वीरेंदर उर्फ़ काले को मार गिराने की इस वारदात में 10 से अधिक अपराधी शामिल थे। हत्या करने के बाद सभी अपराधी भाग निकले। हमलावरों का सुराग पाने के लिए पुलिस सीसीटीवी कैमरों को खँगाल रही है।
महिला सिंगर माणिकतला के मुरारीपुकुर क्लब में आयोजित प्रोग्राम में बैंड के साथ परफॉर्म करने पहुँची थी। आधी रात में ब्रेक लेने के लिए वह स्टेज से सटे ग्रीन रूम में गई। इसी दौरान भानु के साथ ही क्लब के कुछ मेंबर भी अंदर घुस आए और गायिका को आधे घंटे तक टॉर्चर किया।
पुलिस के दावे के मुताबिक जाँच के दौरान पाया गया कि कोई भी दलित परिवार गाँव नहीं छोड़ रहा है। पत्रकारों ने रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की। दलितों ने अपने घर के आगे 'घर बिकाऊ है' का बोर्ड पत्रकारों की सलाह पर ही लगाए थे।
ईडी ने जुलाई में अहमद पटेल के दामाद इरफान सिद्दीकी का बयान भी रिकॉर्ड किया था। फिर इसके बाद संदेसरा समूह के कर्मचारी सुनील यादव से भी सीबीआई ने पूछताछ की थी। बताया जाता है कि सुनील यादव ने ही
फैसल पटेल और संदेसरा बंधुओं के बारे में बताया था।
यह कहानी है कर्नाटक के बेलगावी जिला स्थित सुदूरवर्ती गाँव शेगुनासी की, जहाँ इस वर्ष भयंकर बाढ़ आई। लेकिन, उनके लिए मदद सरकार से नहीं बल्कि ऐसी जगह से पहुँची कि 10 साल पुराना इतिहास फिर से जिन्दा हो गया।
नाले में मिली लाश। शर्ट देख कर टेलर ने मृतक की पहचान कृष्णा के तौर पर की। असल में कृष्णा अपने शर्ट के कॉलर के नीचे के 3-4 बटन हमेशा अलग रंग के लगवाता था। जब पुलिस हत्या के तह तक पहुँची तो उसे प्यार, धोखा और लालच से भरी एक कहानी मिली।
सुधीर धावले ने एक आवेदन दाखिल कर आयोग के समक्ष बयान देने का आग्रह किया था। धावले एल्गार परिषद के आयोजकों में से एक था। एल्गार परिषद ने माओवादियों के समर्थन से भीमा कोरेगाँव युद्ध की बरसी पर हिंसा भड़काई थी।
आरोपितों ने वर्ष 2010 में कानपुर के मॉल रोड इलाक़े में अलकेमिस्ट इंफ्रा रियलिटी और अलकेमिस्ट इंफ्रा टाउनशिप लिमिटेड के नाम से कम्पनियाँ खोली। उन्होंने निवेशकों को लालच दिया कि उनके द्वारा दी गई रक़म का कई गुना उन्हें वापस मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान पूछा था कि क्या श्री राम के कोई वंशज अभी भी हैं। इसके बाद भाजपा नेत्री राजकुमारी दीया कुमारी, राजस्थान कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता सत्येंद्र सिंह राघव और मेवाड़ राजघराने के अरविंद सिंह मेवाड़ ने खुद को भगवान राम का वंशज बताया था।
"जैसे लोकमान्य तिलक ने कहा था कि स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, वैसे ही अब जबकि हम आज़ादी के 75 वर्षों की तरफ बढ़ रहे हैं, तो हमें कहना चाहिए कि 'सुराज्य' हमारा कर्त्तव्य है।"