विचार

बुज़दिली को माचोमैन बनाने वाले रवीश वामपंथी वैचारिक दरिद्रता के आख़िरी ब्रांड एम्बेसडर हैं

रवीश कुमार को राहुल गाँधी के साथ, जेठ की दुपहरिया में खुले आसमान के नीचे इंटरव्यू करते हुए देखा तो ख्याल आ गया कि यह बंदा इश्क में फलाना-ढिमकाना हो जाना लिखता है, लेकिन असल जिन्दगी में बेइन्तिहाँ नफरत और कुंठा ढोता है।

TIME कवर स्टोरी: कट्टरपंथ, भारत से नफरत जिसे विरासत में मिली हो, मिलिए इल्मुद्दीन और दादा दीन तासीर से

कट्टरपंथी इस्लाम से सहानुभूति और हिंदुस्तान से नफ़रत आतिश को विरासत में मिले हैं। तभी उन्हें हिन्दूफ़ोबिया ‘फैंटेंसी’ लगता है।

‘नफरती चिंटू’ कुणाल कामरा ने कॉन्ग्रेस काल के लिंचिंग को दिखाया मोदी के नाम

2014 से पहले के कई वीडियो का उपयोग करके, जब पीएम मोदी सत्ता में नहीं थे, कामरा जैसे 'नफरती चिंटू' ने देश में मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार और झूठ के प्रसार का ही काम किया है।

‘टाइम’ का रेसिस्ट पत्रकार, हिंदू-घृणा जताने में ‘वायर’ के लेख चोरी कर कल्पना परोस रहा है

पूरा लेख रेटरिक यानी गाल बजाने जैसा है जिसमें वही पाँच साल पुरानी बातें हैं जिन्हें लिख कर भारत का छद्म-बुद्धिजीवी गिरोह भी बोर हो चुका है: मोदी नफरत फैलाता है, समाज को बाँट रहा है, सरकार पूर्णतः विफल रही है... ब्ला, ब्ला ब्ला...

क्या है सच दिल्ली के सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों का? ऐसे फैलाया जा रहा झूठ

दिल्ली सरकार के मुखिया को ध्यान रखना चाहिए कि कागज़ी आंकड़ों की बाजीगरी करके भले आप वाहवाही लुट ले, करोड़ों लुटाकर मीडिया का ध्यान भटका दें, जिन गरीब के बच्चों को स्कूली व्यवस्था से दूर कर रहे है, उन बच्चों के साथ खिलवाड़ कर राष्ट्र-अपराध कर रहे है।

प्रिय मीडिया गिरोह, हर दलित जीतेन्द्र की मौत जातिवाद के कारण नहीं होती

सामाजिक समारोह में इस प्रकार की झड़प और हिंसा जौनपुर-जौनसार में आम बात है और यही वजह है कि समय-समय पर यहाँ पर 10-15 गाँव मिलकर शादी-विवाह में शराब और DJ को प्रतिबंधित करते आए हैं लेकिन ऐसे में किसी व्यक्ति की मृत्यु होना बेहद चौंकाने वाला प्रकरण है।

कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं, गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं: BJP को ट्रोल करने वाले जावेद अख़्तर को समर्पित पंक्तियाँ

...वो अलग बात है कि कॉन्ग्रेस को अपदस्थ करने के लिए दुष्यंत द्वारा लिखी गई कविता का प्रयोग आज जावेद अख़्तर उसी कॉन्ग्रेस को (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से) सत्ता दिलाने के लिए कर रहे हैं। विडम्बना इसे देख कर हज़ार मौतें मरेंगी।

रेनकोट वाले डॉक्टर साहब! ‘इधर-उधर की बात न कर, ये बता कि काफ़िला क्यों लुटा’

अब आरटीआई से मिले एक जवाब से भी पता चल गया है कि सत्यनिष्ठ, धर्मनिष्ठ डॉक्टर साहब के राज में कोई सर्जिकल स्टाइक नहीं हुई थी। शायद डॉक्टर साहब को अरुण शौरी ने बताया होगा, “आपको भले न पता हो लेकिन हमें मालूम है कि अहमद पटेल ने कई सर्जिकल स्ट्राइक की थीं लेकिन राष्ट्रहित में आपको भी पता नहीं चलने दिया।

उसने कहा कि ‘भ्रूण हत्या ही ठीक है, ये दुनिया आप पुरुषों को मुबारक’

ये मेरा ही तो रूप है जो बसों में उस पर गिर जाता है, जो गर्ल्स हॉस्टल की खिड़कियों की सीध में अपने लिंग पर हाथ फेरता है। वो मैं ही तो होता हूँ जो अपनी किसी जान-पहचान की बच्ची को चॉकलेट देकर कहीं ले जाता हूँ, और उसके साथ हैवानियत दिखाने के बाद उसकी हत्या भी कर देता हूँ।

जय श्री राम, हुह… जिस पत्रकार ने ऐसा कहा, वो एक नंबर का धूर्त है, बंगालियों के नाम पर कलंक है

माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम के भक्तों को अलग-अलग देखते हुए क्षेत्र और श्रद्धा के नाम पर उन्हें लड़ने की कोशिश में लगे नंदी क्या यह नहीं जानते कि बंगाली रामायण के लेखक ने दुर्गा पूजा को बंगाल के घर-घर तक पहुँचाया? कृत्तिवासी ओझा के बारे में नहीं पता?

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