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AAP सांसद स्वाति मालीवाल को केजरीवाल ने पिटवाया, CM के घर पर हुई मारपीट: मीडिया रिपोर्ट, दिल्ली पुलिस जाँच में जुटी

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के घर पर पुलिस बुलाई है। स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल के निजी सचिव विभव कुमार पर मारपीट का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें CM आवास के भीतर पीटा गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (13 मई, 2024) को AAP की राज्यसभा सांसद CM आवास पहुँची थीं। यहाँ उनके साथ केजरीवाल के निजी सचिव विभव कुमार ने मारपीट की। उन पर हमला किया। इसके बाद मालीवाल ने दिल्ली पुलिस को फोन किया।

CM आवास पर मारपीट की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम पहुँची। बताया गया कि स्वाति मालीवाल CM आवास से निकल कर पुलिस थाने भी पहुँच गईं। बताया गया कि यह मारपीट की घटना सोमवार सुबह 10 बजे CM आवास के भीतर हुई।

स्वाति मालीवाल ने पुलिस को एक फोन कॉल में यह भी कहा कि विभव कुमार ने उनके साथ मारपीट मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के कहने पर की। बताया गया कि इस मामले में दो बार फोन किया गया। यह भी बताया गया कि पुलिस के पहुँचने पर स्वाति मालीवाल मौके पर नहीं मिली। वह दिल्ली के सिविल लाइन्स थाने पहुँच चुकी थी।

CM केजरीवाल, उनके निजी सचिव विभव कुमार और स्वाति मालीवाल ने अभी आधिकारिक रूप से इस मामले में कुछ नहीं कहा है। दिल्ली पुलिस ने भी इस विषय में कोई जानकारी नहीं दी है। उत्तरी दिल्ली के DCP भी सिविल लाइन्स थाने में पहुँचे हुए हैं।

गौरतलब है कि जिन विभव कुमार पर स्वाति मालीवाल को पीटने का आरोप लगा है उन्हें विजिलेंस हटाने की कार्रवाई कर चुकी है, विजिंलेंस ने कहा था कि उनकी नियुक्ति नियमानुरूप नहीं थी। बिभव कुमार के खिलाफ उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक सरकारी अधिकारी को उसके कामकाज से रोकने और नुकसान पहुँचाने का मामला दर्ज है। 

मदरसे में यौन उत्पीड़न करता था इमाम, छात्रों ने गला घोंट कर मौत के घाट उतारा: 6 गिरफ्तार, पूरी साजिश का हुआ खुलासा

राजस्थान के अजमेर में एक इमाम की हत्या का मामला सामने आया है। इस संबंध में पुलिस ने मदरसे के 6 छात्रों को गिरफ्तार किया है। इमाम का नाम मौलाना माहिर था। 27 अप्रैल को उसके छात्रों ने उसके द्वारा किए जा रहे यौन उत्पीड़न से तंग आकर उसकी गला घोंट कर हत्या कर दी।

घटना राजस्थान के अजमेर जिले के थाना रामगंज क्षेत्र के दौराई गाँव के मोहल्ला कंचन नगर स्थित मोहम्मदी मस्जिद की है। पुलिस को छानबीन में मौलाना माहिर का मोबाइल मिला है, साथ ही वो रस्सी भी बरामद हुई है जिससे उसका गला घोंटा गया। बताया जा रहा है कि मदरसे के एक छात्र का माहिर ने यौन उत्पीड़न किया था। जब छात्र ने उसे धमकी दी कि वो सबको सबकुछ बता देगा तो माहिर ने उसे पैसों का लालच देकर चुप करा दिया।

इसके बाद भी उसकी हरकतें खत्म नहीं हुईं। वो लगातार यौन उत्पीड़न करता रहा। ऐसे में अन्य छात्रों ने प्लान बनाकर एक दिन उसे बेहोश किया, फिर उसे डंडे से पीटा और रस्सी से उसका गला घोंट दिया। माहिर घटना के दो दिन पहले ही अपने गाँव से आया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, माहिर की हत्या का खुलासा करने में पुलिस को समय लगा क्योंकि 15 दिन से ये छात्र एक ही बात को दोहरा रहे थे कि माहिर को अंजान लोगों ने मारा है। समय बीतने के साथ पुलिस के लिए इस केस की छानबीन मुश्किल होती जा रही थी। पुलिस सैंकड़ों सीसीटीवी फुटेज जाँच कर चुकी थी लेकिन कुछ नहीं पता चल रहा था।

अजमेर के एसपी देवेंद्र कुमार बिश्नोई कहते हैं कि उन्होंने इस मामले में बहुत खोजबीन की लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा तब उन्होंने छात्रों को कॉन्फिडेंस में लेना शुरू किया। इसके बाद उन लोगों ने खुद ही सब कुछ उगल दिया। छात्रों ने ही जानकारी दी की इमाम ने छात्र का यौन उत्पीड़न किया था। जब छात्र ने उसे धमकी दी कि वो सबको सबकुछ बता देगा तो माहिर ने उसे पैसों का लालच देकर चुप करवा दिया।

बिश्नोई ने बताया कि हत्या की घटना से दो दिन पहले ही माहिर अपने गाँव से लौटा था। ऐसे में 26 अप्रैल को जब वो खाना खाने चला तो छात्रों ने उसे खाने में सोने की दवाई मिलाकर दे दी। जब मौलाना सोने गया तो छात्र स्टोर रूम से डंडे और रस्सी ले आए। जैसे ही माहिर सोया इन्होंने उसके सिर पर डंडे से मारा। उसने उठने की कोशिश की तो उसका गला रस्सी से घोंट दिया। जैसे ही वो बेहोश हुआ, उसकी धड़कनें रुकीं। सारे वहाँ से भाग गए। बाद में मस्जिद के तौसीफ अशरफ ने इस मामले में शिकायत दायर की और छानबीन के बाद पुलिस ने 6 नाबालिगों को गिरफ्तार किया।

कोलेजियम ने गलत लोगों को बना दिया जज, हिमाचल प्रदेश HC में हो गई नियुक्ति, CJI चंद्रचूड़ के पास पहुँचा मामला

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में दो जजों की कोलेजियम द्वारा नियुक्ति पर विवाद खड़ा हो गया है। कोलेजियम द्वारा नियुक्त किए गए इन जजों के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। हाई कोर्ट के इस फैसले के लिए खिलाफ प्रदेश के ही दो जिला जजों ने मोर्चा खोल दिया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के सोलन और बिलासपुर के जिला जज चिराग भानु सिंह और अरविन्द मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट से खुद को हाई कोर्ट का जज ना बनाए जाने की शिकायत की है। उन्होंने कहा है कि वह राज्य के सबसे वरिष्ठ जिला जज थे लेकिन उनकी जगह हाई कोर्ट के कोलेजियम ने दूसरे जूनियर लोगों को भर्ती कर लिया।

इन दोनों जजों ने आरोप लगाया है कि इस नियुक्ति के दौरान नियमों का पालन नहीं हुआ और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों तक को नजरअंदाज कर दिया गया। इन दोनों जजों ने कहा कि उनका नाम चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ वाले सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की तरफ से हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट को दिया गया था।

दोनों जजों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि नाम की संस्तुति CJI चंद्रचूड़ के कोलेजियम के बाद देश के कानून मंत्रालय ने भी की थी। कानून मंत्रालय ने एक पत्र लिख कर हिमाचल प्रदेश के हाई कोर्ट कोलेजियम को मल्होत्रा और सिंह के नामों पर विचार करने के लिए कहा था।

दोनों जजों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा है कि उनका नाम एक बार जुलाई 2023 और फिर जनवरी 2024 सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाया गया था। लेकिन इस सबके बावजूद हिमाचल हाई कोर्ट ने उनको प्रमोशन नहीं दिया। दोनों जजों ने आरोप लगाया कि उनके नाम को नजरअंदाज कर दिया गया।

मल्होत्रा और सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका में कहा है कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी जगह पर उनसे दो जूनियर लोगों को नियुक्त कर दिया जो कि अयोग्य हैं और उनके नामों को हटा दिया जबकि उनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। दोनों जजों ने मेरिट की अनदेखी का आरोप हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट पर लगाया है।

दोनों जजों ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा की गई नियुक्तियों पर रोक लगाने की माँग की है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट उनकी इस समस्या का समाधान निकाले। अब इस मामले पर CJI डी वाई चंद्रचूड़ के दखल के कयास लगाए जा रहे हैं।

चौथे चरण के लिए EVM में लॉक होगी 1717 उम्मीदवारों की किस्मत: लोकसभा की 96 सीटें, आंध्र-ओडिशा में विधानसभा चुनाव भी

लोकसभा चुनाव 2024 में सोमवार को चौथे चरण का मतदान होगा। लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश की 96 लोकसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इइसके साथ ही आंध्र प्रदेश और ओडिशा विधानसभा के लिए भी मतदान कराया जाएगा। आंध्र प्रदेश में 175 विधानसभा सीटे हैं, तो ओडिशा की 28 विधानसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा। ओडिशा में चार चरणों में विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं, जिसकी शुरुआत सोमवार से हो रही है।

लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में आंध्र प्रदेश में सर्वाधिक 25 लोकसभा सीट, तेलंगाना में सभी 17 लोकसभा सीट, यूपी में 13 लोकसभा सीट, महाराष्ट्र में 11 लोकसभा सीट, पश्चिम बंगाल और एमपी की 8-8 लोकसभा सीट, बिहार की 5 लोकसभा सीट, ओडिशा और झारखंड की 4-4 सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की एक लोकसभा सीट पर भी वोटिंग कराई जाएगी। चौथे चरण की 96 संसदीय सीटों में सामान्य श्रेणी की 64 सीटें, अनुसूचित जनजाति की 12 सीटें और अनुसूचित जाति श्रेणी की 20 सीटें आरक्षित हैं।

मैदान में कई हाई प्रोफाइल चेहरे

लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में मोदी सरकार के 5 बड़े मंत्रियों, एक पूर्व मुख्यमंत्री, 2 क्रिकेटर और एक अभिनेता समेत कई दिग्गज राजनेताओं की किस्मत तय होगी। वहीं, यूपी से सपा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की भी किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद होगा।

हाई प्रोफाइल नेताओं में तेलंगाना के हैदराबाद से भाजपा की माधवी लता, कन्नौज से समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव, बिहार के बेगुसराय से गिरिराज सिंह, उजियारपुर से गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, हैदराबाद से असदुद्दीन औवेसी, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी, मुंगेर से जदयू के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, झारखंड के खूंटी से अर्जुन मुंडा, पश्चिम बंगाल के आसनसोल से शत्रुघ्न सिन्हा, बहरामपुर से अधीर रंजर चौधरी और क्रिकेटर यूसुफ पठान की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद हो जाएगा।

17.7 करोड़ मतदाता करेंगे नेताओं की किस्मत का फैसला

चुनाव आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार, 10 राज्य/केंद्र-शासित प्रदेशों की कुल 96 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 17.7 करोड़ मतदाता हैं। ये 1.92 लाख मतदान केंद्रों पर वोट डालकर 1717 उम्मीदवारों के के भाग्य का निर्णय कर सकेंगे। इनमें 8.97 करोड़ पुरुष और 8.73 करोड़ महिला मतदाता हैं। इस चरण में आंध्र प्रदेश की 175 विधानसभा सीटों और ओडिशा की 28 विधानसभा सीटों पर भी मतदान कराया जा रहा है।

आयोग ने इस चरण के चुनाव को सुचारु और शांतिपूर्वक सम्पन्न कराने के लिए 364 पर्यवेक्षकों (126 सामान्य पर्यवेक्षक, 70 पुलिस पर्यवेक्षक, 168 अन्य पर्यवेक्षक) की तैनाती कर रखी है। इसके अतिरिक्त कुछ राज्यों में विशेष पर्यवेक्षकों को तैनात किया गया है।

इस साल 100+ माओवादी ढेर, 400+ ने किया सरेंडर: छत्तीसगढ़ में सरकार बदलते वामपंथी हिंसा की टूटने लगी कमर, समझिए कैसे काम कर रही नई रणनीति

कभी केंद्र सरकार ने संसद में ये बात स्वीकार की थी कि भारत में सबसे ज्यादा खून लाल आतंक की वजह से बहता है। साल 2004 की 4 नवंबर को नए-नए प्रधानमंत्री बने डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा था कि नक्सलवाल भारत की आतंरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती है। साल 2010 में दंतेवाड़ा में नक्सलियों के हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे और लगभग पूरी बटालियन का ही सफाया हो गया था। नक्सलवाल उस दौर में देश के 220 जिलों में था, जिसमें 83 जिलों में उनका काफी प्रभाव था। अबूझमाड़ के जंगल कुछ सालों तक अबूझ ही थे। लेकिन पिछले कुछ महीनों में नक्सलियों की जिस तरह से कमर टूट रही है और सुरक्षा बल उनका एक के बाद एक सफाया कर रहे हैं, वो बदली हुई सरकार का, उसकी इच्छाशक्ति का और बदलती रणनीति का नतीजा है।

नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा नीत राजग सरकार ने भारत देश के सबसे बड़े दुश्मन यानी वामपंथी हिंसा से निपटने की जो रणनीति अपनाई है, वो बेहद कारगर होती दिख रही है। मोदी सरकार ने साल 2027 तक पूरे देश को लाल आतंक से मुक्ति दिलाने का लक्ष्य रखा है। ये लक्ष्य तभी पूरा हो सकता था, जब नक्सलियों को उनकी ही माँद में घुसकर न सिर्फ चुनौती दी जाए, बल्कि उनकी जड़ों पर भी करारा प्रहार किया जाए। अब पिछले कुछ माह से नतीजे भी सामने आ रहे हैं। अकेले छत्तीसगढ़ में पिछले 4 माह में नक्सलियों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन हुए हैं। इन ऑपरेशंस में सौ से ज्यादा नक्सली मारे जा चुके हैं, जिनमें शीर्ष कमांडर तक शामिल हैं, तो 400 से ज्यादा सरेंडर कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।

इस सफलता के पीछे क्या है वजह?

मोदी सरकार ने जब नक्सलवाद के सफाए का लक्ष्य निर्धारित किया, तब सबसे ज्यादा जिस बात पर चर्चा हुई, वो थी नक्सलियों के खिलाफ रणनीति बनाने की। ऐसे में गृह मंत्रालय ने ये तय किया कि सीमा की रखवाली के साथ ही कश्मीर में आतंकवाद का सामना कर चुके बीएसएफ और अन्य फ्रंटल अर्धसैनिक बलों को भी नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में सामने लाया जाए। अभी तक ये जिम्मेदारी सिर्फ सीआरपीएफ तक सीमित थी, बाकी कुछ हिस्सों में औद्योगिक इकाइयों की रक्षा के लिए सीआईएसएफ की टुकड़ियों की सहायता ली जाती थी। ऐसे में फ्रंट पर सीआरपीएफ के साथ ही बीएसएफ को भी नक्सलियों से निपटने का जब जिम्मा सौंपा गया, तब सवाल भी उठ रहे थे, लेकिन अब सभी सवालों के जवाब सामने हैं।

दरअसल, सीआरपीएफ की टीम एक निश्चित प्लानिंग के साथ ही आगे बढ़ती थी। सीआरपीएफ के साथ स्थानीय पुलिस और जंगलों में लड़ने के लिए ट्रेंड राज्यों की स्पेशल फोर्स पूरी प्लानिंग करती थी। फिर ऊपर से आदेश और लंबी सरकारी प्रक्रिया। ऐसे में कई बार नक्सलियों को बच कर निकल जाने का मौका मिलता था। यही नहीं, नक्सलियों के जोन में न तो मोबाइल टॉवर होते थे और न ही सुरक्षा चौकियाँ। ऐसे में हमारे सुरक्षा बल नक्सलियों के जाल में अक्सर फंस जाते थे, लेकिन बीएसएफ को नक्सल विरोधी अभियान में शामिल करने से परिस्थितियाँ बदल गई।

फास्ट ट्रैक्ड एंटी नक्सल ऑपरेशन से सफलता

बीएसएफ को लालफीताशाही से मुक्त रखकर गृह मंत्रालय ने फास्ट ट्रैक्ड एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाने की अनुमति दी है। ऐसे में पहले जहाँ किसी ऑपरेशन को अंजाम देने में सीआरपीएफ की टीम को काफी समय लग जाता था और नक्सलियों को संभलने का मौका मिल जाता था, वो मौका अब नहीं मिलता है। अब बीएसएफ टारगेटेड ऑपरेशन को अंजाम देती है। बीएसएफ व अन्य सुरक्षा बलों को नए हथियारों और तकनीकी से लैस किया गया है। यही नहीं, नक्सलियों के गढ़ के आसपास भी अब सुरक्षा बलों की उपस्थिति है, खासकर अबूझमाड़ में नक्सलियों के सबसे बड़े केंद्र से महज 4 किमी की दूरी पर।

अब पहले के मुकाबले, संचार ही नहीं, यातायात की व्यवस्था और चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस की चौकियाँ नक्सलियों के खात्मे में खासा योगदान दे रहे हैं। पिछले 4-5 माह में जो नतीजे सामने आए हैं, वो इन्हीं चार-5 माह की व्यवस्था नहीं है। दरअसल, गृह मंत्रालय और नक्सल प्रभावित राज्यों में साल 2022 से नई प्लानिंग के तहत जो पुलिस की चौकियाँ बनाई गई हैं, वो काफी काम आ रही हैं। अब कॉर्डिनेटेड अटैक में नक्सलियों को संभालने का मौका नहीं दिया जा रहा है। कुछ दिनों पहले ही बीएसएफ ने एकदम तड़के नक्सलियों के एक शिविर पर धावा बोल दिया था, जिसमें 29 से ज्यादा नक्सली मार गिराए गए थे। उन नक्सलियों में ईनामी नक्सली भी शामिल थे। उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला था, हालाँकि तीन तरफ से घिरे होने के बावजूद बड़ी संख्या में नक्सली भागने में सफल हो गए थे, लेकिन उस ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बलों ने दो और बड़े ऑपरेशन चलाए, जिसमें 2 दर्जन से ज्यादा नक्सली ढेर किए जा चुके हैं।

नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए ये बड़े अभियान

नक्सलवाद के खात्मे के लिए कभी सरकार ने स्थानीय लोगों को हथियारों से लैस करने का अभियान शुरु किया था, जिसमें सलवा जुडूम अभियान प्रमुख था। हालाँकि सरकार ने इसे कभी अपना अभियान नहीं माना, लेकिन कोर्ट से रोक लगने के बाद इस अभियान पर रोक लग गई। इसके अलावा साल 2009 में ऑपरेशन ग्रीन हंट चलाया गया। इस ऑपरेशन से नक्सलियों की घेरेबंदी में थोड़ी सफलता तो मिली, लेकिन नुकसान ज्यादा हुआ। हालाँकि अब नक्सलियों के बारे में ज्यादा सूचनाएँ उपलब्ध थी। ऑपरेशन ग्रीन हंट से मिले सबक के बाद ऑपरेशन प्रहार शुरू किया गया। तीन हिस्सों में ऑपरेशन प्रहार को काफी सफलताएँ मिली, लेकिन नक्सली अपने गढ़ों में मजबूत बने रहे थे। मौजूदा समय में सुरक्षा बल नक्सली इलाकों में हॉट परस्यूट और ड्राइव फॉर हंट चला रहे हैं, जो नक्सल आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलताएँ दिला रही है।

नक्सल आतंकवाद का खात्मा कब तक?

हॉट परस्यूट और ड्राइव फ़ॉर हंट के तहत अब सुरक्षा बल अलग तरीके से नक्सलियों का सफाया कर रहे हैं। पहले नक्सलियों के पास इतना समय होता था कि वो अपना पीछा कर रहे सीआरपीएफ के जवानों को घेरकर उनपर ही हमला कर देते थे, लेकिन अब सुरक्षा बल न सिर्फ उनका पीछा करते हैं, बल्कि बेहतरी मशीनरी के दम पर उनकी आईईडी से लेकर माइन्स तक का तोड़ निकाल रहे हैं। ऐसे में माओवादियों का शिकार बनने की जगह अब सुरक्षा बल माओवादियों का थकाकर, उनका ही शिकार करते हैं। इसकी वजह से इस ऑपरेशन का सक्सेस रेट ज्यादा है। इसके अलावा जो बात इन ऑपरेशंस की सफलता में सबसे आगे आ रही है, वो है इन सुरक्षा बलों के हाथों में अत्याधुनिक हथियार, जिनको उन तक पहुँचाने का जिम्मा खुद गृह मंत्रालय उठा रहा है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जल्द से जल्द राज्य से नक्सलियों के सफाए की बात कह रहे हैं, जिसमें दम भी नजर आता है। लेकिन नक्सलियों के लड़ने के तरीके और उनकी शैली को देखते हुए इसमें थोड़ा समय और लगने की उम्मीद है। वैसे, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसी साल एक हाई-लेवल मीटिंग की थी, खासकर इस साल नक्सल आतंकवाद को कुचलने की शुरुआत से पहले की आखिरी बड़ी मीटिंग, जिसमें उन्होंने सुरक्षाबलों को पूरी छूट देते हुए नक्सलवाद के समूल नाश के लिए साल 2027 का समय फिक्स्ड कर दिया है। ये मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल होगा, जब कमोवेश उसी समय भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन रहा होगा, तो दूसरी तरफ वो अपने अंदर मौजूद सबसे बड़े खतरे को भी खत्म कर चुका होगा।

गुजरात में बांध की जमीन पर अवैध कब्जा कर बना दी दरगाह: पानी में इत्र मिलाने से चर्मरोग का शिकार हो रहे लोग, प्रशासन से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं

गुजरात के जामनगर में रणजीत सागर बांध में अवैध इस्लामी निर्माण किया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि प्रशासन द्वारा वर्ष 2022 में अवैध कब्जा हटाने का लिखित आदेश जारी होने के बाद भी निर्माण अभी भी जस का तस है। मामले को लेकर स्थानीय हिंदू कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। उनका आरोप है कि प्रशासन की निगरानी में इस निर्माण को नहीं हटाया जा रहा है। वहीं पुलिस-प्रशासन ने अपने संज्ञान में इस मामले के आने के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है।

जामनगर जिले के हर्षदपुर और नवा मोखाना गाँव के बीच रणजीत सागर बांध के अंदर एक दरगाह बनी हुई है। इस दरगाह का नाम ‘हजरत पंजूपीर दरगाह शरीफ’ है। नियमों के मुताबिक, सार्वजनिक जलस्रोतों पर निजी निर्माण करना कानूनी अपराध है। हालांकि, बांध की सरकारी जमीन पर 10,000 से 15,000 वर्ग फुट क्षेत्र पर एक दरगाह बनाई गई है। इस मामले में जामनगर के हिंदू कार्यकर्ताओं ने 2022 में प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा था और दबाव हटाने की माँग की थी।

प्रशासनिक सर्वे से साबित हुआ कि जिस दरगाह का निर्माण किया गया है वह सरकारी जगह है और निर्माण अवैध है। इसके बाद सितंबर 2022 में मामलतदार ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाले कासम हसन उड़िया के खिलाफ लिखित में अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया। इस आदेश में कहा गया था कि यदि प्रवर्तक कसम परिसर को नहीं खोलता है, तो राजस्व संहिता की धारा 202 के तहत नोटिस जारी की जाएगी और फिर परिसर को खोलने और अवैध कब्ज़ा हटाने का खर्च भी उसी से वसूला जाएगा।

संघर्ष समिति के कार्यकर्ता युवराज सोलंकी ने ऑपइंडिया को बताया, “बांध के पीछे एक विशाल दरगाह बनाई गई है। इसमें 31-31 फीट की तीन दरगाहें हैं और एक नवनिर्मित साइड दरगाह भी इतनी ही लंबाई की है। वर्ष 2022 में हमने कब्जा हटाओ संघर्ष समिति द्वारा कलेक्टर को एक आवेदन प्रस्तुत किया।

युवराज ने कहा, ”जामनगर रणजीत सागर बांध में यह दरगाह पिछले 30-35 वर्षों में बनाई गई है। मानसून के दौरान जब बांध के इस क्षेत्र में पानी आता है तो ये संरचनाएँ डूब जाती हैं। साथ ही अब जामनगर में पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए बांध को सौनी योजना द्वारा भरा जा रहा है, इसलिए यह जगह लगभग 6 महीने तक पानी में डूबी रहती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आसपास के सभी गाँवों में हिंदू आबादी है।”

इससे होने वाली समस्या के बारे में उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “इस दरगाह में इत्र का प्रयोग बहुतायत में किया जाता है। जब पानी नहीं होता तो बड़ी मात्रा में इत्र चढ़ाया जाता है। पानी आने के बाद उसकी खुशबू पानी में मिल जाती है और जो लोग उस पानी का इस्तेमाल करते हैं उन्हें चर्म रोग हो जाते हैं। परफ्यूम इतना तेज़ होता है कि मुँह या हाथों पर चिपक जाए तो जलन होता है, इस पानी को पीना तो दूर की बात है।”

पटना में रोडशो करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने PM मोदी: बुर्के वाली मुस्लिम महिलाओं ने भी लगाए ‘जय श्री राम’ के नारे, राम मंदिर से लेकर मिथिला पेंटिंग तक की झलक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 के चौथे चरण से पहले बिहार की राजधानी पटना में भव्य रोडशो किया, जिसमें आम जनमानस का एक बड़ा हुजूम उमड़ा। पीएम मोदी एयरपोर्ट से राजभवन पहुँचे, उसके बाद उन्होंने रोडशो किया। भट्टाचार्य मोड़ से शुरू होकर उमा सिनेमा, कदमकुआँ, साहित्य सम्मेलन, ठाकुरबाड़ी रोड और कारगिल चौक होते हुए उद्योग भवन और JP गोलंबर तक लगभग 2 किलोमीटर के इस रोडशो के साथ ही पीएम मोदी ने बिहार में समीकरण को भाजपा के पक्ष में साधा, जहाँ सातों चरणों में चुनाव हो रहे हैं।

रविवार (12 मई, 2024) को रोडशो खत्म होने के बाद राजभवन में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रात्रि-विश्राम की व्यवस्था की गई। अगले दिन उन्हें पटना सिटी गुरुद्वारा में भी दर्शन करना है। इसके बाद हाजीपुर, वैशाली और सारण में वो रैलियों को संबोधित करेंगे। इस दौरान सड़क के दोनों तरफ सांस्कृतिक झलकियाँ भी दिखीं। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उनके साथ नज़र आए। उनके स्वागत में आईं मुस्लिम महिलाओं ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए।

रोडशो में बड़ी संख्या में महिलाएँ भी भगवा पगड़ी बाँधी हुई नज़र आईं, वहीं आरती करते हुए पुजारी भी दिखे। इस दौरान कहीं राम मंदिर की झलक दिखी तो कहीं मिथिला पेंटिंग की। पीएम मोदी की गाड़ी के ठीक आगे साफा बाँधी महिलाओं का काफिला था। बिहार में विपक्षी दलों ने जाति और आरक्षण के इर्दगिर्द इस चुनाव को घुमाने की कोशिश की गई, लेकिन पीएम मोदी ने मुस्लिम आरक्षण लेकर तमाम मुद्दों पर करारा प्रहार किया और आरक्षण पर भ्रम फैलाने वालों को जवाब दिया, लगातार अपनी जन-कल्याणकारी योजनाएँ गिनाईं।

नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पटना में रोडशो किया हो। पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र से जहाँ पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भाजपा के प्रत्याशी हैं, वहीं पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव उम्मीदवार हैं। इस दौरान लोग अपने-अपने घरों की छतों पर खड़े होकर पीएम मोदी की एक झलक पाने को बेताब दिखे। पीएम मोदी ने अपने चुनाव प्रचार का फोकस विपक्ष के देश-विरोधी रवैये पर प्रहार के साथ-साथ अपनी गरीब-कल्याण योजनाओं को रखा है।

जिस पेट्रोल पंप पर अमानतुल्लाह-अनस ने की गुंडागर्दी वो बलिदानी सैनिक की विधवा का: AAP विधायक ने मैनेजर से कहा था – तुम्हें और तुम्हारे सारे स्टाफ को पीटूँगा, कोई नहीं बचाएगा

उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस ने शनिवार (11 मई, 2024) को ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) के विधायक अमानतुल्लाह खान के दिल्ली स्थित आवास पर दबिश दी। इस दबिश के दौरान दिल्ली पुलिस भी साथ मौजूद रही। अमानतुल्लाह और उसके बेटे पर नोएडा के फेज-1 थाने में FIR दर्ज है। इन दोनों पर एक पेट्रोल पम्प के स्टाफ को धमकाने और मारने-पीटने का आरोप है। दबिश के दौरान बाप-बेटे दोनों घर से गैरहाजिर मिले।

पुलिस मामले में जाँच और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है। जहाँ अमानतुल्लाह और उनकी औलाद ने बवाल काटा है वो युद्ध में देश के लिए बलिदान हुए एक लांस नायक के परिजनों का पेट्रोल पम्प है।

नोएडा पुलिस की अमानतुल्लाह के घर पर दी गई दबिश का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में SHO फेज 1 इंस्पेक्टर ध्रुव भूषण दुबे और सब इंस्पेक्टर शरद यादव लगभग 25 जवानों और अधिकारियों अपनी टीम के साथ मौजूद दिख रहे हैं। टीम का नेतृत्व ACP अरविन्द कुमार कर रहे थे। दबिश देने वाली टीम को दिल्ली पुलिस का ही सहयोग मिला। अमानतुल्लाह के घर के आगे पुलिस टीम को आसपास के लोग चुपचाप देख रहे थे। SHO ने कई बार अमानतुल्लाह के गेट को खटखटाया लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला।

उत्तर प्रदेश भाजपा यूथ विंग सोशल मीडिया हेड ने इस वीडियो को अपने ‘X’ हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “नोएडा सेक्टर 95 में अमानतुल्लाह खान के बेटे द्वारा पेट्रोल पंप के कर्मचारियों को लोहे की रॉड से पीटने के कुछ दिनों बाद यूपी पुलिस उनके घर पहुँच गई है। स्वयंभू ‘निडर’ और केवल ‘☝️’ से डरने वाले लोग बाबा की पुलिस के लिए अपने दरवाज़े नहीं खोल रहे हैं।” फ़िलहाल अभी अमानतुल्लाह और उनके बेटे सहित 2 अन्य अज्ञात आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इनकी धरपकड़ के लिए पुलिस ने प्रयास तेज कर दिए हैं।

क्या है FIR में

यह FIR विनोद कुमार सिंह की तहरीर पर मंगलवार (7 मई, 2024) को दर्ज हुई है। विनोद कुमार सिंह ने तहरीर में बताया कि मंगलवार की सुबह 9:27 पर AAP विधायक अमानतुल्लाह का बेटा अनस खान अपनी ब्रीजा कार से उनके पेट्रोल पम्प पर तेल डलवाने आया। आते ही उसने पहले लाइन तोड़ी और सेल्समैन को गाली दे कर अपनी कार में तेल भरने को कहा। सेल्समैन ने बारी-बारी से तेल भरने की बात कही तो अनस खान भड़क गया। उसने खुद को विधायक का बेटा बताया और कार से लोहे की रॉड निकाल ली।

आरोप है कि अनस लोहे की रॉड से सेल्समैन को मारने लगा। इस दौरान वह गंदी-गंदी गालियाँ बक रहा था। गुस्से में उसने पेट्रोल पम्प पर रखी स्वैपिंग मशीन को भी तोड़ डाला। पेट्रोल पम्प के अन्य कर्मचारी अपने पिट रहे साथी को बचाने दौड़े। सीनियर स्टॉफ आने के बाद झगड़े को शांत करवाया गया और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के आने पर भी अनस खान की बदतमीजी में कोई कमी नहीं आई। उसने फिर से खुद को विधायक की संतान बताया और पेट्रोल पम्प के सभी स्टाफ को मारने की धमकी देने लगा। इसी दौरान उसने पेट्रोल पम्प को बंद भी करवा देने का चैलेन्ज दिया।

बताया जा रहा है कि जहाँ अपने बचाव में पेट्रोल पम्प स्टाफ ने पुलिस बुलवाई तो वहीं अनस खान ने अपने अब्बा अमानतुल्लाह खान को कॉल किया। अमानतुल्लाह खान 2 गाड़ियों से पेट्रोल पम्प पर पहुँचे। यहाँ अमानतुल्लाह ने अपने बेटे को समझाने के बजाय पेट्रोल पम्प स्टाफ और मैनेजर को ही हड़काना शुरू कर दिया। AAP के इस विधायक ने मैनेजर से कहा, “मैं अभी तुम्हे और तुम्हारे स्टाफ को मारने लगूँ तो हमारा कुछ नहीं कर पाओगे।” इसके बाद पेट्रोल पम्प को अपने इलाके में बताते हुए अमानतुल्लाह ने इसके मालिक को भी हड़काया।

पीड़ित ने शिकयत में अमानतुल्लाह और उसके बेटे पर कड़ी कार्रवाई की माँग के साथ भविष्य में अपने स्टाफ की सुरक्षा की गुहार लगाई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। इस घटना का CCTV फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में अनस खान को अपने गुर्गों के साथ गुंडागर्दी करते देखा जा सकता है। पुलिस ने अमानतुल्लाह खान, उसके बेटे अनस व 2 अन्य अज्ञात पर IPC की धारा 323, 504, 506 और 427 के तहत FIR दर्ज कर ली है।

ऑपरेशन रक्षक- 2 के बलिदानी के परिजनों का है पेट्रोल पम्प

ऑपइंडिया की पड़ताल में सामने आया कि अमानतुल्लाह खान और उनके बेटे अनस ने जिस पेट्रोल पम्प पर अभद्रता की है वो भारतीय सेना के एक बलिदानी के परिजनों का है। इन बलिदानी का नाम लांस नायक रामेन्द्र प्रताप सिंह है। राष्ट्रीय रायफल्स में तैनात रामेन्द्र प्रताप सिंह साल 1999 में वीरगति को कश्मीर के सुंदरवन में ड्यूटी दे रहे थे। इसी दौरान आतंकियों के वेश में पाकिस्तानी फ़ौज ने सेना के कैम्प पर हमला कर दिया था। दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में रामेन्द्र प्रताप सिंह बड़ी बहादुरी से मोर्चे पर लड़े थे। आखिरकार आतंकियों की गोली से वो वीरगति को प्राप्त हुए थे।

वो विधायक के बेटे तो मैं भी बलिदानी की संतान

ऑपइंडिया ने पेट्रोल पम्प मालिक विनोद कुमार सिंह से बात की। विनोद कुमार ने हमें बताया कि पिता के बलिदान के लगभग 18 साल बाद वर्ष 2017 में उनकी माँ को आश्रित कोटे में पेट्रोल पम्प आवंटित हुआ था। अमानतुल्लाह के बेटे की हरकत पर विनोद ने कहा, “अगर उनको फख्र है कि वो विधायक के बेटे हैं तो मुझे भी स्वाभिमान है कि मैं एक बलिदानी सैनिक की संतान हूँ।” विनोद सिंह को नोएडा पुलिस से पूरी उम्मीद है कि वो आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाएगी।

‘हमारी कोशिशें जारी, जल्द मिलेगा रिजल्ट’

ऑपइंडिया ने DCP नोएडा IPS विद्यासागर मिश्रा से बात की। विद्यासागर ने हमें बताया कि अभी तक पुलिस को अमानतुल्लाह या उनके बेटे की तरफ से कोई लिखित जवाब नहीं मिला है। DCP ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ पुलिस की कोशिशें लगातार जारी हैं जिसका परिणाम जल्द ही सामने होगा।

दिल्ली के स्कूलों के बाद अस्पतालों में बम रखे होने की अफवाह: बुरारी के बाद संजय गाँधी मेमोरियल अस्पताल में अफरातफरी, IGI एयरपोर्ट को भी धमकी

दिल्ली के दर्जनों अस्पतालों में बम की धमकी के बाद अब दिल्ली के 2 अस्पतालों में बम की धमकी मिली है। बम की धमकी ई-मेल के माध्यम से दी गई, जिसके बाद अफरातफरी मच गई। ये मामला रविवार (12 मई 2014) का है, जहा दिल्ली के बुरारी में स्थित सरकारी अस्पताल और मंगोलपुरी में स्थित संजय गाँधी मेमोरियल अस्पताल में बम की सूचना मिली। इसके अलावा इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी बम रखने की सूचना मिली।

दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, बुराड़ी सरकारी अस्पताल और मंगोलपुरी के संजय गाँधी अस्पताल में बम की धमकी वाले ईमेल मिले। सूचना के बाद बम निरोधक दस्ता और अग्निशमन अधिकारियों की कई टीमें मौके पर पहुँच गई और अस्पताल में सघन तलाशी अभियान छेड़ दिया। दिल्ली पुलिस के डीसीपी (उत्तर) मनोज मीणा ने बताया कि, अभी तक की जाँच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है।

दिल्ली पुलिस ने मामले में अपना बयान जारी करते हुए कहा कि, “बुराड़ी अस्पताल में बम की धमकी के संबंध में एक ईमेल प्राप्त हुआ था। स्थानीय पुलिस, बम निरोधक टीमें (बीडीटी) अस्पताल में हैं। अभी तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है।” डीसीपी (बाहरी) जिमी चिरम ने कहा कि, पुलिस ने बम पता लगाने वाली टीम के साथ मंगोलपुरी के संजय गाँधी मेमोरियल अस्पताल में विस्तृत तलाशी ली और कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला है।

बताया जा रहा है कि अस्पतालों के अलावा IGI एयरपोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। बताया जा रहा है कि बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।

बता दें कि कुछ दिन पहले दिल्ली और नोएडा के कई स्कूलों को ठीक इसी की तर्ज पर ईमेल के जरिए धमकी दी गई थी। जिससे स्कूली बच्चों, टीचर्स और माता-पिता काफी घबरा गए थे। जानकारी मिलने पर एक-एक स्कूल की तलाशी ली गई थी और यहाँ तक कि जिन स्कूलों को मेल नहीं आया था, उनके स्टूडेंट्स को भी वापस घर भेज दिया गया था। हालाँकि तलाशी में कुछ भी नहीं मिला था।

अचानक सपा MLA के घर पहुँचे अमित शाह, बंद कमरों में रायबरेली फतह के लिए मंथन: जानिए कौन हैं मनोज पांडेय, जो राहुल-अखिलेश दोनों को दे रहे सिरदर्द

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (12 मई 2024) को समाजवादी पार्टी के बागी विधायक मनोज पांडे के रायबरेली स्थित आवास पर पहुँचे और वहाँ चाय पी। अमित शाह के साथ रायबरेली से भाजपा प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह भी मौजूद थे। इस दौरान पांडेय अमित शाह को बुके दिए और पैर छूकर आशीर्वाद लिया। माना जाता है कि यह मुलाकात लोकसभा चुनावों को लेकर थी।

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले मनोज पांडेय समाजवादी पार्टी से जुड़े थे। हालाँकि, राज्यसभा चुनावों से पहले उन्होंने पार्टी के मुख्य सचेतक के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कयास लगने लगे थे कि वे भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करेंगे। आखिर में उन्होंने क्रॉस वोटिंग की भी थी। तब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि क्रॉस वोटिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

राज्यसभा चुनावों में वोटिंग से पहले भाजपा विधायक दयाशंकर सिंह उनके घर पहुँचे थे और मनोज पांडेय से मुलाकात की थी। मुलाकात के दौरान दयाशंकर सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी टेलीफोन पर बात कराई थी। मनोज पांडेय ऊँचाहार सीट से विधायक हैं। ऊँचाहार सीट को साल 2012 से पहले डलमऊ के नाम से जाना जाता था।

माना जाता है कि मनोज पांडेय ने समाजवादी पार्टी से बगावत इस उम्मीद से की थी कि भाजपा उन्हें रायबरेली से अपना लोकसभा उम्मीदवार बनाएगी। हालाँकि, उनकी उम्मीद हकीकत में नहीं बदली। उनके बदले दिनेश प्रताप सिंह को टिकट मिला। यूपी तक से बातचीत में पांडे ने कहा, “मैं सपा का विधायक हूँ, लेकिन पीएम मोदी, अमित शाह और सीएम योगी के साथ हूँ।”

उन्होंने कहा, “मैं रायबरेली की टिकट के लिए बीजेपी नहीं आया था। मैं देश मजबूत होता देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आया हूँ। मेरी पार्टी में जब कुछ लोगों ने राम पर ही सवाल उठा दिए तो मैं कैसे बर्दाश्त कर सकता था? मेरा विरोध स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर शुरू हुआ था, जो सनातन और रामचरितमानस को गाली देते थे। नेतृत्व भी मेरी बात नहीं सुन रहा था। इसलिए भाजपा के साथ आ गया।”

मनोज पांडेय जन्म 15 अप्रैल 1968 को रायबरेली जिले में हुआ है। पाण्डेय ने स्नातकोत्तर की डिग्री भी ली है। वे पहली बार साल 2012 में समाजवादी पार्टी की टिकट पर जीतकर यूपी विधानसभा पहुँचे थे। अखिलेश यादव की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया था। इसके साल 2017 और 2022 में भी सपा के टिकट पर जीते थे। उन्हें अखिलेश यादव का वफादार माना जाता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनोज पांडेय की कुल संपत्ति 16.30 करोड़ रुपए है। इनमें से 3.3 करोड़ रुपए की चल और 13 करोड़ की अचल संपत्ति है। उन पर दो करोड़ रुपए की देनदारी भी है। जून 2020 में उनके सुरक्षाकर्मी एक एक रिक्शा चालक को हॉकी स्टिक से बुरी तरह पीटने का आरोप लगा था।