विचार

जले नोटों पर चुप्पी, सवालों पर ‘मीडिया ट्रायल’ का लेबल: क्या न्यायपालिका खुद को कानून से ऊपर मानती है?

मीडिया ट्रायल या जवाबदेही से डर? जस्टिस यशवंत वर्मा केस और मुकुल रोहतगी के बयान ने न्यायपालिका पर उठाए असहज सवाल।

नई ‘स्वरा भास्कर’ मत बनो AR रहमान, विवादों में खुद घुसो फिर बोलो- नहीं मिल रहा काम: तुम्हारे घर में तिलक लगाकर एंट्री बैन...

काम नहीं मिलता तो स्वरा भास्कर की तरह ही एआर रहमान ने भी विक्टिम कार्ड खेलना सीख लिया है। वे भी 'पावर शिफ्ट' और इंडस्ट्री को 'कम्युनल' बताकर चर्चा में आना चाहते हैं।

पुस्तक, शौर्य और ज्ञान: विकसित भारत की वैचारिक आधारशिला

विश्व पुस्तक मेला 2026 की थीम ‘भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा’ सैन्य विरासत, रणनीतिक बुद्धिमत्ता और राष्ट्रीय चेतना को सामने लाती है।

सिलेक्टिव है RJ सायमा का नारीवाद… हिजाब पर करनी थी बात, करने लगी मजहब का बचाव: पढ़िए 7 घटनाएँ और सोचिए क्या सच में...

RJ सायमा हिजाब-बुर्का पर इस्लाम की मर्जी का तर्क देती हैं, लेकिन भारत-विदेशों में महिलाओं पर दबाव और हिंसा की सच्चाई पर मौन धारण कर लेती हैं।

भारत भवन के घड़े में BLF के बखेड़े

जब किसी और निजी संस्था को भारत भवन उपलब्ध नहीं है तो BLF को क्यों वंदनवार सजते हैं, वह भी 'अज्ञात कारणों' से मोटी सरकारी आर्थिक मदद सहित।

‘बॉनफायर’ हो जाता है हजम, लोहड़ी की अलाव में दिखता है ‘प्रदूषण’: हिंदू त्योहारों पर ही क्यों मीडिया देता है ज्ञान, विदेशी तौर-तरीके बताए...

मीडिया में लोहड़ी की हेडलाइंस 'धुआँ और पर्यावरण नुकसान' होती है। वहीं, दूसरी तरफ 'बॉनफायर' की हेडलाइंस 'ठंड में पार्टी का मजा लें' होती हैं।

गोधरा में भीतर से नहीं फूँकी गई थी साबरमती एक्सप्रेस… शर्म तो आप घोंटकर पी चुके हैं शंकर सिंह वाघेला, पर क्या जमीर भी...

शंकरसिंह वाघेला की फेसबुक वॉल पर एक रील पोस्ट की गई है, जिसमें गोधरा हिंदू हत्याकांड को लेकर बेबुनियाद और बेतुकी बातें कही गई हैं।

महबूबा मुफ्ती से आरफा तक चाहती हैं कि हम न जानें इस्लामी लुटेरों-आक्रांताओं का सच, क्योंकि नफरत फैलेगी: अजीत डोभाल से यूँ ही नहीं...

डोभाल के बयान से साफ है कि वो कहीं भी 'बदले' शब्द को हिंसा से जोड़कर नहीं बोल रहे थे बल्कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण की बात कर रहे हैं।

याकूब मेमन से उमर खालिद तक: जब ‘न्याय’ इस्लामी-वाम गठजोड़ के मजहबी नैरेटिव को चुभने लगता है

उमर खालिद और शरजील इमाम पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद फिर वही पैटर्न। कानून नहीं, मजहबी पहचान और मजहब की भावना थोपने की कोशिश।

CBI का छापा, सोनिया का पास्ता मेकर और इंदिरा गाँधी: ममता बनर्जी के ‘दखल’ से चर्चा में 49 साल पुराना किस्सा

CBI बाहर थी और इंदिरा गाँधी 5 घंटे घर के अंदर। उनका कहना था कि उन्हें सामान रखने के लिए समय चाहिए। इसी सामान में एक चीज पास्ता मेकर भी थी।

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