दिल्ली के उत्तम नगर में तरुण कुमार की मुस्लिमों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी और द वायर इसे 'मामूली विवाद' बता रहा है। हिंदुओं के 'त्रिशूल दीक्षा' कार्यक्रम पर आर्टिकल लिख द वायर ने इसे डर जैसा बता दिया।
गंगा सबकी है ये बात सही है लेकिन यहाँ कुछ फेक न्यूज फैलाई जा रही है इसलिए सबसे पहले फैक्ट्स जानने जरूरी हैं। वाराणसी में जो हुआ वो मुस्लिम युवकों ने जानबूझकर किया।
लेफ्ट-लिबरल प्रोपेगेंडाबाज ईरान को 'बेचारा' मुल्क दिखाते हैं लेकिन अफगानिस्तान में मौत पर चुप रहते हैं। दिल्ली में तरुण की हत्या पर भी इनसे पोस्ट नहीं होती।
आरफा को भारत के 'हिंदू राष्ट्र' कहलाए जाने से दिक्कत है, क्योंकि आरफा के दिमाग में गलतफहमी है कि भारत में संस्कृति और सभ्यता का विकास मुगलों के आने के बाद हुआ।
सोशल मीडिया पर वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी जहाँ मुस्लिम पक्ष का नैरेटिव फैलाने में जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं वहीं बीबीसी ने प्रयास किया कि मामले से मजहबी एंगल बिलकुल दूर ही रखें।
पहले कॉन्ग्रेसी पत्रकार मृणाल पांडे ने महाभारत की 'द्रौपदी' पर गलत तथ्य प्रस्तुत कर उनकी छवि को बिगाड़ा। पोल खुली तो वामपंथी पैटर्न पर चलते हुए सनातनी विद्वान को ही ब्लॉक कर दिया।
नोएडा की सोसाइटी में मंदिर निर्माण की माँग पर प्रोपेगेंडा पत्रकार आरफा खानम ने 'मस्जिद कार्ड' और 'RSS-BJP' एंगल घुसाकर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की।
ICC T20 वर्ल्ड कप में सूर्य कुमार यादव की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। इसी बीच Economic Times ने सवाल पूछा कि सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तानियों से हाथ क्यों नहीं मिलाया?