भारतीय हॉकी टीम का रंग बदलने के फैसले को लेकर विवाद हो रहा है। दरअसल, हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी टीम के रंग को गहरे नीचे से बदलकर केसरिया रंग का कर दिया है, जिसके बाद पुराने खिलाड़ी ही नहीं, राजनेता भी इस विवाद में कूद पड़े हैं। ये वही नेता हैं, जो अब तक कहते थे कि खेल में राजनीति को न घुसाया जाए।
कैसी है नई जर्सी की डिजाइन?
एफआईएच हॉकी विश्व कप के लिए हॉकी इंडिया (Hockey India) ने पुरुषों और महिलाओं की राष्ट्रीय टीम के लिए एक नई किट लॉन्च की। इस नई जर्सी में पारंपरिक नीले रंग (Navy Blue) की जगह प्रमुख रूप से भगवा/नारंगी (Saffron/Orange) रंग को जगह दी गई।
इस डिजाइन में कंधों और किनारों पर तिरंगे रंग की पाइपिंग, स्टाइलिश देवनागरी लिपि में लिखा ‘इंडिया’ और भारतीय हॉकी के लिए ओडिशा के लंबे समय से चले आ रहे समर्थन को मान्यता देने वाली ब्रांडिंग भी शामिल है। हॉकी इंडिया ने कहा कि जर्सी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाती है।
Presenting the new India jersey! 🇮🇳
— Hockey India (@TheHockeyIndia) July 27, 2026
Every stitch tells a story. Every pattern, every colour carries India's pride.
Our teams are ready to once again do the country proud at the FIH Hockey World Cup Belgium & Netherlands 2026.
🎥: Select 2 (SD+HD)+ Khel & JioHotstar
🗓️: August… pic.twitter.com/8GvwbByapq
जैसे ही हॉकी इंडिया ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस जर्सी का वीडियो शेयर किया, वैसे ही इंटरनेट पर बहस छिड़ गई।
पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और ओलंपियन वीरेन रसकिन्हा (Viren Rasquinha) ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए इसे ‘शर्मनाक’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय हॉकी की विरासत और पहचान हमेशा नीला रंग ही रहा है।
रसकिन्हा ने अपने ट्वीट में लिखा, “हॉकी इंडिया ने कई अच्छे काम किए हैं, लेकिन यह शर्मनाक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा से नीला रंग रही है। मैंने सालों तक गर्व से नीली जर्सी पहनी है। फैंस भारतीय टीम को नीले रंग में ही देखना चाहते हैं। इस नारंगी रंग के पीछे क्या तर्क है?”
I must say that @TheHockeyIndia has done many good things for 🇮🇳 🏑. But this is embarrassing. The legacy & identity of the Indian team has always been BLUE. I wore the Blue jersey with pride for many years. Fans want to see our Indian team in blue. What is the logic of orange? https://t.co/apDnJkTld4
— Viren Rasquinha (@virenrasquinha) July 29, 2026
इस बीच, जब लोगों ने उनके ट्वीट पर राजनीतिक टिप्पणियाँ शुरू कीं, तो रसकिन्हा ने एक और पोस्ट में स्पष्ट किया कि उनकी चिंता केवल खेल की पहचान (Heritage & Identity) को लेकर है, किसी राजनीति से नहीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए पूछा कि “क्या अर्जेंटीना की फुटबॉल टीम कभी अपनी पहली जर्सी के नीले-सफेद स्ट्राइप्स को हटाकर नारंगी पहन सकती है?”
I’m seeing many unnecessary political comments on this. I don’t want to get into any of that. My simple & humble point is on pride, identity & legacy.
— Viren Rasquinha (@virenrasquinha) July 30, 2026
🇮🇳 is to 🏑 what Argentina is to Football. Will we ever see Argentina wearing Orange and White stripes as their 1st jersey? https://t.co/lAnu2gOR7y
हॉकी इंडिया और कप्तान हरमनप्रीत सिंह का स्पष्टीकरण बढ़ते विवाद के बीच हॉकी इंडिया और वर्तमान भारतीय हॉकी कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने सामने आकर स्थिति साफ की।
कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा, “इसमें कोई राजनीति नहीं है। यह टीम और कोचों का सामूहिक फैसला था। आजकल हॉकी नीले रंग के सिंथेटिक टर्फ (Astroturf) पर खेली जाती है। जब खिलाड़ी नीले टर्फ पर नीली जर्सी पहनकर खेलते हैं, तो एक-दूसरे को पास देते समय दृश्यता (Visibility) प्रभावित होती है। नारंगी रंग नीले टर्फ पर साफ दिखता है।”
🚨 BREAKING & EXCLUSIVE
— RevSportz Global (@RevSportzGlobal) July 30, 2026
"No Politics, It Was a Team Decision" Harmanpreet Singh Clears the Air on India's Jersey Change.@BoriaMajumdar @TheHockeyIndia #HarmanpreetSingh #HockeyIndia #IndianHockey pic.twitter.com/KXnF5jQxkg
हॉकी इंडिया ने भी आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि भगवा रंग हमारे राष्ट्रीय ध्वज का हिस्सा है, जो साहस, त्याग और विजय का प्रतीक है। इस बारे में खिलाड़ियों से भी सलाह ली गई थी।
#WATCH | Bhubaneswar | On Hockey India changed national team jerseys from blue to saffron, Hockey India President Dilip Kumar Tirkey says, "There is a lot of discussion regarding the Team India jersey color, with people introducing political angles and raising contentious points.… pic.twitter.com/w4v6Xsgvcy
— ANI (@ANI) July 30, 2026
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
जैसे ही इस जर्सी की तस्वीरें सामने आईं, राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (BJD) ने भी इस जर्सी बदलाव पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा में सत्ता बदलने के बाद जानबूझकर राज्य और राष्ट्रीय पहचान से नीले रंग को हटाकर राजनीतिक कारणों से भगवा रंग थोपा जा रहा है। इसके जवाब में भाजपा नेताओं ने कहा कि भगवा राष्ट्रीय ध्वज का रंग है और इस पर राजनीति करना अनुचित है।
I am deeply anguished to know that the legendary colour of the Indian hockey team’s jersey has been changed to saffron. The iconic shade of blue of the Indian hockey team is not just a colour. It is an emotion associated with the nation’s sporting heritage.
— Naveen Patnaik (@Naveen_Odisha) July 30, 2026
For decades, this… pic.twitter.com/4cgXOvpxdJ
इस मामले में भी कॉन्ग्रेस अपनी राजनीति पर उतर आई। उसके साथ इंडी गठबंधन के नेता भी भारतीय टीम की नई जर्सी पर सवाल उठा रहे हैं। संसद भवन के बाहर कॉन्ग्रेस सांसद प्रियंका गाँधी, सुखदेव भगत, राजद सांसद सुधाकर सिंह, समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह सहित कई नेताओं ने सवाल उठाए। प्रियंका गांधी ने तो जर्सी बदलने को इतिहास बदलने की कोशिश बता डाला।
पहले क्रिकेट टीम की ‘ऑरेंज जर्सी’ पर मचा था बवाल
यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय खेल टीम के परिधान में नारंगी या भगवा रंग आने पर बवाल हुआ हो। साल 2019 के आईसीसी क्रिकेट विश्व कप (England) के दौरान भी ऐसा ही एक बड़ा विवाद देखने को मिला था।
बता दें कि 2019 विश्व कप में ‘अवे जर्सी‘ का मामला भी ऐसे ही सामने आया था। विश्वकप में आईसीसी के नियमों के अनुसार, जब दो ऐसी टीमों का मैच होता है जिनकी जर्सी का रंग एक जैसा हो (जैसे भारत और इंग्लैंड, दोनों का रंग नीला था), तो मेहमान टीम को ‘अवे जर्सी’ पहननी पड़ती है। बीसीसीआई ने इस मैच के लिए नारंगी और नीले रंग के मिश्रण वाली जर्सी पेश की, जिसकी पीठ और बाजू पूरी तरह नारंगी थे।
रिफत जावैद जैसे वामी-इस्लामी पत्रकार ने तब भी विवाद पैदा करने की कोशिश की थी।
Feel sorry for the bankruptcy of ideas and issues India’s opposition parties are suffering from. I mean seriously! Am stunned that they actually reacted to the new team jersey and opposed the saffron colour. एजेंडा ऊँचा रहे हमारा! pic.twitter.com/1FJN4HiJ3p
— Rifat Jawaid (@RifatJawaid) June 26, 2019
इसके अलावा सपा नेताओं ने जर्सी के लेकर अपनी मानसिकता खुलकर दिखाई थी, जिसपर वरिष्ठ पत्रकार गौरव सावंत ने सपा नेताओं को आड़े हाथों लिखा था।
Abu Azmi of Samajwadi Party and Adhir Ranjan choudhary of the Congress have lost it. Objecting to orange/saffron in Team India's cricket Jersey is bizarre. Shows they have so completely lost the plot. Savan ke andhe ko hara dikhta hai, 2019 elections ke andhe ko bhagwa dikhta hai https://t.co/ysbcRErYUQ
— GAURAV C SAWANT (@gauravcsawant) June 26, 2019
विश्व कप 2023 की ट्रेनिंग किट को लेकर भी हुआ था विवाद
साल 2023 में भारत में खेले गए वनडे वर्ल्ड कप के दौरान जब भारतीय क्रिकेट टीम प्रैक्टिस के लिए नारंगी रंग की ट्रेनिंग टी-शर्ट पहनकर मैदान पर उतरी, तो फिर से सोशल मीडिया पर मीम्स और तंज कसने का दौर शुरू हो गया। आलोचकों ने इसकी तुलना स्विगी (Swiggy) डिलीवरी बॉयज और पेट्रोल पंप कर्मचारियों की यूनिफॉर्म से कर डाली। इस मामले में साउथ के एक्टर सिद्धार्थ ने व्यंग्य करते हुए क्रिकेट टीम की नई जर्सी की तुलना इंडियन ऑयल/पेट्रोल पंप वर्कर से की थी।
‘खेल और राजनीति को न मिलाएँ’ वाला राग
इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प बात वह दोहरा मापदंड (Double Standard) है, जिसकी ओर अक्सर खेल प्रेमी इशारा करते हैं। आमतौर पर वामपंथी और लिबरल विचारकों का एक बड़ा वर्ग यह तर्क देता है कि खेल और राजनीति को आपस में नहीं मिलाया जाना चाहिए (Keep Politics Out of Sports)। लेकिन जब भी राष्ट्रीय टीम की किट, लोगो या ट्रेनिंग गियर में भगवा/नारंगी रंग का इस्तेमाल होता है, तो सबसे पहले इसे ‘राजनीतिक एजेंडा’ या ‘भगवाकरण’ बताने की शुरुआत भी इसी वर्ग द्वारा की जाती है।
भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है, जिसमें सबसे ऊपर ‘केसरिया’ (Saffron) रंग है जो शौर्य और साहस का प्रतीक है। अगर राष्ट्रीय टीम तिरंगे के ही एक रंग को पहनती है, तो उसे किसी राजनीतिक दल विशेष से जोड़ना तर्कसंगत नहीं है।
तकनीकी कारणों की अनदेखी कर रहे विवाद फैलाने वाले लोग
हॉकी इंडिया और कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने स्पष्ट रूप से बताया कि नीले एस्ट्रोटर्फ (Blue Turf) पर नारंगी जर्सी से बॉल और खिलाड़ियों की विजिबिलिटी बेहतर होती है। लेकिन खेल के इस तकनीकी पहलू (Scientific/Technical reason) को समझे बिना राजनीतिक रंग देना इस बात को साबित करता है कि विरोध केवल रंग को लेकर है, खेल के प्रदर्शन से नहीं।
भारतीय खेलों में जर्सी के रंग को लेकर होने वाली बहस यह दर्शाती है कि हमारे देश में खेल केवल मनोरंजन या प्रतिस्पर्धा नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक और राजनीतिक विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम भी बन चुके हैं। हालाँकि जब खिलाड़ी मैदान पर उतरते हैं, तो उनके सीने पर लिखा ‘INDIA’ और तिरंगा ही सबसे ज्यादा मायने रखता है। चाहे नीली जर्सी हो या भगवा, खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करने उतरते हैं। खेल प्रशंसकों का मानना है कि जर्सी के रंग पर राजनीति करने के बजाय ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि हमारी टीम मैदान पर कैसा प्रदर्शन कर रही है और देश के लिए कितने पदक जीत रही है।


