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‘दिल्ली की तरह पंजाब में भी हुआ शराब घोटाला’: कॉन्ग्रेस के पूर्व CM ने INDI गठबंधन के साथी अरविंद केजरीवाल पर बोला हमला, कहा – उन पर विश्वास करें कैसे?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल घोटालेबाज हैं। ये हम नहीं कह रहे, या सिर्फ भाजपा का ऐसा बयान नहीं हैं। बल्कि, कॉन्ग्रेस पार्टी ऐसा कह रही है। वही कॉन्ग्रेस पार्टी, जो I.N.D.I. गठबंधन में AAP (आम आदमी पार्टी) के साथ शामिल है। लेकिन, पंजाब में दोनों अलग-अलग लड़ रहे हैं। ठीक वैसे ही, जैसे केरल में कॉन्ग्रेस और वामदल लड़ रहे, पश्चिम बंगाल और कॉन्ग्रेस और TMC लड़ रहे। अरविंद केजरीवाल हाल ही में चुनाव प्रचार खत्म होने तक जमानत पर छूटे हैं।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, “अरविंद केजरीवाल शराब के बहुत बड़े घोटाले में नामजद हैं। मात्र 15 दिनों के लिए वो जेल से बाहर आए हैं। ऐसे व्यक्ति पर कैसे विश्वास किया जा सकता है? जैसे दिल्ली में बहुत बड़ा शराब घोटाला हुआ, वैसे ही पंजाब में भी हुआ है। पंजाब वाले मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दिल्ली में तो नई शराब नीति वापस भी ले ली गई, पंजाब में तो ऐसा नहीं हुआ। ऐसे शख्स का विरोध होना चाहिए।”

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब को लूटा जा रहा है, पंजाब पर 80,000 करोड़ रुपए का कर्ज लाद दिया गया है और अरविंद केजरीवाल पंजाब के सरकारी विमान का इस्तेमाल कर रहे हैं। चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के जालंधर से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। बता दें कि दिल्ली में तो AAP-कॉन्ग्रेस का गठबंधन है, लेकिन पंजाब में नहीं। AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल गुरुवार (16 मई, 2024) को लुधियाना के जोधन में अपने प्रत्याशी अशोक पराशर पप्पी के समर्थन में रोडशो करेंगे।

उससे पहले दिल्ली CM का अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर और दुर्गियाना मंदिर में दर्शन करेंगे। लुधियाना से कॉन्ग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू सांसद हैं। अरविंद केजरीवाल के बाहर निकलने से पंजाब में कॉन्ग्रेस तनाव में आ गई है। इसका कारण ये है कि AAP ने ही राज्य की सत्ता से कॉन्ग्रेस को बेदखल कर जीत दर्ज की और भगवंत मान मुख्यमंत्री बने। दिल्ली के शराब घोटाले में पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी जेल में हैं। वहीं राज्यसभा सांसद संजय सिंह जमानत पर बाहर निकले हैं।

हाल ही में चरणजीत सिंह चन्नी ने जम्मू कश्मीर के पुँछ में भारतीय वायुसेना के जवानों पर हुए हमले को ‘भाजपा का चुनावी स्टंट’ बताया था। उन्होंने कहा था कि ये स्टंटबाजी हो रही है, हमले नहीं हो रहे। चन्नी ने पुलवामा में 40 CRPF जवानों के बल्दियन पर विवादित बयान देते हुए कहा था कि पिछली बार भी चुनाव आया तो ऐसे स्टंट खेले गए और बीजेपी को जिताने का काम किया गया। उन्होंने कहा था कि पहले से तैयारी करके हमले करवाए जाते हैं, यह भाजपा को जिताने का स्टंट होता है और इसमें कोई सच्चाई नहीं होती।

कंगाल पाकिस्तान की जनता आटे के लिए लड़-मर रही, नेता-फौजी दुबई में खरीद रहे अरबों का विला : काले धन को ‘इन्वेस्ट’ करने का ठिकाना बना UAE

पाकिस्तान में लोग आटे के लिए मार काट करने के लिए तैयार हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। पीओके में जनता सड़कों पर उतर कर इंस्पेक्टर को पीट कर मार चुकी है। इसी बीच 14 मई 2024 को ‘दुबई अनलॉक’ नाम की फाइल सामने आई है, जिसे इंटरनेशनल खोजी पत्रकारों ने जारी की है। इस फाइल में यूएई में प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों के बारे में जानकारी है, जिसमें बताया गया है कि एक तरफ पाकिस्तान की जनता खाने-पीने के सामान के लिए मारामारी कर रही है, तो दूसरी ओर पाकिस्तान के भ्रष्ट नेता, ब्यूरोक्रेट्स और आर्मी के बड़े अफसर अरबों की काली कमाई से यूएई के अंदर हजारों प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं।

दुबई अनलॉक के लिए सेंटर फॉर एडवांस्ड डिफेंस स्टडीज (C4ADS) और संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने काम किया है, जिसने बताया है कि दुबई के अंदर लक्जरी प्रॉपर्टीज में किन लोगों ने निवेश किया है। अकेले पाकिस्तानियों ने यूएई में 11 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्तियाँ खरीदी है। एक तरफ पाकिस्तान की जनता भूख से बेहार है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के भ्रष्ट सैन्य अधिकारी और अमीर नेता लोग यूएई में प्रॉपर्टीज बना रहे हैं।

इस जाँच के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बच्चों, नवाज शरीफ के बेटे हुसैन नवाज शरीफ, गृहमंत्री मोहसिन नकवी की बीवी, शरजील मेमन और उसके परिवार, सीनेटर फैसले वावदा, फराह गोगी, शेर अफजल मारवत जैसे नेशनल और स्टेट असेंबली के मेंबर्स के पास यूएई में संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। इस सूची में पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ, पूर्व प्रधानमंत्री शौकत अजीज, कई रिटायर्ड आर्मी जनरल, पुलिस चीफ, राजदूत और वैज्ञानिक तक के पास यूएई में संपत्ति है।

खास बात ये है कि मौजूदा राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को साल 2014 में एक संपत्ति गिफ्ट के तौर पर मिली थी। साल 2018 में उन्होंने कागजों पर इसे दिखाया भी था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे गिफ्ट में किसी और को दे दिया। ऐसा ही एक नाम अब्दुल गनी माजिद का है, जो एक बिजनेस टाइकून है और जरदारी के साथ फर्जी अकाउंट मामले में सह-अभियुक्त भी हैं। बाद में पता चला कि 319 मिलियन पाकिस्तानी रुपए का ये पेंटहाउस साल 2014 में उन्होंने जरदारी को दे दिया था और जरदारी ने बाद में इसे अपनी बेटी को दे दिया।

एक और पाकिस्तानी नेता मोहनिस नकवी ने दुनिया के अरेबियन रेंचेज में 5 वेडरूम का विला अपनी बीवी के नाम से खरीदा था। लेकिन अपने चुनावी हलफनामे में उसकी जानकारी नहीं दी। ये विला साल 2017 में 329 मिलियन पाकिस्तानी रुपए में खरीदा गया था औऱ अप्रैल 2023 में इसे 344 मिलियन पाकिस्तानी रुपए में बेच भी दिया गया। इस रिपोर्ट में अल्ताफ खनानी नेटवर्क की संपत्तियों के बारे में भी जानकारी दी गई है। वो मनी लॉन्ड्रिंग का कारोबार करता है। अमेरिका ने मनी लॉन्ड्रिंग पर बैन लगाया हुआ है, लेकिन खनानी के परिवार के सदस्यों की कई संपत्तियाँ मनी लॉन्ड्रिंग के पैसों से ही दुबई में खरीदी गई हैं। इस परिवार के 3 लोगों पर अमेरिका बैन लगा चुका है। इसी तरह से हामिद मुख्तार नाम का डॉक्टर भी दुबई में प्रॉपर्टियों का मालिक है, जिसपर अमेरिका ने बैन लगा रखा है। उस पर मानव तस्करी नेटवर्क चलाने का आरोप है।

यूएई में भारतीयों के पास ज्यादा संपत्ति, लेकिन भारतीय अधिकतर बिजनेसमैन हैं, तो पाकिस्तानियों में अपराधी और सरकारी कर्मचारियों के साथ ही नेताओं-आर्मी अफसरों का गठजोड़ है।

इस रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है कि पाकिस्तान के अमीर वर्ग ने काफी सारा धन दुबई भेजा हुआ है, जिससे पाकिस्तान में आर्थिक असमानता बढ़ी है। डाटा से पता चला है कि दुबई में संपत्तियाँ खरीदने में भारतीय दुनिया के किसी भी देश से सबसे आगे हैं। दुबई में भारतीयों के नाम 35 हजार से ज्यादा संपत्तियाँ हैं, जिनकी कीमत 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। हालाँकि इस लिस्ट में शामिल सभी भारतीयों के नाम असली हैं और मालिक भी असली हैं। लेकिन पाकिस्तान के जिन लोगों ने यूएई में संपत्तियाँ खरीदी हैं, वो नेता हैं, सेना से जुड़े हैं या आपराधिक कार्यों में लिप्त हैं, यानी कि सारा पैसा काला धन है।

वैसे, यूएई में संपत्ति रखने वाले भारतीयों में नीरव मोदी जैसे व्यक्ति का भी नाम है, जो अभी लंदन की जेल में बंद है। उसके पास 13,41,900 अमेरिकी डॉलर की कीमत वाले तीन ऑफिस हैं, जो गोल्ड टॉवर में हैं। वहीं, खालिस्तानी आतंकी जममीत हकीमजादा के पास गार्डन होम्स फ्रोंड में 81.75 लाख अमेरिकी डॉलर से ज्यादा कीमत का विला है। चंदन की तस्करी करने वाले शाहुल हमीद दाऊद के नाम पर भी यूएई में प्रॉपर्टी है।

गरीबी, अराजकता और घोर अन्याय

दुबई फाइल्स में पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा यूएई में भारी निवेश पाकिस्तान की खस्ताहाल व्यवस्था को दिखाता है। एक तरफ नेताओं, सैन्य अधिकारियों ने पाकिस्तान के धन को यूएई में भेजकर अपने लिए संपत्तियाँ इकट्ठी कर शाही जिंदगी जी रहे हैं, तो दूसरी ओर पाकिस्तान की आम जनता गरीबी, भोजन की कमी और भयंकर महँगाई की मार झेल रही है। बलूचिस्तान से लेकर पीओके में हो रहे विरोध प्रदर्शन दिखाते हैं, कि कैसे पाकिस्तान अपने नागरिकों की जरूरतों को पूरा कर पाने में विफल साबित हो रहा है। देश चलाने के लिए हुक्मरान दुनिया के दूसरे देशों में भीख माँग रहे हैं और कर्ज माँग रहे हैं, तो पाकिस्तान के गिने चुने लोग अरबों की दौलत विदेशों में इन्वेस्ट करके ऐश कर रहे हैं।

चाबहार पर प्रतिबंधों की धमकी दे रहा था अमेरिका, जयशंकर ने धो डाला: ईरानी बंदरगाह भारत के हाथ में आने के बाद बदला था स्टैंड

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के भारत द्वारा विकास पर अमेरिका के प्रतिबंधों की धमकी को लेकर जवाब दिया है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है कि ईरान का यह बंदरगाह सबके हित में है और हम यह बात उन तक पहुँचाएंगे और समझाएँगे।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “मैंने इस विषय में कुछ बयान देखे थे। साल में यह बात लोगों तक पहुँचाने और समझाने की जरूरत है कि यह बंदरगाह सबके हित में है। लोगों को इसे एकदम आशंकित होकर नहीं देखना चाहिए।” विदेश मंत्री जयशंकर ने इसको लेकर पुराने अमेरिकी निर्णयों का हवाला भी दिया।

उन्होंने कहा, “उन्होंने पूर्व में भी ऐसा (प्रतिबंध लगाना) नहीं किया है। अगर आप अमेरिका का पुराना रवैया इस मामले में देखें, तो अमेरिका भी चाबहार के विकास को सराहता रहा है।” इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि भारत का चाबहार से लंबा जुड़ाव रहा है।

विदेश मंत्री जयशंकर का बयान अमेरिकी विदेश मंत्रालय की टिप्पणी के बाद आया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भारत के चाबहार बंदरगाह विकसित करने को लेकर कहा था कि कोई भी देश या कम्पनी जो कि ईरान के साथ व्यापारिक सौदे कर रहा है, उसे इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि उन पर प्रतिबन्ध लग सकते हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसे चाबहार बंदरगाह को लेकर ईरान और भारत के बीच समझौते की रिपोर्ट को देखा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह भारतीय विदेश मंत्रालय का चाबहार समेत ईरान से रिश्तों को लेकर पक्ष देखेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसके द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबन्ध जारी रहेंगे।

गौरतलब है कि भारत और ईरान ने सोमवार (13 मई, 2024) को ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने और प्रबंध करने को लेकर समझौता किया था। भारत एक सरकारी कम्पनी के जरिए ईरान के इस बंदरगाह को अगले 10 वर्षों तक चलाएगा। भारत इस बंदरगाह में पहले ही 85 मिलियन डॉलर (लगभग ₹709 करोड़) के निवेश करने की घोषणा कर चुका है।

हालिया समझौते में भारत ने कहा है कि वह इस बंदरगाह के विकास के लिए 120 मिलियन डॉलर (लगभग ₹1000 करोड़) का निवेश करेगा। भारत ने इसके लिए सस्ता कर्ज देने की घोषणा भी की है। यह बंदरगाह पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ता है।

इस समझौते को लेकर अमेरिका की प्रतिबंधों की धमकी नई बात है। 2021 से पहले जब अमेरिका के हित अफगानिस्तान से जुड़े हुए थे, तब वह इस बंदरगाह के विकास का समर्थन करता था। अमेरिका ने इसको लेकर भारत को प्रतिबंधों से छूट दी थी।

अमेरिका ने इस बंदरगाह से जुड़ी रेलवे लाइन को भी प्रतिबंधों से छूट देने की बात कही थी। ईरान पर यह अमेरिकी प्रतिबंध उसके परमाणु बम बनाने को लेकर लगाए गए हैं। अमेरिका, ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वह परमाणु बम बना रहा है और इसको लेकर प्रतिबन्ध लगाए हैं।

2021 में अमेरिका अफगानिस्तान से बाहर निकल गया था। अब उसके अफगानिस्तान में हित नहीं है। ऐसे में वह चाबहार पर अपनी भाषा में परिवर्तन कर रहा है। हालाँकि, अभी अमेरिका ने इस बात को लेकर कोई घोषणा नहीं की है कि भारत पर चाबहार के लिए प्रतिबन्ध लगाएगा या नहीं।

भारत, चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी है और अमेरिका पूर्व में भी भारत को कई बार ऐसी ही छूट दे चुका है। अमेरिका ने अपने NATO सहयोगी तुर्की पर रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए CAATSA प्रतिबन्ध जड़ दिए थे जबकि भारत को इससे छूट दे दी थी।

ऐसा ही अमेरिका ने भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर किया था। ऐसे में चाबहार को लेकर अमेरिका, भारत पर कदम उठाएगा, इसकी संभावनाएँ कम है।

जिस प्रदर्शन में लगे ‘भारत की बर्बादी’ के नारे उसे गर्लफ्रेंड ने बताया ‘कविता पाठ’, सुनते रहे समदीश भाटिया: बॉयफ्रेंड की करतूत को कोर्ट बता चुका है ‘आतंकवाद’

दिल्ली दंगा के मामले में JNU का छात्र नेता रहा उमर खालिद फ़िलहाल जेल में है। वहीं उसकी गर्लफ्रेंड बनोज्योत्स्ना लाहिरी ने समदीश भाटिया को लगभग एक घंटे का इंटरव्यू दिया है। उन्होंने कहा कि 2016 में उनका Ph.D पूरा हुआ था। उन्होंने कहा कि उस दौरान मौत की सज़ा के खिलाफ एक प्रदर्शन किया गया, जिसमें ‘कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन’ की बात की गई। बकौल बनोज्योत्स्ना लाहिरी, ये JNU बस एक सामान्य दिन था, जहाँ हर छात्र किसी न किसी रूप में राजनीति करता है।

उन्होंने इस इंटरव्यू में आगे कहा कि अचानक से ‘Zee News’ का कैमरा उन्हें दिखा, फिर उनलोगों ने सोचा कि आज ये मीडिया वाले क्यों आ गए हैं क्योंकि JNU में तो रोज ऐसे-ऐसे कार्यक्रम होते हैं। बनोज्योत्स्ना लाहिरी ने कहा कि माइक घुसा-घुसा कर देश विरोधी नारे लगने की बात की गई, कल को पूरी मीडिया और पूरी दुनिया इसकी बात करने लगी। उन्होंने कहा कि तब देश के गृह मंत्री रहे राजनाथ सिंह ने कड़ी कार्रवाई की बात की, फिर राजद्रोह की FIR दर्ज की गई।

बनोज्योत्स्ना लाहिरी का कहना है कि ये सब सुन कर उनलोगों को कॉमेडी लग रही थी, क्योंकि सेडिशन का चार्ज तब लगता है जब कोई भड़काऊ बयान दे और हिंसा हो लेकिन कोई हिंसा तो हुई ही नहीं थी। क्या बनोज्योत्स्ना लाहिरी ये कहना चाहती हैं कि पुलिस-प्रशासन को हिंसा होने तक इंतज़ार करना चाहिए? अगर कोई भारत विरोधी बयान दे तो हिंसा होने का इंतज़ार करना चाहिए, वरना वो व्यक्ति निर्दोष माना जाएगा और उस पर कोई कार्रवाई न हो?

असल में 2016 में 9 फरवरी को इनलोगों ने जो प्रदर्शन किया था, उसके बैनर की शुरुआत ही ब्राह्मणों को गाली देकर की गई थी। उसमें स्पष्ट लिखा था कि ये विरोध प्रदर्शन ‘अफजल गुरु और मकबूल भट्ट की न्यायिक हत्या’ के विरोध में है। ये प्रदर्शन सरकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ था। अफजल गुरु कौन था? 2002 में संसद भवन पर आतंकी हमले का मास्टरमाइंड। मकबूल भट्ट कौन था? पाकिस्तान की शह पर जम्मू कश्मीर में कई आतंकी हमलों को अंजाम देने वाला। लेकिन, बनोज्योत्स्ना लाहिरी कहती हैं कि वो तो ‘कविता पाठ’ था।

JNU में ‘कल्चरल इवनिंग’ के नाम पर इन दोनों के समर्थन में प्रदर्शन हुआ था, जिसे बनोज्योत्स्ना लाहिरी आज ‘सामान्य सा प्रदर्शन’ बता रही हैं। इस कार्यक्रम में ‘कश्मीर की आज़ादी तक जंग रहेगी’ के नारे लगे और उमर खाली की गर्लफ्रेंड के लिए ये ‘जस्ट अनदर डे’ था। क्या कश्मीर गुलाम है? जम्मू कश्मीर भारत का अखंड हिस्सा है और इसके एक भाग पर पाकिस्तान का जबरन कब्ज़ा है और वहाँ पाकिस्तान के खिलाफ जम कर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

क्या भारत ने कश्मीर को गुलाम बना रखा है? अगर नहीं, तो ये आज़ादी के नारे क्यों? ‘तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा’ और ‘भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी’ के नारे भी लगे थे। जिस देश में आप रहते हैं और जिस देश के वासियों के टैक्स के पैसे से पढ़ते हैं, उसी देश को बर्बाद करने की साजिश सेडिशन नहीं तो और क्या है? बनोज्योत्स्ना लाहिरी के लिए इस पर कार्रवाई ‘कॉमेडी’ है। हर घर से आतंकी निकलने की बात करना क्या है? इसकी अनुमति क्यों दी जाए?

बड़ी बात ये है कि समदीश भाटिया ने इस दौरान बनोज्योत्स्ना लाहिरी को रोकने की कोई कोशिश नहीं की। समदीश भाटिया ने दक्षिणपंथियों को रिझाने के लिए एकाध वीडियो बनाए और फिर अब वो उमर खालिद के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी तरह एक वीडियो में उन्होंने कहा था, “मैं भाजपा थोड़े हूँ जो चोरी करूँगा।” क्या भाजपा कार्यकर्ता होना चोर होना है? ऐसे यूट्यूबरों को कमाई के अलावा कुछ नहीं सुझता। उन्हें इसके लिए देश विरोधी एजेंडा भी चलाना हो तो वो चलाएँगे।

उमर खालिद पर आरोप है कि उसने दिल्ली दंगों की साजिश रचने में भूमिका निभाई। CAA विरोध के नाम पर हुए विरोध प्रदर्शन को हिंसा में परिवर्तित करने में इसका हाथ था। दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस रजनीश भटनागर ने उसकी जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए लिखा था कि उमर खालिद ने जो किया वो ‘आतंकवाद’ है। उस पर UAPA के तहत कार्रवाई की जा रही है। उसके भाषणों पर जजों ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि इससे बड़ी ‘खूनी क्रांति’ आ सकती थी।

पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर हमारा, इसे हम लेकर रहेंगे: बंगाल में बोले अमित शाह, कहा- POK पर बात करने से डरते हैं ममता बनर्जी और राहुल गाँधी

पश्चिम बंगाल के हुगली में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पहले कश्मीर में आजादी के नारे लगते थे और अब PoK में आजादी के नारे लगते हैं। अमित शाह ने कहा कि पहले कश्मीर में पत्थरबाजी होती थी, अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पत्थरबाजी होती है। उन्होंने कहा कि 2.11 करोड़ टूरिस्टों ने कश्मीर जाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया और PoK में आटे के भाव ने रिकॉर्ड बनाया।

इस जनसभा में गृहमंत्री ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वाली पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर जमकर निशाना साधा। POK में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का हिस्सा है और भारत इसे लेकर रहेगा।

पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि साल 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर में शांति लौट आई है। वहीं, पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर अब विरोध प्रदर्शनों और आजादी के नारों से गूंज रहा है। बता दें कि POK में महंगाई को लेकर हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ये मणिशंकर अय्यर, ये फारुख अब्दुल्ला देश को डराने का काम करते हैं कि पाकिस्तान के पास एटम बम है और PoK की बात मत करो, क्योंकि पाकिस्तान के पास परमाणु बम है। अमित शाह ने कहा, “राहुल बाबा आपको डरना है तो डरिए, ममता दीदी आपको डरना है तो डरिए, PoK भारत का है और इसे हम लेकर रहेंगे।”

मस्जिद में चल रही थी नमाज, भीड़ के साथ आया खालिद और करने लगा सबकी पिटाई: पुलिस ने बताया जमीन का विवाद, FIR दर्ज

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ा रहे इमाम और नमाज़ियों पर हमले की खबर है। इस हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। हमले का आरोप कारी खालिद नाम के व्यक्ति और उसके साथियों पर लगा है। घटना के पीछे की वजह सम्पत्ति विवाद को बताया गया है। पुलिस ने कारी खालिद पक्ष के कुल 27 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। दोनों पक्षों के लोगों को मुचलके पर थाने में पाबंद भी किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरिद्वार जिले के थानाक्षेत्र रुड़की में घटना सोमवार (13 मई 2024) को घटी। सोमवार को यहाँ समीर अली शेख ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में समीर ने खुद को दरगाह खादिम गुलाब शाह पीर का खादिम बताया है। उन्होंने लिखा है कि गुलाबनगर इलाके में दरगाह के पास एक मस्जिद भी बनी हुई है। इस मस्जिद पर कारी खालिद अपना हक जताता आ रहा है जबकि समीर अली इसे अपनी जागीर मानता है। इस जमीनी विवाद के चलते दोनों पक्षों में अक्सर तनातनी बनी रहती थी। दोनों ने अदालत में भी अपना-अपना दावा ठोंक रखा है।

सोमवार की रात में समीर अली इस मस्जिद में कुछ अन्य नमाज़ियों के साथ नमाज़ अदा कर रहा था। नमाज़ पढ़ रहे लोगों में इजहार, जमीर अहमद और महताब, आदि शामिल हैं। इसी दौरान कारी खालिद अपने दर्जनों साथियों सहित वहाँ आ धमका। उसके साथ मौजूद लोगों ने नमाज़ पढ़ रहे लोगों को अपशब्द कहे। कुछ ही देर में इस भीड़ ने नमाज़ियों पर हमला कर दिया। हमले से मस्जिद में भगदड़ का माहौल बन गया। भाग रहे लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया जिसमें कई लोग घायल हो गए। शोरगुल सुन कर आसपस के लोग जमा हुए। घटना की जानकारी होते ही पुलिस भी मौके पर पहुँची।

पुलिस को देख कर हमलावर भाग खड़े हुए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। रुड़की कोतवाली के प्रभारी गोविंद कुमार ने मीडिया से बात करते हुए इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर कारी खालिद, जमील अहमद, शाहनवाज, अली नवाब, कलीम, जान आलम और सुहेल सहित कुल 27 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन सभी बलवा समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है। दोनों पक्षों के कुछ लोगों को मुचलके पर पाबंद भी किया गया है। पुलिस ने किसी भी प्रकार से माहौल बिगाड़ने वालों को सख्त चेतावनी दी है। मामले की जाँच की जा रही है।

कार में जबरन बैठाकर चाकू की नोक पर रेप, महिला ने AAP के नेता और उसके बेटे-बहू पर भी लगाया आरोप: पार्टी ने बताया मनगढंत

गुजरात के अमरेली जिले में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता कांति सतासिया के बेटे हरेश पर एक लड़की का अपहरण करके चाकू की नोक पर बलात्कार करने का आरोप लगा है। पीड़िता ने शिकायत में 2022 का विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके कांति सतासिया, उनके दूसरे बेटे भाविन और हरेश की बीवी वैशाली पर धमकी देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने 11 मई को FIR दर्ज कर ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 35 वर्षीया पीड़िता मूल रूप से बसगरा की रहने वाली है। पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने बताया कि हरेश के साथ उसका 15 वर्षों से अफेयर है। लगभग 25 दिन पहले हरेश सतासिया ने पीड़िता को उसके गाँव से बुलाया। इसके बाद उसने महिला को जबरन अपनी कार में बैठा लिया और रेप किया।

पीड़िता का कहना है कि इसका जब उसने विरोध किया तो उसे चाकू दिखाकर चुप रहने की धमकी दी गई। बकौल पीड़िता, हरेश पहले भी उससे शादी का वादा करके कई बार रेप कर चुका है। शिकायत में महिला ने आगे बताया कि किसी अन्य लड़के से जब उसका ब्याह तय हो रहा था तब हरेश के पिता कांति सतासिया और उसके भाई भाविन ने इसमें व्यवधान डाला।

इन दोनों पर पीड़िता के मंगेतर पर दबाव डालकर सगाई तुड़वा देने का आरोप है। साथ ही हरेश की पत्नी का भी जिक्र शिकायत कॉपी में है। हरेश की बीवी वैशाली पर आरोप है कि उन्होंने कॉल करके पीड़िता को धमकी दी। पुलिस ने हरेश पर रेप और अपहरण के साथ उनके पापा कांति सतासिया, बीवी वैशाली और भाई भाविन पर धमकी देने की FIR दर्ज कर ली है।

अमरेली के पुलिस अधीक्षक हिमकर सिंह ने बताया कि चारों आरोपितों को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी ने अपने नेता व उनके बेटे पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया है। AAP ने FIR की टाइमिंग को संदिग्ध बताते हुए इसे विश्वास के लायक नहीं माना है। बताते चलें कि 2022 विधानसभा चुनावों में भाजपा के जेवी काकड़िया ने कांति सतासिया को हराया था।

‘मोदी अद्भुत नेता, वे तीसरी बार भी बनेंगे भारत के PM’: कौन हैं साजिद तरार जिन्होंने कहा पाकिस्तान को भी ‘नमो’ जैसे नेतृत्व की जरूरत

पाकिस्तानी अमेरिकी कारोबारी साजिद तरार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ की है। वह इस बात को लेकर एकदम निश्चिंत है कि नरेन्द्र मोदी भारत के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने पीएम मोदी को एक जन्मजात नेता बताया है और कहा है कि भारत को उनके मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है।

साजिद तरार ने पीएम मोदी को लेकर कहा, “मोदी जी एक अद्भुत नेता है, वह जन्मजात नेता हैं। वह अकेले ऐसे नेता हैं जो कि खराब हालातों में भी पाकिस्तान गए और राजनीतिक साख को दाँव पर लगाया। मैं इन्हीं मोदी जी से आशा करता हूँ कि वह पाकिस्तान के बातचीत और व्यापार शुरू करेंगे। क्योंकि पाकिस्तान में अगर शांति होगी तो यह भारत के लिए भी अच्छा है।”

उन्होंने आगे बताया, “पीएम मोदी की उपलब्धियों की एक लम्बी लिस्ट है। मजबूत भारत के लिए उनका नेतृत्व जरूरी है और यह एकदम स्पष्ट है कि वह तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।” साजिद तरार ने भारत के चुनावों को लेकर भी हैरानी व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि एक पाकिस्तानी के नाते भारत में 97 करोड़ लोगों का वोट डालना उन्हें एकदम चमत्कार लगता है। उन्होंने कहा कि यह भारत सबसे बड़े लोकतंत्र होने को सिद्ध करता है। उन्होंने भारत में बड़े स्तर पर मतदान को अद्भुत बताया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में लोग भारत के लोकतंत्र से सीखेंगे। उन्होंने आशा जताई कि पाकिस्तान को भी एक बार नरेन्द्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री मिले।

साजिद तरार ने इस दौरान पाकिस्तान के आर्थिक संकट को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान आर्थिक संकट से गुजर रहा है, इसकी वजह से महँगाई बढ़ी हुई है। IMF के पैकेज के कारण बिजली, पेट्रोल महँगा है, बिजली महँगी होने के कारण निर्यात नहीं हो पा रहा। पाक अधिकृत कश्मीर में बिजली महँगी होने की वजह से जुलूस निकले।”

उन्होंने प्रश्न खड़े किए कि हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने POK के लिए एक पैकेज का ऐलान किया है, इसके लिए पैसे कहाँ से दिए जाएँगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मूल मुद्दे नहीं हल किए जा रहे। उन्होंने पाकिस्तान में कानून व्यवस्था और आंतकवाद पर भी प्रश्न खड़े किए।

साजिद तरार पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी कारोबारी है। वह 1990 के दशक में अमेरिका चले गए थे। साजिद अमेरिका के बाल्टिमोर के बड़े कारोबारी हैं। वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के करीबी माने जाते हैं। वह मुस्लिमों के मामलों के लिए ट्रम्प के सलाहकार भी रहे हैं। तरार एक बड़ी निवेश कम्पनी में बड़े पद पर हैं। तरार सोशल मीडिया पर भी अपने विचार खुल कर रखते हैं। वह पाकिस्तान के मुद्दों को लेकर भी मुखर रहते हैं।

केदारनाथ धाम में ढोल-ताशा परंपरा या फिर रीलबाजी?

क्या आज लोग केदारनाथ धाम जाकर कुछ ऐसी हरकतें कर रहे हैं जिससे वहाँ की शांति भंग हो रही है? या फिर ये एक अनावश्यक विवाद है, क्योंकि इन्हीं श्रद्धालुओं से वहाँ के लोगों का व्यापार चलता है? इसमें एक तर्क ये भी है कि हमारे गली-मोहल्ले के मंदिर जो वहाँ हम रौनक लाने का प्रयास क्यों नहीं करते दूर तीर्थाटन करने से पहले? दैनिक न सही तो कम से कम साप्ताहिक रूप से ही वहाँ उपस्थिति क्यों नहीं दर्ज करा पाते? खैर, रील्स वाली बीमारी आजकल भारत के कई तीर्थस्थलों पर देखने को मिल रही है।

अगर आपने ऋषि-मुनियों के जीवन के बारे में पढ़ा होगा तो अक्सर देखा होगा कि वो वन में तपस्या करते थे। यही कारण है कि नैमिषारण्य से लेकर दण्डकारण्य तक उस काल में आध्यात्मिक स्थलों के रूप में उभरे। ऋषि-मुनियों ने वहीं प्रकृति के बीच अपने आश्रम स्थापित किए। वो पेड़-पौधों एवं वन्यजीवों की देखभाल भी करते थे। इन आश्रमों में मृग चरते रहते थे, ऐसा प्रसंग कई बार रामायण या महाभारत में आया है। कइयों ने तपस्या के लिए और भी दुर्गम स्थल चुने।

इनमें हिमालय उनका सबसे पसंदीदा क्षेत्र हुआ करता था। स्पष्ट है कि तब हिमालयी क्षेत्र में आज की तरह पक्की सड़कें नहीं रही होंगी, रोपवे नहीं बने होंगे और चढ़ाई में सहूलियत देने वाले उपकरण नहीं रहे होंगे, वहाँ की तस्वीरें-वीडियो देख कर वहाँ जाने की योजनाएँ नहीं बनती होंगी। कभी आपने सोचा है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने आखिर इन दुर्गम स्थलों को ही अपना ठिकाना क्यों बनाया? वो गाँव-नगर में रह कर भी तो साधना कर सकते थे। इसका आसान सा जवाब है – शांति।

हिमालयी या जंगली क्षेत्रों में क्यों रहते थे ऋषि-मुनि?

जी हाँ, शांति। ये ऋषि-मुनि लोगों की बसावट से दूर इसीलिए रहते थे, ताकि उनकी साधना में कम से कम व्यवधान पड़े। अब जो व्यवधान डालने के लिए जंगलों तक में पहुँच गए, वो राक्षस कहलाए। केदारनाथ धाम भारत के प्राचीन आध्यात्मिक स्थलों में से एक है। 2023 में 12 लाख लोगों ने उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित इस मंदिर में आकर महादेव का दर्शन किया। ये 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मंदिर सड़क से सीधा नहीं जुड़ा हुआ है, अतः गौरीकुंड से 22 किलोमीटर के ट्रेक के बाद लोग यहाँ आते हैं।

प्राचीन काल में हिमालय को स्वर्ग इसीलिए भी कहा गया, क्योंकि यहाँ के वन्यजीवन और स्थानीय जनजीवन की गतिविधियों में व्यवधान डालने के लिए बाहरी ताकतें नहीं आती थीं। पहाड़ों में विकास कार्य होने चाहिए, मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने केदारनाथ धाम तक में निर्माण कार्य कराए। पर्यटन और तीर्थाटन भी होना चाहिए, लेकिन हुड़दंग, नशा, रीलबाजी और दिखावे के लिए पहाड़ों पर जाने का जो प्रचलन चल पड़ा है उसे बंद करने की आवश्यकता है।

केदारनाथ धाम: द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक, 2013 में आया था महाप्रलय

केदारनाथ धाम रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है, जो अलकनंदा एवं मन्दाकिनी नदियों के संगम के लिए विख्यात है। केदार पर्वत पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग को केदारेश्वर भी कहा जाता है। यहाँ कण-कण में भगवान शिव बसे हुए हैं, तभी इस पर्वत श्रृंखला को भी रूद्रपर्वत कहा जाता है। इसे सुमेरु और पंच पर्वत भी कहा गया है, क्योंकि इसमें 5 चोटियाँ हैं – रूद्र हिमालय, विष्णुपुरी, ब्रह्मपुरी, उद्गारीकंठ, और स्वर्ग रोहिणी। इसी का एक हिस्सा गंधमादन पर्वत भी है, जहाँ से युधिष्ठिर ने स्वर्ग में प्रवेश किया था।

उन्होंने कहा भी था कि कठिन तपस्या के बाद ही यहाँ तक पहुँचा जा सकता है। जब कोई मेहनत कर के कहीं पहुँचता है तो उसे लक्ष्य की महत्ता का भान होता है, आज की जो पीढ़ी आसानी से वहाँ मोबाइल फोन लेकर पहुँच रही है उसके लिए ये एक खेल से बढ़ कर कुछ नहीं। स्कन्द पुराण में खुद ब्रह्मा जी कहते हैं कि महान दुर्गम पर्वत हिमाद्रि सभी जंतुओं के लिए नहीं है, इस पर महेश्वर का शासन है। विनती किए जाने पर महादेव ने डिवॉन, गंधर्वों, पक्षियों, नागों एवं विद्याधरों की क्रीड़ा के लिए अलग-अलग स्थान निश्चित किए।

खुद भगवान शिव हिमालय को सभी आश्रमों का निवास स्थान बताते हुए कहते हैं कि वो यहाँ पर लिंग के रूप में स्थित हैं। पांडव भी महाभारत युद्ध के बाद मन की शांति के लिए यहाँ आए थे। केदारनाथ ही वो जगह है, जहाँ जगद्गुरु शंकराचार्य शिव में विलीन हुए थे, यहाँ उन्होंने देह-त्याग किया था। सर्दी के मौसम में मंदिर बंद रहता है, इसीलिए नियमित पूजा उखीमठ में जारी रहती है। कुल मिला कर यूँ समझिए कि केदारनाथ धाम हिन्दू, खासकर शैव मत में एक उच्च स्थान रखता है।

केदारनाथ धाम भक्ति व अध्यात्म का स्थल, रील बनाने की जगह नहीं

पिछले कुछ वर्षों से केदारनाथ धाम, खासकर पूरे पहाड़ी क्षेत्र पर एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लोग भगवान के दर्शन, भजन-कीर्तन, ध्यान या योग के लिए नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम रील बनाने के लिए यहाँ पहुँच रहे हैं। आपको लड़के-लड़कियाँ पहाड़ों पर लॉन्ग ड्राइव करते और बियर पीते हुए मिल जाएँगे। ये पवित्र स्थल सेक्स और नशा का अड्डा नहीं हैं, न बनाए जाने चाहिए। ये नाच-गान के लिए भी नहीं है, यहाँ की शांति भंग करने का अधिकार किसी को भी नहीं है।

अब देखिए, केदारनाथ धाम में रील वाला ड्रामा इतना बढ़ गया कि वहाँ के स्थानीय पुजारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। भड़कते हुए पुजारी इस वीडियो में कह रहे हैं कि कुछ लोगों ने और प्रशासन ने तमाशा बना रखा है, गाजा-बाजा नहीं बजना चाहिए। वो कह रहे हैं कि सिर्फ ढोल बजेगा, भगवान के दर्शन के लिए यहाँ लोगों को आना चाहिए। उनका पूरा ज़ोर है कि क्षेत्र को शांत रखा जाना चाहिए, ये सब करना है तो लोग न आएँ। असल में इंदौर के 44 लड़के और 18 लड़कियों का एक समूह वहाँ 30 ढोल और 10 ताशे लेकर पहुँचा था, वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए।

अगर हम कहीं भी घूमने जा रहे हैं, अपने बगल के गाँव में भी – तो सबसे पहले चीज हमें ये देखनी चाहिए कि उन्हें क्या पसंद है और क्या नहीं और उसी अनुरूप व्यवहार करना चाहिए। अगर आप किसी के घर में बतौर मेहमान जाते हैं तो वहाँ अपनी नहीं चलाते। हाँ, ये देश का हर कोना हर एक देशवासी का है, लेकिन देश की विविधता का सम्मान करना भी हम देशवासियों का ही काम है। अयोध्या, मथुरा, काशी, केदारनाथ या फिर उज्जैन महाकाल मंदिर रील बनाने के स्थल नहीं हैं।

इस मामले में आप दक्षिण भारत को देख लीजिए, जहाँ हर मंदिर के कुछ नियम-कानून हैं और आपको उसका अनुसरण करना पड़ता है। तमाम मंदिरों के अपने ड्रेस कोड भी हैं, प्रधानमंत्री या उनके सुरक्षाकर्मी भी जाते हैं तो उन्हें इसका पालन करना पड़ता है। अगर कहीं कुछ पाबंदियाँ नहीं लगाई गई हैं, तब हमारे जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि हम वहाँ की मर्यादा को बनाए रखें। उत्तराखंड की पुलिस भी चेतावनी जारी कर चुकी है कि धाम की मर्यादा बनाए रखने के लिए धूम्रपान न करें, हुड़दंग न करें।

केदारनाथ धाम में रीलबाजी: क्या कहते हैं पुजारी

हमने इस पूरे मामले को समझने के लिए वहाँ के पुजारी आचार्य संतोष जी महाराज से बात की। उनका आरोप है कि सरकार का ध्यान अब तीर्थ से पर्यटन की तरफ केंद्रित हो गया है। उनका कहना है कि पूजा परंपरा में बदलाव आ गया है, जो गलत है। उन्होंने कहा कि यहाँ की परंपरा है गर्भगृह में जाकर दर्शन करना, जैसा उज्जैन महाकाल मंदिर में भी है। वहाँ पूजा होती है, माता को घी लगाई जाती है, गणेश जी की प्रथम पूजा का नियम है।

उनका कहना है, “गणेश जी की पूजा के नियम की अनदेखी हो रही है। अब VIP दर्शन कराए जा रहे हैं। सीधे गर्भगृह में 2100 रुपए शुल्क लेकर प्रवेश कराया जाता है, जिससे ऐसे में धर्म दर्शन में रास्ते में जो गणेश जी की पूजा होती है, वो नहीं हो पा रही है। धर्म और आस्था बिक रही है, परंपराएँ कहाँ रह गई हैं? ‘विशेष पूजा’ में भी गणेश जी की पूजा छोड़ कर आगे की पूजा की जाती है। मेरी सलाह है कि श्रद्धालु कितनी भी संख्या में आएँ, यहाँ की परंपराओं पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है।”

उन्होंने कहा कि हमें ये देखे जाने की ज़रूरत है कि एक घंटे में हम कितने श्रद्धालुओं को दर्शन करा सकते हैं और दिन भर में हमारे पास दर्शन के लिए कितने घंटे हैं, इस हिसाब से नियम बनाया जाना चाहिए और इसमें न सिर्फ मंदिर समिति बल्कि तीर्थ पुरोहितों को भी सहयोग करना चाहिए। संतोष जी महाराज ने कहा कि यहाँ मशीनें चल रही हैं, प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हो रही है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य के नाम खुलेआम खनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज योजनाएँ नहीं बल्कि प्रकृति ज़रूरी है।

संतोष जी महाराज ने कहा कि कई तीर्थस्थलों पर कम खर्च और कम समय में लोग पहुँच सकते हैं, लेकिन वो केदारनाथ धाम आ रहे हैं क्योंकि यहाँ वो खुद को प्रकृति के करीब पाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर ये प्रकृति ही हम बचा नहीं पाएँगे तो आएगा कौन? उन्होंने कहा कि कमाई की जगह प्रकृति को बचाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर समिति ने जगह-जगह विज्ञापन दे रखा है कि 2100 रुपए में दर्शन करा देंगे, जबकि आम लोग 4-4 घंटे लाइन में खड़े रहते हैं। उन्होंने मंदिर समिति पर करोड़ों रुपए के सोने में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए।

केदारनाथ धाम में अव्यवस्था? मंदिर समिति ने अपनी सफाई में क्या कहा

वहीं केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजयेन्द्र अजय इन आरोपों से ताल्लुक नहीं रखते। उन्होंने कहा कि मंदिर में लॉकर रूम की व्यवस्था नहीं है, इस कारण मंदिर समिति श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन, कैमरा या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को नहीं जमा करा पाती हैं। उन्होंने कहा कि बाकी मंदिरों के मुकाबले केदारनाथ मंदिर के पास जगह की भी कमी है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं से लगातार मंदिर की मर्यादा बना रखने की अपील मंदिर समिति करता रहता है।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं से लगातार अपील की जाती है कि परंपराओं का पालन किया जाए और किसी की भी धार्मिक भावनाएँ आहत न की जाएँ। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि मंदिर समिति का अधिकार क्षेत्र सिर्फ पूजा-प्रबंधन तक सीमित है, बाकी चीजें पुलिस-प्रशासन की जिम्मेदारी है। VIP दर्शन के आरोपों को नकारते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ ऐसी कोई व्यवस्था है ही नहीं, प्रोटोकॉल से आने वाले VIPs से देश के सभी मंदिरों में शुल्क लिया जाता है।

केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजयेन्द्र अजय ने कहा कि किसी-किसी मंदिर में सामान्य दर्शनार्थियों से भी शुल्क लिया जाता है, लेकिन केदारनाथ धाम में ऐसा कुछ भी नहीं है। सोने में गड़बड़ी के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अनाधिकारिक कुछ भी नहीं होता बल्कि सब कुछ रिकॉर्ड पर होता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की कॉर्पोरेट बॉडी है, हम ऑटोनोमस हैं लेकिन कई चीजों में सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार समिति के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और फाइनेंस ऑफिसर नियुक्त करती है।

क्या श्रद्धालुओं से अनावश्यक रूप से वसूले जाते हैं पैसे?

हमने केदारनाथ धाम जाने वाले कुछ श्रद्धालुओं से भी बातचीत की, जिनका कहना है कि सब इंस्टाग्राम रील्स बनाने या फिर नशा करने के लिए ही केदारनाथ धाम नहीं आते हैं, ऐसे में सभी को इस रूप में देखना ठीक नहीं है। एक पक्ष ये भी है कि केदारनाथ धाम में ढोल-ताशे वाले जिस दल को रोका गया, वो देश के कई मंदिरों में घूम कर ऐसा कर चुके हैं और वो काफी भक्तिभाव से ये सब करते हैं। उस पक्ष का ये भी कहना है कि वो पारंपरिक वेशभूषा में रहते हैं और मर्यादा का किसी प्रकार से भी उल्लंघन नहीं करते।

एक श्रद्धालु ने कहा कि अगर ढोल-ताशे की आवाज़ से दिक्कत है तो फिर सुबह से शाम तक केदारनाथ धाम के ऊपर जो हेलीकॉप्टर मँडराते रहते हैं, उससे पर्यावरण को दिक्कत क्यों नहीं होती? उन्होंने एक और विषय पर आवाज़ उठाई, वो है अनावश्यक वसूली का। कुछ श्रद्धालुओं की शिकायत है कि होटल रूम से लेकर अन्य सभी सेवाओं के लिए कई गुना ज़्यादा रुपए वसूले जाते हैं और इस पर कोई आवाज़ नहीं उठाता। उनका कहना है कि कभी-कभी 10 गुना ज्यादा शुल्क लिया जाता है।

हालाँकि, ये समस्या खासकर पहाड़ की नहीं है बल्कि देश के अधिकतर तीर्थ एवं पर्यटन स्थलों पर ट्रांसपोर्ट और स्टे में बाहर से आने वालों को अधिक शुल्क चुकाना पड़ता है। पूरी बात का लब्बोलुआब ये है कि हमें धार्मिक स्थलों पर वहाँ की मर्यादा का पालन करते हुए भक्ति और अध्यात्म में रमना चाहिए, शांति के साथ। अब ढोल-ताशा बजाने से रोकने को लेकर अलग-अलग राय हो सकते हैं, वो भक्तिभाव से कर रहे थे या फिर सोशल मीडिया के लिए – उनके मन की बात विशुद्ध रूप से तो बाबा केदार को ही पता होगी।

जिसने मृत पिता के लिए कहा- करते थे मेरा यौन शोषण, वो CM हाउस में खुद के साथ बदसलूकी पर चुप क्यों: कई सवाल, कब देंगे मालीवाल-केजरीवाल जवाब

दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मुख्यमंत्री केजरीवाल आवास पर हुई मारपीट वाला विवाद बढ़ता जा रहा है। सोमवार (13 मई 2024) को पुलिस के पास उनके नाम से एक कॉल आई कि उनके साथ मारपीट हुई है। इसके बाद खुद स्वाति मालीवाल भी पुलिस थाने तक पहुँचीं, लेकिन शिकायत करातीं इससे पहले उन्हें एक कॉल आ गई और वो तुरंत बाहर चली गईं। उसके बाद वो लौट कर नहीं आई। पूरी खबर पर संदेह किया जाता इससे पहले ही AAP सांसद संजय सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस के सामने आए और बोले कि AAP स्वाति के साथ है। वहीं स्वाति मालीवाल के पूर्व पति ने इस संबंध में वीडियो बनाकर पूरे हमले को साजिश करार दिया और अपनी पूर्व पत्नी की जान को खतरा तक बताया…।

इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए ये तो स्पष्ट लग रहा है कि स्वाति मालीवाल के साथ मुख्यमंत्री केजरीवाल के आवास पर बदसलूकी हुई, लेकिन सवाल ये है कि इस मामले में अभी स्वाति खुद क्यों चुप हैं। उन्होंने अभी तक अपने ऊपर हुई घटना के बारे में किसी को क्यों कुछ नहीं बताया।

स्वाति मालीवाल राज्यसभा सांसद बनने से पहले सालों तक दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रही थीं। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के साथ छेड़छाड़, बदसलूकी और मारपीट के कई मुद्दे उठाए। जरूरत पड़ने पर हड़ताल की, नोटिस जारी किए, सड़क पर बैठ गईं। उन्होंने अन्य राज्यों में भी अपना हस्तक्षेप किया जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता…मगर बात जब खुद के लिए इंसाफ माँगने की आई तो न तो वो मीडिया के सामने बयान देने आईं और न हीं उन्होंने कोई वीडियो बनाया, न ही कोई पोस्ट किया। उनके पूर्व पति तक ने अपनी वीडियो में कहा है कि स्वाति को इसमें बोलना चाहिए। वो क्यों चुप है ये नहीं पता चल पा रहा है।

सोशल मीडिया पर लग रहे अनुमान

इस मामले को देखते हुए राजनैतिक विरोधी ये तक कहने लगे कि स्वाति पर जो सीएम आवास पर हमला हुआ वो बिना सीएम की जानकारी में हुए नहीं हो सकता है… इसलिए अगर सच में ऐसा है तो स्वाति को इस मामले में बोलना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। इसके अलावा कुछ लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि केजरीवाल राज्यसभा सांसद का पद अपने वकील को देना चाहते हैं, जिसने उनका कोर्ट में केस लड़ा, इसलिए हो सकता है स्वाति से पद छोड़ने को कहा गया हो और न सुनवाई पर ये घटना घटी। कुछ का मानना है कि मीडिया में आने के लिए स्वाति मालीवाल ने सिर्फ और सिर्फ ड्रामा किया है। उनपर कोई हमला नहीं हुआ है और कुछ का कहना है कि हो सकता है कि इस पूरी घटना के पीछे कोई निजी मामला हो जिसके बारे में स्वाति मीडिया में न कहना चाहती हों इसलिए उन्होंने ऐसा किया है।

भाजपा की महिला नेता ने उठाया सवाल

भाजपा की महिला नेता शाजिया इल्मी ने भी इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने सीएम केजरीवाल से इस मामले में सच्चाई बताने को कहा है। उन्होंने कहा है कि इस संबंध में पिछले 48 घंटे से सवाल किए जा रहे हैं, फिर भी केजरीवाल चुप क्यों हैं? वो बताएँ कि उन्होंने बिभव पर क्या एक्शन लिया है? क्या बिभव ने केजरीवाल की ओर से स्वाति को पीटा जो वो एक्शन लेने से कतरा रहे हैं? उन्हें धमकी दी गई है? क्यों कोई एफआईआर अब तक नहीं हुई है? क्या इस घटना के लिए केजरीवाल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

स्वाति मालीवाल की चुप्पी से उठते हैं सवाल

बता दें कि सीएम आवास पर बदसलूकी मामले में अरविंद केजरीवाल के सेक्रेट्री भिभव कुमार के खिलाफ पूर्व दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष कब बोलेंगीं ये तो नहीं पता लेकिन उनकी चुप्पी के कारण, आप के रवैये के चलते कुछ सवाल सोशल मीडिया पर उठने लगे हैं। जैसे ये पूछा जाना तो लाजिमी है कि एक नंबर से जब कॉलें आईं और स्वाति थाने भी पहुँची तो उन्होंने एक कॉल आने पर केस क्यों नहीं कराया… ऐसा तो नहीं वो कॉल उन्हें धमकाने या चुप कराने के लिए किसी ने की हो। वरना उनसे जुड़ी खबरें बताती हैं कि उन्होंने सक्रिय होकर महिलाओं के मुद्दों को उठाया है।

अगर हम उनका ट्विटर हैंडल देखेंगे तो भी यही पता चलता है कि उन्होंने इस घटना के बारे में अब तक सोशल मीडिया पर एक शब्द नहीं लिखा है। ऐसे में ये भी कहा जा रहा है कि स्वाति हैं कहाँ पर? क्या वो इस हाल में हैं कि अपने सोशल मीडिया को एक्सेस कर सकें? अगर ऐसा है तो क्यों अभी तक उन्होंने इस पूरे विवाद में कोई शिकायत नहीं की।

एक सवाल ये भी कि आम आदमी पार्टी ने इस खबर के मीडिया में आने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि वो आरोपित पर कार्रवाई करेंगे। कहीं ऐसा तो नहीं ये इस डर से किया गया ताकि सीएम केजरीवाल का नाम मीडिया में न उछले क्योंकि वो अभी जेल से बाहर आएँ हैं। लोग कह रहे हैं कि अगर इस मामले में सीएम का कोई हाथ नहीं है तो उन्हें भी इस संबंध में अपना पक्ष साफ कर देना चाहिए।

ये भी पूछा जा रहा है कि जब स्वाति पर हमला हुआ होगा, तो वो चीखी-चिल्लाई भी होंगी… ऐसे में क्या कोई उनके आसपास नहीं आया। क्या न केजरीवाल वहाँ मौजूद थे और न ही सुनीता केजरीवाल वहाँ मौजूद थीं… अगर दोनों वहीं थे तो उन्होंने उस मामले को वहीं क्यों नहीं सुलझाया और एक महिला के खिलाफ कार्रवाई होता देख एक्शन क्यों नहीं लिया।

सबड़े बड़ी बात और सबसे बड़ा सवाल इस घटना के बाद ये है कि जिस तरह से स्वाति मालीवाल के पूर्व पति नवीन जयहिंद की वीडियो सामने आई है और उन्होंने वीडियो में गंभीर इल्जाम लगाए हैं उसे देखते हुए पूछा जा सकता है कि आखिर नवीन कौन सी साजिश के बारे में बात कर रहे थे। उन्हें क्यों लगता है कि स्वाति की जान को खतरा है। उन्होंने क्यों ये बोला कि संजय सिंह पहले से जानते थे कि ये अटैक होगा, उन्होंने आप सांसद को फटकारते हुए क्यों एक्टिंग बंद करने को कहा। ऐसा क्या है जो नवीन जयहिंद समझ रहे हैं लेकिन मीडिया तक वो बात नहीं खुल पा रही। ऐसे तमाम सवाल हैं जो स्वाति की चुप्पी से उमड़ रहे हैं लेकिन जवाब कहीं से कहीं तक नहीं मिल रहा है। याद रहे स्वाति वही महिला हैं जिन्होंने 2023 में अपने पिता के खिलाफ भी बयान दे दिया था। उन्होंने साफ बताया था कि उनके पिता उनका यौन शोषण करते थे, उन्हें चोटी पकड़ पकड़कर मारते थे।