सामाजिक मुद्दे

घिसी-पिटी और पॉलिटिकली करेक्ट लाइन से अलग और बेबाक बातें

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

राहुल गाँधी जी, हवाबाज़ी थोड़ा कम कीजिए! ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ ने ज़िंदगियाँ बदली हैं

'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना की प्रमुख ज़रूरत देशव्यापी जागरूकता अभियान भी है। पर राहुल और उनके पिट्ठू मीडिया को वास्तविक तथ्यों से अवगत हो और उसे सच्चाई के साथ पेश करने की उम्मीद करना बड़ा सवाल है।
महर्षि दधीचि

मुंबई से मेडिकल साइंस की एक ख़बर और महर्षि दधीचि के बलिदान की महान गाथा

आख़िर क्यों वाजपेयी ने अपनी कविता में दधीचि का जिक्र किया था? बांद्रा के शिक्षक स्वर्गीय राजेश की कहानी ले जाती है हमें हज़ारों साल पीछे। वृत्रासुर वध की महान गाथा फिर से...
गुरमीत ने अपने समर्थकों को भ्रमित करने का प्रयास किया

धर्म और आस्था की आड़ में गुरमीत का फलता-फूलता साम्राज्य आख़िर किसकी देन है ?

अपने प्रिय बाबा के आगे नतमस्तक होने वाले लोग यह मान ही नहीं पाते कि उनके बाबा से भी कोई ग़लती, अपराध या गुनाह हो सकता है।
रोहिंग्या

प्रिय लम्पट बुद्धिजीवी गिरोह, भारत ने रोहिंग्या का ठेका नहीं ले रखा है

भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या मुसलमानों को अवैध अप्रवासी बताते हुए उन्हें देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया था। सरकार का तर्क था कि रोहिंग्या लोगों को रहने की अनुमति देने से हमारे अपने नागरिकों के हित काफी प्रभावित होंगे और देश में तनाव भी पैदा होगा।
क्विंट

हेलो Quint, शरीरिक बीमारी तो ठीक हो सकती है, मानसिक बीमारी का क्या करें?

लोकतंत्र और FOE का मतलब वो लिबरल क्या जाने जो दुनिया की सबसे बड़ी लोकतान्त्रिक पार्टी के मुखिया के लिए मौत माँगता हो। स्वाइन फ़्लू के सात हज़ार केस आ चुके हैं भारत में। क्या उन सबकी मृत्यु से स्तुति मिश्रा की क्षुधा शांत होगी?
उरी फ़िल्म

प्रिय प्रोपेगेंडाबाज़ो! तेरी जली न? उरी और हैदर फ़िल्मों के राष्ट्रवाद में थोड़ा फ़र्क है

इस देश का दुर्भाग्य है कि यहीं पर मौज़ूद एक ऐसा बड़ा वर्ग पैदा हो चुका है जिसे भारतीय सेना के जज़्बों में भी राजनीति ढूँढ लेने में में गर्व महसूस होता है।
भारत में महिला संत

लैंगिक समानता हिन्दू जीवन-दर्शन का अभिन्न अंग: अन्य धर्मों-सभ्यताओं से एक तुलनात्मक अध्ययन

इतिहास में क्या कहीं भी ऐसा वाक़या मिलता है, जहाँ महिलाओं ने किसी धर्म या संस्कृति की प्राथमिक पुस्तक का लेखन कार्य किया हो? भारत में महिलाओं ने वेद लिखे हैं
कन्हैया कुमार

थ्रोबैक (बिकॉज़ व्हाई नॉट): जब कन्हैया कुमार ने भरा था लड़की से ‘अभद्र व्यवहार’ का जुर्माना

गिरोहों का सबसे पहला काम होता है कि अभियुक्त अगर अपने पक्ष का हो तो सामाजिक रूप से पीड़िता का ही चरित्रहनन करने में जुट जाओ।
अकबर नहीं था महान

राहुल गाँधी का इस्लाम और शांति: अक़बर और नरमुंडों का पहाड़ (भाग-1)

युद्ध के बाद दिल्ली में खोपड़ियों का एक इतना बड़ा टावर खड़ा किया गया जिसे पूरी दिल्ली देख सके। नरमुंडों का एक इतना विशाल ढेर, जिसे देख कर नृशंसता भी हज़ार बार काँपे।
स्कूल का खेल मैदान

परीक्षाओं के दौर में आत्महत्या की ख़बरें आएँगी और बतौर समाज हम कुछ नहीं करेंगे

प्रोफ़ेसर यशपाल की समिति की पतली-दुबली 25-30 पन्नों की रिपोर्ट धरी रह गई और छात्रों की आत्महत्या की घटनाएँ बढ़ती रही। हम आखिर कब ध्यान देंगे इसपर?
बरखा दत्त और सागरिका घोष

सागरिका जी, मोदी के साथ सेल्फ़ी लेने पर बॉलीवुड कलाकार ‘भक्त’ हो गए, फिर आप क्या हैं?

आपके इन सर्कास्टिक प्रयोगों से ऐसा लगता है कि अगर किसी के पास सोशल मीडिया पर उसके पाठक पहले से तैयार हों, तो वो भारी तादाद में नागरिकों को देश के प्रति भड़का और बरगला सकते हैं।
नन के साथ अत्याचार

चंद कौड़ियों के लिए जब पादरी ने कर दिया था कैथोलिक लड़कियों का सौदा

बीस लड़कियों का ऐसा पहला दल 1963 में केरल से विदेशों में भेजा गया और 1972 से इनके साथ दुर्व्यवहार की कहानियां सुनाई देने लगीं।

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