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अरविंद केजरीवाल ने खालिस्तानी संगठन से लिए ₹133 करोड़, उप-राज्यपाल ने की NIA जाँच की सिफारिश: USA के गुरुद्वारा में बैठक, पन्नू के SFJ से डील

दिल्ली शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। आरोप है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी ने खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ से फंडिंग ली है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसकी आतंक निरोधी एजेंसी NIA से जाँच कराने की सिफारिश की है।

दरअसल, इस संबंध में उपराज्यपाल को एक शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP को देवेंद्र पाल भुल्लर को रिहा करने और खालिस्तान समर्थक भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए फंड मिले थे। इसके लिए खालिस्तानी आतंकी समूहों से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 133.60 करोड़ रुपए) मिले थे।

दरअसल, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन इंडिया की राष्ट्रीय महासचिव आशू मोंगिया और आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता मुनीश कुमार रायजादा ने इस संबंध में 1 अप्रैल 2024 को उपराज्यपाल को पत्र लिखा था। इसमें आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू से 16 मिलियन अमेरिकी डॉलर लेने का आरोप लगाया गया था।

पत्र में कहा गया था कि अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने यह रकम 2014 से लेकर 2022 के बीच में खालिस्तानी संगठन से ली है। इसमें यह भी कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल और खालिस्तान समर्थक सिखों के बीच साल 2014 में अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित गुरुद्वारा रिचमंड हिल्स में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में केजरीवाल ने खालिस्तानी देवेंद्र पाल भुल्लर को रिहा करने का वादा किया था।

उपराज्यपाल द्वारा केंद्रीय गृह सचिव को NIA जाँच के लिए लिखी गई चिट्ठी के अनुसार, भुल्लर को रिहा करने के बदले में अरविंद केजरीवाल ने अपनी आम आदमी पार्टी के लिए वित्तीय सहायता की माँग की थी। इस बैठक की तस्वीरें रायजादा ने अपने सोशल मीडिया साइट X (पहले ट्विटर) पर साल 2014 में साझा भी की थी।

आम आदमी पार्टी के पूर्व कार्यकर्ता मनीश कुमार रायजादा और आशू मोंगिया द्वारा लिखी गई चिट्ठी के आधार पर उपराज्य ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 27 जनवरी 2014 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर प्रोफेसर भुल्लर को क्षमा देने की भी अपील की थी।

‘मुस्लिम बनो और आरक्षण पाओ’: SC/ST/OBC सभी हिंदुओं से छीन लिया जाएगा रिजर्वेशन – सोशल मीडिया पर डिमांड, दारुल इस्लाम की ओर बढ़ता भारत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के दौरान अपनी कई जनसभाओं में कहा है कि वो किसी भी कीमत पर मजहब के आधार पर आरक्षण नहीं होने देंगे। उन्होंने संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर और प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि ये दोनों भी नहीं चाहते थे कि मजहब के आधार पर आरक्षण मिले। अब सोशल मीडिया में इसे लेकर बहस का बाजार गर्म हो गया है।

‘इंडिया टुडे’ के संपादक रहे एक्टिविस्ट दिलीप मंडल ने ने एक ट्वीट में लिखा कि इस चुनाव में हमने एक चीज तय कर दिया है कि SC/ST की सूची में अब कोई मुस्लिम वर्ग नहीं आ जाएगा। उन्होंने लिखा कि हमने रंगनाथ मिश्रा कमीशन को हमने गहरी मिट्टी में दफना दिया है। बता दें कि UPA सरकार द्वारा गठित इस आयोग ने सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों को 10% आरक्षण देने की सिफारिश की थी। साथ ही OBC को जो 27% कोटा मिला हुआ है उसमें से 8.5% मुस्लिमों को देने की सिफारिश भी की थी।

इस आयोग ने यहाँ तक सलाह दे दी थी कि दलितों को इस्लामी या ईसाई धर्मांतरण के बाद भी आरक्षण का लाभ मिलता रहे। दिलीप मंडल ने स्पष्ट किया कि अब ये सुनिश्चित हो गया है कि केंद्र में या किसी भी राज्य में मुस्लिमों को आरक्षण नहीं मिलेगा। उन्होंने इस दौरान याद दिलाया कि कैसे कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मुस्लिमों को कॉन्ग्रेस द्वारा आरक्षण दे दिया गया। साथ ही कहा कि आगे ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक चुनाव में इतना सुनिश्चित हो गया, यही बहुत है।

इस पर सोशल मीडिया पर घृणा फैलाने वाला आसिफ खान भड़क गया और उसने कहा, “हिन्दू इस देश की जनसंख्या का 80% हैं। हिन्दू समूहों के लिए जाति आधारित आरक्षण विशुद्ध बहुसंख्यकवाद है। इस देश में स्पष्ट बहुमत में होने के बावजूद उन्हें SC/ST/OBC/EWS आरक्षण का लाभ मिलता है। इस कारण हिन्दू भारत के सभी संस्थानों में हावी हैं। उनका प्रतिनिधित्व बहुत अधिक है, इसीलिए उनका आरक्षण खत्म किया जाना चाहिए। जिनका प्रतिनिधित्व कम है, उन अल्पसंख्यक समूहों को आरक्षण मिलना चाहिए।”

इस सोच को देखिए। आसिफ खान जैसों का कहना है कि आरक्षण पिछड़े समूहों को नहीं, मुस्लिमों को मिलना चाहिए। यानी, मजहब के आधार पर आरक्षण, वो भी हिन्दुओं के देश में। दुनिया भर में 50+ मुस्लिम मुल्क हैं। इसके अलावा भी कई देशों में मुस्लिम अच्छी-खासी संख्या में हैं। लेकिन, इन्हें आरक्षण चाहिए भारत में। भारत में देश से बाहर से आए मजहब को आरक्षण चाहिए। जो हिन्दू यहाँ के मूलनिवासी हैं, जिन पर 800 वर्षों के इस्लामी शासन के दौरान अत्याचार हुए, उन्हें कोई फायदा न मिले – ऐसा इनका कहना है।

जहाँ मुस्लिम बहुलता में आ जाते हैं, वहाँ सबसे पहले शरिया लगाने की कोशिश की जाती है, फिर वो इलाका ‘दारुल इस्लाम’ बन जाता है। बिहार के सीमांचल में कई सरकारी स्कूलों में भी रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी होना इसका उदाहरण है। फिर जहाँ इस्लाम का शासन आ जाता है, बाकी वर्ग अपने-आप दोयम दर्जे के नागरिक हो जाते हैं। उनसे जजिया कर वसूला जाता है। अब आसिफ खान जैसे लोग पिछड़े हिन्दुओं का आरक्षण खत्म कर के भारत को ‘दारुल इस्लाम’ बनाना चाहते हैं।

उधर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने राज्य में मुस्लिमों को मिल रहे आरक्षण का बचाव किया है। बता दें कि राज्य में नौकरी, एडमिशन और पंचायत चुनावों तक में पिछड़ों के कोटे में मुस्लिमों को आरक्षण मिला हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने पीएम मोदी के इस दावे को झूठ बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने पिछड़ों का आरक्षण लेकर मुस्लिमों को दे दिया। पीएम मोदी ने बताया था कि आंध्र प्रदेश में भी कॉन्ग्रेस ने 4 बार ऐसी कोशिश की, लेकिन न्यायपालिका के कारण सफल नहीं हो पाई।

सुप्रीम कोर्ट ने गर्भवती लड़की के लिए ‘महिला’ की जगह ‘व्यक्ति’ शब्द का किया इस्तेमाल: बताया कारण, कहा – नॉन-बाइनरी और समलैंगिक भी हो सकते हैं प्रेग्नेंट

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह दिए गए एक फैसले में ‘गर्भवती महिला’ की जगह ‘गर्भवती व्यक्ति’ शब्द का इस्तेमाल किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसका कारण बताया है। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि जन्म से जो स्त्रीलिंग हैं, उनके अलावा नॉन-बाइनरी (ऐसे लोग जो खुद को पुरुष या महिला नहीं मानते) भी गर्भवती हो सकते हैं, इसीलिए ‘महिला’ की जगह ‘व्यक्ति’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। मामला 14 साल की एक नाबालिग लड़की के गर्भवती होने से जुड़ा था।

मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़, जस्टिस JB पार्डीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने ये फैसला सुनाया था। अब उन्होंने कहा है कि Cis-जेंडर (जो अपना जेंडर वही मानते हैं जो उनके जन्म के समय था) ही नहीं बल्कि ट्रांसजेंडर (समलैंगिक) पुरुष और नॉन-बाइनरी (महिला-पुरुष के अलावा अन्य) लोग भी गर्भवती हो सकते हैं। इस मामले में उक्त नाबालिग लड़की बलात्कार के बाद गर्भवती हुई थी। एक मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि वो शारीरिक और मानसिक रूप से गर्भ गिराने के लिए फिट है, हाईकोर्ट की अनुमति मिल जाए तो।

जब तक उक्त लड़की ने बॉम्बे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, तब तक वो 27 हफ्ते की गर्भवती हो चुकी थी। हालाँकि, फिर से मेडिकल बोर्ड ने कहा कि भ्रूण में कोई जन्मजात असमानताएँ नही थीं, ऐसे में आयु के हिसाब से उसे गिराना ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड को पुनः परीक्षण का आदेश दिया। जाँच के बाद बोर्ड ने इसके लिए हामी भर दी और कहा कि लड़की गर्भवती रही तो इससे इसके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा।

आखिरकार, 22 अप्रैल, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने गर्भ गिराने की अनुमति दे दी। जब तक उसके अभिभावक अंतिम फैसले तक पहुँचते, लड़की 30 सप्ताह (7 महीने) की गर्भवती हो चुकी थी। अभिभावक अपनी बेटी के स्वास्थ्य को लेकर बेचैन थे और लड़की भी बच्चे को जन्म देना चाहती थी, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस आदेश को वापस ले लिया। लड़की की इच्छा है कि नवजात को गोद लेने के लिए दे दिया जाएगा। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने लिखा था कि ऐसे मामलों में ‘गर्भवती व्यक्ति’ की इच्छा क्या है इसे सबसे पहले देखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर ‘गर्भवती व्यक्ति’ और उसके अभिभावक के बीच मतभेद हो तो अदालत को नाबालिग या मानसिक रूप से बीमार शख्स की बात को सुनना चाहिए और फैसले लेते समय उसका ध्यान रखना चाहिए। बता दें कि पश्चिमी देशों में कई जगह ‘They/Them’ प्रोनाउन का इस्तेमाल किया जा रहा है और He/Him या She/Her को नफरत की निगाह से देखा जाता है। भारत में भी अब धीरे-धीरे कई जगह ये फ़ैल रहा है। ये ‘वोक’ कल्चर का हिस्सा है।

ममता बनर्जी का फनी वीडियो शेयर करने पर कोलकाता पुलिस सोशल मीडिया में ही यूजर से पूछने लगी पता-ठिकाना, कार्रवाई की दी धमकी

कोलकाता पुलिस के डीसीपी क्राइम ब्रांच के आधिकारिक एक्स अकाउंट ने सोमवार (6 मई, 2024) को सार्वजनिक रूप से एक यूजर से उसकी पहचान उजागर करने को कहा। पुलिस ने उससे उसका नाम-पता बताने को कहा। उसका जुर्म सिर्फ इतना था कि उसने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक मीम वीडियो साझा कर दिया था।

कोलकाता पुलिस ने मीम वीडियो के रिप्लाई में लिखा, “आपको तुरंत अपना नाम और पता और अपनी पहचान बताने का आदेश दिया जाता है। यदि माँगी गई जानकारी नहीं बताई जाती है, तो आप CRPC की धारा 42 के तहत कानूनी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होंगे।”

यह ट्वीट पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी पर बनाए गए एक स्पूफ वीडियो के जवाब में किया गया था। ममता बनर्जी को एक गाने पर नाचते हुए दिखाने वाला यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और इसे 400 से ज़्यादा बार रीट्वीट किया गया था।

कोलकाता पुलिस ने इस यूजर को दिए गए नोटिस में कहा गया है, “यह देखा गया है कि आप सोशल मीडिया का इस्तेमाल आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और भड़काऊ पोस्ट करने के लिए कर रहे हैं। आपको यह पोस्ट हटाने और ऐसा करने से बचने का निर्देश दिया जाता है, अन्यथा आप नियम-कानूनों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होंगे।” कोलकाता पुलिस ने अपने नोटिस में कहा है कि CM ममता बनर्जी का यह वीडियो साझा करने से क़ानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।

ममता बनर्जी पर मीम साझा करने पर पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

2019 में, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मेट गाला थीम वाला मीम शेयर करने पर एक महिला को गिरफ्तार किया गया था। ममता बनर्जी की एक एडिटेड तस्वीर शेयर करने के आरोप में भारतीय जनता युवा मोर्चा की संयोजक प्रियंका शर्मा के खिलाफ हावड़ा में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता विभास हाजरा ने शिकायत दर्ज कराई थी। मेट गाला 2019 थीम वाले मीम में प्रियंका चोपड़ा के शरीर पर ममता बनर्जी का चेहरा लगाया गया था। प्रियंका को इसके बाद गिरफ्तार कर हावड़ा में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था।

इस मामले में की गई शिकायत की कॉपी में लिखा था कि इस कृत्य ने कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है और इसे हिंसक मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। शिकायत में लिखा था, “प्रियंका ने ना केवल हमारी माननीय मुख्यमंत्री का अपमान करने की कोशिश की है, बल्कि उसने फेसबुक पर अपने पोस्ट के जरिए हमारे बंगाल की संस्कृति का अपमान करने की कोशिश कर रही है जो साइबर अपराध है।” सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस मामले टीएमसी सरकार को फटकार लगाई थी, जिसमें कहा गया था कि महिला की गिरफ्तारी “प्रथम दृष्टया मनमानी” थी।

कर्नाटक में सेक्स Videos वायरल होने के बाद पीड़िताओं की बढ़ी मुश्किलें, घर से हो रहीं गायब; दरवाजों पर लटक रहे ताले

कर्नाटक के सांसद प्रज्वल रेवन्ना की काली करतूतें सामने आने के बाद अब खबर है कि इस केस की पीड़िताएँ अपने इलाके से गायब हो रही हैं और उनके घर के दरवाजों पर ताला लगा है। इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट प्रकाशित की है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कर्नाटक के हसन जिले में पिछले 10 दिन में पीड़िताओं के घर छोड़ने की घटना देखने को मिली है। ये पूरा इलाका एचडी रेवन्ना के नियंत्रण में हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उन्होंने जिले के 3 शहर और 5 गाँव घूम-घूमकर देखे और कई निवासियों से बात भी की। हालाँकि वहाँ कोई नाम बताकर कुछ कहने को तैयार नहीं हुए।

यहाँ तक वो महिला जो रेवन्ना के घर में काम करती थी और जिसने उसके विरुद्ध शिकायत दी थी वो भी अपना घर छोड़कर गायब है। पड़ोसियों का कहना है कि उसकी वीडियो वायरल होने के बाद से उसके घर पर ताला लगा दिख रहा है। किसी को कुछ नहीं पता कि वो कहाँ गई है।

इसी प्रकार से कहा जा रहा है कि जिन लोगों ने कभी प्रज्वल के साथ अपनी तस्वीरें डाली थी वो भी अपनी फोटोज डिलीट कर रही हैं। कुछ के पतियों ने उनसे सवाल करने शुरू कर दिए हैं कि कहीं उनका कनेक्शन सांसद से तो नहीं रहा।

इस मामले में जिला पंचायत की पूर्व सदस्य ने भी अपनी शिकायत में खुलासा किया था कि प्रज्वल ने उनका रेप तीन सालों तक किया और इसकी वो वीडियो भी बनाता था। हालाँकि जब से वीडियो सामने आई उसके बाद से उनका पूरा परिवार गायब है।

बता दें कि रेवन्ना मामले में वीडियो बाहर आने के बाद कई महिलाओं के लिए समाज का सामना करना मुश्किल हो गया। लोग वीडियो देखकर बातें कर रहे हैं और एक दूसरे से कह रहे हैं कि वो महिला को जानते हैं। कोई किसी की पड़ोसी निकल रही है तो कोई परिवार की।

स्थानीयों का कहना है कि इस मामले में महिलाओं का चेहरा उजागर करके अच्छा नहीं किया गया है। कुछ लोग इस घटना के बाद मुँह छिपाकर घूम रही हैं। किसी को नहीं पता कि वो लोग कब लौटेंगीं। स्थानीय ये भी कह रहे हैं कि इलाके में रेवन्ना का रसूख इतना है कि यहाँ रहते हुए उनसे लड़ना असंभव है।

कुछ लोगों को इस बात का भी दुख है कि किस तरह से प्रज्वल के गुनाह के कारण देवगौड़ा की छवि बर्बाद हो गई। उन्होंने बताया कि प्रज्वल ने जो किया उसके लिए उसे क्षमा नहीं किया जा सकता बस उन्हें दुख है कि देवगौड़ा ने 40 साल अपने जीवन के राजनीति को देकर मुकाम हासिल किया था, वो सब प्रज्वल के कारण बर्बाद हो गया।

कॉन्ग्रेस की सरकार बनने पर राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट देंगे राहुल गाँधी, करीबियों को बताया था शाहबानो वाला प्लान: आचार्य प्रमोद कृष्णम का दावा

केंद्र में सरकार बनने पर कॉन्ग्रेस राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट फैसले को बदलने का इरादा रखती है। इसको लेकर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक बैठक में बात की थी। यह दावा आचार्य प्रमोद कृष्णम ने किया है। वह 3 दशकों तक कॉन्ग्रेस से जुड़े रहे हैं, उन्होंने हाल ही में कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दिया है।

पूर्व कॉन्ग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा है कि राहुल गाँधी राम मंदिर निर्माण को रोकना चाहते थे। इसके लिए वह सरकार बनने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट देते। आचार्य प्रमोद ने आरोप लगाया है कि उनके दिमाग में यह निर्णय पलटने का प्लान है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मीडिया से बातचीत में यह खुलासा किया है। उन्होंने कहा, “मैं कॉन्ग्रेस में 32 वर्ष रहा हूँ। जब राम मंदिर का निर्णय आया तो राहुल गाँधी ने अपने नजदीकी लोगों की बैठक में अमेरिका के अपने एक सलाहकार के कहने पर कहा था कि सरकार बनने पर राम मंदिर का फैसला पलट दिया जाएगा। इसके लिए सुपरपावर कमीशन बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि जिस तरह तीन तलाक के मुद्दे को लेकर शाहबानो निर्णय को राजीव गाँधी सरकार ने बदला था तो फिर राम मंदिर का निर्णय क्यों नहीं बदला जा सकता।”

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि राहुल गाँधी कई बार हिंदुत्व, हिन्दू धर्म की शक्ति बदलने की बात कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता जानते हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार बनने पर राम मंदिर का फैसला बदला जाना था। यह सब अमेरिका में रहने वाले लोगों की सलाह पर होता है। उन्होंने राहुल गाँधी से इस बात की प्रतिक्रिया लेने की बात भी कही है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा है कि यह बात यदि गलत है तो मुझ पर मुकदमा कर दिया जाए, मैं इसे सिद्ध कर दूँगा।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने यह भी कहा है कि उन्हें राम मंदिर जाने के कारण पार्टी से निकाल दिया गया। उन्होंने हाल ही में पार्टी छोड़ने वाले प्रवक्ताओं का भी नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी सनातन की बात करेगा वह कॉन्ग्रेस में नहीं रह सकता। उन्होंने कहा है कि आगे और भी लोग पार्टी छोड़ेंगे।

उन्होंने राहुल गाँधी को अपना बयान गलत सिद्ध करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि राहुल गाँधी भाजपा और नरेन्द्र मोदी के विरोधी इसलिए हैं क्योंकि वह सनातन की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी की दुश्मनी राम से है और अयोध्या तथा हिंदुत्व से है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस भारत की संस्कृति के विरुद्ध है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं में से एक रहे हैं। उन्होंने 2019 में लखनऊ से कॉन्ग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ा था। उनके कुछ दिनों पहले कॉन्ग्रेस से मतभेद हो गए थे। इसके बाद उन्होंने यह बड़ा आरोप राहुल गाँधी पर लगाया है। राम मंदिर निर्माण के सम्बन्ध में नवम्बर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया था जिसके बाद इसके निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ था।

मसाले के बदले आपकी रसोई में सप्लाई हो रहा था लकड़ी का बुरादा, दिल्ली की फैक्ट्री में सड़े अनाज से लेकर केमिकल तक का भंडार मिला: क्राइम ब्रांच ने 3 को दबोचा

देश की राजधानी दिल्ली में मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाने वाले एक रैकेट का खुलासा हुआ है। करावल नगर में क्राइम ब्रान्च ने नकली मसाला बनाने वाली 2 फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है। इन फैक्ट्रियों में सड़े चावल और नारियल के साथ लकड़ी के बुरादे से मिलावटी मसाले बनाए जा रहे थे। इन फैक्ट्रियों को सरफ़राज़, खुर्शीद और बंटी संचालित कर रहे थे।

क्राइम ब्रांच ने घटनास्थल से लगभग 15 टन नकली मसाले और कच्चा माल जब्त किया है। जाँच के लिए सैंपल को खाद्य सुरक्षा विभाग को जाँच के लिए भेजा है। इस कार्रवाई की पुष्टि पुलिस ने रविवार (5 मई 2024) को की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि कुछ फैक्ट्रियाँ राजधानी में अवैध तौर पर कई ब्रांड के मसाले बना रही हैं।

नॉर्थ ईस्ट इलाके की फैक्ट्रियों में बने मसालों को दिल्ली और NCR क्षेत्र में बेचे जाने की भी शिकायत मिली थी। इन शिकायतों का संज्ञान लेकर क्राइम ब्रांच ने पड़ताल की तो करावल नगर में 2 फैक्ट्रियाँ चिन्हित हुईं। क्राइम ब्रांच ने इन दोनों ठिकानों पर छापेमारी की। पहली फैक्ट्री में 42 साल के खुर्शीद मलिक और 46 वर्षीय बंटी उर्फ दिलीप मिलावटी मसाले बनाते हुए मिल गए।

दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की टीम ने उन्हें दौड़ाकर पकड़ लिया। इस फैक्ट्री की तलाशी ली गई तो यहाँ से लकड़ी के बुरादे, सड़ा हुआ जामुन, सड़े चावल, सड़ा हुआ बाजरा, नारियल, पेड़ों की छाल और कई केमिकल मिले। इन्हीं चीजों से मसाले बनाए जा रहे थे। इन मसालों को पैकेज के लिए ले जाने के लिए 50-50 किलो की बोरियों में भरा जा रहा था।

पुलिस ने इन आरोपितों से जब पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि इन मसालों को वो न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर, बल्कि देश के कई अलग-अलग हिस्सों में बेच रहे थे। पुलिस ने फ़ूड एन्ड सेफ्टी डिपार्टमेंट को अपनी कार्रवाई के बारे में सूचित किया। विभाग ने आकर बरामद हुए सामानों के सैम्पल जमा किए और जाँच के लिए ले गए।

आरोपित बंटी और खुर्शीद ने पुलिस को दूसरी फैक्ट्री के बारे में भी बताया। यहाँ से भी पुलिस को कई किलोग्राम बेहद खराब धनिया और हल्दी बरामद हुए। इसी के साथ दोनों फैक्ट्रियों से सड़े जामुन, यूकेलिप्टस के पत्ते, साइट्रिक एसिड, लकड़ी का बुरादा, पशुओं का चोकर, मिर्च के डंठल, खराब लाल मिर्च, केमिकल वाले कलर आदि भी बरामद हुए हैं।

इन सभी के सैम्पल जाँच हेतु भेजे गए हैं। वहीं बंटी और खुर्शीद ने पूछताछ में अपने 32 साल के एक अन्य साथी सरफराज का नाम भी बताया है। पुलिस ने दबिश देकर सरफराज को भी गिरफ्तार कर लिया है। ये लोग नकली मसालों को दुकानदारों को सप्लाई करते थे। यहाँ से दुकानदार इस नकली मसालों को ग्राहकों तक पूरे दाम लेकर बेचते थे।

जो झारखंड खनिज की खदान, वह कॉन्ग्रेस के लिए लूट की दुकान: जब-जब सत्ता से सटी तब-तब पैदा हुए हेमंत, धीरज, आलमगीर…

अब तक ये खबर आपको पता चल ही गई होगी कि झारखंड के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री आलमगीर आलम के व्यक्तिगत सचिव (PS) संजीव लाल के नौकर जहाँगीर आलम के ठिकानों पर छापेमारी कर के 25 करोड़ रुपए की नकदी बरामद की है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने 9 अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की है, जिसमें पथ निर्माण विभाग में कार्यरत इंजीनियर विकास कुमार का आवास भी शामिल है। फरवरी 2023 में मुख्य अभियंता बीरेंद्र राम के 24 ठिकानों पर रेड पड़ी थी, जिसमें उनकी 100 करोड़ रुपए से भी अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ था।

मंत्री के PS के नौकर के यहाँ से मिला अकूत कैश

जहाँगीर आलम के यहाँ से इतना कैश मिला कि नोट गिनने में ED की टीम भी हाँफ गई। अतिरिक्त बक्शे मँगाए गए नोट रखने के लिए। ये पूरा मामला मनी लॉन्ड्रिंग का है। मनी लॉन्ड्रिंग किसी कारोबार में नहीं, बल्कि योजनाओं के कार्यान्वयन में गड़बड़ी कर के की गई है। यानी, ये जनता का पैसा है। इसे जन-कल्याण पर खर्च करने की बजाए नेताओं-अधिकारियों ने अपने ऐशोआराम के लिए रखना उचित समझा। अपने लिए अरबों रुपयों की संपत्ति बनाई।

ये कार्रवाई उसी झारखंड में की जा रही है, जहाँ हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर जेल जाना पड़ा है। प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी को चलाने वाला खुद सलाखों के पीछे है। मामला राजधानी राँची में 8.5 एकड़ जमीन का है। ED झारखंड में खनन घोटाले की जाँच कर रही है। इसी दौरान राँची में सेना की जमीन की अवैध रूप से खरीद-बिक्री का मामला सामने आया, जिसमें रेवेन्यू इंस्पेक्टर भानु प्रताप प्रसाद का नाम आया, जिनका सीधा कनेक्शन हेमंत सोरेन से था।

हेमंत सोरेन को भी जाना पड़ा जेल

ED को पता चला कि भानु प्रताप प्रसाद एक पूरे के पूरे गिरोह का हिस्सा है, जिसका काम है धमकी देकर, सरकारी दस्तावेजों में गड़बड़ी कर के और अपने रसूख का इस्तेमाल कर के जमीन कब्जाना। अप्रैल 2023 में उसके यहाँ से 11 ट्रक दस्तावेज जब्त किए गए थे। बताया गया कि उसके साथ इस साजिश में हेमंत सोरेन भी शामिल थे। सोचिए, जिस राज्य का मुख्यमंत्री ही भ्रष्टाचार में शामिल हो उस राज्य की क्या दुर्गति होगी। अब हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना पार्टी चला रही हैं, चंपई सोरेन को डमी CM बना कर लाया गया है।

झारखंड खनिज संपन्न राज्य है, यहाँ का कोयला विदेशों तक जाता है। लेकिन, इसकी बदकिस्मती देखिए कि एक लंबे आंदोलन के बाद बिहार से अलग होने के बाद भी इसकी स्थिति और बिगड़ती ही जा रही है। 5 साल रघुबर दास की सरकार में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई हुई, धर्मांतरण के खिलाफ सरकार ने फैसले लिए, लेकिन हेमंत सोरेन तुष्टिकरण की राजनीति में डूबे रहे। वैसे उनके पिता शिबू सोरेन पर भी कम दाग नहीं हैं, वो तो अपने ही प्राइवेट सेक्रेटरी की हत्या में गिरफ्तार हुए थे।

धीरज साहू के यहाँ मिला था कैश

हमें ये सोचने की ज़रूरत है कि आखिर झारखंड की ऐसी स्थिति क्यों है? ज़्यादा पीछे नहीं जाते हैं। आपको याद होगा दिसंबर 2023 में कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के यहाँ आयकर (IT) विभाग की रेड पड़ी थी और 350 करोड़ रुपए कैश बरामद किए गए थे। वो शराब के कारोबारी हैं। आज तक भारत में एक ऑपरेशन में इतनी मात्रा में धन नहीं बरामद हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि जनता से लूटा हुआ एक-एक पाई लौटाना होगा।

उन्होंने कहा था कि एक तरफ इन नोटों के ढेर देखिए और दूसरी तरफ I.N.D.I. गठबंधन के नेताओं के ‘ईमानदारी’ पर भाषण सुनिए। आलमगीर आलम भी कॉन्ग्रेस के ही नेता हैं। झारखंड के पाकुड़ से चौथी बार विधायक हैं। उनके PS के नौकर के यहाँ से कैश मिलने पर भी पीएम मोदी ने एक रैली में चुटकी लेते हुए कहा है कि घर जाकर टीवी देखिए, मोदी माल पकड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी ने चोरी-लूट बंद की है, इसीलिए उन्हें गाली पड़ रही है। साथ ही उन्होंने जनता से पूछा कि उनके हक़ का पैसा वापस लाया जाना चाहिए या नहीं?

मधु कोड़ा युग: कॉन्ग्रेस का साथ, जम कर भ्रष्टाचार

झारखंड की बादमकिसमति की दास्तान 8.5 एकड़ जमीन, 25 करोड़ कैश या 350 करोड़ रुपए की नकदी पर ही खत्म नहीं होती। आइए, थोड़ा और पीछे चलते हैं। मधु कोड़ा का नाम आपलोगों को याद होगा, जो निर्दलीय विधायक होने के बावजूद सितंबर 2006 में अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार का तख्तापलट कर CM बने थे। मात्र 2 वर्षों में झारखंड उनके राज में घोटाला प्रदेश बन गया, 4000 करोड़ रुपए के घोटाले में मधु कोड़ा का नाम आया। और हाँ, जैसे अभी की हेमंत सोरेन सरकार को कॉन्ग्रेस-राजद का समर्थन प्राप्त था, वैसे ही मधु कोड़ा की सरकार भी इन दोनों दलों के समर्थन से आभूषित थी।

उस समय अजय माकन झारखंड में कॉन्ग्रेस के प्रभारी हुआ करते थे, जो बाद में दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष बने। अजय माकन उस दौरान अपनी ही पार्टी के समर्थन वाली सरकार के विरोध में बोलते रहते थे, धरना तक देते थे, समर्थन-वापसी की धमकी वाला अल्टीमेटम देकर समय घटाते-बढ़ाते रहते थे, लेकिन समर्थन वापस नहीं लेते थे। अटकलें थीं कि वो दबाव बना कर ‘रेट बढ़ाने’ के लिए ये हरकतें करते थे। यानी, मधु कोड़ा के भ्रष्टाचार में कॉन्ग्रेस की भी अच्छी-खासी कमाई हुई थी।

साफ़ है, कॉन्ग्रेस पार्टी को झारखंड के विकास से कोई लेना-देना नहीं रहा, उसने सिर्फ लूट के लिए इस राज्य का इस्तेमाल किया। भाजपा की सरकारें आईं तो बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुबर दास वहाँ के मुख्यमंत्री बने। हालाँकि, इन तीनों में से किसी पर भी भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा। इन मुख्यमंत्रियों के खिलाफ लाख नाराज़गी रहीं, लेकिन इनके दामन दागदार नहीं रहे। ये भी सामने आया था कि झारखंड का पैसा लूट कर विदेश भेजा जा रहा है।

‘प्रभात खबर’ में रिपोर्ट छपी थी कि मधु कोड़ा के राज में झारखंड से 1000 करोड़ रुपए विदेश भेजे गए। कई मंत्रियों पर आरोप लगे। बताया गया कि वो पहचान बदल-बदल कर संपत्ति खरीद रहे हैं। JPSC से लेकर विधानसभा में बहाली तक में गड़बड़ी हुई। दवा घोटाला हुआ। दवा खरीद में 100 करोड़ रुपए की हेराफेरी हुई। अलकतरा घोटाला से लेकर नमक घोटाला तक हुआ। कॉन्ग्रेस सरकार में मौजूद रही। अजय माकन बाद में राजनीतिक परिस्थिति की दुहाई देते हुए डैमेज कंट्रोल के लिए कहते रहे कि मधु कोड़ा को CM बने रहने देना गलती थी।

15 नवंबर, 2007 को ही अजय माकन ने मधु कोड़ा की सरकार को 60 दिनों का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन सरकार 2009 तक चलती रही। लालू यादव और कॉन्ग्रेस का वरदहस्त होने के कारण मधु कोड़ा या हेमंत सोरेन जैसे CM झारखंड में खुल कर भ्रष्टाचार कर पाए। धीरज साहू और आलमगीर आलम जैसे नेता तो इसी की अगली कड़ी हैं। कहा जाता है कि छोटे राज्य होने से प्रशासन सुगम हो जाता है, लेकिन झारखंड अधिकतर राजनीतिक अस्थिरता और नक्सलवाद के अलावा भ्रष्टाचार से जूझता रहा।

चुनाव ब्रिटेन का, बातें फिलिस्तीन की: जीत के बाद मुस्लिम काउंसलर ने लगाए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे, जानिए कैसे पश्चिम को जकड़ रहा इस्लामी कट्टरपंथ

इंग्लैंड के निकाय चुनावों में जीत हासिल करने के बाद एक मुसिम प्रत्याशी मोतिन अली ने अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए। इस मुस्लिम पार्षद का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यह वीडियो इंग्लैंड के शहर लीड्स का है, जहाँ जीत दर्ज करने के बाद 42 वर्षीय मोतिन अली ने फिलिस्तीन के समर्थन में एक जोशीला भाषण दिया और अपनी जीत को गाजा के लोगों की जीत बता दिया।

निकाय चुनाव परिणामों के बाद लीड्स शहर के लिए चुने गए इस नवनिर्वाचित पार्षद ने एक भाषण दिया। इस भाषण में मोतिन अली ने साफ़ किया कि यहाँ की जनता लेबर काउंसिल से अकुताई हुई थी और खुदके ना सुने जाने की शिकायत कर रही थी। अली ने ऐलान किया कि अब यहाँ गाजा की आवाज सुनी जाएगी और वह स्वयं फिलिस्तीन के लिए बोलेगा।

रिपोर्ट बताती हैं कि अली जैसे और भी कई उम्मीदवारों ने इंग्लैंड के निकाय चुनावों में गाजा युद्ध को लेकर अपना चुनाव अभियान चलाया और जीत हासिल की। इनमें से अधिकांश ने लेबर पार्टी के उम्मीदवारों को हराया। नहीद जोहरा गुल्सिताब नाम के एक उम्मीदवार ने भी वाल्साल से जीत हासिल की और इसे गाजा के लोगों को समर्पित किया। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट किया लेबर पार्टी, ग्रीन पार्टी को हलके में ना ले। गुलसिताब लेबर पार्टी छोड़ कर ग्रीन पार्टी में शामिल हुए थे। गुलसिताब का लेबर पार्टी से गाजा पर स्टैंड को लेकर मतभेद था।

मोतिन अली और इंग्लैंड में बढती फिलिस्तीन समर्थक भावनाएँ

यूके ग्रीन पार्टी के भीतर अली का रूतबा लीड्स काउंसिल चुनावों में उनकी जीत के साथ बढ़ा। यहाँ, उन्हें 3,000 से अधिक वोट मिले और उन्होंने गिप्टन और हरेहिल्स सीटें जीतीं। लीड्स में जन्मे और पले-बढ़े अली के अपने समाज के अंदर महत्वपूर्ण संबंध हैं। अली की अपनी खुद की एक एकाउंटिंग फर्म है। अली को एक कट्टर मुस्लिम माना जाता है। यह बात स्थानीय चुनावों में उनकी जीत के बाद उम्माह के प्रति उनका भाषण दिखाता है।

अली फ़िलिस्तीनियों के बड़े समर्थक हैं और 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमास के हमले को भी समर्थन देते हैं। इस हमले में 1200 से अधिक लोग मारे गए थे। सोशल मीडिया पर अली के विचार काफी कट्टर रहे हैं। अली का मानना है कि इजरायल ने गाजा में ज्यादा कठोर कार्रवाई की है। अली ने इजरायली सेना की तुलना श्वेतश्रेष्ठतावादियों के साथ भी कर दी। इन सबके बाद भी वह चुनाव जीत गए, जो यह दर्शाता है कि पश्चिम में फिलिस्तीन समर्थक भावनाओं के लिए लगातार समर्थन बढ़ रहा है।

पश्चिम में बढ़ रहा है इस्लाम

मोतिन अली की जीत के बाद लोगों को यह झटका लगा है कि इंग्लैंड में लगातार कट्टर इस्लाम का उदय हो रहा है। असल में ब्रिटेन में हो रहे बदलावों को देखा जाए तो पता चलता है कि यह कोई नई बात नहीं है बल्कि लम्बे समय से यहाँ कट्टरपंथी इस्लाम अपने पैर पसार रहा है। इसका एक बड़ा उदाहरण इंग्लैंड में रहने वाला मोहम्मद हिजाब नाम का शख्स है, खुद को इस्लामी विद्वान बताने वाला यह शख्स मुस्लिमों को हिन्दुओं पर हमले के लिए भड़का चुका है।

उसका एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें वह हिन्दुओं को गालियाँ दे रहा था। मोहम्मद हिजाब ने हमास के इजरायल पर हमले के बाद इलाके में हिंसक रूप से एक मुस्लिम युवाओं की रैली निकाली। मुस्लिमों की बढ़ती आबादी भी इसमें सहायक बन रही है। 2023 में इंग्लैंड की 6% से अधिक जनसंख्या (41 लाख) मुस्लिम थी, यह 2011 में कम (27%) ही थी। रिपोर्ट बताती हैं कि मुस्लिमों ने ब्रिटेन की जनसंख्या बढ़ने में 33% का योगदान दिया।

ऐसे में देखा जा सकता है कि मोतिन अली जैसे लोग क्यों चुने जा रहे हैं। इनको चुनने पर लोकतंत्र को ख़तरा पैदा होता है। ऐसे में इन देशों में लोकतंत्र का गाना गाने वालों को सतर्क होना चाहिए। सिर्फ इंग्लैंड में ही नहीं बल्कि फ्रांस में इस्लाम के नाम पर हत्याएँ बढ़ी है। यह खतरा यूरोप में ही नहीं बल्कि अमेरिका में भी हैं जहाँ इल्हन उमर जैसी महिलाएं संसद जा रही हैं। यह लोग विचारों से अत्यंत कट्टर हैं और इनका लक्ष्य लोकतंत्र नहीं बल्कि इस्लामिक राज्य की स्थापना है।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है, आप इसे यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

बेंगलुरु, दिल्ली के बाद अब अहमदाबाद में वही खौफ, 7 स्कूलों को बम से उड़ाने की मिली धमकी: रूस के सर्वर से भेजे ईमेल

दिल्ली की तरह अब गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के लगभग 7 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। स्कूलों को ये धमकी सोमवार (6 मई 2024) को ईमेल के जरिए दी गई है। धमकाने वाले बाहरी सर्वर और रूस डोमेन वाले ईमेल आईडी का प्रयोग किया है। पुलिस ने फ़ौरन बम निरोधक दस्ते के साथ स्कूलों में पहुँच कर सघन तलाशी ली है। फ़िलहाल कोई आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई है।

इस धमकी के बाद स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के परिजन परेशान हो गए। पुलिस ने अभिभावकों से परेशान नहीं होने की अपील की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धमकी भरा ये ईमेल सोमवार की सुबह 7 से 8 बजे के बीच आया है। पता चला है कि ईमेल में एक शब्द ‘तौहीद’ का प्रयोग है, जिसका अर्थ एकता है।

इंडिया टुडे के अनुसार, अब तक की जाँच से पता चला है कि ईमेल में ‘सवारीइम’ शब्द का भी इस्तेमाल किया गया है, जिसका अर्थ है तलवारें टकराना। यह एक अरबी शब्द है, जिसका इस्तेमाल खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) साल 2014 से लगातार अपना इस्लामी दुष्प्रचार के लिए किया जा रहा है।

ये धमकी DPS, आनंद निकेत, एशिया इंग्लिश स्कूल, कैलॉरेक्स स्कूल, न्यू नोबल स्कूल, ONGC केंद्रीय विद्यालय और अमृता विद्यालय को उनकी ईमेल ID पर भेजी गई हैं। हालाँकि, इन स्कूलों में अभी छुट्टियाँ चल रही हैं। ईमेल मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने इसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दी। पुलिस की कई टीम बम निरोधक दस्ते के साथ फ़ौरन मौके पर पहुँची।

खबर लिखे जाने तक स्कूलों में तलाशी अभियान जारी थी। अभी तक कोई संदिग्ध या आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली है। साइबर क्राइम ब्राँच के DCP लवीना सिन्हा ने मीडिया से बात करते हुए इन धमकियों की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जिन स्कूलों के लिए धमकियों की ईमेल आई है, उन्हें सूचित कर दिया गया है।

धमकी [email protected] आईडी से दी गई है। इसमें रूसी डोमेन ‘mail.ru’ का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस का कहना है कि इसका सर्वर बाहरी है। बता दें कि कुछ दिनों पहले दिल्ली के दर्जनों स्कूलों को भी इसी तरह धमकी मिली थी। उसमें [email protected] ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया गया था। दिल्ली से पहले बेंगलुरु के कई स्कूलों को भी धमकी दी गई थी।