इस पत्र में उसी भावना का इजहार किया गया है जिसका राहुल गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए किया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस का मुकाबला किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि पूरी सरकारी मशीनरी से था। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं के तटस्थ नहीं होने की बात भी कही थी।
सार्वजनिक जगहों पर जुमे की नमाज अता किए जाने की हरियाणा के सीएम खट्टर भी आलोचना कर चुके हैं। बीते साल नोएडा पुलिस ने कंपनियों को एडवाइजरी जारी कर कहा था कि वे अपने कर्मचारियों को सार्वजनिक जगहों पर नमाज अता करने से रोकें। बीते साल ही मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल प्रार्थना के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने सफाई देते हुए कहा है कि पर्यावरण के प्रति जागरुकता पैदा करने और लोगों को ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से आम और उसके पौधे बाँटे गए। कहा यह भी जा रहा है कि सदन में जिस विभाग का बजट पेश किया जाता है उस विभाग की तरफ से सदस्यों के बीच उपहार बाँटने की भी परंपरा रही है।
''वाह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी! छत्तीसगढ़ के मान-सम्मान का प्रतीक है दुपट्टा-पगड़ी, लेकिन जन चौपाल में आपसे मिलने आए लोगों की शिकायतें सुनने से पहले उनके गमछे-पगड़ी को सीएम हाऊस में उतरवाकर यूँ टाँग दिया! दुपट्टा-पगड़ी से भी आपकी सुरक्षा को खतरा है क्या?''
"अगर वित्तीय संसाधनों पर किसी पार्टी विशेष का एकछत्र कब्ज़ा हो तो कोई चुनाव निष्पक्ष हो ही नहीं सकता। अब भारत में सभी सरकारी संगठन न्यूट्रल नहीं रहे हैं और हमारी लड़ाई सबके ख़िलाफ़ थी। RSS सभी संगठनों पर कब्ज़ा करने में सफल हो गया है।"
पश्चिम बंगाल में साल 2011 में जब तृणमूल सत्ता में आई उसके बाद 'कट मनी' का प्रचलन आम हो गया। यह इस तरीके से माँगा जाना शुरू हुआ कि ग्रामीणों को पता ही नहीं चला कि यह घूस है बल्कि इसे वे हाल के दिनों तक 'सरकारी दर' ही समझते रहे। उन्हें अपने ठगे जाने की बात तब समझ आई जब...
पिछले 8 वर्षों में इस योजना पर 700 करोड़ रुपए से भी अधिक राशि ख़र्च की गई थी। 2018 में भाजपा सरकार ने इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया था। जबकि 2019 के बजट में इस योजना के बजट को 30 गुना कम कर दिया गया। सिर्फ़ 6 करोड़ रुपए ही आवंटित किए गए हैं।
अब ये कातिलों से लेकर गबन के आरोपियों का बचाव केवल इस आधार पर करना चाहते हैं कि फलाना मोदी के खिलाफ बोला था, ‘एंटी-RSS’ था, तो अगर इसे जेल भेजा गया तो सरकार के खिलाफ बोलने वालों में ‘डर का माहौल’ बन जाएगा।
कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के 2 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से राज्य में सियासी हलचल तेज है। पहले बेल्लारी जिले के विजयनगर से कॉन्ग्रेस सांसद आनंद सिंह ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद एक और कॉग्रेस विधायक रमेश जरकिहोली ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया।
भावुक कार्यकर्ता बार-बार राहुल गाँधी से इस्तीफा वापस लेने की माँग कर रहा था। उसका कहना था कि अगर राहुल गाँधी इस्तीफा वापस नहीं लेते हैं, तो वो फाँसी के फंदे से झूलकर आत्महत्या कर लेगा। इसके बाद उसने आत्महत्या करने के लिए खुद को वहाँ एक पेड़ से लटका लिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।