निजामुद्दीन में एक भीड़ जुटती है - मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान समेत कई देशों के करीब 2500 लोग यहाँ आते हैं। कोरोना के बवाल के बावजूद यह सब होता है। नतीजा - दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव के हालिया मामले में से 50% से ज्यादा सिर्फ इस एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग।
सच्चाई ये है कि इस कम्युनिटी किचेन को 'झंडेवालान मंदिर कमिटी' और समाजसेवा संगठन 'सेवा भारती' मिल कर रही है। इसीलिए आजतक ने बाद में हेडिंग को बदल दिया और 'कैसा है केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन' की जगह 'कैसा है मंदिर का कम्युनिटी किचेन' कर दिया।
ख़ालिदा जिया जम्मू-कश्मीर की उन पाँच महिलाओं में शामिल थीं जिन्होंने सबसे पहले राज्य में कॉन्वेन्ट शिक्षा हासिल की थीं। बढ़ती उम्र के चलते बेशक उनकी गतिविधियाँ कम हो गईं हैं इसके बाद भी वे अपने रूचि के क्षेत्रों तथा सामाजिक सरोकार पर निगाह बनाए रखती हैं।
प्रोफेसर कौशल किशोर ने रवीश कुमार को सलाह देते हुए कहा कि वो थोड़ी सकारात्मक बातें भी करें। जब प्रधानमंत्री देश की जनता की परेशानी के लिए क्षमा माँग रहे हैं, ऐसे में रवीश क्या कहते हैं कि देश की सारी जनता मर जाए?
डफली बजाने से अगर कोरोना से लड़ाई लड़ ली जाती तो शायद आज JNU के वामपंथी ब्रिगेड से ही सबसे ज्यादा डॉक्टर और वैज्ञानिक निकलते। अगर प्रोपेगेंडा पोर्टलों में लेख लिखने से कोरोना भाग जाता तो राणा अयूब, सदानंद धुमे और बरखा दत्त जैसे लोगों ने अब तक वैक्सीन का अविष्कार कर लिया होता।
“कोरोना वायरस महामारी से संघर्ष में सरकार व समाज की सम्मिलित शक्ति की आवश्यकता है। मेरी आप सभी से अपील है कि 'मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष' द्वारा पीड़ितों की सहायता व उन्हें राहत प्रदान करने हेतु अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें और हम सभी के इस महासंघर्ष को शक्ति प्रदान करें।”
दिल्ली सरकार ने आनंद विहार बस अड्डे पर लोगों को इकट्ठा किया, फिर उन्हें वहीं पहुँचा दिया, जहाँ से ये काफी जद्दोजहद करके आए थे। हजारों लोग फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर, बल्लभगढ़ से आनंद विहार तक पहुँचे थे। भीड़ को देखते हुए जब गालियाँ पड़ने लगीं तो केजरीवाल सरकार ने बसों में ठूँस कर इन्हें दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में जाकर छोड़ दिया।
प्रसार भारती ने दि प्रिंट की इस खबर को शेयर करते हुए बताया है कि ये फेक न्यूज है। उनका कहना है कि प्रसार भारती इस खबर को लेकर लगातार कैबिनेट के संपर्क में है और कैबिनेट ने इसे लेकर हैरानी जताई है। कैबिनेट का साफ कहना है कि अभी तक उनके पास इस तरह का कोई प्लान नहीं है कि वे लॉकडाउन को एस्टेंड करने वाले हैं।
कोरोना लॉकडाउन के कारण बुनियादी जरूरतों की जद्दोजहद से जूझ रहे मजदूरों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी सौगात दी है। ताजा खबर के अनुसार सीएम योगी ने मनरेगा के तहत राज्य के 27.5 लाख श्रमिकों के बैंक खातों में सीधे 611 करोड़ रुपए भेजे हैं।