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110 दिन में 200 उड़ान, दिन में 4-4 बार लेता था फ्लाइट… हवाई जहाज से चुराता था गहने-पैसे, दिल्ली में खोल रखा है गेस्ट हाउस: जानिए कैसे पुलिस के चढ़ा हत्थे

दिल्ली पुलिस ने सोमवार (13 मई, 2024) को हवाई जहाज़ों में चोरी करने वाले एक चोर को गिरफ्तार किया है। चोर का नाम राजेश कपूर है जिसकी उम्र 40 साल है। राजेश पिछले 19 वर्षों से चोरी करता आ रहा था। वह पहले ट्रेनों में चोरी करता था। राजेश के निशाने पर खासतौर पर बुजुर्ग महिलाएँ हुआ करती थीं। वह बोर्डिंग के दौरान उनके हैंडबैग को चुराया करता था। राजेश के निशाने पर खासतौर पर बुजुर्ग महिलाएँ हुआ करती थीं। वह बोर्डिंग के दौरान उनके हैंडबैग को चुराया करता था। आरोपित चोरी के इरादे से लगभग 200 उड़ानों में यात्रा कर चुका है। वो पहाड़गंज में ‘रिक्की डीलक्स’ नाम से गेस्ट हाउस भी चलाता है।

राजेश कपूर की गिरफ्तारी की पुष्टि दिल्ली पुलिस की DCP IGI उषा रंगनानी ने की है। सोमवार को उन्होंने इस बाबत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि पिछले 3 माह के अंदर इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से चोरी के 3 मामले आए। इसमें से पहला केस 2 फरवरी 2024 का था। तब अमृतसर से दिल्ली की यात्रा के दौरान एक यात्री के 20 लाख के आभूषण चोरी हो गए थे। एक अन्य केस में 11 अप्रैल को हैदराबाद से दिल्ली जा रही फ्लाइट में एक यात्री का 7 लाख रुपए मूल्य का आभूषण चोरी हो गया था।

इन केसों का खुलासा करने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया। हवाई अड्डे की CCTV और जिन विमानों में चोरियाँ हुई थीं उनके यात्रियों की जानकारियाँ जुटाई गईं। इनमें एक यात्री को चिह्नित किया गया जो दोनों उड़ानों में मौजूद था। संदिग्ध का नाम राजेश कपूर निकला। जब एयरलाइंस से राजेश का नंबर निकाला गया तो वह फर्जी मिला। पुलिस ने प्रयास कर के राजेश कपूर का असली नंबर खोज निकाला। आरोपित को करोल बाग़ इलाके से हिरासत में ले लिया गया जहाँ वो चोरी के आभूषण किसी शरद जैन नाम के व्यक्ति को बेचने आया था।

पुलिस की पूछताछ में राजेश कपूर ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। राजेश ने कुल 5 ऐसे मामले बताए जहाँ उसने उड़ानों में चोरियाँ की थीं। इन चोरियों से मिले पैसे राजेश ने ऑनलाइन और ऑफ़लाइन जुआ खेला। पुलिस ने और खोजबीन की तो राजेश कुल 11 अपराधों में शामिल निकला। ये अपराध चोरियों और जुआ खेलने के थे। चोरी करने के लिए राजेश लगभग 200 विमानों में यात्रा कर चुका था। वह कुल 110 दिनों तक हवाई जहाज में ही रहा था। राजेश के निशाने पर एयर इंडिया और विस्तारा की जहाजें हुआ करती थीं।

अब तक हुई जाँच में यह सामने आया है कि राजेश पहले ट्रेनों में चोरियाँ करता था। साल 2005 से उसने चोरी करना शुरू किया। कुछ दिनों बाद राजेश ने हवाई जहाज़ों में चोरियाँ करना शुरू कर दिया। चोरी करने के लिए वह उन बुजुर्ग महिलाओं को चिह्नित करता था जो विदेश की यात्रा पर निकली होती थीं। यात्रा के दौरान राजेश अपनी सीट बार-बार बदलता रहता था। उड़ान के दौरान राजेश ओवरहेड केबिनों में रखे बैग को टटोलता था और उसमें से कीमती सामान निकाल लिया करता था।

पुलिस की जाँच में यह बात भी निकल कर सामने आई है कि राजेश अपने मृत भाई ऋषि की ID पर कई यात्राएँ कर चुका है। वह दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में रहता है। चोरी करने के बाद राजेश अपने फोन को बंद कर दिया करता था। उसका फोन काफी कम समय के लिए ऑन होता था। राजेश की गिरफ्तारी उसके घर से हुई है। उसके पास से चोरी किए गए सोने-चाँदी के आभूषण और कई अन्य कीमती सामन बरामद हुए हैं। पुलिस ने राजेश से चोरी का आभूषण खरीदने वाले 46 वर्षीय शरद जैन को भी गिरफ्तार कर लिया है। मामले में पुलिस की जाँच अभी जारी है।

पतंजलि को ‘भ्रामक विज्ञापनों’ पर सुप्रीम कोर्ट में खींचा, अब खुद के अध्यक्ष का बयान ही बना IMA के गले की फाँस: जानिए क्यों डॉक्टर अशोकन की माफी नहीं हुई कबूल

भ्रामक विज्ञापनों के नाम पर पतंजलि को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाने वाला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) अपने ही बिछाए जाल में फँस गया है। 14 मई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने IMA अध्यक्ष द्वारा मीडिया में की गई टिप्पणी पर फटार लगाई और IMA अध्यक्ष डॉ आरवी अशोकन द्वारा माँगी गई माफी पर असंतोष जताया।

आईएमए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का ऐसा रवैया तब देखने को मिला है जब खुद डॉ आरवी अशोकन कोर्ट के आगे पेश हुए थे। उन्होंने जस्टिस हिमा कोहली और असहानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच के आगे बिन कोई शर्त माफी भी माँगी लेकिन जज फिर भी IMA अध्यक्ष से नाराज रहे।

बता दें कि पतंजलि का विवाद सुप्रीम कोर्ट में चलने के दौरान IMA चीफ ने मीडिया में एक विवादित बयान दिया था और दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट उन पर उंगली उठाने लगा है। बाद में इसी इंटरव्यू के बारे में पतंजलि के वकील मुकुल रोहतगी ने जजों को बताया जिसके बारे में जानकर कोर्ट IMA पर नाराज हुआ और मानहानि केस तक की बात कही। इसके अलावा उन्होंने 23 अप्रैल, 2024 को भी संस्था से कहा था कि वो पहले अपने घर को व्यवस्थित करे। आधुनिक दवाओं को लेकर अनैतिक कारोबार और अस्पतालों द्वारा महँगी और गैर-ज़रूरी दवाएँ लिखने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई थी।

अब इसी मामले में आगे कोर्ट ने आईएमए चीफ से कहा- “डॉ अशोकन आपके अनुभव को देखते हुए हम आपसे जिम्मेदाराना रवैया चाहते थे, लेकिन आपने वही किया जो पतंजलि के संस्थापकों ने किया। आपने जाकर मीडिया में टिप्पणी की। ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस केस को भी वैसे ही ट्रीट किया जाएगा जैसे कि पतंजलि के साथ किया गया था।”

कोर्ट ने कहा, “आप IMA के अध्यक्ष हैं। IMA के 3 लाख 50 हजार डॉक्टर सदस्य हैं। किस तरह की आप लोगों पर अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं। आपने पब्लिक में माफी नामी क्यों नही माँगी। आपने पेपर में माफीनामे क्यों नही छपवाया। आप एक जिम्मेदआर व्यक्ति हैं। आपको जवाब देना होगा। आपने 2 हफ़्ते में कुछ नहीं किया। आपने जो इंटरव्यू दिया उसके बाद क्या किया। हम आपसे जानना चाहते हैं। आपने जो लंबित मामले में कहा, हमें बहुत चौंकाने वाला लगा, जबकि आप खुद केस में एक पार्टी थे। आप देश के नागरिक हैं क्या देश में जज फैसले के लिए क्रिटिसिज्म नहीं सहते, लेकिन हम कुछ नही कहते क्योंकि हमारे में अहंकार नहीं है।”

जस्टिस कोहली ने IMA अध्यक्ष से कहा- “आपकी माफी के लिए हमें सिर्फ वही कहना है जो हमने पतंजलि के लिए कहा था। यह मामला कोर्ट में हैं, जिसमें आप पार्टी हैं। आपके वकील टिप्पणियों को हटाने के लिए कह सकते थे, लेकिन आप प्रेस के पास चले गए। हम बिलकुल इससे खुश नहीं हैं। हम आपको इतनी आसानी से माफ नहीं कर सकते हैं। आप सोचिए तो आप दूसरों के लिए कैसा उदाहरण तैयार कर रहे हैं।”

कोर्ट ने IMA की ओर से पेश वकील वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया से अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा हम मुवक्किल द्वारा माँगी गई माफी को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं। इस पर पटवालिया ने कोर्ट से एक और मौका माँगा। साथ ही कहा कि उन्होंने कुछ गलती की है, ऐसा करना उनकी नादानी थी। डॉ अशोकन ऐसी स्थिति में पड़ गए थे कि उन्हें वो बयान देना पड़ा। वहीं जस्टिस ने उनकी बात को यह कहकर खारिज कर दिया- “आपके कहने का क्या मतलब है समाचार एजेंसी ने ऐसा कहने के लिए जाल बिछाया था।” इसके बाद टीआरपी का मुद्दा छेड़ने पर इस पहलू पर सहमति बनी।

उल्लेखनीय है कि यह सारा मामला पिछले वर्ष नवंबर में शुरू हुआ था। उसी समय सुप्रीम कोर्ट ने आधुनिक चिकित्सा पर सवाल उठाने के लिए रामदेव और उनकी कंपनी को कड़ी चेतावनी जारी की थी। इसके बाद इस मामले में सुनवाई चली। पतंजलि के संस्थापक ने इस संबंध में बिन किसी शर्त माफी माँगी। 14 प्रोडक्ट जिनपर बैन लगा था उन्हें बाजार से वापस मँगाया।

अब इस समय में भ्रामक विज्ञापन केस में योग गुरु रामदेव, उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि आयुर्वेद पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। दोनों को अगले आदेश तक कोर्ट में पेश होने से छूट भी दे दी गई है। वहीं IMA पर सख्ती दिखाई गई है।

क्या ‘सालार के बेटे’ के खिलाफ चुनाव भी नहीं लड़ सकती एक हिंदू बेटी? हैदराबाद में AIMIM समर्थक भीड़ ने माधवी लता को दी माँ की गाली, देखती रही पुलिस

लोकसभा चुनाव 2024 के चौथे चरण में सोमवार (13 मई, 2024) को 96 सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें से एक हैदराबाद भी था। तेलंगाना की राजधानी को AIMIM का गढ़ माना जाता है, जहा पिछले 40 वर्षों से ओवैसी परिवार का कब्ज़ा है। इस बार असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भाजपा ने कोम्पेल्ला माधवी लता को उतारा है। उनका आरोप है कि बड़ी मात्रा में फर्जी मतदान हुआ है और पुलिस ने बुर्कानशीं महिलाओं की फोटो उनके पहचान-पत्र से मिलान नहीं किया।

अब एक वीडियो सामने आया है, जिसमें AIMIM समर्थक भीड़ जुटा कर माधवी लता को गाली देते हुए दिख रहे हैं। एक शख्स ‘चल निकल, माँ की $# तेरी’ चीख रहा है। उक्त शख्स ने नीले रंग की शर्ट पहन रखी है और ब्लैक गॉगल्स लगा रखा है। इस दौरान माधवी लता वहाँ शांत खड़ी रहीं और उन्होंने पलट कर जवाब भी नहीं दिया। बड़ी बात ये है कि ये सब हैदराबाद पुलिस के सामने हुआ। पुलिसकर्मियों ने गंदी-गंदी गालियाँ देने वाले उस व्यक्ति को गिरफ्तार भी नहीं किया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस उसे समझा रही है और पीछे जाने को कह रही है, लेकिन वो लगातार माँ की गालियाँ देते हुए चीख रहा है। माधवी लता उस दौरान फोन पर किसी से बात कर रही थीं, उन्हें उनके सुरक्षाकर्मियों ने अपने घेरे में ले लिया। वहाँ इकट्ठी भीड़ उन्हें वहाँ से निकलने को कह रही थी। पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद भीड़ वहाँ से तितर-बितर नहीं हुई। बता दें कि पोलिंग बूथ पर बुर्कानशीं महिलाओं का चेहरा उनके पहचान-पत्र से मिलाने को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है।

माधवी लता ने इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि क्या ऐसी गालियाँ दिए जाने से वो डर जाएँगी? उन्होंने कहा कि वो भी इस पाता बस्ती की गलियों में खेलते हुए बड़ी हुई हैं। भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि एक महिला वहाँ लड़ने आ गई और जनता को भी पसंद आ गई, इससे विरोधी डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि विपक्ष का हर चमचा रो रहा है। माधवी लता अपने हिन्दुवत्ववादी चेहरे के लिए जानी जाती हैं और राष्ट्रीय मीडिया में भी उन्हें अच्छी कवरेज मिली है।

बता दें कि बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाई अकबरुद्दीन को ‘सालार का बेटा’ बताया था। वो अकबरुद्दीन ही है, जिसने 15 मिनट के लिए पुलिस हटा देने के बाद अंजाम देखने की धमकी हिन्दुओं को दी थी। बता दें कि ओवैसी भाइयों के अब्बा सुल्तान सलाहुद्दीन को ‘सालार-ए-मिल्लत’ कहा जाता था, इसका अर्थ है – जननेता। सलाहुद्दीन के अब्बा अब्दुल वहीद ने AIMIM की स्थापना की थी। सलाहुद्दीन ने 4 दशक के अपने राजनीतिक करियर में अखंड आंध्र प्रदेश के मुस्लिम वोटरों को अपने साथ रखा, अपने मनमुताबिक पाले में उन्हें झुकाया।

हनी ट्रैप, सेक्स टेप, पैसा… चीन ने खोल लिए सारे घोड़े फिर भी नेपाल में उखड़ गए पैर: भारत को घेरने के लिए लेकर आया BRI, वह 7 साल से अटका पड़ा

भारत को लगातार पड़ोसी देशों के बहाने घेरने का प्रयास करने वाला चीन, नेपाल में अपना एजेंडा पूरा नहीं कर पा रहा है। नेपाल के भीतर चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) रफ़्तार नहीं पकड़ पा रहा है। नेपाल और भारत के संबंध इस मामले में सबसे बड़ी रुकावट हैं। इसके अलावा चीन का विदेशों में दिए जाने वाले कर्जे के प्रति रवैया भी इसकी चाल धीमी कर रहा है।

नेपाल, चीन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में 7 साल पहले ही शामिल हो चुका है लेकिन इस पर असल प्रगति अभी नहीं हो पाई है। दोनों देशों के बीच कई मामलों पर तल्खी भी सामने आ चुकी है। चीन ने नेपाल में बनाए गए कुछ प्रोजेक्ट को BRI का नाम दिया है, इसे नेपाल ने नकार दिया है।

क्या है BRI, नेपाल में क्यों घुसना चाहता है चीन?

BRI चीन का एक बड़ा प्रोजेक्ट है। चीन इसके अंतर्गत ऐसे देशों में रोड, रेलवे, एयरपोर्ट और समुद्री बंदरगाहों का निर्माण या विकास करता है, जो कि काफी गरीब हैं और खुद यह करने में सक्षम नहीं है। BRI को चीन नए रेशम मार्ग की संज्ञा देता है। चीन पाकिस्तान और बांग्लादेश को पहले ही BRI का सदस्य बना चुका है। 2017 में नेपाल भी चीन के BRI का सदस्य बन गया था। उस समय नेपाल की सरकारों ने चीन से नजदीकी बढ़ाना चालू की थीं।

हालाँकि, इस समझौते में आने के 7 सालों के बाद भी नेपाल में चीन का यह प्रोजेक्ट रफ़्तार नहीं पकड़ पाया है। चीन, नेपाल में भारत का प्रभाव कम करने के कारण घुसना चाहता है। नेपाल, पारंपरिक रूप से भारत का सहयोगी रहा है। नेपाल अपनी लगभग 70% जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर है। उसका विदेशों से होने वाला कारोबार भी भारत के जरिए होता है। खाद्य सामग्रियों से लेकर ईंधन तक भारत नेपाल को देता है। आर्थिक पहलू के अलावा भारत का नेपाल के साथ सांस्कृतिक संबंध भी है।

चीन भारत और नेपाल के इसी सहयोग को खत्म करना चाहता है। चीन नेपाल में भारत का प्रभाव कम करके भारत को दूसरी तरफ से घेरना चाहता है। चीन, नेपाल को इन्फ्रा प्रोजेक्ट के सपने दिखा रहा है ताकि वह उसे कर्ज दे सके और जब नेपाल यह कर्जे वापस करने में असफल हो तब वह नेपाल में अपने लिए रणनीतिक बेस तैयार कर सके। हालाँकि, अभी तक उसे इस काम में सफलता नहीं मिली है। उसका BRI नेपाल में आकार नहीं ले पा रहा।

समझौता अब तक क्यों नहीं हो पाया फाइनल?

नेपाल और चीन के बीच BRI के लिए समझौता 2017 में ही हो चुका है लेकिन इस पार काम कुछ चिंताओं के चलते नहीं बढ़ पा रहा। दरअसल, नेपाल ने अभी तक BRI के तहत विकसित किए जाने वाले कोई भी प्रोजेक्ट नहीं चुने हैं। BRI ,किस तरीके से नेपाल में लागू किया जाए इसको लेकर चीन और नेपाल के बीच सहमति नहीं बन पाई है। नेपाल का कहना है कि वह अपने देश में बनने वाले BRI प्रोजेक्ट के लिए 1% से अधिक के ब्याज पर कर्ज नहीं ले सकता।

नेपाल ने चीन से यह भी कहा है कि वह BRI प्रोजेक्ट के लिए कर्जे की बजाय अनुदान लेना ज्यादा पसंद करेगा। नेपाल का कहना है कि इससे उनकी अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा। इसके अलावा नेपाल को BRI लागू करने वाले दस्तावेज के कुछ उपबंधों से समस्या है। इसीलिए इस पर हस्ताक्षर नहीं हो रहे। इसके अलावा नेपाल ने चीन को समझौते के तहत विकसित किए जाने वाले प्रोजेक्ट की लिस्ट भी पूर्व में सौंपी थी, इसमें 30 से अधिक प्रोजेक्ट के नाम थे। बाद में चीन ने काट कर इन प्रोजेक्ट की सँख्या 9 कर चुका है।

BRI को लेकर जहाँ पिछले 7 सालों में कोई प्रगति नहीं हो पाई है, वहीं आगे भी इसके कोई आसार नहीं दिखते। इसके पीछे चीन की नीतियाँ और उसके BRI की छवि एक बड़ा कारण है। नेपाल की आंतरिक राजनीति भी इसमें एक बड़ा कारण है। नेपाल की पार्टियों ने कहा है कि चीन के BRI को लागू करने से पहले सबके बीच सहमति होनी चाहिए।

नेपाल में दखल के लिए महिला का राजदूत का चीन ने किया था इस्तेमाल

चीन, नेपाल में अपने हित साधने के लिए सभी प्रकार के हथकंडे अपनाता आया है। 2020 में चीन की नेपाल में राजदूत होऊ यांगी नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हनी ट्रैप में फँसाने की खबरें सामने आई थी।

कहा गया था कि यांकी कहने पर ही ओली ने एक नक्शा पास करवाया था, जिसमें उत्तराखंड के तीन जगह कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताया था। इसके अलावा नेपाल के कुछ इलाकों पर चीन द्वारा अतिक्रमण करने की भी खबरें आई थी। कहा गया था कि ‘सेक्स टेप‘ की वजह से ओली इस अतिक्रमण को लेकर चुप हैं। बताया गया था कि होऊ यांगी को नेपाली सेना के प्रमुख जनरल पूर्णचंद्र थापा का दफ्तर हो या पीएम ओली का कार्यालय, चीनी राजदूत नेपाल के किसी भी क्षेत्र में बेरोकटोक आ-जा सकती थी।

नेपाल-चीन में होती रही है खींचतान

नेपाल और चीन में बीते कुछ समय में खींचतान भी होती आई है। नेपाल ने चीन से सहायता लेकर पोखरा एयरपोर्ट बनाया था। इसके लिए फंडिंग चीन की बैंकों ने की थी जबकि इसका निर्माण भी चीन की ही कम्पनियों ने किया था। नेपाल का कहना था कि यह प्रोजेक्ट BRI के तहत नहीं बना है और उससे अलग है। इसके उलट जब इसका उद्घाटन अक्टूबर 2023 में हुआ तब चीन ने इसे BRI के तहत बना हुआ बताया। नेपाल ने इससे इनकार किया। इसको लेकर नेपाल के भीतर चिंताएँ भी जाहिर की गईं।

भारत को घेरने की रणनीति हुई फेल

नेपाल के जरिए भारत को घेरने की रणनीति फेल हो गई है। भारत और नेपाल संबंधों में बीच में कुछ तल्खी आ गई थी जिसका चीन फायदा उठाना चाहता था। दोनों देशों पर BRI के लिए समझौता भी इसी दौरान हुआ था। हालाँकि, भारत से नेपाल के संबंध फिर से प्रगाढ़ हो गए। भारत वर्तमान में नेपाल के कई हाइड्रो और इन्फ्रा प्रोजेक्ट में भी मदद कर रहा है। बीते वर्ष 2023 में नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड भारत के दौरे पर आए थे।

इस दौरे में भारत ने नेपाल से 10,000 मेगावाट बिजली खरीदने का समझौता किया था। भारत ने इस दौरान नेपाल के कई बिजली प्रोजेक्ट बनाने को लेकर भी सहमति दी थी। इसके अलावा रेलवे लाइन और माल की आवाजाही को लेकर भी दोनों देशों में समझौते हुए थे। ऐसे में चीन की दाल नेपाल में गलना फिर से बंद हो गई है।

जहाँ पढ़ने वाले सारे बच्चे बनना चाहते हैं मुल्ले-मौलवी, वहाँ 196 गैर-मुस्लिम छात्रों को भी दी जा रही दीनी तालीम: उत्तराखंड के मदरसों का हाल देख बिफरा NCPCR

उत्तराखंड के मदरसों में गैर-इस्लामी बच्चों को इस्लामी तालीम दिए जाने का खुलासा हुआ है। इन बच्चों की संख्या 196 बताई गई है। कुछ मदरसों का गठजोड़ सरकारी स्कूलों के साथ भी पाया गया है। तमाम सरकारी मानकों पर खरे नहीं मिले। राज्य के इन मदरसों में भारत के कई प्रदेशों के छात्रों का एडमिशन पाया गया। ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने सोमवार (13 मई, 2024) को इन मदरसों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने दिल्ली जा कर शिक्षा विभाग को नोटिस जारी करने का भी एलान किया है।

NCPCR अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने सोमवार को उत्तराखंड में पुलिस सहित कई अन्य विभागों से बैठक के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि देहरादून में ही 3 ऐसे मदरसे चिह्नित हुए हैं जहाँ राज्य के बाहर रहने वाले कई छात्रों को भर्ती करवाया गया है। प्रियंक के अनुसार इन बच्चों को बुनियादी शिक्षा के अधिकार से वंचित किया गया है। बाहरी छात्रों में बिहार और उत्तर प्रदेश के बच्चे बताए जा रहे हैं। एक मदरसे में तो बच्चों से बाकायदा फीस वसूली जा रही थी। इस मदरसे ने अपना गठजोड़ एक स्थानीय स्कूल के साथ बताया।

स्कूल से मदरसों का गठजोड़ प्रियंक कानूनगो ने शिक्षा विभाग की गड़बड़ी मानते हुए इसके पीछे भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। प्रियंक ने बताया कि निरीक्षण के दौरान बच्चों की आँखों में डॉक्टर, इंजीनियर या पुलिस अधिकारी बनने के सपने नहीं थे। ये सभी बच्चे मुफ़्ती, मौलवी, काजी और कारी बनना चाह रहे थे। NCPCR अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने मीटिंग एक दौरान ही इस बावत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही दिल्ली पहुँच कर संबंधित विभागों को नोटिस भी जारी की जाएगी।

प्रियंक कानूनगो ने आगे बताया कि उत्तराखंड में कई ऐसे मदरसे भी चल रहे हैं जो सरकार द्वारा बनाए गए मानकों पर खरे नहीं उतरते। उदहारण के तौर पर उन्होंने देहरादून के 3 उन मदरसों का नाम लिया जहाँ वो स्वयं औचक निरीक्षण के लिए गए थे। उन्होंने आगे कहा कि सरकारी मान्यता प्राप्त स्कूलों में उन्हें हिन्दू बच्चों को पढ़ाने की भी जानकारी मिली है। NCPCR को कुछ समय पहले उत्तराखंड के मदरसों में 749 गैर इस्लामी बच्चों के पढ़ने की जानकारी मिली थी। ताजा आँकड़ों के मुताबिक, अभी भी 196 गैर-इस्लामी बच्चे मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ रहे हैं।

प्रियंक ने संविधान का हवाला देते हुए आगे कहा कि किसी भी बच्चे को उसके माता-पिता की लिखित अनुमति के बिना किसी दूसरे मजहब की शिक्षा नहीं दी जा सकती। हिन्दू बच्चों को मदरसों में पढ़ाए जाने को प्रियंक ने एक आपराधिक साजिश माना है। इस अपराध में उन्होंने राज्य के शिक्षा व अल्पसंख्यक विभाग को बराबर का जिम्मेदार माना है। अल्पसंख्यक विभाग ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को बताया कि मदरसों की मैपिंग में कई जिलों के जिलाधिकारी (DM) सहयोग नहीं कर रहे।

अब NCPCR उत्तराखंड के तमाम जिलाधिकारियों को नोटिस जारी करेगा। नोटिस में उन सभी से स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। ‘X’ हैंडल पर प्रियंक ने अपने निरीक्षण के वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “आज देहरादून, उत्तराखंड में अवैध अनमैप्ड मदरसों का निरीक्षण किया मदरसा वली उल्लाह दहलवी व मदरसा दारूल उलूम में उत्तर प्रदेश व बिहार के गरीब बच्चों को ला कर रखा गया है। बच्चों के रहने के लिए बुनियादी सुविधाओं की भयंकर कमी है।”

प्रियंक कानूनगो ने आगे लिखा, “जहाँ बच्चे सोते हैं वहीं खाना बनता है। जहाँ दीनी तालीम दी जाती है वहीं लोग नमाज़ भी पढ़ने आते हैं। इसीलिए, बच्चों के खाने व सोने की दिनचर्या बेतरतीब है। किसी भी बच्चे को स्कूल नहीं भेजा जा रहा है। सभी बच्चे केवल मौलवी और मुफ़्ती ही बनना चाहते हैं। यहाँ के कारी/मौलवी के खुद के बच्चे स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी इन मदरसों के अस्तित्व से अनभिज्ञ हैं, आवश्यक कार्यवाही हेतु राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर रहे हैं।”

बांग्लादेश से आकर भारत में अवैध ढंग से रह रहे थे अलकायदा के 2 आतंकी, गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार: असम में टेरर नेटवर्क फैलाने का मिला था काम

असम के गुवाहाटी में सोमवार (13 मई 2024) को रेलवे स्टेशन पर अलकायदा से जुड़े दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। छानबीन में सामने आया है कि ये लोग आतंकवादी संगठन अल कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट से संबंध रखते हैं। इनकी पहचान बहार मिया (30) और रेयरली मिया (40) के तौर पर हुई है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, दोनों आतंकी बांग्लादेश से हैं और भारत में अवैध ढंग से बिन किसी पारपोर्ट के रह रहे थे। इनके पास से कुछ भारतीय दस्तावेज भी मिले हैं जिनका इस्तेमाल ये लोग असम में आतंकी नेटवर्क फैलाने के लिए रहे थे।

एक अधिकारी ने इस संबंध में जानकारी दी है कि ये दोनों युवाओं को आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा, “ये दोनों असम में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अवैध रूप से रह रहे थे। उनके पास से आधार और पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए गए।”

बता दें कि इससे पहले भी असम में बांग्लादेशी आतंकी संगठन अंसारुल बांग्ला टीम (एबीटी) अब्दुस सुकुर अली की गिरफ्तारी हुई थी। इस संबंध में खुद असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने जानकारी देते हुए बताया था कि “आतंकी अब्दुस सुकुर अली को भारत-बांग्लादेश सीमा के पास पकड़ा गया।”

सीएम बिस्वा ने कहा था असम में आतंकी मॉड्यूल को समय-समय पर नष्ट किया गया है और यह आगे भी जारी रहेगा। साल 2023 अप्रैल में धुबरी से एबीटी से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि बीते साल असम पुलिस ने एबीटी और भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा (एक्यूएलएस)के नौ मॉड्यूल का खुलासा किया था और इससे जुड़े 53 लोगों को गिरफ्तार किया था। इन गिरफ्तारियों के बाद ऐसे प्राइवेट मदरसों को जमींदोज किया गया था जहाँ आतंकी संगठन से जुड़े शिक्षक युवकों को कट्टरपंथ का एबीसीडी पढ़ा रहे थे।

काल भैरव से अनुमति ले PM मोदी ने लगातार तीसरी बार वाराणसी से भरा पर्चा: राम मंदिर का मुहूर्त निकालने वाले गणेश शास्त्री भी बने प्रस्तावक, NDA दिग्गजों का जमघट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लगातार तीसरी बार बतौर लोकसभा उम्मीदवार पर्चा भरा है। मंगलवार (14 मई, 2024) को इस मौके पर कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे। वाराणसी के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं DM एस राजलिंगम के समक्ष पर्चा दाखिल किया। कलेक्ट्रेट परिसर में नॉमिनेशन के बाद वो सीधे कॉन्वेंशन सेंटर ‘रुद्राक्ष’ पहुँचे, जहाँ उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।

पीएम मोदी ने गंगा सप्तमी के दिन नॉमिनेशन दाखिल किया है, साथ ही इस दिन राज पुष्य नक्षत्र का योग भी है। उससे पहले उन्होंने बाबा कालभैरव की पूजा-अर्चना की। दशाश्वमेध घाट पर उन्होंने माँ गंगा की भी पूजा की। वो क्रूज पर सवार होकर नमो घाट पहुँचे थे। गर्मी के बावजूद समाहरणालय के सामने बड़ी संख्या में लोग जुटे। BJP अध्यक्ष JP नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस दौरान उनके साथ रहे। 1 दिन पहले ही वाराणसी में उन्होंने भव्य रोडशो किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावकों में गणेश्वर शास्त्री, वैजनाथ पटेल, लालचंद कुशवाहा और संजय सोनकर का नाम तय किया गया था। जहाँ गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ब्राह्मण हैं और अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का मुहूर्त उन्होंने ही निकाला था और साथ ही समारोह में मुख्य पुजारी भी थे। सेवापुरी हरसोस गाँव के निवासी और जनसंघ के जमाने से कार्यकर्ता वैजनाथ पटेल व लालचंद कुशवाहा OBC समाज से आते हैं, जबकि संजय सोनकर दलित समुदाय से हैं

पीएम मोदी के वाराणसी का रोडशो ढाई घंटे चला था और इसमें 5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। नॉमिनेशन के दौरान LJP (रामविलास) के चिराग पासवान, TDP के चंद्रबाबू नायडू, जनसेना नेता व सुपरस्टार पवन कल्याण, शिवसेना (BT) नेता व महाराष्ट्र के CM एकनाथ शिंदे और महाराष्ट्र की ही ‘रिपब्लिकन पार्टी’ के नेता रामदास अठावले के अलावा RLD के जयंत चौधरी भी शामिल हुए। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और RLSP के ओमप्रकाश राजभर भी वहाँ मौजूद रहे।

मोईन शेख ने किया महिला का यौन शोषण, शादी का दिया झाँसा, फिर धर्मांतरण करने को कहा, FIR दर्ज: इंदौर का मामला

मध्य प्रदेश के इंदौर में मोईन अली नाम के एक शख्स ने एक महिला का लम्बे समय तक यौन शोषण किया और उसका धर्म परिवर्तन करवाने के लिए दबाव डाला। मोईन ने महिला पर धर्म परिवर्तन ना करने पर उसकी बेटियों को मारने की धमकी दी। इस मामले में FIR दर्ज करवाई गई है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर की एक महिला ने बताया कि वह अपने पति से कुछ समय से अलग रहती है। उसका पति उसे कुछ वर्ष पहले छोड़ गया था। उसके तीन बेटियाँ हैं। वह अपने पति से अलग बेटियों को लेकर रहती है।

महिला ने बताया कि उसके पति का एक दोस्त मोईन शेख उसके घर आता जाता था। पति ने जब उसे छोड़ दिया तो भी मोईन शेख उसके घर आता रहा। उसने महिला ने अपनी नजदीकियाँ बढ़ा ली। इसके बाद उसने महिला का कई बार यौन शोषण किया।

महिला ने आरोप लगाया है कि मोईन शेख ने उससे उसकी बेटियों की पढ़ाई में सहायता और शादी का वादा किया। उसने महिला से कहा कि अगर उसे कोई ऐतराज नहीं है तो वह शादी कर लेगा। वह शादी करने का झांसा महिला को लम्बे समय तक देता रहा।

इसके बाद वह अपनी की गई बात से मुकरने लगा। महिला जब भी उसे शादी करने को कहती तो वह नए बहाने बनाता। इसके बाद उसने महिला के सामने शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन की शर्त रख दी। उसने कहा कि महिला जब तक इस्लाम कबूल नहीं करती तब तक वह निकाह नहीं करेगा।

महिला को मोईन शेख ने धमकी दी कि अगर वह धर्म परिवर्तन नहीं करती तो वह उसकी बेटियों को मार देगा। महिला ने यह भी बताया कि उसे छोड़ कर मोईन शेख ने कहीं और शादी भी कर ली और उसे बिना शादी के ही रहने को लेकर कहने लगा। महिला ने इस मामले में इंदौर पुलिस के पास FIR दर्ज करवाई है।

बिना बुर्के-हिजाब के दिखीं क्रिकेटर इरफान पठान की बीवी, इस्लामी कट्टरपंथी करने लगे हल्ला: लिखा- कुछ दिन बाद यह कपड़े भी नहीं पहनेगी

पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान की एक बिना बुर्का-हिजाब पहने हुए वीडियो सामने आई तो इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए। इरफ़ान पठान की पत्नी को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर अभद्र कमेन्ट किए और उन्हें इस्लामी दीन की तालीम देने लगे। किसी ने कहा कि इरफान की पत्नी कुछ दिन में बिना कपड़े के दिखेंगी तो किसी ने कहा कि वह आगे अब बिकनी भी पहनने लगेंगी। उन्हें बेशर्म करार दिया गया।

दरअसल, पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान हाल ही में मुंबई के बांद्रा के एक कैफे के बाहर पत्नी सबा बेग और बेटे के साथ नजर आए थे। यहाँ मौजूद कुछ फोटोग्राफर ने उनकी तस्वीरें खींचना और चालू कर दिया। इस वीडियो में इरफान की पत्नी एक जींस- टॉप पहने नजर आईं। हालाँकि, वह कैमरे देखते ही किनारे हो गईं।

जब फोटोग्राफरों ने उनसे कहा कि वह भी इरफान पठान के साथ आकर फोटो खिंचवा लें तो उन्होंने मना कर दिया। इरफान पठान ने भी इस बात को मना किया। इसके बाद इरफान पठान और उनकी पत्नी की यह वीडियो वायरल हो गई। वीडियो वायरल होते ही इस्लामी कट्टरपंथी उन पर हमलावर हो गए।

ट्विटर पर इरफान की पत्नी की फोटो के साथ ज़ारा नाम की एक यूजर ने लिखा, “कुछ दिन बाद ये कपड़े भी नहीं पहनेगी।” इसके आगे इस यूजर ने लिखा कि जो भी मुस्लिम इसे निजी चॉइस बताएगा वो ‘बेशर्म’ और ‘भ$वा’ है।

उर्दू में खान लिखने वाले एक हैंडल ने इरफान पठान को ‘दय्यूस’ और ‘ह₹मी’ बताया। दय्यूस सामान्यत: उस आदमी को कहते हैं जो अपने घर की महिलाओं को नियंत्रण में नहीं रखता।

एक अन्य अकाउंट ने, जिसमें बांग्लादेश और फिलिस्तीन का झंडा लगाया हुआ था, इरफ़ान पठान को लानतें दी और दय्युस कहा।

इरफ़ान पठान

इरफ़ान पठान और उनकी पत्नी की इन्स्टाग्राम पर डाली गई वीडियो के नीचे भी कट्टरपंथियों ने काफी अश्लील टिप्पणियाँ की। जीशान अहमद ने लिखा कि इरफ़ान ई बीवी ‘सेक्सी’ हैं और तो अमान अली ने लिखा कि वह दिन दूर नहीं जब सबा बेग बिकनी में नजर आएँगी।

इरफ़ान पठान

इन्स्टाग्राम पर एक और यूजर ने पूछा कि बुर्का कहाँ गया वहीँ दूसरे ने इसे हलाल से हराम की तरफ जाना बताया।

इरफ़ान पठान

इरफान पठान की पत्नी और उनको लेकर और भी कई भद्दे कमेन्ट किए गए। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ है। इससे पहले जब फरवरी, 2024 में वह बिना बुर्के के दिखीं थी तब भी उन पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला बोला था।

इरफ़ान पठान की पत्नी सबा बेग है पूर्व में एक मॉडल थीं और उनकी परवरिश सऊदी अरब में हुई है। उनकी शादी 4 फरवरी, 2016 को सबा बेग से हुई थी। सबा ने इरफ़ान के साथ शादी के बाद अपना मॉडलिंग करियर छोड़ दिया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी इरफ़ान के साथ मुलाक़ात 2014 में हुई थी। इसके बाद दोनों में नजदीकियाँ बढ़ना चालू हो गईं। 2016 में दोनों ने विवाह कर लिया। जब सबा की शादी इरफ़ान से हुई थी तब वह आत्र 21 साल की थीं। उनकी और इरफ़ान की उम्र में 10 वर्ष का अंतर है। उन दोनों के दिसम्बर 2016 में एक बेटा इमरान खान भी हुआ था।

इरफ़ान पठान कुछ समय पहले तक अपनी पत्नी की फोटो नहीं डालते थे जिनमें उनका चेहरा दिखता हो। इससे पहली डाली गई फोटो में उनकी पत्नी का चेहरा बुर्का या फिर हाथों से ढका हुआ होता था। मुस्लिम कट्टरपंथियों के अनुसार, इस्लाम में महिलाओं को सार्वजनिक स्थान पर चेहरा ढकने की हिदायत दी गई है। इससे पहले मोहम्मद शामी की बेटी के सरस्वती पूजा करने और अभिनेत्री सारा अली खान के मंदिर जाने को लेकर भी इस्लामी कट्टरपंथी बवाल मचाते आए हैं।

‘जेल गए अरविंद केजरीवाल तो USA में बैठी थीं स्वाति मालीवाल, इसीलिए CM आवास में हुई पिटाई’: मीडिया रिपोर्ट में दावा – इस्तीफा देने को कहा गया, थाने में रोने लगीं

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास में उनकी ही पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की पिटाई हुई। अरविंद केजरीवाल कुछ ही दिनों पहले तिहाड़ जेल से निकले हैं और चुनाव खत्म होने पर उन्हें फिर से आत्मसमर्पण करना है, ऐसे में उनके लिए मुश्किलें और बढ़ती ही जा रही हैं। सोमवार (13 मई, 2024) को सिविल लाइंस पुलिस थाने में आई PCR कॉल में स्वाति मालीवाल की तरफ से कहा था कि उनके साथ मारपीट हो रही है। इसके बाद वो थाने भी पहुँची थीं।

हालाँकि, स्वाति मालीवाल बिना कोई लिखित शिकायत दर्ज कराए वहाँ से निकल गई थीं। इस प्रकरण में उन्होंने फोन कॉल पर विभव कुमार का नाम लिया था, जो अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव हैं और एक विवादित अधिकारी रहे हैं। मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि स्वाति मालीवाल द्वारा अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद उनके पक्ष में खुल कर आवाज़ न उठाने और जेल में उनसे एक बार भी मिलने नहीं जाने के कारण उनसे नाराज़गी है।

बता दें कि 3 बार दिल्ली महिला आयोग (DCW) की अध्यक्ष रह चुकीं स्वाति मालीवाल हाल ही में कई दिनों तक अमेरिका में रह कर आई हैं और अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद जब उनकी पार्टी सड़क पर थी तब वो परिदृश्य से गायब थीं। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और मंत्री रहे सत्येंद्र जैन इस मामले में पहले से ही जेल में हैं। वहीं राज्यसभा सांसद संजय सिंह जमानत पर बाहर हैं। बताया जा रहा है कि स्वाति मालीवाल के AAP से संबंध अब ठीक नहीं हैं।

‘Daily Pioneer’ में प्रकाशित सौम्या शुक्ला की रिपोर्ट के अनुसार, स्वाति मालीवाल को पार्टी द्वारा राज्यसभा सांसदी से इस्तीफा देने को कहा गया है। स्वाति मालीवाल थाने आई थीं, लेकिन उन्हें फिर एक फोन कॉल आया और वो बाद में आने की बात कह कर चली गईं। उन्होंने फोन पर कहा था कि वो अभी ठीक स्थिति में नहीं हैं, इसीलिए बाद में रिपोर्ट दर्ज कराएँगी। थाने में उन्हें कहा गया था कि FIR दर्ज कराने के लिए मेडिकल परीक्षण ज़रूरी है।

इसके बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से उनसे संपर्क करने की कोशिशें सफल नहीं हो पा रही हैं। पुलिस स्टेशन में वो रोने भी लगी थीं। दिल्ली CMO या AAP की तरफ से अब तक इस मामले पर चुप्पी साधी हुई है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) स्पष्ट कर चुका है कि वो इस मामले की जाँच के लिए एक टीम भेजेगी, साथ ही दिल्ली पुलिस से कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट तलब करेगी। अब इस मामले में ये समझते हैं कि पुलिस आगे क्या कर सकती है।

अगर स्वाति मालीवाल लिखित शिकायत दायर नहीं करती हैं तो फिर दिल्ली पुलिस PCR कॉल के आधार पर FIR दर्ज कर सकती है। विभव कुमार और अरविंद केजरीवाल, दोनों 2007 में स्थापित ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ (IAC) वाले दिनों से ही अरविंद केजरीवाल के साथ हैं और 2011 में अन्ना हजारे के आंदोलन में भी सक्रिय थे। दिल्ली पुलिस के पास एक विकल्प है कि वो स्वाति मालीवाल को मजिस्ट्रेट के सामने बयान देने के लिए कहे।

PCR कॉल रिकॉर्ड के मुताबिक, स्वाति मालीवाल ने कहा, “मैं अभी CM के घर पर हूँ। उन्होंने अपने PA विभव कुमार से बुरी तरह पिटवाया है।” इसके बाद सिविल लाइंस के SHO 6, फ्लैग स्टाफ रोड स्थित अरविंद केजरीवाल के घर पहुँचे। स्वाति मालीवाल ऑटो से थाने से वापस गई थीं। स्वाति मालीवाल को हाल ही में AAP के स्टार प्रचारकों की सूची से भी हटा दिया गया है। भाजपा नेताओं ने भी एक महिला के साथ मारपीट के खिलाफ आवाज़ उठाई है।