मीडिया हलचल

एक लेख में 8 बार बु* शब्द का प्रयोग बताता है कि ‘दि प्रिंट’ का दिमाग कहाँ घुसा हुआ है

ऐसे लेखों का औचित्य क्या है? इससे किसका भला हो रहा है? क्या इसका औचित्य भोजपुरी बोलने वालों को नीचा दिखाना नहीं है।

राजदीप सरदेसाई: आज रिया की स्तुति से टीआरपी की तलाश, कभी गुजरात दंगों पर ‘प्रोपेगेंडा’ से सेंकी थी रोटियॉं

राजदीप को ना ही रिया चक्रवर्ती से और ना ही सुशांत सिंह राजपूत से ही संवेदना है। वह बस TRP की रेस में किसी तरह खुद को खबरों में बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।

ये पतित गैंग कंगना की 2009 की तस्वीरें क्यों दिखा रहा है? ‘माह लाइफ माह रुल्ज’ का वोक नारा भी वामपंथियों के लिए ही...

लेफ्ट-लिबरल्स को यह सवाल खुद से पूछना चाहिए कि क्या 'माय लाइफ माय रूल्स' का 'वोक' नारा भी सिर्फ पादुकोण या कपूर परिवार की बेटियों के अधिकारों के लिए ही है?

सुशांत मामले में मीडिया ट्रायल पर रोने वाले राजदीप सरदेसाई की ‘त्रि-या चरित्र’ पत्रकारिता

राजदीप के लिए सुशांत भले बड़े स्टार नहीं थे पर रिया चकवर्ती का प्रोफाइल इतना बड़ा है कि उसे घंटों सफाई देने का मंच मुहैया कराया जाता है।

फेसबुक इंडिया को ‘बीजेपी का वफादार’ बता WSJ ने पूरा किया लिबरल मीडिया का इंतकाम

WSJ का लेख दूसरों के लिए भी एक चेतावनी की तरह है। संदेश साफ है यदि आप उनके सामने सरेंडर नहीं करते तो वे आपकी प्रतिष्ठा और करियर को नष्ट कर देंगे।

सुशांत के नाम पर बिहार को गाली, बिहारी परिवारों को बताया जहरीला: शेखर गुप्ता की वेबसाइट की करतूत पर रवीश भी चुप

शेखर गुप्ता की वेबसाइट पर प्रकाशित लेख में कहा गया है कि 'विषाक्त' बिहारी परिवारों में बच्चों पर श्रवण कुमार बनने की जिम्मेदारी होती है। बिहारी रवीश कुमार प्रदेश के अपमान पर चुप हैं।

रवीश जी, आपका हर शो चुटकुला ही है, फिर कॉमेडी के लिए इतना परिश्रम काहे भाई!

भारत की पत्रकारिता में यह रवीश का सबसे बड़ा योगदान है। अच्छी योजनाओं और सरकारी कार्यों में भी, खोज-खोज कर कमियाँ बताई जाने लगी हैं। देखा-देखी बाकी वामपंथी एंकरों और पुराने चावल पत्रकारों ने भी, अपनी गिरती लोकप्रियता बनाए रखने के लिए, अपने दैनिक शौच से पहले और फेफड़ों से चढ़ते हर खखार (हिन्दी में बलगम) के बाद, मोदी और सरकार को गरियाना अपना परम कर्तव्य बना लिया है।

‘क्या यही है रामराज्य’, ‘संघियों ने मारा’ चिल्लाने वाले, ‘कमालुद्दीन के बेटे’ के हत्यारा होने पर बिलबिलाए

इस बात से तो कोई इनकार नहीं कर रहा कि इस केस में बाकी आरोपित का हाथ नहीं था। लेकिन लोग केवल शाहनूर का नाम उजागर कर रहे हैं क्योंकि...

‘टिकटॉक के 30 करोड़ लौटा दो’: चीन के लिए नमकहलाली करने वाले और क्या बोलेंगे!

सरकार ने इन एप्स को चीन का होने के कारण ब्लॉक नहीं किया है, बल्कि ये वो एप्स हैं, जो नागरिकों के फोन से उनकी निजी सूचनाएँ चुराते हैं।

हिन्दूघृणा की दुकान है न्यूजलॉन्ड्री: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on NewsLaundry’s Hinduphobic agenda

सामजिक अपराध को सम्प्रदायिक रंग देकर रिपोर्ट करने और हर बार बिना आधार के किसी हिन्दू या हिंदूवादी संस्था पर आरोप लगाने में न्यूजलॉन्ड्री...

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