारा, उनको यातनाएँ दी और उन पर दबाव डाला कि वह मालेगाँव धमाका मामले में जबरदस्ती गुनाह कबूल करें।

मेजर रमेश उपाध्याय को गिरफ्तार करने को लेकर ATS ने आरोप लगाया था कि उन्होंने पूछताछ में शामिल होने को लेकर दी गई नोटिस का जवाब नहीं दिया था। इसको लेकर मेजर उपाध्याय ने कहा है कि उनको नोटिस भेजे जाने की बात झूठी है। मेजर ने कहा है कि ATS ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा।

मेजर उपाध्याय ने ATS द्वारा दी गई प्रताड़ना को लेकर बताया, “मुंबई ATS की अवैध हिरासत में मुझे ना केवल शारीरिक यातना दी गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि मेरे मकान मालिक को धमकी देकर मुझ पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी डाला गया। उससे कहा गया कि वह आतंकवादी को शरण क्यों दे रहा है। इसके बाद मेरे परिवार और सामान को सड़क पर फेंक दिया गया।”

मेजर उपाध्याय ने बताया, ” मुझे धमकी दी गई कि मेरी पत्नी को नंगा कर घुमाया जाएगा, मेर बेटी के साथ बलात्कार किया जाएगा, बेटे का जबड़ा तोड़ दिया जाएगा। इसके बाद उन लोगों ने इस धमकी को अंजाम देने के लिए मेरी विवाहित बेटियों के घरों पर छापा मारना चालू कर दिया। इससे उन्हें और उनके ससुराल वालों को अपमानित किया गया। मुझ पर लगातार उस अपराध को कबूल करने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव डालना जो मैंने नहीं किया था।”

मालेगाँव मामले में सच्चाई बाहर लाने के लिए ATS ने मेजर उपाध्याय का पॉलीग्राफ और नारको टेस्ट भी करवाया गया था। मेजर उपाध्याय ने आरोप लगाया कि जब इन टेस्ट में उन्हें क्लीन चिट मिल गई तो इसकी रिपोर्ट ATS ने दबा दी और कोर्ट के सामने प्रस्तुत नहीं की। मेजर उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने बाद में यह रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखीं।

उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि पुलिस कमिश्नर सुखविंदर सिंह ने तमाम सादे कागजों पर दस्तखत करवाए और उनको एक बयान पढवा कर कैमरे पर रिकॉर्ड किया। मेजर ने आरोप लगाया कि सुखविंदर सिंह ने पहले उन्हें छोड़े जाने और उनके खिलाफ सबूत ना होने की बात कही और बाद में उन पर MCOCA लगाने की बात की।

मेजर उपाध्याय ने कहा है कि NIA चार्जशीट के कारण उन्हें काफी राहत मिली थी। उन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ पेश किए गए सारे सबूत फर्जी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह सारे फर्जी सबूत ATS ने बनाए थे ताकि उनके राजनीतिक मास्टरों के हित साधे जा सकें। उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि उन लोगों के खिलाफ एक्शन लिया जाए जिन्होंने उन्हें प्रताड़ित किया।

गौरतलब है कि पहले मालेगाँव धमाका में मुकदमे का सामना करने वाले कर्नल पुरोहित ने भी ऐसे ही आरोप ATS पर लगाए थे। उन्होंने हाल ही में कोर्ट को दिए गए एक बयान में बताया था कि उनको लगातार इस बात के लिए मारापीटा जाता था कि वह RSS-VHP नेताओं का नाम लें। उन पर तत्कालीन भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ को भी इस मामले में फँसाने का दबाव भी डाला गया था। उनके साथ भी ATS ने बर्बरता की थी और उनका घुटना तोड़ दिया था।

जिस मालेगाँव धमाका मामले में मेजर उपाध्याय और कर्नल पुरोहित समेत कई हिन्दुओं को आरोपित बनाया गया था वह 29 सितम्बर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगाँव में हुआ था। इसमें 6 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इस धमाके के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी को हवा देना चालू किया था। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा को भी आरोपित बनाया गया था और टॉर्चर किया गया था लेकिन उन्हें बाद में क्लीनचिट मिल गई थी।