पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शपथ ग्रहण से एक दिन पूर्व ही नई सरकार में स्वास्थ्य कारणों से कोई भी पद स्वीकार करने में अपनी असमर्थता जता दी है। अरुण जेटली ने अपने फैसले की जानकारी नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दे दी है। उनके इस फैसले से...
यह पहली बार नहीं है जब मुंबई कॉन्ग्रेस के नेताओं द्वारा भारत रत्न से सम्मानित गायिका लता मंगेशकर को लेकर बुरा-भला कहा गया हो। इससे पहले जब नवम्बर 2013 में लता मंगेशकर ने नरेन्द्र मोदी का समर्थन किया था, तब जनार्दन चांदुरकर ने कहा था कि उनका भारत रत्न पुरस्कार छीन लेना चाहिए।
भाजपा ने उन कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का निर्णय लेते हुए उनके परिवारों को मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया है। इन कार्यकर्ताओं के परिवारों को भाजपा पदाधिकारियों की देखरेख में ट्रेन से दिल्ली लाया जाएगा। ये पदाधिकारी दिल्ली में भी इन लोगों का ख्याल रखेंगे।
"हमारे राष्ट्रपिता ने कहा था कि किसी भी योजना की रूपरेखा तैयार करने से पहले यह सोचना ज़रूरी है कि इससे सबसे ग़रीब व्यक्ति को क्या लाभ पहुँचेगा? मोदी ने इसे काफ़ी अच्छी तरह से वास्तविकता का रूप दिया है।"
हिमांत विश्व शर्मा ने कहा, “अगर राहुल गाँधी अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं, तो विपक्ष के लिए कोई उम्मीद नहीं है, मगर यदि भाजपा के नजरिए से देखें, तो अगर राहुल गाँधी अगले 50 वर्षों तक अध्यक्ष रहेंगे, तो हमें खुशी होगी।”
अल्पेश ठाकोर ने कहा, “कॉन्ग्रेस इस बात को समझने में विफल रही कि वास्तव में लोग क्या चाहते हैं। वह सिर्फ ये नारा लगाते रहे- ‘घोटाला हुआ, घोटाला हुआ’। कोई घोटाला नहीं था, उनके दिमाग में घोटाला था, उनके दिमाग में कैमिकल लोचा था।”
रजनीकांत ने कहा कि यह जीत मोदी की जीत है और वह एक करिश्माई नेता हैं। कॉन्ग्रेस के ताज़ा नेतृत्व संकट पर उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी को पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में विपक्ष भी मज़बूत होना चाहिए।
"जैसे सात चरणों में लोकसभा का निर्वाचन हुआ, वैसे ही (दूसरी पार्टियों के नेताओं का) भाजपा में शामिल होना भी सात चरणों में होगा। आज तो केवल पहला चरण था।"
बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधक है। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी है, ताकि देश का विकास किया जा सके। देश की आबादी को 150 करोड़ से अधिक नहीं होने दिया जाना चाहिए।
इसी क्षेत्र में अब तक 10 चुनाव जीत चुके गहलोत की 93 रैलियों का कोई असर नहीं हुआ और उनके ख़ुद के ही विधानसभा क्षेत्र में उनके बेटे लीड नहीं ले सके। सरदारपुरा में वैभव गहलोत लगभग 18,000 मतों से पीछे छूट गए। कुल पौने 3 लाख मतों के अंतर से उनकी बुरी हार हुई।