शाहरुख़ ख़ान से भी वामपंथी लगातार अपील करते रहे हैं कि वो सरकार के ख़िलाफ़ बोलें लेकिन तीनों ख़ान ने इस सम्बन्ध में अब तक कोई बयान नहीं दिया है। अब स्थिति ये है कि शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने शाहरुख़ ख़ान को निशाना बनाया है। उन्होंने नाराज़गी जताई है।
दीपिका पादुकोण को लेकर सभी बड़े ब्रांड्स अब सेफ खेल रहे हैं। कई ब्रांड्स ने ऐसा कहा है कि वो दीपिका वाली प्रचार वीडियोज को कम दिखा रहे हैं। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में भी 'ब्रांड दीपिका' पर असर पड़ सकता है। बॉक्स ऑफिस और विज्ञापन, दोनों ही मामलों में दीपिका की मुसीबतें बढ़ रही हैं।
गुनगुन थानवी नामक किसी स्त्री ने जाने-माने जनवादी कवि बाबा नागार्जुन पर बाल यौन शोषण का अभियोग मढ़ दिया है। इस पूरे मामले में हिन्दी की राजनीति करने और उसे बेच-बेच खाने वालों की “कही त मैय मारल जै…” वाली दशा हो गई है।
राजस्थान का युवराज सिंह। अब तक अनजान, TikTok पर माइकल जैक्सन के जैसे डांस से मिली पहचान। न केवल दर्शक बल्कि बड़े-बड़े बॉलीवुड स्टार भी अब इनके फैन हो गए, पूछने लगे कि यह शख्स है कौन? अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, सुनील शेट्टी और ऋतिक रौशन तक ने...
17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी के सेनापति सूबेदार तानाजी मालुसरे की विजयगाथा पर आधारित फिल्म 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' को योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में आज आधिकारिक रूप से टैक्स फ्री कर दिया।
"आप गतिशीलता का तभी आनंद ले पाएँगे या उत्सव मना पाएँगे, जब आपका एक पैर स्थिरता में दृढ़ता से जमा होगा। और दूसरा गतिशील।" मकर संक्रांति का पर्व इस बात का भी उद्घोष है कि गतिशीलता का उत्सव मनाना तभी संभव है, जब आपको अपने भीतर स्थिरता का एहसास हो।
काशी विद्वत परिषद के रामनारायण द्विवेदी ने ऑपइंडिया को बताया कि परिषद की बैठक में ये प्रस्ताव रखा गया था कि सुबह की आरती और दर्शन के समय जो लोग शिवलिंग का स्पर्श दर्शन करना चाहते हैं या फिर स्पर्श कर के पूजन करना चाहते हैं, उनके लिए ड्रेस कोड तय किए जाएँ।
दादियाँ दादा जी को अपने समय की पतंगबाजी याद दिलाती हैं और दादा ताव में आकर खड़े हो जाते हैं दादी को ये दिखाने कि मैं अभी बूढ़ा नहीं हुआ हूँ। अब भी ये लड़के मेरी पतंग के आगे नहीं टिक सकते और पतंग कटते ही, 'सालो चाइनीज़ माँझो वापरे छे' कहकर वापस आकर बैठ जाते हैं।
ताइवान और हॉन्ग कॉन्ग पर कब्जा करके चीन एक ग्रेटर चीन का सपना देख रहा था। मगर दोनों जगहों की जनता ने लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवारों को जीत दिलाकर चीन के अरमानों पर पानी फेर दिया। यहाँ के मतदाताओं ने हॉन्ग कॉन्ग की तरह ही चीन के ‘एक देश दो सिस्टम’ की राजनीतिक व्यवस्था को खारिज कर दिया है।