देश में 22 सितंबर 2025 से वस्तु और सेवा कर (GST) में नए बदलाव होने जा रहे हैं। इसको लेकर बुधवार (17 सितंबर 2025) को सरकार ने नए रेट्स का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नए बदलावों से अर्थव्यवस्था में ₹2 लाख करोड़ का निवेश होगा।
वित्त मंत्री ने कहा, “इस नई पीढ़ी की टैक्स व्यवस्था में केवल दो स्लैब (5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत) हैं। इससे अर्थव्यवस्था में ₹2 लाख का निवेश होगा। अब पैसा लोगों के हाथों में होगा।” उन्होंने इस पर भी प्रकाश डाला कि नए GST बदलावों से लगभग 99 प्रतिशत वस्तुओं पर 12 प्रतिशत से घटकर अब 5 प्रतिशत GST लगेगी।
इसी बदलाव में 90 प्रतिशत वस्तुएँ, जिन पर 28 प्रतिशत GST था, उन वस्तुओं पर अब सिर्फ 18 प्रतिशत GST ही लगेगा। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि नए GST व्यवस्था को FMCG संस्थानों ने अपनाया है और 22 सितंबर 2025 से लोगों को लाभ पहुँचाने का भी वादा किया है।
निर्मला सीतारमण ने बताया कि NDA सरकार ने दरों में बदलाव करने से पहले पाँच महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान दिया। इनमें गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देना, मध्यम वर्ग की जरूरतों को पूरा करना, किसानों का समर्थन करना, छोटे और मध्यम व्यवसायों की मदद करना और रोजगार और निर्यात बढ़ाने वाले क्षेत्रों पर ध्यान देना शामिल है।
GST में बदलाव के नोटिफिकेशन के मुताबिक, 22 सितंबर 2025 से कुछ वस्तुएँ अब नई कीमत से बाजार में उपलब्ध होंगी। अगले कुछ दिनों में हर राज्य में GST की नई दरों को लागू करने के लिए अलग-अलग नोटिफिकेशन भी जारी किए जाएँगे।
उधर, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBIC) भी उद्योग और हितधारकों के साथ मिलकर बदलाव संबंधित मुद्दों को आसान बनाने और तमाम मुद्दों पर स्पष्टीकरण देने के लिए काम कर रहा है। जबकि सरकार ने फिलहाल केवर नई कीमतों के फिर से लेबलिंग के लिए आवश्यक नोटिफिकेशन जारी किया है।
सरकार ने GST में बदलाव कर आम आदमी को पहुँचाया फायदा
उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुई GST (वस्तु एवं सेवा कर) काउंसिल की 56वीं बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए गए, जिनका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा। पहले जीएसटी में चार प्रमुख स्लैब थे– 5%, 12%, 18% और 28%। अब इसे घटाकर दो मुख्य स्लैब कर दिए गए हैं– 5% और 18%। सिर्फ कुछ खास और महँगे सामानों पर ही 40% टैक्स लगेगा।
ये वो चीजें हैं जिन्हें ‘सिन गुड्स’ या ‘डेमेरिट गुड्स’ कहा जाता है, जैसे तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट और बहुत महँगी गाड़ियाँ। सरकार का मकसद था कि आम आदमी पर टैक्स का बोझ कम हो और कारोबार करना आसान हो जाए।


