मीडिया हलचल

‘एक दिन में मात्र 86 लाख लोगों को वैक्सीन, बेहद खराब!’: रवीश कुमार के लिए पानी पर चलने वाले कुत्ते की कहानी

'पोलियो रविवार' के दिन मोदी सरकार ने 9.1 करोड़ बच्चों को वैक्सीन लगाई। रवीश 2012 के रिकॉर्ड की बात कर रहे। 1950 में पहला पोलियो वैक्सीन आया, 62 साल बाद बने रिकॉर्ड की तुलना 6 महीने बाद बने रिकॉर्ड से?

पाठकों तक हमारी पहुँच को रोक रही फेसबुक, मनमाने नियमों को थोप रही… लेकिन हम लड़ेंगे: ऑपइंडिया एडिटर-इन-चीफ का लेटर

हमें लगता है कि जिस ताकत का सामना हमें करना पड़ रहा है, वह लगभग हर हफ्ते हम पर पूरी ताकत के साथ हमला बोलती है। हम लड़ेंगे। लेकिन हम अपनी मर्यादा के साथ लड़ेंगे और अपने सम्मान को बरकरार रखेंगे।

मैं चाहे जो लिखूँ-बोलूँ, मेरी मर्जी: बालसुलभ तर्कों से लैस इतिहास्य-कार, आरफा खानुम महज झाँकी है

औरंगज़ेब ने भले दर्जनों मंदिर तुड़वाए, लेकिन इतिहासकार चाहे तो अपने इतिहास की कार चढ़ा उसे कुचल दे और साबित कर दे कि वह तो बड़ा शालीन शासक था।

RSS का राहत कार्य ‘हिन्दू राष्ट्र का एजेंडा’ और ‘मुस्लिम बाँट रहे प्यार’: ‘The Wire’ के लिए अब सेवा भी कम्युनल

'The Wire' ने अब समाजसेवा को भी सांप्रदायिक बना दिया है। उसके अनुसार, देश भर में राहत-कार्य करने वाले बुरे हैं और कोई मुस्लिम संस्था चींटी को चीनी भी खिला दे तो वो महान है।

पीलिया के मरीज को सब पीला दिखता है: द टेलीग्राफ को भी लक्षद्वीप में पेड़ों पर ‘लाल’ नहीं, दिख रहा है ‘भगवा’

हिंदी में कहावत है, पीलिया के मरीज को सब पीला दिखता है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति को चीजों को वैसी ही देखता है जैसे उसके दिमाग ने पहले से सोचा हुआ है। यही हाल टेलीग्राफ का है।

PM मोदी के खिलाफ विदेशी मीडिया गिरोह और उसका प्रोपेगेंडा: कभी ‘डिवाइडर इन चीफ’ तो कभी Covid के ‘एकमात्र जिम्मेदार’

मीडिया गिरोह और भारत के राष्ट्रवादी लोगों का युद्ध बहुत आगे तक चलने वाला है। इस युद्ध में इतना तो निश्चित है कि मीडिया, हिंदुओं और भारत के हितों पर जोरदार प्रहार करने वाला है और उसके सामने खड़े हैं प्रधानमंत्री मोदी और उनका समर्थन करने वाले करोड़ों हिन्दू।

राजनीति से नहीं ट्विटर के रार का सरोकार, यह ‘विदेशी मसीहा’ को लेकर लिबरल बेचैनी का है इजहार

बात पुराने पापों पर पर्दा डालने की हो या नए प्रोपेगेंडा की, देशी लिबरलों को अब विदेशी मदद की दरकार है, क्योंकि उनके घरेलू नायक बेपर्दा हो चुके हैं।

राष्ट्रवाद विरोधी इकोसिस्टम के हाथों में खेलता ट्विटर, लोकतंत्र के लिए जरूरी है यह जानना कि कौन कहाँ खड़ा है

ट्विटर इंडिया के लिए सरकार द्वारा उठाए गए प्रश्नों की अनदेखी न तो कानून सम्मत है और न ही आम भारतीय की अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता के पक्ष में है।

‘अल्लाह-हू-अकबर’ के साथ दंगे, आतंक, जबरन धर्म-परिवर्तन पर चुप्पी… लेकिन ‘जय श्रीराम’ नारे पर सबूत माँग रहा गैंग

आपने यदि यह बताने की कोशिश कर दी कि केवल भारत में ही नहीं पूरे विश्व में एक कट्टरपंथी विचारधारा एक नारे का प्रयोग कर रही है तो...

बंगाल के नतीजों पर नाची, हिंसा पर होठ सिले: अब ममता ने मीडिया को दी पॉजिटिव रिपोर्टिंग की ‘हिदायत’

विडंबना यह नहीं कि ममता ने मीडिया को चेताया है। विडंबना यह है कि उनके वक्तव्य को छिपाने की कोशिश भी यही मीडिया करेगी।

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