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‘तुहो पागले हाउ’: जेल से निकलते ही ‘छोटे सरकार’ ने लालू यादव के धोखे को किया याद, बोले – गरीब को खाना और किसान को पैसा दे रहे PM मोदी, वो अच्छे लगते हैं

मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह के जेल से बाहर निकलने के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। उनके सहारे न सिर्फ मुंगेर से जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह बड़ी जीत का सपना देख रहे हैं, बल्कि पार्टी कई अन्य सीटों पर भी उनका इस्तेमाल करेगी। पैरल पर निकले अनंत सिंह ने समर्थकों के साथ दौरा भी शुरू कर दिया है। मोकामा सीट पर अनंत सिंह जदयू, निर्दलीय और राजद से जीत दर्ज कर चुके हैं। फ़िलहाल वहाँ से उनकी पत्नी नीलम देवी विधायक हैं।

नीलम देवी जीती तो RJD के टिकट पर थीं, लेकिन अब दोनों पति-पत्नी खुल कर NDA के लिए बल्लेबाजी कर रहे हैं। 2005 से ही पटना के मोकामा विधानसभा सीट पर अनंत सिंह का ही कब्ज़ा है। जेल से निकलने के बाद ‘ABP News’ को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वो हमेशा से नीतीश कुमार के साथ थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें फँसा दिया तो लालू यादव के बुलाने पर वो राजद सुप्रीमो के पास गए। बकौल अनंत सिंह, लालू यादव ने उनका साथ नहीं दिया, एक बकार नहीं बोला (यानी उनके समर्थन में चूँ तक नहीं किया)।

अनंत सिंह ने कहा कि जनता उनका भगवान है और विधायक बनने के लिए किसी के भी दरवाजे पर जाने की ज़रूरत उन्हें नहीं है, वो निर्दलीय भी जीतते हैं। लालू यादव पर धोखे का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि लालू यादव ने उन्हें मदद का आश्वासन दिया था, मदद नहीं मिली तो वो हट गए। आशा क्षीण होने के सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि कोई आशा लेकर जाएगा और सामने वाला मदद नहीं करेगा तो बुरा नहीं लगेगा क्या? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा कि कोई ज़रूरत नहीं है।

अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें केवल जनता से मतलब रहता है, नेता-फेता वगैरह से नहीं। उन्होंने कहा कि जनता उनकी मालिक है, सब कुछ वही है, लोग इसी कारण उन्हें जानते हैं। आगे की रणनीति के सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि वो जनता से भेंट-मुलाकात करेंगे। मतदान के सवाल पर मोकामा के पूर्व विधायक ने कहा कि एक वोट से क्या होगा, वो वोट नहीं देते हैं। हालाँकि, बाद में उन्होंने कहा कि वोट दे देंगे। अनंत सिंह ने जदयू की सीटों में नुकसान के सवाल पर कहा कि ललन सिंह 5 लाख वोट से जीतेंगे।

जब पत्रकार निधि श्री ने पूछा कि आपके कह देने से, तो अनंत सिंह बोले – जनता बोलेगी, चुनाव में ज़्यादा दिन नहीं है। जब उनसे उनके दुःख, कष्ट और संघर्ष के दिनों को लेकर सवाल पूछा गया तो अनंत सिंह ने कहा, “हमरा कभी दुःख होबे नहीं करता है। हमरा जो होता है सब सुखे लगता है। दुःख हमको पता लगे तब न।” फँसाए जाने के अपने बयान की याद दिलाने पर उन्होंने कहा कि वो कहाँ कह रहे हैं कि उनको बचाया गया है? हालाँकि, अनंत सिंह ने कहा कि वो 20 वर्षों से घर नहीं गए।

अगरा बनाम पिछड़ा के नैरेटिव पर अनंत सिंह ने कहा कि सब कोई साथ है। उन्होंने अपने समर्थकों की तरफ भी इशारा किया और कहा कि इनमें सभी जाति के लोग हैं। उन्होंने जाति की राजनीति को गलत बताते हुए कहा कि राजनीति जाति नहीं बल्कि समाज से होता है। अनंत सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी उन्हें अच्छे लगते हैं, वो फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे क्योंकि वो गरीब को खाना देते हैं और किसान को पैसा देते हैं। अनंत सिंह ने सांसद बनने के सवाल पर कहा कि फ़िलहाल उनका क्षेत्र छोटा है।

जब उनसे दिल्ली में बड़ा घर-बँगला होने के सपने की बात की गई तो महिला पत्रकार से उन्होंने कहा, “तुहो पागल हाउ।” उन्होंने कहा कि किसे बड़ा घर अच्छा नहीं लगता है, किसे झोपड़ी अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में उनका घर और फार्महाउस है, उन्हें इसके लिए सेहाय (तरसने) की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने जनता से मिलने को अपना एकमात्र शौक करार दिया। वहीं ‘यूपी तक’ पर उन्होंने कहा कि लोग जब उनके हैं तो भीड़ किसके लिए रहेगा। उन्होंने कहा कि वो मुंगेर से राजद प्रत्याशी अशोक महतो को जानते तक नहीं हैं।

‘मुस्लिमों को आरक्षण देना देशद्रोह’: प्रोफेसर दिलीप मंडल ने बताया किसने संविधान को सबसे ज्यादा बदला, कहा – मनमोहन कैबिनेट में सिर्फ 1 OBC मंत्री था

कॉन्ग्रेस बार-बार मुस्लिमों को धर्म के आधार पर मुस्लिमों आरक्षण देने की बात करती है। जबकि भारत के संविधान में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि धर्म के आधार पर रिजर्वेशन नहीं दिया जा सकता है। अगर धर्म के आधार के कोई आरक्षण देने की बात करता है तो वह संविधान विरोधी बात करता है। हालाँकि, वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल इसे देशद्रोही कहते हैं।

दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी SC, ST और OBC समाज का आरक्षण छीनकर मुस्लिमों को देना चाहती है। कर्नाटक के आँकड़े इसकी पुष्टि भी करते हैं। वहाँ सभी शैक्षिणक संस्थानों एवं सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों की सभी जातियों को OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के अंतर्गत आरक्षण की सुविधा दी गई है।

पीएम मोदी ने कहा था कि जो हक़ बाबासाहेब ने दलितों, पिछड़ों एवं जनजातीय समाज को दिया, कॉन्ग्रेस और I.N.D.I. गठबंधन वाले उसे मजहब के आधार पर मुस्लिमों को देना चाहते हैं। एक चुनावी जनसभा के दौरान उन्होंने कहा कि वो वादा करे कि संविधान में ST, SC और OBC को जो आरक्षण मिला है, उसे वो कम कर के मुस्लिमों में नहीं बाँटेगी। इस बयान के बाद कॉन्ग्रेसियों ने पीएम मोदी की आलोचना शुरू कर दी थी।

बात 1994 की है जब वीरप्पा मोईली की नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने एक आदेश के बाद सारे मुस्लिमों को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में डालकर आरक्षण दिया था। ये फैसला उन्होंने रेड्डी कमीशन की दी गई सिफारिश पर लिया था। इसमें 6 फीसद आरक्षण कैटेगरी 2बी के लोगों के लिए था जिन्हें ‘अधिक पिछड़ा’ कहा गया था। इस 6% में भी 4% रिजर्वेशन मुस्लिमों को दिया गया था।

इसके अलावा, 2% बौद्ध और ईसाई धर्म के ऐसे लोगों को दिया गया था, जो मूलत: अनुसूचित जाति के थे। इस आदेश को 24 अक्टूबर 1994 के बाद लागू होना था। हालाँकि इस बीच इस आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट चुनौती दी गई और कर्नाटक सरकार के इस फैसले पर रोक लग गई। इसके बाद साल 1995 में देवगौड़ा की सरकार आई और मुस्लिमों के लिए ओबीसी कोटा दोबारा से आया।

ANI की संपादक स्मिता प्रकाश के साथ पॉडकास्ट में रिजर्वेशन को लेकर प्रोफेसर दिलीप मंडल ने कहा कि साल 2014 में जब प्रधानमंत्री के पद से जब मनमोहन सिंह जाते हैं, उस समय उनकी पूरी कैबिनेट में ओबीसी का सिर्फ मंत्री था। उन्होंने कहा कि पता नहीं कॉन्ग्रेस ओबीसी के हित की बात किस आधार पर कर रही है।

संविधान में बदलाव के लिए 400 पार सीट की बात पर उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में कुल 8 संशोधन हुए हैं, जबकि इंदिरा गाँधी के शासन के पहले 10 साल में कुल 25 संशोधन हुए हैं। अगर संविधान बदलना होता तो मोदी सरकार बदल देती, क्योंकि 98 प्रतिशत मामलों में संविधान संशोधन के लिए बहुमत ही काफी है।

उन्होंने कहा, “भाजपा ने कास्ट सेंसस को सपोर्ट किया, बीजेपी ने प्रोमोशन में रिजर्वेशन का विरोध नहीं किया, बीजेपी ने लोगों को डिमोट नहीं किया। उनका पॉलिटिकल इक्वेशन अलाउ ही नहीं करता कि वे एसटी, एससी और ओबीसी के विरोध में खड़े हों। जिस दिन वो दिख गए, उस दिन बीजेपी की पॉलिटिक्स खत्म हो गई।”

प्रोफेसर मंडल ने कहा, “जिस सीबीआई कोर्ट अटल बिहारी वाजपेयी के समय लालू यादव को दोषी नहीं ठहराती है, वह सीबीआई कोर्ट मनमोहन सिंह के समय लालू को दोषी ठहरा देती है। राहुल गाँधी इंश्योर करते हैं कि ये आदमी (लालू यादव) जिंदगी में कभी पार्लियामेंट में वापस लौटकर ना आ पाए।”

72 साल के कमर अंसारी ने 9 साल की बच्ची से किया बलात्कार: चॉकलेट देने के बहाने दुकान के अंदर बुलाया, बोला – किसी को बताई तो माँ-बाप का क़त्ल कर दूँगा

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई सटे ठाणे जिले में 9 साल की एक बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। दुष्कर्म का आरोप कमर अंसारी पर लगा है जिसकी उम्र 72 वर्ष बताई जा रही है। कमर अंसारी बेकरी की दुकान चलाता है। घटना के समय पीड़िता उसकी दुकान से कुछ सामान खरीदने गई थी। बच्ची का रेप रेप दुकान के अंदर चॉकलेट के बहाने ले जा कर किया गया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपित बेकरी मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (30 अप्रैल 2024) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना ठाणे शहर जिले के थानाक्षेत्र महात्मा फुले चौक की है। इस क्षेत्र में 72 साल का कमर अंसारी लम्बे समय से बेकरी की दुकान चलाता है। 30 अप्रैल की शाम बेकरी के पास की झुग्गी-झोपडी में रहने वाली एक 9 वर्षीया बच्ची दूध खरीदने कमर अंसारी की दुकान पर गई। आरोप है कि कमर अंसारी ने पहले पीड़िता को इधर-उधर की बातों में फँसाया और बाद में चॉकलेट खिलाने का लालच दे कर दुकान के अंदर वाले हिस्से में ले गया। यहाँ उसने पीड़िता से दुष्कर्म किया।

घटना के समय दुकान में कोई और मौजूद नहीं था। रेप के बाद कमर अंसारी ने पीड़िता को मुँह बंद रखने के लिए 10 रुपए थमाए। आरोप है कि कमर अंसारी ने बच्ची को धमकाते हुए कहा कि अगर उसने कहीं मुँह खोला तो उसके मम्मी-पापा दोनों का कत्ल कर दिया जाएगा। घर आ कर बच्ची ने अपने परिजनों को पूरी बात बता दी। बच्ची की 42 वर्षीया माँ ने इस घटना की शिकायत महात्मा फुले चौक पुलिस थाने में की। इस तहरीर में आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई थी। पुलिस ने इस तहरीर पर 1 मई 2024 (बुधवार) को केस दर्ज कर के कमर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है।

इंस्पेक्टर शैलेश साल्वी ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपित कमर अंसारी पर IPC की धारा 376, 376 (ए, बी), 506 और पॉक्सो एक्ट की धारा 4/6 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने आरोपित को अदालत में पेश कर के 2 दिनों का कस्टडी रिमांड लिया। रिमांड की अवधि पूरी हो जाने के बाद शनिवार (4 मई) को कमर अंसारी को जेल भेज दिया गया। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और काउंसिलिंग करवाई गई है। मामले में जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

रेस्टॉरेंट में घुस कर ब्यूटी क्वीन को मारी गोली, जान देकर चुकानी पड़ी इंस्टाग्राम पर लोकेशन अपडेट करने की कीमत: दुर्दांत तस्कर से था प्रेम संबंध

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और इक्वाडोर की ब्यूटी क्वीन की गोली मार कर हत्या कर दी गई है। मृतका का नाम पर्रागा गोयबुरो है जिनका पूर्व में रिलेशन 2022 में मारे जा चुके एक दुर्दांत गैंगस्टर से बताया जा रहा है। पर्रागा गोयबुरो पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लग चुके हैं। मिस इक्वाडोर प्रतियोगिता में भाग ले चुकीं 23 वर्षीया पर्रागा गोयबुरो की हत्या क्वेवेदो शहर के एक रेस्टॉरेंट में हुई। मृतका की इंस्टाग्राम पोस्ट ने कातिलों को उनकी लोकेशन बताई। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना रविवार (28 अप्रैल, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इक्वाडोर की 23 वर्षीया मॉडल पर्रागा गोयबुरो 28 अप्रैल को क्वेवेदो शहर में मौजूद थीं। यहाँ दोपहर वो एक रेस्टोरेंट में खाना खाने पहुँची थीं। रेस्टोरेंट में पहुँचने के दौरान उन्होंने अपनी लोकेशन ऑन की। यहाँ से पर्रागा गोयबुरो अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करनी शुरू कर दीं। पर्रागा गोयबुरो रेस्टोरेंट में किसी से बात कर रहीं थीं। इसी दौरान 2 बंदूकधारी हमलावर रेस्टोरेंट में घुसे। उन्होंने पर्रागा गोयबुरो पर निशाना साध कर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अचानक हुए हमले से रेस्टोरेंट में अफरातफरी मच जाती है। कुछ ही देर में हमलावर भाग निकले। गोली लगने से बुरी तरह से घायल पर्रागा गोयबुरो जमीन में गिर पड़ीं। उनका काफी खून फर्श पर बह गया। उनको अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। गोलीबारी में पर्रागा गोयबुरो से बात कर रहा व्यक्ति भी घायल हो जाता है जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। मामले की जाँच कर रही पुलिस प्रथम दृष्टया यह मान कर चल रही है कि कातिलों को पर्रागा गोयबुरो की लोकेशन उनके सोशल मीडिया हैंडल से मिली होगी।

फिलहाल अभी तक इक्वाडोर की पुलिस किसी भी हमलावर को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। हत्या की वजह का भी पता नहीं चल पाया है। पर्रागा गोयबुरो इक्वाडोर की ब्यूटी क्वीन होने के साथ वहाँ की प्रसिद्ध सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी मानी जाती हैं। पर्रागा गोयबुरो का इक्वाडोर के कुख्यात तस्कर लिएंड्रो नोरेरो से अफेयर भी था। साल 2022 में जेल एक अंदर हुई एक हिंसा में लिएंड्रो नोरेरो की हत्या हो गई थी।

इसके अलावा पर्रागा गोयबुरो पर पूर्व में भ्रष्टाचार का भी आरोप लग चुका है। जाँच में यह आरोप संगठित अपराध से जुड़े पाए गए थे। हत्याकांड की जाँच कर रही पुलिस इन सभी पहलुओं का भी परीक्षण कर रही है।

पेरिस ओलंपिक से बाहर हो सकते हैं बजरंग पूनिया, एंटी-डोपिंग एजेंसी ने लगाया बैन: ट्रायल में हार के बाद भाग खड़े हुए, अब कह रहे – मेरा वकील जवाब देगा

ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया पेरिस ओलंपिक से बाहर हो सकते हैं। उन पर डोपिंग टेस्ट में शामिल न होने के लिए नाडा ने अस्थाई प्रतिबंध लगा दिए हैं। बजरंग पूनिया के पास प्रतिबंधों के खिलाफ अपील करने का समय 7 मई तक का है, इसके बाद उनपर कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही अब उनके ओलंपिक में हिस्सा लेने की कोशिशों पर काले बादल मंडराने लगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी ने बजरंग पूनिया को अस्थाई रूप से सस्पेंड कर दिया है, क्योंकि उन्होंने मार्च महीने में सोनीपत में हुए ट्रायल में हार के बाद न तो अगले मुकाबलों में हिस्सा लिया था और न ही डोप सैंपल दिया था। नियमों के मुताबिक, हर खिलाड़ी के लिए डोप सैंपल देना अनिवार्य होता है। नाडा ने 23 अप्रैल को ही पत्र लिख कर बजरंग पूनिया को नोटिस जारी किया था। नाडा ने 7 मई तक जवाब देने का समय दिया था, लेकिन इस पत्र के बारे में जानकारी सार्वजनिक अब हुई है।

नाडा ने क्यों की इतनी बड़ी कार्रवाई?

बता दें कि पेरिस ओलंपिक के लिए अभी क्वालिफायर्स होने बाकी हैं। उससे पहले सोनीपत में ट्रायल्स का आयोजन किया गया था। यह ट्रायल्स सोनीपत में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) की एकेडमी में हुए थे। इसमें बजरंग पूनिया का मुकाबला रोहित कुमार से हुआ। रोहित कुमार ने इन ट्रायल में बंजरंग पूनिया को 9-1 के अंतर से पटखनी दे दी। इसी के बाद स्पष्ट हो गया कि वह क्वालिफायर्स में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

इस मुकाबले के बाद उन्हें आगे भी मुकाबलों में हिस्सा लेना था, लेकिन बजरंग पूनिया ने ट्रायल्स छोड़ दिए थे। यही नहीं, उन्होंने अधिकारियों के कई बार अनुरोध करने के बाद भी डोपिंग टेस्ट के लिए सैंपल नहीं दिए और ट्रायल वाली जगह से बाहर चले गए थे। इसी के बाद अब नाडा ने उन पर अस्थाई प्रतिबंध लगाया है कि जबतक इस मामले का निपटारा नहीं हो जाता, वो किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकते।

हालाँकि बजरंग पूनिया ने दावा किया है कि उन्होंने कभी सैंपल देने से इनकार नहीं किया, बल्कि सैंपल लेने के लिए एक्सपायर्ड किट लाई गई थी, मैंने उसका विरोध किया। पूनिया ने कहा कि नाडा के पत्र का जवाब उनके वकील देंगे।

गौरतलब है कि हाल के समय में बजरंग पूनिया के प्रदर्शन में काफी गिरावट देखी गई है। इससे पहले वह 2023 एशियन गेम्स में भी हार चुके हैं। उन्हें जापान के एक पहलवान के यामागुची ने 10-0 से शिकस्त दी थी। वह एशियन गेम्स से बिना मेडल लिए ही लौट आए थे। हालाँकि पहलवान बजरंग पूनिया भारत के लिए ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुके हैं। टोक्यो ओलंपिक 2020 में उन्होंने 65 किलो ग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीता था। अब अगर उनके उपर लगा यह बैन नहीं हटा तो पेरिस ओलंपिक के लिए होने वाले फाइनल ट्रायल में हिस्सा नहीं ले पाएँगे।

बजरंग पूनिया पिछले काफी समय से खेल के लिए प्रैक्टिस करने की जगह प्रदर्शन करते देखे गए हैं। वो कभी किसी नेता से मुलाकात करते हैं, तो कभी किसी नेता के लिए सोशल मीडिया पर बयान जारी कर रहे होते हैं। ऐसे में उनके खेल में गिरावट आने की सबसे बड़ी वजह वो खुद ही बनते चले गए।

‘हिंदुत्व ताकतों’ से लेकर ‘RSS की साजिश’ तक, कसाब को कलावा वाला ‘समीर’ बनाने में पाकिस्तान ही नहीं कॉन्ग्रेस का भी हाथ: तुष्टिकरण देख अमेरिका भी रह गया था हैरान

2008 में जब 26/11 का मुंबई हमला हुआ था और 166 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी, उस समय केंद्र में UPA की सरकार थी और सोनिया गाँधी ‘सुपर PM’ हुआ करती थीं। इन हमलों को लेकर दुनिया को कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार सबूत दिखाती रह गई, पाकिस्तान अपनी थेथरई पर कायम रहा। दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने इसे RSS की साजिश बताया। इसी तरह महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार रह-रह कर इन हमलों में ‘हिन्दू आतंकवाद’ खोजते हैं।

मुस्लिम तुष्टिकरण कॉन्ग्रेस की पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के दौरान अपनी जनसभाओं में कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कह रहे हैं कि पार्टी की विचारधारा ‘मुस्लिम लीग’ वाली हो गई है। इसका कारण ये है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने बिना मुस्लिमों का नाम लिए अपने घोषणा-पत्र में ये इंगित कर दिया है कि वो मुस्लिम समाज का आरक्षण बढ़ाएगी। इतना ही नहीं, पार्टी पर आरोप है कि इसके लिए वो SC, ST और OBC समाज का आरक्षण भी छीन लेगी। पीएम मोदी इसके खिलाफ मुखर हैं।

ये हुई कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की बात। वैसे इसमें कुछ भी नया नहीं है, यूपीए काल में भी सांप्रदायिक हिंसा को लेकर एक बिल लाया गया था जो अगर कानून बन जाता तो हर एक दंगे में हिन्दुओं को ही सज़ा होती और मुस्लिम सब कुछ कर के भी बच निकलते। देश का सौभाग्य रहा कि ये बिल कानून का रूप नहीं ले पाया और इसका जम कर विरोध हुआ। कर्नाटक जैसे राज्यों में कॉन्ग्रेस सरकार ने पहले से ही पिछड़ों के कोटा में मुस्लिमों को आरक्षण दे रखा है।

26/11 मुंबई हमला: पाकिस्तान की साजिश, कॉन्ग्रेस का साथ

अब आते हैं 26/11 मुंबई हमले पर, जिसमें द ताजमहल पैलेस होटल, लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ओबेरॉय ट्रिडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर्स कॉलेज को पाकिस्तान से आए 10 आतंकियों ने निशाना बनाया था। उनमें से 9 को मार गिराया गया, लेकिन तुकाराम ओम्बाले जैसे बहादुर कॉन्स्टेबल के बलिदान के कारण अजमल कसाब पकड़ा गया। अजमल कसाब अगर गिरफ्तार नहीं होता तो शायद सारे सबूत होने के बावजूद इस घटना को ‘भगवा आतंकवाद’ का तमगा दे दिया जाता और कोई कुछ नहीं कर पाता।

पाकिस्तान की भी तो यही तैयारी थी, जो कॉन्ग्रेस पार्टी ने किया। अजमल कसाब को ‘समीर दिनेश चौधरी’ नाम दिया गया था, उसकी पहचान बेंगलुरु के एक छात्र की बनाई गई थी और उसे कलावा पहनाया गया था। ये सब इसीलिए, ताकि वो हिन्दू दिखे। IPS (रिटायर्ड) राकेश मारिया ने भी बताया था कि कैसे अगर पाकिस्तान की साजिश सफल हो जाती तो सारे अख़बार ‘हिन्दू आतंकवाद’ की सुर्ख़ियों से भर जाते और बेंगलुरु में अजमल कसाब के कथित परिवार को खोजने और उनका इंटरव्यू लेने के लिए मीडिया वालों की लाइन लगती।

अजमल कसाब को ‘अरुणोदय डिग्री कॉलेज’ के छात्र की नकली पहचान दी गई थी। वो हमले से कुछ दिन पहले सिद्धिविनायक मंदिर भी पहुँचा था, वहाँ तस्वीरें क्लिक करवाई थी और 15-20 कलावा खरीदे थे। उसने पाकिस्तान जाकर साजिशकर्ता साजिद मीर को ये सारा कलावा दिया था और उसे भी लगा कि ये एक अच्छा विचार है। सोचिए, अगर अजमल कसाब नहीं पकड़ा जाता तो फिर पाकिस्तान की साजिश सफल हो जाती, कॉन्ग्रेस का साथ उसे मिल तो रहा ही था।

कौन हैं विजय वडेट्टीवार, मुंबई हमलों पर क्यों उनका बयान निंदनीय

आगे बढ़ने से पहले जान लेते हैं कि विजय नामदेवराव वडेट्टीवार कौन हैं और उन्होंने कहा क्या है। वो कॉन्ग्रेस के नेता हैं, जिन्हें पार्टी ने महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया है। कॉन्ग्रेस से वो दशकों से जुड़े हुए हैं, 1980 में उन्होंने पार्टी के छात्र संगठन NSUI से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। 90 के दशक की शुरुआत में गढ़चिरौली से जिला परिषद सदस्य रहे हैं, फिर 2010 में चंद्रपुर स्थित डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव सेन्ट्रल बैंक के अध्यक्ष रहे।

1998 में वो MLC बने थे। इससे पहले 2019 में भी वो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं। चंद्रपुर स्थित ब्रह्मपुरी से लगातार दूसरी बार विधायक हैं। उद्धव ठाकरे की MVA सरकार में उनके पास एक दर्जन मंत्रालय थे। खैर, ये सब बताने का कारण ये है कि बयान कॉन्ग्रेस के किसी छुटभैये नेता की तरफ से नहीं आया है। उन्होंने कहा है कि IPS हेमंत करकरे की जिस गोली से हत्या हुई वो अजमल कसाब या अन्य आतंकियों नहीं बल्कि एक RSS को समर्पित पुलिस अधिकारी के हथियार से चली थी।

असल में वो अधिवक्ता उज्जवल निकम पर निशाना साध रहे थे। वो उज्ज्वल निकम ही थे जिन्होंने अजमल कसाब को फाँसी के फंदे तक पहुँचाया था। उस समय वो महाराष्ट्र के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर थे, अब भाजपा ने उन्हें मुंबई नॉर्थ-सेन्ट्रल से लोकसभा उम्मीदवार बनाया है। दिवंगत दिग्गज नेता प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन की जगह उन्हें लाया गया है। उज्जवल निकम ने कई आतंकियों को आजीवन कारावास और फाँसी की सज़ा दिलाई है। लेकिन, कॉन्ग्रेस नेता विजय नामदेवराव वडेट्टीवार उन्हें ‘देशद्रोही’ कहते हैं।

भाजपा ने इस बयान का करारा जवाब दिया है। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि कॉन्ग्रेस अजमल कसाब का पक्ष ले रही है। वहीं उज्जवल निकम ने कहा कि वो ऐसे बेबुनियाद आरोप से दुःखी हैं जिससे उनकी ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न लगाया जा रहा है। उन्होंने इसे मुंबई हमले के मृतकों का अपमान बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि राजनेता इस हद तक गिर जाएँगे, राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह की हरकत की जाएगी।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लिए पाकिस्तान से दुआएँ आने के पीछे का कारण समझ में आ गया है, पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता पाकिस्तान को 26/11 पर क्लीन चिट दे रहे हैं। शहजाद पूनावाला ने कहा कि उज्जवल निकम ने राष्ट्रहित में वकालत का इस्तेमाल किया, उन्हें ‘देशद्रोही’ कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों को ‘बलिदानी’ कहने वाले, सेना को ‘बलात्कारी’ कहने वाले और आतंकियों की मौत पर आँसू बहाने वाले असली देशद्रोही हैं।

बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने राहुल गाँधी का समर्थन करते हुए उन्हें समाजवादी बताया है। राहुल गाँधी लगातार सत्ता में आने के बाद सबकी संपत्ति की जाँच और बँटवारे का वादा कर रहे हैं, जिस पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि लोगों की गाढ़ी कमाई से बने घर और महिलाओं के मंगलसूत्र पर कॉन्ग्रेस की नज़र है, सबका सर्वे कर के छीन लिया जाएगा। अब पाकिस्तान की तरफ से भी कॉन्ग्रेस को खुलेआम समर्थन मिल रहा है।

अमेरिका ने भी माना था – 26/11 पर कॉन्ग्रेस ने की मजहबी राजनीति

यहाँ तक कि अमेरिका के एक लीक हुए केबल से भी खुलासा हुआ था कि 166 लोगों की लाशों पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने मजहबी राजनीति का घिनौना खेल खेला। तब अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय एंट्री रहे AR अंतुले ने हमले के कुछ ही दिनों बाद कहा था कि इसके पीछे ‘हिंदुत्व ताकतों’ का हाथ है। 23 दिसंबर, 2008 को अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट को भेजे गए केबल में एम्बेस्डर डेविड मुल्फोर्ड ने कहा था कि एआर अंतुले के दावों को भारत के मुस्लिम समुदाय में समर्थन भी मिला।

उन्होंने ये भी लिखा था कि आगामी लोकसभा चुनावों में मुस्लिम समाज के समर्थन के लिए कॉन्ग्रेस ने ‘कंस्पिरेसी थ्योरी’ को हवा दी। मुस्लिम समाज में ये भय बिठा दिया गया कि उन्हें पक्षपात कर के निशाना बनाया जा रहा है, जाँच एजेंसियाँ सच्चाई दबाने के लिए ये सब कर रही है। अमेरिका तक ने माना था कि कॉन्ग्रेस जाति-मजहब की राजनीति करती है, जानबूझकर AR अंतुले की टिप्पणी का सहारा लेकर मुस्लिम समाज में माहौल बनाने की कोशिश की गई, ये सब अचानक नहीं हुआ या फिर बिना सोचे-समझे नहीं किया गया।

इसी तरह पाकिस्तान के विश्लेषक ज़ैद हामिद ने एक पूरी की पूरी किताब लिख कर मुस्लिम हमलों को हिन्दुओं की साजिश बता दिया। दुनिया भर के शीर्ष 500 मुस्लिमों में शुमार किए जा चुके ज़ैद हामिद ने हिन्दुओं की तुलना यहूदियों से की। उसने अजमल कसाब को ‘अमर सिंह’ नाम का एक सिख बता दिया और कहा कि वो R&AW के लिए जासूसी करता था। भारत के कॉन्ग्रेस नेताओं ने एक तरह से ज़ैद हामिद जैसों का काम और आसान ही कर दिया।

पुलवामा पर भी कॉन्ग्रेस पार्टी का था वही रुख

हम 26/11 पर ही क्यों रुके रहें? पुलवामा हमला, जिसमें फरवरी 2019 में 40 CRPF जवान बलिदान हो गए थे, उसे लेकर कॉन्ग्रेस ने जो संवेदनहीनता दिखाई उसकी चर्चा भी आवश्यक है। जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, जो पद से हटते ही विपक्ष की गोद में खेलने लगे, उन्होंने दावा किया था कि केंद्र सरकार ने एयरक्राफ्ट नहीं दिए इसीलिए जवान बलिदान हुए। इस बयान को आधार बना कर कॉन्ग्रेस पार्टी ने देश भर में प्रदर्शन किया।

पंजाब के उप-मुख्यमंत्री रहे सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पुलवामा हमले को भाजपा की साजिश तक बता दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पुलवामा का हमला कराया गया। राहुल गाँधी ने तो पुलवामा हमले को पाकिस्तान और PM नरेंद्र मोदी के बीच की ‘मैच फिक्सिंग’ तक करार दिया था। कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू जाकर पाकिस्तान के सेना प्रमुख से गले मिल रहे थे, लेकिन कॉन्ग्रेस पुलवामा में भाजपा की साजिश देख रही थी।

‘पंजाब के अपराधियों का कनाडा में होता है स्वागत, ये समस्या तो खड़ी करेंगे’: आतंकी निज्जर की हत्या में 3 गिरफ्तारी पर बोले जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए भारतीयों के बारे में कनाडा सरकार जानकारी साझा किए जाने का इंतजार है। जयशंकर ने कहा कि उन्होंने गिरफ्तारियों की खबर देखी है और ये संदिग्ध किसी गिरोह वाले पृष्ठभूमि के हैं। उन्होंने कहा कि भारत के मना करने के बावजूद कनाडा पंजाब में संगठित अपराध करने वालों को अपने यहाँ आने की छूट देता है।

बता दें कि निज्जर की हत्या में कमलप्रीत सिंह, करणप्रीत सिंह और करण बराड़ नाम के तीन भारतीयों को गिरफ्तार किया गया है। कनाडा के मीडिया द्वारा इन सभी के गैंगस्टर लॉरेस बिश्नोई गैंग से ताल्लुक रखने का भी दावा किया जा रहा है। कनाडाई मीडिया हाउस सीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ये तीनों जिस ग्रुप के सदस्य हैं, वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़ा है। 

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हमारी एक चिंता जो हम उन्हें बता रहे हैं वह यह है कि उन्होंने (कनाडा ने) भारत, विशेष रूप से पंजाब के संगठित अपराध को कनाडा में संचालित होने की अनुमति दी है।” उन्होंने कहा कि निज्जर की हत्या पर कनाडा में जो कुछ हो रहा है, वह ज्यादातर उनकी आंतरिक राजनीति के कारण है और इसका भारत से कोई लेना-देना नहीं है।

जयशंकर ने कहा कि कनाडा में ‘खालिस्तान समर्थक झुकाव’ वाले कुछ लोगों ने खुद को राजनीतिक रूप से संगठित किया है और एक प्रभावशाली राजनीतिक लॉबी का आकार ले लिया है। उन्होंने आगे कहा कि कनाडा में सत्तारूढ़ पार्टी के पास संसद में बहुमत नहीं है और वह कुछ ऐसी पार्टियों एवं नेताओं के समर्थन पर निर्भर है, खालिस्तान समर्थक हैं।

वोटबैंक को लेकर जयशंकर ने कहा, “कुछ लोकतांत्रिक देशों में इनके राजनेताओं को यह विश्वास दिलाया जाता है कि यदि वे इन लोगों का सम्मान करते हैं या इन लोगों की वकालत करते हैं तो इन लोगों के पास एक समुदाय को अपना समर्थन देने की कुछ क्षमता है। इसलिए उन्होंने इन देशों की राजनीति में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश की है। इस समय यह अमेरिका में इतनी बड़ी समस्या नहीं है।”

उन्होंने कहा, “अभी हमारी सबसे बड़ी समस्या कनाडा में है, क्योंकि आज कनाडा में सत्ता में रहने वाली पार्टी और कनाडा में अन्य पार्टियों ने इस प्रकार के उग्रवाद, अलगाववाद और हिंसा की वकालत करने वालों को आज़ादी के नाम पर एक निश्चित वैधता दे दी है। जब आप उनसे कुछ कहते हैं तो उनका जवाब होता है, हम एक लोकतांत्रिक देश हैं।”

कनाडा पर निशाना साधते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने आगे कहा, “लेकिन बात यह है कि उन्हें यह समझने की जरूरत है कि यह अब दुनिया एकतरफा रास्ता वाली नहीं है। यदि वहाँ ऐसा कुछ होता है तो प्रतिकार होगा। न्यूटन का राजनीति का नियम वहाँ भी लागू होगा। प्रतिक्रिया होगी। अन्य लोग कदम उठाएँगे या इसका प्रतिकार करेंगे।”

जयशंकर ने कहा, “पंजाब में संगठित अपराध से जुड़े कई लोगों का कनाडा में स्वागत किया गया है। हम कनाडा से कह रहे हैं कि देखो ये भारत के वांछित अपराधी हैं, आपने उन्हें वीजा दिया है। उनमें से कई झूठे दस्तावेज़ों से आए हैं, फिर भी आप उन्हें वहाँ रहने की अनुमति देते हैं। यदि आप राजनीतिक उद्देश्यों के लिए संदिग्ध और नकारात्मक पृष्ठभूमि वाले लोगों को आयात करेंगे तो समस्याएँ होंगी।”

जयशंकर ने कहा, “हमने उन्हें कई बार ऐसे लोगों को वीजा, वैधता या राजनीतिक स्थान नहीं देने के लिए कहा, जो उनके (कनाडा) के लिए, हमारे लिए और हमारे संबंधों के लिए भी समस्याएँ पैदा कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि भारत ने ऐसे 25 लोगों के प्रत्यर्पण की माँग कनाडा से की है, जिनमें से अधिकांश खालिस्तान समर्थक हैं, लेकिन कनाडा सरकार ने कुछ नहीं किया।

विदेश मंत्री ने कहा, “कनाडा ने कोई सबूत नहीं दिया। वे कुछ मामलों में हमारे साथ कोई सबूत साझा नहीं करते हैं। पुलिस एजेंसियाँ भी हमारे साथ सहयोग नहीं करती हैं। कनाडा में भारत पर आरोप लगाना उनकी राजनीतिक मजबूरी है। अब चूँकि कनाडा में चुनाव आ रहा है तो वे वोट बैंक की राजनीति में व्यस्त हैं।”

16 साल के कट्टरपंथी मुस्लिम लड़के ने चाकुओं से किया हमला, पुलिस ने ऑन द स्पॉट कर दिया शूट: ऑस्ट्रेलिया में ऑनलाइन जुड़ा था कट्टरपंथी लोगों से

ऑस्ट्रेलिया में कॉकेशियाई मूल के 16 साल के इस्लामिक कट्टरपंथी किशोर को पुलिस ने मार गिराया है। वो बड़ा चाकू हाथ में लेकर लोगों पर हमले कर रहा था। उसने पुलिस पर भी हमला किया, जिसके बाद 2 पुलिस वालों ने उसे चेतावनी देकर रोकने की कोशिश की, लेकिन वो तीसरे पुलिस वाले की तरफ चाकू लेकर हमला करने के लिए बढ़ा ही था, कि उसने उसे तुरंत ही गोली मार दी और कट्टरपंथी किशोर को जहन्नुम का रास्ता दिखा दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में 16 साल के इस्लामी कट्टरपंथी ने ही खुद पुलिस को फोन पर सूचना दी थी कि वो हमले करने जा रहा है। इसके बाद वो एक पार्किंग स्थल पर पहुँचा और लोगों पर चाकू से हमले करने लगा। एक व्यक्ति का फेफड़ा भी इस हमले में क्षतिग्रस्त हो गया। इस दौरान आम लोगों ने भी उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन कई लोग घायल हो गए। मौके पर पहुँची पुलिस ने भी उसे समझाने की कोशिश की और चाकू फेंकने की अपील की, लेकिन वो पुलिस वालों पर ही हमलावर हो गया।

बताया जा रहा है कि दो पुलिसकर्मियों ने उसे रोकने की कोशिश की और डंडे से डराया। क्योंकि पुलिस कर्मी उसे डराकर उसकी जिंदगी बचाना चाहते थे, लेकिन तभी वो तीसरे पुलिसकर्मी पर चाकू लेकर झपटा और यही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई, क्योंकि तीसरे पुलिसकर्मी ने उसे सीधे माथे पर गोली मार दी और वो तुरंत ढेर हो गया। पुलिस ने ही उसे अस्पताल पहुँचाया, लेकिन उसने दम तोड़ दिया।

एबीसी न्यूज ने कमिश्नर ब्लैंच के हवाले से बताया है कि 16 साल का ये किशोर ऑनलाइन संपर्कों के चलते ‘रेडिकल’ हो गया था। अभी इस हमले को आतंकी हमला नहीं कह सकते, क्योंकि उसने इस हमले को अकेले ही अंजाम दिया है। कमिश्नर ने स्थानीय मुस्लिम समुदाय को सहयोग के लिए शुक्रिया भी कहा है, जिन्होंने हमलावर किशोर को रोकने की कोशिश की। वहीं, परिवार भी जाँच में सहयोग कर रहा है। हालाँकि पुलिस ने कहा है कि जाँच के बाद ही ये साबित हो पाएगा कि ये आतंकी हमला है या नहीं।

कमिश्नर ब्लैंच ने कहा कि किशोर को पुलिस जानती थी और वह कट्टरपंथी होने के जोखिम वाले व्यक्तियों की मदद करने के लिए बनाए गए एक कार्यक्रम का हिस्सा था। प्रधान मंत्री एंथोनी अल्बानीज़ ने स्थिति पर काबू पाने के लिए त्वरित कार्रवाई करने के लिए पुलिस को धन्यवाद दिया। इसके बाद उन्होंने कहा, “हम एक शांतिप्रिय राष्ट्र हैं और ऑस्ट्रेलिया में हिंसक चरमपंथ के लिए कोई जगह नहीं है।”

शराब घोटाले के 18वें आरोपित को ED ने किया गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा हिरासत में: गोवा चुनाव के लिए AAP को पहुँचाए थे पैसे

दिल्ली के आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार वकील विनोद चौहान को अदालत ने शनिवार (4 मई 2024) को 7 मई तक के लिए एजेंसी की हिरासत में भेज दिया। इस मामले में की ईडी द्वारा की गई यह 18वीं गिरफ्तारी है। आरोप है कि विनोद ने गोवा चुनाव के लिए हवाला के जरिए आम आदमी पार्टी (AAP) को पैसे पहुँचाए थे।

ED ने दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट को बताया कि विनोद ‘साउथ ग्रुप’ के सदस्यों के साथ नियमित संपर्क में थे। उनकी तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव एवं BRS की नेता के. कविता और कुछ AAP नेताओं जैसे प्रमुख साजिशकर्ताओं के साथ गहरी साँठगाँठ थी। इस मामले में ED के विशेष वकील ज़ोहेब हुसैन ने कोर्ट से विनोद की चार दिन की हिरासत का अनुरोध किया था।

वकील ज़ोहेब हुसैन ने अदालत को बताया, “विनोद चौहान के कार्यालय में तलाशी ली गई। वहाँ से 1,06,00,000 रुपए (1.06 करोड़ रुपए) जब्त किये गए थे। वे इन रुपयों का स्रोत नहीं बता पाए थे। उनके पास ‘साउथ ग्रुप’ के सदस्यों द्वारा आम आदमी पार्टी के लिए दी गई नकदी थी।” उन्होंने कहा कि विनोद 25.5 करोड़ रुपए के अपराध की आय को स्थानांतरित करने में शामिल थे।

ED के तर्क को काटते हुए विनोद चौहान के वकील ने कहा कि उन्हें केंद्रीय एजेंसी की हिरासत में भेजने की कोई जरूरत नहीं है। वकील ने कहा, “मैं हमेशा जाँच में शामिल हुआ हूँ। मुझे क्यों गिरफ्तार किया गया है?” उन्होंने कहा कि नकदी बरामदगी के संबंध में ऑडिटेड विवरण पहले ही एजेंसी को उपलब्ध करा दिए गए हैं। ये पैसे व्यवसाय के माध्यम से प्राप्त हुए थे।

इस पर ईडी के वकील ने कहा कि अपराध से हुई आय को पहले ही इस्तेमाल हो चुकी है। एक करोड़ रुपया वह रकम थी, जो बच गई थी। बता दें कि ‘साउथ ग्रुप’ में दक्षिण भारत के वे व्यक्ति शामिल हैं, जिसके बारे में ईडी का दावा है कि उन्हें अनुचित लाभ, स्थापित थोक व्यवसायों में हिस्सेदारी, कई खुदरा क्षेत्र (पॉलिसी में अनुमति से अधिक) हिस्सेदारी दी गई थी और इसके बदले में AAP के नेताओं को 100 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था।

बता दें कि शराब नीति में घोटाला मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, बीआरएस की नेता के. कविता सहित कई शराब व्यवसायियों को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया है। इस मामले में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें जमानत मिल गई है। ईडी ने विनोद चौहान को 3 मई 2024 को गोवा से गिरफ्तार किया था।

पंजाब में 19 साल के बच्चे को पीट-पीट कर मार डाला… गुरु ग्रंथ साहिब को फाड़ने का आरोप: पुलिस ने मृतक पर ही किया केस, हत्यारी भीड़ पर कोई FIR नहीं

पंजाब के फिरोजपुर में बेअदबी के आरोप में एक युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई है। मृतक का नाम बख्शीस सिंह उर्फ़ गोला है। बख्शीस को मार डालने वाली भीड़ ने उस पर गुरुद्वारा साहिब बाबा बीर सिंह में घुस पर बेअदबी का आरोप लगाया है। घटना शनिवार (4 मई 2024) की है। मृतक के पिता के मुताबिक उनके बेटे की दिमागी हालत ठीक नहीं थी, जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा था। SGPC (शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी ) ने बेअदबी को जानबूझ कर की गई करतूत बताते हुए मृतक के परिवार के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना फ़िरोज़पुर के सिटी क्षेत्र में आने वाले गाँव बंडाला की है। शनिवार को यहाँ गाँव तल्ली गुलाम के गुरुद्वारा बाबा बीर सिंह में लगभग 19 वर्षीय एक युवक पहुँचा। युवक का नाम बख्शीस सिंह बताया जा रहा है, जो आसपास गोला नाम से जाना जाता था। आरोप है कि बख्शीस सिंह ने गुरूद्वारे में रखे गुरु ग्रंथ साहिब के कुछ पन्ने फाड़ डाले। इस हरकत के बाद बख्शीस सिंह भागने की कोशिश करने लगा, जिसे आसपास मौजूद लोगों ने दौड़ा कर पकड़ लिया। इन सभी ने उसकी निर्ममता से पिटाई शुरू कर दी।

इस पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में जमीन पर गिरे एक युवक को भीड़ पीट रही है। आसपास काफी शोरगुल हो रहा है। पिट रहे युवक के दोनों हाथों को पीछे से बाँध कर रखा गया है। हमलावरों के हाथों में लाठी-डंडे दिख रहे हैं। आसपास नारेबाजी भी हो रही है। भीड़ में हर उम्र के लोग शामिल दिख रहे हैं। इस दौरान कोई भी युवक को बचाने का प्रयास नहीं करता। मृतक के आसपास काफी खून बहा है। मौके पर पुलिस बल भी दिखाई दे रहा है। एक निहंग तो बख्शीस सिंह पर तलवार भी चलाता दिख रहा है।

बुरी तरह से घायल बख्शीस सिंह को पुलिस ने अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। बेटे की मौत के बाद उसके पिता लखविंदर सिंह सामने आए। उन्होंने अपने बेटे को मानसिक तौर पर बीमार बताया। लखविंदर सिंह ने दावा किया कि वो 2 साल से अपने बेटे का इलाज करवा रहे थे। उनकी माँग है कि बख्शीस के कतिलों को कानून सजा दे। फिरोजपुर सिटी डिप्टी एसपी सुखविंदर सिंह ने बताया कि मामला पुलिस के संज्ञान में है, जिसकी जाँच की जा रही है।

मृतक के परिजनों का सामाजिक बहिष्कार भी

इस मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी (SGPC) का भी बयान सामने आया है। 4 मई को जारी अपने बयान में SGPC ने मृतक युवक के परिजनों का सामाजिक और धार्मिक बहिष्कार का एलान किया है। SGPC ने बख्शीस सिंह का अंतिम संस्कार किसी भी गुरूद्वारे में न होने का भी फरमान जारी किया है। जत्थेदार ग्यानी रघबीर सिंह ने बेअदबी की घटनाओं को सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने इन घटनाओं को रोक पाने में कानून को भी नाकाम बताया है।

मृतक बख्शीश की हरकतों से सिख समुदाय की भावनाओं को आहत बताते हुए SGPC ने कहा कि सिखों के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब से ऊपर कुछ भी नहीं है। भीड़ द्वारा बख्शीस सिंह की हत्या को जत्थेदार द्वारा मजबूरी बताते हुए ऐसे मामलों में कानून को ही दोषपूर्ण करार दे दिया गया। SGPC ने सरकार को चेतावनी दी है कि वो बख्शीस सिंह की पीट-पीट कर हत्या करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बजाय घटना के पीछे की साजिश का खुलासा करे।

पंजाब पुलिस ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार समिति के अध्यक्ष लखवीर सिंह की शिकायत के आधार पर बख्शीश सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295-ए के तहत FIR दर्ज की है। जिस लड़के को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला, कानून ने उस मर चुके बच्चे के ऊपर ही लिख दी रपट। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हत्यारी भीड़ पर अभी तक कोई केस दर्ज नहीं की गई है… यह कैसा कानून है?