राजनैतिक मुद्दे

अरुंधति रॉय, प्रपंच कब तक चलाओगी: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Arundhati Roy Propaganda

अरुंधति रॉय जैसे लोग भारत को टुकड़ों में बाँटने की मंशा रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर भारतीय सेना को तानाशाह के रूप में दिखाते हैं।

थूक कर कितनी बार चाटेंगे राहुल गॉंधी, अब तो पाकिस्तानी भी कहने लगे कंफ्यूज्ड

राहुल गॉंधी की बाल बुद्धि और बाल हठ से देश अरसे से परिचित है। जब से उन्हें मोदी के मुकाबिल खड़ा करने की कोशिश की गई उनका यह गुण बार-बार प्रकट होने लगा और हर बार वे 'गलती हो गई माफ कर दो' वाले भाव में आ जाते हैं। यह और बात है कि यूपीए काल में उनकी यह हरकत 'वाह जहॉंपनाह' के शोर में दब जाया करती थी।

केजरीवाल के कारनामे: नए खुले नहीं, 37 बंद हो गए फिर भी दिल्ली में बढ़ गए ठेके

दिल्ली की शराब की तलब पुरानी। राजस्व में भारी इजाफा। पर अपने ही वादों और आँकड़ों से उलझी केजरीवाल सरकार। आप विधायक ने ही पूछा सत्ता में आते ही क्यों दी 133 ठेके खोलने की अनुमति? नई नीति के बाद 37 ठेके बंद करने का दावा तो फिर कैसे बढ़ गई दुकानें?

जब अब्दुल्ला और कॉन्ग्रेस ने जेटली, सुषमा और अनंत को J&K की सीमा पर गिरफ़्तार करवाया था…

क्या आपको 2011 में आयोजित भाजपा की एकता यात्रा याद है? अब्दुल्ला-कॉन्ग्रेस सरकार ने न सिर्फ़ अनंत कुमार, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली को J&K में घुसने से रोका बल्कि गिरफ्तार भी करवा लिया था। आज तीनों दिग्गज हमारे बीच नहीं रहे। आइए इतिहास में चलें 8 वर्ष पीछे।

राहुल गॉंधी भोज से पहले बिझो होता है, बिना उसके खाने नहीं पहुॅंचते, साथ गए झा जी से ही पूछ लेते

राहुल गॉंधी, हमारा नहीं तो कम से कम उनका तो ख्याल करिए, जो आपसे हर बाद उम्मीद लगा लेते हैं, पहले से भी किसी बड़े चमत्कार की और आप हर बार, बार-बार, पिछली बार से भी ज्यादा वीभत्स तरीके से उस सपने को चीर-फाड़ देते हैं।

वामपंथ एक कैंसर है, इसको इग्नोर करने से काम नहीं चलेगा, इनकी जड़ पर एसिड डालना ज़रूरी

इन्हें सिर्फ रोकना ज़रूरी नहीं है, इनका समूल नाश आवश्यक है। इनका लक्ष्य मोदी या भाजपा नहीं, इनका लक्ष्य हिन्दुओं को इतना पंगु और लाचार बना देना है कि ये बिखर जाएँ, नेतृत्वहीन हो जाएँ, और अंत में इस संस्कृति को भुला दें जिसकी जड़ में वैयक्तिक और सामाजिक स्वतंत्रता, सहिष्णुता, सर्वधर्म समभाव है।

आजादी कॉन्ग्रेसियों की बपौती नहीं, कालिख पोत कर सावरकर को काला नहीं कर सकते

इनकी सावरकर से दुश्मनी केवल इसलिए है क्योंकि वह हिंदूवादी थे, और कॉन्ग्रेस की राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण की है। हिन्दूफ़ोबिया इनकी वैचारिक नसों में है, तो इसलिए हिन्दू हितों की बात करने वाले को खलनायक या कमज़ोर दिखाना तो हिन्दूफ़ोबिया की तार्किक परिणति होगा ही।

चिदंबरम और अमित शाह का फर्क: एक 9 साल पहले डटा था, दूसरा आज भागा-भागा फिर रहा

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में जुलाई 22, 2010 को अमित शाह को सीबीआई ने 1 बजे पेश होने को कहा। समन सिर्फ़ 2 घंटे पहले यानी 11 बजे दिया गया था। फिर 23 जुलाई को पेश होने को कहा गया और उसी दिन शाम 4 बजे चार्जशीट दाखिल कर दी गई।

अगर चपरासी पूर्व-सांसद से ज्यादा कमाते हैं, तो कॉन्ग्रेसी कब करियर बदल रहे हैं?

7 दिन का यह नोटिस दिए जाने के पहले पूर्व सांसदों को चुनाव हारे लगभग 2 महीने बीत चुके हैं। कम होते हैं 2 महीने बोरिया-बिस्तर समेटने के लिए?

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें