ऑक्सफैम की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब गुलाम बनाए गए देशों को आजादी भी मिली तो सत्ता ऐसे लोगों को सौंप दी गई, जो कि उन्हीं के चुने हुए कुछ अभिजात्य थे।
अनुपम खेर ने इस कविता में विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों के दर्द बयां किया। कैप्शन में उन्होंने बताया कि ये कविता एक विस्थापित कश्मीरी पंडित सुनयना काचरू की है।