Friday, July 19, 2024
Homeदेश-समाजगाँव में मस्जिद और मदरसे, फिर भी भीड़ ने सरकारी जमीन पर ही चटाई...

गाँव में मस्जिद और मदरसे, फिर भी भीड़ ने सरकारी जमीन पर ही चटाई बिछा कर पढ़ी बकरीद की नमाज: हड़प कर बनाना चाहते थे ईदगाह, 11 गिरफ्तार

ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता रामाश्रय से बात की। उन्होंने बताया कि गाँव तुर्कहा में पहले से ही मस्जिदें और मदरसे हैं लेकिन फिर भी नमाज़ियों की जिद सरकारी जमीन को ही घेर कर नमाज़ पढ़ने की थी।

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में सरकारी जमीन पर जबरन नमाज़ पढ़ने का मामला सामने आया है। नमाज बकरीद (17 जून, 2024) के दिन पढ़ी गई। आरोप है कि यहाँ ग्राम प्रधान के पति की साजिश से बरात घर की आड़ में मस्जिद निर्माण की साजिश रची जा रही थी। गाँव के एक हिन्दू पंच ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। कार्रवाई में ढिलाई बरतने के आरोप में 3 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर भी किया गया है।

यह मामला कुशीनगर जिले के थाना क्षेत्र खड्डा का है। यहाँ के गाँव तुर्कहा के निवासी रामाश्रय ने गुरुवार (20 जून, 2024) को थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनके गाँव तुर्कहा में एक सरकारी जमीन परती (खाली) पड़ी है। तहरीर के मुताबिक, इस जमीन को गाँव के ही नूरुद्दीन, जमालुद्दीन, मुस्तफा और अशरफ सहित कई अन्य लोग अवैध तौर पर कब्ज़ा करना चाहते हैं। इस साजिश में ग्राम प्रधान रीता यादव के पति केदार व प्रमोद यादव नाम के एक अन्य व्यक्ति को भी शामिल बताया गया है।

शिकायतकर्ता ने आगे बताया है कि खाली पड़ी सरकारी जमीन पर ईदगाह और मदरसा आदि बनाने के लिए पक्के निर्माण की तैयारी चल रही है। इस तैयारी की वजह से 2 समुदायों के बीच शांति भंग होने की आशंका जताई गई है। आरोप है कि बीती ईद के दिन भी इस जमीन पर नमाज़ पढ़ने की तैयारी कर ली गई थी। तब उठे विरोध के बाद 9 अप्रैल, 2024 को दोनों पक्षों में नमाज़ न पढ़ने का सुलहनामा हुआ था। इस बकरीद को सुलहनामे में लिखी गई बातें ठुकरा कर एक बार फिर से नमाज़ पढ़ने की कोशिश की गई।

रामश्रय की शिकायत में आगे बताया गया है कि 17 जून को बकरीद के मौके पर सरकारी जमीन पर नमाज़ पढ़ी गई। नमाज़ पढ़ने के लिए मुस्लिम समुदाय के कई लोग वहाँ एकजुट हुए थे। आरोप है कि गाँव में ईदगाह भी मौजूद है लेकिन भीड़ ने नमाज़ पढ़ने के लिए सरकारी जमीन को ही चुना। आरोपितों की इस हरकत को शिकायतकर्ता ने 2 समुदायों के बीच भेद पैदा करने वाला लिखा है। साथ ही बताया गया कि इस करतूत से क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त हो गया। पंच रामाश्रय ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने रामाश्रय की शिकायत पर नूरुद्दीन, जमालुद्दीन, मुस्तफा, अशरफ सहित अन्य अज्ञात नमाज़ियों पर FIR दर्ज कर ली है। जमीन पर कब्ज़े की साजिश में साथ देने के आरोप में महिला ग्राम प्रधान के पति केदार यादव व सरकारी स्कूल में कर्मचारी प्रमोद यादव को भी नामजद किया गया है। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153- A, 295- A और 447 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

11 आरोपित गिरफ्तार, 3 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। वीडियो व अन्य सबूतों के आधार पर अन्य आरोपितों को चिन्हित करने की कोशिश के साथ जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। वहीं कार्रवाई में ढिलाई के आरोप में कुल 3 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। लाइन हाजिर होने वाले स्टाफ में थाना प्रभारी नीरज कुमार राय, सब इंस्पेक्टर ओम प्रकाश यादव व मोहन सिंह हैं। इन सभी के खिलाफ जाँच भी करवाई जा रही है।

ठुकराया जा चुका था ईदगाह का प्रपोजल

कुशीनगर जिले के एडिशनल एसपी अभिनव त्यागी ने मीडिया से बताया कि जिस जमीन पर अवैध तौर पर नमाज़ पढ़ने का प्रयास किया गया था, कुछ समय पहले उस जगह ईदगाह बनाने का प्रपोजल भेजा गया था। हालाँकि प्रशसन ने अपने फैसले में इस प्रपोजल को ठुकरा दिया था। इस इंकार के बावजूद उसी सरकारी जमीन पर बकरीद में नमाज़ पढ़ने का प्रयास किया गया था जिस पर पुलिस ने कार्रवाई की है। नमाज़ियों में लगभग सभी उम्र वर्ग के लोग बताए जा रहे हैं।

गाँव में पहले से मस्जिदें और मदरसे, लेकिन जिद सरकारी जमीन की

ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता रामाश्रय से बात की। उन्होंने बताया कि गाँव तुर्कहा में पहले से ही मस्जिदें और मदरसे हैं लेकिन फिर भी नमाज़ियों की जिद सरकारी जमीन को ही घेर कर नमाज़ पढ़ने की थी। रामाश्रय ने आरोप लगाया कि बकरीद के दिन अचानक ही सैकड़ों नमाज़ी सरकारी जमीन पर जुट गए। इन सभी के पास एक लम्बी चटाई थी जिसे आनन-फानन में बिछा कर उसी पर नमाज़ शुरू हो गई। कुछ ही दूर पर पुलिस बल की मौजूदगी का भी दावा किया गया जो इस भीड़ को नहीं रोक पाया।

बारात घर की आड़ में बनने लगी इस्लामी इबादतगाह

शिकायतकर्ता ने सरकारी जमीन को हड़पने वाली इस पूरी में महिला ग्राम प्रधान के पति केदार यादव को खासतौर पर सक्रिय बताया। उन्होंने हमें बताया कि प्रधान पति लम्बे समय तक पूरे गाँव को धोखे में रखे थे। वो सरकारी जमीन पर बारात घर बनाने का भरोसा दिलाते रहे। आरोप है कि बारात घर की आड़ में ग्राम समाज की भूमि पर इस्लामी इबादतगाह बनाने की तैयारी हो चुकी थी। रामाश्रय ने इस साजिश में सरकारी स्कूल में कर्मचारी प्रमोद यादव व राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत का दावा किया है।

कड़ी कार्रवाई न हुई तो मंसूबे हो जाएँगे सफल

शिकायतकर्ता ने हमें आगे बताया कि भले ही आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है लेकिन सरकारी जमीन पर कब्ज़े की साजिश कहीं न कहीं अभी भी जारी है। उन्होंने कब्जेदारी के इस पूरे प्लान में शामिल अधिकारियों की भी जाँच करवा कर उन पर कार्रवाई की माँग की। रामाश्रय का मानना है कि अगर उच्चाधिकारियों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई न की तो साजिशकर्ता आज नहीं तो कल अपने मंसूबों में सफल हो जाएँगे। फ़िलहाल हालात शाँतिपूर्ण हैं। घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में सैकड़ों लोगों की भीड़ एक खाली जगह पर बैठ कर नमाज़ पढ़ती दिख रही है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

फैक्ट चेक’ की आड़ लेकर भारत में ‘प्रोपेगेंडा’ फैलाने की तैयारी कर रहा अमेरिका, 1.67 करोड़ रुपए ‘फूँक’ तैयार कर रहा ‘सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स’...

अमेरिका कथित 'फैक्ट चेकर्स' की फौज को तैयार करने की योजना को चतुराई से 'डिजिटल लिटरेसी' का नाम दे रहा है, लेकिन इनका काम होगा भारत में अमेरिकी नरेटिव को बढ़ावा देना।

मुस्लिम फल विक्रेताओं एवं काँवड़ियों वाले विवाद में ‘थूक’ व ‘हलाल’ के अलावा एक और पहलू: समझिए सच्चर कमिटी की रिपोर्ट और असंगठित क्षेत्र...

काँवड़ियों के पास ये विकल्प क्यों नहीं होना चाहिए, अगर वो सिर्फ हिन्दू विक्रेताओं से ही सामान खरीदना चाहते हैं तो? मुस्लिम भी तो लेते हैं हलाल?

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -