Homeविविध विषयअन्यराष्ट्र से बोले PM मोदी- जब तक युद्ध चल रहा है हथियार नहीं डाले...

राष्ट्र से बोले PM मोदी- जब तक युद्ध चल रहा है हथियार नहीं डाले जाते, 100 करोड़ वैक्सीन डोज हम पर उठे हर सवाल का जवाब

कोरोना वैश्विक महामारी के इस संकट काल में प्रधानमंत्री को राष्ट्र को यह 10वाँ संबोधन था। इसको लेकर उन्होंने सबसे पहले देश को 19 मार्च 2020 को संबोधित करते हुए जनता कर्फ्यू की घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (22 अक्टूबर 2021) को देश को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान 100 करोड़ कोरोना वैक्सीन डोज का आँकड़ा पार करने पर पूरे देश को बधाई दी। कहा कि इसकी पूरी दुनिया में सराहना हो रही है। कोरोना वैश्विक महामारी के इस संकट काल में प्रधानमंत्री को राष्ट्र को यह 10वाँ संबोधन था। इसको लेकर उन्होंने सबसे पहले देश को 19 मार्च 2020 को संबोधित करते हुए जनता कर्फ्यू की घोषणा की थी। आज के संबोधन से पहले संक्रमण को लेकर उनका राष्ट्र को आखिरी संबोधन 7 जून 2021 का हुआ था, जब 18+ उम्र वालों के लिए फ्री टीकाकरण का ऐलान किया गया था।

प्रधानमंत्री का आज का संबोधन नीचे सुनिए;

नमस्कार,
मेरे प्यारे देशवासियों, आज मैं अपनी बात की शुरुआत एक वेद वाक्य से करना चाहता हूँ- ‘कृतं मे दक्षिणे हस्ते जयो मे सव्य आहितः’। इस बात को भारत के संदर्भ में देखें तो बहुत सरल अर्थ यह है कि हमारे देश ने एक तरफ कर्तव्य का पालन किया तो दूसरी तरफ उसे बड़ी सफलता मिली।

21 अक्टूबर को भारत ने 1 अरब यानी 100 करोड़ वैक्सीन डोज का कठिन लेकिन असाधारण लक्ष्य प्राप्त किया। इस उपलब्धि के पीछे 130 करोड़ देशवासियों की कर्तव्यशक्ति लगी है। इसलिए यह सफलता भारत की सफलता है, हर देशवासी की सफलता है। मैं इसके लिए हर देशवासी को हृदय से बधाई देता हूँ।

साथियो, 100 करोड़ वैक्सीन डोज केवल एक आँकड़ा नहीं है। ये देश के सामर्थ्य का प्रतिबिंब है। इतिहास के नए अध्याय की रचना है। यह उस नए भारत की तस्वीर है जो कठिन लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करना जानता है। यह नए भारत की तस्वीर है जो अपने संकल्पों की सिद्धि के लिए परिश्रम की पराकाष्ठा करता है।

साथियो, आज कई लोग भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम की तुलना दुनिया के दूसरे देशों से कर रहे हैं। भारत ने जिस तेजी से 100 करोड़ का आँकड़ा पार किया है। उसकी सराहना हो रही है। लेकिन इसमें एक बात छूट जा रही है कि हमने ये शुरुआत कहाँ से की है। दुनिया के दूसरे बड़े देशों के लिए वैक्सीन पर रिसर्च करना, वैक्सीन खोजना इसमें दशकों से उनकी महारत है। भारत अधिकतर इन देशों की बनाई वैक्सीनेशन पर ही निर्भर रहता था। हम बाहर से मँगवाते थे। इसीलिए जब 100 साल की सबसे भीषण महामारी आई तो भारत पर सवाल उठने लगे। क्या भारत इस वैश्विक महामारी से लड़ पाएगा? भारत दूसरे देशों से इतनी वैक्सीन खरीदने का पैसा कहाँ से लाएगा? भारत को वैक्सीन कब मिलेगी? भारत के लोगों को मिलेगी भी या नहीं मिलेगी? क्या भारत इतने लोगों को टीका लगा पाएगा कि महामारी को फैलने से रोक सके? भाँति-भाँति के सवाल थे, लेकिन आज ये 100 करोड़ वैक्सीन डोज हर सवाल का जवाब दे रहा है। भारत ने अपने नागरिकों को 100 करोड़ वैक्सीन डोज लगाई है और वो भी मुफ्त, बिना पैसा लिए।

100 करोड़ वैक्सीन डोज का एक प्रभाव ये भी होगा कि दुनिया अब भारत को कोरोना से ज्यादा सुरक्षित मानेगी। एक फार्मा हब के तौर पर भारत को दुनिया में जो स्वीकृति मिली है, उसे और मजबूती मिलेगी। पूरा विश्व आज भारत की इस ताकत को देख रहा है, महसूस कर रहा है।

साथियो, भारत का वैक्सीनेशन अभियान ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का सबसे जीवंत उदाहरण है। कोरोना महामारी की शुरुआत में ये भी आशंकाएँ व्यक्त की जा रही थीं कि भारत जैसे लोकतंत्र में इस महामारी से लड़ना बहुत ही मुश्किल होगा। भारत के लिए, भारत के लोगों के लिए ये भी कहा जा रहा था कि इतना संयम, इतना अनुशासन यहाँ कैसे चलेगा। लेकिन हमारे लिए लोकतंत्र का मतलब है सबका साथ। सबको साथ लेकर देश ने सबको वैक्सीन, मुफ्त वैक्सीन का अभियान शुरू किया है। गरीब-अमीर, गाँव-शहर, दूर-सुदूर देश का यही मंत्र रहा कि अगर बीमारी भेदभाव नहीं करती तो वैक्सीन में भी भेदभाव नहीं हो सकता। इसलिए ये सुनिश्चित किया गया कि वैक्सीनेशन अभियान पर वीआईपी कल्चर हावी न हो। कोई कितने भी बड़े पद पर रहा हो, कितना ही धनी क्यों न रहा हो, उसे वैक्सीन सामान्य नागरिकों की तरह ही मिलेगी।

भारत का पूरा वैक्सीनेशन प्रोग्राम विज्ञान की कोख में जन्मा है। वैज्ञानिक आधारों पर पनपा है और वैज्ञानिक तरीकों से चारों दिशाओं में पहुँचा है। हम सभी के लिए गर्व करने की बात है कि भारत का पूरा वैक्सीनेशन प्रोग्राम, Science Born, Science Driven और Science Based रहा है। विशेषज्ञ और देश-विदेश की अनेक एजेंसी भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बहुत सकारात्मक है। आज भारतीय कंपनियों में ना सिर्फ रिकॉर्ड निवेश आ रहा है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं। Start-ups में रिकॉर्ड निवेश के साथ ही record Start-ups, Unicorn बन रहे हैं।

जैसे स्वच्छ भारत अभियान, एक जनआंदोलन है, वैसे ही भारत में बनी चीज खरीदना, भारतीयों द्वारा बनाई चीज खरीदना, वोकल फॉर लोकल होना, ये हमें व्यवहार में लाना ही होगा। मैं आपसे फिर ये कहूँगा कि हमें हर छोटी से छोटी चीज, जो मेड इन इंडिया हो, जिसे बनाने में किसी भारतवासी का पसीना बहा हो, उसे खरीदने पर जोर देना चाहिए और ये सबके प्रयास से ही संभव होगा।


देश बड़े लक्ष्य तय करना और उन्हें हासिल करना जानता है। लेकिन, इसके लिए हमें सतत सावधान रहने की जरूरत है। हमें लापरवाह नहीं होना है कवच कितना ही उत्तम हो, कवच कितना ही आधुनिक हो, कवच से सुरक्षा की पूरी गारंटी हो, तो भी, जब तक युद्ध चल रहा है, हथियार नहीं डाले जाते। मेरा आग्रह है, कि हमें अपने त्योहारों को पूरी सतर्कता के साथ ही मनाना है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अमेरिका से युद्ध की आड़ में ईरानी सरकार विरोधियों को निपटाने में लगी, सिर्फ जून में करीब 100 लोगों को दी फाँसी: कई के...

ईरान में अमेरिका के साथ युद्ध के आड़ में खामेनेई सत्ता अपने विरोधियों को निपटाने में लगी हुई है। सिर्फ जून 2026 में ही 100 लोगों को फाँसी की सजा दी गई है।

बंगाल के आदिनाथ मंदिर को वापस पाने में जुटे सनातनी, इस्लामी आक्रांताओं ने कब्जा कर बना दी थी अदीना मस्जिद: जानिए कब से चल...

बंगाल की अदीना 'मस्जिद' के पास हिंदू संगठन ने पूजा-पाठ शुरू कर दी। हिंदुओं ने कहा कि यह ऐतिहासिक ढाँचा एक प्राचीन हिंदू मंदिर तोड़कर बनाया गया है।
- विज्ञापन -