विचार

मोदी की माँ की तस्वीरों से जूतों की कहानी तक, लिबरलों के धुआँ क्यों निकल रहा है

मोदी ने तो माताजी का आशीर्वाद लिया और चले गए, लेकिन लिबरल ब्रीड अभी भी पागल हो रहा है। मोदी रैली में व्यस्त है, इंटरव्यू खत्म हो गया, लेकिन लिबरल ब्रीड उसे कंधे पर लेकर घूम रहा है। लिबरलों के पोस्टर ब्वॉय लिंगलहरी कन्हैया की गरीब माँ पर खूब आहें निकलीं, कैमरा तो उसके घर में भी घुसा था, उसके घर का राजनीतिकरण हुआ कि नहीं?

जब सड़क पर गाय काटकर कॉन्ग्रेस ने मनाई थी बीफ पार्टी, हिन्दूओं की आस्था पर किया था सीधा हमला

इस घटना को लगभग एक वर्ष होने वाला है और इस एक वर्ष के भीतर ही कॉन्ग्रेस के युवा अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जनेऊ भी धारण किया, अमरनाथ यात्रा का भी फोटोशॉप किया, समय और परिस्थिति के अनुसार हिन्दू प्रतीकों के साथ खूब तस्वीरें खिंचवाते नजर आते हैं, उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक के मंदिर का भ्रमण और धोती पहनना सीखने तक के उपक्रम राहुल गाँधी को करने पड़े हैं।

पत्रकारिता के (अ)नैतिक प्रतिमान सिद्धार्थ वरदराजन से और उम्मीद भी क्या है

हर खबर में इन्हें ‘एंगल’ ही यह दिखता है कि कैसे मोदी को गरियाने मिल जाए। यही इनका पत्रकारिता का (अ)धर्म है, यही इनकी (अ)नैतिक जिम्मेदारी है।

NDTV वालों के लिए लिए स्त्री का अपमान सिर्फ ‘तंज’ है, सेक्सिज़्म तो चलता है

दिक्कत है मामले की गंभीरता और शब्दों के चुनाव से छिछोरेपन को, सेक्सिस्ट बयान को, नारीविरोधी शब्दों को 'तंज' और 'ज़ुबानी जंग' के नाम पर ऐसे प्रस्तुत करना जैसे इतना तो चलता है।

देश का सबसे ‘बड़ा’ दलित नेता और ‘बयानवीर’ उदित राज का कटा टिकट – ये हैं कारण

महेश गिरी को जब पता चला कि उनकी जगह गंभीर को टिकट दिया गया है, उन्होंने तुरंत ट्वीट कर उन्हें शुभकामनाएँ दी जबकि 'बयानवीर' उदित राज जरा सी देरी क्या हुई, पार्टी को ही धमकाने लगे। जानिए उन्हें टिकट से नदारद रखने के पीछे क्या रहे कारण?

कश्मीरी पंडितों से इतनी नफरत क्यों राहुल गाँधी? आप तो ‘दत्तात्रेय-कौल ब्राह्मण’ हो!

मैं आपकी राजनीतिक विवशता को देख रही हूँ। विडंबना यह कि आप वर्षों से राजनीतिक परिदृश्य में एक मुकाम पाने को कड़ी मेहनत कर रहे हैं, जिसमें सफलता कमोबेश आपके लिए हाथ न आने वाला ही रहा है। ऊपर से नेहरू-गाँधी परिवार में पैदा होने के लाभ को भुनाने में भी सक्षम नहीं रहे आप। अफसोस!

वामपंथी आतंकवाद और आईसिस के मजहबी जिहाद में कोई अंतर नहीं, बिलकुल नहीं

मुझे इससे कोई मतलब नहीं है कि फ़लाँ किताब के फ़लाँ चैप्टर में यह लिखा है कि एक मानव की हत्या पूरे मानवता की हत्या है, क्योंकि ये कहने की बातें हैं, इनका वास्तविकता से कोई नाता नहीं है। ये फर्जी बातें हैं जो आतंकियों के हिमायती उनके बचाव में इस्तेमाल करते हैं।

परमाणु युद्ध का भय दिखाकर वामपंथी बुद्धिजीवियों ने देश को आर्थिक रूप से खोखला किया

विश्व के हर बड़े देश ने परमाणु अस्त्र इसलिए बनाए ताकि उनके ऊपर परमाणु हमला करने से पहले दूसरा देश दस बार सोचे। अब यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को इस बात की याद दिलाते हैं कि हमारे पास भी परमाणु अस्त्र हैं इसलिए हम दूसरों के बम से सुरक्षित हैं तो इसमें बुरा क्या है?

श्री लंका ब्लास्ट: बौद्धों को आतंकी साबित करने पर तुले वामपंथी, अब लिट्टे भी ‘हिन्दू संगठन’

2016 में ख़बर आई थी कि 32 अच्छी तरह शिक्षित और समृद्ध मुस्लिमों ने ISIS जॉइन किया है। इस वर्ष स्थानीय इस्लामिक आतंकी संगठन तोहिथ जमात के मुस्लिमों से विस्फोटक सामग्रियाँ ज़ब्त की गई। श्रीलंकाई मुस्लिमों ने समाज सुधारने की बजाए सरकार पर ही आरोप लगा दिए।

मोतिहारी: ‘टिकट बेचवा’ उपेंद्र कुशवाहा Vs केंद्रीय मंत्री राधामोहन की लड़ाई में चीनी मिल मुद्दा

एक तरफ़ चीनी मिल वाला मुद्दा है जिस पर केंद्रीय मंत्री चुप हैं वहीं दूसरी तरफ़ है उनकी संगठनात्मक क्षमता एवं अनुभव, जिसके आधार पर वह प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ रहे हैं। यहाँ कृषि मंत्रालय में रहे वर्तमान व पूर्व केंद्रीय मंत्रियों के बीच ईगो का टकराव है। सवाल यह भी है, क्या कुशवाहा ने टिकट बेचा? मोतिहारी से ग्राउंड रिपोर्ट

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