निखिल ने हंगामा करते हुए कहा कि उन्हें मांड्या में एक महिला के हाथों हार मिली है, जो उनके लिए अपमानजनक बात है। निखिल ने अपने दादा और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें मांड्या की भूलभुलैया में उलझा दिया और वहाँ आठ अपने विधायक होने की बावजूद उनका सांसद बनने का सपना चूर-चूर हो गया।
अधिकतर ट्विटर यूजर्स ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि ज़रूर ये भाजपा के ही लोग हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दें। ट्विटर यूजर्स ने लिखा कि भाजपा तब तक जीत के प्रति आश्वस्त है, जब तक राहुल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष हैं।
गोले ने अपनी स्कूली शिक्षा सोरेंग सीनियर सेकंडरी स्कूल से की और बाद में दार्जिलिंग के सरकारी कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया। राजनीति में कदम रखने से पहले वो सरकारी टीचर थे। बाद में उन्होंने चामलिंग की एसडीएफ ज्वाइन की थी लेकिन...
सोमवार (मई 27, 2019) को मीडिया से बात करते हुए महेश्वर यादव ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि राजद परिवारवाद के चक्कर में उलझी हुई है। इसी वजह से पार्टी की इतनी दुर्गति हुई।
अपने शहर की बेरुखी और राज्य में कॉन्ग्रेस के ख़राब प्रदर्शन से नाराज़ बब्बर ने आलाकामन को अपना इस्तीफा भेज दिया। महाराष्ट्र में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने भी प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है। अब तक 13 बड़े कॉन्ग्रेस नेता इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं।
अतुल जमानत के लिए हाई कोर्ट तक गए, लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिली। अतुल राय के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है। हालाँकि वो चुनाव प्रचार के दौरान वह अपने क्षेत्र में मौजूद नहीं थे, फिर भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी से लगभग 1 लाख 22 हजार वोटों से जीत हासिल की थी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से 22 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिसमें से 21 उम्मीदवार ना सिर्फ चुनाव हारे, बल्कि उनकी जमानत भी जब्त हो गई। इन 21 उम्मीदवारों में कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद भी शामिल हैं।
केजरीवाल ने आने वाले विधानसभा चुनावों के बारे में कार्यकर्ताओं से कहा, "मायूस होने की आवश्यकता नहीं है, जनता दिल्ली सरकार की तारीफ़ कर रही है। अपना कॉलर ऊपर करो और कहो कि बड़े चुनाव में जो किया सो किया, अब छोटा चुनाव आ रहा है आप को वोट करे।"
अफवाह यह भी उड़ी थी कि अरुण जेटली इस बार वित्त मंत्रालय नहीं संभालेंगे। उनके पिछले तीन सप्ताह से दफ्तर भी नहीं आने के कारण ऐसी अटकलों को आधार मिल गया था।