गोतस्करों के इस गिरोह का सरगना दिल्ली का जुल्फिकार उर्फ मुल्ला है। यह गिरोह गाजियाबाद, मेरठ, बागपत आदि जनपदों से गोवंश का कटान कर दिल्ली में मीट सप्लाई करता है।
आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया में देवी-देवताओं पर कोई भी अपमानजनक टिप्पणी करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, ज़िला प्रशासन की अनुमति के बिना किसी भी देवता की मूर्ति की स्थापना नहीं होगी।
एक ओर जहाँ यूपी, हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने से प्रदूषण की समस्या सामने आती है, वहीं बिहार, झारखंड, असम, ओडिशा जैसे राज्य में पराली नहीं जलाई जाती। वहाँ के किसान अभी भी पुरानी पद्धति से ही फ़सलों की कटाई करते हैं। इससे होता यह है कि...
"सोशल मीडिया पर इसीलिए कड़ी नज़र रखी जा रही है ताकि राम मंदिर पर फ़ैसले को लेकर किसी भी प्रकार के अफवाह को फैलने से रोका जाए। इसके लिए न सिर्फ़ ऑनलाइन वालंटियर्स बाकि इलाक़े के संभ्रांत लोगों की भी मदद ली जा रही है।"
एलन सुहैब और थाहा फ़ज़ल ने माओवादियों के मारे जाने पर राज्य पुलिस को धमकाते हुए नोटिस जारी किए थे। प्रारम्भिक जाँच में, पुलिस ने दावा किया है कि इस बात के ठोस सबूत हैं कि दोनों ने माओवादी पदाधिकारियों के साथ संपर्क बना रखा था।
मोहम्मद इस्माइल ने हड़िया के नशे में एक लड़की के साथ छेड़खानी की। इस तरह की हरकत वह पहले भी कर चुका था। इससे नाराज लड़की के भाई ने दो अन्य लोगों के साथ मिलकर लाठी-डंडों से उसकी पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई।
समुदाय विशेष का जिक्र किए जाने पर आपत्ति को डीएम ने खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि खुफिया एजेंसी से मिले इनपुट को ध्यान में रख कर ही उन्होंने आदेश जारी किया और इसका मकसद सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखना था।
जब उसने अपनी बीवी पर कुल्हाड़ी से वार किया, तब वो रसोई में खाना बना रही थी। उसकी सास व दो सालियाँ भी उस दौरान घर में ही मौजूद थीं। उन्होंने पुलिस को बताया कि अगर ग्रामीण नहीं आते तो निसार उन सब को मार डालता।
परांदे ने हाल ही में असम में खत्म हुई नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़ंस (एनआरसी) की कवायद और नागरिकता अधिनियम (सिटिज़ेशनशिप बिल) की भी बात की। उन्होंने कहा कि देश में हिन्दुओं के हित में सिटिज़ेशनशिप बिल में संशोधन किया जाना बेहद ज़रूरी है।